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विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 ( Special Economic Zones Act, 2005 )


 

विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005

(2005 का अधिनियम संख्यांक 28)

[23 जून, 2005]

निर्यात के संवर्धन के लिए विशेष आर्थिक जोनों की

स्थापना, विकास और प्रबंध का और उससे

संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 है ।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रतिनिर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रतिनिर्देश है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) नियत दिन" से किसी विशेष आर्थिक जोन के संबंध में, वह तारीख अभिप्रेत है जिसको केन्द्रीय सरकार धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन विशेष आर्थिक जोन अधिसूचित करती है;

(ख) अनुमोदन समिति" से धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन गठित अनुमोदन समिति अभिप्रेत है;

(ग) प्राधिकृत संक्रिया" से वे संक्रियाएं अभिप्रेत हैं जिन्हें धारा 4 की उपधारा (2) और धारा 15 की उपधारा (5) के अधीन प्राधिकृत किया जाए;

(घ) प्राधिकरण" से धारा 31 की उपधारा (1) के अधीन गठित विशेष आर्थिक जोन प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(ङ) बोर्ड" से धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन गठित अनुमोदन बोर्ड अभिप्रेत है;

(च) सह विकासकर्ता" से ऐसा व्यक्ति या राज्य सरकार अभिप्रेत है, जिसे या जिसको धारा 3 की उपधारा (12) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदन पत्र अनुदत्त किया गया है;

(छ) विकासकर्ता" से ऐसा व्यक्ति या राज्य सरकार अभिप्रेत है, जिसे धारा 3 की उपधारा (10) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदन पत्र अनुदत्त किया गया है और इसके अन्तर्गत कोई प्राधिकारी और सह विकासकर्ता भी है;

(ज) विकास आयुक्त" से धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन एक या अधिक विशेष आर्थिक जोनों के लिए नियुक्त किया गया विकास आयुक्त अभिप्रेत है;

(झ) स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र" से संपूर्ण भारत (जिसके अंतर्गत राज्यक्षेत्रीय सागर खंड और महाद्वीपीय मग्नतट भूमि है) अभिप्रेत है, किन्तु उसके अंतर्गत विशेष आर्थिक जोनों के क्षेत्र नहीं हैं;

(ञ) उद्यमकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे धारा 15 की उपधारा (9) के अधीन विकास आयुक्त द्वारा अनुमोदन पत्र अनुदत्त किया गया है;

(ट) विद्यमान विशेष आर्थिक जोन" से ऐसा प्रत्येक विशेष आर्थिक जोन अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर या उसके पूर्व विद्यमान है;

(ठ) विद्यमान यूनिट" से ऐसी प्रत्येक यूनिट अभिप्रेत है जिसे इस अधिनियम के प्रारंभ पर या उसके पूर्व किसी विद्यमान विशेष आर्थिक जोन में स्थापित किया गया है;

(ड) निर्यात" से अभिप्रेत है-

(i) किसी विशेष आर्थिक जोन से भूमि, समुद्र या वायु-मार्ग द्वारा या किसी अन्य ढंग द्वारा, चाहे भौतिक रूप से या अन्यथा, भारत से बाहर माल ले जाना या सेवाएं प्रदान करना; या        

(ii) किसी स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र से किसी यूनिट या विकासकर्ता को माल प्रदाय करना या सेवाएं प्रदान करना; या

(iii) एक ही या किसी भिन्न विशेष आर्थिक जोन में एक यूनिट से किसी अन्य यूनिट को या विकासकर्ता को माल का प्रदाय करना या सेवाएं प्रदान करना;

(ढ) मुक्त व्यापार और भाण्डागार जोन" से ऐसा विशेष आर्थिक जोन अभिप्रेत है जिसमें मुख्यतः व्यापार और भाण्डागार तथा उससे संबद्ध अन्य क्रियाकलाप किए जाते हैं;

(ण) आयात" से अभिप्रेत है-

(i) किसी यूनिट या विकासकर्ता द्वारा भारत के बाहर किसी स्थान से भूमि, समुद्र या वायु मार्ग द्वारा या किसी अन्य ढंग द्वारा, चाहे भौतिक रूप से या अन्यथा, किसी विशेष आर्थिक जोन में माल लाना या सेवाएं प्राप्त करना; या

(ii) किसी यूनिट या विकासकर्ता द्वारा उसी विशेष आर्थिक जोन या किसी भिन्न विशेष आर्थिक जोन की किसी अन्य यूनिट से या विकासकर्ता से माल या सेवाएं प्राप्त करना;

(त) अवसंरचना सुविधा" से किसी विशेष आर्थिक जोन के विकास के लिए आवश्यक औद्योगिक, वाणिज्यिक या सामाजिक अवसंरचना या अन्य सुविधाएं या ऐसी अन्य सुविधाएं, जो विहित की जाएं अभिप्रेत हैं;

(थ) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" से ऐसा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन अनुमोदित किया गया है;  

(द) विनिर्माण" से हाथ से या मशीन द्वारा, किसी नए उत्पाद को, जिसका सुभिन्न नाम, लक्षण या उपयोग हो, बनाना, उत्पादन करना, गढ़ना, संयोजन करना, प्रसंस्करण करना या अस्तित्व में लाना अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत प्रशीतन, कर्तन करना, पालिश करना, मिश्रण करना, मरम्मत करना, पुनः बनाना, पुनः इंजीनियरी जैसी प्रक्रियाएं भी होंगी और इसके अंतर्गत कृषि, जल कृषि, पशुपालन, पुष्प कृषि, उद्यान कृषि, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, रेशम कीड़ा पालन, द्राक्षा कृषि और खनन भी हैं;

(ध) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है और अधिसूचित करना" पद का अर्थ तदनुसार लगाया जाएगा;

(न) अधिसूचित अपराध" से धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन उस रूप से विनिर्दिष्ट अपराध अभिप्रेत है;

(प) अपतट बैंककारी यूनिट" से विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित बैंक की कोई शाखा अभिप्रेत है; जिसने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुज्ञा अभिप्राप्त कर ली है;

(फ) व्यक्ति" के अन्तर्गत कोई व्यष्टि, चाहे वह भारत में या भारत के बाहर निवासी हो, हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, सहकारी सोसाइटी, कम्पनी चाहे वह भारत में निगमित हो या भारत से बाहर, फर्म साम्पत्तिक समुत्थान या व्यक्तियों का संगम या व्यष्टि निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, स्थानीय प्राधिकारी और ऐसे व्यष्टि, हिंदू अविभक्त कुटुंब, सहकारी सोसाइटी संगम, निकाय, प्राधिकारी या कंपनी के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन कोई अभिकरण, कार्यालय या शाखा भी है;

(ब) विहित" से इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(भ) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है; 

(म) अनुसूची" से इस अधिनियम की अनुसूचियां अभिप्रेत हैं;

(य) सेवाओं" से ऐसी व्यापार योग्य सेवाएं अभिप्रेत हैं, जो-

(i) माराकेस में 15 अप्रैल, 1994 को संपन्न हुए विश्व व्यापार संगठन की स्थापना करने वाले करार के साथ आईबी के रूप में संलग्न सेवाओं में व्यापार संबंधी साधारण करार के अंतर्गत आती हैं;

(ii) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं; और

(iii) विदेशी मुद्रा अर्जित करती हैं;

(यक) विशेष आर्थिक जोन" से धारा 3 की उपधारा (4) के परन्तुक और धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित प्रत्येक विशेष आर्थिक जोन (मुक्त व्यापार और भाण्डागार जोन सहित) अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत विद्यमान विशेष आर्थिक जोन भी है; 

(यख) राज्य सरकार" से उस राज्य की, जिसमें विशेष आर्थिक जोन स्थापित है या स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है, राज्य सरकार अभिप्रेत है;

(यग) यूनिट" से किसी विशेष आर्थिक जोन में किसी उद्यमकर्ता द्वारा स्थापित कोई यूनिट अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत विद्यमान यूनिट, अपतट बैंककारी यूनिट और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में की कोई यूनिट, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व में या उसके पश्चात् स्थापित की गई हो, अभिप्रेत है;

(यघ) उन सभी अन्य शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क अधिनियम, 1944 (1944 का 1), उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65), आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43), सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) और विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन), अधिनियम 1992 (1992 का 22) में परिभाषित हैं, क्रमशः वहीं अर्थ होंगे जो उनके उन अधिनियमों में हैं ।

अध्याय 2

विशेष आर्थिक जोन की स्थापना

3. विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने का प्रस्ताव करने की प्रक्रिया-(1) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या किसी व्यक्ति द्वारा, माल के विनिर्माण या सेवाएं प्रदान करने के लिए या दोनों के लिए या मुक्त व्यापार और भाण्डागार जोन के रूप में या तो संयुक्त रूप से या पृथक्-पृथक् रूप से, किसी विशेष आर्थिक जोन की स्थापना की जा सकेगी ।

(2) कोई व्यक्ति, जो विशेष आर्थिक जोन स्थापित करना चाहता है, क्षेत्र की पहचान करने के पश्चात् विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने के प्रयोजन के लिए संबद्ध राज्य सरकार को प्रस्ताव कर सकेगा । 

(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, जो किसी विशेष आर्थिक जोन की स्थापना करना चाहता है, क्षेत्र की पहचान करने के पश्चात्, अपने विकल्प पर, विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने के प्रयोजन के लिए बोर्ड को सीधे प्रस्ताव कर सकेगा:

परन्तु जहां इस उपधारा के अधीन ऐसा कोई प्रस्ताव किसी व्यक्ति से सीधे प्राप्त हुआ है, वहां बोर्ड अनुमोदन प्रदान कर सकेगा और ऐसे अनुमोदन की प्राप्ति के पश्चात् संबद्ध व्यक्ति, ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करेगा ।

 (4) यदि राज्य सरकार कोई विशेष आर्थिक जोन स्थापित करना चाहती है तो वह क्षेत्र की पहचान करने के पश्चात्, विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने के प्रयोजनों के लिए प्रस्ताव सीधे बोर्ड को भेज सकेगी:

परन्तु केन्द्रीय सरकार, -

(क) संबद्ध राज्य सरकार से परामर्श करने के पश्चात्;

(ख) बोर्ड को विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने के लिए प्रस्ताव निर्देशित किए बिना; और

(ग) क्षेत्र की पहचान करने के पश्चात्,  स्वप्रेरणा से विशेष आर्थिक जोन स्थापित कर सकेगी और उसे अधिसूचित कर सकेगी

(5) उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन प्रत्येक प्रस्ताव ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तथा ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट करते हुए जो विहित की जाएं, किया जाएगा ।

(6) राज्य सरकार, उपधारा (2) के अधीन किए गए प्रस्ताव की प्राप्ति पर, अपनी सिफारिशों के साथ उसे बोर्ड को ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, अग्रेषित करेगी ।

(7) उपधारा (8) में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन प्रस्ताव की प्राप्ति के पश्चात् प्रस्ताव को ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, अनुमोदित कर सकेगा या प्रस्ताव को उपांतरित या रद्द कर सकेगा ।

(8) केन्द्रीय सरकार विशेष आर्थिक जोन की स्थापना के लिए निम्नलिखित अपेक्षाएं विहित कर सकेगी, अर्थात्: - 

(क) भूमि का वह न्यूनतम क्षेत्र और अन्य निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड, उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन उसे प्राप्त किसी प्रस्ताव को अनुमोदित, उपांतरित या रद्द करेगा; और

(ख) वे निबंधन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए, विकासकर्ता प्राधिकृत संक्रियाएं कर सकेगा और अपनी बाध्यताएं पूरी कर सकेगा और हकदारी ले सकेगा:

परन्तु खंड (क) में निर्दिष्ट भूमि का भिन्न-भिन्न निम्नतम क्षेत्र और अन्य निबंधन और शर्तें, केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी वर्ग या वर्गों के विशेष आर्थिक जोनों के लिए विहित की जा सकेंगी ।

(9) यदि बोर्ड, -

(क) उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन प्राप्त किसी प्रस्ताव को बिना किसी उपांतरण के अनुमोदित करता है तो वह उसे केन्द्रीय सरकार को संसूचित करेगा;

(ख) उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन प्राप्त किसी प्रस्ताव को उपांतरणों सहित अनुमोदित करता है तो वह संबद्ध व्यक्ति या राज्य सरकार को ऐसे उपांतरणों के बारे में संसूचित करेगा और यदि ऐसे व्यक्ति या राज्य सरकार द्वारा ऐसे अनुमोदन स्वीकार कर लिए जाते हैं तो बोर्ड, अनुमोदन के बारे में केन्द्रीय सरकार को संसूचित करेगा;

(ग) उपधारा (2) से उपधारा (4) के अधीन प्राप्त किसी प्रस्ताव को नामंजूर करता है तो वह उसके लिए कारण अभिलिखित करेगा और नामंजूरी की संसूचना केन्द्रीय सरकार को देगा जो संबद्ध राज्य सरकार या व्यक्ति को सूचित करेगी ।

(10) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (9) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन संसूचना की प्राप्ति पर ऐसे समय के भीतर जो, विहित किया जाए, विकासकर्ता को, जो व्यक्ति है या संबद्ध राज्य सरकार को अनुमोदन पत्र ऐसे निबंधनों और शर्तों तथा बाध्यताओं और हकदारी पर, जो बोर्ड द्वारा अनुमोदित किए जाएं, अनुदत्त करेगी:

