भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद् अधिनियम, 1970
(1970 का अधिनियम संख्यांक 48)
[21 दिसम्बर, 1970]
भारतीय चिकित्सा की एक केन्द्रीय परिषद् के गठन का और भारतीय चिकित्सा का
एक केन्द्रीय रजिस्टर रखे जाने का तथा तत्संबद्ध विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के इक्कीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) यह अधिनियम भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद् अधिनियम, 1970 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह किसी राज्य में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस राज्य के लिए इस निमित्त नियत करे तथा विभिन्न राज्यों के लिए और इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “अनुमोदित" संस्था से ऐसी अध्यापन संस्था, स्वास्थ्य-केन्द्र या अस्पताल अभिप्रेत है जो विश्वविद्यालय या बोर्ड से ऐसी संस्था के रूप में मान्यताप्राप्त है जिसमें कोई व्यक्ति अपने को चिकित्सीय अर्हता दिए जाने के पूर्व अपने पाठ्यक्रम द्वारा अपेक्षित प्रशिक्षण, यदि कोई हो, प्राप्त कर सकता है ;
(ख) “बोर्ड" से (किसी भी नाम से ज्ञात) भारतीय चिकित्सा का कोई बोर्ड, परिषद्, परीक्षा निकाय या संकाय अभिप्रेत है जो भारतीय चिकित्सा की चिकित्सीय अर्हताएं प्रदान करने का और भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों के रजिस्ट्रीकरण का विनियमन करने वाली किसी तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन राज्य सरकार द्वारा गठित किया गया हो ;
(ग) “केन्द्रीय परिषद्" से धारा 3 के अधीन गठित भारतीय चिकित्सा की केन्द्रीय परिषद् अभिप्रेत है ;
(घ) “भारतीय चिकित्सा का केन्द्रीय रजिस्टर" से केन्द्रीय परिषद् द्वारा इस अधिनियम के अधीन रखा गया रजिस्टर अभिप्रेत है ;
(ङ) “भारतीय चिकित्सा" से वह भारतीय चिकित्सा-पद्धति अभिप्रेत है जो सामान्यतः अष्टांग आयुर्वेद, सिद्ध [या यूनानी तिब्बी] के नाम से जानी जाती है, जो वह उन आधुनिक प्रगतियों से जिन्हें केन्द्रीय परिषद् अधिसूचना द्वारा समय-समय पर घोषित करे, अनुपूरित हो या न हो ;
[(ङक) “चिकित्सा महाविद्यालय" से अभिप्रेत है ऐसा भारतीय चिकित्सा महाविद्यालय, चाहे वह उस नाम से या अन्य किसी नाम से जाना जाता हो, जिसमें कोई व्यक्ति ऐसा पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण, जिसके अंतर्गत कोई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण भी है, प्राप्त कर सकता है, जो उसे मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता प्रदान करने के लिए अर्हित करेगा ;]
(च) “चिकित्सीय संस्था" से भारत के भीतर या बाहर की ऐसी संस्था अभिप्रेत है जो भारतीय चिकित्सा में उपाधियां, डिप्लोमें या अनुज्ञप्तियां अनुदत्त करती है ;
(छ) “विहित" से विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ज) “मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता" से द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ अनुसूची में सम्मिलित भारतीय चिकित्सा का चिकित्सीय अर्हताओं में से कोई, जिसके अन्तर्गत स्नातकोत्तर चिकित्सीय अर्हता भी है, अभिप्रेत है ;
(झ) “विनियम" से धारा 36 के अधीन बनाया गया विनियम अभिप्रेत है ;
(ञ) “भारतीय चिकित्सा का राज्य रजिस्टर" से ऐसा रजिस्टर या ऐसे रजिस्टर अभिप्रेत हैं या जो भारतीय चिकित्सा से व्यवसायियों के रजिस्ट्रीकरण का विनियमन करने वाली किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन रखा जाता है या रखे जाते हैं ;
(ट) “विश्वविद्यालय" से भारत में का ऐसा विश्वविद्यालय अभिप्रेत है जो विधि द्वारा स्थापित किया गया है और जिसमें भारतीय चिकित्सा का कोई संकाय है, तथा इसके अन्तर्गत भारत में का ऐसा विश्वविद्यालय भी है जो विधि द्वारा स्थापित किया गया है और जिसमें भारतीय चिकित्सा के शिक्षण, अध्यापन, प्रशिक्षण या अनुसंधान की व्यवस्था है ।
(2) जम्मू-कश्मीर राज्य में अप्रवृत्त किसी विधि के प्रति इस अधिनियम में किसी निर्देश का उस राज्य के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति, यदि कोई हो, निर्देश है ।
अध्याय 2
केन्द्रीय परिषद् और उसकी समितियां
3. केन्द्रीय परिषद् का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक केन्द्रीय परिषद् शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, गठित करेगी जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) प्रत्येक ऐसे राज्य में, जिसमें भारतीय चिकित्सा का राज्य रजिस्टर रखा जाता है, आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानीट चिकित्सा पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए पांच से अनधिक उतने सदस्य जितने प्रथम अनुसूची के उपबन्धों के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएं, जो उस रजिस्टर में, यथास्थिति, आयुर्वेद, सिद्ध [या यूनानी] चिकित्सा के व्यवसायियों के रूप में नामावलिगत व्यक्तियों द्वारा अपने में से निर्वाचित किए जाएंगे ;
(ख) प्रत्येक विश्वविद्यालय से आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानी] चिकित्सा पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए एक-एक सदस्य जो उस विश्वविद्यालय के संबद्ध चिकित्सा पद्धति के (किसी भी नाम से ज्ञात) संकाय या विभाग के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगा ;
(ग) खण्ड (क) और खण्ड (ख) के अधीन निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के तीस प्रतिशत से अनधिक उतने सदस्य जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा उन व्यक्तियों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएं जो भारतीय चिकित्सा का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखते हों :
परन्तु तब तक के लिए जब खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन सदस्य इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार निर्वाचित हो जाएं, केन्द्रीय सरकार उतनी संख्या में, जितने वह सरकार ठीक समझे, सदस्य नामनिर्दिष्ट करेगी जो, यथास्थिति, उक्त खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन इस रूप में चुने जाने के लिए अर्हित व्यक्ति होंगे, और इस अधिनियम में निर्वाचित सदस्यों के प्रति निर्देशों का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा कि उनके अंतर्गत इस प्रकार नामनिर्दिष्ट सदस्यों के प्रति निर्देश भी हैं ।
(2) केन्द्रीय परिषद् का अध्यक्ष उस परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से ऐसी रीति से निर्वाचित किया जाएगा जो विहित की जाए ।
(3) आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानी] चिकित्सा पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए एक उपाध्यक्ष होगा, जो उस चिकित्सा पद्धति का प्रतिनिधित्व करने वाले उन सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगा जो उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन निर्वाचित किए गए हों या उस उपधारा के खण्ड (ग) के अधीन नामनिर्दिष्ट किए गए हों ।
4. निर्वाचन का ढंग-(1) धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन निर्वाचन केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे नियमों के अनुसार संचालित किया जाएगा जो उसके द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं ।
(2) जहां केन्द्रीय परिषद् के लिए निर्वाचन के बारे में कोई विवाद उठे वहां वह केन्द्रीय सरकार को निर्देशित किया जाएगा, जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
5. निर्वाचन और सदस्यता पर निर्बन्धन-(1) कोई व्यक्ति केन्द्रीय परिषद् के लिए निर्वाचित किए जाने के लिए पात्र तब ही होगा जब वह द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ अनुसूची में सम्मिलित चिकित्सीय अर्हताओं में से कोई रखता हो, भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामवलिगत हो और संबंधित राज्य में निवास करता हो, अन्यथा नहीं ।
(2) कोई व्यक्ति एक ही समय पर एक से अधिक हैसियत में सदस्य के रूप में काम न करेगा ।
6. केन्द्रीय परिषद् का निगमन-केन्द्रीय परिषद् भारतीय चिकित्सा की केन्द्रीय परिषद् के नाम की निगमित निकाय होगी उसका शाश्वत् उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी तथा उसे जंगम सम्पत्ति और स्थावर सम्पत्ति दोनों का ही अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।
7. केन्द्रीय परिषद् के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि-(1) केन्द्रीय परिषद् का अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य, यथास्थिति, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किए जाने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए या जब तक उसका उत्तराधिकारी सम्यक् रूप से निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट न हो जाए, तब तक जो भी दीर्घतर हो, पद धारण करेगा ।
(2) किसी निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य के बारे में तब यह समझा जाएगा कि उसने अपना स्थान रिक्त कर दिया है जब कि वह ऐसे प्रतिहेतु के बिना, जो केन्द्रीय परिषद् की राय में पर्याप्त हो, केन्द्रीय परिषद् के तीन क्रमवती मामूली अधिवेशनों से अनुपस्थित रहे, अथवा धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन निर्वाचित सदस्य की दशा में, जब वह संबंधित भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत न रह जाए, अथवा उस उपधारा के खण्ड (ख) के अधीन निर्वाचित सदस्य की दशा में, जब वह संबंधित विश्वविद्यालय के भारतीय चिकित्सा के (किसी भी नाम से ज्ञात) संकाय या विभाग का सदस्य न रह जाए ।
(3) केन्द्रीय परिषद् में की आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, निर्वाचन या नामनिर्दिष्ट द्वारा भरी जाएगी और उस रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट व्यक्ति उस अवधि के अवशिष्ट भाग के लिए पद धारण करेगा जिसके लिए वह सदस्य, जिसका स्थान वह ले, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किया गया था ।
(4) केन्द्रीय परिषद् के सदस्य पुनः निर्वाचन या पुनः नामनिर्देशन के पात्र होंगे ।
(5) जब पांच वर्ष की उक्त अवधि किसी सदस्य के बारे में अवसित होने को हो तो उत्तराधिकारी उक्त अवधि के अवसान के पूर्व तीन मास के भीतर किसी भी समय निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किया जा सकेगा किन्तु वह तब तक पद ग्रहण न करेगा जब तक उक्त अवधि का अवसान न हो जाए ।
8. केन्द्रीय परिषद् के अधिवेशन-(1) केन्द्रीय परिषद् का अधिवेशन प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार और ऐसे समय तथा स्थान पर, जो केन्द्रीय परिषद् द्वारा नियत किया जाए, होगा ।
(2) जब तक अन्यथा विहित न किया जाए, गणपूर्ति केन्द्रीय परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से होगी और केन्द्रीय परिषद् के सब कार्यों का विनिश्चय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की बहुसंख्या द्वारा होगा :
परन्तु केन्द्रीय परिषद् का किसी भारतीय चिकित्सा के संबंध में कोई विनिश्चय तब ही प्रभावी होगा, जब, यथास्थिति, आयुर्वेद, सिद्ध [या यूनानी] चिकित्सा-पद्धति का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य अधिवेशन में उपस्थित हों और विनिश्चय का समर्थन करें, अन्यथा नहीं ।
9. आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी समितियां- [(1) केन्द्रीय परिषद् अपने सदस्यों में से-
(क) एक आयुर्वेद समिति ;
(ख) एक सिद्ध समिति ; और
(ग) एक यूनानी समिति,
गठित करेगी और प्रत्येक समिति में धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन निर्वाचित या खण्ड (ग) के अधीन नामनिर्दिष्ट वे सदस्य होंगे जो, यथास्थिति, आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सा पद्धति का प्रतिनिधित्व करते हों ।]
(2) आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानी] चिकित्सा-पद्धतियों के लिए धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन निर्वाचित उपाध्यक्ष क्रमशः उपधारा (1) के खण्ड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट समितियों के अध्यक्ष होंगे ।
(3) ऐसे साधारण या विशेष निदेशों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय परिषद् समय-समय पर दे, ऐसी प्रत्येक समिति केन्द्रीय परिषद् की क्षमता के भीतर की ऐसी प्रत्येक बात के बारे में कार्यवाही करने के लिए सक्षम होगी जो, यथास्थिति, आयुर्वेद, सिद्ध [या यूनानी] चिकित्सा-पद्धति के संबंध में हो ।
10. अन्य समितियां-केन्द्रीय परिषद् अपने सदस्यों में से अन्य ऐसी समितियों को साधारण या विशेष प्रयोजनों के लिए गठित कर सकेगी जैसी वह परिषद् इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे ।
11. समितियों के अधिवेशन-(1) धारा 9 और 10 के अधीन गठित समितियों का अधिवेशन, प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार और ऐसे समय तथा स्थान पर, जो केन्द्रीय परिषद् द्वारा नियत किया जाए, होगा ।
(2) जब तक अन्यथा विहित न किया जाए, गणपूर्ति समिति के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से होगी और समिति के सब कार्यों का विनिश्चय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की बहुसंख्या द्वारा होगा ।
12. केन्द्रीय परिषद् के अधिकारी और अन्य कर्मचारी-केन्द्रीय परिषद्-
(क) एक रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी जो सचिव के रूप में कार्य करेगा और यदि समीचीन समझा जाए तो कोषपाल के रूप में भी कार्य कर सकेगा ;
(ख) अन्य ऐसे व्यक्तियों को नियोजित करेगी जिन्हें इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए वह आवश्यक समझे ;
(ग) रजिस्ट्रार या किसी अन्य कर्मचारी से उसके कर्तव्यों के सम्यक् पालन के लिए ऐसी प्रतिभूति अपेक्षित करेगी और लेगी जैसी केन्द्रीय परिषद् आवश्यक समझे ; तथा
(घ) केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से वे पारिश्रमिक और भत्ते नियत करेगी जो केन्द्रीय परिषद् के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को तथा उसकी समितियों के सदस्यों को दिए जाएंगे और केन्द्रीय परिषद् के कर्मचारियों की सेवा की शर्तें अवधारित करेगी ।
