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तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 ( Tobacco Board Act, 1975 )


 

तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975

(1975 का अधिनियम संख्यांक 4)

[19 मार्च, 1975]

तम्बाकू उद्योग का संघ के नियंत्रण के

अधीन विकास करने के वास्ते

उपबन्ध करने के लिए

 अधिनियम

                भारत गणराज्य के छब्बीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है । 

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे :

परन्तु इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए और विभिन्न राज्यों या उनके विभिन्न भागों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

2. संघ द्वारा नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-इसके द्वारा घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि तम्बाकू उद्योग को संघ अपने नियंत्रण के अधीन ले ले ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित तम्बाकू बोर्ड अभिप्रेत है; 

(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है; 

(ग) संसाधन" का वही अर्थ होगा जो केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) में है तथा उसके सभी व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों का अर्थ तदनुकूल किया जाएगा ; 

(घ) व्यौहारी" से तम्बाकू का व्यौहारी अभिप्रेत है; 

(ङ) कार्यपालक निदेशक" से धारा 6 के अधीन नियुक्त कार्यपालक निदेशक अभिप्रेत है ;

(च) निर्यात" और आयात" से भूमि, समुद्र या वायु मार्ग द्वारा क्रमशः भारत से ले जाना या भारत में लाना अभिप्रेत है;  

(छ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है; 

(ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(झ) रजिस्ट्रीकृत" से, रजिस्ट्रीकृत उगाने वाला" अभिव्यक्ति के सिवाय, इस अधिनियम के अध्याय 3 तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रजिस्ट्रीकृत अभिप्रेत है;

(ञ) रजिस्ट्रीकृत उगाने वाला" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने वर्जीनिया तम्बाकू उगाने के लिए धारा 10 के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अभिप्राप्त किया है । 

अध्याय 2

तम्बाकू बोर्ड

4. बोर्ड की स्थापना और उसका गठन-(1) उस तारीख से जिसे, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा जो तम्बाकू बोर्ड कहलाएगा ।

(2) यह बोर्ड पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे स्थावर और जंगम, दोनों प्रकार की, सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा । 

 [(3) बोर्ड का मुख्यालय आन्ध्र प्रदेश राज्य में गुन्टूर में होगा और बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, भारत में या भारत के बाहर अन्य स्थानों पर कार्यालय या अभिकरण स्थापित कर सकेगा ।]

(4) बोर्ड में निम्निलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-

(क) एक अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा; 

(ख) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा; 

(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले 1[आठ] सदस्य, जो क्रमशः निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करेंगे :-

(i) कृषि से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार का मंत्रालय;

(ii) वाणिज्य से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार का मंत्रालय;

(iii) वित्त से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार का मंत्रालय;

(iv) औद्योगिक विकास से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार का मंत्रालय;

(v) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्;

(vi) आन्ध्र प्रदेश सरकार;  । । ।

 [(viक) गुजरात सरकार; और]

(vii)  कर्नाटक सरकार;

(घ) 1[आन्ध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक राज्यों से भिन्न] तम्बाकू उगाने वाले राज्यों की सरकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा वर्णक्रमानुसार बारी-बारी से नियुक्त किए जाने वाले दो सदस्य; 

(ङ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले  [दस से अनधिक सदस्य,] जो तम्बाकू उगाने वालों, तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों के व्यौहारियों या निर्यातकर्ताओं (जिनके अन्तर्गत पैकर भी हैं), तम्बाकू उत्पादों के विनिर्माताओं में से तथा ऐसे व्यक्तियों में से होंगे जो केन्द्रीय सरकार की राय में तम्बाकू विपणन या कृषि अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ हैं : 

 [परन्तु तम्बाकू उगाने वालों में से इस खण्ड के अधीन नियुक्त सदस्यों की संख्या छह से अधिक नहीं होगी ;]

5[(च) भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग का कृषि विपणन सलाहकार, पदेन; 

(छ) कार्यपालक निदेशक, पदेन ।]

5[(4क) यह घोषित किया जाता है कि बोर्ड के सदस्य का पद उसके धारक को संसद् के किसी सदन का सदस्य चुने जाने से या होने से निरर्हित नहीं करेगा ।]

(5) बोर्ड अपने सदस्यों में से एक उपाध्यक्ष निर्वाचित करेगा, जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।

(6) सदस्यों की पदावधि और सदस्यों के स्थानों में रिक्तियों को भरने की रीति तथा सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी विहित की जाए ।

(7) 4[केन्द्रीय सरकार के किसी ऐसे अधिकारी को] (जो बोर्ड का सदस्य न हो) जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त किया जाता है, बोर्ड की बैठकों में उपस्थित होने तथा उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा । 

