केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अधिनियम, 1949
(1949 का अधिनियम संख्यांक 66)
[28 दिसम्बर, 1949]
एक केन्द्रीय सशस्त्र रिजर्व पुलिस बल के गठन और
विनियमन का उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
एक केन्द्रीय सशस्त्र रिजर्व पुलिस बल के गठन और विनियमन के लिए उपबन्ध करना समीचीन है;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है:
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अधिनियम, 1949 है ।
(2) इसका विस्तार 1सम्पूर्ण भारत पर है और यह बल के सदस्यों को, चाहे वे कहीं भी हों, लागू होगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध नहीं है,
(क) “सक्रिय ड्यूटी" से ऐसी ड्यूटी अभिप्रेत है, जो किसी स्थानीय क्षेत्र में उपद्रव होने की दशा में वहां व्यवस्था पुनःस्थापित और परिरक्षित करने के लिए हो,
(ख) “बन्द गिरफ्तारी" से बल या बल की टुकड़ी या कवार्टर गार्ड चौकी के भवन या किसी गार्ड के भारसाधन के अधीन तम्बू में परिरोध अभिप्रेत है,
(ग) “बल" से केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अभिप्रेत है,
(घ) “बल के सदस्य" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे कमाण्डेण्ट द्वारा, चाहे इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात्, बल में नियुक्त किया गया है और धाराएं 1, 3, 6, 7, 16, 17, 18 और 19 के लिए इसमें ऐसा व्यक्ति भी आता है जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा, चाहे ऐसे प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात्, बल में नियुक्त किया गया है,
(ङ) “खुली गिरफ्तारी" से किन्हीं बैरकों, लाइनों या कैम्प की, जो तत्समय बल के किसी भाग के अधिभोग में है, प्रसीमाओं के अन्दर परिरोध अभिप्रेत है,
(च) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है,
(छ) “अधीनस्थ आफिसर" से बल का ऐसा सदस्य अभिप्रेत है जो सूबेदार मेजर, सूबेदार, जमादार या उपनिरीक्षक के रैंक का है,
(ज) “हमला", आपराधिक बल", कपट पूर्वक", विश्वास करने के कारण" और स्वेच्छा से उपहति कारित करना" पदों के वही अर्थ हैं जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) में हैं ।
बल का गठन
3. बल का गठन-(1) एक सशस्त्र बल केन्द्रीय सरकार द्वारा कायम रखा जाएगा और उसका नाम केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल होगा ।
(2) बल ऐसी रीति से गठित होगा और बल के सदस्य ऐसा वेतन, पेंशन और अन्य पारिश्रमिक पाएंगे, जैसा विहित किया जाए ।
4. वरिष्ठ आफिसरों की नियुक्ति और शक्तियां-(1) केन्द्रीय सरकार बल में एक कमाण्डेण्ट और ऐसे अन्य व्यक्तियों को, जिन्हें वह उचित समझती है, सहायक कमाण्डेण्ट और कम्पनी आफिसर के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।
(2) कमाण्डेण्ट और इस प्रकार नियुक्त ऐसे प्रत्येक अन्य आफिसर को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार होंगे और वे ऐसी शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग कर सकेंगे जिन्हें इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबन्धित किया जाए ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा हैदराबाद राज्य के सिवाय शब्दों का अंतःस्थापन और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा लोप किया गया ।
