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लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 ( Public Records Act, 1993 )


 

लोक अभिलेख अधिनियम, 1993

(1993 का अधिनियम संख्यांक 69)

[21 दिसम्बर, 1993]

केन्द्रीय सरकार और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों, केन्द्रीय सरकार या

किसी संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा गठित पब्लिक सेक्टर

उपक्रमों, कानूनी निकायों और निगमों, आयोगों

और समितियों के लोक अभिलेखों के प्रबंध,

प्रशासन और परिरक्षण का तथा उनसे

संबंधित या उनके आनुषंगिक

विषयों का विनियमन

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 है ।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                (क) बोर्ड" से धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन गठित अभिलेखागार सलाहकार बोर्ड अभिप्रेत है;

(ख) महानिदेशक" से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त अभिलेखागार महानिदेशक अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत महानिदेशक के कर्तव्यों का पालन करने के लिए उस सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी है;

(ग) अभिलेखागार प्रधान" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के अभिलेखागार का भारसाधक है;

(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ङ) लोक अभिलेख" के अन्तर्गत है किसी अभिलेख सर्जक अभिकरण के,- 

                (i) कोई दस्तावेज पांडुलिपि और फाइल;

                (ii) किसी दस्तावेज की कोई माइक्रो फिल्म, माइक्रोफिश और प्रतिकृति प्रति;

(iii) ऐसी माइक्रो फिल्मों में सन्निविष्ट प्रतिबिम्ब या प्रतिबिम्बों का कोई प्रत्युत्पादन (चाहे विवर्धित हो या नहीं); और

                (iv) किसी कम्प्यूटर द्वारा या किसी अन्य युक्ति द्वारा उत्पादित कोई अन्य सामग्री;

(च) अभिलेख सर्जक अभिकरण" के अन्तर्गत है,-

                (i) केन्द्रीय सरकार के संबंध में उस सरकार का कोई मंत्रालय, विभाग या कार्यालय;

(ii) केन्द्रीय सरकार द्वारा पूर्णतः या पर्याप्ततः नियंत्रित या वित्त पोषित कोई कानूनी निकाय या निगम, अथवा उस सरकार द्वारा गठित आयोग या किसी समिति के संबंध में, उक्त निकाय, निगम, आयोग या समिति के कार्यालय;

 (iii) किसी संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के संबंध में, उस प्रशासन का कोई विभाग या कार्यालय;

(iv) संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा पूर्णतः या पर्याप्ततः नियंत्रित या वित्त पोषित किसी कानूनी निकाय या निगम अथवा उस प्रशासन द्वारा गठित आयोग या समिति के संबंध में, उक्त निकाय, निगम, आयोग या समिति के कार्यालय;

(छ) अभिलेख अधिकारी" से धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन अभिलेख सर्जक अभिकरण द्वारा नामनिर्देशित अधिकारी अभिप्रेत है ।

3. लोक अभिलेखों के प्रशासन, प्रबंध आदि से संबंधित संक्रियाओं का समन्वय, विनियमन और पर्यवेक्षण करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के अधीन लोक अभिलेखों के प्रशासन, प्रबंध परिरक्षण, चयन, व्ययन और निवृत्ति से संबंधित संक्रियाओं का समन्वय, विनियमन और पर्यवेक्षण करने की शक्ति होगी ।

                (2) केन्द्रीय सरकार, धारा 2 के खंड (च) के उपखंड (i) और उपखंड (ii) में विनिर्दिष्ट अभिलेख सर्जक अभिकरणों के लोक अभिलेखों के संबंध में और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन, उक्त खंड के उपखंड (iii) और उपखंड (iv) में विनिर्दिष्ट अभिलेख सर्जक अभिकरणों के लोक अभिलेखों के संबंध में, आदेश द्वारा, यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान को, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों को करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, अर्थात्  :-

                                (क) अभिलेखागार का पर्यवेक्षण, प्रबंध और नियंत्रण करना;

(ख) ऐसी अवधि के पश्चात् जो विहित की जाए, स्थायी प्रकृति के लोक अभिलेखों को निक्षिप्त करने के लिए स्वीकार करना;     

(ग) लोक अभिलेखों की अभिरक्षा, उनका उपयोग और वापस लिया जाना;

(घ) लोक अभिलेखों की व्यवस्था, परिरक्षण और प्रदर्शन करना;

(ङ) लोक अभिलेखों की तालिकाएं, अनुक्रमणिकाएं, सूची और अन्य संदर्भ-माध्यम तैयार करना :