(8) बोर्ड ऐसी रीति में और ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, अपने साथ किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को सहयोजित कर सकेगा जिनकी सहायता या सलाह वह इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी का अनुपालन करने में लेना चाहे तथा इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को उन प्रयोजनों से सुसंगत बोर्ड की चर्चाओं में भाग लेने का अधिकार होगा जिनके लिए वह सहयोजित किया गया है किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा । 

(9) बोर्ड या उसके द्वारा धारा 7 के अधीन नियुक्त किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि- 

(क) बोर्ड या ऐसी समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या 

(ख) बोर्ड के या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति को नियुक्त करने में कोई त्रुटि हुई है; या 

(ग) बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता हुई है जिसका मामले के गुणागुणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । 

5. अध्यक्ष का वेतन और भत्ते तथा अन्य सेवा की शर्तें-अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्ते का तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि तथा अन्य मामलों के सम्बन्ध में सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा जैसी समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाएं । 

6. बोर्ड के अधिकारी तथा अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार एक कार्यपालक निदेशक नियुक्त करेगी जो अध्यक्ष के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जिन्हें विहित किया जाए या जिन्हें अध्यक्ष द्वारा उसको प्रत्यायोजित किया जाए ।

(2) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का एक सचिव नियुक्त करेगी जो अध्यक्ष के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जिन्हें विहित किया जाए अथवा जिन्हें अध्यक्ष द्वारा उसको प्रत्यायोजित किया जाए ।

(3) कार्यपालक निदेशक तथा सचिव ऐसे वेतन और भत्तों के तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और अन्य मामलों के बारे में सेवा की ऐसी शर्तों के हकदार होंगे जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत किया जाए ।

(4) ऐसे नियन्त्रण, निर्बन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए (जिनके अन्तर्गत तम्बाकू निर्यात संवर्धन परिषद् के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए शर्तें भी उस दशा में हैं जिसमें कि उक्त परिषद् का परिसमापन किया जाए), जिन्हें विहित किया जाए, बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जो उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों । 

(5) अध्यक्ष, कार्यपालक निदेशक, सचिव और बोर्ड के अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से सम्बन्ध न रखने वाले किसी काम का जिम्मा केन्द्रीय सरकार की इजाजत के बिना नहीं लेंगे ।

7. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा जैसी इस अधिनियम के अधीन दक्षतापूर्वक उसके कर्तव्यों के निर्वहन और कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हों ।

(2) बोर्ड को उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी समिति के सदस्यों के रूप में इतने व्यक्तियों को, जो बोर्ड के सदस्य न हों, सहयुक्त करने की शक्ति होगी जितने वह ठीक समझे तथा इस प्रकार सहयुक्त व्यक्तियों को समिति की बैठकों में उपस्थित होने तथा उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु मत देने का अधिकार नहीं होगा । 

8. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का कर्तव्य होगा कि वह केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन तम्बाकू उद्योग के विकास का संवर्धन ऐसे उपायों से करे जिन्हें वह ठीक समझे ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसमें निर्दिष्ट उपाय निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे,-

 [(क) निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए, वर्जीनिया तम्बाकू के उत्पादन और संसाधन को विनियमित करना, अर्थात् :-

(i) भारत में और विदेश में वर्जीनिया तम्बाकू की मांग; 

(ii) वर्जीनिया तम्बाकू उगाने के लिए भूमि की उपयुक्तता; 

(iii) देश के भिन्न-भिन्न प्रदेशों में, जहां वर्जीनिया तम्बाकू उगाया जाता है, मृदा की विशिष्टताओं और कृषि जलवायु संबंधी बातों में, विभेद और उन प्रदेशों में उत्पादित वर्जीनिया तम्बाकू की क्वालिटी और मात्रा पर उनका प्रभाव; 

(iv) भिन्न-भिन्न प्रकार के वर्जीनिया तम्बाकू की विपणनीयता; 

(v) फसलों के चक्रानुक्रम की आवश्यकता; और 

(vi) वर्जीनिया तम्बाकू उगाने वालों की भूधृति का प्रकार क्या वह उसके स्वामित्व में है या पट्टे पर;]

(ख) भारत और विदेशों, दोनों स्थानों में, वर्जीनिया तम्बाकू की मण्डी पर लगातार नजर रखना और यह सुनिश्चित करना कि उगाने वालों को उसके लिए उचित और लाभकारी कीमत मिलती है और इस वस्तु की कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव नहीं होता; 

(ग) भारतीय वर्जीनिया तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों के लिए भारत के बाहर विद्यमान मण्डियों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना तथा नई मण्डियों का विकास करना, और भारत के बाहर इस वस्तु की मांग के अनुरूप विपणन युक्ति का विकास करना जिसमें सीमित ब्रांड नामों के अधीन सामूहिक विपणन भी है; 

