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कीटनाशी अधिनियम, 1968 ( Insecticides Act, 1968 )


 

कीटनाशी अधिनियम, 1968

(1968 का अधिनियम संख्यांक 46)

[2 सितम्बर, 1968]

मनुष्यों या जीव-जन्तुओं को जोखिम के निवारण की दृष्टि

से कीटनाशियों के आयात, विनिर्माण, विक्रय,

परिवहन, वितरण और उपयोग के

विनियमन तथा उससे सम्बद्ध

विषयों के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के उन्नीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम कीटनाशी अधिनियम, 1968 कहा जा सकेगा ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है । 

(3) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और विभिन्न राज्यों के लिए तथा इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी । 

2. अन्य विधियों का लागू होना वर्जित नहीं-इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अतिरिक्त होंगे, न कि उसके अल्पीकरण में ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "जीव-जन्तु" से मनुष्यों के लिए उपयोगी जीव-जन्तु अभिप्रेत हैं, और इसके अन्तर्गत मछली तथा कुक्कुटादि और वन-जन्तुओं की ऐसी किस्में भी हैं, जिन्हें, केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसी किस्मों के रूप में विनिर्दिष्ट करे, जिनका उसकी राय में, संरक्षण अथवा परिरक्षण, वांछनीय है ; 

(ख) “बोर्ड" से धारा 4 के अधीन गठित केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड अभिप्रेत है; 

(ग) “केन्द्रीय कीटानाशी प्रयोगशाला" से धारा 16 के अधीन, यथास्थिति, स्थापित केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला अथवा विनिर्दिष्ट संस्था अभिप्रेत है;

(घ) “आयात" से उन राज्यक्षेत्रों के भीतर के, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, किसी स्थान पर, उन राज्यक्षेत्रों से बाहर के स्थान से लाना अभिप्रेत है;

(ङ) “कीटानाशी" से निम्नलिखित अभिप्रेत है- 

(i) अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई पदार्थ; अथवा 

(ii) ऐसे अन्य पदार्थ (जिनके अन्तर्गत कवक-नाशी या घासपात-नाशी भी हैं), जिन्हें केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श के पश्चात्, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर अनुसूची में सम्मिलित करे; अथवा  

(iii) कोई निर्मिति जिसमें ऐसे पदार्थों में से कोई एक या अधिक अन्तर्विष्ट हों; 

(च) “कीटनाशी विश्लेषक"  से धारा 19 के अधीन नियुक्त कीटनाशी विश्लेषक अभिप्रेत हैं ;

(छ) “कीटनाशी निरीक्षक" से धारा 20 के अधीन नियुक्त कीटनाशी निरीक्षक अभिप्रेत है; 

(ज) “लेबिल" से कोई भी ऐसा लिखित, मुद्रित या चित्रित विषय अभिप्रेत है जो प्रथम पैकेज पर और प्रत्येक अन्य आवरक पर है जिसमें पैकेज रखा गया है या पैक किया गया है, और इसके अन्तर्गत कीटनाशी के साथ वाला कोई भी लिखित, मुद्रित या चित्रित विषय भी है; 

(झ) “अनुज्ञापन अधिकारी" से धारा 12 के अधीन नियुक्त अनुज्ञापन अभिप्रेत है; 

(ञ) किसी कीटनाशी के सम्बन्ध में, विनिर्माण" के अन्तर्गत निम्नलिखित है :- 

(i) किसी कीटनाशी के विक्रय, वितरण या उपयोगी की दृष्टि से उसे बनाने, परिवर्तित करने, परिरूपित करने, पैक करने, उस पर लेबिल लगाने, उसके हिस्से करने या उसे अन्यथा शोधित करने या अनुकूलित करने के लिए कोई प्रक्रिया या प्रक्रिया का भाग, किन्तु फुटकर कारबार के मामूली अनुक्रम में किसी कीटनाशी को पैक करना या उसके हिस्से करना इसके अन्तर्गत नहीं है, तथा

(ii) कोई प्रक्रिया जिससे कीटनाशी युक्त निर्मिति बनाई जाती है;

(ट) “कूटनामी"-कोई कीटनाशी कूटनामी समझा जाएगा- 

(i) यदि उसके लेबिल में उससे संबंधित कोई ऐसा कथन, डिजाइन या चित्रित रूपण हो, जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या या भ्रामक हो, अथवा यदि उसका पैकेज उसकी अन्तर्वस्तु की बाबत अन्यथा प्रवंचनाकारी हो; अथवा 

(ii) यदि वह अन्य कीटनाशी की नकल हो या उसके नाम से बेचा जाता हो; अथवा 

(iii) यदि उसके लेबिल में ऐसी चेतावनी न दी गई हो, जो मनुष्यों या जीव-जन्तुओं को जोखिम के निवारण के लिए आवश्यक हो और जिसका अनुपालन किए जाने पर वह उक्त निवारण के लिए पर्याप्त हो; अथवा 

(iv) यदि कोई शब्द, कथन या अन्य सूचना, जिसका लेबिल पर होना इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित हो, उस पर ऐसी सहज दृश्य रीति से, जिससे अन्य शब्द, कथन या डिजाइन या चित्रित विषय लेबिल पर प्रदर्शित किए गए हों, और ऐसी शैली में, जिसे क्रय तथा उपयोग की रूढ़िगत दशाओं में सामान्य व्यक्ति द्वारा उसका पढ़ा जाना और समझा जाना संभाव्य हो जाए, प्रदर्शित न की गई हो; अथवा 

(v) यदि इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित रूप से उसे पैक न किया गया हो या उस पर लेबिल न लगाया गया हो; अथवा

(vi) यदि उसे इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित रूप में रजिस्ट्रीकृत न किया गया हो; अथवा 

(vii) यदि लेबिल में रजिस्ट्रीकरण संख्यांक से भिन्न कोई रजिस्ट्रीकरण का निर्देश अन्तर्विष्ट हो; अथवा 

(viii) यदि कीटनाशी में उतनी विषालुता हो जो विहित मात्रा से अधिक हो अथवा उसमें ऐसा कोई पदार्थ मिश्रित या पैक कर दिया गया हो जिससे उसकी प्रकृति या क्वालिटी बदल जाए या उसमें ऐसा पदार्थ हो जो रजिस्ट्रीकरण में सम्मिलित न किया गया हो; 

(ठ) “पैकेज" से कोई बक्स, बोतल, संदूकची, टिन, पीपा, डिब्बा, पात्र, बोरी, थैला, आवेष्टन या ऐसी अन्य वस्तु अभिप्रेत है जिसमें कोई कीटनाशी रखा या पैक किया जाता है; 