13. केन्द्रीय परिषद् और उसकी समितियों में रिक्तियों से कार्यों आदि का अविधिमान्य न होना-केन्द्रीय परिषद् या उसकी किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत न की जाएगी कि, यथास्थिति, केन्द्रीय परिषद् या उस समिति में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटि थी ।
[अध्याय 2क
नए चिकित्सा महाविद्यालय, पाठ्यक्रम आदि के लिए अनुज्ञा
13क. नए चिकित्सा महाविद्यालय, नए पाठ्यक्रम आदि की स्थापना के लिए अनुज्ञा-(1) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के उपबंधों के अनुसार अभिप्राप्त केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के सिवाय, -
(क) कोई व्यक्ति चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित नहीं करेगा ; या
(ख) कोई चिकित्सा महाविद्यालय-
(i) अध्ययन का कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण प्रारंभ नहीं करेगा, जिसके अंतर्गत कोई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण भी है, जो ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के विद्यार्थी को, कोई मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता प्रदान किए जाने के लिए स्वयं को अर्हित करने में समर्थ बनाएगा ; या
(ii) अध्ययन या प्रशिक्षण के किसी पाठ्यक्रम, जिसके अंतर्गत अध्ययन या प्रशिक्षण का कोई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी है, की अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि नहीं करेगा ।
स्पष्टीकरण 1-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, व्यक्ति" के अंतर्गत कोई विश्वविद्यालय या न्यास है, किन्तु केन्द्रीय सरकार इसके अंतर्गत नहीं है ।
स्पष्टीकरण 2-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी चिकित्सा महाविद्यालय में अध्ययन या प्रशिक्षण के किसी पाठ्यक्रम, जिसके अंतर्गत अध्ययन या प्रशिक्षण का कोई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण भी है, के संबंध में, प्रवेश क्षमता" से विद्यार्थियों की वह अधिकतम संख्या अभिप्रेत है, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण में प्रवेश दिए जाने के लिए नियत की जाए ।
(2) प्रत्येक व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय, उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार को उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार एक स्कीम प्रस्तुत करेगा और केन्द्रीय सरकार, उस स्कीम को केन्द्रीय, परिषद् को उसकी सिफारिशों के लिए निर्दिष्ट करेगी ।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट स्कीम ऐसे प्ररूप में होगी और उसमें ऐसी विशिष्टियां होगी और वह ऐसी रीति से प्रस्तुत की जाएगी तथा उसके साथ ऐसी फीस होगी, जो विहित की जाए ।
(4) उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार से कोई स्कीम प्राप्त होने पर, केन्द्रीय परिषद्, सम्बद्ध व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय से ऐसी अन्य विशिष्टियां अभिप्राप्त कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे, और तत्पश्चात् वह, -
(क) यदि स्कीम त्रुटिपूर्ण है और उसमें आवश्यक विशिष्टियां नहीं हैं तो सम्बद्ध व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय को लिखित अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर दे सकेगी और वह व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय, केन्द्रीय परिषद् द्वारा विनिर्दिष्ट त्रुटियों का, यदि कोई हों, परिशोधन करने के लिए स्वतंत्र होगा ;
(ख) उपधारा (8) में निर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, स्कीम पर विचार कर सकेगी और उसे केन्द्रीय सरकार को ऐसी अवधि के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार से निर्देश प्राप्त होने की तारीख से छह मास से अधिक न हो उस पर अपनी सिफारिशों सहित प्रस्तुत कर सकेगी ।
(5) केन्द्रीय सरकार उपधारा (4) के अधीन स्कीम और केन्द्रीय परिषद् की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् और जहां आवश्यक हो, सम्बद्ध व्यक्ति या महाविद्यालय से ऐसी विशिष्टियां अभिप्राप्त करने के पश्चात् तथा उपधारा (8) में निर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए स्कीम का या तो ऐसी शर्तों सहित, यदि कोई हों, जो वह आवश्यक समझे, अनुमोदन कर सकेगी या स्कीम का अननुमोदन कर सकेगी और ऐसा कोई अनुमोदन उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा होगा :
परंतु कोई स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा समबद्ध व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अननुमोदित नहीं की जाएगी :
परंतु यह और कि इस उपधारा की कोई बात, ऐसे किसी व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय को, जिसकी स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं की गई है, नई स्कीम प्रस्तुत करने से निवारित नहीं करेगी । इस धारा के उपबंध ऐसी स्कीम को उसी प्रकार लागू होंगे मानो उक्त स्कीम उपधारा (2) के अधीन पहली बार प्रस्तुत की गई हो ।
(6) जहां, उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार को स्कीम प्रस्तुत किए जाने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर, केन्द्रीय सरकार द्वारा, स्कीम प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय को आदेश संसूचित नहीं किया जाता है, वहां केन्द्रीय सरकार द्वारा इस स्कीम का अनुमोदन उसी रूप में किया गया समझा जाएगा जिसमें वह प्रस्तुत की गई थी और तद्नुसार उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा भी प्रदत्त की गई समझी जाएगी ।
(7) उपधारा (6) में विनिर्दिष्ट समय-सीमा की संगणना करते समय, सम्बद्ध व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा स्कीम प्रस्तुत करने, केन्द्रीय परिषद् द्वारा या केन्द्रीय सरकार द्वारा मांगी गई किन्हीं विशिष्टियों को प्रस्तुत करने में लिया गया समय अपवर्जित किया जाएगा ।
(8) केन्द्रीय परिषद्, उपधारा (4) के खंड (ख) के अधीन अपनी सिफारिशें करते समय और केन्द्रीय सरकार, उपधारा (5) के अधीन स्कीम का अनुमोदन करने वाला या अननुमोदन करने वाला कोई आदेश पारित करते समय, निम्नलिखित बातों का सम्यक् ध्यान रखेगी, अर्थात :-
(क) क्या प्रस्थापित चिकित्सा महाविद्यालय या विद्यमान चिकित्सा महाविद्यालय, जो अध्ययन या प्रशिक्षण का कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का इच्छुक है, धारा 22 के अधीन केन्द्रीय परिषद् द्वारा यथाविहित चिकित्सा शिक्षा के न्यूनतम मानक प्रस्थापित करने की स्थिति में होगा ;
(ख) क्या उस व्यक्ति के पास जो चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करना चाहता है या विद्यमान चिकित्सा महाविद्यालय के पास, जो अध्ययन या प्रशिक्षण का कोई नया उच्चतर पाठ्यक्रम प्रारंभ करना चाहता है अथवा अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि करना चाहता है, पर्याप्त वित्तीय साधन है ;
(ग) क्या चिकित्सा महाविद्यालय का उचित कार्यकरण अथवा अध्ययन या प्रशिक्षण के नए पाठ्यक्रम का संचालन अथवा बढ़ाई गई प्रवेश क्षमता की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, आवास, प्रशिक्षण, अस्पताल के संबंध में आवश्यक सुविधाओं का उपबंध किया गया है या स्कीम में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर किया जाएगा ;
(घ) क्या ऐसे विद्यार्थियों की संख्या को, जिनके ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय या अध्ययन या प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की संभावना है, या बढ़ाई गई प्रवेश क्षमता को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त अस्पताल सुविधाओं का उपबंध किया गया है या स्कीम में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर किया जाएगा ;
(ङ) क्या उन विद्यार्थियों को, जिनके ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय या अध्ययन या प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की संभावना है, मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता रखने वाले व्यक्तियों द्वारा समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कोई इंतजाम किया गया है या कोई कार्यक्रम तैयार किया गया है ;
(च) चिकित्सा महाविद्यालय में भारतीय आयुर्विज्ञान के व्यवसाय के क्षेत्र में जनशक्ति की अपेक्षा ; और
(छ) ऐसी कोई अन्य बातें, जो विहित की जाएं ।
(9) जहां, केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन किसी स्कीम का अनुमोदन या अननुमोदन करने के लिए कोई आदेश पारित करती है, वहां आदेश की एक प्रति सम्बद्ध व्यक्ति या महाविद्यालय को संसूचित की जाएगी ।
13ख. कतिपय दशाओं में चिकित्सा अर्हताओं की अमान्यता-(1) जहां कोई चिकित्सा महाविद्यालय धारा 13क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना स्थापित किया जाता है वहां ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय के किसी विद्यार्थी को अनुदत्त चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता नहीं मानी जाएगी ।
(2) जहां कोई चिकित्सा महाविद्यालय कोई नया उच्चतर अध्ययन या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, जिसके अंतर्गत अध्ययन या प्रशिक्षण का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी है, धारा 13क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना आरंभ करता है वहां ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय के किसी विद्यार्थी को ऐसे अध्ययन या प्रशिक्षण के आधार पर अनुदत्त चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता नहीं मानी जाएगी ।
(3) जहां कोई चिकित्सा महाविद्यालय किसी अध्ययन या प्रशिक्षण के किसी पाठ्यक्रम में अपनी प्रवेश क्षमता में धारा 13क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना वृद्धि करता है वहां अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि के आधार पर ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय के किसी विद्यार्थी को अनुदत्त चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता नहीं मानी जाएगी ।
13ग. कतिपय चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए अनुज्ञा लेने का समय-(1) यदि भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद् (संशोधन) अधिनियम, 2003 के प्रारंभ पर या उसके पूर्व किसी व्यक्ति ने किसी चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की है या किसी चिकित्सा महाविद्यालय ने अध्ययन या प्रशिक्षण का कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम आरंभ किया है या प्रवेश क्षमता में वृद्धि की है तो, यथास्थिति, ऐसा व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय, उक्त प्रारंभ से तीन वर्ष की अवधि के भीतर धारा 13क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा प्राप्त करेगा ।
(2) यदि, यथास्थिति, कोई व्यक्ति या चिकित्सा महाविद्यालय, उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा प्राप्त करने में असफल रहता है, तो धारा 13ख के उपबंध, यथासाध्य, ऐसे लागू होंगे मानो धारा 13क के अधीन केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा नामंजूर कर दी गई है ।]
अध्याय 3
चिकित्सीय अर्हताओं को मान्यता
14. भारत में की कुछ चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा अनुदत्त चिकित्सीय अर्हताओं को मान्यता-(1) भारत में के किसी विश्वविद्यालय, बोर्ड या अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा अनुदत्त चिकित्सीय अर्हताएं, जो द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं होंगी ।
(2) भारत में का कोई विश्वविद्यालय, बोर्ड या अन्य चिकित्सीय संस्था जो ऐसी चिकित्सीय अर्हता अनुदत्त करती हो जो द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित नहीं है, ऐसी किसी अर्हता को मान्यता प्राप्त कराने के लिए केन्द्रीय सरकार से आवेदन कर सकेगी, और केन्द्रीय सरकार, केन्द्रीय परिषद् से परामर्श करने के पश्चात्, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा द्वितीय अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकेगी कि ऐसी अर्हता उसमें सम्मिलित हो जाए, और ऐसी कोई अधिसूचना यह निदेश भी दे सकेगी कि द्वितीय अनुसूची के अन्तिम स्तम्भ में ऐसी चिकित्सीय अर्हता के संबंध में ऐसी प्रविष्टि की जाए जो यह घोषित करे कि वह मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता तब ही होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् अनुदत्त की जाए ।
15. कुछ ऐसी चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा, जिनकी अर्हताएं द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित नहीं हैं ; अनुदत्त चिकित्सीय अर्हताओं को मान्यता-तृतीय अनुसूची में सम्मिलित अर्हताएं जो अगस्त, 1947 के पन्द्रहवें दिन के पूर्व, भारत के किसी नागरिक को किसी ऐसे क्षेत्र में की किसी चिकित्सीय संस्था द्वारा अनुदत्त की गई हो जो उस तारीख के पूर्व, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट, 1935 में यथा परिभाषित इंडिया" के भीतर समाविष्ट था, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं होंगी ।
16. उन देशों में की, जिनके साथ व्यतिकर की स्कीम है, चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा अनुदत्त चिकित्सीय अर्हताओं को मान्यता-(1) भारत के बाहर की चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा अनुदत्त चिकित्सीय अर्हताएं जो चतुर्थ अनुसूची में सम्मिलित हैं इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं होंगी ।