 [(गग) बोर्ड द्वारा, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, रजिस्ट्रीकृत उगाने वालों या संसाधकों द्वारा वर्जीनिया तम्बाकू के विक्रय के लिए नीलामी मंच की स्थापना और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, बोर्ड द्वारा स्थापित या उसमें रजिस्ट्रीकृत नीलामी मंचों पर नीलामकर्ता के रूप में कार्य करना;]

(घ) केन्द्रीय सरकार को ऐसी न्यूनतम कीमतों की सिफारिशें करना जो वर्जीनिया तम्बाकू के निर्यात के प्रयोजनों के लिए नियत की जा सकती हैं जिससे निर्यातकर्ताओं में अवांछनीय होड़ न होने पाए; 

(ङ) उगाने वालों, विनिर्माताओं और व्यौहारियों तथा राष्ट्र के हितों का सम्यक् ध्यान रखते हुए वर्जीनिया तम्बाकू के भारत में विपणन के सम्बन्ध में तथा वर्जीनिया तम्बाकू के निर्यात की अन्य बातों के बारे में विनियमन करना; 

(च) वर्जीनिया तम्बाकू के उगाने वालों, व्यौहारियों तथा निर्यातकर्ताओं (जिनके अन्तर्गत पैकर भी हैं) तथा वर्जीनिया तम्बाकू उत्पादों के विनिर्माताओं और वर्जीनिया तम्बाकू तथा उसके उत्पादों से सम्बन्धित अन्य व्यक्तियों के लिए उपयोगी जानकारी का प्रचार करना;

(छ) उगाने वालों से उस दशा में वर्जीनिया तम्बाकू खरीदना जिसमें वैसा करना उगाने वालों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक या समीचीन समझा जाता है और जैसे तथा जब ठीक समझा जाए उसका भारत में या भारत के बाहर व्ययन करना; 

(ज) उगाने वालों के स्तर पर तम्बाकू के श्रेणीकरण को सम्प्रवर्तित करना; 

(झ) तम्बाकू उद्योग की उन्नति के लिए वैज्ञानिक, प्रौद्योगिक और आर्थिक अनुसंधान का कार्य प्रायोजित करना, उसमें सहायता करना, उसे समन्वित करना या उसे प्रोत्साहित करना;

(ञ) ऐसे अन्य विषय जो विहित किए जाएं । 

(3) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट विषयों को प्राथमिकता देने की शर्त के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपाय, वर्जीनिया तम्बाकू से भिन्न तम्बाकू के लिए भी, उपधारा (2) के खण्ड (ग) से लेकर (छ) तक में विनिर्दिष्ट सभी या किसी बात के बारे में भी उपबन्ध कर सकेंगे और इस प्रयोजन के लिए उन खण्डों में वर्जीनिया तम्बाकू के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ किया जाएगा कि उसके अन्तर्गत वर्जीनिया तम्बाकू से भिन्न तम्बाकू के प्रति भी निर्देश हैं । 

(4) इस धारा के अधीन बोर्ड अपने कृत्यों का पालन ऐसे नियमों के अनुसार और अधीन रहते हुए करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं और ऐसे नियम विशिष्टतया यह सुनिश्चित करने के लिए उपबन्ध कर सकेंगे कि बोर्ड, संघ के अभिकरणों, संस्थाओं और प्राधिकरणों से, जो तम्बाकू उद्योग से सम्बन्धित हों (जिसके अन्तर्गत तम्बाकू का उगाना भी है), गहरा सम्पर्क रखते हुए कार्य करता है और एक ही काम को दुबारा करने से बचाता है । 

9. बोर्ड का विघटन-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तथा उसमें विनिर्दिष्ट किए जाने वाले कारणों से निदेश दे सकेगी कि बोर्ड उस तारीख से और उतनी अवधि के लिए, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटित कर दिया जाएगा :

परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना निकालने से पूर्व केन्द्रीय सरकार प्रस्थापित विघटन के खिलाफ अभ्यावेदन करने के लिए बोर्ड को उचित अवसर प्रदान करेगी और यदि बोर्ड द्वारा कोई अभ्यावेदन किया गया है तो उस पर विचार करेगी ।

(2) जब बोर्ड उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन विघटित कर दिया जाता है तब,-

(क) सभी सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, विघटन की तारीख से ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे; 

(ख) विघटन की अवधि के दौरान बोर्ड की सभी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिसे या जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे; 

(ग) बोर्ड में निहित सब निधियां और अन्य सम्पत्ति विघटन की अवधि के दौरान केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी; और 

(घ) ज्यों ही विघटन की अवधि समाप्त हो जाती है त्यों ही बोर्ड इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार पुनर्गठित किया जाएगा । 

