लोक भविष्य-निधि अधिनियम, 1968
(1968 का अधिनियम संख्यांक 23)
झ्र्16 मई, 1968ट
जनसाधारण के लिए भविष्य-निधि की संस्थापना का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उन्नीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :द्भद्भ
1. संक्षिप्त नाम और विस्तारद्भद्भ(1) यह अधिनियम लोक भविष्य-निधि अधिनियम, 1968 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
2. परिभाषाएंद्भद्भइस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होद्भद्भ
(क) निधिञ्ज् से स्कीम के अधीन स्थापित लोक भविष्य-निधि अभिप्रेत है ;
(ख) अप्राप्तवयञ्ज् से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 (1875 का 9) के अधीन प्राप्तवय हो गया नहीं समझा जाता ;
(ग) स्कीमञ्ज् से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन विरचित लोक भविष्य-निधि स्कीम अभिप्रेत है ;
(घ) योगदाताञ्ज् से ऐसा व्यष्टि अभिप्रेत है जो धारा 4 के अधीन निधि में अभिदाय करता है और जहां कि ऐसा अभिदाय किसी व्यष्टि द्वारा ऐसे अप्राप्तवय की ओर से, जिसका वह संरक्षक है, किया जाता है वहां ऐसा अप्राप्तवय अभिप्रेत है ;
(ङ) वर्षञ्ज् से वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है ।
3. लोक भविष्य-निधि स्कीमद्भद्भ(1) केन्द्रीय सरकार जनसाधारण के लिए भविष्य-निधि की स्थापना के लिए एक स्कीम, जो लोक भविष्य-निधि स्कीम कहलाएगी, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विरचित कर सकेगी और इस स्कीम की विरचना के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, एक निधि इस अधिनियम और स्कीम के उपबन्धों के अनुसार स्थापित की जाएगी ।
(2) इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए अनुसूची में विनिर्दिष्ट स्कीम सब विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेगी ।
(3) स्कीम इस अधिनियम से भिन्न किसी तत्समय प्रवृत्त निधि में, या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावशील किसी लिखत में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी प्रभावशील होगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार स्कीम में परिवर्धन, संशोधन या फेरफार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर कर सकेगी ।
4. निधि में अभिदायद्भद्भकोई भी व्यष्टि, अपनी ओर से या किसी ऐसे अप्राप्तवय की ओर से, जिसका वह संरक्षक हो, निधि में अभिदाय ऐसी रीति से और ऐसी अधिकतम और न्यूनतम परिसीमाओं के अध्यधीन रहते हुए कर सकेगा, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।
5. ब्याजद्भद्भधारा 4 के अधीन किए गए सभी अभिदायों पर ऐसी दर से ब्याज लगेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, शासकीय राजपत्र में अधिसूचित की जाए और ब्याज की गणना ऐसी रीति से की जाएगी, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए ।
6. रकम निकालनाद्भद्भ(1) योगदाता को यह हक होगा कि वह निधि में अपने नाम जमा रकम (जिसके अन्तर्गत उस पर प्रोद्भूत ब्याज आता है) में से उस परिमाण तक और ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, रकमें निकाले :
परन्तु ऐसी रकमें निकालना उस वर्ष के, जिसमें वह निधि में आरम्भिक अभिदाय करे, अन्त से पांच वर्ष की कालावधि के अवसान के पश्चात् ही अनुज्ञात किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, योगदाता को यह हक होगा कि वह निधि में अपने नाम जमा सारा अतिशेष उस वर्ष के, जिसमें वह उस निधि में आरम्भिक अभिदाय करे, अन्त से पन्द्रह वर्ष की कालावधि के अवसान के पश्चात् निकाल ले ।
(3) उपधाराओं (1) और (2) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे व्यष्टि को, जिसने ऐसे अप्राप्तवय की ओर से, जिसका वह संरक्षक हो, निधि में अभिदाय किए हों, यह हक होगा कि वह केवल अप्राप्तवय के उपयोग के लिए ही कोई रकम निधि में से निकाले ।
7. उधारों का अनुदानद्भद्भयोगदाता को उस रकम में से, जो निधि में उसके नाम जमा हो, ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो स्कीम मे विनिर्दिष्ट की जाएं, उधार अनुदत्त किए जा सकेंगे और जहां कि योगदाता अप्राप्तवय हो वहां ऐसे उधार उसके संरक्षक को केवल उस अप्राप्तवय के उपयोग के लिए अनुदत्त किए जाएंगे ।
8. योगदाता की मृत्यु पर संदायद्भद्भ(1) यदि किसी योगदाता की मृत्यु हो जाए और किसी व्यक्ति के पक्ष में कोई नामनिर्देशन उस योगदाता की मृत्यु के समय प्रवृत्त हो तो निधि में उसके नाम जमा सभी रकमें उस नामनिर्देशिती को संदेय होंगी ।
