सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
(2000 का अधिनियम संख्यांक 21)
[9 जून, 2000]
इलैक्ट्रानिक डाटा के आदान-प्रदान द्वारा और इलैक्ट्रानिक संसूचना के अन्य साधनों द्वारा, जिन्हें
सामान्यतया इलैक्ट्रानिक वाणिज्य" कहा जाता है और जिनमें संसूचना और सूचना
के भंडारण के कागज-आधारित तरीकों के अनुकल्पों का उपयोग अंतर्वलित है,
किए गए संव्यवहारों को विधिक मान्यता देने, सरकारी अभिकरणों में
दस्तावेजों को इलैक्ट्रानिक रूप से फाइल करना सुकर बनाने
और भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम,
1872, बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 और
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 का
और संशोधन करने तथा उससे संबंधित
या उसके आनुषंगिक विषयों का
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने तारीख 30 जनवरी, 1997 के संकल्प ए/आर ई एस/51/162 द्वारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि से संबंधित संयुक्त राष्ट्र आयोग द्वारा अंगीकार की गई इलैक्ट्रानिक वाणिज्य संबधी आदर्श विधि को अंगीकार कर लिया है;
उक्त संकल्प में, अन्य बातों के साथ, यह सिफारिश की गई है कि सभी राज्य, जब वे अपनी विधियों का अधिनियमन या पुनरीक्षण करें, संसूचना और सूचना के भंडारण के कागज-आधारित तरीकों के अनुकल्पों को लागू होने वाली विधि की एकरूपता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, उक्त आदर्श विधि पर अनुकूल ध्यान दें;
उक्त संकल्प को प्रभावी करना और विश्वसनीय इलैक्ट्रानिक अभिलेखों द्वारा सरकारी सेवाएं दक्षतापूर्वक देने का संवर्धन करना आवश्यक समझा गया है;
भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर होगा और, इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, यह किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किए गए किसी अपराध या इसके अधीन उल्लंघन को भी लागू होता है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रारंभ के प्रति निर्देश है ।
[(4) इस अधिनियम की कोई बात, पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट दस्तावेजों या संव्यवहारों को लागू नहीं होगी :
परंतु केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा पहली अनुसूची का, उसमें प्रविष्टियों को जोड़कर या हटाकर संशोधन कर सकेगी ।
(5) उपधारा (4) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।]
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) अभिगम" से, इसके व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित, अभिप्रेत है कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में प्रवेश प्राप्त करना, उसके तर्कसंगत, अंकगणितीय अथवा स्मृति फलन संसाधनों के द्वारा अनुदेश देना या संसूचना देना;
(ख) प्रेषिती" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्राप्त करने के लिए प्रवर्तक द्वारा आशयित है किन्तु इसके अंतर्गत कोई मध्यवर्ती नहीं है;
(ग) न्यायनिर्णायक अधिकारी" से धारा 46 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त न्यायनिर्णायक अधिकारी अभिप्रेत है;
(घ) [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] लगाना" से, इसके व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित अभिप्रेत है किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] द्वारा अधिप्रमाणित करने के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति द्वारा कोई कार्यपद्धति या प्रक्रिया अंगीकार करना;
(ङ) समुचित सरकार" से,-
(i) संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 में प्रगणित,
(ii) संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 3 के अधीन अधिनियमित किसी राज्य विधि से संबंधित,
किसी विषय के संबंध में राज्य सरकार और किसी अन्य दशा में केन्द्रीय सरकार अभिप्रेत है;
(च) असममित गूढ़ प्रणाली" से सुरक्षित कुंजी युग्म की कोई प्रणाली अभिप्रेत है जिसमें 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] सृजित करने के लिए एक प्राइवेट कुंजी और 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] को सत्यापित करने के लिए एक लोक कुंजी है;
(छ) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे धारा 24 के अधीन 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अनुज्ञप्ति दी गई है;
(ज) प्रमाणीकरण पद्धति विवरण" से प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा उन पद्धतियों को विनिर्दिष्ट करने के लिए जारी किया गया विवरण अभिप्रेत है जो प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी करने में प्रयोग करता है;
[(जक) संचार युक्ति" से सैलफोन, वैयक्तिक अंकीय सहायता या दोनों का संयोजन या कोई ऐसी अन्य युक्ति अभिप्रेत है जिसका उपयोग कोई पाठ, वीडियों, आडियो या आकृति संसूचित करने, भेजने या पारेषित करने के लिए किया जाता है;]
(झ) कंप्यूटर" से ऐसी इलैक्ट्रानिक, चुम्बकीय, प्रकाशीय या अन्य द्रुत डाटा संसाधन युक्ति या प्रणाली अभिप्रेत है जो इलैक्ट्रानिक, चुम्बकीय या प्रकाशीय तरंगों के अभिचालनों द्वारा तर्कसंगत, अंकगणितीय और स्मृति फलन के रूप में कार्य करता है और इसके अंतर्गत सभी निवेश उत्पाद, प्रक्रमण, भंडारण, कंप्यूटर साफ्टवेयर या संचार सुविधाएं भी हैं जो किसी कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में कंप्यूटर से संयोजित या संबंधित होती हैं;
[(ञ) कंप्यूटर नेटवर्क" से,-
(i) उपग्रह, सूक्ष्म तरंग, भौमिक लाइन, तार, बेतार, या अन्य संचार मीडिया के उपयोग ; और
(ii) दो या अधिक अंतःसंबद्ध कंप्यूटरों या संचार युक्ति से मिलकर बने टर्मिनलों या किसी कंप्लैक्स, चाहे अंतःसंबंध निरंतर रखा जाता है या नहीं,
के माध्यम से एक या अधिक कंप्यूटरों या कंप्यूटर प्रणालियों या संचार युक्ति का अंतःसंबंध अभिप्रेत है ;]
(ट) कंप्यूटर साधन" से कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, कंप्यूटर नेटवर्क, डाटा, कंप्यूटर डाटा संचय या साफ्टवेयर अभिप्रेत है;
(ठ) कंप्यूटर प्रणाली" से, निवेश और निर्गम सहायक युक्तियों सहित और ऐसे कैलकुलेटरों को छोड़कर, जो क्रमादेश्य नहीं हैं और जो बाह्य फाइलों के साथ संयोजन में उपयोग में नहीं आ सकते, ऐसी युक्ति या युक्तियों का संग्रह अभिप्रेत है जिसमें कंप्यूटर प्रोग्राम, इलैक्ट्रानिक अनुदेश, निवेश डाटा और निर्गम डाटा भरे गए हैं, जो तर्क, अंकगणतीय, डाटा भंडारण और पुनःप्राप्ति, संचार नियंत्रण और अन्य कृत्य करती है;
(ड) नियंत्रक" से धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों का नियंत्रक अभिप्रेत है;
(ढ) साइबर अपील अधिकरण" से धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन स्थापीत साइबर । । । अपील अधिकरण अभिप्रेत है;
2[(ढक) साइबर कैफे" से ऐसी कोई सुविधा अभिप्रेत है, जहां से किसी व्यक्ति द्वारा, जनता को कारबार के साधारण अनुक्रम में इंटरनैट तक पहुंच प्रस्थापित की जाती है;
(ढख) साइबर सुरक्षा" से सूचना, उपस्कर, युक्तियों, कंप्यूटर, कंप्यूटर संसाधन, संचार युक्ति और उनमें भंडारित सूचना को अप्राधिकृत पहुंच, उपयोग, प्रकटन, विच्छिन्न, उपांतरण या नाश से संरक्षित करना अभिप्रेत है;]
(ण) डाटा" से सूचना, जानकारी, तथ्यों, संकल्पनाओं या अनुदेशों का निरूपण अभिप्रेत है जिन्हें एक निश्चित रीति से तैयार किया जा रहा है या तैयार किया गया है और जो कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में संसाधित किए जाने के लिए आशयित है, संसाधित किया जा रहा है या संसाधित किया गया है और जो किसी रूप में (जिसके अंतर्गत कंप्यूटर प्रिन्टआउट, चुम्बकीय या प्रकाशीय भंडारण मीडिया, छिद्रित कार्ड, छिद्रित टेप हैं) या कंप्यूटर की स्मृति में आंतरिक रूप से भंडारित हो सकता है;
(त) अंकीय चिह्नक" से किसी उपयोगकर्ता द्वारा धारा 3 के उपबंध के अनुसार किसी इलैक्ट्रानिक पद्धति या प्रक्रिया द्वारा किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणन अभिप्रेत है;
(थ) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र" से धारा 35 की उपधारा (4) के अधीन जारी किया गया अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;
(द) सूचना के संदर्भ में, इलैक्ट्रानिक रूप" से किसी मीडिया, चुम्बकीय, प्रकाशीय, कंप्यूटर स्मृति, माइक्रोफिल्म, कंप्यूटर उत्पादित सूक्ष्मिका या समरूप युक्ति में उत्पादित, प्रेषित, प्राप्त या भंडारित कोई सूचना अभिप्रेत है;
(ध) इलैक्ट्रानिक राजपत्र" से इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित राजपत्र अभिप्रेत है;
(न) इलैक्ट्रानिक अभिलेख" से किसी इलैक्ट्रानिक रूप या माइक्रोफिल्म या कंप्यूटर उत्पादित सूक्ष्मिका में डाटा, अभिलेख या उत्पादित डाटा, भंडारित, प्राप्त या प्रेषित प्रतिबिंब या ध्वनि अभिप्रेत है;
[(नक) इलैक्ट्रानिक चिह्नक" से किसी उपयोगकर्ता द्वारा दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट इलैक्ट्रानिक तकनीक के माध्यम से किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणन अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अंकीय चिह्नक भी है;
(नख) इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र" से धारा 35 के अधीन जारी किया गया इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र भी है;]
(प) किसी कंप्यूटर के संबंध में, फलन" के अंतर्गत किसी कंप्यूटर से अथवा उसमें तर्क, नियंत्रण, अंकगणितीय प्रक्रम, विलोप, भंडारण और पुनः प्राप्ति तथा संचार या दूरसंचार भी आता है;
1[(पक) भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल" से धारा 70ख की उपधारा (1) के अधीन स्थापित अभिकरण अभिप्रेत है;]
(फ) सूचना" के अंतर्गत [डाटा, संदेश, पाठ,] प्रतिबिंब, ध्वनि, वाणी, कोड, कंप्यूटर कार्यक्रम, साफ्टवेयर और डाटा संचय या माइक्रोफिल्म या कंप्यूटर उत्पादित सूक्ष्मिका भी आती है;
2[(ब) किसी विशिष्ट इलैक्ट्रानिक अभिलेख के संबंध में मध्यवर्ती" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से उस अभिलेख को प्राप्त करता है, भंडारित करता है या पारेषित करता है या उस अभिलेख के संबंध में कोई सेवा प्रदान करता है और उसके अंतर्गत दूरसंचार सेवा प्रदाता, नैटवर्क सेवा प्रदाता, इंटरनेट सेवा प्रदाता, वैब, होस्टिंग सेवा प्रदाता, सर्च इंजन, आन लाइन पेमेंट साइट, आन लाइन ऑक्सन साइट, आन लाइन विपणन स्थान और साइबर कैफे भी हैं;]
(भ) असममित गूढ़ प्रणाली में, कुंजी युग्म" से, प्राइवेट कुंजी और उसकी अंकगणितीय रूप से संबंधित लोक कुंजी अभिप्रेत है जो इस प्रकार संबंधित है कि लोक कुंजी उस अंकीय चिह्नक को सत्यापित कर सकती है जो प्राइवेट कुंजी द्वारा सृजित किया गया है;
(म) विधि" के अन्तर्गत संसद् या राज्य विधान-मंडल का कोई अधिनियम, यथास्थिति, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश, अनुच्छेद 240 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए विनियम, संविधान के अनुच्छेद 357 के खंड (1) के उपखंड (क) के अधीन राष्ट्रपति के अधिनियमों के रूप में अधिनियमित विधेयक आते हैं और इनके अंतर्गत उनके अधीन बनाए गए नियम, विनियम, उपविधियां और जारी किए गए आदेश भी हैं;
(य) अनुज्ञप्ति" से धारा 24 के अधीन किसी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को अनुदत्त अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है;
(यक) प्रवर्तक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी इलैक्ट्रानिक संदेश को भेजता है, उसका उत्पादन, भंडारण करता है या किसी अन्य व्यक्ति को पारेषित करता है अथवा किसी इलैक्ट्रानिक संदेश को भिजवाता है, उसका उत्पादन, भंडारण कराता है या किसी अन्य व्यक्ति को पारेषित कराता है, किन्तु इसके अंतर्गत कोई मध्यवर्ती नहीं है;
(यख) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(यग) प्राइवेट कुंजी" से कुंजी युग्म की वह कुंजी अभिप्रेत है जो अंकीय चिह्नक सृजित करने के लिए प्रयोग की जाती है;
(यघ) लोक कुंजी" से कुंजी युग्म की वह कुंजी अभिप्रेत है जो अंकीय चिह्नक को सत्यापित करने के लिए प्रयोग की जाती है और अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध है;
(यङ) सुरक्षित प्रणाली" से ऐसे कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाएं अभिप्रेत हैं, जो-
(क) अप्राधिकृत प्रवेश और दुरुपयोग से युक्तियुक्त रूप से सुरक्षित है;
(ख) विश्वसनीयता और सही संचालन का युक्तियुक्त स्तर उपबंधित करती है;
(ग) आशयित कृत्य करने के लिए युक्तियुक्त रूप से उपयुक्त है;
(घ) साधारणतः स्वीकार्य सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुरूप है;
(यच) सुरक्षा प्रक्रिया" से धारा 16 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित सुरक्षा प्रक्रिया अभिप्रेत है;
(यछ) उपयोगकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके नाम से [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी किया जाता है;
(यज) अंकीय चिह्नक, इलैक्ट्रानिक अभिलेख या लोक कुंजी के संबंध में, सत्यापित करना" से इसके व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित अभिप्रेत है यह अवधारण करना कि क्या-
(क) प्रारंभिक इलैक्ट्रानिक अभिलेख पर उपयोगकर्ता की लोक कुंजी के तद्नुरूपी प्राइवेट कुंजी का उपयोग करते हुए अंकीय चिह्नक लगाया गया था ;
(ख) प्रारंभिक इलैक्ट्रानिक अभिलेख, ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख पर अंकीय चिह्नक इस प्रकार लगाए जाने के समय से ही अक्षुण्ण रखे गए हैं या उसे उपांतरित किया गया है ।
(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियमिति या उसके किसी उपबंध के प्रति किसी निर्देश का, उस क्षेत्र के संबंध में जिसमें ऐसी अधिनियमिति या ऐसा उपबंध प्रवृत्त नहीं है, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि या तत्स्थानी विधि से सुसंगत उपबंध, यदि कोई है, के प्रति निर्देश है ।
अध्याय 2
[अंकीय चिह्नक और इलैक्ट्रानिक चिह्नक]
3. इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणीकरण-(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई उपयोगकर्ता, किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को अपने अंकीय चिह्नक लगाकर अधिप्रमाणित कर सकेगा ।
(2) इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणन असममित गूढ़ प्रणाली और द्रुतान्वेषण फलन का उपयोग करके किया जाएगा जो प्रारंभिक इलैक्ट्रानिक अभिलेख को किसी अन्य इलैक्ट्रानिक अभिलेख में आवृत्त और रूपान्तर करता है ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, द्रुतान्वेषण फलन" से एल्गोरिथ्म मैपिंग या विटस की एक श्रृंखला का दूसरी श्रृंखला में रूपांतरण अभिप्रेत है, जो कि सामान्यतः द्रुतान्वेषण परिणाम के नाम से ज्ञात सेट से छोटी हैं और ऐसी हैं जिसमें कोई इलैक्ट्रानिक अभिलेख हर समय वही द्रुतान्वेषण परिणाम उत्पन्न करता है जब उसके निवेश के रूप में उसी इलेक्ट्रानिक अभिलेख के साथ एल्गोरिथ्म को निष्पादित किया जाता है तो वह अभिकलनीय रूप से निम्नलिखित के संबंध में असंभव हो जाता है-
(क) ऐल्गोरिथ्म द्वारा उत्पादित द्रुतान्वेषण परिणाम से मूल इलैक्ट्रानिक अभिलेख को व्युत्पन्न या पुनः संरचित करना;
(ख) दो इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का ऐल्गोरिथ्म का उपयोग करके वैसा ही द्रुतान्वेषण परिणाम उत्पादित करना ।
(3) कोई भी व्यक्ति, उपयोगकर्ता की लोक कुंजी का उपयोग करके इलैक्ट्रानिक अभिलेख को सत्यापित कर सकता है ।
(4) प्राइवेट कुंजी और लोक कुंजी उपयोगकर्ता के लिए अद्वितीय हैं और वे फलनकारी कुंजी युग्म का निर्माण करती हैं ।
[3क. इलैक्ट्रानिक चिह्नक-(1) धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई उपयोगकर्ता किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को, ऐसे इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक द्वारा अधिप्रमाणित कर सकेगा, जो,-
(क) विश्वसनीय समझी जाती है ; और
(ख) दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक विश्वसनीय समझी जाएगी, यदि,-
(क) चिह्नक सृजन डाटा या अधिप्रमाणन डाटा, उस संदर्भ में, जिसमें उनका उपयोग किया जाता है, यथास्थिति, हस्ताक्षरकर्ता या अधिप्रमाणनकर्ता के साथ जोड़े जाते हैं और न कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ;
(ख) चिह्नक सृजन डाटा या अधिप्रमाणन डाटा, चिह्नांकन के समय, यथास्थिति, हस्ताक्षरकर्ता या अधिप्रमाणनकर्ता के नियंत्रणाधीन थे और न कि किसी अन्य व्यक्ति के;
(ग) ऐसा चिह्नक लगाने के पश्चात्, इलैक्ट्रानिक चिह्नक में किया गया कोई परिवर्तन पता लगाए जाने योग्य है;
(घ) इलैक्ट्रानिक चिह्नक द्वारा अधिप्रमाणन के पश्चात् सूचना में किया गया कोई परिवर्तन पता लगाए जाने योग्य है; और
(ङ) यह ऐसी अन्य शर्तों को पूरी करता हो, जो विहित की जाएं ।