परन्तु केन्द्रीय सरकार, बोर्ड के अनुमोदन के आधार पर, ऐसी दशाओं में जहां किसी विशेष आर्थिक जोन की स्थापना के लिए किसी एक विकासकर्ता के कब्जे में निकटस्थ भूमि का ऐसा न्यूनतम क्षेत्र, जो विहित किया जाए, नहीं है, उस विशेष आर्थिक जोन में एक से अधिक विकासकर्ताओं को अनुमोदन दे सकेगी और ऐसी दशाओं में प्रत्येक विकासकर्ता को उस भूमि की बाबत, जो उसके कब्जे में है, विकासकर्ता माना जाएगा ।

(11) कोई व्यक्ति या राज्य सरकार, जो उपधारा (2) से उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी अभिज्ञात क्षेत्र में कोई अवसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहती है, या कोई प्राधिकृत संक्रिया करना चाहती है, उपधारा (10) में निर्दिष्ट विकासकर्ता के साथ करार करने के पश्चात् उसके लिए बोर्ड को एक प्रस्ताव उसके अनुमोदन के लिए भेज सकेगी और उपधारा (5) तथा उपधारा (7) से उपधारा (10) तक के उपबंध, यथाशक्य ऐसे व्यक्ति या राज्य सरकार द्वारा किए गए उक्त प्रस्ताव को लागू होंगे ।

(12) उपधारा (11) में निर्दिष्ट ऐसे प्रत्येक व्यक्ति या राज्य सरकार को, जिसका प्रस्ताव बोर्ड द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है और जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदन पत्र अनुदत्त कर दिया गया है, विशेष आर्थिक जोन का सहविकासकर्ता माना जाएगा ।

(13) इस धारा के उपबंधों और विकासकर्ता को अनुदत्त अनुमोदन पत्र के अधीन रहते हुए, विकासकर्ता अनुमोदित यूनिटों को उसके द्वारा ऐसी यूनिटों के उद्यमकर्ताओं के साथ किए गए करार के अनुसार स्थान या निर्मित क्षेत्र आबंटित कर सकेगा या अवसंरचनात्मक सुविधाएं दे सकेगा ।

4. विशेष आर्थिक जोन की स्थापना और उसके प्रचालन के लिए विकासकर्ता को अनुमोदन और प्राधिकार-(1) विकासकर्ता, धारा 3 की उपधारा (10) के अधीन अनुमोदन पत्र दिए जाने के पश्चात्, उस धारा की उपधारा (2) से उपधारा (4) में निर्दिष्ट अभिज्ञात क्षेत्र की सही विशिष्टियां केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा और तदुपरि वह सरकार अपना यह समाधान करने के पश्चात् कि धारा 3  की उपधारा (8) के अधीन अपेक्षाएं और ऐसी अन्य अपेक्षाएं, जो विहित की जाएं, पूरी कर दी गई हैं, राज्य में विनिर्दिष्ट रूप से अभिज्ञात क्षेत्र को एक विशेष आर्थिक जोन के रूप में अधिसूचित कर सकेगी :

परंतु किसी विद्यमान विशेष आर्थिक जोन को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार अधिसूचित और स्थापित किया गया समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध, यथाशक्य, ऐसे जोन को तद्नुसार लागू होंगे:

परंतु यह और कि केन्द्रीय सरकार, विशेष आर्थिक जोन को अधिसूचित करने के पश्चात्, यदि वह उचित समझती है तो तत्पश्चात् किसी अतिरिक्त क्षेत्र को उस विशेष आर्थिक जोन के भागरूप में सम्मिलित किए जाने के लिए अधिसूचित कर सकेगी ।

(2) नियत दिन के पश्चात् बोर्ड, विकासकर्ता को किसी विशेष आर्थिक जोन में ऐसी संक्रियाएं करने के लिए, जिन्हें केन्द्रीय सरकार प्राधिकृत करे, प्राधिकृत कर सकेगी ।

5. विशेष आर्थिक जोन अधिसूचित करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत-केन्द्रीय सरकार, किसी क्षेत्र को विशेष आर्थिक जोन के रूप में या विशेष आर्थिक जोन में सम्मिलित किए जाने वाले किसी अतिरिक्त क्षेत्र को अधिसूचित करते समय और इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने में निम्नलिखित सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होगी, अर्थात्: -                               

(क) अतिरिक्त आर्थिक क्रियाकलाप की उत्पत्ति;

(ख) माल और सेवाओं के निर्यात का संवर्धन;

(ग) स्वदेशी और विदेशी स्रोतों से विनिधान का संवर्धन;

(घ) रोजगार के अवसरों का सृजन;

(ङ) अवसरंचनात्मक सुविधाओं का विकास; और

(च) भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा और विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का अनुरक्षण ।

6. प्रसंस्करण और अप्रसंस्करण क्षेत्र-विशेष आर्थिक जोन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी प्राधिकारी द्वारा निम्नलिखित के रूप में सीमांकित किया जा सकेगा-

(क) माल के विनिर्माण या सेवाएं प्रदान करने के क्रियाकलापों के लिए यूनिटों को स्थापित करने के लिए प्रसंस्करण क्षेत्र; या

(ख) अनन्यतः व्यापार या भाण्डागारण प्रयोजनों के लिए क्षेत्र;

(ग) खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों से भिन्न अन्य क्रियाकलापों के लिए अप्रसंस्करण क्षेत्र ।

7. कर, शुल्क या उपकर से छूट-ऐसे माल या सेवाएं जिनका, -

(i) किसी विशेष आर्थिक जोन में किसी यूनिट द्वारा, या

(ii) किसी विकासकर्ता द्वारा,

स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र के बाहर निर्यात या उसके भीतर आयात या उससे उपापन किया गया है, ऐसे निबंधनों, शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी अधिनियमितियों के अधीन करों, शुल्कों या उपकर के संदाय से छूट प्राप्त होंगी ।

अध्याय 3

अनुमोदन बोर्ड का गठन

8. अनुमोदन बोर्ड का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिसूचना के प्रारंभ के पंद्रह दिन के भीतर, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, एक बोर्ड का गठन करेगी जिसे अनुमोदन बोर्ड कहा जाएगा ।

 (2) बोर्ड में निम्नलिखित होंगे-

(क) एक ऐसा अधिकारी जो वाणिज्य से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग में भारत सरकार के अपर सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो-अध्यक्ष; पदेन;

 (ख) दो ऐसे अधिकारी जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा राजस्व से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य, पदेन;

(ग) एक ऐसा अधिकारी, जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा, आर्थिक कार्यों (वित्तीय सेवाओं) से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य, पदेन;  

(ङ) संबद्ध राज्य सरकार का नामनिर्देशिती-सदस्य, पदेन;

(च) विदेश व्यापार महानिदेशक या उसका नामनिर्देशिती-सदस्य, पदेन;

(छ) संबद्ध विकास आयुक्त-सदस्य, पदेन;

(ज) भारतीय प्रबंध संस्थान का, जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी है या भारतीय विदेश व्यापार संस्थान का, जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी है, एक प्राचार्य, जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा-सदस्य, पदेन;

(झ) वाणिज्य से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग में विशेष आर्थिक जोनों से संबंधित भारत सरकार का एक अधिकारी जो उप सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य-सचिव, पदेन;

परन्तु इस उपधारा के खण्ड (ख) से खण्ड (घ) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्य जो संयुक्त सचिव है, यदि वह बोर्ड के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो बोर्ड के अधिवेशन में अपनी ओर से उपस्थित होने के लिए अपने अधीन कार्यरत किसी अन्य अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगा ।

(3) किसी पदेन सदस्य की पदावधि उसी समय समाप्त हो जाएगी जिस समय वह उस पद पर नहीं रहता है जिसके आधार पर वह नामनिर्दिष्ट किया गया था ।

(4) बोर्ड, अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनों के लिए, सदस्यों के रूप में उतने ऐसे व्यक्तियों को सहयोजित कर सकेगा जितने वह ठीक समझे, जिन्हें विशेष आर्थिक जोनों से संबद्ध क्रियाकलाप से संबंधित या उनसे सुसंगत विषयों में विशेष ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव हो और ऐसे किसी व्यक्ति को बोर्ड की चर्चाओं में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उनको गणपूर्ति के लिए गणना में नहीं लिया जाएगा और वह किसी अन्य प्रयोजन के लिए सदस्य नहीं होगा तथा ऐसा व्यक्ति, यथास्थिति, ऐसे भत्ते या फीस प्राप्त करने का हकदार होगा जो बोर्ड द्वारा नियत की जाएं ।

(5) बोर्ड ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगा जो उसके द्वारा नियत किए जाएं तथा उसे अपनी स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी ।

(6) बोर्ड के कुल सदस्यों के एक-तिहाई से उसकी गणपूर्ति होगी और बोर्ड के सभी कार्यों का विनिश्चय उपस्थित सदस्यों की आम सहमति द्वारा किया जाएगा ।

(7) बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि बोर्ड में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।

(8) बोर्ड के सभी आदेश और विनिश्चय और उसके द्वारा जारी की गई सभी अन्य लिखतें सदस्य-सचिव या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित की जाएंगी ।

9. बोर्ड के कर्तव्य, शक्तियां और कृत्य-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड का विशेष आर्थिक जोनों का संवर्धन करने और व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने का कर्तव्य होगा ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड की शक्तियों और कृत्यों में निम्नलिखित भी सम्मिलित होंगे-

(क) किसी विशेष आर्थिक जोन की स्थापना के लिए प्रस्तावों का अनुमोदन करना या प्रस्ताव को नामंजूर करना या ऐसे प्रस्तावों का उपांतरण करना;

(ख) विकासकर्ता द्वारा किसी विशेष आर्थिक जोन में की जाने वाली प्राधिकृत संक्रियाओं का अनुमोदन करना;

(ग) विकासकर्ताओं या यूनिटों को (ऐसे विकासकर्ताओं या यूनिटों से भिन्न जो किसी विधि के अधीन या केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदन अभिप्राप्त करने से छूट तंर्गत) किसी विशेष आर्थिक जोन में उसके विकास, प्रचालन और अनुरक्षण के लिए विदेशी सहयोग या विदेशी प्रत्यक्ष विनिधान (जिनके तंर्गत भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विनिधान भी है) के लिए अनुमोदन अनुदत्त करना;

(घ) किसी विशेष आर्थिक जोन में अवसंरचनात्मक सुविधाएं प्रदान करने के लिए किसी प्रस्ताव का अनुमोदन करना या उसे नामंजूर करना या ऐसे प्रस्तावों का उपांतरण करना;

(ङ) उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उस अधिनियम की धारा 3 के खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक उपक्रम को अनुज्ञप्ति अनुदत्त करना यदि ऐसे उपक्रम का पूर्णरूपेण या उसके किसी भाग को किसी विशेष आर्थिक जोन में स्थापित किया जाता है या स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है;

(च) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन किसी विकासकर्ता को अनुदत्त अनुमोदन पत्र का निलंबन और प्रशासक की नियुक्ति; (छ) धारा 15 की उपधारा (4) के अधीन की गई अपीलों को निपटाना;

(ज) धारा 16 की उपधारा (4) के अधीन की गई अपीलों को निपटाना;

(झ) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करना जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं ।

(3) बोर्ड, यदि इस अधिनियम या विशेष आर्थिक जोनों से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के प्रयोजनों के लिए ऐसा अपेक्षित हो, अधिसूचना द्वारा, इस बारे में विनिश्चय कर सकेगा कि क्या कोई विशिष्ट क्रियाकलाप, धारा 2 के खंड (द) में यथापरिभाषित विनिर्माण की कोटि में आता है अथवा नहीं और बोर्ड का ऐसा विनिश्चय केन्द्रीय सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों पर आबद्धकर होगा ।

(4) बोर्ड ऐसी शक्तियों और कृत्यों को, जिन्हें वह ठीक समझे, बोर्ड के कृत्यों के प्रभावी और उचित निर्वहन के लिए एक या अधिक विकास आयुक्तों को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

(5) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में या अपने कृत्यों के अनुपालन में, नीति विषयक प्रश्नों पर ऐसे निदेशों द्वारा आबद्ध होगा, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे लिखित में दिए जाएं ।

(6) इस बारे में कि कोई प्रश्न नीति विषयक है या नहीं, केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

10. कतिपय दशाओं में अनुमोदन पत्र का निलंबन और विशेष आर्थिक जोन का अंतरण-(1) यदि किसी समय बोर्ड की यह राय है कि विकासकर्ता-

(क) इस अधिनियम के उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों का निर्वहन करने या कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है; या

(ख) उसने इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में लगातार व्यतिक्रम किया है; या

(ग) उसने अनुमोदन पत्र के निबंधन और शर्तों का अतिक्रमण किया है; या

(घ) उसकी वित्तीय स्थिति ऐसी है कि वह अनुमोदन पत्र द्वारा उस पर अधिरोपित कर्तव्यों और बाध्यताओं का पूर्णतया और दक्षतापूर्वक निर्वहन करने में असमर्थ है, और

ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनमें बोर्ड के लिए लोकहित में ऐसा करना आवश्यक हो गया है, वहां बोर्ड, आवेदन पर, या विकासकर्ता की सहमति से, या अन्यथा, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, विशेष आर्थिक जोन के रूप में स्थापित उसके संपूर्ण क्षेत्र या उसके भाग के लिए विकासकर्ता को अनुदत्त अनुमोदन पत्र को एक वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकेगा और अनुमोदन पत्र के निबंधनों और शर्तों के अनुसार विकासकर्ता के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए एक प्रशासक नियुक्त कर सकेगा और तद्नुसार विशेष आर्थिक जोन का प्रबंध करेगा ।

(2) प्रशासक की नियुक्ति के परिणामस्वरूप, उपधारा (1) में निर्दिष्ट विकासकर्ता के विशेष आर्थिक जोन का प्रबंध प्रशासक में निहित हो जाएगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन कोई अनुमोदन पत्र तब तक निलंबित नहीं किया जाएगा जब तक कि बोर्ड ने विकासकर्ता को लिखित रूप में कम से कम तीन मास की सूचना उन आधारों का कथन करते हुए न दे दी हो जिन पर वह अनुमोदन पत्र को निलंबित करने का प्रस्ताव करता है और प्रस्तावित निलंबन के विरुद्ध उस सूचना की अवधि के भीतर विकासकर्ता द्वारा दर्शित किसी कारण पर विचार न कर लिया हो ।

(4) बोर्ड, उपधारा (1) के अधीन अनुमोदन पत्र को निलंबित करने के बजाय, उसे ऐसे और निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझे, प्रवृत्त बने रहने की अनुज्ञा दे सकेगा तथा इस प्रकार अधिरोपित और निबंधन या शर्तें विकासकर्ता पर आबद्धकर होंगी और विकासकर्ता द्वारा उनका अनुपालन किया जाएगा और वे इस प्रकार बल और प्रभाव वाली होंगी मानो वे अनुमोदन पत्र में अंतर्विष्ट हों ।

(5) यदि बोर्ड इस धारा के अधीन अनुमोदन पत्र को निलम्बित करता है वहां वह निलंबन की सूचना की विकासकर्ता पर तामील करेगा और वह तारीख नियत करेगा जिसको निलंबन प्रभावी होगा ।

(6) उपधारा (1) के अधीन अनुमोदन पत्र के निलंबन पर, उपधारा (5) में निर्दिष्ट विकासकर्ता का विशेष आर्थिक जोन एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए या उस तारीख तक, जिसको ऐसे विशेष आर्थिक जोन के लिए उसका अनुमोदन पत्र, यथास्थिति, उपधारा (7) और उपधारा (9) के उपबंधों के अनुसार अंतरित हो जाता है, उपधारा (2) के अधीन प्रशासक में निहित हो जाएगा । 

(7) जहां बोर्ड ने उपधारा (5) के अधीन अनुमोदन पत्र के निलंबन के लिए सूचना दे दी है वहां विकासकर्ता, बोर्ड के पूर्व अनुमोदन के पश्चात्, अपना अनुमोदन पत्र ऐसे व्यक्ति को अंतरित कर सकेगा जो बोर्ड द्वारा ऐसा अनुमोदन अनुदत्त किए जाने के लिए पात्र पाया जाता है ।

(8) यदि किसी समय बोर्ड को ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासक नियुक्त करने वाले आदेश का प्रयोजन पूरा हो गया है या किसी कारण से यह अवांछनीय है कि नियुक्ति आदेश प्रवृत्त बना रहना चाहिए तो बोर्ड आदेश को रद्द कर सकेगा और तदुपरि प्रशासक उस विशेष आर्थिक जोन के प्रबंध से निर्निहित हो जाएगा, जब तक कि बोर्ड द्वारा अन्यथा निदेश न दिया जाए, पुनः उस व्यक्ति में, जो विकासकर्ता है, निहित हो जाएगा जिसमें वह प्रशासक की नियुक्ति की तारीख के ठीक पूर्व निहित था ।

(9) जहां बोर्ड इस धारा के अधीन किसी विकासकर्ता की बाबत अनुमोदन पत्र को निलंबित करता है, वहां निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे, अर्थात्: -

(क) बोर्ड उस विकासकर्ता के अनुमोदन पत्र को अंतरित करने के लिए, जिसका अनुमोदन निलंबित किया गया है, आवदेन आमंत्रित करेगा और ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो विहित की जाए, उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों का चयन करेगा जिसको या जिनको विशेष आर्थिक जोन में विकासकर्ता का अनुमोदन पत्र अंतरित किया जा सकेगा;

(ख) उपखंड (क) के अधीन व्यक्ति या व्यक्तियों का चयन हो जाने पर, बोर्ड, लिखित सूचना द्वारा, विकासकर्ता से, विशेष आर्थिक जोन में अपना अनुमोदन पत्र इस प्रकार चयन किए गए व्यक्ति या व्यक्तियों को अंतरित करने की अपेक्षा कर सकेगा और तदुपरि विकासकर्ता उनमें से किसी ऐसे व्यक्ति को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् अंतरिती कहा गया है), जिसका अनुमोदन बोर्ड द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर और ऐसे प्रतिफल पर, जो विकासकर्ता और अंतरिती के बीच करार किया जाए, चयन किया गया है, विशेष आर्थिक जोन में अपने हित, अधिकार और दायित्व अंतरित करेगा;

(ग) अनुमोदन पत्र के निलंबन की तारीख से ही या उस तारीख से ही, जो यदि पूर्व में हो, जिसको विकासकर्ता के विशेष आर्थिक जोन में उसका अनुमोदन पत्र अंतरिती को अंतरित किया गया है, विकासकर्ता के सभी अधिकार, कर्तव्य, बाध्यताएं और दायित्व, सिवाय किसी ऐसे दायित्व के, जो उस तारीख से पूर्व प्रोद्भूत हुआ हो, आत्यंतिक रूप से समाप्त हो जाएंगे;

(घ) बोर्ड विशेष आर्थिक जोन के प्रचालन की बाबत ऐसे अंतरिम इंतजाम कर सकेगा जो वह उचित समझे;

(ङ) प्रशासक ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जैसा बोर्ड निदेश दे ।

(10) बोर्ड, निर्यात का संवर्धन करने या यूनिटों के हित का संरक्षण करने या लोकहित में ऐसे निदेश जारी कर सकेगा या ऐसी स्कीम बना सकेगा जो वह विशेष आर्थिक जोन के प्रचालन के लिए आवश्यक समझे ।

अध्याय 4

विकास आयुक्त

11. विकास आयुक्त-(1) केन्द्रीय सरकार, एक या अधिक विशेष आर्थिक जोन के लिए अपने अधिकारियों में से किसी ऐसे अधिकारी को जो भारत सरकार के उपसचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, विकास आयुक्त के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन किसी विकासकर्ता (केन्द्रीय सरकार से भिन्न) द्वारा स्थापित विशेष आर्थिक जोन में विकास आयुक्त की उसके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को जिन्हें वह आवश्यक समझे, नियुक्त कर सकेगी ।

(3) प्रत्येक विकास आयुक्त, अधिकारी और अन्य कर्मचारी ऐसे वेतन और भत्तों के और छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और ऐसे अन्य विषयों की बाबत जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए जाएं, सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, हकदार होंगे ।

12. विकास आयुक्त के कृत्य-(1) प्रत्येक विकास आयुक्त, विशेष आर्थिक जोन का तेजी से विकास और उससे निर्यात का संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सभी कदम उठाएगा ।

(2) पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विकास आयुक्त-

(क) विशेष आर्थिक जोन में यूनिट स्थापित करने के लिए उद्यमकर्ताओं का मार्गदर्शन करेगा;

(ख) विशेष आर्थिक जोन से निर्यात के प्रभावी संवर्धन को सुनिश्चित करेगा और उसके लिए उपयुक्त कदम उठाएगा;

(ग) खंड (क) और खंड (ख) के संबंध में या उनके प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के संबद्ध विभागों या अभिकरणों के बीच उचित समन्वय सुनिश्चित करेगा;

(घ) विशेष आर्थिक जोन में विकासकर्ता और यूनिट के कार्यकरण को मानीटर करेगा;

(ङ) ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा जो इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे समनुदेशित किए जाएं; और

(च) ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा जो उसे बोर्ड द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं । 

(3) प्रत्येक विकास आयुक्त विशेष आर्थिक जोन का संपूर्ण भारसाधक होगा और इस अधिनियम के अधीन किसी कृत्य का पालन करने के लिए धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर (जिनके अंतर्गत ऐसे विशेष आर्थिक जोन में प्रतिनियुक्त पदधारी भी हैं) प्रशासनिक नियंत्रण और पर्यवेक्षण रखेगा ।

(4) उपधारा (1) से उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रत्येक विकास आयुक्त ऐसे कृत्यों का पालन और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा जो उसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या संबद्ध राज्य सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं ।

(5) प्रत्येक विकास आयुक्त, समय-समय पर, किसी विकासकर्ता या यूनिट से ऐसी जानकारी मांग सकेगा जो, यथास्थिति, विकासकर्ता या यूनिट के कार्यकरण को मानीटर करने के लिए आवश्यक हो ।

(6) विकास आयुक्त, अपने अधीन नियोजित किसी भी अधिकारी को अपनी किन्हीं या सभी शक्तियों या कृत्यों को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

अध्याय 5

एकल पटल समाशोधन

13. अनुमोदन समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार-

(क) विद्यमान विशेष आर्थिक जोनों की दशा में, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से छह मास के भीतर;

(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् स्थापित अन्य विशेष आर्थिक जोनों की दशा में, ऐसे विशेष आर्थिक जोन की स्थापना की तारीख से छह मास के भीतर,

अधिसूचना द्वारा, प्रत्येक विशेष आर्थिक जोन के लिए धारा 14 में विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग करने और कृत्यों का पालन करने के लिए एक समिति का गठन करेगी, जिसे अनुमोदन समिति कहा जाएगा ।

(2) प्रत्येक अनुमोदन समिति में निम्नलिखित होंगे-

(क) विकास आयुक्त-अध्यक्ष; पदेन; 

(ख) केन्द्रीय सरकार के ऐसे दो अधिकारी जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य, पदेन;

(ग) राजस्व से संबंधित मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार के दो अधिकारी, जिन्हें उस सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य, पदेन;

(घ) आर्थिक कार्य (वित्तीय सेवाओं) से संबंधित मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार का एक अधिकारी, जिसे उस सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य; पदेन;  

(ङ) संबद्ध राज्य सरकार के ऐसे दो अधिकारी जिन्हें उस राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा-सदस्य, पदेन;

(च) संबद्ध विकासकर्ता का प्रतिनिधि-विशेष आमंत्रिती । 

(3) अनुमोदन समिति, अपनी शक्तियों का प्रयोग करने और अपने कृत्यों का पालन करने के प्रयोजन के लिए, अपने अधिवेशनों में ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें समिति ठीक समझे, आमंत्रित कर सकेगी जिनकी सहायता और सलाह को वह आवश्यक समझे ।

(4) प्रत्येक अनुमोदन समिति ऐसे समय और स्थानों पर अधिवेशन करेगी जिन्हें वह आवश्यक समझे तथा उसे अपनी स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी ।

(5) अनुमोदन समिति के कुल सदस्यों के आधे से उसकी गणपूर्ति होगी और अनुमोदन समिति के सभी कार्यों का विनिश्चय उपस्थित सदस्यों की आम सहमति द्वारा किया जाएगा:

परन्तु अनुमोदन समिति के आम सहमति से किसी मामले का विनिश्चय करने में असमर्थ रहने की दशा में, उस मामले को विनिश्चय के लिए अनुमोदन बोर्ड को भेजा जाएगा ।

(6) अनुमोदन समिति का कोई कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि अनुमोदन समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।

(7) अनुमोदन समिति के सभी आदेश और विनिश्चय और उसके द्वारा जारी सभी अन्य संसूचनाएं अध्यक्ष या अनुमोदन समिति द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित की जाएंगी ।

(8) पदेन सदस्य के उस पद पर न रहने के साथ ही, जिसके आधार पर उसका नामनिर्देशन किया गया था, उसकी पदावधि समाप्त हो जाएगी ।

14. अनुमोदन समिति की शक्तियां और कृत्य-(1) प्रत्येक अनुमोदन समिति निम्नलिखित विषयों के संबंध में कृत्यों का पालन और शक्तियों का प्रयोग कर सकेगी, अर्थात्: -

(क) विशेष आर्थिक जोन में किसी विकासकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाएं करने के लिए ऐसे जोन में स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र से माल का आयात या उपापन करने का अनुमोदन करना;

(ख) विशेष आर्थिक जोन में विकासकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाएं करने के लिए भारत के बाहर से या स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र से सेवा प्रदाता द्वारा सेवाएं प्रदान करने का अनुमोदन करना;

(ग) विशेष आर्थिक जोन में माल या सेवाओं या भाण्डागारण या व्यापार को मानीटर करना;

(घ) विशेष आर्थिक जोन में धारा 15 की उपधारा (8) के उपबंधों के अनुसार विनिर्माण करने या सेवाएं प्रदान करने या भाण्डागारण या व्यापार करने के लिए यूनिटें स्थापित करने के लिए प्रस्तावों का [धारा 9 की उपधारा (2) के खंड (ङ) के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से भिन्नट अनुमोदन करना या उन्हें उपांतरित करना या नामंजूर करना:

