चंडीगढ़ विक्षुब्ध क्षेत्र अधिनियम, 1983
(1983 का अधिनियम संख्यांक 33)
[8 दिसम्बर, 1983]
चंडीगढ़ के विक्षुब्ध क्षेत्रों में उपद्रव के दमन के लिए और
लोक व्यवस्था को पुनःस्थापित करने और बनाए
रखने के लिए बेहतर उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चंडीगढ़ विक्षुब्ध क्षेत्र अधिनियम, 1983 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र पर है ।
(3) यह 7 अक्तूबर, 1983 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, -
(क) प्रशासक" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ;
(ख) विक्षुब्ध क्षेत्र" से ऐसा कोई क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे धारा 3 के अधीन अधिसूचना द्वारा तत्समय विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित किया गया है ।
3. क्षेत्रों को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित करने की शक्तियां-प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगा कि सम्पूर्ण चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र या उसका कोई भाग, जिसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, विक्षुब्ध क्षेत्र है ।
4. कुछ आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर गोली चलाने की शक्ति-कोई मजिस्ट्रेट या पुलिस की सशस्त्र शाखा की दशा में, कोई ऐसा पुलिस अधिकारी जो उपनिरीक्षक या हवलदार की पंक्ति से नीचे का न हो, यदि उसकी यह राय है कि ऐसा करना लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है तो ऐसी सम्यक् चेतावनी देने के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझे, किसी ऐसे व्यक्ति पर, जो विक्षुब्ध क्षेत्र में पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के जमाव को अथवा हथियारों या ऐसी वस्तुओं को, जिनका प्रयोग हथियारों के रूप में किया जा सकता है, अथवा अग्न्यायुधों, गोलाबारूद या विस्फोटक पदार्थों को लेकर चलने को प्रतिषिद्ध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या आदेश के उल्लंघन में कार्य करता है, गोली चलाकर या उसके प्रति अन्यथा बल का प्रयोग करके उसकी मृत्यु तक कारित कर सकेगा ।
5. शस्त्रों के अस्थायी गोदाम, किलेबन्द स्थानों आदि को नष्ट करने की शक्तियां-कोई मजिस्ट्रेट या ऐसा पुलिस अधिकारी जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, यदि उसकी यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक है तो शस्त्रों के किसी भी अस्थायी गोदाम को, ऐसी किसी तैयार की गई या किलेबन्द स्थान को या आश्रयस्थल को, जिससे सशस्त्र हमले किए गए हैं या किए जाने संभव हैं या किए जाने का प्रयत्न किया गया है, अथवा किसी ऐसी संरचना को जिसका प्रयोग सशस्त्र स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण शिविर के रूप में या ऐसे सशस्त्र गैंगों या फरार हुए व्यक्तियों द्वारा, जिनकी किसी अपराध की बाबत तलाश है, छिपने के स्थल के रूप में किया गया है, नष्ट कर सकेगा ।
6. धारा 4 और धारा 5 के अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों का संरक्षण-धारा 4 और धारा 5 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, [केन्द्रीय सरकार] की पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं की जाएगी ।
7. निरसन और व्यावृत्ति-(1) चंडीगढ़ विक्षुब्ध क्षेत्र अध्यादेश, 1983 (1983 का 6) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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