अध्याय 3

वर्जीनिया तम्बाकू के उत्पादन और व्ययन का विनियमन

10. वर्जीनिया तम्बाकू के उगाने वालों का रजिस्ट्रीकरण-(1) कोई भी व्यक्ति वर्जीनिया तम्बाकू को इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार बोर्ड से अभिप्राप्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की शर्तों के अधीन और अनुसार ही उगाएगा, अन्यथा नहीं ।

(2) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र देने या इन्कार करने में बोर्ड भारत और विदेशों में वर्जीनिया तम्बाकू के लिए मांग, और जिस भूमि के सम्बन्ध में प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया है उसकी उपयुक्तता और ऐसी अन्य बातों का ध्यान रखेगा जो वर्जीनिया तम्बाकू उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विहित की जाएं । 

(3) इस धारा के अनुसरण में दिया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र उतनी अवधि के लिए विधिमान्य रहेगा जितनी विहित की जाए ।

(4) ऐसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के लिए प्रत्येक आवदेन के साथ (उस भूमि के, जिसके सम्बन्ध में आवेदन किया गया है, 0.4 हैक्टेयर के लिए एक रुपए से अनधिक) उतनी फीस होगी जितनी विहित की जाए ।

 [10क. वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए वर्जीनिया तम्बाकू की पौध उगाने वालों का रजिस्ट्रीकरण-(1) कोई भी व्यक्ति वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए वर्जीनिया तम्बाकू की पौध को तब तक नहीं उगाएगा जब तक वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार अपने आपको बोर्ड के पास नर्सरी उगाने वाले के रूप में रजिस्टर नहीं करा लेता है ।

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा की कोई बात किसी रजिस्ट्रीकृत उगाने वाले द्वारा स्वयं अपने उपयोग के लिए किसी वर्जीनिया तम्बाकू की पौध उगाने को लागू नहीं होगी ।

(2) कोई रजिस्ट्रीकृत नर्सरी उगाने वाला अपने द्वारा उगाए गए किसी वर्जीनिया तम्बाकू की पौध को किसी रजिस्ट्रीकृत उगाने वाले से भिन्न किसी व्यक्ति को विक्रय नहीं करेगा या विक्रय नहीं कराएगा ।]

 11. वर्जीनिया तम्बाकू के संसाधकों का रजिस्ट्रीकरण-रजिस्ट्रीकृत संसाधक से भिन्न कोई भी व्यक्ति तब तक वर्जीनिया तम्बाकू का संसाधन नहीं करेगा या संसाधन का जिम्मा नहीं लेगा जब तक वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार बोर्ड में संसाधक के रूप में अपने को रजिस्टर नहीं करा लेता है । 

 [11क. वर्जीनिया तम्बाकू आदि के प्रसंस्कर्ताओं और विनिर्माताओं का रजिस्ट्रीकरण-कोई भी व्यक्ति वर्जीनिया तम्बाकू का प्रसंस्करण या उसके उत्पादों का विनिर्माण तब तक नहीं करेगा जब तक वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार अपने आपको बोर्ड के पास, यथास्थिति, ऐसे प्रसंस्कर्ता या विनिर्माता के रूप में रजिस्टर नहीं करा लेता है ।  

11ख. श्रेणीकरण कार्य और कोठारों के सन्निर्माण आदि के लिए अनुज्ञप्तियों का प्राप्त किया जाना-कोई भी व्यक्ति तब तक, -

(i) वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए वर्जीनिया तम्बाकू से संबंधित श्रेणीकरण कार्य नहीं करेगा; या

(ii) किसी काठोर का सन्निर्माण और प्रचालन नहीं करेगा,

जब तक वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार बोर्ड से अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं कर लेता है ।  

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

(i) कोठार" से ऐसा कोई भवन या संरचना अभिप्रेत है जिसकी छत जस्ते की शीट या टाइल की हो और जिसमें तम्बाकू की पत्तियों के धूमनाल-संसाधन के लिए उपयोग की जाने वाली धूमवाहिका नली, भट्टी और सोपान हो; 

(ii) श्रेणीकरण कार्य" से पौधों की स्थिति, परिपक्वता, रंग, तना और कलुष के आधार पर और ऐसे विनिर्देशों के अनुसार, जो विहित किए जाएं, विनिर्दिष्ट श्रेणियों में तम्बाकू की पत्तियों का पृथक्करण अभिप्रेत है ।]

12. निर्यातकर्ताओं, पैकरों, नीलामकर्ताओं और व्यौहारियों का रजिस्ट्रीकरण-कोई भी व्यक्ति तब तक तम्बाकू या किसी तम्बाकू उत्पाद का निर्यात नहीं करेगा या तम्बाकू के पैकर, नीलामकर्ता या व्यौहारी के रूप में कार्य नहीं करेगा जब तक कि वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार अपने आपको बोर्ड में रजिस्टर नहीं करा लेता । 