5. अभ्यावेशन-किसी व्यक्ति को बल का सदस्य नियुक्त करने से पूर्व अनुसूची में दी गई भर्ती की तालिका में अंतर्विष्ट विवरण पढ़कर सुनाया जाएगा और यदि आवश्यक हो, तो धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त आफिसर के समक्ष उस व्यक्ति को यह समझा दिया जाएगा और इस पर ऐसी अभिस्वीकृति के रूप में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर लिए जाएंगे कि उसे यह पढ़कर सना दिया गया है:
परन्तु ऐसे किसी वयक्ति को जिसने बल में छह मास की कालावधि के लिए सेवा की है, तत्पश्चात् बल में नियुक्त होने पर उस बल का सदस्य समझा जाएगा, यद्यपि उसके मामले में इस धारा के उपबन्धों का अनुपालन नहीं किया गया है ।
6. बल से त्यागपत्र और प्रत्याहरण-बल के किसी सदस्य को
(क) अपनी सेवा के पहले तीन मास के अवसान के पूर्व के सिवाय अपने वचनबन्ध की अवधि के दौरान अपनी नियुक्ति से त्यागपत्र देने की स्वतंत्रता नहीं होगी, या
(ख) कमाण्डेण्ट या सहायक कमाण्डेण्ट या कमाण्डेण्ट द्वारा ऐसी अनुज्ञा देने के लिए प्राधिकृत अन्य किसी आफिसर की पूर्व लिखित अनुज्ञा के बिना अपनी नियुक्ति से संबंधित सभी या किन्हीं कर्तव्यों से प्रत्याहरण करने की स्वतंत्रता नहीं होगी ।
बल के सदस्यों के साधारण कर्तव्य
7. बल के सदस्यों के साधारण कर्तव्य-(1) बल के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिपूर्वक दिए गए सभी आदेशों और वारंटों का तत्परता से पालन और निष्पादन करे, अपराधियों का पता लगाए और उन्हें न्याय दिलाए और उन सभी व्यक्तियों को पकड़े जिन्हें पकड़ने के लिए वह वैघ रूप से प्राधिकृत है और जिनके पकड़े जाने के बारे में पर्याप्त आधार विद्यमान हैं ।
(2) बल का प्रत्येक सदस्य भारत राज्यक्षेत्र के बाहर और परे तथा अन्दर भी सेवा करने के लिए दायी होगा ।
बल का अधीक्षण, नियंत्रण और प्रशासन
8. बल का अधीक्षण, नियंत्रण और प्रशासन-(1) बल का अधीक्षण और नियंत्रण केन्द्रीय सरकार में निहित होगा और बल का प्रशासन केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबन्धों के अनुसार ऐसे आफिसरों के माध्यम से किया जाएगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार समय-समय पर इस निमित्त नियुक्त करे ।
(2) बल का प्रधान कार्यालय नीमच या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किया जाए ।
(3) अपने प्रधान कार्यालय से बाहर सक्रिय ड्यूटी के दौरान बल ऐसे प्राधिकारी या आफिसर के साधारण नियंत्रण और निदेशन के अध्यधीन रहेगा जिसे विहित किया जाए या जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विशेषतया नियुक्त किया जाए ।
अपराध और दण्ड
9. अधिक जघन्य अपराध-बल का प्रत्येक सदस्य जो
(क) कोई विद्रोह आरम्भ करता है, प्रदीप्त करता है, कारित करता है, या कारित करने का षड्यंत्र करता है या उसमें सम्मिलित होता है, या किसी विद्रोह के समय उपस्थित होते हुए उसे दबाने के लिए अपना अधिकतम प्रयास नहीं करता है या किसी विद्रोह या उसके किसी आशय या विद्रोह करने के षड्यंत्र या राज्य के विरुद्ध किसी षड्यंत्र की विद्यमानता के बारे मे जानते हुए या उसका विश्वास करने का कारण रखते हुए अपने वरिष्ठ आफिसर को अविलम्ब सूचना नहीं देता है, अथवा