(2) केन्द्रीय परिषद् भारत के बाहर के किसी राज्य या देश में के किसी प्राधिकारी के साथ जिसे उस राज्य या देश की विधि द्वारा, भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों का रजिस्टर करने का कार्य सौंपा गया हो भारतीय चिकित्सा में चिकित्सीय अर्हताओं की मान्यता के लिए व्यतिकर की स्कीम तय करने के लिए बातचीत कर सकेगी, तथा ऐसी किसी स्कीम के अनुसरण में, केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा चतुर्थ अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकेगी, कि उसमें ऐसी चिकित्सीय अर्हता सम्मिलित हो जाए जिसके लिए केन्द्रीय परिषद् ने यह विनिश्चय किया हो कि मान्यताप्राप्त होनी चाहिए तथा ऐसी कोई अधिसूचना यह निदेश भी दे सकेगी कि चतुर्थ अनुसूची के अन्तिम स्तम्भ में ऐसी चिकित्सीय अर्हता के संबंध में ऐसी प्रविष्टि की जाए जो यह घोषित करे कि वह मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता तब ही होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् अनुदत्त की जाए ।
17. द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ अनुसूचियों में सम्मिलित अर्हताएं रखने वाले व्यक्तियों के नामावलिगत किए जाने के अधिकार-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए यह है कि द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ अनुसूची में सम्मिलित कोई चिकित्सा अर्हता किसी भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत किए जाने के लिए पर्याप्त अर्हता होगी ।
(2) धारा 28 में यह उपबंधित के सिवाय, ऐसे भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों से, जो मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता रखता हो और भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर या केन्द्रीय रजिस्टर में नामावलिगत हो, भिन्न कोई व्यक्ति -
(क) सरकार में या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी द्वारा घोषित किसी संस्था में वैद्य, सिद्ध, हकीम [या काय चिकित्सकट के रूप में कोई पद या किसी भी नाम से ज्ञात कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा ;
(ख) किसी राज्य में भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय नहीं करेगा ;
(ग) चिकित्सीय या योग्यता का प्रमाणपत्र या कोई अन्य प्रमाणपत्र, जो सम्यक् रूप से अर्हित चिकित्सा व्यवसायियों द्वारा हस्ताक्षरित और अधिप्रमाणित किए जाने के लिए किसी विधि द्वारा अपेक्षित हो, हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित करने का हकदार न होगा ;
(घ) किसी मृत्यु-समीक्षा पर या किसी न्यायालय में भारतीय चिकित्सा से संबंधित किसी विषय पर, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 45 के अधीन विशेषज्ञ के रूप में साक्ष्य देने का हकदार न होगा ।
(3) उपधारा (2) की किसी बात का,-
(क) भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत भारतीय चिकित्सा के व्यवसायी के किसी राज्य में भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय करने के अधिकार पर केवल इस आधार पर प्रभाव नहीं पडे़गा कि इस अधिनियम के प्रारम्भ पर वह मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता नहीं रखता ;
(ख) भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत किसी भारतीय चिकित्सा के व्यवसायी को किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों के रजिस्ट्रीकरण संबंधी विधि द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त, विशेषाधिकारों पर (जिनके अन्तर्गत किसी पद्धति को चिकित्सा का व्यवसाय करने का अधिकार भी है) प्रभाव नहीं पडे़गा ;
(ग) किसी ऐसे राज्य में, जिसमें इस अधिनियम के प्रारम्भ पर भारतीय चिकित्सा का राज्य रजिस्टर नहीं रखा जाता है, भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय करने के किसी व्यक्ति के अधिकार पर प्रभाव नहीं पडे़गा यदि ऐसे प्रारम्भ पर वह पांच से अन्यून वर्षों तक भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय करता रहा हो ;
(घ) भारतीय चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) द्वारा या उसके अधीन, ऐसे व्यक्तियों को जो उक्त अधिनियम की अनुसूचियों में सम्मिलित अर्हताएं रखते हों, प्रदत्त अधिकारों पर [जिनके अन्तर्गत उक्त अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (च) में यथा परिभाषित चिकित्सा-व्यवसाय करने का अधिकार भी हैट प्रभाव नहीं पडे़गा ।
(4) कोई व्यक्ति जो उपधारा (2) के किसी उपबंध के उल्लंघन में कार्य करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
18. पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं के सम्बन्ध में जानकारी की अपेक्षा करने की शक्ति-भारत में का प्रत्येक विश्वविद्यालय, बोर्ड या अन्य चिकित्सीय संस्था, जो मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता अनुदत्त करती हो, ऐसी अर्हता अभिप्राप्त करने के लिए पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रमों और दी जाने वाली परीक्षाओं के बारे में, उस आयु के बारे में जिस पर ऐसे पाठ्यक्रमों का पूरा किया जाना और परीक्षाओं का दिया जाना अपेक्षित हो और ऐसी अर्हता प्रदत्त की जाए और सामान्यतया ऐसी अर्हता अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षाओं के बारे में ऐसी जानकारी देगी जिसकी केन्द्रीय परिषद्, समय-समय पर, अपेक्षा करे ।
19. परीक्षाओं में निरीक्षक-(1) केन्द्रीय परिषद्, किसी चिकित्सीय महाविद्यालय, अस्पताल या अन्य संस्था के, जहां भारतीय चिकित्सा की शिक्षा दी जाती हो, निरीक्षण के लिए, या किसी विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में, उस विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था द्वारा अनुदत्त की जाने वाली चिकित्सीय अर्हताओं को मान्यता के लिए केन्द्रीय सरकार से सिफारिश करने के प्रयोजन से उपस्थित होने के लिए उतनी संख्या में चिकित्सीय निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी जितनी वह अपेक्षित समझे ।
(2) चिकित्सीय निरीक्षक किसी प्रशिक्षण या परीक्षा के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे किन्तु शिक्षा के स्तरों की, जिनके अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण तथा भारतीय चिकित्सा की शिक्षा देने के लिए विहित अन्य सुविधाएं भी हैं, पर्याप्तता पर, अथवा प्रत्येक परीक्षा की, जिसमें वे उपस्थित रहें, पर्याप्तता पर केन्द्रीय परिषद् को रिपोर्ट देंगे ।
(3) केन्द्रीय परिषद् ऐसी किसी रिपोर्ट की प्रति संबंधित विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था को भेजेगी और उस पर उस विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था के टिप्पणों सहित एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भी भेजेगी ।
20. परीक्षाओं में परिदर्शक-(1) केन्द्रीय परिषद् किसी चिकित्सीय महाविद्यालय, अस्पताल या अन्य संस्था के जहां भारतीय चिकित्सा की शिक्षा दी जाती है, निरीक्षण के लिए, अथवा मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता अनुदत्त करने के प्रयोजन के लिए किसी परीक्षा में उपस्थित होने के लिए उतनी संख्या में परिदर्शक नियुक्त कर सकेगी जितने वह अपेक्षित समझे ।
(2) कोई व्यक्ति, चाहे वह केन्द्रीय परिषद् का सदस्य हो या न हो, इस धारा के अधीन परिदर्शक के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा, किन्तु ऐसे व्यक्ति को जिसे किसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए धारा 19 के अधीन निरीक्षण के रूप में नियुक्त किया गया हो, उसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए परिदर्शक के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा ।
(3) परिदर्शक किसी परीक्षण या परीक्षा के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, किन्तु शिक्षा के स्तरों की, जिनके अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण तथा भारतीय चिकित्सा की शिक्षा देने के लिए विहित अन्य सुविधाएं भी हैं, पर्याप्तता पर अथवा प्रत्येक परीक्षा की जिसमें वे उपस्थित रहें, पर्याप्तता पर केन्द्रीय परिषद् के अध्यक्ष को रिपोर्ट देंगे ।
(4) परिदर्शक की रिपोर्ट, तब के सिवाय जब किसी विशिष्ट मामले में केन्द्रीय परिषद् का अध्यक्ष अन्यथा निदेश दे, गोपनीय मानी जाएगी :
परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार परिदर्शक की रिपोर्ट की प्रति की अपेक्षा करे, तो केन्द्रीय परिषद् उसे प्रस्तुत करेगी ।
21. मान्यता का वापस लिया जाना-(1) जब निरीक्षक या परिदर्शक की रिपोर्ट पर केन्द्रीय परिषद् को यह प्रतीत हो कि-
(क) किसी विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था में पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रम और दी जाने वाली परीक्षा अथवा उसके द्वारा ली गई परीक्षा में अभ्यर्थियों से अपेक्षित प्रवीणता ; अथवा
(ख) ऐसे विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था में या उस विश्वविद्यालय से संबद्ध किसी महाविद्यालय या अन्य संस्था में कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण तथा शिक्षण और प्रशिक्षण की अन्य सुविधाएं,
केन्द्रीय परिषद् द्वारा विहित स्तरों के अनुरूप नहीं हैं तब केन्द्रीय परिषद् उस आशय का अभ्यावेदन केन्द्रीय सरकार को करेगी ।
(2) ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार उस राज्य की सरकार को भेज सकेगी जिसमें वह विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था स्थित हो और वह राज्य सरकार उसे ऐसे टिप्पणों सहित जो वह करे उस विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था को, उस कालावधि की प्रज्ञापना सहित जिसके भीतर वह विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था राज्य सरकार को अपना स्पष्टीकरण दे सकेंगी, भेजेगी ।
(3) स्पष्टीकरण की प्राप्ति पर, या जहां नियत कालावधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण न दिया जाए वहां उस कालावधि के अवसान पर, राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार से अपनी सिफारिशें करेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार ऐसी अतिरिक्त जांच करने के पश्चात् यदि कोई हो, जो वह ठीक समझे, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि समुचित अनुसूची में उक्त चिकित्सीय अर्हता के संबंध में ऐसी प्रविष्टि की जाए जो यह घोषित करे कि, यथास्थिति, वह मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता तब ही होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व अनुदत्त की जाए अथवा यह कि यदि उक्त चिकित्सीय अर्हता किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विनिर्दिष्ट महाविद्यालय या संस्था के विद्यार्थियों को अनुदत्त की जाए, तो वह मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता तब ही होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व की जाए, या यह कि किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध विनिर्दिष्ट महाविद्यालय या संस्था के संबंध में उक्त चिकित्सीय अर्हता मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता तब ही होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् अनुदत्त की जाए ।
22. भारतीय चिकित्सा में शिक्षा के न्यूनतम स्तर-(1) केन्द्रीय परिषद्, भारत में के विश्वविद्यालयों, बोर्डों या चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताओं के अनुदत्त किए जाने के लिए अपेक्षित भारतीय चिकित्सा में शिक्षा के न्यूनतम स्तर विहित कर सकेगी ।
(2) प्ररूप, विनियमों और उनके सभी पश्चात्वर्ती संशोधनों की प्रतियां केन्द्रीय परिषद् द्वारा सभी राज्य सरकारों को दी जाएंगी और केन्द्रीय परिषद्, यथास्थिति, विनियमों या उनके किसी संशोधन को केन्द्रीय सरकार को मंजूरी के लिए भेजने के पूर्व, किसी राज्य की टीका-टिप्पणियों पर विचार करेगी जो यथापूर्वोक्त प्रतियों के दिए जाने से तीन मास के भीतर प्राप्त हों ।
(3) धारा 9 की उपधारा (1) के खण्ड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट प्रत्येक समिति समय-समय पर विनियमों की प्रभावकारिता पर केन्द्रीय परिषद् को रिपोर्ट देगी और उनमें ऐसे संशोधनों के लिए, जो वह ठीक समझे केन्द्रीय परिषद् से सिफारिश कर सकेगी ।
अध्याय 4
भारतीय चिकित्सा का केन्द्रीय रजिस्टर
23. भारतीय चिकित्सा का केन्द्रीय रजिस्टर-(1) केन्द्रीय परिषद् भारतीय चिकित्सा की पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए पृथक् भागों में चिकित्सा-व्यवसायियों का एक रजिस्टर रखवाएगी जो भारतीय चिकित्सा का केन्द्रीय रजिस्टर कहलाएगा और जिसमें उन सभी व्यक्तियों के नाम होंगे जो तत्समय किसी भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत हों और जो मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताओं में से कोई भी रखते हों ।
(2) केन्द्रीय परिषद् के रजिस्टर का यह कर्तव्य होगा कि वह इस अधिनियम के और केन्द्रीय परिषद् द्वारा किए गए किन्हीं आदेशों के उपबन्धों के अनुसार भारतीय चिकित्सा का केन्द्रीय रजिस्टर रखे और बनाए रखे और समय-समय पर रजिस्टर का पुनरीक्षण करे और उसे भारत के राजपत्र में, और अन्य ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, प्रकाशित करे ।
(3) ऐसा रजिस्टर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) के अर्थ में लोक दस्तावेज समझा जाएगा और भारत के राजपत्र में प्रकाशित किसी प्रति द्वारा साबित किया जा सकेगा ।
24. भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर की प्रतियों का प्रदाय-प्रत्येक बोर्ड इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, और तत्पश्चात् प्रत्येक वर्ष के अप्रैल के प्रथम दिन के पश्चात् केन्द्रीय परिषद् को भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर को तीन मुद्रित प्रतियों का प्रदाय करेगा, तथा प्रत्येक बोर्ड भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में समय-समय पर किए गए सभी परिवर्धनों और अन्य संशोधनों की इत्तिला केन्द्रीय परिषद् को अविलंब देगा ।
25. भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण-केन्द्रीय परिषद् का रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में किसी व्यक्ति के रजिस्ट्रीकरण की रिपोर्ट की प्राप्ति पर अथवा विहित रीति से किसी व्यक्ति द्वारा किए गए आवेदन पर उसका नाम भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में प्रविष्ट कर सकेगा, परन्तु यह तब जब रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाए कि सम्बन्धित व्यक्ति ऐसे रजिस्ट्रीकरण के लिए इस अधिनियम के अधीन पात्र है ।