13. वर्जीनिया तम्बाकू का रजिस्ट्रीकृत नीलामी मंचों पर विक्रय किया जाना-कोई भी रजिस्ट्रीकृत उगाने वाला या संसाधक वर्जीनिया तम्बाकू को इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार बोर्ड में रजिस्ट्रीकृत [या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा स्थापित] नीलामी मंच पर ही विक्रय करेगा या कराएगा, न कि अन्यत्र । 

 [13क. रजिस्ट्रीकृत व्यौहारियों और निर्यातकर्ताओं का नीलामी मंचों से क्रय करने आदि का कर्तव्य-कोई भी रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी या रजिस्ट्रीकृत निर्यातकर्ता वर्जीनिया तम्बाकू को, -

(क) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार बोर्ड के पास रजिस्ट्रीकृत या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा स्थापित नीलामी मंच से; या 

(ख) किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी या रजिस्ट्रीकृत उगाने वाले या संसाधक से भिन्न किसी व्यक्ति से,

ही क्रय करेगा या क्रय कराएगा, न कि अन्यत्र:

                परन्तु ऐसे किसी राज्य के सम्बन्ध में, जिसमें धारा 13 के उपबन्ध प्रवृत्त नहीं हैं, खंड (क) के अधीन विनिर्दिष्ट शर्त लागू नहीं होगी ।  

13ख. वर्जीनिया तम्बाकू के क्रेताओं का नीलामी मंचों से भिन्न स्थानों पर कुछ अऋजु व्यवहारों से विरत रहने का कर्तव्य-ऐसा प्रत्येक व्यौहारी, जो ऐसे किसी राज्य में, जिसमें धारा 13 के उपबन्ध प्रवृत्त नहीं हैं, वर्जीनिया तम्बाकू का क्रय करता है, - 

(क) अपने द्वारा इस प्रकार क्रय किए गए वर्जीनिया तम्बाकू की पूरी मात्रा के लिए ऐसी दर पर, जिस पर उसने ऐसे तम्बाकू का क्रय करने के लिए करार किया था, पूरी कीमत का संदाय करेगा और भार में किसी बट्टे या उसके भार में अन्य कटौतियां करने का अथवा ऐसी दर के अनुसार संगणित कीमत में से कोई कटौतियां करने का दावा करने से विरत रहेगा;

(ख) अपने द्वारा इस प्रकार क्रय किए गए वर्जीनिया तम्बाकू के लिए खंड (क) के उपबन्धों के अनुसार संगणित पूरी कीमत का यथासम्भव शीघ्रता से और किसी भी दशा में ऐसे युक्तियुक्त समय के भीतर, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, संदाय करेगा; और 

(ग) ऐसे किसी व्यवहार का आश्रय लेने से विरत रहेगा जिसे बोर्ड ऐसे राज्य में तम्बाकू का विक्रय करने वाले व्यक्तियों की संरक्षा की आवश्यकता और ऐसी सभी अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए अऋजु व्यवहार निर्दिष्ट करे ।]

14. रजिस्ट्रीकरण से सम्बद्ध आवेदन, रद्दकरण, फीसें और अन्य मामले-धारा 10 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का प्ररूप और रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का प्ररूप  [धारा 10क के प्रयोजनों के लिए नर्सरी उगाने वालों के रजिस्ट्रीकरण के लिए, धारा 11 के प्रयोजनों के लिए संसाधकों के रजिस्ट्रीकरण के लिए, धारा 11क के प्रयोजन के लिए प्रसंस्कर्ताओं और विनिर्माताओं के रजिस्ट्रीकरण के लिए, धारा 11ख के अधीन श्रेणीकरण कार्य या कोठारों का सन्निर्माण और प्रचालन करने की अनुज्ञप्तियां प्राप्त करने के लिए], धारा 12 के प्रयोजनों के लिए तम्बाकू के निर्यातकर्ताओं, पैकरों या नीलामकर्ताओं या व्यौहारियों के रजिस्ट्रीकरण के लिए और धारा 13 के प्रयोजनों के लिए नीलामी मंचों के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का प्ररूप और वह समय जिसके अन्दर और वह रीति जिसमें ऐसे आवेदन किए जाएंगे, ऐसे आवेदनों पर संदेय फीसें, उनमें विनिर्दिष्ट की जाने वाली विशिष्टियां, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र देने और रद्द करने में या नीलामी मंचों का रजिस्ट्रीकरण करने में या, यथास्थिति, 3[वर्जीनिया तम्बाकू के नर्सरी उगाने वालों, संसाधकों, प्रसंस्कर्ताओं, निर्यातकर्ताओं, पैकरों या नीलामकर्ताओं या व्यौहारियों के रूप मे या वर्जीनिया तम्बाकू के उत्पादों के विनिर्माताओं के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए या धारा 11ख के अधीन अनुज्ञप्तियां मंजूर करने में, वर्जीनिया तम्बाकू के रजिस्ट्रीकृत उगाने वालों, नर्सरी उगाने वालों, संसाधकों, प्रसंस्कर्ताओं, निर्यातकर्ताओं, पैकरों या नीलामकर्ताओं या व्यौहारियों अथवा वर्जीनिया  तम्बाकू के उत्पादों के रजिस्ट्रीकृत विनिर्माताओं या धारा 11ख के अधीन अनुज्ञप्त व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली विवरणियां और उनके द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर तथा बोर्ड द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर ऐसे होंगे जो विहित किए जाएं ।]