(ड) “परिसर" से कोई ऐसी भूमि, दुकान, स्टाल या स्थान अभिप्रेत है जहां कोई कीटानाशी बेचा जाता या विनिर्मित किया जाता या भंडार में रखा जाता या उपयोग में लाया जाता है, और इसके अन्तर्गत कीटनाशियों को वहन करने वाला कोई यान भी है; 

(ढ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(ण) अपने व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय अभिव्यक्तियों के सहित रजिस्ट्रीकृत" से इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत अभिप्रेत है;

(त) अपने व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय अभिव्यक्तियों के सहित विक्रय" से किसी कीटनाशी का विक्रय अभिप्रेत है, चाहे वह नकद हो या उधार पर और चाहे वह थोक हो या फुटकर, और इसके अन्तर्गत किसी कीटनाशी के विक्रय के लिए करार, उसके विक्रय की प्रस्थापना, उसे विक्रय के लिए अभिदर्शित करना या विक्रय के लिए कब्जे में रखना है, और इसके अन्तर्गत किसी ऐसे कीटनाशी के विक्रय का प्रयत्न भी है; 

(थ) संघ राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में राज्य सरकार" से उसका-प्रशासक अभिप्रेत है; 

(द) कर्मकार" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो सेवा या शिक्षुता की संविदा के अधीन नियोजित है । 

4. केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड-(1) केन्द्रीय सरकार, यथाशक्यशीघ्र, एक बोर्ड का गठन करेगा जो केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड कहलाएगा और जो केन्द्रीय सरकार तथा राज्य सरकार को इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले तकनीकी विषयों पर सलाह देगा और इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन बोर्ड को सौंपे गए अन्य कृत्यों का निष्पादन करेगा । 

(2) जिन विषयों पर बोर्ड उपधारा (1) के अधीन सलाह दे सकेगा, उनके अन्तर्गत निम्नलिखित से संबंधित                              विषय भी होंगे : -

(क) कीटनाशियों का उपयोग करने में मनुष्यों या जीव-जन्तुओं को होने वाली जोखिम और ऐसी जोखिम के निवारण के लिए आवशक सुरक्षा उपाय; 

(ख) मनुष्यों या जीव-जन्तुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से कीटनाशियों का विनिर्माण, विक्रय, भंडारकरण, परिवहन और वितरण । 

(3) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्-

(i) स्वास्थ्य-सेवाओं का महानिदेशक-पदेन, जो अध्यक्ष होगा ;

(ii) औषधि-नियंत्रक, भारत-पदेन; 

(iii) भारत सरकार का वनस्पति रक्षण सलाहकार-पदेन;

(iv) खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास और सहकारिता मंत्रालय (खाद्य विभाग) का भंडारकरण और निरीक्षण निदेशक-पदेन; 

(v) कारखानों का मुख्य सलाहकार-पदेन;

(vi) राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान का निदेशक-पदेन;

(vii) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक-पदेन;

(viii) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक-पदेन;

(ix) भारतीय प्राणी-विज्ञान सर्वेक्षण का निदेशक-पदेन;

(x) भारतीय मानक संस्थान का महानिदेशक-पदेन;

(xi) परिवहन और पोत परिवहन मंत्रालय का पोतपरिवहन महानिदेशक अथवा, उसकी अनुपस्थिति में पोतपरिवहन उपमहानिदेशक-पदेन;

(xii) रेल मंत्रालय (रेल बोर्ड) का यातायात (साधारण) संयुक्त निदेशक-पदेन;

(xiii) केन्द्रीय खाद्य-मानक समिति का सचिव-पदेन; 

[(xiiiक) पशुपालन आयुक्त, कृषि विभाग-पदेन;

(xiiiख) संयुक्त आयुक्त (मीना-उद्योग), कृषि विभाग-पदेन;

(xiiiग) वन उपमहानिरीक्षक (वन्यजीव), कृषि विभाग-पदेन;

(xiiiघ) उद्योग सलाहकार (रसायन), तकनीकी विकास महानिदेशालय-पदेन;ट

(xiv) पैट्रोलियम और रसायन मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने वाला एक व्यक्ति, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा; 

(xv) एक औषधविज्ञानी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा;

(xvi) एक चिकित्सीय विषयविज्ञानी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा ;

(xvii) एक व्यक्ति जो किसी राज्य में लोकस्वास्थ्य विषयक विभाग का भारसाधक हो, और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा; 

(xviii) दो व्यक्ति जो राज्यों में कृषि निदेशक हों, और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नानिर्दिष्ट होंगे;

(xix) चार व्यक्ति, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होंगे, और जिनमें से एक औद्योगिक स्वास्थ्य और उपजीविकाजन्य परिसंकटों का विशेषज्ञ होगा ;

(xx) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का प्रतिनिधित्व करने वाला एक व्यक्ति, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा;

[(xxi) एक परिस्थिति विज्ञानी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा ।ट

(4) उपधारा (3) के खण्ड (xiv) से [(xxi)] तक (जिनमें ये दोनों भी हैं), के अधीन नामनिर्दिष्ट व्यक्ति, जब तक उनके स्थान पदत्याग या मृत्यु द्वारा या अन्यथा पहले ही रिक्त न हो जाएं, अपने नामनिर्देशन की तारीख से तीन वर्ष के लिए पद धारण करेंगे, किन्तु ये पुनर्नामनिर्देशन के पात्र होंगे : 

परन्तु खण्ड (न्ध्त्त्) और (न्ध्त्त्त्) के अधीन नामनिर्दिष्ट व्यक्ति तभी तक पद धारण करेंगे जब तक वे उन नियुक्तियों को धारण किए हुए हैं जिनके आधार पर उनके नामनिर्देशन किए गए हैं । 

[(5) बोर्ड, रजिस्ट्रीकरण समिति या धारा 6 के अधीन नियुक्त किसी समिति के किसी कार्य या कार्यवाही को केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि, यथास्थिति, बोर्ड, रजिस्ट्रीकरण समिति या ऐसी समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।]

5. रजिस्ट्रीकरण समिति-(1) केन्द्रीय सरकार एक रजिस्ट्रीकरण समिति का गठन करेगी, जिसमें एक अध्यक्ष और पांच से अनधिक ऐसे व्यक्ति होंगे जो बोर्ड के सदस्य हों (जिनके अन्तर्गत भारत का औषधि नियंत्रक और भारत सरकार का वनस्पति रक्षण सलाहकार भी है), जो- 

(i) कीटनाशियों के सूत्रों की संवीक्षा तथा उनकी प्रभावकारिता और मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं की सुरक्षा की बाबत, यथास्थिति, आयातकर्ता या विनिर्माता द्वारा किए गए दावों का सत्यापन करने के पश्चात् कीटनाशियों का रजिस्ट्रीकरण करेगी, तथा

(ii) अन्य ऐसे कृत्य करेगी, जो उसे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन सौंपे गए हों ।

(2) जहां अध्यक्ष बोर्ड का सदस्य न हो, वहां उसकी पदावधि तथा सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाएं । 