परन्तु जहां अनुमोदन समिति इस बारे में विनिश्चय करने में असमर्थ है कि क्या कोई विशिष्ट प्रक्रिया विनिर्माण की कोटि में आती है या नहीं, वहां वह उसे विनिश्चय के लिए अनुमोदन बोर्ड को निर्दिष्ट करेगी;

(ङ) धारा 9 की उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन अनुमोदन प्राप्त होने पर, यूनिट स्थापित करने के लिए (भारत के बाहर किसी व्यक्ति द्वारा विनिधानों सहित) विदेशी सहयोगों और विदेशी प्रत्यक्ष विनिधानों को अनुज्ञात करना;

(च) उन शर्तों के अनुपालन की मानीटरी और पर्यवेक्षण करना जिनके अधीन रहते हुए विकासकर्ता या उद्यमकर्ता को अनुमोदन पत्र या अनुज्ञा, यदि कोई हो, अनुदत्त की गई है;

(छ) ऐसे अन्य कृत्य करना जो उसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या संबद्ध राज्य सरकार द्वारा सौंपे जाएं ।

(2) अनुमोदन समिति ऐसे विकासकर्ता के संबंध में, जो केन्द्रीय सरकार है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसे कृत्यों का पालन या ऐसी शक्ति का प्रयोग नहीं करेगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट की जाए:

परंतु अनुमोदन समिति का गठन किए जाने तक संबद्ध विकास आयुक्त, अनुमोदन समिति की सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा और उसके सभी कृत्यों का निर्वहन करेगा ।

15. यूनिट की स्थापना-(1) कोई व्यक्ति, जो विशेष आर्थिक जोन में प्राधिकृत संक्रियाएं करने के लिए कोई यूनिट स्थापित करना चाहता है, संबद्ध विकास आयुक्त को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तथा ऐसी विशिष्टियों से युक्त, जो विहित की जाएं, प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेगा:

परंतु विद्यमान यूनिट इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार स्थापित की गई समझी जाएगी और ऐसी यूनिटों के लिए इस अधिनियम के अधीन अनुमोदन अपेक्षित नहीं होगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रस्ताव प्राप्त होने पर, विकास आयुक्त उसको अनुमोदन समिति को उसके अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगा ।

(3) अनुमोदन समिति या तो प्रस्ताव का बिना किसी उपांतरण के अनुमोदन कर सकेगी या ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझे, उपांतरण सहित प्रस्ताव का अनुमोदन कर सकेगी या उपधारा (8) के उपबंधों के अनुसार उस प्रस्ताव को नामंजूर कर सकेगी:

परंतु किसी प्रस्ताव के उपांतरण या नामंजूरी की दशा में, अनुमोदन समिति संबद्ध व्यक्ति को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगी और उसके लिए जो कारण हैं उन्हें लेखबद्ध करने के पश्चात् या तो प्रस्ताव को उपांतरित करेगी या उसे नामंजूर करेगी ।

(4) उपधारा (3) के अधीन किए गए अनुमोदन समिति के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अनुमोदन बोर्ड को अपील कर सकेगा ।

(5) यदि कोई अपील उसके लिए विहित समय की समाप्ति के पश्चात् की जाएगी तो वह ग्रहण नहीं की जाएगी:

परंतु कोई अपील उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी बोर्ड का यह समाधान कर देता है कि विहित समय के भीतर अपील न कर पाने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण थे ।

(6) उपधारा (4) के अधीन की गई प्रत्येक अपील, ऐसे प्ररूप में होगी और उसके साथ उस आदेश की एक प्रति जिसके विरुद्ध अपील की गई है और ऐसी फीस भी होगी, जो विहित की जाए ।

(7) किसी अपील के निपटान की प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए:

परन्तु किसी अपील का निपटारा करने से पूर्व, अपीलार्थी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

(8) केन्द्रीय सरकार, -

(क) उन अपेक्षाओं को (जिसके अन्तर्गत वह अवधि भी है, जिसके लिए कोई यूनिट स्थापित की जा सकेगी) विहित कर सकेगी जिनके अधीन रहते हुए अनुमोदन समिति, उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी प्रस्ताव को अनुमोदित, उपांतरित या नामंजूर कर सकेगी;

(ख) ऐसे निबंधन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए यूनिट प्राधिकृत संक्रियाएं करेगी और उसकी बाध्यताएं तथा हकदारियां, विहित कर सकेगी ।

(9) विकास आयुक्त, उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रस्ताव के अनुमोदन के पश्चात्, संबद्ध व्यक्ति को यूनिट स्थापित करने और उसमें ऐसी संक्रियाएं करने के लिए जिन्हें विकास आयुक्त प्राधिकृत करे, अनुमोदन पत्र अनुदत्त कर सकेगा और इस प्रकार प्राधिकृत प्रत्येक संक्रिया का अनुमोदन पत्र में उल्लेखित किया जाएगा ।

16. उद्यमकर्ता के अनुमोदन पत्र का रद्दकरण-(1) अनुमोदन समिति, किसी समय, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण या हेतुक है कि उद्यमकर्ता ने उन निबंधनों और शर्तों में से किसी का या उसकी बाध्यताओं का लगातार अतिक्रमण किया है जिनके अधीन रहते हुए उस उद्यमकर्ता को अनुमोदन पत्र अनुदत्त किया गया था, अनुमोदन पत्र को रद्द कर सकेगी:

परंतु ऐसा कोई अनुमोदन पत्र तब तक रद्द नहीं किया जाएगा जब तक कि उद्यमकर्ता को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान न कर दिया गया हो ।

(2) जहां अनुमोदन पत्र उपधारा (1) के अधीन रद्द कर दिया गया है, वहां यूनिट ऐसे रद्दकरण की तारीख से यूनिट होने के नाते उसे इस अधिनियम के अधीन उपलब्ध किसी छूट, रियायत, फायदे या कटौती की हकदार नहीं होगी ।

(3) इस अधिनियम के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, वह उद्यमकर्ता जिसका अनुमोदन पत्र उपधारा (1) के अधीन रद्द कर दिया गया है, अपनी यूनिट से संबंधित स्टॉक में पड़े पूंजीगत माल और तैयार माल या अप्रयुक्त कच्ची सामग्री के संबंध में उसके द्वारा ली गई छूट, रियायत, वापसी और किसी अन्य फायदे को ऐसी रीति से वापस करेगा जो विहित की जाए ।

(4) अनुमोदन समिति द्वारा उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, बोर्ड को अपील कर सकेगा ।

(5) यदि कोई अपील उसके लिए विहित समय की समाप्ति के पश्चात् की जाएगी तो वह ग्रहण नहीं की जाएगी:

परंतु कोई अपील उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी बोर्ड का यह समाधान कर देता है कि विहित समय के भीतर अपील न कर पाने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण थे ।

(6) उपधारा (4) के अधीन की गई प्रत्येक अपील, ऐसे प्ररूप में होगी और उसके साथ उस आदेश की एक प्रति जिसके विरुद्ध अपील की गई है और ऐसी फीस भी होगी, जो विहित की जाए ।

(7) किसी अपील के निपटान की प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए:

परन्तु किसी अपील का निपटारा करने से पूर्व, अपीलार्थी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

17. अपतट बैंककारी यूनिट की स्थापना और उसका प्रचालन-(1) किसी विशेष आर्थिक जोन में कोई अपतट बैंककारी यूनिट स्थापित करने और उसका प्रचालन करने के लिए आवेदन रिजर्व बैंक को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की जाए ।

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, रिजर्व बैंक, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि आवेदक ने उपधारा (3) के अधीन विनिर्दिष्ट सभी शर्तों को पूरा कर दिया है, तो ऐसे आवेदक को अपतट बैंककारी यूनिट की स्थापना और उसका प्रचालन करने की अनुज्ञा प्रदान करेगा ।

(3) रिजर्व बैंक, अधिसूचना द्वारा, उन निबंधनों और शर्तों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिनके अधीन रहते हुए कोई अपतट बैंककारी यूनिट विशेष आर्थिक जोन में स्थापित और प्रचालित की जा सकेगी ।

18. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की स्थापना-(1) केन्द्रीय सरकार किसी विशेष आर्थिक जोन में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र स्थापित करने का अनुमोदन कर सकेगी और ऐसा केन्द्र स्थापित करने और उसे प्रचालित करने के लिए अपेक्षाएं विहित कर सकेगी:

परंतु केन्द्रीय सरकार, किसी विशेष आर्थिक जोन में केवल एक ही अंतरराष्ट्रीय सेवा केन्द्र का अनुमोदन करेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार, ऐसे दिशानिर्देशों के अधीन रहते हुए, जो रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, बीमा, विनियामक और विकास प्राधिकरण और ऐसे अन्य संबद्ध प्राधिकरणों द्वारा जिन्हें वह ठीक समझे, बनाए जाएं, किसी अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में यूनिटों को स्थापित करने के लिए अपेक्षाएं और उनके प्रचालन के निबंधन और शर्तें विहित कर सकेगी ।

19. एकल आवेदन प्ररूप, विवरणी, आदि-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, यदि अपेक्षित हो, -

(क) किसी विकासकर्ता या किसी उद्यमकर्ता द्वारा किसी एक या अधिक केन्द्रीय अधिनियमों के अधीन कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा या रजिस्ट्रीकरण, या अनुमोदन अभिप्राप्त किए जाने के लिए एकल आवेदन का प्ररूप विहित कर सकेगी;

(ख) विशेष आर्थिक जोन के विकास या यूनिटें स्थापित करने या उनके प्रचालन से संबंधित विषयों के बारे में केन्द्रीय सरकार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए बोर्ड, विकास आयुक्त या अनुमोदन समिति को प्राधिकृत कर सकेगी;

(ग) किसी विकासकर्ता या किसी उद्यमकर्ता द्वारा किसी एक या अधिक केन्द्रीय अधिनियमों के अधीन विवरणी या जानकारी देने के लिए एकल प्ररूप विहित कर सकेगी ।

20. निरीक्षण करने के लिए अभिकरण-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यथास्थिति, विकासकर्ता या उद्यमकर्ता द्वारा किसी केन्द्रीय अधिनियम के उपबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण या निरीक्षण करने हेतु किसी अधिकारी या अभिकरण को विनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसा अधिकारी या अभिकरण ऐसे सत्यापन या अनुपालन की रिपोर्टें ऐसी रीति में और ऐसे समय के भीतर प्रस्तुत करेगा, जो उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।

21. अधिसूचित अपराधों के लिए एकल प्रवर्तन अधिकारी या अभिकरण-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन दण्डनीय बनाए गए किसी कृत्य या लोप को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित अपराध के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी विशेष आर्थिक जोन में किए गए किसी अधिसूचित अपराध या अपराधों की बाबत किसी अधिकारी या अभिकरण को प्रवर्तन अधिकारी या अभिकरण के रूप में प्राधिकृत कर सकेगी ।

(3) उपधारा (2) के अधीन प्राधिकृत प्रत्येक अधिकारी या अभिकरण को अन्वेषण, निरीक्षण, तलाशी या अभिग्रहण की ऐसी सभी तत्संबंधी शक्तियां होंगी, जो अधिसूचित अपराध की बाबत सुसंगत केन्द्रीय अधिनियम के अधीन उपबंधित हैं ।

22. अन्वेषण, निरीक्षण, तलाशी या अभिग्रहण-धारा 20 या धारा 21 के अधीन विनिर्दिष्ट अभिकरण या अधिकारी, संबंधित विकास आयुक्त को पूर्व सूचना देकर, विशेष आर्थिक जोन या किसी यूनिट में अन्वेषण, निरीक्षण, तलाशी या अभिग्रहण कर सकेगा यदि ऐसे अभिकरण या अधिकारी के पास यह विश्वास करने के कारण हैं (कारण लेखबद्ध किए जाएंगे) कि किसी विशेष आर्थिक जोन में कोई अधिसूचित अपराध किया गया है या उसके किए जाने की संभावना है:

परन्तु धारा 21 की उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी अभिकरण या अधिकारी से भिन्न किसी अभिकरण या अधिकारी द्वारा किसी विशेष आर्थिक जोन में कोई अन्वेषण, निरीक्षण, तलाशी या अभिग्रहण, संबंधित विकास आयुक्त के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा:

परन्तु यह और कि कोई अधिकारी या अभिकरण, यदि उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया गया हो, किसी विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में कोई अन्वेषण, निरीक्षण, तलाशी या अभिग्रहण विकास आयुक्त को पूर्व सूचना दिए बिना या उसके अनुमोदन के बिना कर सकेगा ।

23. वादों और अधिसूचित अपराधों का विचारण करने के लिए अभिहित न्यायालय-(1) राज्य सरकार, जिसमें विशेष आर्थिक जोन स्थित है, उस राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से-

(क) विशेष आर्थिक क्षेत्र में उद्भूत होने वाले सिविल प्रकृति के सभी वादों का विचारण करने के लिए; और

(ख) विशेष आर्थिक क्षेत्र में किए गए अधिसूचित अपराधों का विचारण करने के लिए, एक या अधिक न्यायालयों को अभिहित कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन अभिहित न्यायालय से भिन्न कोई न्यायालय, उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी वाद का विचारण या किसी अधिसूचित अपराध का विचारण नहीं करेगा:

परन्तु वे न्यायालय जिनमें किसी विशेष आर्थिक जोन में सिविल प्रकृति का कोई वाद इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व फाइल किया गया हो, ऐसे प्रारंभ के पश्चात् वाद का विचारण करते रहेंगे:

परन्तु यह और कि वे न्यायालय जिनमें किसी अधिसूचित अपराध का कोई विचारण इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किया जा रहा है, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् ऐसे अपराध का विचारण करते रहेंगे:

परन्तु यह भी कि इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किसी अधिसूचित अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् ऐसे अपराध के संबंध में विचारण तब तक करते रहेंगे जब तक कि न्यायालयों को उपधारा (1) के अधीन अभिहित न कर दिया जाए और ऐसे विचारण संबंधी सभी ऐसे मामले उसके पश्चात् इस प्रकार अभिहित किए गए ऐसे न्यायालय को अंतरित किए जाएंगे जो उस प्रकम से विचारण करेंगे जिस पर ऐसे मामले इस प्रकार अंतरित किए गए थे ।

24. उच्च न्यायालय को अपील-धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन अभिहित न्यायालय के किसी विनिश्चय या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, अभिहित न्यायालय के विनिश्चय या आदेश की संसूचना की तारीख से साठ दिन के भीतर ऐसे आदेशों से उद्भूत होने वाले तथ्य या विधि के किसी प्रश्न पर उच्च न्यायालय में अपील फाइल कर सकेगा:

परंतु उच्च न्यायालय, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी उक्त अवधि के भीतर अपील फाइल करने में पर्याप्त कारण से निवारित हुआ था, साठ दिन से अनधिक की और अवधि के भीतर उसे फाइल किए जाने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।

स्पष्टीकरण-धारा 23 में और इस धारा में उच्च न्यायालय" से उस राज्य का, जिसमें विशेष आर्थिक जोन स्थित है, उच्च न्यायालय अभिप्रेत है ।

25. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को अपराध के लिए उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि उसने यह साबित कर दिया है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

अध्याय 6

विशेष आर्थिक जोनों के संबंध में विशेष वित्तीय उपबंध

26. प्रत्येक विकासकर्ता और उद्यमकर्ता को छूट, वापसियां और रियायतें-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक विकासकर्ता और उद्यमकर्ता निम्नलिखित छूटों, वापसियों और रियायतों का हकदार नहीं होगा, अर्थात्: -

(क) विकासकर्ता या उद्यमकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाएं किए जाने के लिए विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में आयात किए गए माल या प्रदान की गई सेवा पर सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) या सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 (1975 का 51) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी सीमाशुल्क से छूट;

(ख) विशेष आर्थिक जोन से या यूनिट से भारत से बाहर किसी स्थान को निर्यात किए गए माल पर या प्रदान की गई सेवाओं पर, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) या सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 (1975 का 51) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी सीमाशुल्क से छूट;

(ग) विकासकर्ता या उद्यमकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाएं किए जाने के लिए किसी स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र से विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में लाए गए माल पर केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क अधिनियम, 1944 (1944 का 1) या केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1985 (1986 का 5) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी उत्पाद-शुल्क से छूट;

(घ) विकासकर्ता या उद्यमकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाएं किए जाने के लिए स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र से विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में लाए गए माल, या प्रदान की गई सेवाओं या भारत के बाहर अवस्थित सेवा प्रदाताओं द्वारा विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में प्रदान की गई सेवाओं पर ऐसी वापसी या ऐसे अन्य फायदे, जो समय-समय पर अनुज्ञेय हों;

(ङ) विकासकर्ता या यूनिट को विशेष आर्थिक जोन में प्राधिकृत संक्रियाओं को करने के लिए प्रदान की गई कराधेय सेवाओं पर वित्त अधिनियम, 1994 (1994 का 32) के अध्याय 5 के अधीन सेवा-कर से छूट;

(च) वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 (2004 का 23) की धारा 98 के अधीन उद्ग्रहणीय प्रतिभूति संव्यवहार कर से छूट, यदि कराधेय प्रतिभूति संव्यवहार, किसी अनिवासी द्वारा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र के माध्यम से किए जाते हैं;

(छ) केन्द्रीय विक्रय-कर अधिनियम, 1956 (1956 का 74) के अधीन समाचारपत्रों से भिन्न माल के विक्रय या क्रय पर कर के उद्ग्रहण से छूट, यदि ऐसे माल विकासकर्ता या उद्यमकर्ता द्वारा प्राधिकृत संक्रियाओं को करने के लिए आशयित हैं ।

(2) केन्द्रीय सरकार वह रीति, जिसमें और ऐसे निबंधन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के अधीन विकासकर्ता या उद्यमकर्ता को छूटें, रियायतें, वापसी या अन्य फायदे दिए जाएंगे, विहित कर सकेगी ।

27. आय-कर अधिनियम, 1961 के उपबंधों का कतिपय उपांतरण सहित विकासकर्ताओं और उद्यमकर्ताओं के संबंध में लागू होना-तत्समय यथा प्रवृत्त आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के उपबंध विशेष आर्थिक जोन या यूनिट में प्राधिकृत संक्रियाओं को करने के लिए विकासकर्ता या उद्यमकर्ता को या उनके संबंध में दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट उपांतरणों के अधीन रहते हुए, लागू होंगे ।

28. विशेष आर्थिक जोनों में माल या सेवाओं की अवधि-केन्द्रीय सरकार, वह अवधि विहित कर सकेगी जिसके दौरान किसी यूनिट या विशेष आर्थिक जोन में लाया गया कोई माल या प्रदान की गई सेवाएं कर, शुल्क या उपकर का संदाय किए बिना ऐसी यूनिट या ऐसे विशेष आर्थिक जोन में बना रहेगा या प्रदान की जाती रहेंगी ।

29. स्वामित्व का अंतरण और माल का हटाया जाना-किसी यूनिट या विशेष आर्थिक जोन में लाए गए या उत्पादित या विनिर्मित किसी माल के स्वामित्व का अंतरण या उसे ऐसे यूनिट या जोन से हटाया जाना, ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार विहित करे, अनुज्ञात किया जाएगा ।

30. यूनिटों द्वारा घरेलू निकासी-केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन रहते हुए, -

(क) किसी विशेष आर्थिक जोन से स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र में हटाया गया माल सीमाशुल्क से जिसके अंतर्गत सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 (1975 का 51) के अधीन प्रतिपाटन शुल्क, प्रतिशुल्क और सुरक्षा शुल्क भी है, जहां लागू हो, इस प्रकार प्रभार्य होगा, जैसे वे ऐसे माल पर तब उद्ग्रहणीय होते, जब वह आयातित किया जाता; और

(ख) किसी विशेष आर्थिक जोन से हटाए गए माल पर लागू शूल्क की दर और टैरिफ मूल्य, यदि कोई हो, इस प्रकार हटाए जाने की तारीख को और जहां ऐसी तारीख सुनिश्चित नहीं की जा सकती हो, वहां शुल्क के संदाय की तारीख को प्रवृत्त दर और टैरिफ मूल्य होगा ।

अध्याय 7

विशेष आर्थिक जोन प्राधिकरण

31. प्राधिकरण का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व उसके द्वारा स्थापित या जो ऐसे प्रारंभ के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित किया जाए, प्रत्येक विशेष आर्थिक जोन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और उसे सौंपे गए कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, एक प्राधिकरण का गठन करेगी जिसे (विशेष आर्थिक जोन का नाम) प्राधिकरण कहा जाएगा:

परन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित विद्यमान विशेष आर्थिक जोनों की बाबत, ऐसा प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से छह मास के भीतर गठित किया जाएगा:

परन्तु यह और कि जब तक ऐसे प्राधिकरण का गठन नहीं कर दिया जाता, ऐसे विद्यमान विशेष आर्थिक जोन पर नियंत्रण करने वाला व्यक्ति या प्राधिकारी (जिसके अंतर्गत विकास आयुक्त भी है) विशेष आर्थिक जोन पर प्राधिकरण का गठन किए जाने तक ऐसा नियंत्रण करता रहेगा ।

(2) प्रत्येक प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

(3) प्रत्येक प्राधिकरण का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे ।

(4) कोई प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, भारत में अन्य स्थानों पर अपने शाखा कार्यालय स्थापित कर सकेगा ।

(5) प्रत्येक प्राधिकरण निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-

(क) उस विशेष आर्थिक जोन का, जिस पर प्राधिकरण अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है, विकास आयुक्त-अध्यक्ष, पदेन;    

(ख) केन्द्रीय सरकार के ऐसे दो अधिकारी जिन्हें विशेष आर्थिक जोन से संबंधित विषयों का ज्ञान हो या उनका ऐसे क्षेत्र में अनुभव हो, जिन्हें उस सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए-सदस्य, पदेन;

(ग) विशेष आर्थिक जोन से संबंधित विषयों पर वाणिज्य से संबंधित भारत सरकार के मंत्रालय या विभाग का एक अधिकारी-सदस्य, पदेन;

(घ) दो से अनधिक व्यक्ति जो उद्यमकर्ता या उनके नामनिर्देशिती हों जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए-सदस्य, पदेन ।

(6) किसी प्राधिकरण के (पदेन सदस्यों से भिन्न) सदस्यों की पदावधि और रिक्तियों को भरने की रीति वह होगी जो विहित की जाए ।

(7) प्राधिकरण ऐसी रीति में, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए और ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को अपने साथ सहयोजित कर सकेगा जिसकी सहायता या सलाह उसे अपने कृत्यों के प्रभावी रूप से निर्वहन के लिए अपेक्षित है और वह व्यक्ति ऐसे भत्ते या फीस प्राप्त करने का हकदार होगा जो प्राधिकरण द्वारा नियत की जाए ।

(8) प्राधिकरण के कुल सदस्यों के एक-तिहाई से गणपूर्ति होगी और प्राधिकरण के सभी कार्य उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे ।

(9) प्राधिकरण का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी कि-

(क) प्राधिकरण में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या

(ख) प्राधिकरण के सदस्य के रूप में कार्य रहे किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या

(ग) प्राधिकरण की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता है ।

(10) प्रत्येक प्राधिकरण ऐसे समय पर और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में (जिसके अन्तर्गत ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं

32. प्राधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) उस विशेष आर्थिक जोन का प्रत्येक विकास आयुक्त, जिसके लिए उसे उस रूप में नियुक्त किया गया है, संबंधित प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक होगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं । 

(2) प्रत्येक प्राधिकरण, धारा 33 के अधीन उसको अंतरित अधिकारियों और कर्मचारियों के अतिरिक्त, ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।

(3) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की पद्धति, सेवा की शर्तें, वेतनमान तथा भत्ते वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।

33. प्राधिकरण को अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के अंतरण के लिए विशेष उपबंध-(1) केन्द्रीय सरकार के लिए, संबंधित विद्यमान विशेष आर्थिक जोन में पदधारण करने वाले किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को (ऐसे अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के सिवाय जो प्रतिनियुक्ति पर हैं) आदेश द्वारा, ऐसी तारीख या तारीखों से जो आदेश में विहित की जाएं, प्राधिकरण को अंतरित करना विधिमान्य होगा:

परंतु उस पद का वेतनमान जिस पर ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को अंतरित किया जाता है, उस पद के वेतनमान से निम्नतर नहीं होगा जिसको वह ऐसे अंतरण से ठीक पूर्ण धारण कर रहा था और उस पद की जिस पर उसका अंतरण किया जाता है, सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें (जिसके अंतर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं) ऐसे अंतरण से ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित पद के संबंध में सेवा के निबंधनों और शर्तों से कम अनुकूल नहीं होंगी:

परंतु यह और कि यदि, उसके अंतरण से ठीक पूर्व, कोई ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी केन्द्रीय सरकार के अधीन किसी उच्चतर पद पर किसी छुट्टी के कारण रिक्ति या विनिर्दिष्ट अवधि की किसी रिक्ति के कारण स्थानापन्न कार्य कर रहा था, तो उसका वेतन और अन्य भत्ते, यदि कोई हों, अंतरण पर ऐसी रिक्ति की अनवसित अवधि के लिए संरक्षित किए जाएंगे और तत्पश्चात् वह केन्द्रीय सरकार के अधीन उस पद को लागू वेतनमान का हकदार होगा जिसके लिए वह तब हकदार होता जब वह उस पर प्रतिवर्तित हुआ होता यदि वह प्राधिकरण में अंतरित न हुआ होता । 

(2) यदि इस संबंध में कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि किसी विषय, जिसके अंतर्गत पारिश्रमिक, पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सीय प्रसुविधाएं भी हैं, से संबंधित सेवा के विहित निबंधन और शर्तें उस पद से संबद्ध निबंधनों और शर्तों से कम अनुकूल हैं, जो प्राधिकरण को उसके अंतरण से ठीक पूर्व किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी द्वारा धारित पद से संबद्ध थीं तो इस विषय में केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

34. प्राधिकरण के कृत्य-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक प्राधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि वह उस विशेष आर्थिक जोन के, जिसके लिए उसका गठन किया गया है, विकास, प्रचालन और प्रबंध के लिए ऐसे उपाय करे, जो वह     ठीक समझे ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसमें निर्दिष्ट उपायों में निम्नलिखित के लिए उपबंध हो सकेगा, -

(क) विशेष आर्थिक जोन में अवसंरचना का विकास करना;

(ख) विशेष आर्थिक जोन से निर्यातों का संवर्धन करना;

(ग) विशेष आर्थिक जोन के कार्यकरण और कार्यपालन का पुनर्विलोकन करना;