 [14क. फीस का उद्ग्रहण-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा स्थापित किसी नीलामी मंच पर वर्जीनिया तम्बाकू का विक्रय किया जाता है वहां बोर्ड या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ऐसे विक्रय के संबंध में र्बोड द्वारा की गई सेवाओं के लिए ऐसे तम्बाकू के मूल्य के दो प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर पर फीस उद्ग्रहीत करने के लिए सक्षम होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत फीस बोर्ड द्वारा या ऐसे अधिकारी द्वारा, वर्जीनिया तम्बाकू के विक्रेता और ऐसे तम्बाकू के क्रेता से बराबर-बराबर और ऐसी रीति से संगृहीत की जाएगी जो विहित की जाए ।]

15. निरीक्षण की शक्ति-बोर्ड अपने सदस्यों, अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों में से किसी को धारा 14 में निर्दिष्ट किसी आवेदन में या किसी विवरणी में उल्लिखित किन्हीं विशिष्टियों की यथार्थता का सत्यापन करने के लिए किसी भूमि या परिसर का ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा । 

अध्याय 4

वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा

16. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् बोर्ड को अनुदानों और उधारों के तौर पर उतनी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जितनी केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किए जाने के लिए ठीक समझे ।

17. तम्बाकू निधि का गठन-(1) तम्बाकू निधि कहलाई जाने वाली एक निधि गठित की जाएगी और उसमें निम्नलिखित राशियां जमा की जाएंगी: -

(क) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत की गई फीसें; 

(ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई कोई धनराशि या दिए गए कोई उधार; 

(ग) कोई अनुदान या उधार जो किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए दिया जाए; 

(घ) धारा 8 में निर्दिष्ट उपायों को कार्यान्वित करने में बोर्ड द्वारा वसूल की गई राशियां, यदि कोई हों । 

(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा: - 

(क) धारा 8 में निर्दिष्ट उपायों में होने वाले खर्च की पूर्ति; 

(ख) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिकों की पूर्ति;

(ग) बोर्ड के अन्य प्रशासनिक व्ययों की पूर्ति; 

(घ) किन्हीं उपायों का प्रतिसंदाय । 

18. बोर्ड की उधार लेने की शक्तियां-ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, बोर्ड को इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए तम्बाकू निधि की अथवा किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर उधार लेने की शक्ति होगी ।

 [18क. हानियों को बट्टे खाते डालना-ऐसी शर्तों के, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, अधीन रहते हुए, जहां बोर्ड की यह राय है कि बोर्ड को शोध्य कोई रकम या उसके द्वारा उपगत धन की या सम्पत्ति की कोई हानि अवसूलीय है वहां बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, उक्त रकम या हानि को अन्तिम रूप से बट्टे खाते डालने की मंजूरी दे सकेगा:

परन्तु केन्द्रीय सरकार का ऐसा अनुमोदन वहां आवश्यक नहीं होगा जहां ऐसी अवसूलीय रकम या हानि किसी एकल मामले में और किसी वर्ष में कुल मिलाकर ऐसी रकम से अधिक नहीं है जो विनिर्दिष्ट की जाए ।]

 19. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अन्तर्गत [आय और व्यय] तथा तुलनपत्र भी हैं, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए । 

(2) बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, की जाएंगी और ऐसी लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में उपगत कोई व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के तथा बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में वे ही अधिकार, और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की परीक्षा के सम्बन्ध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियां, लेखा, सम्बद्ध वाउचरों तथा अन्य दस्तावेज और कागजपत्र पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे तद्विषयक लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित केंद्रीय सरकार को हर वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी । 

अध्याय 5

केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण

20. तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों के आयात और निर्यात को प्रतिषिद्ध या नियंत्रित करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों के या तो साधारणतया या विनिर्दिष्ट प्रकार के मामलों में आयात या निर्यात को प्रतिषिद्ध करने, निर्बन्धित करने या अन्यथा नियंत्रित करने के लिए उपबन्ध कर सकेगी ।

(2) उस सब सम्यक् और तम्बाकू उत्पादों को, जिनको उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश लागू होता है, ऐसा माल समझा जाएगा जिसका आयात या निर्यात सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया है और उस अधिनियम के सब उपबन्ध तद्नुसार प्रभावी होंगे । 