26. वृत्तिक आचरण-(1) केन्द्रीय परिषद्, भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों के लिए वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के स्तर और आचार संहिता विहित कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय परिषद् द्वारा उपधारा (1) के अधीन बनाए गए विनियम यह विनिर्दिष्ट कर सकेंगे कि उनका कौन-सा अतिक्रमण वृत्ति के संबंध में गर्हित आचरण अर्थात् वृत्तिक अवचार गठित करता है, और किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा उपबन्ध प्रभावी होगा ।
27. भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर से नामों का हटाया जाना-(1) यदि भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत किसी व्यक्ति का नाम उस रजिस्टर में से, किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में हटा दिया जाए तो केन्द्रीय परिषद् भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर से ऐसे व्यक्ति का नाम हटाए जाने का निदेश देगी ।
(2) जहां भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में किसी व्यक्ति का नाम उसके पास अपेक्षित चिकित्सीय अर्हताएं न होने के आधार से भिन्न किसी आधार पर हटा दिया जाए अथवा जहां अपना नाम भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में पुनः प्रविष्ट किए जाने के लिए उक्त व्यक्ति का आवेदन नामंजूर कर दिया जाए वहां विहित रीति से और ऐसी शर्तों के अध्यधीन जो विहित की जाएं, और जिनके अन्तर्गत फीस के संदाय की शर्त भी है, केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा, जिसका विनिश्चय जो केन्द्रीय परिषद् से परामर्श करने के पश्चात् दिया जाएगा, राज्य सरकार तथा भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर की तैयारी से संबंधित प्राधिकारियों पर बाध्यकर होगा ।
28. चिकित्सा व्यवसाय के लिए अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण-यदि भारतीय चिकित्सा में मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं अभिप्राप्त करने के लिए पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रम के अन्तर्गत किसी व्यक्ति के अर्हता परीक्षा में उत्तीर्ण होने के पश्चात् तथा उसे अर्हता प्रदत्त किए जाने के पूर्व किसी कालावधि का प्रशिक्षण भी आता हो तो उस व्यक्ति द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर संबंधित बोर्ड उसे भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण अनुदत्त करेगा जिससे वह व्यक्ति पूर्वोक्त कालावधि पर्यन्त किसी अनुमोदित संस्था में ऐसे प्रशिक्षण के प्रयोजन के लिए हो, न कि किसी अन्य प्रयोजन के लिए, भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय कर सके ।
29. उन व्यक्तियों के विशेषाधिकार जो भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में नामावलिगत हैं-उन शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें कुछ मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं रखने वाले व्यक्तियों द्वारा भारतीय चिकित्सा के व्यवसाय के संबंध में इस अधिनियम में दिया गया है, प्रत्येक व्यक्ति, जिसका नाम भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में तत्समय हो अपनी अर्हताओं के अनुसार भारत के किसी भाग में, भारतीय चिकित्सा का व्यवसाय करने का तथा कोई व्यय, ओषधियों या अन्य साधित्रों की बाबत प्रभार या कोई फीस, जिसका वह हकदार हो, ऐसे व्यवसाय की बाबत विधि के सम्यक् अनुक्रम में वसूल करने का हकदार होगा ।
30. अतिरिक्त अर्हताओं का रजिस्ट्रीकरण-(1) यदि कोई व्यक्ति जिसका नाम भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में हो, किसी चिकित्सा में प्रवीणता के लिए कोई ऐसी उपाधि, डिप्लोमा या अन्य अर्हता अभिप्राप्त कर ले, जो मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता हो तो वह विहित रीति से इस निमित्त किए गए आवेदन पर, इस बात का हकदार होगा कि वह ऐसी अन्य उपाधि, डिप्लोमा या अन्य अर्हता कथित करने वाली प्रविष्टि भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में अपने नाम के संबंध में या तो पूर्वतर की गई किसी प्रविष्टि के स्थान पर या उसके अतिरिक्त करा ले ।
(2) भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में ऐसे किसी व्यक्ति की बाबत प्रविष्टियां भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में किए गए परिवर्तनों के अनुसार परिवर्तित की जाएंगी ।
31. भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों द्वारा निवास तथा चिकित्सा-व्यवसाय के स्थान से परिवर्तन का सूचित किया जाना-भारतीय चिकित्सा के केन्द्रीय रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक व्यक्ति अपने निवास या चिकित्सा-व्यवसाय के स्थान का अन्तरण केन्द्रीय परिषद् को और संबंधित बोर्ड को, ऐसे अन्तरण के नब्बे दिन के भीतर, सूचित करेगा और ऐसा करने में असफल होने पर केन्द्रीय परिषद् या बोर्ड के सदस्यों के निर्वाचन में भाग लेने का उसका अधिकार, केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा, या तो स्थायी रूप में या ऐसी कालावधि के लिए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, समपहृत किया जा सकेगा ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
32. केन्द्रीय परिषद् द्वारा दी जाने वाली जानकारी और उसका प्रकाशन-(1) केन्द्रीय परिषद् केन्द्रीय सरकार को ऐसी रिपोर्ट, अपने कार्यवृत्तों की प्रतिलिपियां, अपने लेखाओं की संक्षिप्तियां और अन्य जानकारी देगा, जिनकी वह सरकार अपेक्षा करे ।
(2) केन्द्रीय सरकार, इस धारा या धारा 20 के अधीन अपने को दी गई कोई रिपोर्ट, प्रतिलिपि, संक्षिप्ति या जानकारी ऐसी रीति से प्रकाशित कर सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।
33. जांच आयोग-(1) जब कभी केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत कराया जाए कि केन्द्रीय परिषद् इस अधिनियम के उपबन्धों में से किसी का अनुपालन नहीं कर रही है तब केन्द्रीय सरकार उस शिकायत की विशिष्टियां एक जांच आयोग को निर्देशित कर सकेगी, जो तीन व्यक्तियों से मिल कर बनेगा, जिसमें से दो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे (जिनमें से एक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होगा) तथा एक केन्द्रीय परिषद् द्वारा नियुक्त किया जाएगा और वह आयोग संक्षिप्त रीति से जांच करने के लिए तथा शिकायत में आरोपित बातों की सत्यता के बारे में केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट देने के लिए अग्रसर होगा और यदि आयोग द्वारा यह पाया जाए कि व्यतिक्रम या अनुचित कार्रवाई का कोई आरोप सिद्ध कर दिया गया है तो आयोग उन उपचारों की (यदि कोई हों) सिफारिश करेगा जो उसकी राय में आवश्यक हों ।
(2) केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय परिषद् से अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस प्रकार सिफारिश किए गए उपचारों को ऐसे समय के भीतर अपनाए जो आयोग की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए वह ठीक समझे और यदि केन्द्रीय परिषद् ऐसी किसी अपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहे तो केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय परिषद् के विनियमों को संशोधित कर सकेगी या ऐसा उपबन्ध या आदेश कर सकेगी या ऐसा अन्य कदम उठा सकेगी जो आयोग की सिफारिश को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हो ।
(3) जांच आयोग को अपने द्वारा की जाने वाली जांच के प्रयोजन के लिए शपथ दिलाने, साक्षियों को हाजिर कराने तथा दस्तावेजों को पेश कराने की शक्ति तथा अन्य ऐसी आवश्यक शक्तियां होंगी जैसी सिविल न्यायालय द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन प्रयुक्त की जाती हैं ।
34. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए सरकार, केन्द्रीय परिषद् या बोर्ड या उसकी किसी समिति अथवा सरकार या केन्द्रीय परिषद् या पूर्वोक्त बोर्ड के किसी अधिकारी या सेवक के विरुद्ध नहीं होगी ।
35. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
[(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।]
36. विनियम बनाने की शक्ति- [(1)] केन्द्रीय परिषद् साधारण तौर पर इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए विनियम केन्द्रीय सरकार की [पूर्व मंजूरी से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगीट और इस शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :-
(क) केन्द्रीय परिषद् के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के निर्वाचन की रीति ;
(ख) केन्द्रीय परिषद् की सम्पत्ति का प्रबन्ध तथा उसके लेखाओं का रखा जाना और संपरीक्षा ;
(ग) केन्द्रीय परिषद् के सदस्यों का त्यागपत्र ;
(घ) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य ;
(ङ) केन्द्रीय परिषद् और उसकी समितियों के अधिवेशन बुलाना और करना, वे समय जब और वे स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जाने हैं, उनमें कार्य किया जाना और गणपूर्ति गठित करने के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या ;
(च) धारा 9 या धारा 10 के अधीन गठित समितियों के कृत्य ;
(छ) रजिस्ट्रार की तथा केन्द्रीय परिषद् के अन्य अधिकारियों और सेवकों की पदावधि तथा उनकी शक्तियां और कर्तव्य ;
[(छक) धारा 13क की उपधारा (3) के अधीन स्कीम का प्ररूप, ऐसी स्कीम में दी जाने वाली विशिष्टियां, वह रीति जिसमें स्कीम प्रस्तुत की जाएगी और स्कीम के साथ संदेय फीस ;
(छख) धारा 13क की उपधारा (8) के खंड (छ) के अधीन कोई अन्य बात ;ट
(ज) निरीक्षकों और परिदर्शकों की नियुक्तियां, शक्तियां, कर्तव्य और प्रक्रिया ;
(झ) किसी विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सीय संस्था में मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता के अनुदान के लिए अनुसरण किए जाने वाले अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम और उनकी कालावधि, परीक्षा के विषय और उनमें अभिप्राप्त की जाने वाली प्रवीणता के स्तर ;
(ञ) भारतीय चिकित्सा की शिक्षा के लिए कमर्चारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के स्तर ;
(ट) वृत्तिक परीक्षाओं का संचालन, परीक्षकों की अर्हताएं तथा ऐसी परीक्षाओं में प्रवेश की शर्तें ;
(ठ) भारतीय चिकित्सा के व्यवसायियों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के स्तर तथा आचार संहिता ;
(ड) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों में कथित की जाने वाली विशिष्टियां और अर्हताओं का उनमें दिया जाने वाला सबूत ;
(ढ) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अध्यधीन अपील धारा 27 के अधीन की जा सकेगी ;
(ण) इस अधिनियम के अधीन आवेदनों तथा अपीलों पर दी जाने वाली फीसें ; तथा
(त) कोई अन्य विषय जिसके लिए विनियमों द्वारा उपबन्ध इस अधिनियम के अधीन किया जा सकता है ।
[(2) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए प्रत्येक विनियम को बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।
प्रथम अनुसूची
[धारा 3 (1) (क) देखिए]
1. केन्द्रीय सरकार प्रत्येक राज्य में आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानी] चिकित्सा पद्धतियों में से प्रत्येक को केन्द्रीय परिषद् में आबंटित किए जाने वाली स्थानों की संख्या का अवधारण, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित आधार पर करेगी, अर्थात् :-
(क) जहां इन पद्धतियों में से किसी में भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों की संख्या 100 से अधिक हो किन्तु 10,000 से अधिक न हो -1 स्थान
(ख) जहां इन पद्धतियों में से किसी में भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों की संख्या 10,000 से अधिक हो किन्तु 20,000 से अधिक न हो -2 स्थान
(ग) जहां इन पद्धतियों में से किसी में भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों की संख्या 20,000 से अधिक हो किन्तु 30,000 से अधिक न हो -3 स्थान
(घ) जहां इन पद्धतियों में से किसी में भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों की संख्या 30,000 से अधिक हो किन्तु 40,000 से अधिक न हो -4 स्थान
(ङ) जहां इन पद्धतियों में से किसी में भारतीय चिकित्सा के राज्य रजिस्टर में नामावलिगत व्यक्तियों की संख्या 40,000 से अधिक हो -5 स्थान
2. केन्द्रीय परिषद् के लिए धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्वाचन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुर्वेद, सिद्ध [और यूनानी] चिकित्सा पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए केन्द्रीय परिषद् में आबंटित किए जाने वाले स्थानों की संख्या ऊपर पैरा 1 में दिए गए आधार पर आवधारित की जाएगी ।
द्वितीय अनुसूची
(धारा 14 देखिए)
भारत में के विश्वविद्यालयों, बोर्डों या चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा अनुदत्त भारतीय चिकित्सा में मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं
|
विश्वविद्यालय, बोर्ड या चिकित्सकीय संस्था का नाम |
मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं |
रजिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
टिप्पणियां |
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1 |
2 |
3 |
4 |
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भाग 1-आयुर्वेद और सिद्ध |
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आन्ध्र1. बोर्ड आफ इन्डियन मेडिसिन, हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश |
ग्रेज्युएट ऑफ दी कालेज ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
ग्रेज्युएट ऑफ दी कालेज ऑफ इन्टेग्रेटेड मेडिसिन
आयुर्वेद विशारद बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
जी०सी०ए०एम०
जी०सी०आई०एम०
ए०वी०बी०
बी०ए०एम० एण्ड एस० |
..
..