(3) केन्द्रीय सरकार, इस बात का अभिनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए प्रक्रिया विहित कर सकेगी, कि क्या इलैक्ट्रानिक चिह्नक उसी व्यक्ति का है जिसके द्वारा उसका चिह्नांकन किया जाना या अधिप्रमाणित किया जाना तात्पर्यित है ।
(4) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, दूसरी अनुसूची में ऐसे चिह्नक को लगाने के लिए कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक या प्रक्रिया जोड़ सकेगी या उससे हटा सकेगी :
परंतु कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या अधिप्रमाणन तकनीक दूसरी अनुसूची में तभी विनिर्दिष्ट की जाएगी, जब ऐसा चिह्नक या तकनीक विश्वसनीय हो ।
(5) उपधारा (4) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।]
अध्याय 3
इलैक्ट्रानिक नियमन
4. इलैक्ट्रानिक अभिलेखों की विधिमान्यता-जहां कोई विधि यह उपबंध करती है कि सूचना या कोई अन्य विषय लिखित या टंकित या मुद्रित रूप में होगा, वहां, ऐसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी अपेक्षा पूर्ण कर दी गई समझी जाएगी, यदि ऐसी सूचना या विषय,-
(क) किसी इलैक्ट्रानिक रूप में दिया जाता है या उपलब्ध कराया जाता है; और
(ख) इस प्रकार पहुंच योग्य है कि वह किसी पश्चात्वर्ती निर्देश के लिए उपयोग किए जाने योग्य है ।
5. [इलैक्ट्रानिक चिह्नकों] की विधिमान्यता-जहां किसी विधि में यह उपबंध किया गया हो कि सूचना या कोई अन्य विषय, उस पर हस्ताक्षर कर के अधिप्रमाणित किया जाए, या कोई दस्तावेज हस्ताक्षरित किया जाए अथवा उस पर किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर हों, वहां ऐसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी अपेक्षा पूर्ण कर दी गई समझी जाएगी, यदि ऐसी सूचना या विषय, ऐसी रीति से जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] लगा कर अधिप्रमाणित किया गया हो ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए इसके व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों के साथ हस्ताक्षरित" से, किसी व्यक्ति के संदर्भ में, अभिप्रेत है किसी दस्तावेज पर अपने हस्तलिखित हस्ताक्षर करना या कोई चिह्न लगाना और हस्ताक्षर" पद का तद्नुसार अर्थ लगाया जाएगा ।
6. सरकार और उसके अभिकरणों में इलैक्ट्रानिक अभिलेखों और 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नकों] का प्रयोग-(1) जहां किसी विधि में,-
(क) समुचित सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी कार्यालय, प्राधिकरण, निकाय या अभिकरण में कोई प्ररूप, आवेदन या कोई अन्य दस्तावेज किसी विशिष्ट रीति से फाइल करने का;
(ख) किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापन, मंजूरी या अनुमोदन, वह चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो किसी विशिष्ट रीति से जारी या मंजूर करने का;
(ग) किसी विशिष्ट रीति से धन की प्राप्ति या संदाय का,
उपबंध है, वहां, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी अपेक्षा पूर्ण कर दी गई समझी जाएगी, यदि, यथास्थिति, ऐसा फाइल किया जाना, जारी किया जाना, मंजूरी, प्राप्ति या संदाय, ऐसे इलैक्ट्रानिक रूप से, जो समुचित सरकार द्वारा विहित किया जाए, किया जाता है ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, समुचित सरकार, नियमों द्वारा निम्नलिखित विहित कर सकेगी-
(क) वह रीति जिससे और वह रूपविधान जिसमें ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख फाइल, सृजित या जारी किए जाएंगे;
(ख) खंड (क) के अधीन किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के फाइल, सृजन या जारी किए जाने के लिए किसी फीस या प्रभारों के संदाय की रीति या पद्धति ।
[6क. सेवा प्रदाता द्वारा सेवाओं का परिदान-(1) समुचित सरकार, इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए और इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से, जनता को सेवाओं के दक्ष परिदान के लिए, आदेश द्वारा, किसी सेवा प्रदाता को कंप्यूटरीकृत सुविधाओं की स्थापना, अनुरक्षण और उन्नयन और ऐसी अन्य सेवाओं का अनुपालन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी, जो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस प्रकार प्राधिकृत सेवा प्रदाता के अंतर्गत ऐसा कोई व्यष्टि, प्राइवेट अभिकरण, प्राइवेट कंपनी, भागीदारी फर्म, एकल स्वत्वधारी फर्म या कोई ऐसा अन्य निकाय या अभिकरण भी है जिसे ऐसे सेवा सैक्टर को शासित करने वाली नीति के अनुसार इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से सेवाएं प्रस्थापित करने के लिए समुचित सरकार द्वारा अनुज्ञा दी गई है ।
(2) समुचित सरकार, उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत किसी सेवा प्रदाता को, ऐसे सेवा प्रभार, जो ऐसी सेवा का उपभोग करने वाले व्यक्ति से ऐसी सेवा प्रदान करने के प्रयोजन के लिए समुचित सरकार द्वारा विहित किए जाएं, संगृहीत, प्रतिधारित और विनियोजित करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगी ।
(3) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, समुचित सरकार इस तथ्य के होते हुए भी कि इस अधिनियम, नियम, विनियम या अधिसूचना के अधीन ऐसा कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है, जिसके अधीन सेवा प्रदाताओं द्वारा ई-सेवा प्रभारों का संग्रहण, प्रतिधारण और विनियोजन करने के लिए सेवा प्रदान की जाती है, इस धारा के अधीन सेवा प्रदाताओं को सेवा प्रभारों का संग्रहण, प्रतिधारण, विनियोजन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।
(4) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन सेवा प्रभारों का मापमान विनिर्दिष्ट करेगी जो इस धारा के अधीन सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रभारित और संगृहीत किए जा सकेंगे :
परंतु समुचित सरकार विभिन्न प्रकार की सेवाओं के लिए सेवा प्रभारों के विभिन्न मापमान विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।]
7. इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का प्रतिधारण-(1) जहां किसी विधि में यह उपबंध है कि दस्तावेज, अभिलेख या सूचना किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए प्रतिधारित की जाए, वहां, ऐसी अपेक्षा पूर्ण कर दी गई समझी जाएगी यदि ऐसे दस्तावेज, अभिलेख या सूचना इलैक्ट्रानिक रूप में प्रतिधारित की जाती है, यदि-
(क) उसमें अन्तर्विष्ट सूचना इस प्रकार पहुंच योग्य बनी रहती है कि पश्चात्वर्ती निर्देश के लिए उपयोग की जा सके;
(ख) इलैक्ट्रानिक अभिलेख उसी रूपविधान में, जिसमें मूलतः उत्पादित, प्रेषित या प्राप्त किया गया था या उस रूपविधान में, जिसमें मूलतः उत्पादित, प्रेषित या प्राप्त की गई सूचना ठीक-ठीक निरूपित करने के लिए निदर्शित की जा सकती है, प्रतिधारित किया जाता है;
(ग) वे ब्यौरे, जो ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख के उद्भव, गंतव्य, प्रेषण या प्राप्ति की तारीख और समय के अभिज्ञान को सुकर बनाएंगे, इलैक्ट्रानिक अभिलेख में उपलब्ध हैंः
परंतु यह खंड किसी ऐसी सूचना को लागू नहीं होता है जो किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को केवल प्रेषित या प्राप्त करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए स्वतः उत्पादित की जाती है ।
(2) इस धारा की कोई बात किसी ऐसी विधि को लागू नहीं होगी जिसमें दस्तावेजों, अभिलेखों या सूचना का इलैक्ट्रानिक अभिलेखों के रूप में प्रतिधारण के लिए अभिव्यक्त रूप से उपबंध है ।
[7क. इलैक्ट्रानिक रूप में रखे गए दस्तावेजों, आदि की संपरीक्षा-जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में, दस्तावेजों, अभिलेखों या सूचना की संपरीक्षा का उपबंध है, वहां, वह उपबंध इलैक्ट्रानिक रूप में संसाधित और रखे गए दस्तावेजों, अभिलेखों या सूचना की संपरीक्षा के संबंध में भी लागू होगा ।]
8. इलैक्ट्रानिक राजपत्र में नियम, विनियम, आदि का प्रकाशन-जहां किसी विधि में यह उपबंध है कि कोई नियम, विनियम, आदेश, उपविधि, अधिसूचना या कोई अन्य विषय, राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा वहां ऐसी अपेक्षा पूर्ण कर दी गई समझी जाएगी यदि ऐसा नियम, विनियम, आदेश, उपविधि, अधिसूचना या कोई अन्य विषय राजपत्र या इलैक्ट्रानिक राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है :
परन्तु जहां राजपत्र या इलैक्ट्रानिक राजपत्र में कोई नियम, विनियम, आदेश, उपविधि, अधिसूचना या किसी अन्य सामग्री को प्रकाशित किया जाता है वहां वही प्रकाशन की तारीख, उस राजपत्र की तारीख समझी जाएगी, जिसको वह प्रथमतः किसी रूप में प्रकाशित हुआ था ।
9. धारा 6, धारा 7 और धारा 8 इस बात पर जोर देने का अधिकार प्रदान नहीं करती कि दस्तावेज इलैक्ट्रानिक रूप में स्वीकार किया जाए-धारा 6, धारा 7 और धारा 8 में अंतर्विष्ट कोई बात किसी व्यक्ति को इस बात पर जोर देने का अधिकार प्रदान नहीं करेगी कि केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी मंत्रालय या विभाग अथवा किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित या केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित या वित्तपोषित किसी प्राधिकरण या निकाय को कोई दस्तावेज इलैक्ट्रानिक अभिलेखों के रूप में स्वीकार, जारी, सृजित, प्रतिधारित, संरक्षित करना चाहिए या इलैक्ट्रानिक रूप में कोई धनीय संव्यवहार करना चाहिए ।
10. [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] से संबंधित नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, नियमों द्वारा, निम्नलिखित विहित कर सकेगी,-
(क) 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] का प्रकार;
(ख) वह रीति और रूपविधान जिसमें 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] लगाया जाएगा;
(ग) वह रीति या प्रक्रिया जो 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] लगाने वाले व्यक्ति की पहचान को सुकर बनाती है;
(घ) इलैक्ट्रानिक अभिलेखों या संदायों की यथोचित समग्रता, सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रण पद्धति और प्रक्रियाएं; और
(ङ) कोई अन्य विषय, जो 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] को विधिक प्रभाव देने के लिए आवश्यक हो ।
[10क. इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से की गई संविदाओं की विधिमान्यता-जहां किसी संविदा को तैयार करने में, यथास्थिति, प्रस्थापनाओं की संसूचना, प्रस्थापनाओं की स्वीकृति, प्रस्थापनाओं का प्रतिसंहरण और स्वीकृतियां, इलैक्ट्रानिक रूप में या किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के साधनों द्वारा, अभिव्यक्त की जाती है वहां ऐसी संविदा केवल इस आधार पर कि ऐसा इलैक्ट्रानिक रूप या साधन उस प्रयोजन के लिए उपयोग किया गया था, अप्रवर्तनीय नहीं समझी जाएगी ।]
अध्याय 4
इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का अधिकार, अभिस्वीकृति और प्रेषण
11. इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का अधिकार-किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिकार प्रवर्तक को प्राप्त होगा,-
(क) यदि वह स्वयं प्रवर्तक द्वारा;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे उस इलैक्ट्रानिक अभिलेख की बाबत प्रवर्तक की ओर से कार्य करने का प्राधिकार था; या
(ग) स्वतः प्रचालित किए जाने के लिए प्रवर्तक द्वारा या उसकी ओर से कार्यक्रमित किसी सूचना प्रणाली द्वारा भेजा गया था ।
12. प्राप्ति की अभिस्वीकृति-(1) [जहां प्रवर्तक ने यह अनुबंधित नहीं किया है] कि इलैक्ट्रानिक अभिलेख की प्राप्ति की अभिस्वीकृति किसी विशिष्ट रूप में या किसी विशिष्ट पद्धति द्वारा दी जाए, वहां अभिस्वीकृति,-
(क) प्रेषिती द्वारा स्वचालित या अन्यथा किसी संसूचना द्वारा; या
(ख) प्रेषिती के किसी आचरण द्वारा, जो प्रवर्तक को यह इंगित करने के लिए पर्याप्त है कि इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्राप्त हो गया है,
दी जा सकेगी ।
(2) जहां प्रवर्तक ने यह नियत किया है कि इलैक्ट्रानिक अभिलेख, उसके द्वारा ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख की अभिस्वीकृति के प्राप्त होने पर ही आबद्धकर होगा, वहां जब तक अभिस्वीकृति इस प्रकार प्राप्त नहीं हो जाती है, ऐसा समझा जाएगा कि इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रवर्तक द्वारा कभी भेजा ही नहीं गया था ।
(3) जहां प्रवर्तक ने यह नियत नहीं किया है कि इलैक्ट्रानिक अभिलेख, ऐसी अभिस्वीकृति प्राप्त होने पर ही आबद्धकर होगा और प्रवर्तक द्वारा विनिर्दिष्ट या तय किए गए समय के भीतर या यदि कोई समय विनिर्दिष्ट या तय नहीं किया गया है तो उचित समय के भीतर, अभिस्वीकृति प्राप्त नहीं की गई है वहां प्रवर्तक, प्रेषिती को यह कथन करते हुए कि उसके द्वारा अभिस्वीकृति प्राप्त नहीं की गई है और ऐसा उचित समय विनिर्दिष्ट करते हुए, जिस तक अभिस्वीकृति उसके द्वारा प्राप्त कर ली जानी चाहिए, नोटिस दे सकेगा और यदि पूर्वोक्त समय-सीमा के भीतर कोई अभिस्वीकृति प्राप्त नहीं होती है तो वह प्रेषिती को नोटिस देने के पश्चात्, इलैक्ट्रानिक अभिलेख के बारे में इस प्रकार समझ सकेगा मानो वह कभी भेजा ही न गया हो ।
13. इलैक्ट्रानिक अभिलेख के प्रेषण और प्राप्ति का समय और स्थान-(1) प्रवर्तक और प्रेषिती के बीच जैसा अन्यथा तय पाया गया है उसके सिवाय, किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख का प्रेषण उस समय होता है जब वह प्रवर्तक के नियंत्रण से बाहर किसी कम्प्यूटर साधन में डाला जाता है ।
(2) प्रवर्तक और प्रेषिती के बीच जैसा अन्यथा तय पाया गया है उसके सिवाय, किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख की प्राप्ति का समय निम्नलिखित रूप में अवधारित किया जाएगा, अर्थात्ः-
(क) यदि प्रेषिती ने इलैक्ट्रानिक अभिलेखों को प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए कोई कम्यूटर साधन अभिहित कर लिया है,-
(i) तो प्राप्ति उस समय हो जाती है जब इलैक्ट्रानिक अभिलेख अभिहित कम्प्यूटर साधन में डाला जाता है, या
(ii) यदि इलैक्ट्रानिक अभिलेख, प्रेषिती के ऐसे कम्प्यूटर साधन में भेजा जाता है जो अभिहित कम्प्यूटर साधन नहीं है तब प्राप्ति उस समय हो जाती है जब इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रेषिती द्वारा पुनःप्राप्त कर लिया जाता है;
(ख) यदि प्रेषिती ने विनिर्दिष्ट समयों के साथ-साथ, यदि कोई हो, कोई कम्प्यूटर साधन अभिहित नहीं किया है तो प्राप्ति तब होती है जब इलैक्ट्रानिक अभिलेख, प्रेषिती के कम्प्यूटर साधन में डाला जाता है ।
(3) प्रवर्तक और प्रेषिती के बीच जैसा अन्यथा तय पाया गया है उसके सिवाय, कोई इलैक्ट्रानिक अभिलेख उस स्थान पर प्रेषित कर दिया गया समझा जाता है जहां प्रवर्तक का अपना कारबार का स्थान है और उस स्थान पर प्राप्त हो गया समझा जाता है जहां प्रेषिती का अपना कारबार का स्थान है ।
(4) उपधारा (2) के उपबंध इस बात के होते हुए भी लागू होंगे कि वह स्थान जहां कंम्प्यूटर साधन अवस्थित है, उस स्थान से भिन्न हो सकता है जहां इलैक्ट्रानिक अभिलेख उपधारा (3) के अधीन प्राप्त कर लिया गया समझा जाता है ।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) यदि प्रवर्तक या प्रेषिती के एक से अधिक कारबार के स्थान हैं तो कारबार का प्रधान स्थान, कारबार का स्थान होगा;
(ख) यदि प्रवर्तक या प्रेषिती के पास कारबार का स्थान नहीं है तो उसके निवास का प्रायिक स्थान कारबार का स्थान समझा जाएगा;
(ग) किसी निगमित निकाय के संबंध में निवास का प्रायिक स्थान" से वह स्थान अभिप्रेत है जहां वह रजिस्ट्रीकृत है ।
अध्याय 5
सुरक्षित इलैक्ट्रानिक अभिलेख और सुरक्षित [इलैक्ट्रानिक चिह्नक]
14. सुरक्षित इलैक्ट्रानिक अभिलेख-जहां किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को, समय के किसी विनिर्दिष्ट क्षण पर सुरक्षा प्रक्रिया लागू की गई है वहां ऐसा अभिलेख, समय के ऐसे क्षण से सत्यापन के समय तक सुरक्षित इलैक्ट्रानिक अभिलेख समझा जाएगा ।
[15. सुरक्षित इलैक्ट्रानिक चिह्नक-कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक एक सुरक्षित इलैक्ट्रानिक चिह्नक समझा जाएगा, यदि-
(i) चिह्नक सृजन डाटा, चिह्नक लगाने के समय, हस्ताक्षरकर्ता के अनन्य नियंत्रणाधीन था और न कि किसी अन्य व्यक्ति के ; और
(ii) चिह्नक सृजन डाटा, ऐसी अनन्य रीति में भंडारित किया गया और लगाया गया था, जो विहित की जाए ।
स्पष्टीकरण-अंकीय चिह्नक की दशा में, चिह्नक सृजन डाटा से उपयोगकर्ता की प्राइवेट कुंजी अभिप्रेत है ।
16. सुरक्षा प्रक्रियाएं और पद्धतियां-केन्द्रीय सरकार, धारा 14 और धारा 15 के प्रयोजनों के लिए, सुरक्षा प्रक्रियाएं और पद्धतियां विहित कर सकेगी:
परंतु ऐसी सुरक्षा प्रक्रियाओं और पद्धतियों को विहित करते समय केन्द्रीय सरकार, वाणिज्यिक परिस्थितियों, संव्यवहारों की प्रकृति और ऐसी अन्य संबंधित बातों का ध्यान रखेगी, जो वह समुचित समझे ।]
अध्याय 6
प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों का विनियमन
17. नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों का एक नियंत्रक नियुक्त कर सकेगी और उसी या पश्चात्वर्ती अधिसूचना द्वारा उपनियंत्रक [और सहायक नियंत्रक, अन्य अधिकारी और कर्मचारीट भी उतनी संख्या में नियुक्त कर सकेगी जितनी वह ठीक समझे ।
(2) नियंत्रक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का केन्द्रीय सरकार के साधारण नियंत्रण और निदेशों के अधीन रहते हुए निर्वहन करेगा ।
(3) उप नियंत्रक और सहायक नियंत्रक, नियंत्रक द्वारा उन्हें समनुदेशित कृत्यों का निर्वहन, नियंत्रक के साधारण अधीक्षण और नियंत्रक के अधीन करेंगे ।
(4) नियंत्रक, उपनियंत्रकों 1[और सहायक नियंत्रकों, अन्य आधिकारी और कर्मचारियोंट की अर्हताएं, अनुभव और सेवा के निबंधन तथा शर्तें वे होंगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं ।
(5) नियंत्रक कार्यालय का प्रधान कार्यालय और शाखा कार्यालय ऐसे स्थानों पर होंगे, जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे और इनकी स्थापना ऐसे स्थानों पर ही सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे ।
(6) नियंत्रक कार्यालय की एक मोहर होगी ।
18. नियंत्रक के कृत्य-नियंत्रक, निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों का निष्पादन कर सकेगा, अर्थात्ः-
(क) प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों के क्रियाकलापों का पर्यवेक्षण करना;
(ख) प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों की लोक कुंजियों को प्रमाणित करना;
(ग) प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों द्वारा बनाए रखे जाने वाले मानक अधिकथित करना;
(घ) ऐसी अर्हताएं और अनुभव विनिर्दिष्ट करना जो प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के कर्मचारियों के पास होनी चाहिए;
(ङ) ऐसी शर्तें विनिर्दिष्ट करना जिनके अधीन प्रमाणकर्ता प्राधिकारी अपना कार्य करेगा;
(च) लिखित, मुद्रित या दृश्य सामग्री और विज्ञापनों की अन्तर्वस्तु विनिर्दिष्ट करना, जिसके [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र और लोक कुंजी की बाबत वितरण या उपयोग किया जा सके;
(छ) किसी 2[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र और कुंजी का रूप और अन्तर्वस्तु विनिर्दिष्ट करना;
(ज) वह प्ररूप और रीति विनिर्दिष्ट करना, जिसमें प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों द्वारा लेखे रखे जाएंगे;
(झ) उन निबंधनों और शर्तों को विनिर्दिष्ट करना, जिनके अधीन लेखा-परीक्षकों की नियुक्ति की जा सकेगी और उनको पारिश्रमिक संदत्त किया जा सकेगा;
(ञ) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा, अकेले या अन्य प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से किसी इलैक्ट्रानिक प्रणाली के स्थापन और ऐसी प्रणाली के विनियमन को सुकर बनाना;
(ट) वह रीति विनिर्दिष्ट करना, जिसमें प्रमाणकर्ता प्राधिकारी उपयोगकर्ताओं के साथ व्यवहार करेंगे;
(ठ) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी और उनके उपयोगकर्ताओं के बीच हितों के किसी टकराव का समाधान करना;
(ड) प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों के कर्तव्यों को अधिकथित करना;
(ढ) ऐसा डाटा संचय रखना, जिसमें प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी का प्रकटन अभिलेख हो, जिसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट हों, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं और जो जनता की पहुंच में हों ।
19. विदेशी प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों की मान्यता-(1) नियंत्रक, ऐसी शर्तों और निबंधनों के अधीन रहते हुए, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से और राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विदेशी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के रूप में मान्यता दे सकेगा ।
(2) जहां, किसी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को उपधारा (1) के अधीन मान्यता दी जाती है, वहां ऐसे प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विधिमान्य होगा ।
(3) यदि नियंत्रक का यह समाधान हो जाता है कि किसी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी ने ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों में से किसी का, जिनके अध्यधीन उसे उपधारा (1) के अधीन मान्यता प्रदान की गई थी, उल्लंघन किया है तो वह उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी मान्यता को प्रतिसंहृत कर सकेगा ।
। । । । । । ।
21. 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अनुज्ञप्ति-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई व्यक्ति, 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी करने की अनुज्ञप्ति के लिए नियंत्रक को आवेदन कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई अनुज्ञप्ति तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक कि आवेदक, अर्हता, विशेषज्ञता, जनशक्ति, वित्तीय संसाधन और अन्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं की बाबत ऐसी अपेक्षाएं पूरी न करता हो, जो ऐसे 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्रों को जारी करने के लिए आवश्यक हों, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं ।
(3) इस धारा के अधीन अनुदत्त कोई अनुज्ञप्ति,-
(क) ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए,
(ख) अन्तरणीय या वंशागत नहीं होगी;
(ग) ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन होगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
22. अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन-(1) अनुज्ञप्ति जारी करने के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए ।
(2) अनुज्ञप्ति जारी करने के लिए प्रत्येक आवेदन के साथ, निम्नलिखित संलग्न होंगे-
(क) प्रमाणन पद्धति विवरण;
(ख) आवेदक की पहचान करने की बाबत विवरण, जिसमें प्रक्रियाएं भी सम्मिलित हैं;
(ग) पच्चीस हजार रुपए से अनधिक की ऐसी फीस का संदाय, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए;
(घ) ऐसे अन्य दस्तावेज, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
23. अनुज्ञप्ति का नवीकरण-किसी अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए कोई आवेदन,-
(क) ऐसे प्ररूप में;
(ख) ऐसी फीस सहित होगा, जो पांच हजार रुपए से अधिक नहीं होगी,
जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए और अनुज्ञप्ति की विधिमान्यता की अवधि के अवसान से पैंतालीस दिन से अन्यून अवधि से पूर्व किया जाएगा ।
24. अनुज्ञप्ति प्रदान करने या उसे नामंजूर करने के लिए प्रक्रिया-नियंत्रक, धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों और ऐसी अन्य बातों पर, जिन्हें वह ठीक समझे, विचार करने के पश्चात्, अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा या आवेदन को नामंजूर कर सकेगाः
परन्तु इस धारा के अधीन कोई भी आवेदन तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को अपना पक्षकथन प्रस्तुत करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
25. अनुज्ञप्ति का निलंबन-(1) नियंत्रक, यदि उसका ऐसी जांच करने के पश्चात्, जिसे वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि प्रमाणकर्ता प्राधिकारी,-
(क) ने अनुज्ञप्ति जारी करने या उसके नवीकरण के लिए आवेदन में या उसके संबंध में ऐसा कोई कथन किया है जो तात्त्विक विशिष्टियों के बारे में गलत है या मिथ्या है;
(ख) उन निबंधनों और शर्तों का, जिनके अध्यधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई थी, पालन करने में असफल रहा है;
[(ग) धारा 30 में विनिर्दिष्ट प्रक्रियाओं और मानकों को बनाए रखने में असफल रहा है;]
(घ) ने इस अधिनियम, उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों या किए गए आदेश के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन किया है,
तो अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत कर सकेगाः
परन्तु कोई भी अनुज्ञप्ति तब तक प्रतिसंहृत नहीं की जाएगी जब तक कि प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को प्रस्तावित प्रतिसंहरण के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
(2) नियंत्रक, यदि उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त हेतुक है कि उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत करने के लिए कोई आधार है, आदेश द्वारा, उसके द्वारा आदेशित किसी जांच के पूरा होने तक ऐसी अनुज्ञप्ति को निलंबित कर सकेगाः
परन्तु कोई भी अनुज्ञप्ति दस दिन से अनधिक की अवधि के लिए तब तक निलंबित नहीं की जाएगी जब तक कि प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को, प्रस्तावित निलम्बन के विरुद्ध कारण बताने का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।
(3) ऐसा कोई प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, जिसकी अनुज्ञप्ति निलंबित कर दी गई है, ऐसे निलंबन के दौरान कोई [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी नहीं करेगा ।
26. अनुज्ञप्ति के निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचना-(1) जहां किसी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी की कोई अनुज्ञप्ति निलंबित या प्रतिसंहृत कर दी गई है वहां नियंत्रक, यथास्थिति, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण की एक सूचना, उसके द्वारा रखे जाने वाले डाटा-संचय में प्रकाशित करेगा ।
(2) जहां एक या अधिक निधान विनिर्दिष्ट किए गए हैं वहां नियंत्रक, यथास्थिति, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचना, ऐसे सभी निधानों में प्रकाशित करेगा:
परन्तु, यथास्थिति, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचना से युक्त डाटा-संचय ऐसी वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा, जो दिन-रात पहुंच में होगी :
परन्तु यह और कि यदि नियंत्रक, आवश्यक समझे तो वह, ऐसे इलैक्ट्रानिक या अन्य मीडिया में, जिसे वह उपयुक्त समझे, डाटा-संचय की अन्तर्वस्तु को प्रचारित कर सकेगा ।
27. प्रत्यायोजन की शक्ति-नियंत्रक, इस अध्याय के अधीन नियंत्रक की किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए उप नियंत्रक, सहायक नियंत्रक या किसी अधिकारी को लिखित रूप में प्राधिकृत कर सकेगा ।
28. उल्लंघनों का अन्वेषण करने की शक्ति-(1) नियंत्रक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, इस अधिनियम, तद्धीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उपबंधों के किसी भी उल्लंघन का अन्वेषण करेगा ।
(2) नियंत्रक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, वैसी ही शक्तियों का प्रयोग करेगा जो आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अध्याय 13 के अधीन आय-कर प्राधिकारियों को प्रदत्त हैं और ऐसी शक्तियों का प्रयोग उस अधिनियम के अधीन अधिकथित सीमाओं के अधीन रहते हुए करेगा ।
29. कंप्यूटरों और डाटा तक पहुंच-(1) धारा 69 की उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, नियंत्रक या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के पास, यदि यह संदेह करने का उचित कारण है कि [इस अध्याय के उपबंधों का कोई उल्लंघन किया गया हैट तो उसे किसी कंप्यूटर प्रणाली, किसी साधित्र, डाटा या ऐसी प्रणाली से संबंधित किसी अन्य सामग्री तक, ऐसी कंप्यूटर प्रणाली में उपलब्ध या अन्तर्विष्ट कोई सूचना या डाटा अभिप्राप्त करने के लिए, उसमें तलाशी करने या करवाने के प्रयोजन के लिए पहुंच होगी ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए नियंत्रक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति, ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसके भारसाधन में कंप्यूटर प्रणाली, डाटा साधित्र या सामग्री है या वह उसके प्रचालन से अन्यथा संबंधित है, ऐसी युक्तियुक्त तकनीकी और अन्य सहायता, जिसे वह आवश्यक समझे, प्रदान करने के लिए, आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा ।
30. प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा कतिपय प्रक्रियाओं का अनुसरण किया जाना-प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी,-
(क) हार्डवेयर, साफ्टवेयर और ऐसी प्रक्रियाओं का उपयोग करेगा, जो अतिक्रमण और दुरुपयोग से सुरक्षित हैं;
(ख) अपनी सेवाओं में विश्वसनीयता का युक्तियुक्त स्तर उपलब्ध कराएगा, जो आशयित कृत्यों के निर्वहन के लिए युक्तियुक्त रूप से उपयुक्त हैं;
(ग) यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करेगा, जिससे कि [इलैक्ट्रानिक चिह्नकों] की गोपनीयता और एकान्तता सुनिश्चित हो सके; । । ।
[(गक) इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए सभी इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्रों का संग्रह होगा ;
(गख) अपनी पद्धतियों, इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्रों और ऐसे प्रमाणपत्रों की वर्तमान प्रास्थिति की बाबत सूचना का प्रकाशन करेगा; और]
(घ) ऐसे अन्य मानकों का पालन करेगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
31. प्रमाणकर्ता प्राधिकारी अधिनियम आदि के अनुपालन को सुनिश्चित करेगा-प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, यह सुनिश्चित करेगा कि उसके द्वारा नियोजित या अन्यथा नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति, अपने नियोजन या नियुक्ति के दौरान इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों, विनियमों और किए गए आदेशों के उपबंधों का पालन करता है ।
32. अनुज्ञप्ति का संप्रदर्शन-प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, अपनी अनुज्ञप्ति को उस परिसर के उस सहजदृश्य स्थान पर, जिसमें वह अपना कारबार करता है, संप्रदर्शित करेगा ।
33. अनुज्ञप्ति का अभ्यर्पण-(1) ऐसा प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, जिसकी अनुज्ञप्ति निलंबित या प्रतिसंहृत कर दी गई है, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण के ठीक पश्चात् नियंत्रक को अनुज्ञप्ति अभ्यर्पित करेगा ।
(2) जहां कोई प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, उपधारा (1) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति का अभ्यर्पण करने में असफल रहेगा वहां वह व्यक्ति, जिसके पक्ष में अनुज्ञप्ति जारी की गई है, अपराध का दोषी होगा और कारावास से, जो छह मास तक हो सकेगा या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा या दोनों से दंडित किया जाएगा ।
34. प्रकटीकरण-(1) प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट रीति से,-
(क) अपने 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र को प्रकट करेगा, । । ।
(ख) उससे सुसंगत कोई प्रमाणन पद्धति विवरण प्रकट करेगा;
(ग) उसके प्रमाणकर्ता प्राधिकारी प्रमाणपत्र, यदि कोई हो, के प्रतिसंहरण या निलंबन की सूचना प्रकट करेगा; और
(घ) ऐसा कोई अन्य तथ्य प्रकट करेगा, जो किसी 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र की, जिसे उस प्राधिकारी ने जारी किया है, विश्वसनीयता को या उस प्राधिकारी की अपनी सेवाओं को निष्पादित करने की योग्यता को, तात्त्विक और प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है ।
(2) जहां प्रमाणकर्ता प्राधिकारी की राय में कोई घटना घटित हुई है या ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न हुई है जिससे उसकी कंप्यूटर प्रणाली की अखंडता या ऐसी शर्तों पर, जिनके अध्यधीन उसका 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया था, प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तब प्रमाणकर्ता प्राधिकारी,-
(क) ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को, जिसके उससे प्रभावित होने की संभावना है, अधिसूचित करने के लिए युक्तियुक्त प्रयास करेगा; या
(ख) ऐसी घटना या अवस्थिति से निपटने के लिए प्रमाणन पद्धति विवरण में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार कार्य करेगा ।
अध्याय 7
1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र
35. प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी किया जाना-(1) कोई भी व्यक्ति,1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप में आवेदन कर सकेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए ।
(2) ऐसे प्रत्येक आवेदन के साथ प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को संदेय की जाने वाली पच्चीस हजार रुपए से अनधिक उतनी फीस संलग्न होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए :
परन्तु उपधारा (2) के अधीन फीस विहित करते समय, आवेदकों के विभिन्न वर्गों के लिए विभिन्न फीसें विहित की जा सकेंगी ।
(3) ऐसे प्रत्येक आवेदन के साथ प्रमाणन पद्धति विवरण संलग्न होगा या जहां ऐसा विवरण नहीं है, वहां ऐसी विशिष्टियों वाला विवरण संलग्न होगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।
