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रेल कंपनी (आपात उपबंध) अधिनियम, 1951 ( Railway Companies (Emergency Provisions) Act, 1951 )


 

रेल कंपनी (आपात उपबंध) अधिनियम, 1951

(1951 का अधिनियम संख्यांक 51)

[14 सितम्बर, 1951]

कतिपय विशेष मामलों में रेल कम्पनियों के

उचित प्रबन्ध तथा प्रशासन का

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रेल कम्पनी (आपात उपबंध) अधिनियम, 1951 है ।

(2) इसका विस्तार, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय, सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह प्रत्येक ऐसी रेल कम्पनी को लागू होता है, जिसके संबंध में धारा 3 के अधीन अधिसूचित आदेश जारी किया गया है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) कम्पनी अधिनियम" से इण्डियन कम्पनीज ऐक्ट, 1913 (1913 का 7) अभिप्रेत है;

(ख) निदेशक" से धारा 3 के अधीन नियुक्त निदेशक अभिप्रेत है;

(ग) अधिसूचित आदेश" से राजपत्र में अधिसूचित आदेश अभिप्रेत है;            

(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ङ) रेल कम्पनी" से कोई ऐसी कम्पनी अभिप्रेत है, जो किसी रेल के बनाने और चलाने या बनाने अथवा चलाने के प्रयोजन के लिए, केवल उसी या अन्य प्रयोजनों के साथ, कम्पनी अधिनियम अथवा उसके द्वारा निरसित किसी विधि के अधीन रजिस्टर की गई है ।

3. अधिनियम किसी रेल कम्पनी को लागू करने तथा उसके निदेशकों को नियुक्त करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि रेल कम्पनी के कार्यकलापों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे-

(क) उस रेल कम्पनी द्वारा प्रशासित रेल का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की सुविधा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, या

(ख) उस रेल का उपयोग करने वाला कोई व्यापार या उद्योग गंभीर रूप से अस्त-व्यस्त हो गया है, या

(ग) समाज के किसी भाग में भारी बेकारी पैदा हो गई है,

या जब केन्द्रीय सरकार की राय में राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है तो केन्द्रीय सरकार अधिसूचित आदेश द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को उस रेल कम्पनी को लागू कर सकेगी और जितने वह ठीक समझे, उतने व्यक्तियों को उस रेल कम्पनी के निदेशकों के रूप में उसका प्रबंध तथा प्रशासन ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए नियुक्त कर सकेगी ।

(2) इस धारा के अधीन निदेशकों को नियुक्त करने की शक्ति के अन्तर्गत किसी व्यक्ति, फर्म या कम्पनी को उस रेल कम्पनी के प्रबंध अभिकर्ता के रूप में ऐसी शर्तों तथा निबंधनों पर, जिन्हें केन्द्रीय सरकार उचित समझे, नियुक्त करने की शक्ति है ।

4. निदेशकों या प्रबंध अभिकर्ताओं को नियुक्त करने वाले अधिसूचित आदेश का प्रभाव-धारा 3 के अधीन किसी अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने पर, -

(क) उन सभी व्यक्तियों के बारे में, जो उस अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के ठीक पूर्व उस रेल कम्पनी के निदेशकों के रूप में पद धारण कर रहे हैं, यह समझा जाएगा कि उन्होंने इस रूप में अपने पद रिक्त कर दिए हैं;

(ख) उस रेल कम्पनी और इस अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के ठीक पूर्व जो प्रबंध अभिकर्ता के रूप में पद धारण कर रहा है उसके बीच की किसी प्रबंध-संविदा के बारे में यह समझा जाएगा कि वह पर्यवसित कर दी गई है;

(ग) इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रबंध अभिकर्ता के बारे में, यदि कोई हो, यह समझा जाएगा कि वह कम्पनी अधिनियम तथा उस रेल कम्पनी के संगम-ज्ञापन तथा संगम-अनुच्छेदों के अनुसरण में सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया है, और कम्पनी अधिनियम तथा ज्ञापन और अनुच्छेदों के उपबंध, इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए तदनुसार लागू होंगे, किन्तु किसी भी ऐसे प्रबंध अभिकर्ता को केन्द्रीय सरकार की पूर्व सम्मति के बिना पद से नहीं हटाया जाएगा;