.. |
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2.आन्ध्र आयुर्वेद परिषद्, विजयवाड़ा (परीक्षा निकाय) |
वैद्यविद्वान |
.. |
.. |
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3.श्री वेंकटेश्वर आयुर्वेद कलाशाला, विजय-वाडा |
आयुर्वेदालंकार आयुर्वेद-कलानिधि डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसन
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डी०ए०एम |
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4.श्री रंगाचार्य राममोहन आयुर्वेदिक कालेज, गुण्टर, आन्ध्र प्रदेश |
आयुर्वेद प्रवीण |
.. |
.. |
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[4क. आंध्र विश्वविद्यालय, वाल्टेयर |
आयुर्वेद चिकित्सा और सर्जरी का स्नातक |
बी०ए०एम०एस० |
1976 से 1977 तक ] |
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[4ख. नागार्जुन विश्वविद्यालय, नागार्जुन नगर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1977 से आगे |
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4ग.ककाटिया विश्वविद्यालय, वारंगल |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1976 से आगे |
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4घ.उसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद |
बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी
डाक्टर आफ मेडिसिन (आयुर्वेद) |
बी०ए०एम०एस०
एम०डी० (आयुर्वेद) |
1976 से आगे
1974 से आगे]
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[4ङ. एस०वी० विश्वविद्यालय, तिरूपति
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आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और अन्य शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०ए०एम०एस० |
1988 से आगे]
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[4च.यूनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइंसिज, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एंड सर्जरी) आयुर्वेदिक वाचस्पति |
बी०ए०एम०एस०
एम०डी० (आयुर्वेद) |
1992 से आगे
1989 से आगे]
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आसाम |
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5.बोर्ड आफ आयुर्वेदिक मेडिसन, आसाम |
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी |
डी०ए०एम०एस०
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[5क.गोहाटी विश्वविद्यालय, गोहाटी |
बेचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी (आयुर्वेदाचार्य) |
बी०ए०एम०एस० |
[1979 से आगे] |
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बिहार |
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6.स्टेट फैक्ल्टी ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी मेडिसिन, पटना, बिहार |
ग्रेजुएट इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
जी०ए०एम०एस०
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1953 से आगे |
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7.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक स्कूल पटना, बिहार (भूतपूर्व) |
आयुर्वेदाचार्य |
.. |
.. |
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8.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कालेज, पटना, बिहार |
आयुर्वेदाचार्य |
.. |
.. |
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[9.कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा |
प्राणाचार्य
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एन्ड सर्जरी [आयुर्वेदाचार्य] [विद्या वरिधि |
[बी०ए०एम०एस०]
बी०ए०एम०एस०
पी०एच०डी० आयुर्वेद
|
1962 से आगे
1981 से आगे
1974 से 1988 तक] |
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|
[9क.बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर |
आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा में स्नातक
[आयुर्वेदाचार्य] बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
जी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1973 से 1981 तक]
1981 से आगे] |
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|
दिल्ली |
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10.आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बिया कालेज, दिल्ली |
आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरी भिषागाचार्य धन्वन्तरी वेद्यधातरी..
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.. .. .. |
1958 तक 1958 तक 1958 तक |
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11. आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, दिल्ली प्रशासन, दिल्ली
|
(बेचलर इन इण्डियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरी (डिप्लोमा इन इण्डियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
भिषागाचार्य धन्वन्तरी |
बी०आई०एम०एस०
डी०आई०एम०एस०
.. |
1958 से 1963 तक
1956 से 1960 तक
.. |
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|
12.अखिल भारतवर्षीय आयुर्वेद विद्यापीठ, दिल्ली |
आयुर्वेद विशारद आयुर्वेद भिषक वैद्याचार्य प्रजावैद्य परीक्षा वैद्य विशारद आयुर्वेदाचार्य [आयुर्वेदशास्त्री |
.. .. .. .. .. .. .. |
.. .. .. .. .. .. 1971 से आगे] |
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13.बनवारीलाल आयुर्वेदिक विद्यालय, दिल्ली |
वैद्यराज भिषागाचार्य आयुर्वेदाचार्य |
.. .. .. |
1958 तक 1958 तक 1958 तक
|
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14.आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पद्धति परीक्षा निकाय, दिल्ली |
(बैचलर इन इण्डियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरी [आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
[आयुर्वेदाचार्य (ओषधि और शल्य चिकित्सा में स्नातक) |
बी०आई०एम०एस०
.. बी०ए०एम०एस०
ए०बी०एम०एस० |
1963 से आगे
.. 1978]
1975 से 1978 तक]
|
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|
[14क. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली |
(बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1989 से आगे] |
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|
[14ख. सनातन धर्म प्रेम गिरि आयुर्वेदिक कालेज, आयुर्वेदाचार्य (लाहौर), दिल्ली |
आयुर्वेदाचार्य |
एम०ए०एम०एस० |
1951 से 1957 तक] |
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|
गुजरात |
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15.गुजरात विश्वविद्यालय |
बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
[1961 से 1968 तक] |
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16.भ० सि० विश्वविद्यालय, बड़ौदा |
आयुर्वेदिक-विशारद |
.. |
[1953 तक] |
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17.फैकल्टी आफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी सिस्टम आफ मेडिसिन, गुजरात |
ग्रेजुएट आफ दि फेकल्टी आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन |
जी०एफ०ए०एम० |
.. |
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18.कमेटी फार शुद्ध आयुर्वेदिक कोर्स, गुजरात, अहमदाबाद |
आयुर्वेद प्रवीण |
डी०एस०ए०सी० |
.. |
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19.बोर्ड आफ इण्डियन मेडिसन, सौराष्ट्र |
आयुर्वेद विशारद |
.. |
.. |
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20.पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग सेन्टर इन आयुर्वेद, जामनगर |
हायर प्रोफिशियेन्सी इन आयुर्वेद |
एच०पी०ए० |
.. |
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21.श्रावणमास दक्षिणा परीक्षा, समिति, बड़ौदा |
आयुर्वेदोत्तमा आयुर्वेद-मध्यमा |
.. .. |
.. .. |
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22.राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, बड़ौदा |
आयुर्वेद-विशारद |
.. |
.. |
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23.यू०पी० आयुर्वेद महाविद्यालय पाटन, (बड़ौदा-राज्य) |
गृहीत आयुर्वेदशास्त्र डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन गृहीत आयुर्वेद शास्त्र |
डी०ए०एम० एल०ए०एम० |
.. 1942 तक |
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24. गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर |
आयुर्वेदाचार्य
प्राणाचार्य
[डाक्टर आफ फलासाफी (आयुर्वेद)
[डाक्टर आफ मेडिसिन डाक्टर आफ लिट्रेचर (आयुर्वेद) डाक्टर आफ लिट्रेचर (आयुर्वेद) आयुर्वेदाचार्य |
बी०एस०ए०एम०
एम०एस०ए०एम०
पी०एच०डी०(आयुर्वेद)
एम०डी०(आयुर्वेद) डी०लिट (आयुर्वेद)
डी०लिट (आयुर्वेद)
बी०ए०एम०एस० |
[1968 से 1982 तक]
[जुलाई,1974 तक]
1977 से आगे]
1976 से आगे 1976 से आगे
1986 से आगे
1982 से आगे] |
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|
[हरियाणा |
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24क. कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र |
[(आयुर्वेदाचार्य)] (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1982 से आगे |
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24ख.महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक |
आयुर्वेदाचार्य [(आयुर्वेदिक मेडिसिन और सर्जरी का स्नातक)
[आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
जी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1977 से 1983 तक
1982 से आगे]
|
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|
[24खख. हरियाणा राज्य आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति संकाय, चण्डीगढ़आयुर्वेदाचार्य
|
(आयुर्वेदिक मेडिसिन एवं शल्य चिकित्सा स्नातक) |
जी०ए०एम०एस० |
1971 से 1976 तक] |
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हिमाचल प्रदेश |
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24ग.हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला |
आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक
[आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
जी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
[केवल 1986 तक परीक्षा उत्तीर्ण करके प्राप्त उपाधि]
[केवल 1986 तक परीक्षा उत्तीर्ण करके प्राप्त उपाधि] । [1986 से आगे] |
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जम्मू-कश्मीर |
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25.जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1968 से प्रदत्त
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केरल |
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26.केरल विश्वविद्यालय |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन [बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
डाक्टर आफ मेडिसिन (आयुर्वेद) |
बी०ए०एम०
डी०ए०एम० बी०ए०एम०एस०
एम०डी०(आयुर्वेद) |
[1957 से 1979 तक]
1962 तक 1979 से आगे
1976 से आगे |
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27.त्रिवांकुर-सरकार, कोचीन |
वैद्यकलानिधि |
.. |
.. |
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28. गवर्नमेंट आयुर्वेद कालेज, त्रिपुनीतुरा (केरल) |
शास्त्र-भूषण-आयुर्वेद |
.. |
.. |
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29.कोचीन सरकार |
वैद्यभूषणम् |
.. |
.. |
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30.त्रिवांकुर-कोचीन सरकार |
आयुर्वेद-भूषणम् |
.. |
.. |
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31.त्रिवांकुर सरकार |
नेत्र-वैद्य-विशारद वैद्यकलानिधि |
.. |
.. |
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32.केरल सरकार |
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसन |
डी०ए०एम० |
अब भी चालू है । |
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33.त्रिवांकुर सरकार |
वैद्य-शास्त्री मर्म वैद्य विशारद |
.. |
.. |
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|
34.केरलीय आयुर्वेद महापाठशाला, शीर्न्नपुर (केरल) |
वैद्यपादन |
.. |
.. |
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35.कोचीन सरकार |
विष-वैद्य प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र |
.. |
.. |
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36.माधव मेमोरियल आयुर्वेदिक कालेज, कन्नानोर केरल |
वैद्यविभूषणम् |
.. |
1963 तक |
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37.माधव आयुर्वेद कालेज, एरानाकुलम |
आयुर्वेदशास्त्री आयुर्वेद विद्वान |
डी०ए०एस० तक |
1953 से 1957 1957 तक |
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38.आयुर्वेदिक कालेज, कोट्टाकाल, केरल |
आर्य वैद्यन् |
.. |
.. |
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39.आर्युवैद्य पाठशाला, कोट्टाकाल |
आर्य वैद्य डिप्लोमा |
.. |
.. |
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40.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कालेज, त्रिपुनीतुरा |
आयुर्वेद-शास्त्र-भूषण |
.. |
.. |
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41.बोर्ड आफ पब्लिक एग्जामिनेशन्स, कोचीन |
आयुर्वेद विभूषणम् |
.. |
.. |
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42.त्रिवांकुर सरकार |
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन विष-वैद्य विशारद |
डी०आई०एम० |
.. |
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43.त्रिवांकुर सिद्ध वैद्यसंघम्, मुनीचरा |
सिद्ध औषध में डिप्लोमा या प्रमाणपत्र |
.. |
मई, 1947 |
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[43क-1.] कालीकट विश्वविद्यालय, कालीकट |
बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन |
बी०ए०एम० |
1977 से आगे] |
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|
[43क-2.] कालीकट विश्वविद्यालय, कालीकट |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1985 से आगे] |
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|
[43ख. महात्मा गांधी विश्वविद्यालय कोट्टायम |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1988 से 1996] |
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|
मध्य प्रदेश |
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|
44.जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर |
बैचलर आफ आयुर्वेदिक विद मार्डन मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[डाक्टर आफ मेडिसिन (आयुर्वेद) दोष धातूमल विज्ञान
डाक्टर आफ मेडिसिन (आयुर्वेद) (शरीर क्रिया विज्ञान) |
बी०ए०एम०एस०
एम०डी०(आयुर्वेद)
एम०डी०(आयुर्वेद)
|
1965 से आगे
1982 से 1987 तक
1985 से 1987 तक] |
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|
45.इन्दौर विश्वविद्यालय, इन्दौर |
बैचलर आफ आयुर्वेद मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
[1965 से 1982 तक] |
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|
[45क. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1983 से आगे |
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|
46.विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन |
बैचलर ऑफ आयुर्वेद विद माडर्न मेडिसिन एंड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1964 से आगे |
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|
47.रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर |
बैचलर ऑफ आयुर्वेद विद माडर्न मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[डाक्टर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसन
डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (आयुर्वेद)
आयुर्वेद वाचस्पति (क्षय चिकित्सा) |
बी०ए०एम०एस०
डी०ए०एम०
..
एम०डी० (आयुर्वेद) |
1965 से आगे
1977 से 1978 तक
1979 से 1981 तक
1982 से आगे] |
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|
48. बोर्ड ऑफ इण्डियन मेडिसिन, मध्य प्रदेश (मध्य भारत क्षेत्र), ग्वालियर |
भिषगाचार्य |
एल०आई०एम० |
1957 से आगे |
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|
49.महाकौशल आयुर्वेदिक, बोर्ड, जबलपुर |
भिषग्वर |
एल०ए०पी० |
.. |
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|
50.बोर्ड ऑफ इण्डियन मेडिसिन, मध्य प्रदेश (मध्य भारत क्षेत्र), ग्वालियर |
आयुर्वेद विज्ञानाचार्य |
ए०बी०एम०एस० |
1958 से आगे |
|||
|
51.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक विद्यालय, ग्वालियर (आयुर्वेदिक परीक्षा ग्वालियर राज्य) |
(i) वेद्यशास्त्री (ii) वैद्यवर (iii) हिन्दी वैद्य परीक्षा (iv) आयुर्वेद शास्त्री |
.. .. ..