(4) उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, उपधारा (3) के अधीन प्रमाणन पद्धति विवरण या अन्य विवरण पर विचार करने और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र मंजूर कर सकेगा या आवेदन को, उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, नामंजूर कर सकेगा :
। । । । । । ।
[परन्तु] कोई भी आवेदन तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को प्रस्तावित नामंजूरी के विरुद्ध कारण दर्शित करने के लिए उचित अवसर न दे दिया गया हो ।
36. अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र जारी करने पर व्यपदेशन-अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र जारी करते समय प्रमाणकर्ता प्राधिकारी यह प्रमाणित करेगा कि-
(क) उसने इस अधिनियम, उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों का अनुपालन किया है;
(ख) उसने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र प्रकाशित किया है या उसे उस पर विश्वास करने वाले व्यक्ति को अन्यथा उपलब्ध कराया है और उपयोगकर्ता ने उसे स्वीकार किया है;
(ग) उपयोगकर्ता के पास अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी है;
[(गक) उपयोगकर्ता के पास ऐसी प्राइवेट कुंजी है, जो अंकीय चिह्नक का सृजन करने में समर्थ है ;
(गख) प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध की जाने वाली लोक कुंजी का उपयोगकर्ता द्वारा धारित प्राइवेट कुंजी द्वारा लगाए गए अंकीय चिह्नक का सत्यापन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है ।]
(घ) उपयोगकर्ता की लोक कुंजी और प्राइवेट कुंजी मिलकर एक कार्यकारी कुंजी युग्म बनाती है;
(ङ) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में अंतर्विष्ट सूचना सही है; और
(च) उसके पास किसी ऐसे सारवान् तथ्य की जानकारी नहीं है जिसे यदि अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सम्मिलित किया गया होता तो उसका खंड (क) से खंड (घ) में किए गए व्यपदेशनों की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता ।
37. अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र का निलंबन-(1) ऐसा प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, जिसने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र जारी किया है, उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए,-
(क) (i) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध उपयोगकर्ता से; या
(ii) उस उपयोगकर्ता की ओर से कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति से, उस आशय के अनुरोध की प्राप्ति पर;
(ख) यदि उसकी यह राय है कि अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र लोकहित में निलंबित किया जाना चाहिए,
ऐसे अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को निलंबित कर सकेगा ।
(2) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र पन्द्रह दिन से अधिक के लिए तब तक निलंबित नहीं किया जाएगा जब तक कि उपयोगकर्ता को उस विषय पर सुने जाने का अवसर न दे दिया गया हो ।
(3) इस धारा के अधीन अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र के निलंबन पर प्रमाणकर्ता प्राधिकारी उपयोगकर्ता को उसकी संसूचना देगा ।
38. अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र का प्रतिसंहरण-(1) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, अपने द्वारा जारी किया गया अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र उस दशा में प्रतिसंहृत कर सकेगा-
(क) जहां उपयोगकर्ता या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति उस आशय का अनुरोध करे; या
(ख) उपयोगकर्ता की मृत्यु हो जाती है; या
(ग) फर्म का विघटन या कंपनी का परिसमापन हो जाता है, यदि उपयोगकर्ता फर्म या कंपनी है ।
(2) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, और उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, अपने द्वारा जारी किए गए अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को किसी भी समय प्रतिसंहृत कर सकेगा, यदि उसकी यह राय है कि,-
(क) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में दिया गया कोई सारवान् तथ्य मिथ्या है, या उसे छिपा दिया गया है;
(ख) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र के जारी किए जाने से संबंधित अपेक्षाएं पूरी नहीं की गई हैं;
(ग) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी की प्राइवेट कुंजी या सुरक्षा प्रणाली ऐसी रीति से गोपनीय नहीं रह गई है जिससे अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता तात्त्विक रूप से प्रभावित होती है;
(घ) उपयोगकर्ता को दिवालिया या मृत घोषित किया गया है या जहां उपयोगकर्ता फर्म या कंपनी है वहां उसका विघटन या परिसमापन हो गया है या वह अन्यथा अस्तित्व में नहीं रह गई है ।
(3) कोई अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र तब तक प्रतिसंहृत नहीं किया जाएगा जब तक कि उपयोगकर्ता को मामले में सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।
(4) इस धारा के अधीन अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र का प्रतिसंहरण होने पर प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, उसकी संसूचना उपयोगकर्ता को देगा ।
39. निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचना-(1) जहां कोई अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र, धारा 37 या धारा 38 के अधीन निलंबित या प्रतिसंहृत किया जाता है वहां प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, यथास्थिति, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचना, ऐसी सूचना के प्रकाशन के लिए अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट निधान में, प्रकाशित करेगा ।
(2) जहां एक से अधिक निधान विनिर्दिष्ट किए गए हैं वहां प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, ऐसे सभी निधानों में, यथास्थिति, ऐसे निलंबन या प्रतिसंहरण की सूचनाएं प्रकाशित करेगा ।
अध्याय 8
उपयोगकर्ताओं के कर्तव्य
40. कुंजी-युग्म का उत्पादित किया जाना-जहां कोई अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र, जिसकी लोक कुंजी उस उपयोगकर्ता की प्राइवेट कुंजी के अनुरूप है जो अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध की जानी है, उपयोगकर्ता द्वारा स्वीकार कर लिया गया है [वहां] ऐसा उपयोगकर्ता सुरक्षा प्रक्रिया अपनाकर 1[उस कुंजी-युग्म को] तैयार करेगा ।
[40क. इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र के उपयोगकर्ता के कर्तव्य-इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र के संबंध में उपयोगकर्ता ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं ।]
41. अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र की स्वीकृति-(1) किसी उपयोगकर्ता के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया है यदि वह अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को-
(क) एक या अधिक व्यक्तियों को;
(ख) किसी निधान में, प्रकाशित करता है या उसका प्रकाशन प्राधिकृत करता है,
या अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र के लिए अपना अनुमोदन किसी रीति में अन्यथा प्रदर्शित करता है ।
(2) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को स्वीकार करके उपयोगकर्ता उन सभी को, जो अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में अंतर्विष्ट सूचना पर युक्तियुक्त रूप से विश्वास करते हैं, प्रमाणित करता है कि-
(क) उपयोगकर्ता के पास अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी है और वह उसे रखने का हकदार है;
(ख) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को उपयोगकर्ता द्वारा किए गए सभी व्यपदेशन और अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में अंतर्विष्ट सूचना से सुसंगत सभी तात्त्विक तथ्य सही हैं;
(ग) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में की ऐसी सभी सूचनाएं, जो उपयोगकर्ता की जानकारी में हैं, सही हैं ।
42. प्राइवेट कुंजी का नियंत्रण-(1) प्रत्येक उपयोगकर्ता, अपने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी का नियंत्रण रखने में युक्तियुक्त सावधानी बरतेगा और । । ।
(2) यदि अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी गोपनीय नहीं रह गई है, तो उपयोगकर्ता, इसकी संसूचना प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को ऐसी रीति में अविलम्ब देगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपयोगकर्ता तब तक दायी होगा जब तक कि उसने प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को सूचित न कर दिया हो कि प्राइवेट कुंजी गोपनीय नहीं रह गई है ।
अध्याय 9
[शास्तियां, प्रतिकर और अधिनिर्णय]
43. कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली आदि को नुकसान के लिए [शास्ति और प्रतिकर]-यदि कोई व्यक्ति, ऐसे स्वामी या किसी अन्य व्यक्ति की, जो किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क प्रणाली का भारसाधक है, अनुज्ञा के बिना,-
(क) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर नेटवर्क [या कंप्यूटर संसाधन] प्रणाली में पहुंचता है या पहुंच प्राप्त करता है;
(ख) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क से कोई डाटा, कंप्यूटर डाटा संचय या सूचना, जिसके अंतर्गत किसी स्थानांतरणीय भंडारण माध्यम में धृत या संचित कोई सूचना या डाटा भी हैं, डाउनलोड करता है, प्रतिलिपि करता है, या उसका उद्धरण लेता है;
(ग) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में किसी कंप्यूटर संदूषक या कंप्यूटर वाइरस का प्रवेश करता है, या प्रवेश करवाता है;
(घ) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में के किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क, डाटा, कंप्यूटर डाटा संचय या किसी अन्य कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाता है या पहुंचवाता है;
(ङ) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क को विच्छिन्न करता है या करवाता है;
(च) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति की किसी भी साधन से पहुंच से इंकार करता है या करवाता है;
(छ) इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में, किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में किसी व्यक्ति की पहुंच को सुकर बनाने के लिए कोई सहायता प्रदान करता है;
(ज) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में छेड़छाड़ या छलसाधन करके, किसी व्यक्ति द्वारा उपभोग की गई सेवाओं के प्रभारों को किसी अन्य व्यक्ति के लेखे में डालता है,
तो वह इस प्रकार प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर के रूप में ऐसी नुकसानी का जो एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं होगी, संदाय करने का दायी होगा ।
4[(झ) किसी कंप्यूटर संसाधन में विद्यमान किसी सूचना को नष्ट करता है, हटाता है या उसमें परिवर्तन करता है या उसके महत्व या उपयोगिता को कम करता है या उसे किन्हीं साधनों द्वारा हानिकर रूप से प्रभावित करता है;
(ञ) किसी कंप्यूटर संसाधन के लिए प्रयुक्त किसी कंप्यूटर स्रोत कोड को नुकसान पंहुचाने के आशय से चुराता है, छिपाता है, नष्ट या परिवर्तित करता है या किसी व्यक्ति से उसकी चोरी कराता है या उसे छिपवाता, नष्ट या परिवर्तित कराता है,]
3[तो वह इस प्रकार प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर के रूप में नुकसानी का संदाय करने का दायी होगा;]
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) कंप्यूटर संदूषक" से कंप्यूटर अनुदेशों का कोई ऐसा सेट अभिप्रेत है, जो निम्नलिखित के लिए अभिकल्पित किया गया हो,-
(क) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में के डाटा या कार्यक्रम को उपांतरित, नष्ट, अभिलिखित या पारेषित करने; या
(ख) कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क के सामान्य प्रवर्तन का किसी भी साधन से अनधिकार ग्रहण करने,
(ii) कंप्यूटर डाटा संचय" से पाठ, प्रतिबिंब, श्रव्य, दृश्य में सूचना, जानकारी, तथ्य, संकल्पना और अनुदेशों का व्यपदेशन अभिप्रेत है, जो प्रारूपित रीति में तैयार किया जा रहा है या तैयार किया गया है अथवा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा उत्पादित किया गया है और जो कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में उपयोग के लिए आशयित है;
(त्त्त्) कंप्यूटर वाइरस से ऐसा कोई कंप्यूटर अनुदेश, सूचना, डाटा या कार्यक्रम अभिप्रेत है जो किसी कंप्यूटर साधन के निष्पादन को नष्ट करता है, नुकसान पहुंचाता है, ह्रास करता है या प्रतिकूल प्रभाव डालता है अथवा स्वयं को किसी अन्य कंप्यूटर साधन से संलग्न कर लेता है और वह तब प्रवर्तित होता है जब कोई कार्यक्रम, डाटा या अनुदेश निष्पादित किया जाता है या उस कंप्यूटर साधन में कोई अन्य घटना घटती है;
(त्ध्) नुकसान" से किसी माध्यम द्वारा किसी कंप्यूटर साधन को नष्ट करना, परिवर्तित करना, हटाना, जोड़ना, उपान्तरित या पुनः व्यवस्थित करना अभिप्रेत है;
[(ध्) कंप्यूटर स्रोत कोड" से कंप्यूटर संसाधन के कार्यक्रमों, कंप्यूटरों समादेशों, डिजाइन और रेखांक तथा कार्यक्रम विश्लेषण को किसी रूप में सूचीबद्ध करना अभिप्रेत है ।]
[43क. डाटा को संरक्षित रखने में असफलता के लिए प्रतिकर-जहां कोई निगमित निकाय ऐसे किसी कंप्यूटर संसाधन में किसी संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा या सूचना को रखता है, उसका संव्यवहार करता है या उसको संभालता है जो उसके स्वामित्व में, नियंत्रण में है या जिसका वह प्रचालन करता है, युक्तियुक्त सुरक्षा पद्धतियों और प्रक्रियाओं के कार्यान्वयन और अनुरक्षण में उपेक्षा करता है और उसके द्वारा किसी व्यक्ति को सदोष हानि या सदोष लाभ पहुंचाता है, वहां ऐसा निगमित निकाय, इस प्रकार प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर के रूप में नुकसानी का संदाय करने के लिए दायी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) निगमित निकाय" से कोई कंपनी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत वाणिज्यिक या वृत्तिक क्रियाकलापों में लगी हुई फर्म, एकल स्वामित्व या व्यष्टियों का कोई अन्य संगम भी है;
(ii) युक्तियुक्त सुरक्षा पद्धतियों और प्रक्रियाओं" से ऐसी अप्राधिकृत पहुंच, नुकसानी, उपयोग, उपांतरण, प्रकटन या ह्रास, जो, यथास्थिति, पक्षकारों के बीच किसी करार में विनिर्दिष्ट किया जाए या जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी सूचना को संरक्षित करने के लिए अभिकल्पित सुरक्षा पद्धतियों और प्रक्रियाएं और ऐसे करार या किसी विधि के अभाव में, ऐसी युक्तियुक्त सुरक्षा पद्धतियां और प्रक्रियाएं, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे वृत्तिक निकायों या संगमों के परामर्श से, जिन्हें वह उपयुक्त समझे, विहित की जाएं, अभिप्रेत हैं;
(iii) संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा या सूचना" से ऐसी व्यक्तिगत सूचना अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे वृत्तिक निकायों या संगमों के परामर्श से, जिन्हें वह उचित समझे, विहित की जाए ।]
44. जानकारी, विवरणी, आदि देने में असफल रहने के लिए शास्ति-यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जिससे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अधीन,-
(क) नियंत्रक अथवा प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को कोई दस्तावेज, विवरणी या रिपोर्ट देना अपेक्षित है, उसे देने में असफल रहेगा, तो वह, ऐसी प्रत्येक असफलता के लिए एक लाख पचास हजार रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा;
(ख) विनियमों में उनके देने के लिए विनिर्दिष्ट समय के भीतर कोई विवरणी फाइल करने या कोई जानकारी, पुस्तक या अन्य दस्तावेज देना अपेक्षित है, विनियमों में उनके देने के लिए विनिर्दिष्ट समय के भीतर विवरणी फाइल करने या उसे देने में असफल रहेगा, तो वह, ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी असफलता बनी रहती है, पाचं हजार रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा;
(ग) लेखा बहियां या अभिलेख बनाए रखना अपेक्षित है, उन्हें बनाए रखने में असफल रहता है, तो वह, ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी असफलता बनी रहती है, दस हजार रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा ।
45. अवशिष्ट शास्ति-जो कोई, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों का उल्लंघन करेगा, तो वह ऐसे उल्लंघन के लिए, जिसके लिए अलग से किसी शास्ति का उपबंध नहीं किया गया है, ऐसे उल्लंघन से प्रभावित व्यक्ति को पच्चीस हजार रुपए से अनधिक के प्रतिकर का संदाय करने या पच्चीस हजार रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा ।