(3)  यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह ऐसे किसी अधिहरण या शास्ति पर, जिसका कि वह उपधारा (2) द्वारा यथा लागू किए गए सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के उपबन्धों के अधीन भागी हो, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक ही हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा । 

 [20क. वर्जीनिया तम्बाकू का क्रय प्राधिकृत करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-धारा 8 की उपधारा (2) के खंड (छ) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में किसी बात के होते हुए भी, यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह लिखित आदेश द्वारा और ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी निकाय या अन्य अभिकरण को उगाने वालों से वर्जीनिया तम्बाकू का क्रय करने के लिए और भारत में या विदेश में उसका व्ययन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।]

21. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-बोर्ड ऐसे निदेशों का पालन करेगा जो समय-समय पर उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए दिए जाएं । 

22. विवरणिया और रिपोर्टें-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय और ऐसे प्ररूप और रीति में जिन्हें विहित किया जाए या जिसे केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, तम्बाकू उद्योग के संवर्धन और विकास के लिए किसी प्रस्थापित या विद्यमान कार्यक्रम के बारे में ऐसी विवरणियां और विवरण तथा ऐसी विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे । 

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अन्त के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व, जिन्हें विहित किया जाए, एक रिपोर्ट देगा जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही तथा पूरा वृत्तान्त होगा । 

(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति, प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी । 

अध्याय 6

प्रकीर्ण

23. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन कोई विवरणी देने के लिए अपेक्षित होते हुए ऐसी विवरणी देने में असफल रहेगा या इस प्रकार की विवरणी देगा जिसमें कोई ऐसी विशिष्टि है जो मिथ्या है और जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके सही होने का उसे विश्वास नहीं है, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

24. बोर्ड के किसी सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी को उसके कर्तव्यों के पालन में बाधित करने के लिए और बहियों और अभिलेखों को पेश करने में असफल रहने के लिए शास्तियां-जो कोई व्यक्ति-

(क) बोर्ड के किसी सदस्य को या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को अथवा किसी अन्य व्यक्ति को, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उसे प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में या उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालेगा; या 

(ख) किसी लेखा बही या अन्य अभिलेख को, जो उसके नियंत्रण में है या जो उसकी अभिरक्षा में है, इस अधिनियम के द्वारा या अधीन ऐसी बही या अभिलेखों को पेश करने के लिए अपेक्षित होने पर वैसा करने में असफल रहेगा,

वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा । 

25. अन्य शास्तियां-जो कोई इस अधिनियम  [या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों,] के ऐसे उपबन्धों का, जो उनसे भिन्न हों जिनके उल्लंघन के लिए धारा 20 या धारा 23 या धारा 24 में दण्ड का उपबन्ध किया गया है, उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा वह कारावास से, 1[जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा], अथवा दोनों से, और जारी रहने वाले उल्लंघन की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से जो उस प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसे प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसे उल्लंघन जारी रहता है, पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा । 

26. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उतरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का किया जाना निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।  

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है, या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए- 

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, तथा

(ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।  

27. न्यायालय की अधिकारिता-महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से अवर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगी । 

28. केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जाएगा ।

29. सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या तद्धीन अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के अथवा बोर्ड के या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति के अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य के अथवा केन्द्रीय सरकार के या बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के अथवा बोर्ड के किसी अभिकर्ता या बोर्ड द्वारा प्रधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी । 

30. अधिनियम के प्रवर्तन का निलम्बन-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं जिनमें यह आवश्यक हो गया है कि इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित निर्बन्धनों में से कुछ का अधिरोपित किया जाना समाप्त कर दिया जाए या यदि वह ऐसा करना लोकहित में आवश्यक या समीचीन समझती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट विस्तार तक, ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, इस अधिनियम के सभी उपबंधों या उनमें से किसी के प्रवर्तन को, उन सभी राज्यक्षेत्रों या उनमें से किसी में जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, निलम्बित कर सकेगी या शिथिल कर सकेगी । 

(2) जहां इस अधिनियम के किसी उपबंध का प्रवर्तन उपधारा (1) के अधीन निलम्बित या शिथिल कर दिया गया है वहां ऐसे निलम्बन या शिथिल किए जाने को इस अधिनियम के प्रवृत्त रहने के दौरान किसी भी समय केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा हटा सकेगी । 

(3) इस धारा के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, जारी की जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किन्तु अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से अधिसूचना के पूर्व प्रवर्तन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 

31. अन्य विधियों के लागू किए जाने का वर्जित होना-इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।

32. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

(क) बोर्ड के उपाध्यक्ष की शक्तियां और उसके कृत्य; 

(ख) सदस्यों की पदावधि, और सेवा की अन्य शर्तें, सदस्यों में रिक्तियों को भरने की रीति और उनके कृत्यों के निर्वहन में उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया; 