.. |
1916 से आगे 1954 तक अब समाप्त
अब समाप्त |
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|
52.अष्टांग आयुर्वेद विद्यालय, उज्जैन |
वैद्यवाचस्पति |
एल०ए०एम० |
1-5-1956 तक |
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53.बोर्ड ऑफ इण्डियन मेडिसिन, ग्वालियर |
सहायक-वैद्य |
.. |
1954 से तत्पश्चात् समाप्त |
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[53क. मध्य प्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड, भोपाल |
लाइसेंशिएट आयुर्वेदिक प्रैक्टीशनर (भिषग्वर)
[आयुर्वेद विज्ञानाचार्य (आधुनिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सहित आयुर्वेद विज्ञानाचार्य)
भिषगाचार्य |
एल०ए०पी०
ए०वी०एम०एस०
एल०आई०एम० |
1971 से 1973 तक]
1969 से 1970 तक]
1971 से 1974 तक] |
|||
|
54.सागर विश्वविद्यालय, सागर |
[बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी] |
बी०ए०एम०एस० |
1964 से आगे] |
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|
[54क. अवदेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1975 से आगे |
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|
54ख.जबलपुर विश्वविद्यालय, जबलपुर |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1971 से आगे |
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|
[54ग. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर |
आयुर्वेदाचार्य बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1983 से आगे
|
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|
महाराष्ट्र |
||||||
|
55.नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
[आयुर्वेद वाचस्पति
अगतंत-व्यवहारयुर्वेद निष्णात |
बी०ए०एम०एस० (नागपुर)
बी०ए०एम०एस०
एम०डी०(आयुर्वेद)
डी०टी०एफ०एम० (आयुर्वेद) |
1964 से आगे
1980 से आगे]
1988 से आगे
1988 से आगे]
|
|||
|
[56.पूना विश्वविद्यालय, पुणे |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[बैचलर ऑफ सर्जरी एण्ड आयुर्वेदिक मेडिसिन
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस०
बी०एस०ए०एम०
बी०ए०एम०एस० |
1957 से 1976 तक
1976 से 1979 तक
1978 से आगे |
|||
|
57.विदर्भ बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी सिस्टम्स ऑफ मेडिसिन, महाराष्ट्र |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० विदर्भ
|
.. |
|||
|
58.फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी सिस्टम्स आफ मेडिसिन, महाराष्ट्र |
आयुर्वेद विशारद |
ए०वी०बी० नांदेड |
.. |
|||
|
59.कमेटी ऑफ शुद्ध आयुर्वेदिक कोर्स, महाराष्ट्र |
आयुर्वेद प्रवीण |
डी०एस०ए०सी० (मुंबई) |
.. |
|||
|
60.फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी सिस्टम्स आफ मेडिसिन, मुंबई |
ग्रेजुएट ऑफ दी फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
मेम्बर ऑफ फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
आयुर्वेदिक-विशारद
[बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[फैलो ऑफ दी फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन |
जी०एफ०ए०एम० (मुंबई)
एम०एफ०ए०एम० (महाराष्ट्र)
डी०ए०एस०एफ० (मुंबई) बी०ए०एम०एस० (महाराष्ट्र फेकल्टी)
एफ०एम०ए० |
..
..
..
1975 और उसके बाद से]
1984 तक] |
|||
|
61.तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पूना |
आयुर्विद्या विशारद आयुर्विद्या पारंगत
|
ए०बी०वी०(पूना) ए०बी०पी०(पूना)
|
1944 से पूर्व [1942 से 1980 तक]
|
|||
|
62.आर्यगंल महाविद्यालय, सातारा |
आयुर्वेद विशारद |
ए०वी०बी०(सातारा) |
1942 से पूर्व |
|||
|
63.आयुर्वेद महाविद्यालय, अहमदनगर |
आयुर्वेद-तीर्थ |
ए०टी० (अहमदनगर) |
1942 से पूर्व |
|||
|
[63क. शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[बैचलर ऑफ शुद्ध आयुर्वेदिक मेडिसिन]
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
[बी०ए०एम०एस०]
बी०एस०ए०एम०
बी०ए०एम०एस० |
[1975 से 1982 तक]
[1977 से 1982 तक]
1978 से आगे
|
|||
|
63ख.मराठावाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद |
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ शुद्ध आयुर्वेदिक मेडिसिन)
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
[बी०ए०एम०एस०]
बी०एस०ए०एम०
बी०ए०एम०एस० |
1971 से 1977 तक
1976 से 1979 तक
1980 से आगे |
|||
|
63ग.मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई |
आयुर्वेदाचार्य
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०एस०ए०एम०
बी०ए०एम०एस० |
1976 से 1983 तक
1980 से आगे] |
|||
|
[63घ. अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1989 से आगे] |
|||
|
[63ङ. उत्तर महाराष्ट्र विद्यापीठ, अलगांव |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1997 से आगे] |
|||
|
[कर्नाटकट |
||||||
|
64.बोर्ड ऑफ स्टडीज इन इंडियन मेडिसिन, मैसूर बंगलौर |
ग्रेजुएट कोर्स ऑफ इंडियन मैडिसिन |
जी०सी०आई०एम० |
1964 से आगे |
|||
|
65.बोर्ड ऑफ स्टडीज इन इंडियन मेडिसिन, मैसूर राज्य, बंगलौर |
आयुर्वेद-प्रवीण |
डी०एस०ए०सी० |
1958 से आगे |
|||
|
66.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी कालेज, मैसूर |
आयुर्वेद-विद्वत (लायसेंसिएट इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०ए०एम०एस० |
1938 से 1953 तक |
|||
|
67.बोर्ड ऑफ स्टडीज इन इंडियन मेडिसिन, मैसूर राज्य, बंगलौर |
आयुर्वेद-विद्वत (लायसेंसिएट इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०ए०एम०एस० |
1958 से आगे |
|||
|
68.सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन मैसूर |
आयुर्वेद-विद्वत (लायसेंसिएट इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०ए०एम०एम० |
1953 से 1958 तक |
|||
|
69.तारानाथ आयुर्वेद विद्यापीठ, बेलारी |
आयुर्वेद-विद्वत (लायसेंसिएट इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) वैद्य प्रवीण |
एल०ए०एम०एस०
..
|
1953 से 1958 तक
1952 तक |
|||
|
70.मैसूर महाराजा संस्कृत कालेज (आयुर्वेदिक सेक्शन), मैसूर की समिति या प्राधिकारी |
आयुर्वेद विद्वत |
.. |
1909 से पूर्व |
|||
|
71.गर्वनमेंट आयुर्वेदिक कालेज, मैसूर की समिति या प्राधिकारी |
आयुर्वेद-विद्वत |
.. |
1909 से 1928 तक |
|||
|
72.कर्नाटक आयुर्वेद विद्यापीठ, बेलगांव |
भिषग्वर |
.. |
.. |
|||
|
[78.बंगलौर विश्वविद्यालय, बंगलौर |
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति स्नातक
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक)
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०एस०एम०एस०
बी०ए०एम०एस०
बी०एस०ए०एम० |
1967 से आगे
1987 तक
1967 से आगे
|
|||
|
[78क. बंगलौर विश्वविद्यालय, बंगलौर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसन एण्ड सर्जरी)
आयुर्वेदाचार्य बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1987 तक
1987 से आगे] |
|||
|
79.कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ |
बैचलर ऑफ दि सिस्टम ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
[आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०एस०ए०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1969 से आगे
1984 से आगे |
|||
|
[79क. मंगलौर विश्वविद्यालय, मंगलौर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
[(1985 से आगे)] |
|||
|
[79ख. गुलबर्ग विश्वविद्यालय, गुलबर्ग |
(i) आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति स्नातक
(ii) आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०एस०ए०एम०
बी०ए०एम०एस० |
1973 से 1983 तक
1983 से आगे] |
|||
|
[79ग. कुवेम्पु विश्वविद्यालय, शंकरघाट |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1995 से 2002 तक] |
|||
|
उड़ीसा |
||||||
|
80.आयुर्वेदिक एग्जामिनेशन बोर्ड, उड़ीसा |
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
डी०ए०एम०एस० |
1953 से 1962 तक] |
|||
|
81.उड़ीसा एसोसिएशन ऑफ संस्कृत लर्निंग एण्ड कल्चर, पुरी |
आयुर्वेद-शास्त्री आयुर्वेदाचार्य |
.. .. |
1933 से 1933 से |
|||
|
82.स्टेट फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन, उड़ीसा |
आयुर्वेदाचार्य |
बी०ए०एम०एस० |
1969 से आगे |
|||
|
[82क. उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर |
बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
[आयुर्वेद वाचस्पति (काय चिकित्सा) |
बी०ए०एम०एस०
एम०डी०आयुर्वेद
|
1974 से आगे]
1981 से 1989तक]
|
|||
|
82ख.सम्बलपुर विश्वविद्यालय, बुर्ला, सम्बलपुर |
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी स्नातक) |
बी०ए०एम०एस०
|
1980 से आगे] |
|||
|
[82ग. बरहामपुर, विश्वविद्यालय, बरहामपुर |
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०ए०एम०एस०
|
1983 से आगे] |
|||
|
पंजाब |
|
|
|
|||
|
[83.पंजाब राज्य आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति संकाय, चण्डीगढ़ |
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा स्नातक)
[आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम ०एस० |
[1961 से 1992 तक]
1986-87 तक के बैच]
|
|||
|
[84.सनातन धर्म प्रेमगिरि आयुर्वेदिक कालेज (लाहौर) भिवानी/जींद/कुरूक्षेत्र |
आयुर्वेदाचार्य कविराज |
एम०ए०एम०एस० एल०ए०एम०एस० |
1957 तक 1950 से 1956 तक] |
|||
|
85.डी०ए०बी० मैनेजिंग कमेटी, अमृतसर/जालंधर |
वैद्य वाचस्पति |
वी०वी० |
.. |
|||
|
86.वैदिक एण्ड यूनानी तिब्बती कालेज, अमृतसर |
वैद्य कविराज वैद्यरत्न [वैद्य-शास्त्री |
वी०के० बी०आर० वी०एस० |
1947 तक |
|||
|
87.आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी तिब्बती कालेज, अमृतसर |
वाचस्पति |
वी० |
|
|||
|
88.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक विद्यालय (कालेज) पटियाला |
वैद्य वैद्य विशारद वैद्य शास्त्री आयुर्वेदाचार्य |
बी० बी० वी० वी०एस० ए०ए० |
1956 तक
[1912 से 1961 तक] |
|||
|
[88क. गुरूनानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1982 से आगे |
|||
|
88ख.पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सजरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1976 से आगे |
|||
|
[88ग. पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसन एंड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1992 से आगे |
|||
|
राजस्थान |
|
|
|
|||
|
89.राजस्थान आयुर्वेद विभागीय परीक्षा मंडल, अजमेर |
भिषग्वर भिषगाचार्य |
.. .. |
1962 से आगे 1962 से आगे |
|||
|
90.राजपूताना आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी तिब्बी कालेज, जयपुर |
भिषगाचार्य-शिरोमणि भिषगरत्न-शास्त्री |
.. .. |
1951 से आगे 1951 से आगे |
|||
|
91.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कालेज, जयपुर |
भिषक् भिषगाचार्य भिषग्वर |
.. .. .. |
.. .. .. |
|||
|
91क. राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
[आयुर्वेदाचार्य
आयुर्वेदबृहस्पति
आयुर्वेदाचार्य
[आयुर्वेद वाचस्पति |
बी०ए०एम०एस०
..
..
एम०डी० (आयु०)
|
1972 से 1980 तक
1972 से 1982 तक
1981 से 1984 तक]
1986 से आगे |
|||
|
92.महाराजा कालेज ऑफ आयुर्वेद, जयपुर |
शास्त्राचार्य |
.. |
.. |
|||
|
[92क. शिक्षा विभागीय परीक्षाएं, जयपुर राज्य, राजस्थान सरकार, जयपुर |
आयुर्वेद शास्त्री आयुर्वेदाचार्य
भिषग्वर भिषगाचार्य |
.. ..
.. .. |
1972 से 1968 1874 से 1970
1936 से 1968 1938 से 1970] |
|||
|
तमिलनाडु |
|
|
|
|||
|
93.गवर्नमेंट कालेज ऑफ इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसिन, |
मद्रास ग्रेजुएट ऑफ दि कालेज ऑफ इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडीसन
लायसेंसिएट इन इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसिन |
जी०सी०आई०एम०
एल०आई०एम०
|
1947 से 1960 तक
1924 से 1948 तक |
|||
|
94.मद्रास आयुर्वेदिक कालेज, मद्रास |
आयुर्वेद भूषण आयुर्वेद भिषग्वर |
.. .. |
.. .. |
|||
|
95.वेंकटरमण आयुर्वेदिक कालेज, मायलापुर, मद्रास |
वैद्य विशारद |
.. |
.. |
|||
|
96.बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स इन इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसिन, मद्रास |
हायर प्राफिशिएन्सी इन इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसिन |
एच०पी०आई०एम० |
1955 तक |
|||
|
97.मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास |
आयुर्वेद शिरोमणि
टबैचलर ऑफ इंडियन मेडिसिन (सिद्ध)
[आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक) |
..
बी०आई०एम०
बी०ए०एम०एस० |
[1930 से 1977 तक [1965 से 1970 तक]
1986 से आगे] |
|||
|
[98.मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, मदुरै |
बैचलर आफ इंडियन मेडिसिन (सिद्ध)
डाक्टर ऑफ मेडिसिन (सिद्ध)एम०डी०(सिद्ध)1975 से आगेबैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन
एण्ड सर्जरी |
बी०आई०एम०
बी०एस०एम०
एण्ड एस० |
1971 से आगे
1982 से आगे]
|
|||
|
[98क. भारथियार विश्वविद्यालय, कोयम्बतूर |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०ए०एम०एस० |
1989 से 1993 तक] |
|||
|
[98ख. डा०एम०जी०आर० मेडिकल यूनिवर्सिटी, चेन्नई (तमिलनाडु) |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी)
सिद्ध मुरुथवा अरिग्नर (बैचलर आफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी)
सिद्ध मुरुथवा पेरिवग्नर (डा०आफ मेडिसिन इन सिद्ध) |
बी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस०
एम०डी० (सिद्ध) |
1994 से आगे
1994 से आगे
1992 से आगे]
|
|||
|
उत्तर प्रदेश |
|
|
|
|||
|
99.बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी |
आयुर्वेद शास्त्राचार्य
आयुर्वेदाचार्य इन मेडिसिन एण्ड सर्जरी
आयुर्वेदाचार्य विद माडर्न मेडिसिन एण्ड सर्जरी
डाक्टर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
[डाक्टर ऑफ मेडिसिन (आयुर्वेद) |
..