46. न्यायनिर्णयन करने की शक्ति-(1) इस अध्याय के अधीन न्यायनिर्णयन करने के प्रयोजन के लिए, जहां किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम, [दिए गए निदेश या किए गए आदेश के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन किया है, जो शास्ति या प्रतिकर का संदाय करने का दायी बनाता हैट वहां केन्द्रीय सरकार, उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए भारत सरकार के निदेशक की पंक्ति से अनिम्न किसी अधिकारी या राज्य सरकार के किसी समतुल्य अधिकारी को, केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित रीति में जांच करने के लिए, न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।
[(1क) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त न्यायनिर्णायक अधिकारी उन मामलों का न्यायनिर्णयन करने की अधिकारिता का प्रयोग करेगा, जिनमें क्षति या नुकसानी के लिए दावा पांच करोड़ रुपए से अधिक का नहीं है :
परंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक की क्षति या नुकसानी के लिए दावे की बाबत अधिकारिता सक्षम न्यायालय में निहित होगी ।]
(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को उस मामले में अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगा और यदि ऐसी जांच के पश्चात्, उसका यह समाधान हो जाता है कि उस व्यक्ति ने उल्लंघन किया है, तो वह, उस धारा के उपबंधों के अनुसार ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा या ऐसा प्रतिकर अधिनिर्णीत कर सकेगा, जिसे वह ठीक समझे ।
(3) कोई व्यक्ति, न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि उसके पास सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ऐसा अनुभव और ऐसा विधिक या न्यायिक अनुभव न हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए ।
(4) जहां एक से अधिक न्यायनिर्णायक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं वहां केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, उन विषयों और स्थानों को विनिर्दिष्ट करेगी, जिनकी बाबत ऐसे अधिकारी अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगे ।
(5) प्रत्येक न्यायनिर्णायक अधिकारी को सिविल न्यायालय की वे शक्तियां होंगी, जो धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन साइबर अपील अधिकरण को प्रदान की गई है, और :-
(क) उसके समक्ष की सभी कार्यवाहियां भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत न्यायिक कार्यवाहियां समझी जाएंगी;
(ख) उसे दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1974 (1974 का 2) की धारा 345 और धारा 346 के प्रयोजनार्थ सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
2[(ग) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश 21 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।]
47. न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा विचार की जाने वाली बातें-इस अध्याय के अधीन प्रतिकर की मात्रा का न्यायनिर्णयन करते समय, न्यायनिर्णायक अधिकारी, निम्नलिखित बातों पर सम्यक् ध्यान देगा, अर्थात्ः-
(क) व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप हुए अभिलाभ या अनुचित फायदे की रकम, जहां वह परिमाण निर्धारण योग्य हो;
(ख) व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को हुई हानि की रकम;
(ग) व्यतिक्रम की आवृत्तीय प्रकृति ।
अध्याय 10
साइबर । । । अपील अधिकरण
48. साइबर अपील अधिकरण की स्थापना-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, साइबर । । । अपील अधिकरण नामक एक या अधिक अपील अधिकरणों की स्थापना करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना में, वे विषय और स्थान भी विनिर्दिष्ट करेगी, जिनके संबंध में साइबर अपील अधिकरण अधिकारिता का प्रयोग करेगा ।
[49. साइबर अपील अधिकरण की संरचना-(1) साइबर अपील अधिकरण, अध्यक्ष और उतने अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जितने केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियुक्त करे :
परंतु सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 के प्रारंभ के ठीक पूर्व इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन साइबर अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त व्यक्ति, सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया समझा जाएगा ।
(2) साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के परामर्श से किया जाएगा ।
(3) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए,-
(क) साइबर अपील अधिकरण की अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग उसकी न्यायपीठों द्वारा किया जा सकेगा;
(ख) किसी पीठ का गठन, साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष द्वारा ऐसे अधिकरण के एक या दो सदस्यों से, जो अध्यक्ष उपयुक्त समझे, किया जा सकेगा;
(ग) साइबर अपील अधिकरण की न्यायपीठों की बैठक नई दिल्ली और ऐसे अन्य स्थानों पर होगी, जो केन्द्रीय सरकार, साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे;
(घ) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन क्षेत्रों को विनिर्दिष्ट करेगी जिनके संबंध में साइबर अपील अधिकरण की प्रत्येक न्यायपीठ अपनी अधिकारिता का प्रयोग कर सकेगी ।
(4) उपधारा (3) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, साइबर अपील अधिकरण का अध्यक्ष, ऐसे अधिकरण के किसी सदस्य का एक न्यायपीठ से दूसरी न्यायपीठ में स्थानांतरण कर सकेगा ।
(5) यदि साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य को किसी मामले या विषय की सुनवाई के किसी प्रक्रम पर यह प्रतीत होता है कि मामला या विषय ऐसी प्रकृति का है कि उसे अधिक सदस्यों से मिलकर बनने वाली किसी न्यायपीठ द्वारा सुना जाना चाहिए, तो उस मामले या विषय को अध्यक्ष द्वारा ऐसी न्यायपीठ को, जिसे अध्यक्ष उचित समझे, अंतरित किया जा सकेगा ।
50. साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हंताएं-(1) कोई व्यक्ति साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है या न्यायाधीश होने के लिए अर्हित है ।
(2) साइबर अपील अधिकरण के सदस्यों को, उपधारा (3) के अधीन नियुक्त किए जाने वाले न्यायिक सदस्य के सिवाय, केन्द्रीय सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, उद्योग, प्रबंध या उपभोक्ता मामलों का विशेष ज्ञान और वृत्तिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा :
परंतु किसी व्यक्ति को सदस्य के रूप में तभी नियुक्त किया जाएगा जब वह केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की सेवा में है या रहा है और उसने भारत सरकार के अपर सचिव का पद या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार में कोई समतुल्य पद एक वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए अथवा भारत सरकार में संयुक्त सचिव का पद या केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार में कोई समतुल्य पद सात वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए धारण किया हो ।
(3) साइबर अपील अधिकरण के न्यायिक सदस्यों को, केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा जो भारतीय विधिक सेवा का सदस्य है या रहा है और उसने अपर सचिव का पद एक वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए या उस सेवा का श्रेणी-पद पांच वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए धारण किया है ।
51. अध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि, सेवा की शर्तें, आदि-(1) साइबर अपील अधिकरण का अध्यक्ष या सदस्य उस तारीख से, जिसको वह अपना पदभार ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए या उसके पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा ।
(2) साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार अपना यह समाधान करेगी कि उस व्यक्ति का कोई ऐसा वित्तीय या अन्य हित नहीं है जिससे ऐसे अध्यक्ष या सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है ।
(3) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी को साइबर अपील अधिकरण के, यथास्थिति, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में उसके चयन पर, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण करने से पूर्व सेनानिवृत्त होना होगा ।
52. अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें-साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य को, संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें, जिनके अंतर्गत पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे भी हैं, ऐसे होंगे जो विहित किए जाएं ।
52क. अधीक्षण, निदेशन आदि की शक्तियां-साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष को, उस अधिकरण के कामकाज के संचालन में साधारण अधीक्षण और निदेशन की शक्तियां होंगी और वह अधिकरण की बैठकों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त अधिकरण की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं ।
52ख. न्यायपीठों के बीच कारबार का वितरण-जहां न्यायपीठों का गठन किया जाता है, वहां साइबर अपील अधिकरण का अध्यक्ष, आदेश द्वारा, न्यायपीठों के बीच उस अधिकरण के कारबार और प्रत्येक न्यायपीठ द्वारा कार्यवाही किए जाने वाले मामलों का भी वितरण कर सकेगा ।
52ग. मामलों को अन्तरित करने की अध्यक्ष की शक्ति-पक्षकारों में से किसी पक्षकार के आवेदन पर और पक्षकारों को सूचना के पश्चात् तथा ऐसे पक्षकारों में से किसी की, जिनकी सुनवाई करना वह समुचित समझे या स्वप्रेरणा से ऐसी सूचना के बिना, सुनवाई करने के पश्चात् साइबर अपील अधिकरण का अध्यक्ष किसी न्यायपीठ के समक्ष लंबित किसी मामले को, निपटान के लिए किसी अन्य न्यायपीठ को अंतरित कर सकेगा ।
52घ. बहुमत द्वारा विनिश्चय-यदि दो सदस्यों से मिलकर बनने वाली किसी न्यायपीठ के सदस्यों की किसी प्रश्न पर राय में मतभेद है तो वे उस प्रश्न या उन प्रश्नों का, जिन पर उनमें मतभेद है, कथन करेंगे और साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष को निदेश करेंगे जो स्वयं उस प्रश्न या प्रश्नों की सुनवाई करेगा और ऐसे प्रश्न या प्रश्नों का विनिश्चय ऐसे सदस्यों के बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा, जिन्होंने मामले की सुनवाई की है, जिनके अंतर्गत वे सदस्य भी हैं, जिन्होंने मामले की पहले सुनवाई की थी ।]
53. रिक्तियों का भरा जाना-यदि साइबर अपील अधिकरण के [यथास्थिति, अध्यक्ष या सदस्य] के पद में अस्थायी अनुपस्थिति से भिन्न कारण से कोई रिक्ति होती है तो केन्द्रीय सरकार, उस रिक्ति को भरने के लिए इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति करेगी और साइबर अपील अधिकरण के समक्ष कार्यवाहियां उस प्रक्रम से चालू रखी जा सकेंगी जिस पर रिक्ति भरी जाती है ।
54. पद-त्याग और पद से हटाया जाना-(1) साइबर अपील अधिकरण का [अध्यक्ष या सदस्य] केन्द्रीय सरकार को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लिखित सूचना द्वारा अपने पद का त्याग कर सकेगा :
परन्तु उक्त 2[अध्यक्ष या सदस्य] जब तक कि उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा उससे पहले पद का त्याग करने के लिए अनुज्ञात न किया गया हो, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास की समाप्ति तक या उसके उत्तरवर्ती के रूप में सम्यक्तः नियुक्त व्यक्ति के पद-ग्रहण करने तक या उसकी पदावधि की समाप्ति तक, जो भी पूर्वतम हो, अपना पद धारण करता रहेगा ।
(2) साइबर अपील अधिकरण के 2[अध्यक्ष या सदस्य] को, उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा की गई ऐसी जांच के पश्चात्, जिसमें संबद्ध 2[अध्यक्ष या सदस्य] को उसके विरुद्ध आरोपों की सूचना दे दी गई हो और इन आरोपों की बाबत सुनवाई का उचित अवसर दे दिया गया हो, साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर, केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए आदेश से ही उसके पद से हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(3) केन्द्रीय सरकार, पूर्वोक्त 2[अध्यक्ष या सदस्य] के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण की प्रक्रिया को नियमों द्वारा विनियमित कर सकेगी ।
55. अपील अधिकरण का गठन करने वाले आदेश का अन्तिम होना और उसकी कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना-केन्द्रीय सरकार का साइबर अपील अधिकरण के [अध्यक्ष या सदस्यट के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति करने वाला कोई आदेश किसी भी रीति से प्रश्नगत नहीं किया जाएगा और साइबर अपील अधिकरण का कोई कार्य या उसके समक्ष कार्यवाही केवल इस आधार पर किसी भी रीति से प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि साइबर अपील अधिकरण के गठन में कोई दोष है ।
56. साइबर अपील अधिकरण के कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार, साइबर अपील अधिकरण को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह सरकार उचित समझे ।
(2) साइबर अपील अधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी, [अध्यक्ष] के साधारण अधीक्षण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे ।
(3) साइबर अपील अधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
57. साइबर अपील अधिकरण को अपील-(1) उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के अधीन नियंत्रक या न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस साइबर अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा, जिसकी उस विषय पर अधिकारिता है ।
(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पक्षकारों की सहमति से किए गए किसी आदेश के विरुद्ध अपील साइबर अपील अधिकरण को नहीं होगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील, उस तारीख से, जिसको नियंत्रक या न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा किए गए आदेश की प्रति व्यथित व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जाती है, पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर फाइल की जाएगी और वह ऐसे प्ररूप में होगी और उसके साथ उतनी फीस होगी जो विहित की जाए :
परन्तु साइबर अपील अधिकरण, उक्त पैंतालीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उक्त अवधि के भीतर उसे फाइल न किए जाने के लिए पर्याप्त कारण था ।
(4) साइबर अपील अधिकरण, उपधारा (1) के अधीन अपील की प्राप्ति पर, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, उस आदेश पर जिसके विरुद्ध अपील की गई है, उसकी पुष्टि, उपान्तरण या अपास्त करने वाला ऐसा आदेश पारित करेगा, जो वह उचित समझे ।
(5) साइबर अपील अधिकरण, अपने द्वारा किए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपील के पक्षकारों और संबंधित नियंत्रक या न्यायनिर्णायक अधिकारी को भेजेगा ।
(6) उपधारा (1) के अधीन साइबर अपील अधिकरण के समक्ष फाइल की गई अपील यथासंभवशीघ्र निपटाई जाएगी और अपील की प्राप्ति की तारीख से छह मास के भीतर अपील को अंतिम रूप से निपटाने का प्रयास किया जाएगा ।
58. साइबर अपील अधिकरण की शक्तियां और प्रक्रिया-(1) साइबर अपील अधिकरण, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा अधिकथित प्रक्रिया से आबद्ध नहीं होगा, किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों से मार्गदर्शित होगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंधों तथा किन्हीं नियमों के अधीन होगा । साइबर अपील अधिकरण को, अपनी प्रक्रिया को, जिसके अंतर्गत वह स्थान भी है जहां उसकी बैठकें होंगी, विनियमित करने की शक्ति होगी ।
(2) साइबर अपील अधिकरण को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित विषयों के संबंध में वही शक्तियां होंगी, जो किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्ः-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) दस्तावेजों या अन्य इलैक्ट्रानिक अभिलेखों को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;
(घ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(ङ) अपने विनिश्चयों का पुनर्विलोकन करना;
(च) किसी आवेदन को व्यतिक्रम के लिए खारिज करना या एकपक्षीय विनिश्चय करना;
(छ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।
(3) साइबर अपील अधिकरण के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत और धारा 196 के प्रयोजनार्थ न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी और साइबर अपील अधिकरण, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
59.विधिक प्रतिनिधित्व का अधिकार-अपीलार्थी, साइबर अपील अधिकरण के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने के लिए स्वयं हाजिर हो सकेगा या एक अथवा अधिक विधि व्यवसायियों को अथवा अपने किसी अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगा ।