(3) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रीकरण समिति का सदस्य तब तक पद धारण करेगा जब तक वह बोर्ड का सदस्य बना रहे । 

(4) समिति उतनी संख्या में और ऐसे प्रयोजन या कालावधि के लिए जिसे वह ठीक समझे विशेषज्ञ भी सहयोजित कर सकेगी, किन्तु इस भांति सहयोजित विशेषज्ञ को मत देने का अधिकार नहीं होगा । 

(5) रजिस्ट्रीकरण समिति अपनी स्वयं की प्रक्रिया का और अपने द्वारा किए जाने वाले कार्य के संचालन का विनियमन करेगी ।

6. अन्य समितियां-उन शक्तियों के प्रयोग और उन कर्तव्यों के पालन के लिए जिन्हें बोर्ड, उन शर्तों के, यदि कोई हों, जो वह अधिरोपित करे, अध्यधीन उन्हें प्रत्यायोजित करे, बोर्ड ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा जो वह ठीक समझे और उनमें ऐसे व्यक्ति नियुक्त कर सकेगा जो बोर्ड के सदस्य न हों । 

7. बोर्ड के लिए प्रक्रिया-बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के अधीन रहते हुए, अपनी स्वयं की प्रक्रिया के और अपनी किसी समिति की प्रक्रिया के और अपने या ऐसी समिति द्वारा किए जाने वाले समस्त कार्य के संचालन के प्रयोजन के लिए उपविधियां बना सकेगा । 

8. सचिव तथा अन्य अधिकारी-केन्द्रीय सरकार- 

(i) किसी व्यक्ति को बोर्ड का सचिव नियुक्त करेगी, जो रजिस्ट्रीकरण समिति के सचिव के रूप में भी                         कार्य करेगा, तथा

(ii) बोर्ड और रजिस्ट्रीकरण समिति के लिए ऐसे तकनीकी और कर्मचारिवृन्द की व्यवस्था करेगी, जिन्हें केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे । 

9. कीटनाशियों का रजिस्ट्रीकरण-(1) जो व्यक्ति किसी कीटनाशी के आयात या विनिर्माण का इच्छुक हो, वह ऐसे कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रीकरण समिति से आवेदन कर सकेगा और प्रत्येक ऐसे कीटनाशी के लिए पृथक् आवेदन होगा : 

परन्तु जो व्यक्ति इस धारा के प्रारम्भ के ठीक पहले किसी कीटनाशी के आयात या विनिर्माण के कारबार में लगा हुआ हो, वह रजिस्ट्रीकरण समिति से किसी ऐसे कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण के लिए, जिसका आयात या विनिर्माण वह उस तारीख से पहले करता रहा हो, ऐसे प्रारम्भ की तारीख से [सत्रह मासट की कालावधि के भीतर आवेदन करेगा :

[परन्तु यह और कि जहां पूर्ववर्ती परन्तुक में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, उस परन्तुक के अधीन, उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर आवेदन करने में असफल रहता है तो वह तत्पश्चात् किसी समय प्रत्येक ऐसे कीटनाशी रजिस्ट्रीकरण के लिए विनिर्दिष्ट कालावधि के अवसान के पश्चात् प्रत्येक मास या उसके किसी भाग के लिए एक सौ रुपए की शास्ति का संदाय करके, ऐसा आवेदन कर सकेगा ।ट

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा, और उसमें ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी जिन्हें विहित किया जाए । 

(3) किसी कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण के लिए ऐसे किसी आवेदन के प्राप्त होने पर समिति ऐसी जांच के पश्चात्, जैसी वह ठीक समझे, और अपना यह समाधान कर लेने के पश्चात् कि वह कीटानाशी, जिसकी बाबत आवेदन है, कीटनाशी की प्रभावकारिता और मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं के लिए उसकी निरापदता के संबंध में, यथास्थिति, आयातकर्ता या विनिर्माता द्वारा किए गए दावों के अनुरूप है; [ऐसी शर्तों पर जो समिति द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं;ट और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाएं, कीटनाशी का रजिस्ट्रीकरण कर सकेगी, जो उसे एक रजिस्ट्रीकरण-संख्यांक आबंटित कर सकेगी और आवेदन की प्राप्ति की तारीख से बारह मास की कालावधि के भीतर उसके प्रमाणस्वरुप रजिस्ट्रीकरण-प्रमाणपत्र जारी कर सकेगी :

परन्तु यदि समिति अपने समक्ष पेश की गई सामग्रियों के आधार पर उक्त कालावधि के भीतर विनिश्चय करने में असमर्थ हो, तो उस कालावधि को छह मास से अनधिक की अतिरिक्त कालावधि के लिए बढ़ा सकेगी :

परन्तु यह और कि यदि समिति की यह राय हो कि वे पूर्वावधानियां, जिनके बारे में आवेदक द्वारा यह दावा किया गया है कि वे मनुष्यों या जीव-जन्तुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है, ऐसी नहीं हैं जो सरलता से बरती जा सकें, अथवा ऐसी पूर्वावधानियां बरती जाने पर भी, कीटनाशियों के उपयोग में मनुष्यों या जीवजन्तुओं के लिए गम्भीर जोखित अन्तर्ग्रस्त है, तो वह कीटनाशी का रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार कर सकेगी ।

[(3क) समिति द्वारा 31 मार्च, 1975 के पूर्व प्राप्त आवेदनों की दशा में, उपधारा (3) में ऐसे आवेदनों का निपटारा करने के लिए विनिर्दिष्ट अवधि का अवसान हो जाने पर भी, रजिस्ट्रीकरण समिति के लिए यह विधिपूर्ण होगा और सदैव विधिपूर्ण समझा जाएगा कि वह ऐसे आवेदनों का निपटारा ऐसे अवसान के पश्चात् किसी भी समय किन्तु कीटनाशी (संशोधन) अधिनियम, 1977 के प्रारम्भ से एक वर्ष की अवधि के भीतर करे : 

परन्तु इस उपधारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह कीटनाशी (संशोधन)  अधिनियम, 1977 के प्रारम्भ के पूर्व दिए गए किसी रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की किसी शर्त का ऐसे प्रारंभ के पूर्व किए गए किसी उल्लंघन को इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध बनाती है । 

(3ख) जहां रजिस्ट्रीकरण समिति कि यह राय हो कि कीटनाशी को भारत में पहली बार प्रयोग में लाया गया है वहां वह, किसी जांच के लम्बित रहने के दौरान, उसको ऐसी शर्तों पर जो समिति द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, दो वर्ष की कालावधि के लिए अनन्तिम रूप से रजिस्टर करेगी । 