(घ) निदेशक ऐसे कदम उठाएंगे जो सभी सम्पत्ति, चीज-बस्त तथा अनुयोज्य दावों को, जिनकी वह रेल कम्पनी हकदार है या जिनका उसका हकदार होना प्रतीत होता है, उनकी अभिरक्षा तथा उनके नियन्त्रण में लेने के लिए आवश्यक हों और उस रेल कम्पनी की सभी सम्पत्ति तथा चीज-बस्त के बारे में यह समझा जाएगा कि वे अधिसूचित आदेश की तारीख से निदेशकों की अभिरक्षा में हैं;

(ङ) कम्पनी अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से गठित रेल कम्पनी के निदेशक सभी प्रयोजनों के लिए निदेशक होंगे और उस रेल कम्पनी के निदेशकों की सभी शक्तियां प्रयुक्त करने के एकमात्र हकदार होंगे चाहे ऐसी शक्तियां कम्पनी अधिनियम से या रेल कम्पनी के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेदों से या किसी अन्य स्रोत से व्युत्पन्न हों ।

5. निदेशकों की शक्ति तथा कर्तव्य-(1) केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण में निदेशक ऐसे कदम उठाएंगे, जो उस रेल कम्पनी के कारबार का दक्षतापूर्ण प्रबंध करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हों, और विशिष्टतया, कम्पनी अधिनियम में या रेल कम्पनी के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेदों में किसी बात के होने पर भी निदेशकों को निम्नलिखित शक्तियां होंगी-

(क) अपने सदस्यों में से किसी एक को अध्यक्ष के रूप में चुनना और उसे या निदेशकों में से किसी एक या अधिक को अपनी सभी शक्तियां या उनमें से कोई शक्ति प्रत्यायोजित करना;

(ख) केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह सरकार अधिरोपित करना उचित समझे, ऐसी रीति से निधि प्राप्त करना और उसके लिए ऐसी प्रतिभूति देना, जो वे ठीक समझे;

(ग) अपनी अभिरक्षा में की किसी मशीनरी, चलस्टाक, इमारत, संकर्म या अन्य सम्पत्ति की ऐसी मरम्मत करना, जो आवश्यक हों;

(घ) उस रेल कम्पनी के रेल के बनाने, बनाए रखने, परिवर्तित करने या मरम्मत करने और उपयोग करने के लिए सभी आवश्यक कार्य करना;

(ङ) उतने व्यक्तियों को नियोजित करना जितने उन्हें उनके कर्तव्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन करने हेतु समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों और ऐसे कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को अभिनिश्चित करना ।

(2) निदेशक धारा 3 के अधीन अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के पूर्व किसी भी समय केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, उस रेल कम्पनी तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच की गई किसी संविदा या करार को, या तो बिना शर्त या ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें अधिरोपित करना वे ठीक समझें, रद्द कर सकेंगे या उसमें फेरफार कर सकेंगे यदि ऐसी संविदा या करार असद्भावपूर्ण रीति से किया गया था और वह उस रेल कम्पनी के लिए अहितकर है ।

6. कार्यकलापों का विवरण निदेशकों को दिया जाना-(1) धारा 3 के अधीन जो किसी अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने पर, उस रेल कम्पनी के कार्यकलापों के बारे में, एक ऐसा विवरण बनाया जाएगा और निदेशकों को प्रस्तुत किया जाएगा, जो शपथपत्र द्वारा सत्यापित होगा और जिसमें निम्नलिखित विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी, अर्थात्: -

                (क) पृथक् रूप से हाथ की तथा बैंक की रोकड़ बाकी को, यदि कोई हों, बताते हुए उस रेल कम्पनी की आस्तियां;

(ख) ऋण तथा दायित्व;

(ग) पृथक् रूप से प्रतिभूत ऋणों और अप्रतिभूत ऋणों की रकम और प्रतिभूत ऋणों की दशा में प्रतिभूतियों की विशिष्टियां, उनका मूल्य और वे तारीखें, जब वे दी गई थीं बताते हुए लेनदारों के नाम, पते तथा उपजीविकाएं;

(घ) उस रेल कम्पनी को शोध्य ऋण और उन व्यक्तियों के नाम, पते तथा उपजीविकाएं जिनसे वे शोध्य हैं और उनसे संभाव्यता वसूल की जाने वाली रकम;

(ङ) ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं ।

(2) प्रत्येक मामले में जैसा निदेशक अपेक्षा करे वह विवरण धारा 3 के अधीन अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के ठीक पूर्व जो उस रेल कम्पनी के निदेशक या निदेशकों के रूप में पद धारण करता था या करते थे उनमें से एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा, या उस रेल कम्पनी के ऐसे सचिव, प्रबन्धक या अन्य मुख्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा जो अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के पूर्व उस हैसियत में पद धारण करता था और विवरण ऐसे समय के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा जो इस प्रकार अपेक्षित किया जाए ।