(च) अभिलेख प्रबंध पद्धति के सुधार के लिए, स्तरमानों, प्रक्रियाओं और तकनीकों का विश्लेषण, विकास, संवर्धन और समन्वय करना;

(छ) अभिलेखागार और अभिलेख सर्जक अभिकरण के कार्यालयों में लोक अभिलेखों को अनुरक्षण, व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करना;

(ज) लोक अभिलेखों के परिरक्षण के लिए उपलब्ध स्थान के उपयोग का संवर्धन करना और उपस्करों का अनुरक्षण करना;

(झ) अभिलेखों के संकलन, वर्गीकरण और व्ययन की बाबत और अभिलेख प्रबंध के स्तरमानों, प्रक्रियाओं और तकनीकों के उपयोजन के संबंध में अभिलेख सर्जक अभिकरणों को सलाह देना;

(ञ) लोक अभिलेखों का सर्वेक्षण और निरीक्षण करना;

(ट) अभिलेखागार प्रशासन और अभिलेख प्रबंध की विभिन्न शाखाओं में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना;

(ठ) किसी प्राइवेट स्रोत से अभिलेख स्वीकार करना;

(ड) लोक अभिलेखों तक पहुंच विनियमित करना;

(ढ) निष्क्रिय निकायों से अभिलेख प्राप्त करना और राष्ट्रीय आपात की दशा में लोक अभिलेख प्राप्त करने की व्यवस्था करना;

(ण) अभिलेख अधिकारी से अभिलेख प्रबंध और व्ययन पद्धति के संबंध में रिपोर्ट प्राप्त करना;

(त) लोक अभिलेखों की अधिप्रमाणित प्रतियां या उनसे उद्धरण उपलब्ध कराना;

(थ) लोक अभिलेखों को नष्ट करना या उनका व्ययन करना;

(द) ऐतिहासिक या राष्ट्रीय महत्व के किसी दस्तावेज को पट्टे पर प्राप्त करना अथवा उसे क्रय करना या दान के रूप में स्वीकार करना ।

4. लोक अभिलेखों को भारत के बाहर ले जाने का प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना कोई लोक अभिलेख न तो भारत के बाहर ले जाएगा और न ले जाने देगा :

                परन्तु यदि कोई लोक अभिलेख किसी शासकीय प्रयोजन के लिए भारत के बाहर ले जाए जाते है या भेजे जाते है तो ऐसा पूर्व अनुमोदन अपेक्षित नहीं होगा ।

5. अभिलेख अधिकारी-(1) प्रत्येक अभिलेख सर्जक अभिकरण इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अपने किसी अधिकारी को अभिलेख अधिकारी के रूप में नामनिर्देशित करेगा ।

                (2) प्रत्येक अभिलेख सर्जक अभिकरण ऐसी संख्या में और ऐसे स्थानों में, जो वह उचित समझे, अभिलेख कक्षों की स्थापना कर सकेगा और प्रत्येक अभिलेख कक्ष को किसी अभिलेख अधिकारी के भारसाधन में रखेगा ।

6. अभिलेख अधिकारी के उत्तरदायित्व-(1) अभिलेख अधिकारी निम्नलिखित के लिए उत्तरदायी होगा, अर्थात् :-

                                (क) अपने भारसाधन में के लोक अभिलेखों की उचित व्यवस्था, अनुरक्षण और परिरक्षण करना;

(ख) सभी लोक अभिलेखों का कालिक पुनर्विलोकन करना और अल्पकालिक महत्व के लोक अभिलेखों की छटाई करना;

(ग) स्थायी महत्व के लोक अभिलेखों की प्रतिधारित करने की दृष्टि से पच्चीस वर्ष से अधिक पुराने लोक अभिलेखों का, यथास्थिति, भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार से परामर्श करके अंकन करना;

(घ) लोक अभिलेखों को ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए नष्ट करना जो धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन विहित की जाएं;

(ङ) लोक अभिलेखों के लिए, यथास्थिति, भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार से परामर्श करके, प्रतिधारण अनुसूची का संकलन करना;

(च) वर्गीकृत लोक अभिलेखों की श्रेणी कम करने के लिए उनका ऐसी रीति से कालिक पुनर्विलोकन करना जो विहित की जाए;

(छ) अभिलेख प्रबन्ध पद्धति में सुधार के लिए, और लोक अभिलेखों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे स्तरमानों, प्रक्रियाओं और तकनीकों को अपनाना, जिनकी भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा समय-समय पर सिफारिश की जाए;