60. परिसीमा-परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उपबंध, जहां तक हो सके, साइबर अपील अधिकरण को की गई अपील को लागू होंगे ।
61. सिविल न्यायालय की अधिकारिता का न होना-ऐसे किसी विषय की बाबत, जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन नियुक्त कोई न्यायनिर्णायक अधिकारी या इस अधिनियम के अधीन गठित कोई साइबर अपील अधिकरण, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अवधारित करने के लिए सशक्त है, कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करने की किसी न्यायालय को अधिकारिता नहीं होगी और इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई व्यादेश अनुदत्त नहीं किया जाएगा ।
62. उच्च न्यायालय को अपील-साइबर अपील अधिकरण के किसी विनिश्चय या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे विनिश्चय या आदेश से उद्भूत होने वाले तथ्य या विधि के किसी प्रश्न पर, साइबर अपील अधिकरण के विनिश्चय या आदेश की उसे संसूचना की तारीख से साठ दिन के भीतर उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा :
परन्तु यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी, उक्त अवधि के भीतर अपील फाइल करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो वह ऐसी और अवधि के भीतर, जो साठ दिन से अधिक नहीं होगी, अपील फाइल करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।
63. अपराधों का शमन-(1) इस [अधिनियम] के अधीन कोई उल्लंघन, न्यायनिर्णयन कार्यवाहियों के संस्थापन के पूर्व या पश्चात्, यथास्थिति, नियंत्रक या उसके द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा या न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो नियंत्रक या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, शमन किया जा सकेगा :
परन्तु ऐसी राशि, किसी भी दशा में, शास्ति की उस अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी, जो इस अधिनियम के अधीन इस प्रकार शमन किए गए उल्लंघन के लिए अधिरोपित है ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात, उस व्यक्ति को लागू नहीं होगी, जो उसके द्वारा किए गए पहले उल्लंघन, जिसका शमन किया गया था, की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर वही या वैसा ही उल्लंघन करता है ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, उस तारीख से, जिसको उल्लंघन का पहले शमन किया गया था, तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किया गया कोई दूसरा या पश्चात्वर्ती उल्लंघन पहला उल्लंघन समझा जाएगा ।
(3) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी उल्लंघन का शमन किया गया है, वहां इस प्रकार शमन किए गए उल्लंघन की बाबत उस उल्लंघन के दोषी व्यक्ति के विरुद्ध, यथास्थिति, कोई कार्यवाही या अतिरिक्त कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
64. [शास्ति या प्रतिकर की वसूली]-इस अधिनियम के अधीन 2[अधिरोपित शास्ति, या अधिनिर्णीत प्रतिकर] यदि उसका संदाय नहीं किया जाता है, भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल की जाएगी और, यथास्थिति, अनुज्ञप्ति या [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र शास्ति का संदाय किए जाने तक निलंबित रखा जाएगा ।
अध्याय 11
अपराध
65. कंप्यूटर साधन कोड से छेड़छाड़-जो कोई, कम्प्यूटर, कम्प्यूटर कार्यक्रम, कम्प्यूटर प्रणाली या कम्प्यूटर नेटवर्क के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी कम्प्यूटर साधन कोड को, जब कम्प्यूटर साधन कोड का रखा जाना या अनुरक्षित किया जाना तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा अपेक्षित हो, जानबूझकर या साशय छिपाता है, नष्ट करता है या परिवर्तित करता है अथवा साशय या जानबूझकर किसी अन्य से छिपवाता है, नष्ट कराता है या परिवर्तित कराता है तो वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कम्प्यूटर साधन कोड" से कार्यक्रमों, कम्प्यूटर समादेशों, डिजाइन और विन्यास का सूचीबद्ध करना तथा कम्प्यूटर साधन का किसी भी रूप में कार्यक्रम विश्लेषण अभिप्रेत है ।
[66. कंप्यूटर से संबंधित अपराध-यदि कोई व्यक्ति, धारा 43 में निर्दिष्ट कोई कार्य बेईमानी से या कपटपूर्वक करता है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) बेईमानी से" शब्दों का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 24 में है;
(ख) कपटपूर्वक" शब्द का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 25 में है ।
66क. संसूचना सेवा आदि द्वारा आक्रामक संदेश भेजने के लिए दंड-कोई व्यक्ति, जो किसी कंप्यूटर संसाधन या किसी संसूचना के माध्यम से,-
(क) ऐसी किसी सूचना को, जो अत्यधिक आक्रामक या धमकाने वाली प्रक्रति की है; या
(ख) ऐसी किसी सूचना को, जिसका वह मिथ्या होना जानता है, किंतु क्षोभ, असुविधा, खतरा, रुकावट, अपमान, क्षति या आपराधिक अभित्रास, शत्रुता, घृणा या वैमनस्य फैलाने के प्रयोजन के लिए, लगातार ऐसे कंप्यूटर संसाधन या किसी संसूचना युक्ति का उपयोग करके,
(ग) ऐसी किसी इलैक्ट्रानिक डाक या इलैक्ट्रानिक डाक संदेश को, ऐसे संदेशों के उद्गम के बारे में प्रेषिती या पाने वाले को क्षोभ या असुविधा कारित करने या प्रवंचित या भ्रमित करने के प्रयोजन के लिए,
भेजता है तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इलैक्ट्रानिक डाक" और इलैक्ट्रानिक डाक संदेश" पदों से किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति में सृजित या पारेषित या प्राप्त किया गया कोई संदेश या सूचना अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत पाठ, आकृति, आडियो, वीडियो और किसी अन्य इलैक्ट्रानिक अभिलेख के ऐसे संलग्नक भी है, जो संदेश के साथ भेजे जाएं ।
66ख. चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को बेइमानी से प्राप्त करने के लिए दंड-जो कोई ऐसे किसी चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह चुराया गया कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या प्रतिधारण करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
66ग. पहचान चोरी के लिए दंड-जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से किसी अन्य व्यक्ति के इलैक्ट्रानिक चिह्नक, पासवर्ड या किसी अन्य विशिष्ट पहचान चिह्न का प्रयोग करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा ।
66घ. कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा छल करने के लिए दंड-जो कोई, किसी संचार युक्ति या कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा ।
66ङ. एकांतता के अतिक्रमण के लिए दंड-जो कोई, साशय या जानबूझकर किसी व्यक्ति के गुप्तांग के चित्र उसकी सहमति के बिना उस व्यक्ति की एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों में खींचेगा, प्रकाशित या पारेषित करेगा, वह ऐसे कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो लाख रुपए से अधिक का नहीं हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) पारेषण" से किसी दृश्यमान चित्र को इस आशय से इलैक्ट्रानिक रूप में भेजना अभिप्रेत है कि उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा देखा जाए;
(ख) किसी चित्र के संबंध में चित्र खींचना" से वीडियो टेप, फोटोग्राफ, फिल्म तैयार करना या किसी साधन द्वारा अभिलेख बनाना अभिप्रेत है;
(ग) गुप्तांग" से नग्न या अंतःवस्त्र सज्जित जननांग, जघन अंग, नितंब या स्त्री स्तन अभिप्रेत हैं;
(घ) प्रकाशित करने" से मुद्रित या इलैक्ट्रानिक रूप में पुनःनिर्माण करना और उसे जनसाधारण के लिए उपलब्ध कराना अभिप्रेत है;
(ङ) एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों के अधीन" से ऐसी परिस्थितियां अभिप्रेत हैं, जिनमें किसी व्यक्ति को यह युक्तियुक्त प्रत्याशा हो सकती है कि,-
(i) वह इस बात की चिंता किए बिना कि उसके गुप्तांग का चित्र खींचा जा रहा है; एकांतता में अपने वस्त्र उतार सकता या उतार सकती है, या
(ii) इस बात पर ध्यान दिए बिना कि वह व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान या निजी स्थान में है उसके गुप्तांग का कोई भाग जनसाधारण को दृश्यमान नहीं होगा ।
66च. साइबर आतंकवाद के लिए दंड-(1) जो कोई,-
(अ) भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या प्रभुता को खतरे में डालने या जनता या जनता के किसी वर्ग में,-
(i) कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को पहुंचे से इंकार करके या इंकार कराके; या
(ii) प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक किसी कंप्यूटर संसाधन में प्रवेश या उस तक पहुंच करने का प्रयास करके; या
(iii) किसी कंप्यूटर संदूषक को सन्निविष्ट करके या सन्निविष्ट कराके,
आतंक फैलाने के आशय से और ऐसा करके ऐसा कार्य करता है जिससे व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें क्षति होती है या संपत्ति का नाशा या विनाश होता है या होने की संभावना है या यह जानते हुए कि इससे समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति या सेवाओं को नुकसान या उसका विनाश होने की संभावना है या धारा 70 के अधीन विनिर्दिष्ट संवेदनशील सूचना अवसंरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(आ) जानबूझकर या साशय किसी कंप्यूटर संसाधन में प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक प्रवेश या पहुंच करता है और ऐसे कार्य द्वारा ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधारसामग्री तक, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों के कारण निर्बंधित है या कोई निर्बंधित सूचना डाटा या कंप्यूटर डाटा आधारसामग्री तक यह विश्वास करते हुए पहुंच प्राप्त करता है कि इस प्रकार अभिप्राप्त ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधारसामग्री का उपयोग भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हितों को या न्यायालय की अवमानना के संबंध मे, मानहानि या किसी अपराध के उत्प्रेरण के संबंध में किसी विदेशी राष्ट्र, व्यष्टि, समूह के फायदे को क्षति पहुंचाने के लिए या अन्यथा किया जा सकता है या किए जाने की संभावना है,
तो वह साइबर आतंकवाद का अपराध करेगा ।
(2) जो कोई साइबर आतंकवाद कारित या करने की कूटरचना करेगा, तो वह कारावास से जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
67. अश्लील सामग्री का इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशन या पारेषण करने के लिए दंड-जो कोई, इलैक्ट्रानिक रूप में, ऐसी सामग्री को प्रकाशित या पारेषित करता है अथवा प्रकाशित या पारेषित कराता है, जो कामोत्तेजक है या जो कामुकता की अपील करती है या यदि इसका प्रभाव ऐसा है जो व्यक्तियों को कलुषित या भ्रष्ट करने का आशय रखती है जिसमें सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसमें अंर्तविष्ट या उसमें आरुढ़ सामग्री को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना है, पहली दोषसिद्धि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।
67क. कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य आदि वाली सामग्री के इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशन के लिए दंड-जो कोई, किसी ऐसी सामग्री को इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित करता है या पारेषित करता है या प्रकाशित या पारेषित कराता है, जिसमें कामुकता व्यक्त करने का कार्य या आचरण अंतर्वलित है, पहली दोषसिद्धि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।
67ख. कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य आदि में बालकों को चित्रित करने वाली सामग्री को इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित या पारेषित करने के लिए दंड-जो कोई,-
(क) किसी इलैक्ट्रानिक रूप में ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित या पारेषित करेगा या प्रकाशित या पारेषित कराएगा, जिसमें कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य या आचरण में लगाए गए बालकों को चित्रित किया जाता है; या
(ख) अश्लील या अभद्र या कामुकता व्यक्त करने वाली रीति में बालकों का चित्रण करने वाली सामग्री का पाठ या अंकीय चित्र किसी इलैक्ट्रानिक रूप में तैयार करेगा, संगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, पढ़ेगा, डाउनलोड करेगा, उसे बढ़ावा देगा, आदान-प्रदान या वितरित करेगा; या
(ग) कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य के लिए और उसके संबंध में या ऐसी रीति में बालकों को एक या अधिक बालकों के साथ आन-लाइन संबंध के लिए लगाएगा, फुसलाएगा या उत्प्रेरित करेगा, जो कंम्पयूटर संसाधन पर किसी युक्तियुक्त वयस्क को बुरी लग सकती है; या
(घ) आन-लाइन बालकों का दुरुपयोग किए जाने को सुकर बनाएगा; या
(ङ) बालकों के साथ कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य के संबंध में अपने दुर्व्यवहार को किसी इलैक्ट्रानिक रूप में अभिलिखित करेगा,
तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, और दूसरी और पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा :
परन्तु धारा 67, धारा 67क और इस धारा के उपबंधों का विस्तार निम्नलिखित किसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या इलैक्ट्रानिक रूप में आकृति पर नहीं है :-
(i) जिसका प्रकाशन इस आधार पर जनकल्याण के रूप में न्यायोचित साबित किया गया हो कि ऐसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या आकृति, विज्ञान, साहित्य या शिक्षण या सामान्य महत्व के अन्य उद्देश्यों के हित में है; या
(ii) जो सद्भाविक परंपरा या धार्मिक प्रयोजनों के लिए रखी या प्रयुक्त की गई है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, बालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है ।
67ग. मध्यवर्त्तियों द्वारा सूचना का परिरक्षण और प्रतिधारण-(1) मध्यवर्ती ऐसी सूचना का, जो विनिर्दिष्ट की जाए, परिरक्षण और प्रतिधारण ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति तथा रूप में करेगा जो केन्द्रीय सरकार विहित करे ।
(2) ऐसा कोई मध्यवर्ती, जो साशय या जानबूझकर उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।]
68. नियंत्रक की निदेश देने की शक्ति-(1) नियंत्रक, आदेश द्वारा, प्रमाणकर्ता प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी के किसी कर्मचारी को आदेश में विनिर्दिष्ट उपाय करने या ऐसे क्रियाकलापों को बंद कर देने का निदेश दे सकेगा यदि वे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या किन्हीं विनियमों के किन्हीं उपबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं ।
[(2) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश का अनुपालन करने में साशय या जानबूझकर असफल रहता है, अपराध का दोषी होगा और दोषसिद्धि पर कारावास का, जिसकी अवधि दो वर्ष से अधिक की नहीं होगी या एक लाख रुपए से अनधिक के जुर्माने का या दोनों का दायी होगा ।]
[69. किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना के अन्तररोधन या मानिटरिंग या विगूढ़न के लिए निदेश जारी करने की शक्ति-(1) जहां केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की प्रभुता या अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था के हित में अथवा उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन के निवारण या किसी अपराध के अन्वेषण के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है, वहां वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से आदेश द्वारा समुचित सरकार के किसी अभिकरण को, किसी कम्प्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त या भण्डारित किसी सूचना को अंतर्रुद्ध या मानीटर करने अथवा विगूढ़न करने अथवा अंतर्रुद्ध या मानीटर कराने या विगूढ़ न कराने का निदेश दे सकेगी ।
(2) प्रक्रिया और रक्षोपाय, जिनके अधीन ऐसा अंतररोधन या मानीटरिंग या विगूढ़न किया जा सकेगा, वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(3) उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कम्प्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अभिकरण द्वारा मांगे जाने पर, निम्नलिखित के लिए सभी सुविधाएं और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा-
(क) ऐसी सूचना जनित करने, पारेषित करने, प्राप्त करने या भंडार करने वाले कम्प्यूटर संसाधन तक पहुंच उपलब्ध कराना या पहुंच सुनिश्चित करना; या
(ख) यथास्थिति, सूचना को अंतर्रुद्ध, मानीटर या विगूढ़न करना; या
(ग) कम्प्यूटर संसाधन में भंडारित सूचना उपलब्ध कराना ।
(4) ऐसा उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कोई व्यक्ति जो उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट अभिकरण की सहायता करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