(3) यदि कोई व्यक्ति, इस धारा की अपेक्षाओं का अनुपालन करने में उचित कारण बिना, जानते हुए और जानबूझकर व्यतिक्रम करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

7. रेल कम्पनी के शेयरों के फायदा पाने वाले स्वामियों द्वारा विवरण-कोई ऐसा व्यक्ति, जिसका उस रेल कम्पनी के किसी ऐसे शेयर में हित है, जो उस रेल कम्पनी के शेयरधारकों के रजिस्टर में किसी अन्य व्यक्ति के नाम में है, ऐसी अवधि के भीतर जिसे अधिसूचित आदेश से केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए उस रेल कम्पनी को उस शेयर में अपना हित घोषित करते हुए ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, घोषणा प्रस्तुत करेगा (जो ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित की जाएगी जिसके नाम में वह शेयर रजिस्टर किया गया है) और किसी अन्य विधि या किसी संविदा में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में, जो किसी शेयर के लिए यथापूर्वोक्त घोषणा करने में चूक करता है, यह समझा जाएगा कि उसका उस शेयर में कोई भी अधिकार या हक नहीं है :

परन्तु यदि वह व्यक्ति जिसके नाम में वह शेयर रजिस्टर किया गया है इस धारा से यथा अपेक्षित उस घोषणा पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करता है, तो इस धारा की कोई भी बात उस व्यक्ति के, जिसका किसी ऐसे शेयर में हित है, उसके साथ अपने अधिकार को किसी न्यायालय में स्थापित करने के अधिकार पर प्रभाव नहीं डालेगी ।

8. नुकसानी के लिए भूतपूर्व निदेशकों, आदि, के विरुद्ध कार्यवाहियां संस्थित करने की निदेशकों की शक्ति-(1) यदि निदेशकों का यह समाधान हो गया है कि उस रेल कम्पनी के हितों में या लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वे धारा 3 के अधीन अधिसूचित आदेश जारी किए जाने के पूर्व किसी व्यक्ति द्वारा उस रेल कम्पनी के कार्यकलापों के प्रबंध के संबंध में किए गए किसी  कपट, अपकरण या अन्य अपचार के लिए नुकसानी की वसूली के लिए या रेल कम्पनी की किसी ऐसी सम्पत्ति के, जिसका किसी व्यक्ति द्वारा दुरुपयोजन अथवा सदोष प्रतिधारण किया गया है, प्रत्युद्धरण के लिए कम्पनी के नाम में ऐसी कार्यवाहियां संस्थित कर सकेंगे, जो वे ठीक समझें ।

(2) इस धारा के आधार पर संस्थित किन्हीं कार्यवाहियों के संबंध में उपगत किन्हीं लागतों या खर्चों के लिए कोई भी निदेशक व्यक्तिगत रूप से दायी नहीं होगा ।

9. शास्तियां-यदि कोई व्यक्ति उस रेल कम्पनी के कारबार से संबंधित अपनी अभिरक्षा में की किन्हीं लेखाबहियों, रजिस्टरों या किन्हीं अन्य दस्तावेजों को जानबूझकर नष्ट करेगा या जब अपेक्षित है, तब निदेशकों को उन्हें देने में चूक करेगा या उस रेल कम्पनी की कोई सम्पत्ति प्रतिधारित करेगा, तो वह कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

10. निदेशकों की रिक्तियों का भरा जाना-(1) निदेशकों में होने वाली आकस्मिक रिक्तियां, चाहे वे मृत्यु से, पदत्याग से या अन्यथा हुई हों, केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशन से भरी जाएंगी ।

(2) निदेशकों का कोई भी कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि निदेशकों में से किसी का स्थान रिक्त है या उनमें से किसी की नियुक्ति में कोई त्रुटि विद्यमान है ।

11. प्रबंध अभिकर्ता की संविदा या किसी अन्य संविदा की समाप्ति के लिए प्रतिकर विषयक अधिकार होना-(1) कम्पनी अधिनियम में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी कोई भी प्रबन्ध अभिकर्ता उस रेल कम्पनी के साथ अपने द्वारा की गई किसी प्रबंध संविदा की इस अधिनियम के अधीन समय पूर्व समाप्ति के लिए किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा और कोई भी व्यक्ति किसी अन्य संविदा या करार के इस अधिनियम के अधीन रद्दकरण या फेरफार के लिए प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।