(ज) लोक अभिलेखों की वार्षिक अनुकमणिकाओं का संकलन करना;

(झ) संगठनात्मक इतिवृत्त और उसके वार्षिक अनुपूरक का संकलन करना;

(ञ) लोक अभिलेख प्रबन्ध के लिए, यथास्थिति, भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार को सहायता प्रदान करना;

(ट) यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान को वार्षिक रिपोर्ट ऐसी रीति से प्रस्तुत करना, जो विहित की जाए;

(ठ) किसी निष्किय निकाय के अभिलेखों का, यथास्थिति, भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार को परिरक्षण के लिए अन्तरण करना ।

                (2) अभिलेख अधिकारी उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते समय, यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान के निदेशानुसार कार्य करेगा ।

7. अपनी अभिरक्षा में के लोक अभिलेखों के अनाधिकृत हटाए जाने, नष्ट किए जाने आदि की दशा में अभिलेख अधिकारी द्वारा समुचित कार्रवाई का किया जाना-(1) अभिलेख अधिकारी, अपने भारसाधन में के किन्हीं लोक अभिलेखों के अनधिकृत हटाए जाने, नष्ट किए जाने, विरूपित किए जाने या परिवर्तित किए जाने की दशा में, ऐसे लोक अभिलेखों को बरामद करने या पुनःप्राप्त करने के लिए तुरन्त समुचित कार्रवाई करेगा ।

                (2) अभिलेख अधिकारी, अपने भारसाधन में के लोक अभिलेखों के अनधिकृत हटाए जाने, नष्ट किए जाने, विरूपित किए जाने या परिवर्तित किए जाने के बारे में तथा अपने द्वारा प्रारम्भ की गई किसी कार्रवाई के बारे में किसी जानकारी के संबंध में लिखित रिपोर्ट, यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान को बिना किसी विलम्ब के प्रस्तुत करेगा, और, यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान द्वारा दिए गए निदेशों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, ऐसी कार्रवाई करेगा, जो वह आवश्यक समझे ।

                (3) अभिलेख अधिकारी, लोक अभिलेखों को बरामद करने या पुनः प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए किसी सरकारी अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति की सहायता प्राप्त कर सकेगा और ऐसा अधिकारी या व्यक्ति ऐसे अभिलेख अधिकारी को सभी सहायता प्रदान करेगा ।

8. लोक अभिलेखों का नष्ट किया जाना या व्ययन किया जाना-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी लोक अभिलेख को ऐसी रीति से ही और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, नष्ट किया जाएगा या उसका अन्यथा व्ययन किया जाएगा ।

                (2) वर्ष 1892 के पूर्व सृजित किसी भी अभिलेख को तब के सिवाय नष्ट नहीं किया जाएगा जब, यथास्थिति, महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान की राय में वह इस प्रकार विरूपित हो गया है या ऐसी दशा में है कि उसे किसी अभिलेखागार संबंधी उपयोग में नहीं लाया जा सकता ।

9. उल्लंघनों के लिए शास्ति-जो कोई धारा 4 या धारा 8 के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुमाने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

10. सुरक्षा वर्गीकरण वाले लोक अभिलेख-सुरक्षा वर्गीकरण वाले किसी लोक अभिलेख का भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार को अंतरण नहीं किया जाएगा ।

11. प्राइवेट स्रोतों से अभिलेखों की प्राप्ति-(1) भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र का अभिलेखागार ऐतिहासिक या राष्ट्रीय महत्व के किसी अभिलेख को किसी प्राइवेट स्रोत से दान के रूप में, क्रय द्वारा या अन्यथा स्वीकार कर सकेगा ।

                (2) यथास्थिति, भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार या संघ राज्यक्षेत्र का अभिलेखागार, उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई लोक अभिलेख, ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, सद्भावी अनुसंधानविद् को उपलब्ध करा सकेगा ।

12. लोक अभिलेखों तक पहुंच-(1) ऐसे सभी अवर्गीकृत लोक अभिलेख, जो तीस वर्ष से अधिक पुराने हैं और जिनका भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार या किसी संघ राज्यक्षेत्र के अभिलेखागार को अंतरण कर दिया गया है, ऐसे अपवादों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, सद्भावी अनुसंधानविद् को उपलब्ध कराए जा सकेंगे ।

                स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, तीस वर्ष की अवधि की गणना, लोक अभिलेखों के प्रारम्भ किए जाने के वर्ष से की जाएगी ।