(ख) अपने वरिष्ठ आफिसर के प्रति, चाहे वह ड्यूटी पर हो या नहीं, जानते हुए या जानने का कारण रखते हुए कि वह ऐसा आफिसर है आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या प्रयोग करने का प्रयास करता है या उस पर हमला करता है, अथवा
(ग) लज्जास्पद रूप से किसी ऐसे पदस्थान या गार्ड को जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है, या जिसकी रक्षा करना उसका कर्तव्य है, परित्यक्त करता है या समर्पित करता है, अथवा
(घ) राज्य के विरुद्ध शस्त्र उठाने वाले किसी व्यक्ति के साथ प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः पत्र व्यवहार करता है, या उसकी सहायता करता है या उसे राहत देता है या ऐसे किसी पत्र व्यवहार को, जो उसकी जानकारी में आता है, अपने वरिष्ठ आफिसर को तत्काल प्रकट करने में लोप करता है, अथवा
सक्रिय ड्यूटी के दौरान जो
(ङ) अपने वरिष्ठ आफिसर के विधिपूर्ण समादेश की अवज्ञा करता है, अथवा
(च) बल का अभित्यजन करता है, अथवा
(छ) संतरी होते हुए अपने पदस्थान पर सो जाता है या नियमित रूप से अवमुक्त हुए या छुट्टी के बिना उसको छोड़ देता है, अथवा
(ज) लूट-पाट की तलाश में अपने कमान आफिसर या अपने पदस्थान या दल को छोड़ देता है, अथवा
(झ) नियमित रूप से अवमुक्त हुए या छुट्टी के बिना अपनी गार्ड, पिकेट, दल या पेट्रोल को छोड़ देता है, अथवा
(ञ) कैम्प या क्वार्टरों में रसद या अन्य आवश्यक वस्तुएं लाने वाले किसी व्यक्ति के प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करता है या उस पर हमला करता है, या किसी संरक्षण गारद का अतिक्रमण करता है या लूट-पाट के लिए किसी गृह या अन्य स्थान में प्रवेश करता है या, किसी प्रकार की सम्पत्ति की लूट-पाट करता है, या उसे नष्ट करता है, या उसे हानि पहुंचाता है, अथवा
(ट) संघर्ष के समय या कैम्प, गैरिसन या कवार्टरों में रहते हुए साशय मिथ्या एलार्म कारित करता है, या उसे फैलाता है, अथवा
(ठ) अपने कर्तव्य के निष्पादन में कायरता प्रदर्शित करता है,
वह निर्वासन से जिसकी अवधि सात वर्ष से कम न हो या कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो तीन मास के वेतन तक का हो सकेगा या निर्वासन या कारावास के ऐसे दण्डादेश के अतिरिक्त, उतने ही जुर्माने से, दण्डनीय होगा ।
10. कम जघन्य अपराध-बल का प्रत्येक ऐसा सदस्य जो
(क) किसी ड्यूटी या परेड या प्रगमन पथ पर रहते हुए या उसके लिए चेतावनी दिए जाने के पश्चात् नशे की हालत में रहता है, अथवा
(ख) किसी संतरी पर आघात करता है या उस पर बल का प्रयोग करने का प्रयत्न करता है, अथवा
(ग) किसी गार्ड, पिकेट या पेट्रोल का समादेशन करते हुए अपने भारसाधन में सम्यक्तः सुपुर्द किए गए किसी बंदी या व्यक्ति को लेने से इंकार करता है, या अपने भारसाधन में रखे गए किसी व्यक्ति या बंदी को उचित प्राधिकार के बिना निर्मुक्त करता है, या उपेक्षापूर्वक ऐसे किसी बंदी या व्यक्ति को भागने देता है, अथवा
(घ) गिरफ्तारी या परिरोध में होते हुए विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा मुक्त किए जाने से पूर्व अपनी गिरफ्तारी या परिरोध से चला जाता है, अथवा
(ङ) अपनी ड्यूटी के निष्पादन में अपने वरिष्ठ आफिसर के प्रति अत्यधिक अनधीनता या धृष्टता का व्यवहार करता है, अथवा