(ग) कार्यपालक निदेशक और सचिव द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली शक्तियां और पालन किए जाने वाले कर्तव्य;

(घ) वे परिस्थितियां जिनमें और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा कोई सदस्य हटाया जा सकेगा;

(ङ) प्रत्येक वर्ष बोर्ड की न्यूनतम बैठकें करना;

(च) कामकाज के संचालन के लिए बोर्ड की बैठकों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और सदस्यों की संख्या जिससे बैठक में गणपूर्ति होगी; 

(छ) बोर्ड द्वारा किए गए कामकाज के अभिलेखों का बोर्ड द्वारा रखा जाना और उसकी प्रतियों को केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करना; 

 [(छक) धारा 11ख में निर्दिष्ट श्रेणीकरण कार्य के बारे में विनिर्देश;]

(ज) धारा 14 में निर्दिष्ट विषय;

 [(जज) धारा 14क की उपधारा (2) के अधीन फीस के उद्ग्रहण की रीति;]

(झ) व्यय उपगत करने के संबंध में बोर्ड, उसके अध्यक्ष, कार्यपालक निदेशक और बोर्ड की समितियों की शक्तियां; 

(ञ) वे शर्तें जिनके अधीन बोर्ड भारत के बाहर व्यय उपगत कर सकेगा;

1[(ञक) धारा 18क के परन्तुक के प्रयोजनों के लिए रकमें;] 

(ट) बोर्ड की आय और व्यय के बजट प्राक्कलनों की तैयारी और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा ये प्राक्कलन मंजूर किए जाने हैं;

(ठ) वह प्ररूप और रीति जिसमें बोर्ड द्वारा लेखाओं को रखा जाना चाहिए; 

(ड) बोर्ड की निधियों का बैंकों में जमा किया जाना और ऐसी निधियों का विनिधान; 

(ढ) धन उधार देने में बोर्ड द्वारा पालन की जाने वाली शर्तें;

(ण) वे शर्तें जिनके अधीन और वह रीति जिसमें बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी; 

(त) वे अतिरिक्त मामले जिनके संबंध में बोर्ड अपने कृत्यों के निर्वहन में उपाय कर सकेगा; 

(थ) धारा 9 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों को संदेय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते; 

(द) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड को दी जाने वाली किन्हीं विवरणियों या रिपोर्टों का प्ररूप और रीति तथा उनमें अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां; 

(ध) तम्बाकू या तम्बाकू उत्पादों के सम्बन्ध में किस जानकारी या आंकड़ों का संग्रहण; 

(न) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित या उपबन्धित किया जाता है या किया जाए । 

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पूर्व उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 

33. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अपने को समर्थ बनाने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम तथा तद्धीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -

(क) बोर्ड द्वारा नियुक्ति समितियों की बैठकों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा सदस्यों की संख्या जिससे बैठक में गणपूर्ति होगी; 

(ख) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की शक्तियों और कर्तव्यों में से किसी का बोर्ड के अध्यक्ष, सदस्यों, कार्यपालक निदेशक, सचिव या अन्य अधिकारियों को प्रत्यायोजन;  

(ग) धारा 4 की उपधारा (8) के अधीन सहयोजित या धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन सहयुक्त व्यक्तियों को संदेय यात्रा तथा अन्य भत्ते; 

(घ) बोर्ड के अधिकारियों (जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों से भिन्न हों) और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा छुट्टी और सेवा की अन्य शर्तें; 

(ङ) बोर्ड के लेखाओं का बनाए रखना; 

(च) बोर्ड और उसकी विभिन्न समितियों के रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों को बनाए रखना; 

(छ) बोर्ड की ओर से उसके किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए बोर्ड द्वारा अभिकर्ताओं की नियुक्ति; 

(ज) वे व्यक्ति जिनके द्वारा और वह रीति जिसमें बोर्ड की ओर से संदाय, जमा तथा विनिधान किए जा सकेंगे । 

 [(झ) वह समय जिसके भीतर धारा 13ख के खण्ड (ख) के अधीन वर्जीनिया तम्बाकू की पूरी कीमत का संदाय किया जाएगा और खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए अऋजु व्यवहार ।]

(3) बोर्ड द्वारा बनाया गया कोई भी विनियम तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं कर दिया जाता और राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिया जाता तथा किसी विनियम को अनुमोदित करने में केन्द्रीय सरकार उसमें कोई ऐसा परिवर्तन कर सकेगी, जो उसे आवश्यक प्रतीत होता है । 

(4) केन्द्रीय सरकार, किसी ऐसे विनियम को, जिसे उसने अनुमोदित किया है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, रद्द कर सकेगी और तब वह विनियम प्रभावी नहीं रहेगा ।

1[(5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

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