                (2) कोई भी अभिलेख सर्जक अभिकरण, अपनी अभिरक्षा में के किसी लोक अभिलेख तक किसी व्यक्ति की ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, पहुंच होने देगा, जो विहित की जाएं ।

13. अभिलेखागार सलाहकार बोर्ड-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, अभिलेखागार सलाहकार बोर्ड का गठन कर सकेगी ।

                (2) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्  :- 

                                (क) केन्द्रीय सरकार के संस्कृति कार्य से संबंधित मंत्रालय में भारत सरकार का सचिव -पदेन-अध्यक्ष;

(ख) मंत्रिमण्डल सचिवालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय में से प्रत्येक का एक-एक अधिकारी, जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो                                                                                                                                                     

-पदेन-सदस्य;

(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले दो प्रतिनिधि जो संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों में संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों                                                                                                                                             -सदस्य;

(घ) केन्द्रीय सरकार द्वारा तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए नामनिर्देशित किए जाने वाले तीन व्यक्ति जिनमें एक अभिलेखाध्यक्ष हों और जिनमें से दो किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय के इतिहास के स्नातकोत्तर विभाग के      आचार्य हों                                                                

-सदस्य;

(ङ) महानिदेशक                                                                                                            -पदेन-सदस्य-सचिव;

                (3) उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन नामनिर्देशित सदस्यों को ऐसे भत्तों का संदाय किया जाएगा, जो विहित किए जाएं ।

14. बोर्ड के कृत्य-बोर्ड निम्नलिखित कृत्यों का पालन करेगा, अर्थात्  :-

(क) लोक अभिलेखों के प्रशासन, प्रबंध, परिरक्षण और उपयोग से संबंधित मामलों पर केन्द्रीय सरकार और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों को सलाह देना;

(ख) अभिलेखाध्यक्षों के प्रशिक्षण से संबंधित मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित करना;

(ग) प्राइवेट अभिरक्षा से अभिलेखों के अर्जन के लिए निदेश देना;

(घ) ऐसे अन्य विषयों के संबंध में कार्रवाई करना, जो विहित किए जाएं ।

15. अभिलेखागार संबंधी विज्ञान की पाठ्ययोजना के लिए मानक और स्तरमान अधिकथित करने की महानिदेशक की शक्ति-महानिदेशक की अभिलेखागार संबंधी विज्ञान और अन्य आनुषंगिक विषयों में प्रशिक्षण से संबंधित पाठ योजना, पाठ्यचर्या, निर्धारण और परीक्षाओं के लिए मानक और स्तरमान अधिकथित करने की शक्ति होगी ।

16. सद्भावपूर्वक की गई कारवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी बात, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होंगी ।

17. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्  :-

(क) वह अवधि जिसके पश्चात् स्थायी प्रकृति के लोक अभिलेखों को धारा 3 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन स्वीकार किया जा सकेगा;

(ख) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, लोक अभिलेखों को धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (घ) के अधीन नष्ट किया जा सकता है;

(ग) वह रीति जिससे श्रेणी कम करने के लिए वर्गीकृत लोक अभिलेखों का कालिक पुनर्विलोकन धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन किया जाएगा;

(घ) वह रीति जिससे अभिलेख अधिकारी, धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अधीन महानिदेशक या अभिलेखागार प्रधान को रिपोर्ट देगा;

(ङ) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, लोक अभिलेखों को धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन नष्ट किया जा सकेगा या उनका व्ययन किया जा सकेगा;

(च) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, ऐतिहासिक या राष्ट्रीय महत्व के अभिलेख, धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन अनुसंधानविदों को उपलब्ध कराए जा सकेंगे;

(छ) वे अपवाद और निबंधन जिनके अधीन रहते हुए, लोक अभिलेख धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन किसी अनुसंधानविद् को उपलब्ध कराए जा सकेंगे;

(ज) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, कोई अभिलेख सर्जक अभिकरण, अपनी अभिरक्षा में के किसी लोक अभिलेख तक, धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन रहते हुए किसी व्यक्ति की पंहुच होने देगा;

(झ) धारा 13 की उपधारा (3) के अधीन बोर्ड के सदस्यों को संदेय भत्ते;

(ञ) वे विषय जिनकी बाबत बोर्ड धारा 14 के खंड (घ) के अधीन अपने कृत्यों का पालन कर सकेगा;

(ट) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए ।

18. संसद् के समक्ष नियमों का रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो  जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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