(च) क्वार्टरों या फील्ड में किए जाने के लिए आदिष्ट किसी फील्ड कार्य या अन्य किसी प्रकार के कार्य करने में अधीक्षण करने या उसमें सहायता करने से इंकार करता है, अथवा
(छ) बल के किसी ऐसे सदस्य पर, जो उससे रैंक या स्थान में नीचे है, आघात या दुर्व्यवहार करता है, अथवा
(ज) अपने आयुधों, कपड़े, औजारों, उपस्करों, गोलाबारूद या साज-सज्जा, या अन्य किन्हीं वस्तुओं को जो उसको सौंपी गई हैं या किसी अन्य व्यक्ति की है, परिकल्पनापूर्वक या उपेक्षा से क्षति पहुंचाता या खोता है या कपटपूर्वक व्ययन कर देता है, अथवा
(झ) अपने में किसी रोग या अंग शैथिल्य का बहाना करता है या ढोंग करता है या उसे उत्पन्न करता है, या कर्तव्य से बचने के लिए अपने को निरोग करने में साशय विलम्ब करता है, या अपने रोग या अंग शैथिल्य को गुरुतर बनाता है, अथवा
(ञ) अपने आप को या अन्य किसी व्यक्ति को सेवा के लिए अयोग्य कर देने के आशय से स्वयं को या उस व्यक्ति को स्वेच्छापूर्वक उपहति कारित करता है, अथवा
(ट) ऐसे सदस्य के नाते उसे दिए गए या प्रदाय किए गए, या उसकी अभिरक्षा या कब्जे में के सभी या किन्हीं आयुधों, गोलाबारूद, स्टोर, साज-सज्जा, या अन्य संपत्ति को उस दशा में तुरन्त समर्पित नहीं कर देता है या उसके लिए सम्यक्तः हिसाब नहीं दे देता है जबकि उसके वरिष्ठ आफिसर द्वारा उससे ऐसा करने की अपेक्षा की जाए या वह बल का सदस्य नहीं रह गया हो, अथवा
(ठ) अपने समादेशाधीन या भारसाधनाधीन किन्हीं सदस्यों की संख्या या राज्य के या अपने भारसाधन में के किसी धन, आयुध, गोलाबारूद, वस्त्र, उपस्कर, स्टोर, या अन्य सम्पत्ति के बारे में, चाहे वह उन सदस्यों की हो, या सरकार की हो या बल के किसी सदस्य की हो, या बल से संलग्न किसी व्यक्ति की हो, मिथ्या विवरणी या रिपोर्ट जानते हुए देता है, या जो परिकल्पना या आपराधिक उपेक्षा द्वारा पूर्वोक्त बातों के बारे में कोई विवरणी या रिपोर्ट देने या भेजने में लोप करता है, या ऐसा करने से इन्कार करता है, अथवा
(ड) बिना छुट्टी के अपने आप को अनुपस्थित रखता है, या अपने को अनुदत्त छुट्टी के उपरान्त बिना पर्याप्त कारण के अतिवास करता है, अथवा
(ढ) ऐसे कार्य या लोप का दोषी है जो, इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट न होते हुए भी, सुव्यवस्था और अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है, अथवा
(ण) इस अधिनियम के ऐसे किसी उपबन्ध का उल्लंघन करता है जिसके लिए अभिव्यक्ततः कोई दण्ड उपबंधित नहीं किया गया है, अथवा
सक्रिय ड्यूटी के दौरान जो
(त) धारा 9 के खण्ड (ङ) से लेकर (ठ) (दोनों सहित) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से कोई अपराध करता है,
कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो तीन मास के वेतन तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
11. छोटे दण्ड-(1) कमाण्डेण्ट या अन्य कोई प्राधिकारी या आफिसर, जो विहित किया जाए, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, बल के किसी सदस्य को जिसे वह अवज्ञा, कर्तव्य के प्रति उपेक्षा, या किसी कर्तव्य के निर्वहन में असावधानी या बल के सदस्य के रूप में अपनी हैसियत में किसी प्रकार के अन्य अवचार का दोषी समझता है, निलंबन या पदच्युति के बदले में या उसके अतिरिक्त निम्नलखित दण्डों में से कोई एक या अधिक दण्ड दे सकेगा, अर्थात्:
(क) रैंक में अवनति,