69क. किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना की सार्वजनिक पहुंच के अवरोध के लिए निदेश जारी करने की शक्ति-(1) जहां केन्द्रीय सरकार या इस निमित्त उसके द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की प्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण सबंधों या लोक व्यवस्था के हित में या उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है, वहां वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, आदेश द्वारा सरकार के किसी अभिकरण या मध्यवर्ती को किसी कंप्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त, भंडारित या परपोषित किसी सूचना को जनता की पहुंच के लिए अवरुद्ध करने का निदेश दे सकेगा या उसका अवरोध कराएगा ।
(2) वह प्रक्रिया और रक्षोपाय, जिनके अधीन जनता की पहुंच के लिए ऐसा अवरोध किया जा सकेगा, वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(3) वह मध्यवर्ती जो उपधारा (1) के अधीन जारी निर्देश का पालन करने में असफल रहता है, कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
69ख. साइबर सुरक्षा के लिए किसी कम्यूटर संसाधन के माध्यम से ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना मानीटर करने और एकत्र करने के लिए प्राधिकृत करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, देश में साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कंप्यूटर संदूषक की पहचान, विश्लेषण और अनाधिकार प्रवेश या फैलाव को रोकने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी कंप्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना, मानीटर और एकत्र करने के लिए सरकार के किसी अभिकरण को प्राधिकृत कर सकेगी ।
(2) मध्यवर्ती या कम्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, जब ऐसे अभिकरण द्वारा मांग की जाती है, जिसे उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत किया गया है, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा और आन-लाइन पहुंच को समर्थ बनाने के लिए ऐसे अभिकरण को सभी सुविधाएं देगा या ऐसे ट्रैफिक आंकड़े या सूचना जनित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित करने वाले कम्प्यूटर संसाधन को आन-लाइन पहुंच सुरक्षित कराएगा और उपलब्ध कराएगा ।
(3) ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना को मानीटर और एकत्र करने के लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(4) ऐसा कोई मध्यवर्ती जो साशय या जानबूझकर उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करता है कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(i) कंप्यूटर संदूषण" का वही अर्थ होगा जो धारा 43 में है;
(ii) ट्रैफिक आंकड़ा" से ऐसे किसी व्यक्ति, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क या अवस्थिति की पहचान करने वाला या पहचान करने के लिए तात्पर्यित कोई डाटा अभिप्रेत है जिसको या जिससे संसूचना पारेषित की गई या पारेषित की जाए और इसके अंतर्गत संसूचना उद्गम, गंतव्य मार्ग, समय, तारीख, आकार, की गई सेवा की अवधि या प्रकार और कोई अन्य सूचना भी है ।]
70. संरक्षित प्रणाली- [(1) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे कम्यूटर संसाधन को, जो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः नाजुक सूचना अवसंरचना की सुविधा को प्रभावित करता है, सरंक्षित प्रणाली घोषित कर सकेगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, नाजुक सूचना अवसंरचना" से ऐसा कंप्यूटर संसाधन अभिप्रेत है, जिसके अक्षमीकरण या नाश से राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, लोक स्वास्थ्य या सुरक्षा कमजोर होगी ।]
(2) समुचित सरकार, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगी जो उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित संरक्षित प्रणाली तक पहुंचने के लिए प्राधिकृत है ।
(3) कोई व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के उल्लंघन में किसी संरक्षित प्रणाली तक पहुंच प्राप्त कर लेता है या पहुंच प्राप्त करने का प्रयत्न करता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
[(4) केन्द्रीय सरकार, ऐसी संरक्षित प्रणाली के लिए सूचना सुरक्षा पद्धतियां और प्रक्रियाएं विहित करेगी ।]
[70क. राष्ट्रीय नोडल अभिकरण-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, सरकार के किसी संगठन को नाजुक सूचना अवसंरचना संरक्षण की बाबत राष्ट्रीय नोडल अभिकरण अभिहित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अभिहित राष्ट्रीय नोडल अभिकरण सभी उपायों के लिए उत्तरदायी होगा जिनके अंतर्गत नाजुक सूचना अवसंरचना के संरक्षण से संबंधित अनुसंधान और विकास भी है ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों के पालन की रीति वह होगी, जो विहित की जाए ।
70ख. दुर्घटना मोचन के लिए भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल का राष्ट्रीय आपात अभिकरण के रूप में सेवा करना-(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार के किसी अभिकरण को नियुक्त करेगा जिसे भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल कहा जाएगा ।
(2) केंद्रीय सरकार, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण में एक महानिदेशक और ऐसे अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जो विहित किए जाएं ।
(3) महानिदेशक और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
(4) भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में निम्नलिखित कृत्यों का पालन करने वाले राष्ट्रीय अभिकरण के रूप में कार्य करेगा, -
(क) साइबर घटना संबंधी सूचना का संग्रहण, विश्लेषण और प्रसार;
(ख) साइबर सुरक्षा घटनाओं का पूर्वानुमान और चेतावनियां;
(ग) साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटाने के लिए आपात अध्युपाय;
(घ) साइबर घटना मोचन क्रियाकलापों का समन्वय;
(ङ) साइबर घटनाओं की सूचना सुरक्षा पद्धतियों, प्रक्रियाओं, निवारण, मोचन और रिपोर्ट करने के संबंध में मार्गदर्शक सिद्धांत, सलाह, अति संवेदनशील टिप्पण और श्वेतपत्र जारी करना;
(च) साइबर सुरक्षा से संबंधित ऐसे अन्य कृत्य, जो विहित किए जाएं ।
(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों का पालन करने की रीति वह होगी, जो विहित की जाए ।
(6) उपधारा (4) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण सेवा प्रदाताओं, मध्यवर्तियों, डाटा केंद्रों, निगमित निकायों और किसी अन्य व्यक्ति से सूचना मांग सकेगा और उसे निदेश दे सकेगा ।
(7) ऐसा कोई सेवा प्रदाता, मध्यवर्ती डाटा केंद्र, निगमित निकाय और अन्य व्यक्ति, जो उपधारा (6) के अधीन मांगी गई सूचना देने में या निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(8) कोई न्यायालय, इस धारा के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा दिए गए किसी परिवाद पर के सिवाय नहीं करेगा ।]
71. दुर्व्यपदेशन के लिए शास्ति-जो कोई, नियंत्रक या प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के समक्ष, यथास्थिति, कोई अनुज्ञप्ति या [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कोई दुर्व्यपदेशन करता है या किसी तात्त्विक तथ्य को छिपाता है तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
72. गोपनीयता और एकांतता भंग के लिए शास्ति-इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, यदि किसी व्यक्ति ने, इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन प्रदत्त किन्हीं शक्तियों के अनुसरण में किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या अन्य सामग्री से सम्बद्ध व्यक्ति की सहमति के बिना पहुंच प्राप्त कर ली है, और वह किसी व्यक्ति को उस इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या अन्य सामग्री को प्रकट करता है तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
[72क. विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए सूचना के प्रकटन के लिए दंड-इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि में यथा उपबंधित के सिवाय, कोई व्यक्ति, जिसके अंतर्गत मध्यवर्ती भी है, जिसने, विधिपूर्ण संविदा के निबंधनों के अधीन सेवाएं उपलब्ध कराते समय, ऐसी किसी सामग्री तक, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के बारे में व्यक्तिगत सूचना अंतर्विष्ट है, पहुंच प्राप्त कर ली है, सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित करने के आशय से या यह जानते हुए कि उसे सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित होने की संभावना है, संबंधित व्यक्ति की सम्मति के बिना या किसी विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी सामग्री प्रकट करता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।]
73. 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र की कतिपय विशिष्टियों को मिथ्या प्रकाशित करने के लिए शास्ति-(1) कोई व्यक्ति, 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र को तब तक प्रकाशित नहीं करेगा या किसी अन्य व्यक्ति को अन्यथा उपलब्ध नहीं कराएगा, यदि उसे यह जानकारी है कि-
(क) प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध प्रमाणकर्ता प्राधिकारी ने उसे जारी नहीं किया है; या
(ख) प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध हस्ताक्षरकर्ता ने उसे स्वीकार नहीं किया है; या
(ग) वह प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत या निलम्बित कर दिया गया है,
जब तक कि ऐसा प्रकाशन, ऐसे निलम्बन या प्रतिसंहरण से पूर्व सृजित 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के सत्यापन के प्रयोजनार्थ न हो ।
(2) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, ऐसे कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
74. कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए प्रकाशन-जो कोई, किसी कपटपूर्ण या विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए कोई [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जानबूझकर सृजित करता है, प्रकाशित करता है या अन्यथा उपलब्ध कराता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
75. अधिनियम का भारत से बाहर किए गए अपराधों और उल्लंघनों को लागू होना-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबंध, किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को भी, उसकी राष्ट्रिकता को विचार में लाए बिना, लागू होंगे ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह अधिनियम किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को लागू होगा, यदि उस कार्य या आचरण में, जिससे यह अपराध या उल्लंघन होता है, भारत में अवस्थित कोई कंप्यूटर, कंप्यूटर, प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क अंतर्वलित हो ।
76. अधिहरण-कोई ऐसा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, काम्पैक्ट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित कोई ऐसे अन्य उपसाधन, जिनकी बाबत इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया हो या किया जा रहा है, अधिहरणीय होंगे :
परन्तु जहां अधिहरण का अधिनिर्णय देने वाले न्यायालय के समाधानप्रद रूप में यह सिद्ध हो जाता है कि वह व्यक्ति, जिसके कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में कोई ऐसा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, काम्पैक्ट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित कोई अन्य उपसाधन पाया जाता है, इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं है वहां न्यायालय, ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, काम्पैक्ट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित किसी अन्य उपसाधन के अधिहरण का आदेश करने के बजाय इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत ऐसा अन्य आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
[77. प्रतिकर शास्ति या अधिहरण का अन्य दंड में हस्तक्षेप न करना-इस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर, अधिरोपित शास्ति या किया गया अधिहरण, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर के अधिनिर्णय या किसी अन्य शास्ति या दंड के अधिरोपण को निवारित नहीं करेगा ।
77क. अपराधों का शमन-(1) सक्षम अधिकारिता वाला न्यायालय, उन अपराधों से भिन्न अपराधों का शमन कर सकेगा, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन आजीवन या तीन वर्ष से अधिक के कारावास के दंड का उपबंध किया गया है :
परंतु न्यायालय, ऐसे अपराध का वहां शमन नहीं करेगा, जहां अपराधी, उसकी पूर्व दोषसिद्धि के कारण या तो वर्धित दंड का या भिन्न प्रकार के किसी दंड के लिए दायी है :
परंतु यह और कि न्यायालय ऐसे किसी अपराध का शमन नहीं करेगा, जहां ऐसा अपराध देश की समाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालता है या अठारह वर्ष की आयु से कम आयु के किसी बालक या किसी स्त्री के संबंध में किया गया है ।
(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें अपराध विचारण के लिए दंडित है, शमन के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 265ख और धारा 265ग के उपबंध लागू होंगे ।
77ख. तीन वर्ष के कारावास वाले अपराधों का जमानतीय होना-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, तीन वर्ष और उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध संज्ञेय होंगे और तीन वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध जमानतीय होंगे ।]
78. अपराधों का अन्वेषण करने की शक्ति-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते भी, कोई ऐसा पुलिस अधिकारी, जो [निरीक्षक] की पंक्ति से नीचे का न हो, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण करेगा ।
[अध्याय 12
कतिपय मामलों में मध्यवर्तियों का दायी न होना
79. कतिपय मामलों में मध्यवर्ती को दायित्व से छूट-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किंतु उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मध्यवर्ती, उसको उपलब्ध कराई गई या परपोषित की गई किसी अन्य व्यक्ति की सूचना, डाटा या संसूचना संपर्क के लिए दायी नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध तभी लागू होंगे, जब-
(क) मध्यवर्ती का कृत्य, किसी ऐसी संसूचना प्रणाली तक पहुंच उपलब्ध कराने तक सीमित है, जिस पर अन्य व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पारेषित की जाती है या अस्थायी रूप से भंडारित की जाती है या परपोषित की जाती है; या
(ख) मध्यवर्ती-
(i) पारेषण आरंभ नहीं करता है,
(ii) पारेषण के अभिग्राही का चयन नहीं करता है, और
(त्त्त्) पारेषण में अंतर्विष्ट सूचना का चयन या उपान्तरण नहीं करता है;
(ग) मध्यवर्ती, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सम्यक् तत्परता का अनुपालन करता है और ऐसे अन्य मार्गदर्शक सिद्धांतों का भी अनुपालन करता है, जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
(3) उपधारा (1) के उपबंध लागू नहीं होंगे यदि,-
(क) मध्यवर्ती ने विधिविरुद्ध कार्य करने का षड्यंत्र या दुष्प्रेरण किया है या उसमें सहायता की है या उसके लिए उत्प्रेरित किया है, चाहे धमकी द्वारा या वचन द्वारा या अन्यथा;
(ख) वास्तविक जानकारी प्राप्त करने पर या समुचित सरकार अथवा उसके अभिकरण द्वारा यह अधिसूचित किए जाने पर कि मध्यवर्ती द्वारा नियंत्रित कंप्यूटर संसाधन में विद्यमान या उससे सम्बद्ध किसी सूचना, डाटा या संसूचना संपर्क का उपयोग विधिविरुद्ध कार्य करने के लिए किया जा रहा है, मध्यवर्ती किसी भी रीति में साक्ष्य को दूषित किए बिना उस संसाधन पर उस सामग्री तक पहुंच को अविम्ब हटाने या उसे निर्योग्य बनाने में असफल रहता है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अन्य व्यक्ति की सूचना" पद से किसी मध्यवर्ती द्वारा मध्यवर्ती की हैसियत से दी गई सूचना अभिप्रेत है ।
अध्याय 12क
इलैक्ट्रानिक साक्ष्य का परीक्षक
79क. केन्द्रीय सरकार द्वारा इलैक्ट्रानिक साक्ष्य का परीक्षक अधिसूचित करना-केन्द्रीय सरकार, किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी के समक्ष इलैक्ट्रानिक रूप में साक्ष्य के बारे में विशेषज्ञ राय उपलब्ध कराने के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग, निकाय या अभिकरण को इलैक्ट्रानिक साक्ष्य के परीक्षक के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इलैक्ट्रानिक रूप में साक्ष्य" से, प्रमाणक मूल्य की कोई सूचना अभिप्रेत है, जो इलैक्ट्रानिक रूप में भंडारित या पारेषित की जाती है और इसके अंतर्गत कंप्यूटर साक्ष्य, अंकीय दृश्य, अंकीय श्रव्य, सेलफोन, अंकीय फैक्स मशीन भी है ।]
अध्याय 13
प्रकीर्ण