(2) उपधारा (1) की कोई भी बात उस रेल कम्पनी से ऐसे प्रतिकर के रूप में अन्यथा वसूलीय धन को वसूल करने के किसी ऐसे प्रबंध अभिकर्ता के या व्यक्ति के अधिकार पर प्रभाव नहीं डालेगी ।

12. निदेशकों की नियुक्ति का रद्दकरण-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि निदेशकों को नियुक्त करने वाले अधिसूचित आदेश का प्रयोजन पूरा हो गया है या किसी अन्य कारण से यह अनावश्यक है कि अधिसूचित आदेश प्रवृत्त रहना चाहिए, तो केन्द्रीय सरकार अधिसूचित आदेश द्वारा इस अधिनियम के अधीन की गई निदेशकों की नियुक्ति रद्द कर सकेगी ।

(2) किसी ऐसी नियुक्ति के रद्दकरण पर जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट की गई है, केन्द्रीय सरकार-

(क) यह निदेश दे सकेगी कि उस रेल कम्पनी की सभी संपत्ति, चीज-बस्त और अनुयोज्य दावे, उन व्यक्तियों में पुनर्निहित हो जाएंगे, जिनमें वे धारा 3 के अधीन उस अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के पूर्व विहित किए गए थे; या

(ख) उस रेल कम्पनी के सम्पूर्ण कार्यकलापों के प्रबन्ध तथा प्रशासन का भार लेने के लिए नई नियुक्ति द्वारा व्यक्तियों के नए निकाय को पुनर्गठित कर सकेगी; चाहे निदेशकों या प्रबन्धकों के रूप में हो या किसी अन्य हैसियत में:

                परन्तु धारा 3 के अधीन नियुक्त निदेशकों द्वारा उस प्रयोजन के लिए बुलाई गई बैठक में उस रेल कम्पनी के शेयरधारकों द्वारा पारित संकल्प के अनुसरण के सिवाय कोई भी ऐसा निदेश या नई नियुक्ति नहीं की जाएगी ।

                (3) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के पूर्व किसी समय ऐसी कार्रवाई कर सकेगी, जो उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन नई नियुक्तियां करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो ।

13. कम्पनी अधिनियम का लागू होना-(1) कम्पनी अधिनियम में या उसे रेल कम्पनी के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेदों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किन्तु इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, -

(क) उस रेल कम्पनी के शेयरधारकों या किसी अन्य व्यक्ति को उस रेल कम्पनी के निदेशक के रूप में किसी व्यक्ति को नामनिर्देशित करना या नियुक्त करना विधियुक्त नहीं होगा,

(ख) उस रेल कम्पनी के शेयरधारकों की किसी बैठक में पारित किसी भी संकल्प को तब तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित न हो,

(ग) उस रेल कम्पनी के परिसमापन के लिए या उसकी बाबत किसी रिसीवर की नियुक्ति के लिए कोई भी कार्यवाही किसी भी न्यायालय में तब तक नहीं होगी जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से वह न की जाए ।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट उपबंधों और इस अधिनियम में अंतर्विष्ट अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए तथा ऐसे अपवादों, निर्बन्धनों या परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जिन्हें केन्द्रीय सरकार अधिसूचित आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, कम्पनी अधिनियम उस रेल कम्पनी को वैसी ही रीति से लागू होता रहेगा जैसा वह उसे धारा 3 के अधीन उस अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने से पूर्व लागू होता हो ।

14. अन्य विधियों पर अधिनियम का प्रभाव-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या उस रेल कम्पनी के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेदों में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी अन्य लिखत में, इस अधिनियम से असंगत किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के तथा उसके अधीन किए गए किसी अधिसूचित आदेश के उपबन्ध प्रभावी होंगे किन्तु यथापूर्वोक्त के सिवाय इस अधिनियम के उपबन्ध उस रेल कम्पनी को तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में ।

15. निदेशकों का लोक सेवक होना-धारा 3 के अधीन नियुक्त प्रत्येक निदेशक के बारे में यह समझा जाएगा कि वह भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक है ।