(3ग) रजिस्ट्रीकरण समिति, कीटनाशी की प्रभावकारिता और मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं के लिए उसकी निरापदता को ध्यान में रखते हुए, उन शर्तों में परिवर्तन कर सकेगी जिनके अधीन रजिस्ट्रीकरण-प्रमाणपत्र दिया गया है और वह उस प्रयोजन के लिए प्रमाणपत्र के धारक से लिखित सूचना द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह उस प्रमाणपत्र को ऐसे समय के भीतर जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, उसको समर्पित करे ।]

(4) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति के आवेदन पर कीटनाशी का रजिस्ट्रीकरण हो गया हो, वहां किसी कीटनाशी का आयात या विनिर्माण करने के इच्छुक या उसके आयात या विनिर्माण के कारबार में लगे हुए किसी अन्य व्यक्ति के आवेदन करने और विहित फीस का संदाय करने पर उसे उन्हीं शर्तों पर, जिन पर कीटनाशी का मूलतः रजिस्ट्रीकरण किया गया था, रजिस्ट्रीकरण-संख्यांक आबंटित किया जाएगा और उसकी बाबत उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया जाएगा ।

10. रजिस्ट्रीकरण करने या रद्द करने के विरुद्ध अपील-रजिस्ट्रीकरण समिति के धारा 9 के अधीन विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति अपने को विनिश्चय सूचित किए जाने की तारीख से तीस दिन की कालावधि के भीतर विहित रीति से और विहित फीस के संदाय पर केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा :

परन्तु केन्द्रीय सरकार उक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगी, यदि उसका समाधान हो जाए कि अपीलार्थी के समय पर अपील फाइल न करने के लिए पर्याप्त कारण था । 

11. केन्द्रीय सरकार की पुनरीक्षण की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी भी समय किसी ऐसे मामले से, जिसमें रजिस्ट्रीकरण समिति ने धारा 9 के अधीन विनिश्चय दिया हो, संबंधित अभिलेख को किसी ऐसे विनिश्चय की वैधता या औचित्य के बारे में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए मांग सकेगी और उस संबंध में कोई ऐसा आदेश पारित कर सकेगी जो वह ठीक समझे :

परन्तु ऐसा कोई आदेश विनिश्चय की तारीख से एक वर्ष के अवसान के पश्चात् पारित नहीं किया जाएगा :

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई आदेश तब तक पारित नहीं करेगी जब तक उस व्यक्ति को प्रस्थापित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने के लिए उचित अवसर न मिल गया हो । 

12. अनुज्ञापन अधिकारी-राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें वह ठीक समझे, अनुज्ञापन अधिकारी नियुक्त कर सकेगी और उन क्षेत्रों को परिभाषित कर सकेगी जिनकी बाबत वे अधिकारिता का प्रयोग करेंगे । 

13. अनुज्ञप्ति का दिया जाना-(1) कोई व्यक्ति जो किसी कीटनाशी का विनिर्माण या विक्रय करने अथवा विक्रय के लिए उसका स्टाक या प्रदर्शन करने [अथवा उसे वितरित करने का या किसी कीटनाशी का उपयोग करके वाणिज्यिक नाशक-जीव नियंत्रण संक्रियाएं आरंभ करने का इच्छुक होट अनुज्ञप्ति के दिए जाने के लिए अनुज्ञापन अधिकारी से आवेदन कर सकेगा :

परन्तु कोई व्यक्ति जो इस धारा के प्रारंभ ठीक पहले किसी कीटनाशी के विनिर्माण, विक्रय अथवा विक्रय के लिए उस स्टाक या प्रदर्शन करने अथवा उसके वितरण के कारबार में लगा हुआ हो, अनुज्ञप्ति के दिए जाने के लिए अनुज्ञापन अधिकारी से आवेदन ऐसे प्रारम्भ की तारीख से [सत्रह मासट की कालावधि के भीतर करेगा : 

[परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति जो कीटनाशी (संशोधन) अधिनियम, 1977 के प्रारम्भ के ठीक पहले वणिज्यिक नाशक-जीव नियंत्रण संक्रियाओं में लगा हुआ हो, अनुज्ञप्ति के दिए जाने के लिए अनुज्ञापन अधिकारी से आवेदन उक्त अधिनियम के प्रारम्भ से छह मास की कालावधि के भीतर करेगा ।]

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा और उसमें ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी जिन्हें विहित किया जाए । 

(3) अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए किसी ऐसे आवेदन के प्राप्त होने पर, अनुज्ञापन अधिकारी अनुज्ञप्ति ऐसे प्ररूप में, ऐसी शर्तों पर और ऐसी फीस के संदाय पर, जिन्हें विहित किया जाए, देगा । 

(4) इस धारा के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए विधिमान्य होगी और वह समय-समय पर ऐसी कालावधियों के लिए और ऐसी फीस के संदाय पर, जिन्हें विहित किया जाए, नवीकृत की जा सकेगी :

परन्तु जहां अनुज्ञप्ति किसी ऐसे व्यक्ति को दी गई हो जिसने उपधारा (1) के [यथास्थिति, प्रथम परन्तुक या द्वितीय परन्तुकट के अधीन आवेदन किया हो, वहां वह अनुज्ञप्ति किसी ऐसे कीटनाशी के संबंध में, जिसके रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन इस अधिनियम के अधीन नामंजूर कर दिया गया हो या जिसका रजिस्ट्रीकरण इस अधिनियम के अधीन रद्द कर दिया गया हो, उस तारीख से, जिसको ऐसी नामंजूरी या रद्दकरण शासकीय राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो, रद्द समझी जाएगी । 

 [(5) इस धारा के अधीन अनुज्ञप्तियों के दिए जाने या नवीकरण के लिए फीस विहित करते समय, घरेलू उपयोग के प्रयोजन के लिए और अन्य प्रयोजनों के लिए कीटनाशियों के विक्रय या वितरण के लिए अलग-अलग फीस विहित की जा सकेंगी ।]

14. अनुज्ञप्तियों का प्रतिसंहरण, निलम्बन और संशोधन-(1) यदि अनुज्ञापन अधिकारी का, इस निमित्त उसे किए गए निर्देश पर अथवा अन्यथा, समाधान हो जाए कि- 

(क) धारा 13 के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति किसी आवश्यक तथ्य की बाबत दुर्व्यपदेशन के कारण दी गई है, अथवा 

(ख) अनुज्ञप्ति का धारक उन शर्तों के, जिनके अध्यधीन अनुज्ञप्ति दी गई, अनुपालन में असफल रहा है, या उसने इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों में से किसी का उल्लंघन किया है,

तो किसी अन्य ऐसी शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिसका भागी अनुज्ञप्ति का धारक इस अधिनियम के अधीन हो, अनुज्ञापन अधिकारी, अनुज्ञप्ति के धारक को कारण दर्शित करने का अवसर देने के पश्चात् अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत या निलंबित कर सकेगा । 