(2) जहां कि नामनिर्देशिती अप्राप्तवय हो वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकमें अप्राप्तवय की सम्पत्ति के किसी ऐसे संरक्षक को संदेय होंगी जिसे सक्षम न्यायालय ने नियुक्त किया हो या जहां कि ऐसा कोई संरक्षक इस प्रकार नियुक्त न किया गया हो वहां वह अप्राप्तवय के माता-पिता में से किसी को या जहां माता-पिता में से कोई जीवित न हो वहां अप्राप्तवय के किसी अन्य संरक्षक को संदेय होंगी ।
(3) जहां कि योगदाता की मृत्यु के समय कोई भी नामनिर्देशन प्रवृत्त न हो वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकमें उसके विधिक वारिसों को संदेय होंगी ।
9. कुर्की के विरुद्ध संरक्षणद्भद्भनिधि में किसी योगदाता के नाम जमा रकम योगदाता द्वारा उपगत किसी ऋण या दायित्व की बाबत किसी न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश के अधीन कुर्क नहीं की जा सकेगी ।
10. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राणद्भद्भकोई भी वाद, अभियोजन या अन्य कार्यवाही इस अधिनियम या स्कीम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
11. कठिनाइयां दूर करने की शक्तिद्भद्भ(1) यदि इस अधिनियम या स्कीम के उपबन्धों को प्रभावशील करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :
परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया हर आदेश, बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के हर एक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
12. संसद् के समक्ष स्कीम का रखा जानाद्भद्भस्कीम, विरचित की जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के हर एक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखी जाएगी और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखी गई हो, या अव्यवहित पश्चात्वर्ती सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन स्कीम के किसी उपबन्ध में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि कोई उपबन्ध स्कीम में न किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, स्कीम का वह उपबन्ध ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावशील होगा या उसका कोई भी प्रभाव न होगा, किन्तु ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस उपबन्ध के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ।
अनुसूची
झ्र्धारा 3 (2) देखिएट
वे विषय जिनके लिए स्कीम में उपबन्ध किया जा सकेगा :द्भद्भ
(1) वह रीति जिससे निधि में अभिदाय किए जा सकेंगे और ऐसे अभिदायों की अधिकतम और न्यूनतम परिसीमाएं ।
(2) वह रीति जिससे निधि में अभिदायों पर ब्याज की गणना की जा सकेगी ।
(3) योगदाताओं द्वारा निधि में किए गए अभिदायों के साक्ष्य के रूप में उन्हें दी जाने वाली दस्तावेजें ।
(4) वह परिमाण जिस तक और वे निबन्धन और शर्तें जिनके अधीन रकमें योगदातों द्वारा उस रकम में से निकाली जा सकेंगी जो निधि में उनके नाम जमा हो ।
(5) वह प्राधिकारी या वे प्राधिकारी जिसके या जिनके द्वारा या जिसके या जिनके माध्यम से निधि में अभिदाय वसूल किए जा सकेंगे या उनमें से रकमें निकाली जा सकेंगी ।
(6) वे निबन्धन और शर्तें जिनके अधीन निधि में योगदाताओं के नाम जमा रकमों में से उन्हें उधार अनुदत्त किए जा सकेंगे और वह प्राधिकारी या वे प्राधिकारी जिसके या जिनके द्वारा ऐसे उधार अनुदत्त किए जा सकेंगे ।
(7) निधि में अभिदायों को बाबत रखे जाने वाले लेखे और उनमें से निकाली गई रकमें और अन्तिम संदाय तथा अनुदत्त उधार, तथा वह प्राधिकारी या वे प्राधिकारी जिसके या जिनके द्वारा ऐसे लेखे रखे जाएंगे ।
(8) निधि में योगदाता के नाम जमा रकम को उसकी मृत्यु की दशा में प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति का नामनिर्देशन तथा ऐसे नामनिर्देशन का रद्द किया जाना या उसमें परिवर्तन किया जाना ।
(9) किसी मूल दस्तावेज को नुकसान पहुंचने, उसके खो जाने या नष्ट हो जाने की दशा में, निधि में अभिदाय के साक्ष्य के रूप में दी जाने वाली उस दस्तावेज की दूसरी प्रति का दिया जाना और वह फीस जिसके संदाय पर ऐसी दूसरी प्रति दी जा सकेगी ।
(10) कोई अन्य विषय जिसका स्कीम में उपबन्ध किया जाना हो या जो स्कीम को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक या उचित हो ।