(घ) प्राधिकरण की संपत्तियों के उपयोग के लिए उपयोक्ता या सेवा प्रभार अथवा फीस या किराए का उद्ग्रहण करना;

(ङ) ऐसे अन्य कृत्य करना जो विहित किए जाएं ।

35. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्रत्येक प्राधिकरण को अनुदान और उधारों के रूप में उतनी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जितनी वह सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग करने हेतु उपयुक्त समझे ।

36. निधि की स्थापना और उसका उपयोजन-(1) प्रत्येक प्राधिकरण द्वारा एक निधि स्थापित की जाएगी जिसे (संबद्ध विशेष आर्थिक जोन का नाम) प्राधिकरण निधि कहा जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, -

(क) वे सभी धनराशियां जो केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्राधिकरण को प्रदान करे;

(ख) वे सभी अनुदान या उधार जो इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण को दिए जाएं;

(ग) प्राधिकरण की संपत्तियों के उपयोग के लिए उपयोक्ता या सेवा प्रभार या फीस अथवा किराए के रूप में प्राप्त सभी राशियां;

(घ) प्राधिकरण द्वारा ऐसे अन्य स्रोतों से प्राप्त सभी राशियां जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चित की जाएं ।

(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित की पूर्ति करने के लिए किया जाएगा, -

(क) प्राधिकरण के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक;

(ख) धारा 34 के अधीन प्राधिकरण के कृत्यों के निर्वहन में उसके व्यय;

(ग) किसी उधार का प्रतिदाय;

(घ) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों पर और प्रयोजनों के लिए व्यय; और

(ङ) प्राधिकरण के कोई अन्य प्रशासनिक व्यय ।

37. लेखा और संपरीक्षा-(1) प्रत्येक प्राधिकरण, समुचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित करे ।

(2) प्रत्येक प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षा, भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक ऐसे अंतरालों पर करेगा, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और उस संपरीक्षा के संबंध में उपगत व्यय प्राधिकरण द्वारा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक या प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त उस व्यक्ति के, उस संपरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में साधारणतया होते हैं और उसे विशिष्ट रूप से बहियां, लेखा, संबंधित वाउचर और अन्य दस्तावेज तथा कागज पेश किए जाने की मांग करने और प्राधिकरण के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित प्रत्येक प्राधिकरण के लेखा, उनकी संपरीक्षा रिपोर्ट के साथ हर वर्ष केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित किए जाएंगे और केन्द्रीय सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

38. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-प्रत्येक प्राधिकरण, ऐसे निदेशों को कार्यान्वित करने के लिए आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए उसे जारी करे ।

39. विवरणियां और रिपोर्टें-(1) प्रत्येक प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति से, जो विहित की जाए या जैसा केन्द्रीय सरकार निदेश दे, किसी विशेष आर्थिक जोन और यूनिटों में निर्यात के संवर्धन और विकास, प्रचालन और अनुरक्षण के संबंध में ऐसी विवरणियां और विवरण तथा ऐसी विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, यथासंभवशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को एक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, देगा जिसमें पूर्वतर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही और पूर्ण विवरण दिया जाएगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त प्रत्येक रिपोर्ट की प्रति, उसके प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी । 

40. प्राधिकरण को अतिष्ठित करने की शक्ति-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि प्राधिकरण इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है या उसने उनका पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम किया है या अपनी शक्तियों से परे कार्य किया है या उनका दुरुपयोग किया है या जानबूझकर अथवा पर्याप्त हेतुक के बिना, धारा 38 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी निदेश का पालन करने में असफल रहा है तो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा उस प्राधिकरण को ऐसी अवधि के लिए जो छह मास से अधिक की न हो, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगी :

परन्तु इस उपधारा के अधीन अधिसूचना जारी करने से पूर्व, केन्द्रीय सरकार उस प्राधिकरण को प्रस्तावित अधिक्रमण के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए उचित समय देगी और प्राधिकरण के अभ्यावेदन पर, यदि कोई है, विचार करेगी ।

(2) प्राधिकरण को अतिष्ठित करते हुए, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन पर,-

(क) प्राधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, अधिक्रमण की तारीख से ही उस रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख) ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन प्राधिकरण द्वारा या उसकी ओर से प्रयोग या निर्वहन किया जा सकता है, अधिक्रमण की अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा प्रयोग और निर्वहन किया जाएगा जैसा केन्द्रीय सरकार निदेश दे;

(ग) प्राधिकरण में निहित सभी संपत्ति, अधिक्रमण की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित होगी ।

(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिक्रमण की अवधि के अवसान पर, -

(क) अधिक्रमण की अवधि को छह मास से अनधिक की और अवधि के लिए बढ़ा सकेगी; या

(ख) धारा 31 में उपबंधित रीति में प्राधिकरण का पुनर्गठन कर सकेगी ।

41. प्राधिकरण के सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों का लोक सेवक होना-प्रत्येक प्राधिकरण के सभी सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बारे में, जब वे इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबंधों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या उनका कार्य करना तात्पर्यित है, यह समझा जाएगा कि वे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक हैं ।

अध्याय 8

प्रकीर्ण

42. विवाद का निर्देश-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, यदि, -

(क) किसी विशेष आर्थिक जोन में दो या अधिक उद्यमकर्ताओं या दो या अधिक विकासकर्ताओं के बीच या उद्यमकर्ता और विकासकर्ता के बीच सिविल प्रकृति का कोई विवाद उद्भूत होता है; और

(ख) ऐसे विवाद के संबंध में वादों का विचारण करने के लिए न्यायालय या न्यायालयों को धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन अभिहित नहीं किया गया था,

तो ऐसा विवाद मध्यस्थता के लिए निर्देशित किया जाएगा:

परन्तु ऐसा कोई विवाद धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन न्यायालय या न्यायालयों को अभिहित किए जाने की तारीख को या उसके पश्चात् मध्यस्थता के लिए निर्देशित नहीं किया जाएगा ।

(2) जहां कोई विवाद उपधारा (1) के अधीन मध्यस्थता के लिए निर्दिष्ट किया गया है, वहां उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले मध्यस्थ द्वारा निपटाया या विनिश्चित किया जाएगा ।

(3) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26) के उपबंध इस अधिनियम के अधीन सभी माध्यस्थम् को इस प्रकार लागू होंगे मानो माध्यस्थम् के लिए कार्यवाही माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 के उपबंधों के अधीन, निपटान या विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट की गई हो ।

43. परिसीमा-(1) किसी ऐसे विवाद की दशा में जिसे माध्यस्थम् के लिए निर्दिष्ट किया जाना अपेक्षित है, परिसीमा की अवधि, परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उपबंधों द्वारा ऐसे विनियमित होगी मानो विवाद कोई वाद है और मध्यस्थ सिविल न्यायालय है ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मध्यस्थ परिसीमा की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी विवाद को ग्रहण कर सकेगा, यदि आवेदक मध्यस्थ का यह समाधान कर देता है कि विवाद को ऐसी अवधि के भीतर निर्दिष्ट नहीं करने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण थे ।

44. इस अधिनियम के उपबंधों का विद्यमान विशेष आर्थिक जोनों को लागू होना-इस अधिनियम के सभी उपबंध (धारा 3 और धारा 4 के सिवाय), यथाशक्य प्रत्येक विद्यमान विशेष आर्थिक जोन को लागू होंगे ।

45. वे व्यक्ति, जिन्हें इस अधिनियम के अधीन संसूचना भेजी जा सकेगी-इस अधिनियम के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा कोई संसूचना उस व्यक्ति को भेजी जा सकेगी जिसका विशेष आर्थिक जोन या यूनिट के कार्यों पर अंतिम नियंत्रण है या जहां ऐसे कार्य किसी प्रबंधक, निदेशक, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक या किसी अन्य अधिकारी को, वह चाहे जिस नाम से ज्ञात हो, सौंपे गए हों वहां ऐसी संसूचनाएं ऐसे प्रबंधक, निदेशक, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक या किसी अन्य अधिकारी को भेजी जा सकेंगी । 

46. पहचान पत्र-प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह किसी विशेष आर्थिक जोन में नियोजित है, या निवास कर रहा है या उससे उसमें उपस्थित होने की अपेक्षा की जाती है, ऐसे विशेष आर्थिक जोन के प्रत्येक विकास आयुक्त द्वारा पहचान पत्र ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियों से युक्त, जो विहित की जाएं, प्रदान किया जाएगा ।

47. प्रशासन के लिए उत्तरदायी प्राधिकारी-ऐसा प्राधिकारी, जिसे किसी केन्द्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन कोई शक्ति प्रदत्त की गई है या जिससे किसी कृत्य का निर्वहन करना अपेक्षित है, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए किसी विशेष आर्थिक जोन में उस अधिनियम के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग या ऐसे कृत्यों को निर्वहन कर सकेगा ।

48. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या बोर्ड, या अनुमोदन समिति, या प्राधिकरण के किसी अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी या विकास आयुक्त के विरुद्ध नहीं होगी ।

49. विशेष आर्थिक जोनों के संबंध में इस अधिनियम या अन्य अधिनियम या अन्य अधिनियमितियों के उपबंधों को उपांतरित करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम (धारा 53 से धारा 56 तक से भिन्न) या किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों या विनियमों या तद्धीन जारी किसी अधिसूचना या आदेश या दिए गए किसी निदेश का उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट कोई उपबंध (नियम या विनियम बनाने से संबंधित उपबंधों से भिन्न)-

(क) किसी विशेष आर्थिक जोन या विशेष आर्थिक जोनों के किसी वर्ग या सभी विशेष आर्थिक जोनों को लागू नहीं होगा; या 

(ख) किसी विशेष आर्थिक जोन या विशेष आर्थिक जोनों के किसी वर्ग या सभी विशेष आर्थिक जोनों को केवल ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों सहित जो इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट किए जाएं, लागू होगा:

परंतु इस धारा की कोई बात, किसी केन्द्रीय अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम या उसके अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना या आदेश या दिए गए किसी निदेश या बनाई गई किसी स्कीम के किन्हीं उपांतरणों को, जहां तक ऐसे उपांतरण, नियम, विनियम, अधिसूचना, आदेश या निदेश या स्कीम का, किसी विशेष आर्थिक जोन को लागू व्यापार संघों, औद्योगिक और श्रम विवादों, श्रमिक कल्याण, जिसके अंतर्गत कार्य की दशाएं, भविष्य निधि, नियोजक दायित्व, कर्मकार प्रतिकर, अशक्तता और वार्धक्य पेंशन और प्रसूति फायदे भी हैं, से संबंधित विषयों से संबंध है, लागू नहीं होगी । 

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए जाने के लिए प्रस्थापित प्रत्येक अधिसूचना की प्रति, प्रारूप रूप में, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन अधिसूचना के जारी किए जाने का अननुमोदन करने के लिए सहमत हो जाते हैं या दोनों सदन अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाते हैं तो, यथास्थिति, अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी या केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही जारी की जाएगी जिस पर दोनों सदन सहमत हो गए हों । 

50. छूट देने की राज्य सरकार की शक्ति-राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजनों के लिए, विकासकर्ताओं और यूनिटों के लिए नीतियां अधिसूचित कर सकेगी और-

(क) विकासकर्ता या उद्यमकर्ता को राज्य करों, उद्ग्रहणों और शुल्कों से छूट प्रदान करने वाली;

(ख) किसी राज्य अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति या प्राधिकारी को प्रदत्त शक्तियों को, विकासकर्ता या उद्यमकर्ता के संबंध में विकास आयुक्त को प्रत्यायोजित करने वाली,

किसी विधि के अधिनियमन के लिए उपयुक्त उपाय कर सकेगी ।

51. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में अन्तर्विष्ट किसी असंगत बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

52. कतिपय उपबंधों का लागू होना-(1) सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के अध्याय 10क और तद्धीन बनाए गए विशेष आर्थिक जोन नियम, 2003 और विशेष आर्थिक जोन (सीमाशुल्क प्रक्रिया) विनियम, 2003 में अंतर्विष्ट उपबंध, उस तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे, किसी विशेष आर्थिक जोन को लागू नहीं होंगे ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) और तद्धीन बनाए गए विशेष आर्थिक जोन नियम, 2003 और विशेष आर्थिक जोन (सीमाशुल्क प्रक्रिया) विनियम, 2003 के किन्हीं उपबंधों के अधीन किए गए सभी अपराध, यथास्थिति, उक्त अधिनियम या नियमों द्वारा शासित होते रहेंगे ।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिनियम, नियमों और विनियमों के उक्त उपबंधों के अधीन की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यित कोई बात या कार्रवाई, जिसके अंतर्गत बनाया गया कोई नियम, जारी की गई अधिसूचना, किया गया निरीक्षण, आदेश या जारी की गई सूचना या अनुदत्त कोई अनुज्ञा या प्राधिकार या छूट या निष्पादित कोई दस्तावेज भी है, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, उस उपधारा में निर्दिष्ट अधिनियम या नियमों या विनियमों के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई या बनाया गया या जारी की गई या अनुदत्त या निष्पादित की गई समझी जाएंगी ।