ए०एम०एस०
ए०एम०एस०
डी०ए०वाई०एम०
ए०बी०एम०एस०
ए०डी०(आयुर्वेद) |
1925 से 1932तक 1934 से 1953 तक
1934 से 1953 तक
[1963 से 1977 तक]
1954 से 1967 तक
1977 से आगे] |
|||
|
100.लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ |
बैचलर ऑफ आयुर्वेद विद माडर्न मेडिसिन एण्ड सर्जरी
बैचलर ऑफ मेडिसिन एण्ड बैचलर ऑफ सर्जरी
[आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी
डाक्टर आफ मेडिसिन (आयुर्वेद) |
बी०ए०एम०एस०
बी०एम०बी०एस०
बी०एम०एम०एस०
एम०डी० (आयुर्वेद) |
1960 से आगे]
1955 से 1964 तक
1972 से आगे
1974 से आगे] |
|||
|
101.आयुर्वेदिक कालेज, गुरुकुल विश्वविद्यालय, कांगड़ी (हरद्वार) |
आयुर्वेदालंकार
आयुर्वेद वाचस्पति |
..
.. |
1926 से 1956 तक |
|||
|
102.गुरुकुल विद्यालय, वृन्दावन |
आयुर्वेद शिरोमणि
आयुर्वेद-भूषण |
|
1916 से 1967 तक
1944 से 1967 तक |
|||
|
103.ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज, हरद्वार |
आयुर्वेद विशारद वैद्य-विशारद वैद्य-शास्त्री आयुर्वेदाचार्य |
.. |
1945 तक |
|||
|
104.ललित हरि आयुर्वेदिक कालेज, पीलीभीत |
वैद्यभूषण वैद्यराज |
.. |
1944 तक |
|||
|
105.हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग |
वैद्य-विशारद
आयुर्वेद-रत्न |
..
.. |
1931 से 1967 तक 1931 से 1967 तक |
|||
|
106. ज्वालापुर महाविद्यालय, हरद्वार
|
आयुर्वेद भास्कर (केवल ज्वालापुर केन्द्र)
|
.. |
1950 से 1967 तक |
|||
|
107.बोर्ड ऑफ इण्डियन मेडिसिन, उत्तर प्रदेश लखनऊ |
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन एण्ड सर्जरी
बैचलर ऑफ इंडियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी
आयुर्वेदाचार्य, बैचलर ऑफ मेडिसिन एण्ड सर्जरी
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेद विद मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
डी०आई०एम०
डी०आई०एम०एस०
बी०आई०एम०एस०
ए०बी०एम०एस०
आयुर्वेदाचार्य (बी०ए०एम०एस०) |
1932 से 1944 तक
1943 से 1946 तक
1947 से 1956 तक
1957 से 1966 तक
1959 से आगे |
|||
|
[107क. कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर |
आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेद में स्नातक जिसमें आधुनिक आयुर्विज्ञान और सर्जरी शामिल हैं)
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस०
|
1972 से 1982 तक
1983 से आगे] |
|||
|
[107ख. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1970 से आगे] |
|||
|
पश्चिम बंगाल |
||||||
|
108.श्यामदास वैद्य शास्त्रपीठ परिषद्, कलकत्ता |
वैद्य-शास्त्री
|
.. |
1926 से 1940 तक |
|||
|
109.जैमिनी भूषण अष्टांग आयुर्वेद विद्यालय, कलकत्ता |
भिषगाचार्य (मास्टर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एम०ए०एम०एस० |
1930 से 1940 तक |
|||
|
110.जैमिनी भूषण अष्टांग आयुर्वेद विद्यालय, कलकत्ता |
भिषग्रत्न (लायसेन्सिएट इन आयुर्वेदिक मैडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०ए०एम०एस० |
1920 से 1940 तक |
|||
|
111.जनरल काउंसिल एण्ड स्टेट फेकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन, पश्चिमी बंगाल (अब पश्चिमी बंगाल आयुर्वेद परिषद्), कलकत्ता |
वैद्यशिरोमणि (मेम्बर ऑफ दि आयुर्वेदिक स्टेट फैकल्टी)
वैद्य शास्त्री
वैद्यभूषण (लायसेंसिएट इन आयुर्वेदिक स्टेट फैकल्टी)
आयुर्वेदतीर्थ (मेम्बर ऑफ दि आयुर्वेदिक स्टेट फेकल्टी)
आयुर्वेदतीर्थ (आयुर्वेदिक स्टेट फैकल्टी)
प्राणाचार्य
[आयुर्वेदिक चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा में डिप्लोमा)
आयुर्वेदिक चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा में स्नातक |
एम०ए०एस०एफ०
एल०ए०एस०एफ०
एम०ए०एस०एफ०
ए०एस०एफ०
एफ०ए०एस०एफ०
डी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1940 से 1949 तक
1940 से 1945 तक
1939 से 1950 तक
1947 से आगे
1946 से आगे
1979 से 1983 तक]
1979 से 1984 तक |
|||
|
112.आयुर्विद्या प्रतिष्ठान, कलकत्ता |
भिषग्रत्न
भिषगाचार्य |
..
.. |
1930 से 1940 तक 1930 से 1940 तक |
|||
|
113.गंगाचरण आयुर्वेद विद्यालय, कलकत्ता |
आयुर्वेद शास्त्री
आयुर्वेदाचार्य |
..
.. |
1928 से 1940 तक 1928 से 1940 तक |
|||
|
114.महाराजा कासिमबाजार गोबिन्दसुन्दरी आयुर्वेदिक कालेज, कलकत्ता |
आयुर्वेद शास्त्री (बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन)
आयुर्वेदाचार्य (मास्टर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसन)डाक्टर |
ए०एम०बी०
ए०एम०डी० |
1927 से 1940 तक
1927 से 1940 तक |
|||
|
115.विश्वनाथ आयुर्वेद महाविद्यालय, कलकत्ता |
भिषग्रत्न (डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) वैद्य शिरोमणि (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) (मास्टर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
डी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस०
एम०ए०एम०एस० |
1932 से 1940 तक
1932 से 1940 तक
1932 से 1940 तक |
|||
|
[116.कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता |
आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस० |
1982 के बाद |
|||
|
भाग 2-यूनानी |
||||||
|
आन्ध्र प्रदेश |
||||||
|
[1.श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय |
ताबिब-ए कामिल
[कमिले तिब्बो जराहत (यूनानी चिकित्सा और शल्य चिकित्सा स्नातक) |
बी०यू०एम०एस०
|
1957 से आगे
1985 से] |
|||
|
2.निजामिया तिब्बी कालेज, हैदराबाद |
बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी तबीबे-मुस्तनद ग्रेजुएट ऑफ दि कालेज ऑफ यूनानी मेडिसिन |
बी०यू०एम०एस०
जी०सी०यू०एम० |
..
.. |
|||
|
[2क.बोर्ड ऑफ इण्डियन मेडिसिन, हैदराबाद |
कामिल-ए-तिबओ-जराहत (बैचलर आफ मेडिसिन एवं यूनानी सर्जरी) |
बी०एम०यू०एस० |
1965 से 1975 तक |
|||
|
2ख.उसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद |
बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी
कामिले-तिबओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
डाक्टर आफ यूनानी मेडिसिन |
बी०यू०एम०एस०
बी०यू०एम०एस०
[एम०डी०(यूनानी) |
1976 से 1983 तक
1982 से आगे
1976 से आगे] |
|||
|
[2ग.यूनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइंसिज, विजयवाड़ा |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी)
माहिर-ए-तिब्ब |
बी०यू०एम०एस०
एम०डी०(यूनानी) |
1992 से आगे
1989 से आगे] |
|||
|
बिहार |
|
|
|
|||
|
3. स्टेट फैकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी मेडिसन, पटना (बिहार) |
ग्रेजुएट इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
जी०यू०एम०एस० |
1953 से आगे |
|||
|
[3क.बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर |
ग्रेजुएट इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी
कामिल-ए-तिब्ब ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
जी०यू०एम०एस०
बी०यू०एम०एस०
|
1973 के 1982 तक
1982 से आगे]
|
|||
|
दिल्ली |
||||||
|
4. आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, दिल्ली |
(बैचलर इन इण्डियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी) फाजिले-तिब्ब-व-जराहत
(डिप्लोमा इन इण्डियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी)
कामिले-तिब्ब-व-जराहत |
बी०आई०एम०एस०
डी०आई०एम०एस०
.. |
1958 से 1963 तक
1956 से 1963 तक
.. |
|||
|
5.आयुर्वेदिक व यूनानी तिब्बिया कालेज,दिल्ली |
फाजिले-तिब्ब-व-जराहत
कामिले तिब्ब-व-जराहत |
..
.. |
1958 तक
1958 तक |
|||
|
6.जामिया तिब्बिया, दिल्ली |
अक्मलूल हुक्मा |
.. |
1958 तक |
|||
|
7.आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सा पद्धति परीक्षा निकाय, दिल्ली |
फाजिले तिब्ब व जराहत (बैचलर इन इंडियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०आई०एम०एस० |
1963 से आगे |
|||
|
[7क.दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली |
बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०यू०एम०एस० |
1979 से आगे] |
|||
|
[7ख.जामिया हमदर्द (समकक्ष विश्वविद्यालय), नई दिल्ली |
कामिल-ए-तिब-ए-जराहत(बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी |
बी०यू०एम०एस० |
[1996 से आगे] |
|||
|
जम्मू-कश्मीर |
|
|
|
|||
|
8.जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय |
बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०यू०एम०एस० |
1966 से आगे |
|||
|
[8क.कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर |
बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०यू०एम०एस० |
1969 से आगे |
|||
|
मध्यप्रदेश |
|
|
|
|||
|
9.आसिफिया तिब्बिया कालेज, भोपाल |
हकीम कामिल |
बी०यू०एम०एस० |
|
|||
|
[9क.सागर विश्वविद्यालय, सागर |
यूनानी आयुर्विज्ञान तथा शल्य चिकित्सा का स्नातक |
बी०यू०एम०एस० |
1973 से आगे |
|||
|
[9ख.महाकौशल आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, जबलपुर |
यूनानी आयुर्विज्ञान तथा शल्य चिकित्सा का स्नातक |
बी०यू०एम०एस० |
1966 से 1970 तक |
|||
|
9ग.मध्य प्रदेश आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकितसा पद्धति तथा प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड, भोपाल |
यूनानी आयुर्विज्ञान तथा शल्य चिकित्सा का स्नातक |
बी०यू०एम०एस० |
1971 से 1974 तक] |
|||
|
[9घ.डा० हरिसिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर |
यूनानी आयुर्विज्ञान तथा शल्य चिकित्सा का स्नातक |
बी०यू०एम०एस० |
1983 से आगे] |
|||
|
[9ङ.देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर |
कामिले-ए-तिब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1996 से आगे] |
|||
|
महाराष्ट्र |
||||||
|
10.फैकल्टी आफ आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी सिस्टम्स आफ मेडिसिन, महाराष्ट्र |
माहिरे-तिब्ब-व-जराहत्
|
डी०यू०एस०एफ० (मुंबई) |
|
|||
|
11. बोर्ड आफ एग्जामिनर्स इन यूनानी |
माहिरे-तिब्ब-व-जराहत् |
एम०टी०जे० |
1942 से 1943 तक
|
|||
|
[11क. महाराष्ट्रा फैकल्टी आफ आयुर्वेदिक एंड यूनानी सिस्टम्स आफ मेडिसिन, बम्बई |
इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
डी०यू०एम०एस० |
1973 से आगे] |
|||
|
[11ख. बम्बई विश्वविद्यालय, बम्बई |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ जराहत् (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1984 से आगे] |
|||
|
[11ग. पूना विश्वविद्यालय, पुणे |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ जराहत् (यूनानी आयुवैदिक तथा शल्य का स्नातक) |
बी०यू०एम०एस० |
1988 से आगे] |
|||
|
कर्नाटक |
||||||
|
12.बोर्ड आफ स्टडीज इन इंडियन मेडिसन, मैसूर, बंगलौर |
तबीबे-हाजिक (लाइसेन्सिएट इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०यू०एम०एस० |
1958 से आगे |
|||
|
13.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी कालेज (कालेज आफ इण्डियन मेडिसन), मैसूर |
तबीबे-हाजिक (लाइसेन्सिएट इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०यू०एम०एस० |
1928 से 1953 तक |
|||
|
14.सेन्ट्रल बोर्ड आफ इंडियन मेडिसन मैसूर, बैगलोर |
तबीबे-हाजिक (लाइसेन्सिएट इन यूनानी मेडिकल मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
एल०यू०एम०एस० |
1953 से 1958 तक |
|||
|
15.गवर्नमेंट आयुर्वेदिक स्कूल, मैसूर |
.. |
यू०एम०एस० |
.. |
|||
|
[15क. बंगलौर विश्वविद्यालय, बंगलौर |
बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
बी०यू०एम०एस० |
1977 से आगे |
|||
|
तमिलनाडु |
|
|
|
|||
|
16.गवर्नमेंट कालेज आफ इंडियन इंडिजिनस-इंटग्रेटेड मेडिसन, मद्रास |
लायसेन्सिएट एन इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसन
ग्रेजुएट आफ दि कालेज आफ इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसिन |
जी०सी०आई०एम०
एल०आई०एम० |
..