(2) किन्हीं ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, अनुज्ञापन अधिकारी धारा 13 के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति में फेरफार या संशोधन भी कर सकेगा । 

15. अनुज्ञापन अधिकारी के विनिश्चय के विरुद्ध अपील-(1) अनुज्ञापन अधिकारी के धारा 13 के[उपधारा (4) के परन्तुक को छोड़करट या धारा 14 के अधीन के विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति अपने को वह विनिश्चय संसूचित किए जाने की तारीख के तीस दिन की कालावधि के भीतर ऐसे प्राधिकारी को ऐसी रीति से और ऐसी फीस के संदाय पर, जिन्हें विहित किया जाए, अपील कर सकेगा :

परन्तु अपील प्राधिकारी उक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका समाधान हो जाए कि अपीलार्थी के समय पर अपील फाइल न करने के लिए पर्याप्त कारण था । 

(2) उपधारा (1) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, अपीलार्थी को कारण दर्शित करने का अवसर देने के पश्चात् अपील प्राधिकारी मामूली तौर से छह मास की कालावधि के भीतर अपील का निपटारा कर देगा और अपील प्राधिकारी का विनिश्चय अंतिम होगा । 

16. केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला-केन्द्रीय सरकार, अपने द्वारा नियुक्त किए जाने वाले निदेशक के नियंत्रण के अधीन एक केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला की स्थापना, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे सौंपे गए कृत्यों को करने के लिए कर सकेगी :

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा निदेश दे, तो केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला के कृत्य, जहां तक वे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी ऐसी संस्था में, भी किए जा सकेंगे, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए और सब केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला के निदेशक के कृत्य इस प्रकार विनिर्दिष्ट सीमा तक उस संस्था के प्रधान द्वारा किए जाएंगे । 

17. कुछ कीटनाशियों के आयात और विनिर्माण का प्रतिषेध-(1) कोई व्यक्ति स्वयं, या अपनी ओर से किसी                       व्यक्ति द्वारा,-

(क) किसी कूटनामी कीटनाशी का;

(ख) किसी कीटनाशी का, जिसका विक्रय, वितरण या उपयोग तत्समय धारा 27 के अधीन प्रतिषिद्ध हो;

(ग) किसी कीटनाशी का, जिन शर्तों पर उसका रजिस्ट्रीकरण हुआ हो उनके अनुसरण के बिना; 

(घ) किसी कीटनाशी का इस अधिनियम के अन्य किसी उपबन्ध या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन में,

आयात या विनिर्माण नहीं करेगा :    

परन्तु कोई व्यक्ति, जिसने धारा 9 की उपधारा (1) के [किसी भी परन्तु के अधीनट कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया हो, वैसे किसी कीटनाशी का आयात या विनिर्माण चालू रख सकेगा और ऐसा कीटनाशी धारा 3 के खण्ड (ट) के उपखण्ड (vi) या उपखण्ड (vii) या उपखण्ड (viii) के अर्थ में तब तक कूटनामी कीटनाशी नहीं समझा जाएगा, जब तक उसे रजिस्ट्रीकरण समिति द्वारा उक्त कीटनाशी का रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार करने के उसके विनिश्चय की इत्तिला न दे दी गई हो । 

(2) कोई व्यक्ति स्वयं, या अपनी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा किसी कीटनाशी का विनिर्माण इस अधिनियम के अधीन ऐसे प्रयोजन के लिए दी गई अनुज्ञप्ति के अधीन और उसकी शर्तों के अनुसार ही करेगा, अन्यथा नहीं । 

18. कुछ कीटनाशियों के विक्रय, आदि का प्रतिषेध-(1) कोई व्यक्ति स्वयं या अपनी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा- 

(क) किसी कीटनाशी का, जिसका इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण न हुआ हो; 

(ख) किसी कीटनाशी का, जिसका विक्रय, वितरण या उपयोग धारा 27 के अधीन तत्समय प्रतिषिद्ध हो : 

(ग) किसी कीटनाशी का, इस अधिनियम के अन्य किसी उपबन्ध या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन में, 

[विक्रय, विक्रय के लिए स्टाक या प्रदर्शन, वितरण, परिवहन या उपयोग नहीं करेगा और न किसी कर्मकार द्वारा उसका उपयोग                 कराएगा ।]

(2) कोई व्यक्ति स्वयं, या अपनी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा, इस अधिनियम के अधीन ऐसे प्रयोजन के लिए दी गई अनुज्ञप्ति के अधीन और [उसकी शर्तों के अनुसार ही कीटानाशी का विक्रय के लिए स्टाक या प्रदर्शन अथवा वितरण या वाणिज्यिक नाशक-जीव नियंत्रण संक्रियाओं के लिए उपयोग करेगाट अन्यथा नहीं । 

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए कोई कीटनाशी जिसकी बाबत किसी व्यक्ति ने धारा 9 की उपधारा (1) के [किसी भी परन्तुक के अधीनट रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया हो, उस तारीख तक रजिस्ट्रीकृत समझा जाएगा, जिसको ऐसे कीटानाशी का रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार शासकीय राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया हो । 

19. कीटनाशी विश्लेषक-केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे और ऐसी तकनीकी और अन्य अर्हताएं जो विहित की जाएं, रखने वाले व्यक्तियों को ऐसे क्षेत्रों के लिए और उन कीटनाशियों की बाबत या कीटनाशियों के उस वर्ग की बाबत, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कीटनाशी विश्लेषकों के रूप में नियुक्त कर सकेगी :

परन्तु कोई व्यक्ति, जिसका किसी कीटनाशी के विनिर्माण, आयात या विक्रय में कोई वित्तीय हित हो, इस प्रकार नियुक्त नहीं किया जाएगा । 

20. कीटनाशी निरीक्षक-(1) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, और ऐसी तकनीकी और अन्य अर्हताएं, जो विहित की जाएं, रखने वाले व्यक्तियों को उन क्षेत्रों के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कीटनाशी निरीक्षकों के रूप में नियुक्त कर सकेगी :

परन्तु कोई व्यक्ति जो अपेक्षित अर्हताएं न रखता हो, केवल धारा 21 की उपधारा (1) के खण्ड (क)  और खण्ड (घ) के प्रयोजनों के लिए इस प्रकार नियुक्त किया जा सकेगा :

परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति, जिसका किसी कीटनाशी के विनिर्माण, आयात या विक्रय में कोई वित्तीय हित हो, इस प्रकार नियुक्त नहीं किया जाएगा ।

(2) प्रत्येक कीटनाशी निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता, (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा और वह शासकीय रूप से ऐसे प्राधिकारी के अधीनस्थ होगा जिसे उसको नियुक्त करने वाली सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।