53. कतिपय मामलों में विशेष आर्थिक जोनों का पत्तन, विमान-पत्तन, अंतरदेशीय आधान डिपो, भूमि स्टेशन, आदि होना-(1) कोई विशेष आर्थिक जोन, नियत तारीख से ही, प्राधिकृत संक्रियाओं को करने के प्रयोजनों के लिए भारत के सीमाशुल्क राज्यक्षेत्र से बाहर का राज्यक्षेत्र समझा जाएगा ।

(2) कोई विशेष आर्थिक जोन उस तारीख से, जो केंद्रीय सरकार अधिसूचित करे, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 7 के अधीन, यथास्थिति, पत्तन, विमानपत्तन, अंतरदेशीय आधान डिपो, भूमि स्टेशन और भूमि सीमाशुल्क स्टेशन समझा जाएगा: 

परंतु केंद्रीय सरकार, इस धारा के प्रयोजनों के लिए भिन्न-भिन्न विशेष आर्थिक जोनों के लिए, भिन्न-भिन्न तारीखें नियत   कर सकेगी ।

54. पहली अनुसूची का संशोधन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए और यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो अधिसूचना द्वारा, पहली अनुसूची में अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी अधिनियमिति को, यथास्थिति, जोड़ सकेगी या उसमें से लोप कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्येक अधिसूचना की प्रति, प्रारूप रूप में, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन अधिसूचना के जारी किए जाने का अनुमोदन न करने के लिए सहमत हो जाते हैं या दोनों सदन अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए, सहमत हो जाते हैं तो, यथास्थिति, वह अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी या केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही जिस पर दोनों सदन सहमत हो गए हों जारी की जाएगी ।

55. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 2 के खंड (त) के अधीन विशेष आर्थिक जोनों के विकास के लिए आवश्यक अवसंरचात्मक सुविधाएं और खंड (य) के अधीन विशेष आर्थिक जोन में सेवाएं;

(ख) वह अवधि, जिसके भीतर संबंधित व्यक्ति धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन राज्य सरकार की सहमति अभिप्राप्त करेगा;

(ग) वह प्ररूप जिसमें तथा वह रीति जिससे कोई प्रस्ताव किया जा सकेगा और धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन उसमें अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां;

(घ) वह अवधि जिसके भीतर राज्य सरकार धारा 3 की उपधारा (6) के अधीन अपनी सिफारिशों सहित प्रस्थापना भेज सकेगी;

(ङ) वे अपेक्षाएं जिनके अधीन रहते हुए, बोर्ड, धारा 3 की उपधारा (8) के अधीन प्रस्ताव का अनुमोदन कर सकेगा, उसमें उपांतरण कर सकेगा या उसे नामंजूर कर सकेगा;

(च) वह अवधि जिसके भीतर धारा 3 की उपधारा (10) के अधीन राज्य सरकार या विकासर्ता या, उद्यमकर्ता को अनुमोदन पत्र संसूचित किया जाएगा;

(छ) किसी राज्य में विनिर्दिष्ट रूप से पहचान किए गए क्षेत्र को धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन विशेष आर्थिक जोन के रूप में अधिसूचित करने के लिए अन्य अपेक्षाएं;

(ज) वे निबंधन, शर्तें तथा परिसीमाएं जिनके अधीन रहते हुए, स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र में से विशेष आर्थिक जोन को निर्यात किए गए या उसमें आयात किए गए या उससे उपाप्त माल या सेवाओं को धारा 7 के अधीन करों, शुल्कों या उपकर के संदाय से छूट दी जा सकेगी;

(झ) धारा 10 की उपधारा (9) के खण्ड (क) के अधीन किसी विकासकर्ता के अनुमोदन पत्र के निलंबन की दशा में, अनुमोदन पत्र के अंतरण के लिए प्रक्रिया;

(ञ) वह प्ररूप और रीति, जिसमें धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकेगा और उसमें अंतर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां;

(ट) वह समय जिसके भीतर अनुमोदन समिति के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति धारा 15 की उपधारा (4) के अधीन अपील कर सकेगा;

(ठ) वह प्ररूप, जिसमें धारा 15 की उपधारा (6) के अधीन अपील की जाएगी और ऐसी अपील करने के लिए फीस;

(ड) धारा 15 की उपधारा (7) के अधीन किसी अपील को निपटाने के लिए प्रक्रिया;

(ढ) वे अपेक्षाएं (जिसके अंतर्गत वह अवधि भी है, जिसके लिए यूनिट स्थापित की गई हो), जिनके अधीन रहते हुए कोई प्रस्ताव धारा 15 की उपधारा (8) के खंड (क) के अधीन अनुमोदित, उपांतरित या नामंजूर किया जा सकेगा; 

(ण) किसी यूनिट के लिए निबंधन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए वह धारा 15 की उपधारा (8) के खंड (ख) के अधीन प्राधिकृत संक्रियाएं करेगी और यूनिट की बाध्यताएं और हकदारी;

(त) वह समय जिसके भीतर अनुमोदन समिति के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति धारा 16 की उपधारा (4) के अधीन अपील कर सकेगा;

(थ) वह प्ररूप, जिसमें धारा 16 की उपधारा (6) के अधीन अपील की जाएगी और अपील करने के लिए फीस;

(द) धारा 16 की उपधारा (7) के अधीन किसी अपील के निपटान के लिए प्रक्रिया;

(ध) वह प्ररूप और वह रीति जिसमें धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन किसी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिट स्थापित करने के लिए आवेदन किया जा सकेगा;

(न) धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन किसी विशेष आर्थिक जोन में अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की स्थापना तथा उसके प्रचालन के लिए अपेक्षाएं;

(प) वे अपेक्षाएं और निबंधन तथा शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 18 की उपधारा (2) के अधीन किसी विशेष आर्थिक जोन में अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में कोई यूनिट स्थापित और प्रचालित की जा सकेगी;

(फ) धारा 19 के खण्ड (क) के अधीन कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा या रजिस्ट्रीकरण या अनुमोदन अभिप्राप्त करने के लिए एकल आवेदन का प्ररूप;

(ब) धारा 19 के खंड (ग) के अधीन किसी उद्यमकर्ता या विकासकर्ता द्वारा एकल विवरणी या जानकारी प्रस्तुत करने के लिए प्ररूप;

(भ) वह रीति जिसमें और वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 26 की उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक विकासकर्ता और उद्यमकर्ता को छूट तथा रियायतें वापसी या अन्य फायदे अनुदत्त किए जाएंगे;

(म) वह अवधि जिसके दौरान किसी विशेष आर्थिक जोन में लाया गया माल या प्रदान की गई सेवाएं धारा 28 के अधीन ऐसी यूनिट या विशेष आर्थिक जोन में बना रहेगा या प्रदान की जाती रहेंगी;

(य) वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 29 के अधीन किसी यूनिट या, विशेष आर्थिक जोन के भीतर लाए गए या उसमें उत्पादित या विनिर्मित किसी माल के स्वामित्व का अन्तरण या ऐसी यूनिट अथवा जोन से उसका हटाया जाना अनुज्ञात किया जाएगा;

(यक) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए यूनिटें धारा 30 के अधीन किसी विशेष आर्थिक जोन में विनिर्मित माल का स्वदेशी टैरिफ क्षेत्र को विक्रय करने के लिए हकदार होंगी;

(यख) धारा 31 की उपधारा (6) के अधीन प्रत्येक प्राधिकरण के पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों की पदावधि तथा रिक्तियों को भरने की रीति;

(यग) वह रीति जिसमें, और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए और वे प्रयोजन जिनके लिए कोई व्यक्ति धारा 31 की उपधारा (7) के अधीन सहयुक्त किया जा सकेगा;

(यघ) धारा 31 की उपधारा (10) के अधीन अधिवेशनों के समय और स्थान तथा अधिवेशनों में कारबार के संव्यहार में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया;

(यङ) धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक विकास आयुक्त की शक्तियां और उसके कृत्य;

(यच) धारा 32 की उपधारा (3) के अधीन प्रत्येक प्राधिकरण के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की पद्धति, उनकी सेवा-शर्तें तथा वेतनमान और भत्ते;

(यछ) धारा 34 की उपधारा (2) के खंड (ङ) के अधीन प्राधिकरण द्वारा निष्पादित किए जाने वाले अन्य कृत्य;

(यज) वह प्ररूप जिसमें धारा 37 की उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक प्राधिकरण के लेखा तथा अन्य सुसंगत अभिलेख रखे जाएंगे और लेखाओं का वार्षिक विवरण तैयार किया जाएगा; 

(यझ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे और वह समय जब प्रत्येक प्राधिकारी धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सकरार को विवरणियां और विवरण तथा अन्य विशिष्टियां प्रस्तुत करेगा;

(यञ) वह प्ररूप जिसमें तथा वह तारीख जिससे पूर्व प्रत्येक प्राधिकारी धारा 39 की उपधारा (2) के अधीन अपने क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा;

(यट) वह प्ररूप जिसमें और वे विशिष्टियां जो धारा 46 के अधीन पहचान पत्र में अन्तर्विष्ट की जाएंगी;

(यठ) कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना है या जो विहित किया जाए ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाऐ या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम तत्पश्चात्, यथास्थिति, केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा, या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा; तथापि, उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

56. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों:

परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

57. कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन-ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, तीसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां उसमें विनिर्दिष्ट रीति में संशोधित की जाएंगी:

परन्तु ऐसी भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी जिनको तीसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट संशोधन किसी विशिष्ट विशेष आर्थिक जोन या विशेष आर्थिक जोन के किसी वर्ग या सभी विशेष आर्थिक जोनों को लागू होंगे ।

58. व्यावृत्तियां-विशेष आर्थिक जोन से संबंधित किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन बनाए गए या बनाए गए तात्पर्यित सभी नियम या जारी की गई या जारी की गई तात्पर्यित सभी अधिसूचनाएं, जहां तक उनका संबंध उन विषयों से है जिनके लिए इस अधिनियम में या तद्धीन बनाए गए नियमों में या जारी की गई अधिसूचना में उपबंध किया जाता है, और वे उनसे असंगत नहीं हैं, इस अधिनियम के अधीन इस प्रकार बनाए गए या जारी की गई समझी जाएगी मानो यह अधिनियम उस तारीख को प्रवृत्त था जिसको ऐसे नियम बनाए गए थे या अधिसूचनाएं जारी की गई थीं और तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे या बनी रहेंगी जब तक इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या जारी की गई अधिसूचनाओं द्वारा अधिक्रान्त नहीं कर दिए जाते हैं या नहीं कर दी जाती हैं ।

पहली अनुसूची

(धारा 7 और धारा 54 देखिए)

अधिनियमितियां

                1. कृषि उपज उपकर अधिनियम, 1940 (1940 का 27) ।

                2. काफी अधिनियम, 1942 (1942 का 7) ।

                3. अभ्रक खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1946 (1946 का 22) ।

                4. रबड़ अधिनियम, 1947 (1947 का 24) ।

                5. चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) ।

                6. नमक उपकर अधिनियम, 1953 (1953 का 49) ।

                7. ओषधीय और प्रसाधन निर्मितियां (उत्पाद-शुल्क) अधिनियम, 1955 (1955 का 16) ।

                8. अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम, 1957 (1957 का 58) ।

                9. चीनी (उत्पादन विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का 55) ।

                10. टेक्सटाइल समिति अधिनियम, 1963 (1963 का 41) ।

                11. उपज उपकर अधिनियम, 1966 (1966 का 15) ।

                12. सामुद्रिक उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972 (1972 का 13) ।

                13. कोयला खान (संरक्षण और विकास) अधिनियम, 1974 (1974 का 28) ।

                14. तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 (1974 का 47) ।

                15. तम्बाकू उपकर अधिनियम, 1975 (1975 का 26) ।

                16. अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (टेक्सटाइल और टेक्सटाइल वस्तु) अधिनियम, 1978 (1978 का 40) ।

                17. चीनी उपकर अधिनियम, 1982 (1982 का 3) ।

                18. जूट विनिर्मिति उपकर अधिनियम, 1983 (1983 का 28) ।

                19. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात उपकर अधिनियम, 1985 (1986 का 3) ।

                20. गर्म मसाला उपकर अधिनियम, 1986 (1986 का 11) ।

                21. अनुसंधान और विकास उपकर अधिनियम, 1986 (1986 का 32) ।

दूसरी अनूसूची

(धारा 27 देखिए)

आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) में उपांतरण

                (क) धारा 10 में, -

(अ) खंड (15) में उपखंड (vii) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड अंत में अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

(viii) किसी अनिवासी द्वारा या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो मामूली तौर पर भारत में निवासी नहीं है, विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खण्ड (प) में निर्दिष्ट अपतट बैंककारी यूनिट में 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् किए गए निक्षेप पर प्राप्त ब्याज के रूप में कोई अन्य;";

(आ) खंड (23छ) में धारा 80झक की उपधारा (4)" शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों के पश्चात् या धारा 80झकख की उपधारा (3)" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;

(इ) खंड (34) में निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांश को किसी ऐसे निर्धारिती की, जो विकासकर्ता या उद्यमकर्ता है, कुल आय में सम्मिलित नहीं किया   जाएगा ।";

(ख) धारा 10क में, उपधारा (7क) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

(7ख) इस धारा के उपबंध किसी ऐसे उपक्रम को लागू नहीं होंगे, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यग) में निर्दिष्ट यूनिट है और जिसने 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी विशेष आर्थिक जोन में वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर साफ्टवेयर का विनिर्माण या उत्पादन करना आरंभ कर दिया है या करता है ।";