(ख) जुर्माने की ऐसी कोई राशि जो एक मास के वेतन और भत्तों से अधिक न हो,
(ग) क्वार्टर, लाइन या कैम्प में परिरोध जिसकी अवधि एक मास से अधिक न हो,
(घ) क्वार्टर गार्ड में परिरोध, जो दण्ड ड्रिल या अतिरिक्त पहरा, फटीग या अन्य ड्यूटी सहित या रहित अट्ठाईस दिन से अधिक का न हो,
(ङ) बल के किसी विशिष्ट पद या विशेष उपलब्धि से हटाया जाना ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (ग) या खण्ड (घ) में विनिर्दिष्ट दण्ड किसी राजपत्रित आफिसर द्वारा उस दशा में दिया जा सकेगा जबकि वह प्रधान कार्यालय से दूर बल की किसी टुकड़ी का समादेशन कर रहा है, परन्तु यह तब जब इस निमित्त कमाण्डेण्ट द्वारा उसे विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है ।
(3) सहायक कमाण्डेण्ट, कम्पनी आफिसर या अधीनस्थ आफिसर जो सूबेदार या निरीक्षक के रैंक से नीचे का न हो और जो किसी अलग टुकड़ी या किसी सीमा चौकी का समादेशन कर रहा है, या जो प्रधान कार्यालय में बल का अस्थायी रूप से समादेशन कर रहा है, बल के किसी सदस्य को, जो कि तत्समय उसके प्राधिकार के अध्यधीन है, औपचारिक विचारण के बिना अनुशासन के विरुद्ध किए गए छोटे अपराध करने पर जिसके बारे में इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित नहीं है या जो दण्ड न्यायालय में अभियोजित करने के लिए पर्याप्त रूप से गम्भीर प्रकृति का नहीं है, निम्नलिखित दण्डों में से एक या अधिक दण्ड दे सकेगा, अर्थात् :
(क) क्वार्टर गार्ड या ऐसे अन्य स्थान में जो उपयुक्त समझा जाए परिरोध, जो सात दिन से अधिक का न हो; परिरोध के दौरान के सभी वेतन और भत्ते समपहृत हो जाएंगे;
(ख) कवार्टरों, लाइनों या कैम्प में परिरोध सहित या रहित दण्ड ड्रिल, या अतिरिक्त पहरा, फटीग या अन्य ड्यूटी, जो तीस दिन से अधिक न हो,
(ग) परिनिन्दा या तीव्र परिनिन्दा, परन्तु यह दण्ड किसी अधीनस्थ आफिसर को केवल कमाण्डेट द्वारा ही दिया जा सकेगा ।
(4) जमादार या उपनिरीक्षक जो अस्थायी रूप से किसी टुकड़ी या सीमा चौकी का समादेशन कर रहा है, इसे रीति से और इस प्रकार के किसी अपराध के किए जाने के लिए, बल के किसी सदस्य को जो कि तत्समय उसके प्राधिकार के अध्यधीन है उपधारा (3) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट दण्डों में से कोई दण्ड पन्द्रह दिन से अनधिक समय के लिए दे सकेगा ।
12. कारावास का स्थान और कारावास के आधार पर पदच्युति का दायित्व-(1) इस अधिनियम के अधीन कारावास से दण्डित हर व्यक्ति बल से पद्च्युत किया जा सकेगा और वह अपने को देय वेतन, भत्तों और अन्य धनराशियों और साथ ही अपने द्वारा प्राप्त किन्हीं मैडलों और अलंकरणों के समपहरण के लिए भी दायी होगा ।
(2) ऐसे हर व्यक्ति को विहित कारगार में उस दशा में बन्दी रखा जाएगा जबकि उसे इस प्रकार पद्च्युत किया गया हो, किन्तु यदि उसे बल से पदच्युत भी नहीं किया जाता है, तो उसे क्वार्टर गार्ड या ऐसे अन्य स्थान में जिसे न्यायालय या कमाण्डेण्ट उपयुक्त समझे, उस दशा में परिरुद्ध किया जा सकेगा जबकि न्यायालय या कमाण्डेण्ट ऐसा निदेश दे ।
13. वेतन और भत्तों से कटौतियां-बल के किसी सदस्य के वेतन और भत्तों में से उसके कम्पनी आफिसर द्वारा निम्नलिखित शास्तिक कटौतियां की जा सकेंगी, अर्थात्:
(क) प्रत्येक दिन की अनुपस्थिति के लिए चाहे वह अभित्यजन के कारण हो या छुट्टी के बिना, और किसी दण्ड न्यायालय द्वारा दिए गए कारावास के या धारा 11 के अधीन दिए गए परिरोध के प्रत्येक दिन के लिए सभी वेतन और भत्ते,
(ख) प्रत्येक दिन के सभी वेतन और भत्ते, जबकि वह किसी ऐसे अपराध के आरोप पर अभिरक्षा में है, जिसके लिए उसे तत्पश्चात् सिद्धदोष ठहराया जाता है,
(ग) प्रत्येक दिन के सभी वेतन और भत्ते, जबकि वह अस्पताल में बीमारी के कारण रहता है जिसके बारे में अस्पताल में उसकी देखभाल करने वाले चिकित्सा अधिकारी द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा किए गए किसी अपराध द्वारा वह कारित की गई हैं,
(घ) धारा 11 के अधीन समपहृत होने के लिए आदिष्ट सभी वेतन और भत्ते, और
(ङ) बल के किसी सदस्य द्वारा किए गए खर्चों या उसके द्वारा किन्हीं आयुधों, गोलाबारूद, उपस्कर, वस्त्र, उपकरणों या अलंकरणों को जो किसी बल के हैं या किन्हीं भवनों या संपत्ति को, की गई किसी हानि या नुकसान या विनाश की पूर्ति करने के लिए उतनी राशि, जो कमाण्डेण्ट या सहायक कमोडेण्ट द्वारा आदिष्ट की जाए ।
14. सामूहिक जुर्माने-जब कभी किसी कम्पनी या बल के इसी प्रकार के किसी अन्य समान यूनिट का कोई अस्त्र, किसी अस्त्र का भाग या गोलाबारूद, जो उसके उपस्कर का भाग है, खो जाता है या चारी हो जाता है, तब कमाण्डेण्ट ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी वह उचित समझता है और ऐसे नियमों के अध्यधीन, जो विहित किए जाएं, अधीनस्थ अधिकारियों और ऐसी यूनिट के जवानों पर या उनमें से उतनों पर, जितने उसके निर्णय के अनुसार ऐसे खो जाने या चोरी के लिए उत्तरदायी ठहराए जाने चाहिएं, सामूहिक जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।
गिरफ्तारी
15. गिरफ्तारी-(1) बल के किसी सदस्य को जो धारा 9 या धारा 10 में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करता है, बल के किसी आफिसर द्वारा खुली या बन्द गिरफ्तारी में रखा जा सकेगा ।
(2) जब कि उपधारा (1) के अधीन कोई अधीनस्थ आफिसर गिरफ्तारी का आदेश देता है, तब वह तुरन्त या शीघ्रतम अवसर पर गिरफ्तारी के बारे में अपने कम्पनी या टुकड़ी कमाण्डर को रिपोर्ट करेगा जो मामले का अन्वेषण करने के पश्चात् बल के गिरफ्तार किए गए सदस्य की निर्मुक्ति या गिरफ्तारी जारी रखने के बारे में आदेश करेगा ।
प्रकीर्ण
16. बल के सदस्यों को प्रदान की जाने वाली और लगाई जाने वाली शक्तियां और ड्यूटियां-(1) केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, बल के किसी सदस्य को ऐसी शक्तियों में से किन्हीं को प्रदत्त कर सकेगी या ऐसी ड्यूटियों में से किन्हीं को उन पर लगा सकेगी जो किसी वर्ग या ग्रेड के पुलिस आफिसर को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा प्रदत्त किए गए हैं या उस पर लगाए गए हैं ।
(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898(1898 का 5), में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार किसी कमाण्डेण्ट या सहायक कमाण्डेण्ट को ऐसे किसी अपराध के बारे में जांच या विचारण करने के प्रयोजन के लिए किसी वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियां विनिहित कर सकेगी जो बल के किसी सदस्य द्वारा किया गया है और इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय है, या जो बल के किसी सदस्य द्वारा अन्य सदस्य के शरीर या सम्पत्ति के प्रति किया गया है:
परन्तु
(i) जबकि अपराधी छुट्टी पर है या ड्यूटी से अनुपस्थित है, या
1(ii) जबकि अपराध का सम्बन्ध बल के सदस्य के रूप में अपराधी की ड्यूटियों से नहीं है, या
(iii) जबकि यह छोटा अपराध है, यद्यपि इसका सम्बन्ध बल के सदस्य के रूप में अपराधी की ड्यूटियों से है,
तो मामले में अधिकारिता प्राप्त मामूली दण्ड न्यायालय द्वारा अपराध की जांच की जा सकती है या उसका विचारण किया जा सकता है यदि विहित प्राधिकारी, जिसकी अधिकारिता की सीमाओं के अन्दर किया गया है, ऐसा निदेश देता है ।
17. बल के सदस्यों द्वारा किए गए कार्यों के लिए संरक्षण-(1) बल के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी वाद या कार्यवाही में किसी भी कार्य के बारे में जो उसके द्वारा किसी सक्षम प्राधिकारी के वारण्ट या आदेश के अनुसरण में किया गया है, उसके लिए यह अभिवचन करना विधिपूर्ण होगा कि ऐसा कार्य उसने ऐसे वारण्ट या आदेश के प्राधिकार के अधीन किया था ।
(2) किसी ऐसे अभिवाक् को उस वारण्ट या आदेश के पेश करने से साबित किया जा सकेगा जिसमें वह कार्य करने के लिए निदेश दिया गया हो, और यदि इसे इस प्रकार साबित कर दिया जाता है, तो बल के सदस्य को उसके द्वारा इस प्रकार किए गए कार्य के संबंध में दायित्व से उन्मोचित किया जाएगा, चाहे उस प्राधिकारी की जिसने ऐसा वारण्ट या आदेश जारी किया है, अधिकारिता के बारे में कोई त्रुटि है ।
(3) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी विधिक कार्यवाही को (चाहे वह सिविल हो या दाण्डिक) जिसे इस अधिनियम या उसके अधीन बने नियमों के किसी उपबन्ध द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन या उसके अनुसरण में की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में बल के किसी सदस्य के विरुद्ध विधिपूर्वक किया जाए, परिवादित कार्य के किए जाने के पश्चात् तीन मास के अन्दर प्रारम्भ किया जाएगा अन्यथा नहीं, और ऐसी कार्यवाही की लिखित सूचना और उसका कारण प्रतिवादी या उसके वरिष्ठ आफिसर को ऐसी कार्यवाही के प्रारम्भ के कम से कम एक मास पूर्व दिए जाएंगे ।
18. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम2 बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं बातों के बारे में उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्:
(क) बल के सदस्यों के वर्ग और ग्रेड, तथा वेतन, पेंशन और अन्य पारिश्रमिक और बल में उनकी सेवा की शर्तों का विनियमन करना,
(ख) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन किन्हीं कृत्यों को करने के लिए प्राधिकृत आफिसरों की शक्तियों और कर्तव्यों का विनियमन करना,
(ग) बल के सदस्यों की सेवा की कालावधि नियत करना,
(घ) धारा 11 के अधीन छोटे दण्ड देने के लिए विनियमन करना और उस धारा के अधीन दिए गए आदेशों के विरुद्ध अपील या पुनरीक्षण का उपबंध करना या उस धारा के अधीन अधिरोपित जुर्मानों में से छूट देना और धारा 13 के अधीन की गई कटौतियों से छूट देना,
(ङ) आयुधों और गोलाबारूद के खो जाने या चोरी हो जाने की दशा में बल के सदस्यों का पृथक् या सामूहिक दायित्व के बारे में विनियमन करना,