21. कीटनाशी निरीक्षकों की शक्तियां-(1) कीटनाशी निरीक्षक को यह शक्ति होगी कि वह- 

(क) सभी युक्तियुक्त समयों पर और ऐसी सहायता के साथ, यदि कोई हो, जैसी वह आवश्यक समझे, किसी परिसर में, जिसकी बाबत उसके पास या विश्वास करने का कारण हो कि उसने इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन अपराध  किया गया है, या किया जा रहा है, या किया जाने वाला है, या अपना यह समाधान करने के प्रयोजन से कि क्या इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों का या तद्धीन जारी किए गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की या जारी की गई अनुज्ञप्ति की शर्तों का अनुपालन किया जा रहा है, प्रवेश करे तथा तलाशी ले :

(ख) विनिर्माता, वितरक, वाहक, व्यौहारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में रखे गए रजिस्टरों, अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों के पेश किए जाने की अपेक्षा करे, उनका निरीक्षण करे, उनकी परीक्षा करे और उनकी प्रतिलिपियां तैयार करे या उनसे उद्धरण ले और यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि वे सभी या उनमें से कोई इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन दंडनीय अपराध करने का साक्ष्य हो सकेगी तो उनका अभिग्रहण कर ले; 

(ग) यह अभिनिश्चय करने के लिए कि क्या इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों का अनुपालन किया जा रहा है, ऐसी परीक्षा और जांच करे जो वह ठीक समझे और उस प्रयोजन के लिए किसी भी यान को रोक ले ; 

(घ) ऐसे किसी कीटनाशी के वितरण, विक्रय या उपयोग को, जिसकी बाबत उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उसका वितरण, विक्रय या उपयोग इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के उल्लंघन में किया जा रहा है, [तीसट दिन से अनधिक की विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए रोक दे अथवा जब तक अभिकथित उल्लंघन ऐसा न हो कि नुक्स कीटनाशी का कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा दूर किया जा सकता हो, ऐसे कीटनाशी के स्टाक का अभिग्रहण कर ले; 

(ङ) किसी कीटनाशी के नमूने ले और ऐसे नमूने को विश्लेषण के लिए कीटनाशी विश्लेषक को विहित रीति से परीक्षण के लिए भेज दे; तथा 

(च) अन्य ऐसी शक्तियों का प्रयोग करे जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों । 

[(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध, इस अधिनियम के अधीन किसी तलाशी या अधिग्रहण को यथाशक्य उसी भांति लागू होंगे जैसे वह उक्त संहिता की धारा 94 के अधीन जारी किए गए वारंट के प्राधिकार के अधीन ली गई किसी तलाशी या अभिग्रहण को लागू होते हैं ।]

(3) कीटनाशी निरीक्षक, [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 42ट के अधीन पुलिस अधिकारियों की शक्तियों का प्रयोग उस व्यक्ति के वास्तविक नाम तथा निवास के अभिनिश्चय के प्रयोजन के लिए कर सकेगा जिससे नमूना लिया गया या कीटनाशी का अभिग्रहण किया गया हो । 

22. कीटनाशी निरीक्षकों द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-(1) जहां कोई कीटनाशी निरीक्षक धारा 21 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन किसी अभिलेख, रजिस्टर या दस्तावेज का अभिग्रहण करे वहां वह, यथाशक्यशीघ्र, मजिस्ट्रेट को इत्तिला देगा, और उसकी अभिरक्षा के बारे में उसके आदेश प्राप्त करेगा । 

(2) जहां कीटनाशी निरीक्षक धारा 21 की उपधारा (1) के खण्ड (घ) के अधीन कोई कार्रवाई करे वहां- 

(क) यह अभिनिश्चय करने में वह समस्त शीघ्रता करेगा कि कीटनाशी अथवा उसका विक्रय, वितरण या उपयोग धारा 18 के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन करता है, अथवा नहीं और यदि अभिनिश्चय हो जाए कि कीटनाशी अथवा उसका विक्रय, वितरण या उपयोग इस प्रकार उल्लंघन नहीं करता है, तो वह उक्त खंड के अधीन पारित आदेश का, यथास्थिति, तत्काल प्रतिसंहरण कर देगा अथवा ऐसी कार्रवाई करेगा जैसी अभिगृहीत स्टाक की वापसी के लिए                   आवश्यक हो;

(ख) यदि वह कीटनाशियों के स्टाक का अभिग्रहण करे तो वह, यथाशक्यशीघ्र मजिस्ट्रेट को इत्तिला देगा और उनकी अभिरक्षा के बारे में उसके आदेश प्राप्त करेगा ;

(ग) किसी अभियोजन के संस्थित किए जाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि अभिकथित उल्लंघन ऐसा हो कि नुक्स कीटनाशी का कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा दूर किया जा सकता हो तो वह, अपना यह समाधान कर दिए जाने पर कि नुक्स इस प्रकार दूर कर दिया गया है, तत्काल आगे आदेश का प्रतिसंहरण कर देगा और उस दशा में जिसमें कीटनाशी निरीक्षक ने कीटनाशी के स्टाक का अभिग्रहण कर लिया हो, वह, यथाशक्यशीघ्र, मजिस्ट्रेट को इत्तिला देगा और इसके छोड़े जाने के बारे में उसके आदेश प्राप्त करेगा । 

[(3) जहां कोई कीटनाशी निरीक्षक किसी कीटनाशी का कोई नमूना ले, वहां वह उसकी रसीद देगा जिसमें यह कथन होगा कि यदि नमूना परीक्षण या विश्लेषण के पश्चात् मिथ्या छापवाला नहीं पाया जाता है और कीटनाशी विश्लेषक ने इस आशय की रिपोर्ट दी है, तो ऐसे नमूने की उचित कीमत निविदत्त की जाएगी और ऐसी कीमत निविदत्त किए जाने के पश्चात् उसके लिए लिखित अभिस्वीकृति की अपेक्षा कर सकेगा ।ट 

(4)  । । । जहां कीटनाशी निरीक्षक धारा 21 की उपधारा (1) के खंड (घ) के अधीन किसी कीटनाशी के स्टाक का अभिग्रहण करे, वहां वह विहित प्ररूप में उसके लिए रसीद निविदत्त करेगा ।

(5) जहां कीटनाशी निरीक्षक कीटनाशी का नमूना परीक्षण या विश्लेषण के प्रयोजन के लिए ले, वहां वह ऐसा प्रयोजन उस व्यक्ति को जिससे वह उसे ले, विहित प्ररूप में लिखकर प्रज्ञापित होगा करेगा और, जब तक वह व्यक्ति जानबूझकर अपने को अनुपस्थित न करे, ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति में नमूने को तीन भागों में विभाजित करेगा और उस पर प्रभावी रूप से मुद्रा लगाएगा और उसे उपयुक्त रूप से चिह्नांकित करेगा तथा उस व्यक्ति को स्वयं उसकी मुद्रा और चिह्न इस भांति मुद्रांकित और चिह्नांकित समस्त भागों पर या उसमें से किसी पर लगाने की अनुज्ञा देगा :