।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

(घ) धारा 54छ के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

54छक. औद्योगिक उपक्रम के शहरी क्षेत्र से किसी विशेष आर्थिक जोन में स्थानान्तरण की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों की छूट-(1) धारा 54छ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी पूंजी आस्ति के, जो किसी शहरी क्षेत्र में स्थित ऐसे औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र या भवन या भूमि या किसी भवन या भूमि पर कोई अधिकार है, अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ पर, जो ऐसे औद्योगिक उपक्रम के किसी विशेष आर्थिक जोन में, चाहे वह किसी शहरी क्षेत्र में विकसित हुआ हो, या किसी अन्य क्षेत्र में अंतरण के अनुक्रम में या उसके परिणामस्वरूप हुआ है, और निर्धारिती ने उस तारीख से, जिसको अंतरण हुआ था, पहले एक वर्ष या उसके पश्चात् तीन वर्ष की अवधि के भीतर,-

(क) उस विशेष आर्थिक जोन में जिसमें उक्त उपक्रम ले जाया गया है, औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए मशीनरी या संयंत्र क्रय किया है;

(ख) विशेष आर्थिक जोन में अपने कारबार के प्रयोजनों के लिए भवन या भूमि का अर्जन किया है या भवन का सन्निर्माण किया है;

(ग) मूल आस्ति को और ऐसे उपक्रम के स्थापन को ऐसे विशेष आर्थिक जोन में स्थानांतरित किया है; और

(घ) केंद्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए बनाई गई किसी स्कीम में यथा विनिर्दिष्ट किन्हीं अन्य प्रयोजनों पर व्यय उपगत किए हैं,

वहां पूंजी अभिलाभ को ऐसे पूर्ववर्ष की, जिसमें स्थानांतरण हुआ था, आय के रूप में आय-कर से प्रभारित करने की बजाय उस पर उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी, अर्थात्: -

(i) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम खंड (क) से खंड (घ) में उल्लिखित सभी या किसी प्रयोजन के संबंध में उपगत लागत और व्ययों से (ऐसी लागत और व्ययों को इस धारा में इसके पश्चात् नई आस्ति कहा गया है) अधिक है तो पूंजी अभिलाभ की रकम और नई आस्ति की लागत के बीच के अंतर को धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित किया जाएगा; और नई आस्ति की बाबत, यथास्थिति, उसके क्रय किए जाने, अर्जित किए जाने, सन्निर्मित किए जाने या अंतरित किए जाने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर, उसके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए लागत शून्य होगी; या

(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम, नई आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है तो पूंजी अभिलाभ को धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा, और किसी नई आस्ति की बाबत, यथास्थिति, उसके क्रय किए जाने, अर्जित किए जाने, सन्निर्मित किए जाने या अंतरित किए जाने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर, उसके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए, पूंजी अभिलाभ की रकम को लागत में से घटाकर दिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा में, -

(क) विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 के खण्ड (यक) में है;

(ख) शहरी क्षेत्र" से किसी नगर निगम या नगरपालिका की सीमाओं के भीतर कोई ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, जनसंख्या, उद्योग संकेन्द्रण, क्षेत्र की समुचित योजना की आवश्यकता और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए शहरी क्षेत्र के रूप में घोषित करे ।

(2) पूंजी अभिलाभ की वह रकम जो निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) के खंड (क) से खण्ड (घ) में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के संबंध में उस तारीख से जिसको मूल आस्ति का अंतरण हुआ था, पहले एक वर्ष के भीतर उपगत लागत और खर्चों मद्दे विनियोजित नहीं की जाती है या जिसका धारा 139 के अधीन आय की विवरणी दिए जाने की तारीख से पहले पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है, ऐसी विवरणी दिए जाने के पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या ऐसी संस्था में जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, निक्षिप्त की जाएगी [ऐसा निक्षेप धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी दिए जाने के लिए निर्धारिती की दशा में लागू देय तारीख से किसी भी दशा में अपश्चात् नहीं किया जाना हैट और उसका उपयोग इस निमित्त किसी ऐसी स्कमि के अनुसार, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विरचित करे, किया जाएगा और ऐसी विवरणी के साथ ऐसे निक्षेप का सबूत होगा, और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती द्वारा पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए पहले उपयोग की गई रकम, यदि कोई है, और इस प्रकार निक्षिप्त की गई रकम जोड़कर नई आस्ति की लागत समझी जाएगी :

परंतु यदि इस उपधारा के अधीन निक्षिप्त रकम का उस उपधारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर उपधारा (1) के खंड (क) से खण्ड (घ) में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए पूर्णतः या भागतः उपयोग नहीं किया जाता है तो, -

(i) इस प्रकार उपयोग न की गई रकम उस पूर्ववर्ती वर्ष की जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है, आय के रूप में धारा 45 के अधीन प्रभारित की जाएगी; और

(ii) निर्धारिती ऐसी रकम, पूर्वोक्त स्कीम के अनुसार निकालने के लिए हकदार होगा;

(ङ) धारा 80झक में, उपधारा (12) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

(13) इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात, उपधारा (4) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट स्कीम के अनुसार 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् अधिसूचित किसी विशेष आर्थिक जोन को लागू नहीं होगी ।";

(च) धारा 80झक के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

80झकख. विशेष आर्थिक जोन के विकास में लगे उपक्रम या उद्यम द्वारा लाभ और अभिलाभ की बाबत   कटौतियां-(1) जहां किसी निर्धारिती की, जो विकासकर्ता है, सकल कुल आय में विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 के अधीन 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् अधिसूचित किसी विशेष आर्थिक जोन के विकास के किसी कारबार से किसी उपक्रम या उद्यम द्वारा प्राप्त कोई लाभ और अभिलाभ सम्मिलित है, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से प्राप्त लाभ और अभिलाभ के शत प्रतिशत के समतुल्य रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कटौती का, निर्धारिती के विकल्प पर, उसके द्वारा उस वर्ष से, जिसमें किसी विशेष आर्थिक जोन को केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है, आरंभ होने वाले पंद्रह वर्षों में से किन्हीं दस क्रमवर्ती वर्षों के लिए दावा किया जा सकेगा:

परन्तु जहां किसी उपक्रम की, जो विकासकर्ता है, किसी निधार्रण वर्ष के लिए कुल आय की संगणना करने में    धारा 80झक की उपधारा (13) के उपबंधों के लागू होने के कारण लाभ और अभिलाभ सम्मिलित नहीं किए गए थे वहां उपक्रम, जो विकासकर्ता है, दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अनवसित अवधि के लिए ही इस धारा में निर्दिष्ट कटौती का हकदार होगा और उसके पश्चात् वह, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) में उपबंधित किए गए अनुसार आय से कटौती के लिए पात्र होगा:

परंतु यह और कि ऐसी दशा में जहां कोई उपक्रम, जो विकासकर्ता है, जो किसी विशेष आर्थिक जोन का 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् विकास करता है और ऐसे विशेष आर्थिक जोन का प्रचालन और अनुरक्षण किसी अन्य विकासकर्ता को (जिसे इसके पश्चात् इस धारा में अंतरिती विकासकर्ता कहा गया है) अंतरित करता है, वहां ऐसे अंतरिती विकासकर्ता को, उपधारा (1) के अधीन कटौती दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की शेष अवधि के लिए उसी प्रकार अनुज्ञात की जाएगी मानो प्रचालन और अनुरक्षण, अंतरिती विकासकर्ता को इस प्रकार अंतरित नहीं किए गए थे ।

(3) धारा 80झक की उपधारा (5) और उपधारा (7) से उपधारा (12) के उपबंध, उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात करने के प्रयोजन के लिए विशेष आर्थिक जोन को लागू होंगे ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए विकासकर्ता" और विशेष आर्थिक जोन" के वही अर्थ होंगे जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (छ) और (यक) में क्रमशः उनके हैं ।;

(छ) धारा 80ठक के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्: -

80ठक. अपतट बैंककारी यूनिटों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कतिपय आय के संबंध में कटौती-(1) जहां किसी निर्धारिती की, -

(i) जो अनुसूचित बैंक या भारत से बाहर किसी देश की विधियों द्वारा या उनके अधीन निगमित कोई बैंक है और जिसकी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिट है; या

(ii) जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की यूनिट है, सकल कुल आय में उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई आय सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए ऐसी आय में से-

(क) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुज्ञा या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) या किसी अन्य सुसंगत विधि के अधीन अनुज्ञा या रजिस्ट्रीकरण अभिप्राप्त किया गया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के सौ प्रतिशत, और उसके पश्चात्;

(ख) पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के पचास प्रतिशत,

के समतुल्य रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-

(क) किसी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिट से; या

(ख) किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित उपक्रम या किसी अन्य उपक्रम से, जो किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण करता है, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से; या

(ग) किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की किसी यूनिट से उसके ऐसे कारबार से जिसके लिए विशेष आर्थिक जोन में ऐसे केन्द्र में स्थापित करने का अनुमोदन किया गया है, प्राप्त आय होगी ।

(3) इस धारा के अधीन कोई कटौती तभी अनुज्ञात की जाएगी जब निर्धारिती आय की विवरणी के साथ, -

(i) धारा 80ठक की उपधारा (2) के खण्ड (i) के अधीन, जैसी कि वह इस धारा द्वारा उसके प्रतिस्थापन के ठीक पूर्व थी, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट प्ररूप में धारा 228 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखाकार की रिपोर्ट, यह प्रमाणित करते हुए कि कटौती का इस धारा के उपबंधों के अनुसार सही दावा किया गया; और

(ii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अभिप्राप्त अनुज्ञा की प्रति, प्रस्तुत करेगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

(क) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ) में उसका है;

(ख) अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खंड (ङ) में उसका है;

(ग) विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) में उसका है;

(घ) यूनिट" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यग) में उसका है;

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

(ञ) धारा 197क में उपधारा (1ग) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

(1घ) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, किसी अपतट बैंककारी यूनिट द्वारा: -

(क) किसी अनिवासी या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो भारत में मामूली तौर पर निवासी नहीं है, 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् किए गए निक्षेप पर; या

(ख) किसी अनिवासी या ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में मामूली तौर पर निवासी नहीं है, 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् लिए गए उधारों पर, संदत्त ब्याज से कर की कटौती नहीं की जाएगी ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, अपतट बैंककारी यूनिट" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (प) में उसका है ।

तीसरी अनुसूची

(धारा 57 देखिए)

कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन

भाग 1

बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) का संशोधन

1. धारा 2ग की उपधारा (1) में, तीसरे परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करें, -

परन्तु यह भी कि कोई बीमाकर्ता जो बीमा कारबार करने वाली कोई भारतीय बीमा कंपनी, बीमा सहकारी सोसाइटी या इस उपधारा के खंड (ग) में निर्दिष्ट कोई निगमित निकाय है, विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) में यथापरिभाषित किसी विशेष आर्थिक जोन में कोई बीमा कारबार कर सकेगा ।"।

2. धारा 2ग के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करें, -

2गक. इस अधिनियम के उपबंधों को विशेष आर्थिक जोन को लागू करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के उपबंधों में से कोई उपबंध, -

(क) ऐसे बीमाकर्ता को लागू नहीं होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) में यथापरिभाषित किसी विशेष आर्थिक जोन में बीमा कारबार करने वाली कोई भारतीय बीमा कंपनी, बीमा सहकारी सोसाइटी या धारा 2ग की उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट कोई निगमित निकाय है; या

(ख) ऐसे किसी बीमाकर्ता को जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) में यथापरिभाषित किसी विशेष आर्थिक जोन में बीमा कारबार करने वाली कोई भारतीय बीमा कंपनी, बीमा सहकारी सोसाइटी या धारा 2ग की उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट कोई निगमित निकाय है, ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ ही लागू होगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।"।

भाग 2

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) का संशोधन

1. धारा 53 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपधारा (1) में बैंककारी कंपनी या संस्था को या किसी वर्ग की बैंककारी कंपनियों को" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित रखें, -

विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 के अधीन स्थापित किसी विशेष आर्थिक जोन में कार्य कर रही या अवस्थित बैंककारी कंपनी या संस्था को या किसी वर्ग की बैंककारी कंपनियों को या उनकी शाखाओं में से किसी शाखा को ।"।

2. इस प्रकार संख्यांकित उपधारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्येक अधिसूचना की प्रति, प्रारूप रूप में, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि, एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन अधिसूचना के जारी किए जाने का अनुमोदन न करने के लिए सहमत हो जाते हैं या दोनों सदन उस अधिसूचना में कोई परिर्वतन करने के लिए सहमत हो जाते हैं तो, यथास्थिति, अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी या केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही जिस पर दोनों सदन सहमत हो गए हों, जारी की जाएगी ।"।

भाग 3

भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (1899 का 2) का संशोधन

धारा 3 के परन्तुक में खंड (2) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करें, -

(3) विकासकर्ता या यूनिट द्वारा या उसकी ओर से या उसके पक्ष में या विशेष आर्थिक जोन के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के संबंध में निष्पादित कोई लिखत ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, विकासकर्ता", विशेष आर्थिक जोन" और यूनिट" पदों के वही अर्थ हैं, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (छ), खंड (यक) और खंड (यग) में क्रमशः उनके हैं ।।

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