- केंद्रीय पुलिस बल नियम, 1955 के लिए भारत का राजपत्र, 1955, भाग 2, खंड 3, पृ० 393 पर प्रकाशित अधिसूचना सं० का० नि० आ० 499, तारीख 24 फरवरी, 1955 देखिए ।
- केंद्रीय पुलिस बल नियम, 1955 के लिए भारत का राजपत्र, 1955, भाग 2, खंड 3, पृ० 393 पर प्रकाशित अधिसूचना सं० का० नि० आ० 499, तारीख 24 फरवरी, 1955 देखिए ।
(च) इस अधिनियम के अधीन उत्पन्न होने वाले दाण्डिक मामलों का निपटारा करना और उस कारागार को विनिर्दिष्ट करना जिसमें ऐसे किसी मामले में सिद्धदोष ठहराए गए व्यक्ति को परिरुद्ध किया जा सकेगा ।
1[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
19. इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किए गए कार्यों का विधिमान्यकरण-बल के किसी सदस्य द्वारा या उसके संबंध में 15 अगस्त, 1947 को या तत्पश्चात् किन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व, दिए गए किसी आदेश, या की गई किसी बात या कार्यवाही को सभी प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम के अधीन दिया गया या की गई समझी जाएगी मानो उस दिन को, जिसको ऐसा आदेश दिया गया था, या वह बात या कार्यवाही की गई थी, यह अधिनियम प्रवृत्त था ।
अनुसूची
भर्ती की तालिका
(धारा 5 देखिए)
बल में ऐसी कालावधि तक जैसी केन्द्रीय सरकार विहित करे, आपके सेवा कर लेने के पश्चात् आप सक्रिय ड्यूटी पर न रहते हुए किसी भी समय, कमाण्डेण्ट को उस आफिसर के माध्यम से जिसके आप अधीनस्थ हैं, सेवोन्मुक्ति के बारे में आवेदन कर सकेंगे और आपके आवेदन की तारीख से दो मास के पश्चात् आपकी सेवोन्मुक्ति तभी की जाएगी जबकि इससे बल में स्वीकृति सदस्य संख्या के एक बटा-दस से अधिक रिक्तियां कारित नहीं होती हैं, और उस दशा में आप बल में उस समय तक रहने के लिए आबद्ध होंगे जिस समय तक इस आक्षेप को अधित्यक्त या दूर नहीं कर लिया जाता है । किन्तु जब आप सक्रिय ड्यटी पर हों तब आपका सेवोन्मुक्ति के लिए कोई दावा नहीं होगा और ड्यूटी करने के लिए आपको तब तक आबद्ध रहना होगा जब तक कि बल में आपको रखने की आवश्यकता समाप्त नहीं हो जाती है और तब ही आप ऊपर वर्णित रीति से अपना आवेदन कर सकेंगे :
परन्तु यदि आप बल से अलग होना चाहते हैं, तो आप अपनी सेवा के प्रथम तीन मास के अवसान के पूर्व किसी भी समय त्यागपत्र दे सकेंगे और तत्पश्चात् तब तक नहीं जब तक उपरोक्त प्रकार की विहित कालावधि पूरी न हो; कमाण्डेण्ट या तो तत्काल या उसकी प्राप्ति की तारीख से तीन मास के अन्त में आपका त्यागपत्र स्वीकार कर सकेगा:
परन्तु यह भी कि यदि कमाण्डेण्ट उचित समझता है, तो वह आपको अपनी त्यागपत्र देने की इच्छा की तीन मास की सूचना देने पर किसी भी समय त्यागपत्र देने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।
बल के सदस्य के इस अभिस्वीकृति में हस्ताक्षर कि उपरोक्त उसे पढ़कर सुना दिया गया है ।
जगह जहां पर सदस्य के बाएं हाथ के अंगूठे का निशान, अभ्यावेशन आफिसर की उपस्थिति में लिया जाएगा ।
मेरे द्वारा यह अभिनिश्चित करने के पश्चात् कि अभ्यर्थी ने इसका आशय समझ लिया है जिसके बारे में उसने हस्ताक्षर
किया है, मेरी उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया ।
स्थान कमाण्डेण्ट
तारीख या अन्य प्राधिकृत अभ्यावेशन आफिसर
- 1986 के अधिनियम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (15-5-1986 से) अंतःस्थापित ।