परन्तु जहां कीटनाशी छोटे परिमाण के आधानों में हो वहां कीटनाशी निरीक्षक नमूने को यथापूर्वोक्त विभाजित करने के बजाय, उन्हें उपयुक्त रूप से चिह्नांकित करने के पश्चात् और, जहां आवश्यक हो, उन्हें मुद्रांकित करने के पश्चात् उक्त आधानों में से तीन ले सकेगा, और यदि कीटनाशी ऐसा हो कि उच्छन्न होने से उसके क्षय होने की या उसे अन्यथा नुकसान पहुंचने की संभावना हो, तो ऐसा अवश्य करेगा ।  

(6) कीटनाशी निरीक्षक, यथास्थिति, इस प्रकार विभाजित नूमने का एक भाग या एक आधान उस व्यक्ति को वापिस कर देगा जिससे उसने वह लिया हो और शेष को अपने पास रखेगा और उसका निम्नलिखित रूप में व्ययन करेगा :-

(i) वह एक भाग या आधान, कीटनाशी विश्लेषक के पास परीक्षण या विश्लेषण के लिए तुरंत भेजेगा; तथा 

(ii) दूसरे को वह उस न्यायालय में पेश करेगा जिसके समक्ष उस कीटनाशी की बाबत कार्यवाही, यदि कोई हो, संस्थित की गई हो ।

23. व्यक्ति वह स्थान प्रकट करने के लिए आबद्ध होंगे जहां कीटनाशी विनिर्मित किए या रखे जाते हैं-प्रत्येक व्यक्ति जो तत्समय किसी ऐसे परिसर का भारसाधक हो जहां किसी कीटनाशी का विनिर्माण किया जा रहा हो, या वह विक्रय या वितरण के लिए रखा गया हो, कीटनाशी निरीक्षक द्वारा ऐसा करने की अपेक्षा किए जाने पर कीटनाशी निरीक्षक को वह स्थान, जहां, यथास्थिति, कीटनाशी का विनिर्माण किया जा रहा हो या उसे रखा गया हो, प्रकट करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होगा । 

24. कीटनाशी विश्लेषक की रिपोर्ट-(1) कीटनाशी विश्लेषक, जिसे किसी कीटनाशी का नमूना धारा 22 की उपधारा (6) के अधीन परीक्षण या विश्लेषण के लिए भेजा गया हो, [तीसट दिन की कालावधि के भीतर उसे भेजने वाले कीटनाशी निरीक्षक को विहित प्ररूप में दो प्रतियों में हस्ताक्षरित रिपोर्ट परिदत्त करेगा । 

(2) कीटनाशी निरीक्षक, रिपोर्ट प्राप्त होने पर, उसकी एक प्रति उस व्यक्ति को परिदत्त करेगा जिससे नमूना लिया गया हो और दूसरी प्रति को नमूने के संबंध में किसी अभियोजन में उपयोग के लिए रखे रहेगा ।

(3) कोई दस्तावेज जिसका कीटनाशी विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट होना तात्पर्यित हो, उसमें कथित तथ्यों का साक्ष्य होगी, और ऐसा साक्ष्य तब के सिवाय निश्चायक होगा जब वह व्यक्ति, जिससे नमूना लिया गया हो, रिपोर्ट की प्रति प्राप्त होने से अट्ठाईस दिन के भीतर कीटनाशी निरीक्षक को या उसके न्यायालय को, जिसके समक्ष नमूने के संबंध में कोई कार्यवाही लम्बित हो, लिखित रूप में यह सूचित कर दे कि वह रिपोर्ट के खंडन में साक्ष्य पेश करना चाहता है । 

(4) यदि केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला में नमूने का परीक्षण या विश्लेषण पहले न हो चुका हो, और किसी व्यक्ति ने कीटनाशी विश्लेषक की रिपोर्ट के खंडन में साक्ष्य पेश करने के अपने आशय की उपधारा (3) के अधीन सूचना दी हो, वहां न्यायालय स्वयं अपनी प्रेरणा से अथवा परिवादी या अभियुक्त की प्रार्थना पर कीटनाशी के उस नमूने को, जो धारा 22 की उपधारा (6) के अधीन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया हो, उक्त प्रयोगशाला में परीक्षण या विश्लेषण के लिए स्वविवेकानुसार भिजवाएगा                        [उक्त प्रयोगशाला, तीस दिन की अवधि के भीतर, परीक्षण या विश्लेषण करेगीट और उसके परिणाम की लिखित रिपोर्ट देगी, जिस पर केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला के निदेशक द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन हस्ताक्षर होंगे और ऐसी रिपोर्ट उसमें कथित तथ्यों का निश्चायक साक्ष्य होगी । 

(5) केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला द्वारा उपधारा (4) के अधीन किए गए परीक्षण या विशलेषण का व्यय, न्यायालय के निदेशानुसार परिवादी या अभियुक्त द्वारा दिया जाएगा । 

25. अधिहरण-(1) जहां इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन करने के लिए कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन दोषसिद्ध किया जाए वहां, कीटनाशी का वह स्टाक, जिसकी बाबत उल्लंघन किया गया हो, अधिहरणीय होगा । 

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां कीटनाशी निरीक्षक के आवेदन पर या अन्यथा और ऐसी जांच के पश्चात्, जैसी आवश्यक हो, न्यायालय का समाधान हो जाए कि कीटनाशी कूटनामी कूटनाशी है, वहां वह कीटनाशी                          अधिहरणीय होगा ।

26. विषाक्तता की अधिसूचना-राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उसमें विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग से अपेक्षा कर सकेगी कि वह या वे (किसी कीटनाशी के उपयोग या हथालने से उत्पन्न) विषाक्तता की समस्त ऐसी घटनाओं की, जो उसके या उनके संज्ञान में आएं, रिपोर्ट ऐसे अधिकारी को दे या दें, जैसा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए । 

27. कीटनाशियों के विक्रय आदि का लोक सुरक्षा के कारणों से प्रतिषेध-(1) यदि धारा 26 के अधीन रिपोर्ट पर या अन्यथा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की, उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह राय हो कि धारा 3 के खण्ड (ङ)  । । । में विनिर्दिष्ट किसी कीटनाशी के या उसके किसी विनिर्दिष्ट धान के उपयोग से मनुष्यों या जीव-जन्तुओं को ऐसी जोखिम होने की सम्भावना है जिससे तुरन्त कार्रवाई करना समीचीन या आवश्यक हो जाता है, तो वह सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस कीटनाशी या धान के विक्रय, वितरण या उपयोग का उस क्षेत्र में उस सीमा तक और (साठ दिन से अनधिक की) उतनी कालावधि के लिए जिसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट  किया जाए, मामले में अन्वेषण होने तक के लिए प्रतिषेध कर सकेगी :