.. |
|||
|
17.बोर्ड आफ एग्जामिनर्स इन इंडियन/इंडिजिनस/इंटेग्रेटेड मेडिसन |
हायर प्राफिशिएंसी इन इंडियन-इंडिजिनस इंटेग्रेटेड मेडिसिन |
एच०पी०आई०एम |
.. |
|||
|
[17क. मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1979 से आगे |
|||
|
[17ख. डा० एम० जी० आर० मेडीकल यूनिवर्सिटी, चेन्नई |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1994 से आगे |
|||
|
पंजाब |
||||||
|
[18.भूपिन्दर तिब्बीमाकर्ता कालेज, पटियाला |
हाजिक-उल-ओ-जराहत
हुक्मा-माहिर-ई-तिब्ब
तकीब-ए-अकमल |
एच०यू०एच०
एम०टी०जे०
टी०ए० |
1927 से 1950
1927 से 1950
1936 से 1950 |
|||
|
19. आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी तिब्बी कालेज, अमृतसर वैदिक एण्ड यूनानी तिब्बी कालेज, अमृतसर |
कामिलुल-तिब्बी फाजिलुल-तिब्बी हम्दोदुल-हक्मा [जबादत-तुल-अतीबा] |
के०यू०टी० एफ०यू०टी एच०डी०एच० |
1947 तक
1947 तक
|
|||
|
राजस्थान |
|
|
|
|||
|
20.राजपूताना आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी तिब्ब कालेज, जयपुर |
[अमदतुल-हुक्मा तबीब-फाजिल |
.. .. |
1930 से 1980 1930 से 1981 |
|||
|
[20क. भारतीय चिकित्सा बोर्ड, राजस्थान,जयपुर |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत् (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1981 से आगे] |
|||
|
[20ख. राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
कामिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०यू०एम०एस० |
1989 से और आगे] |
|||
|
उत्तर प्रदेश |
|
|
|
|||
|
21.मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ |
डिप्लोमा इन इंडियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी
डिप्लोमा इन यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी
बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी
बैचलर आफ यूनानी तिब्ब एण्ड सर्जरी
[डाक्टर आफ यूनानी मेडिसिन]
आधुनिक आयुर्विज्ञान तथा शल्य
विज्ञान के सथा यूनानी आयुर्विज्ञान का स्नातक
[कामिल-ए तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडीसन एण्ड सर्जरी) |
डी०आई०एम०एस०
डी०यू०एम०एस०
बी०यू०एम०एस०
बी०यू०टी०एस०
डी०यू०एम०
एम०डी० (यूनानी)
बी०यू०एम०एस०
बी०यू०एम०एम० |
1927 से 1943 तक
1944 से 1946 तक
1953 से आगे
1947 से 1952 तक
1974 से 1977 तक
1988 से आगे]
1972 से 1983 तक]
1972 से आगे] |
|||
|
22.बोर्ड आफ इंडियन मेडिसिन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन एण्ड सर्जरी
बैचलर आफ इंडियन मेडिसिन एण्ड सर्जरी
फाजिलुतिब्ब (बैचलर आफ मेडिसिन सर्जरी) |
डी०आई०एम०
डी०आई०एम०एस०
बी०आई०एम०एस०
एफ०एम०बी०एस०
|
1932 से 1944 तक
1943 से 1946 तक
1947 से 1956 तक
1957 से आगे
|
|||
|
[22क. कानुपर विश्वविद्यालय, कानपुर |
फाजिल-ए-तिब्ब-ओ-जराहत (यूनानी में स्नातक जिसमें आधुनिक आयुर्विज्ञान और सर्जरी शामिल है)
कामिल ए-तिब्ब-ओ-जराहत (बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एण्ड सर्जरी) |
बी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस० |
1972 से 1982 तक
1983 से आगे] |
|||
|
[23.अरबी और फारसी परीक्षाओं का बोर्ड, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद |
फाजिल-ए-तिब्ब |
|
1936 से 1982 तक
|
|||
|
24.दारूम-उलम, देवबन्द, उत्तर प्रदेश |
फाजिल-उत-तिब्ब |
डी०यू०एम० |
1964 से 1984 तक] |
|||
|
[25.जमियातुल-नकबा यूनानी मेडिकल स्कूल, इलाहाबाद |
मातामिदुत-तिब्बवाल-जराहत |
एम०यू०एम०एस० |
1908 से 1942 तक] |
|||
टिप्पणी :-भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद् अधिनियम, 1970 (1970 का 48) की द्वितीय अनुसूची में बाद में निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं :-
1. अधिसूचना सं० का०आ० 4068, तारीख 30 नवम्बर, 1979
2. अधिसूचना सं० का०आ० 2635, तारीख 18 सितम्बर, 1980
3. अधिसूचना सं० का०आ० 2313, तारीख 20 अगस्त, 1981
4. अधिसूचना सं० का०आ०2314, तारीख 22 अगस्त, 1981
5. अधिसूचना सं० का०आ० 137, तारीख 24 दिसम्बर, 1981
6. अधिसूचना सं० का०आ० 638, तारीख 25 जनवरी, 1982
7. अधिसूचना सं० का०आ० 661, तारीख 2 फरवरी, 1982
8. अधिसूचना सं० का०आ० 973, तारीख 20 फरवरी, 1982
9. अधिसूचना सं० का०आ० 354 (अ), तारीख 6 मई, 1983
10. अधिसूचना सं० का०आ० 3550, तारीख 5 सितम्बर, 1983
11. अधिसूचना सं० का०आ० 804 (अ), तारीख 11 नवम्बर, 1983
12. अधिसूचना सं० का०आ० 462 (अ), तारीख 23 जून, 1984
13. अधिसूचना सं० का०आ० 1911, तारीख 17 अप्रैल, 1985
14. अधिसूचना सं० का०आ० 2745, तारीख 29 मई, 1985
15. अधिसूचना सं० का०आ० 3404, तारीख 5 जुलाई, 1985
16. अधिसूचना सं० का०आ० 4057, तारीख 14 अगस्त, 1985
17. अधिसूचना सं० का०आ० 5603, तारीख 2 दिसम्बर, 1985
18. अधिसूचना सं० का०आ० 5671, तारीख 5 दिसम्बर, 1985
19. अधिसूचना सं० का०आ० 832, तारीख 17 फरवरी, 1986
20. अधिसूचना सं० का०आ० 1832, तारीख 16 अप्रैल, 1986
21. अधिसूचना सं० का०आ० 627, तारीख 2 फरवरी, 1987
22. अधिसूचना सं० का०आ० 760, तारीख 25 फरवरी, 1987
23. अधिसूचना सं० का०आ० 1030, तारीख 30 मार्च, 1987
24. अधिसूचना सं० का०आ० 1946, तारीख 9 जुलाई, 1987
25. अधिसूचना सं० का०आ० 3186, तारीख 30 अक्तूबर, 1987
26. अधिसूचना सं० का०आ० 1697, तारीख 15 अप्रैल, 1988
27. अधिसूचना सं० का०आ० 1504, तारीख 22 अप्रैल, 1988
28. अधिसूचना सं० का०आ० 1040, तारीख 6 अप्रैल, 1989
29. अधिसूचना सं० का०आ० 1910, तारीख 21 जुलाई, 1989
30. अधिसूचना सं० का०आ० 2177, तारीख 14 अगस्त, 1989
31. अधिसूचना सं० का०आ० 2594, तारीख 21 सितम्बर, 1989
32. अधिसूचना सं० का०आ० 969 (अ), तारीख 29 नवम्बर, 1989
33. अधिसूचना सं० का०आ० 2552, तारीख 22 अगस्त, 1990
34. अधिसूचना सं० का०आ० 3246, तारीख 31 अक्तूबर, 1990
35. अधिसूचना सं० का०आ० 2669, तारीख 29 अगस्त, 1991
36. अधिसूचना सं० का०आ० 630, तारीख 17 जनवरी, 1992
37. अधिसूचना सं० का०आ० 1435, तारीख 7 मई, 1992
38. अधिसूचना सं० का०आ० 3110, तारीख 11 अक्तूबर, 1994
39. अधिसूचना सं० का०आ० 3375, तारीख 18 अक्तूबर, 1996
40. अधिसूचना सं० का०आ० 923 (अ), तारीख 29 दिसम्बर, 1997
41. अधिसूचना सं० का०आ० 518, तारीख 17 फरवरी, 1998
42. अधिसूचना सं० का०आ० 170 (अ), तारीख 6 मार्च, 1998
43. अधिसूचना सं० का०आ० 1792, तारीख 25 जून, 1998
44. अधिसूचना सं० का०आ० 1793, तारीख 28 अगस्त, 1998
45. अधिसूचना सं० का०आ० 876 (अ), तारीख 5 अक्तूबर, 1998
46. अधिसूचना सं० का०आ० 1020 (अ), तारीख 1 दिसम्बर, 1998
47. अधिसूचना सं० का०आ० 214, तारीख 9 जनवरी, 1997
48. अधिसूचना सं० का०आ० 116 (अ), तारीख 17 फरवरी, 1999
49. अधिसूचना सं० का०आ० 117 (अ), तारीख 17 फरवरी, 1999
50. अधिसूचना सं० का०आ० 303 (अ), तारीख 6 मई, 1999
51. अधिसूचना सं० का०आ० 403 (अ), तारीख 23 मई, 1999
52. अधिसूचना सं० का०आ० 1888 (अ), तारीख 16 जुलाई, 1997
53. अधिसूचना सं० का०आ० 820 (अ), तारीख 12 सितम्बर, 2000
54. अधिसूचना सं० का०आ० 1008 (अ), तारीख 9 नवम्बर, 2000
तृतीय अनुसूची
(धारा 15 देखिए)
गवर्नमेंट आफ इण्डिया ऐक्ट, 1935 में यथापरिभाषित इण्डिया में समाविष्ट क्षेत्रों में की कुछ चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा 15 अगस्त, 1947 से पूर्व अनुदत्त अर्हताएं :
|
क्र०स० |
विश्वविद्यालय बोर्ड या चिकित्सीय संस्था का नाम |
मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं |
रजिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
टिप्पणियां |
|
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
|
भाग 1- आयुर्वेद और सिद्ध |
||||
|
1. |
दयानन्द आयुर्वेदिक कालेज, लाहौर |
वैद्य वाचस्पति वैद्य कविराज |
.. .. |
1947 से पूर्व 1947 से पूर्व |
|
2. |
सनातन धर्म प्रेमगिरी आयुर्वेदिक कालेज, लाहौर |
वैद्य शास्त्री श्री आयुर्वेदाचार्य श्री वैद्य कविराज
|
.. .. .. |
1947 से पूर्व 1947 से पूर्व 1947 से पूर्व |
|
3. |
मनमोहन चतुष्पति, ढाका |
आयुर्वेद शास्त्री आयुर्वेद रत्न |
.. |
1920 से 1940 |
|
भाग 2-यूनानी |
||||
|
1. |
दि इस्लामिया कालेज, लाहौर |
हकीमे-हाजिक जब्दतुल-हुक्मा |
.. .. |
.. |
|
2. |
तिब्बिया कालेज, लाहौर |
हाजिकल-ह कमा माहिर तिब्ब-व-जराहत् हाकिमे-हाजिक |
एच०यू०एम० एम०टी०जे० एच०एच० |
1947 तक 1947 तक 1947 तक
|
चतुर्थ अनुसूची
(धारा 16 देखिए)
जिन देशों के साथ व्यतिकर की स्कीम है, उनमें की चिकित्सीय संस्थाओं द्वारा अनुदत्त अर्हताएं
|
विश्वविद्यालय बोर्ड या चिकित्सीय संस्था का नाम |
मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हताएं |
रजिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
टिप्पणियां |
|
1 |
2 |
3 |
4 |
|
आयुर्वेद और सिद्ध |
|||
|
गवर्नमेंट कालेज आफ इंडिजिनस सिस्टम्स आफ मेडिसन, श्रीलंका |
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन एण्ड सर्जरी |
डी०आई०एम०एस० |
.. |
|
[गवर्नमेंट कालेज आफ इंडिजिनस मेडिनिस कोलम्बो, श्रीलंका |
डिप्लोमा इन इंडिजिनस मेडिसिन एण्ड सर्जरी (आयुर्वेद सिद्ध यूनानी)
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी (आयुर्वेद सिद्ध यूनानी) |
डी०आई०एम०एस०
डी०ए०एम०एस० |
1960 तक
1961 से 1976 तक |
|
[इंस्टीट्यूट आफ इंडिजिनस मेडिसिन, यूनिवर्सिटी आफ कोलम्बो, श्रीलंका |
डिप्लोमा इन आयुर्वेद मेडिसिन एण्ड सर्जरी (आयुर्वेद यूनानी)
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी (सिद्ध)
बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी
[बैचलर आफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी |
डी०ए०एम०एस०
डी०ए०एम०एस०
बी०ए०एम०एस०
बी०यू०एम०एस०
|
1977 से 1987 तक]
1977 से 1984 तक]
1991 से आगे]
1991 से आगे] |
|
[यूनिवर्सिटी आफ जाफना, श्रीलंका |
डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी (सिद्ध)
[बैचलर आफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी |
डी०ए०एम०एस०
बी०एम०एस०एस० |
1984 से 1987 तक]
1989 से] |
______