80. पुलिस अधिकारी और अन्य अधिकारियों की प्रवेश करने, तलाशी लेने, आदि की शक्ति-(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी, जो [निरीक्षक] की पंक्ति से नीचे का न हो, या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार का कोई ऐसा अन्य अधिकारी, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो, किसी सार्वजनिक स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा तथा वहां पाए गए किसी ऐसे व्यक्ति को बिना वारण्ट गिरफ्तार कर सकेगा जो युक्तियुक्त रूप से संदिग्ध व्यक्ति है या जिसने इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया है या कर रहा है या करने वाला है ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, सार्वजनिक स्थान" पद के अन्तर्गत कोई सार्वजनिक वाहन, कोई होटल, कोई दुकान या कोई ऐसा अन्य स्थान भी आता है, जो जनता द्वारा उपयोग के लिए आशयित है या उनकी पहुंच में है ।
(2) जहां कोई व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन पुलिस अधिकारी से भिन्न किसी अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किया जाता है वहां ऐसा अधिकारी, बिना किसी अनावश्यक विलंब के गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उस मामले में अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के समक्ष ले जाएगा या भेजेगा ।
(3) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध, इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन किए गए किसी प्रवेश, ली गई कोई तलाशी या गिरफ्तारी के संबंध में, लागू होंगे ।
81. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि में इससे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे :
[परंतु इस अधिनियम में अंतर्विष्ट कोई बात किसी व्यक्ति को, प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम, 1957 (1957 का 14) या पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) के अधीन प्रदत्त किसी अधिकार का प्रयोग करने से निर्बन्धित नहीं करेगी ।]
[81क. अधिनियम का इलैक्ट्रानिक चैक और संक्षेपित चैक को लागू होना-(1) इस अधिनियम के वे तत्समय प्रवृत्त उपबंध इलैक्ट्रानिक चैकों और संक्षेपित चैकों को या उनके संबंध में ऐसे उपांतरणों और संशोधनों के अधीन रहते हुए लागू होंगे जो परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हो और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किए जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा जारी प्रत्येक अधिसूचना जारी किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना जारी नहीं कि जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किन्तु अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
स्पष्टीकरण-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, इलैक्ट्रानिक चैक" और संक्षेपित चैक" पदों के वही अर्थ हैं जो परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) की धारा 6 में है ।]
82. [अध्यक्ष, सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों, नियंत्रकों का लोक सेवक होना-साइबर अपील अधिकरण के 3[अध्यक्ष, सदस्य] और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी, नियंत्रक, उपनियंत्रक तथा सहायक नियंत्रक, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।
83. निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, किसी राज्य की सरकार को इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियम, विनियम या किए गए आदेश के किन्हीं उपबंधों को राज्य में निष्पादित करने के लिए निदेश दे सकेगी ।
84. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या किए गए किसी आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, नियंत्रक या उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति, साइबर अपील अधिकरण के [अध्यक्ष, सदस्योंट न्यायनिर्णायक अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द के विरुद्ध नहीं होगी ।
[84क. गूढ़लेखन के ढंग या पद्धतियां-केन्द्रीय सरकार, इलैक्ट्रानिक माध्यम के सुरक्षित उपयोग और ई-गवर्नेंस और ई-कामर्स के संवर्धन के लिए, गूढ़लेखन के ढंग या पद्धतियां विहित कर सकेगी ।
84ख. अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दंड-जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य, दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है और ऐसे दुष्प्रेरण के दंड के लिए इस अधिनियम द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है, इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-कोई कार्य या अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब कहा जाएगा, जब वह उस उकसाहट के परिणामस्वरूप या उस षड्यंत्र के अनुसरण में या उसकी सहायता से किया जाता है, जिससे दुष्प्रेरण का गठन होता है ।
84ग. अपराध करने के प्रयत्न के लिए दंड-जो कोई इस अधिनियम द्वारा दंडनीय अपराध करने का प्रयत्न करता है या ऐसे कोई अपराध कराता है और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करता है, जहां ऐसे प्रयत्न के दंड के लिए कोई स्पष्ट उपबंध नहीं है, वहां वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि, उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की अधिकतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो अपराध के लिए उपबंधित है या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।]
85. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां कोई व्यक्ति, जो एक कंपनी है, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी निदेश या आदेश के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करता है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस उल्लंघन के लिए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे, जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि ऐसा उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे उल्लंघन के किए, जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी निदेश या आदेश के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह उल्लंघन कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध या उल्लंघन का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(i) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और उसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ii) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
86. कठिनाइयों को दूर करना-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :
परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश इसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
87. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र और इलैक्ट्रानिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
[(क) धारा 3क की उपधारा (2) के अधीन इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक की विश्वसनीयता पर विचार करने के लिए शर्तें;
(कक) धारा 3क की उपधारा (3) के अधीन इलैक्ट्रानिक चिह्नक या अधिप्रमाणन को अभिनिश्चित करने की प्रक्रिया;
(कख) वह रीति, जिसमें धारा 5 के अधीन इलैक्ट्रानिक चिह्नक द्वारा किसी सूचना या सामग्री को अधिप्रमाणित किया जा सकेगाट
(ख) वह इलैक्ट्रानिक रूप, जिसमें धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन फाइल करने, जारी करने, अनुदान, या संदाय का कार्य किया जाएगा;
(ग) धारा 6 की उपधारा (2) के अधीन वह रीति और रूपविधान, जिसमें इलैक्ट्रानिक अभिलेख फाइल किया जाएगा या जारी किया जाएगा और संदाय करने का ढंग;
[(गक) वह रीति, जिसमें धारा 6क की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकृत सेवा प्रदाता, सेवा प्रभार संगृहीत, प्रतिधारित और विनियोजित कर सकेगा;]
(घ) धारा 10 के अधीन [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] की किस्म से संबंधित विषय, वह रीति और रूपविधान, जिसमें इसे लगाया जाएगा;
1[(ङ) धारा 15 के अधीन इलैक्ट्रानिक चिह्नक सृजन डाटा भंडारित करने और उसे लगाने की रीति;
(ङक) धारा 16 के अधीन सुरक्षा प्रक्रिया और पद्धति;]
(च) धारा 17 के अधीन नियंत्रक, उपनियंत्रकों 1[सहायक नियंत्रकों, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियोंट की अर्हताएं, अनुभव और उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें;
। । । । । ।
(ज) धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन आवेदक द्वारा पूरी की जाने वाली अपेक्षाएं;
(झ) धारा 21 की उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति की विधिमान्यता की अवधि;
(ञ) वह प्ररूप, जिसमें धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन किया जा सकेगा;
(ट) धारा 22 की उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन संदेय फीसों की रकम;
(ठ) ऐसे अन्य दस्तावेज, जो धारा 22 की उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन के साथ लगाए जाएंगे;
(ड) धारा 23 के अधीन अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए प्ररूप और उसके लिए संदेय फीस;
[(डक) धारा 35 के अधीन इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन का प्ररूप और फीस;]
(ढ) वह प्ररूप, जिसमें धारा 35 की उपधारा (1) के अधीन [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी किए जाने के लिए आवेदन किया जा सकेगा;
(ण) धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन 3[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जारी किए जाने के लिए प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को संदाय की जाने वाली फीस;
2[(णक) धारा 40क के अधीन उपयोगकर्ताओं के कर्तव्य;
(णख) धारा 43क के अधीन युक्तियुक्त सुरक्षा पद्धति और प्रक्रियाएं तथा संवेदनशील वैयक्तिक डाटा या सूचना];
(त) वह रीति, जिसमें धारा 46 की उपधारा (1) के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी जांच करेगा;
(थ) वह अर्हता और अनुभव, जो धारा 46 की उपधारा (3) के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास होगा;
(द) धारा 52 के अधीन [अध्यक्ष और सदस्योंट के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें;
(ध) धारा 54 की उपधारा (3) के अधीन 4[अध्यक्ष और सदस्योंट के कदाचार और असमर्थता का अन्वेषण करने की प्रक्रिया;
(न) धारा 56 की उपधारा (3) के अधीन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें;
(प) वह प्ररूप, जिसमें धारा 57 की उपधारा (3) के अधीन अपील फाइल की जा सकेगी और उसके लिए फीस;
(फ) सिविल न्यायालय की कोई अन्य शक्ति, जिसका धारा 58 की उपधारा (2) के खंड (छ) के अधीन विहित किया जाना अपेक्षित है; और
4[(ब) धारा 52क के अधीन साइबर अपील अधिकरण के अध्यक्ष की शक्तियां और कृत्य;
(भ) धारा 67ग के अधीन प्रतिधारित और परिरक्षित की जाने वाली सूचना, अवधि, रीति और ऐसी सूचना का प्ररूप;
(म) धारा 69 की उपधारा (2) के अधीन अंतररोधन, मानीटरी या विगूढ़न के लिए प्रक्रियाएं और रक्षोपाय;
(य) धारा 69क की उपधारा (2) के अधीन जनता की पहुंच का अवरोधन करने की प्रक्रिया और रक्षोपाय;
(यक) धारा 69ख की उपधारा (3) के अधीन ट्रैफिक आंकडे या सूचना की मानीटरी करने और उन्हें एकत्रित करने की प्रक्रिया और रक्षोपाय;
(यख) धारा 70 के अधीन संरक्षित प्रणाली के लिए सूचना सुरक्षा पद्धति और प्रक्रियाएं;
(यग) धारा 70क की उपधारा (3) के अधीन अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों के पालन की रीति;
(यघ) धारा 70ख की उपधारा (2) के अधीन अधिकारी और कर्मचारी;
(यङ) धारा 70ख की उपधारा (3) के अधीन महानिदेशक और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें;
(यच) वह रीति, जिसमें धारा 70क की उपधारा (5) के अधीन अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों का पालन किया जाएगा;
(यछ) धारा 79 की उपधारा (2) के अधीन मध्यवर्तियों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत;
(यज) धारा 84क के अधीन विगूढ़न का ढंग या पद्धतिट ।
(3) [धारा 70क की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना और उसके द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियमट उसके निकाले जाने या बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी/रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस । । । नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी/होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना नहीं निकाली जानी चाहिए या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी/जाएगा । किंतु उक्त 2। । । नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
88. सलाहकार समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् यथाशीघ्र एक समिति का गठन करेगी जिसे साइबर विनियमन सलाहकार समिति कहा जाएगा ।
(2) साइबर विनियमन सलाहकार समिति में एक अध्यक्ष होगा और उतनी संख्या में ऐसे अन्य शासकीय और अशासकीय सदस्य होंगे जो मुख्य रूप से प्रभावित हितों का प्रतिनिधित्व करते हों या जिन्हें विषयवस्तु का विशेष ज्ञान हो, जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे ।
(3) साइबर विनियमन सलाहकार समिति,-
(क) केन्द्रीय सरकार को या तो साधारणतया किन्हीं नियमों के संबंध में या इस अधिनियम से संबद्ध किसी अन्य प्रयोजन के लिए;
(ख) नियंत्रक को इस अधिनियम के अधीन विनियम बनाने में,
सलाह देगी ।
(4) ऐसी समिति के अशासकीय सदस्यों को ऐसे यात्रा और अन्य भत्ते संदत्त किए जाएंगे, जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
89. नियंत्रक की विनियम बनाने की शक्ति-(1) नियंत्रक, साइबर विनियमन सलाहकार समिति से परामर्श करने के पश्चात् और केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत विनियम बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) धारा 18 के खंड (ढ) के अधीन प्रत्येक प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के प्रकटन अभिलेख से युक्त डाटा संचय के अनुरक्षण से संबंधित विशिष्टियां;
(ख) वे शर्तें और निर्बन्धन, जिनके अधीन रहते हुए नियंत्रक, धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन किसी विदेशी प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को मान्यता प्रदान कर सकेगा;
(ग) वे निबन्धन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए धारा 21 की उपधारा (3) के खंड (ग) के अधीन कोई अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जा सकेगी;
(घ) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा धारा 30 के खंड (घ) के अधीन पालन किए जाने वाले अन्य मानक;
(ङ) वह रीति जिसमें प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, धारा 34 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट विषय प्रकट करेगा;
(च) विवरण की विशिष्टियां, जो धारा 35 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन के साथ संलग्न होंगी; और
(छ) वह रीति जिसमें उपयोगकर्ता, धारा 42 की उपधारा (2) के अधीन प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को प्राइवेट कुंजी गोपनीय न रह जाने की सूचना देगा ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
90. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) वह इलैक्ट्रानिक रूप जिसमें धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन फाइल करना, जारी करना, अनुदत्त करना, प्राप्त करना या संदाय करना किया जाएगा;
(ख) ऐसे विषयों के लिए जो धारा 6 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट किए जाएं;
। । । । । ।
(3) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र जहां राज्य विधान-मंडल के दो सदन हैं, वहां प्रत्येक सदन के समक्ष या जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
। । । । । । ।
[पहली अनुसूची
[धारा 1 की उपधारा (4) देखिए]
वे दस्तावेज या संव्यवहार, जिनको अधिनियम लागू नहीं होगा
|
क्रम सं० |
दस्तावेजों या संव्यवहारों का वर्णन |
|
1. |
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) की धारा 13 में यथापरिभाषित परक्राम्य लिखत (चेक से भिन्न) । |
|
2. |
मुख्तारनामा अधिनियम, 1882 (1882 का 7) की धारा 1क में यथापरिभाषित मुख्तारनामा । |
|
3. |
भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 3 में यथापरिभाषित न्यास । |
|
4. |
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) की धारा 2 के खंड (ज) में यथापरिभाषित विल, जिसके अंतर्गत कोई अन्य वसीयती व्ययन, चाहे जिस नाम से हो, भी है । |
|
5. |
स्थावर सम्पत्ति या ऐसी संपत्ति में किसी हित के विक्रय या हस्तांतरण के लिए कोई संविदा । |
दूसरी अनुसूची
[धारा 3क की उपधारा (1) देखिए]
इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक और प्रक्रिया
|
क्रम सं० |
वर्णन |
प्रक्रिया |
|
(1) |
(2) |
(3) |
|
|| |
|| |
|| |
। । । । । । ।