16. शक्तियों का प्रत्यायोजन-केन्द्रीय सरकार अधिसूचित आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के उपबन्धों को किसी रेल कम्पनी पर लागू करने के लिए धारा 3 के अधीन उसे दी गई शक्तियों के अथवा धारा 12 या धारा 18 के अधीन उसे दी गई शक्तियों के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी शक्तियां या उनमें से कोई शक्ति किसी भी राज्य सरकार द्वारा प्रयुक्त की जा सकेगी और जहां कोई शक्तियां इस प्रकार प्रत्यायोजित की गई हैं वहां वे ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए प्रयुक्त की जाएंगी जिन्हें केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर जारी करे ।

17. अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी निदेशक के विरुद्ध न होगी ।

(2) इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या संभाव्यतः होने वाली किसी नुकसानी के लिए कोई भी वाद, या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, या किसी राज्य सरकार या किसी निदेशक के विरुद्ध न होगी ।

18. रेल कम्पनी की रेल को अर्जन करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) जहां इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर या पक्षकारों के बीच किए गए किसी करार के आधार पर प्रभावी किसी लिखत के अधीन किसी व्यक्ति या स्थानीय प्राधिकारी या राज्य सरकार द्वारा किसी ऐसी रेल के जो किसी रेल कम्पनी की सम्पत्ति है, उस लिखत में विनिर्दिष्ट रीति से तथा शर्तों के अधीन उसके संगणित मूल्य के संदाय पर, क्रय के लिए उपबंध किया गया है, वहां केन्द्रीय सरकार को भी उन्हीं निबंधनों और उन्हीं शर्तों के अधीन उस रेल के क्रय का वैसा ही अधिकार होगा जो उस व्यक्ति, स्थानीय प्राधिकारी या राज्य सरकार को उस लिखत के अधीन है ।

(2) यदि किसी रेल के संबंध में, केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन अपने क्रय के अधिकार का प्रयोग करती है, तो किसी ऐसे व्यक्ति, स्थानीय प्राधिकारी या राज्य सरकार के बारे में, जिसमें उस लिखत के अधीन तत्समान अधिकार निहित है, यह समझा जाएगा कि वह उसका प्रयोग करने के लिए निर्हकित हो गया है ।

19. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचित आदेश द्वारा नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उपधारा (1) के अधीन बनाए गए नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे: -

(क) वह रीति, जिसमें या वे शर्तें जिनके अधीन किसी रेल कम्पनी के निदेशक या प्रबंध अभिकर्ता इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे;

(ख) वे अतिरिक्त विशिष्टियां, जो धारा 6 के अधीन किसी विवरण में अन्तर्विष्ट होनी चाहिएं;

(ग) वह प्ररूप, जिसमें धारा 7 के अधीन घोषणा की जाएगी;

(घ) रेल स्थानीय सलाहकार समिति की नियुक्ति;

(ङ) वह रीति, जिसमें लेखाबहियां निदेशकों द्वारा रखी जाएंगी और उनकी लेखापरीक्षा की जाएगी;

(च) निदेशकों द्वारा किसी विनिर्दिष्ट प्राधिकारी को उस रेल कम्पनी के कार्यकलापों के संबंध में विनिर्दिष्ट या कालिक विवरणियों और रिपोर्टों का पेश किया जाना;

(छ) अधिसूचित आदेश द्वारा नियुक्त निदेशकों के कारबार के संचालन तथा अधिकारियों तथा कर्मचारिवृन्द की भर्ती और नियोजन ।

 [(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । वह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

20. 1951 के अध्यादेश 2 का निरसन-रेल कम्पनी (आपात उपबंध) अध्यादेश, 1951 इसके द्वारा निरसित किया जाता है:

परंतु वह निरसन-

                                (क) उक्त अध्यादेश के पूर्व प्रवर्तन पर, अथवा

(ख) उक्त अध्यादेश के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की बाबत उपगत किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड पर, अथवा

(ग) ऐसे किसी अन्वेषण या उपचार पर, जो ऐसी किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड की बाबत हो,

प्रभाव नहीं डालेगा, और ऐसा अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार वैसे ही संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा और ऐसी शास्ति, समपहरण या दण्ड अधिरोपित किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं किया गया हो:

                परन्तु यह और कि विधि के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई (जिसमें उक्त अध्यादेश के अधीन जारी किया गया कोई अधिसूचित आदेश, की गई नियुक्ति या दिया गया आदेश भी है) इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई समझी जाएगी और वह तदनुसार तब तक प्रवृत्त रहेगी जब तक कि वह इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अधिष्ठित नहीं कर दी जाती ।

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