परन्तु जहां अन्वेषण उक्त कालावधि के भीतर पूर्ण न हो वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, उसे ऐसी अतिरिक्त कालावधि या कालावधियों के लिए बढ़ा सकेगी जो कुल मिलाकर तीस दिन से अधिक न हो, और जैसी वह उसी रीति से विनिर्दिष्ट करे । 

(2) यदि अपने स्वयं के अन्वेषण के परिणामस्वरूप या राज्य सरकार से रिपोर्ट प्राप्त होने पर, और रजिस्ट्रीकरण समिति से परामर्श करने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाए कि उक्त कीटनाशी या धान के उपयोग से किसी ऐसी जोखिम के होने की सम्भावना है या नहीं है, तो वह ऐसा आदेश (जिसके अन्तर्गत कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण से इन्कार करने का या उसकी बाबत दिए गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को यदि कोई हो, रद्द करने का आदेश भी है) पारित कर सकेगी, जिसे वह मामले की परिस्थितियों को देखते हुए ठीक समझे । 

28. रजिस्ट्रीकरण रद्द किए जाने आदि की अधिसूचना-किसी कीटनाशी का रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार या उसके रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का रद्दकरण शासकीय राजपत्र में और ऐसी अन्य रीति से, जो विहित की जाए, अधिसूचित किया जाएगा ।

29. अपराध और दण्ड-(1) जो कोई,-

(क) धारा 3 के खण्ड (ट) के उपखण्ड (i) या उपखण्ड (iii) या उपखण्ड (viii) के अधीन कुटनामी समझे जाने वाले किसी कीटनाशी का आयात, विनिर्माण, विक्रय, विक्रय के लिए स्टाक या प्रदर्शन, या वितरण करेगा; अथवा 

(ख) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के बिना किसी कीटनाशी का आयात या विनिर्माण करेगा; अथवा 

(ग) अनुज्ञप्ति के बिना किसी कीटनाशी का विनिर्माण, विक्रय, विक्रय के लिए स्टाक या प्रदर्शन, या वितरण करेगा; अथवा

(घ) धारा 27 के उल्लंघन में किसी कीटानाशी का विक्रय या वितरण करेगा; अथवा 

(ङ) किसी कर्मकार द्वारा किसी ऐसे कीटनाशी का, जिसका उपयोग धारा 27 के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया  हो, उपयोग कारित करेगा; अथवा 

(च) किसी कीटनाशी निरीक्षक के, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग या कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालेगा,

[वह- 

(i) प्रथम अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दडंनीय होगा ;  

(ii) द्वितीय तथा पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पंद्रह हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचहत्तर हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,                          दंडनीय होगा ।ट 

(2) जो कोई इस अधिनियम या तद्धीन बनाए किसी नियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी कीटनाशी का उपयोग करेगा, वह जुर्माने से, 1झ्र्जो पांच सौ रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या दोनों सेट दण्डनीय होगा । 

(3) जो कोई इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम के अन्य उपबन्धों में से किसी का या तद्धीन दिए गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र या अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का उल्लंघन करेगा, वह-

(i) प्रथम अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि 1झ्र्एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों सेट दण्डनीय होगा,

(ii) द्वितीय तथा पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि 1झ्र्दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों सेट दण्डनीय होगा । 

(4) यदि कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया हो, बाद में वैसा ही अपराध करे तो जिस न्यायालय के समक्ष द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि हो, उसके लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह अपराधी का नाम और                निवास-स्थान अपराध और अधिरोपित शास्ति ऐसे समाचारपत्रों में या अन्य ऐसी रीति से, जिसका न्यायालय निदेश दे,                     प्रकाशित कराए ।

30. प्रतिरक्षाएं जो इस अधिनियम के अधीन अभियोजनों में करने अथवा करने दी जा सकेंगी-(1) इस धारा में इसके पश्चात् यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन अभियोजन में केवल यह साबित करना कोई प्रतिरक्षा न होगा कि अभियुक्त उस कीटनाशी की प्रकृति या क्वालिटी से, जिसकी बाबत अपराध किया गया, अथवा उस कीटनाशी के विनिर्माण, विक्रय या उपयोग में होने वाली जोखिम, अथवा उसके विनिर्माण या आयात की परिस्थितियों से अनभिज्ञ था । 

(2) धारा 17 के प्रयोजनों के लिए कोई कीटनाशी इस तथ्य के कारण ही कूटनाशी नहीं समझा जाएगा कि-

(क) उसमें कुछ अनुपकारी पदार्थ या संघटक इसलिए बढ़ाया गया है क्योंकि उसकी अपेक्षा इसलिए है कि उस कीटनाशी को वहन या उपयोग के लिए ठीक दशा वाली वाणिज्य की वस्तु के रूप में विनिर्मित या तैयार किया जाए, न कि इसलिए कि कीटनाशी के परिमाण, भार या माप को बढ़ाया जाए या उसकी घटिया क्वालिटी या अन्य नुक्स को छिपाया जाए; अथवा 

(ख) विनिर्माण, तैयारी या प्रवहण की प्रक्रिया में कोई बाहरी पदार्थ अपरिहार्य रूप से उसमें अन्तर्मिश्रित                 हो गया है । 

(3) कोई व्यक्ति जो किसी कीटनाशी का आयातकर्ता या विनिर्माता अथवा उसके वितरण के लिए उसका अभिकर्ता न हो, इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के उल्लंघन के लिए दायी नहीं होगा, यदि वह यह साबित कर दे-  

(क) कि उसने कीटनाशी को आयातकर्ता से या उसके सम्यक् रूप से अनुज्ञप्त विनिर्माता, वितरक या व्यौहारी से अर्जित किया था; 

(ख) कि न तो वह यह जानता था और न युक्तियुक्त तत्परता से यह अभिनिश्चित कर सकता था कि कीटानाशी से इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का किसी प्रकार से उल्लंघन हुआ ; 

(ग) कि वह कीटनाशी जब तक उसके कब्जे में रहा, उसका उचित रूप से भंडारकरण किया गया और वह उसी दशा में रहा जिसमें वह तब था जब उसने उसे अर्जित किया था ।  

31. अपराधों का संज्ञान और विचारण-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए कोई अभियोजन राज्य सरकार अथवा उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा या उसकी लिखित सम्मति से ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं । 

(2) [महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेटट के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा । 

[31. विशेष न्यायालय-(1) यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी जिले या महानगर क्षेत्र में, इस अधिनियम के अधीन अपराधों के शीघ्र विचारण का उपबंध करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात् ऐसे जिले या महानगर क्षेत्र में, यथास्थिति, प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट के एक या अधिक न्यायालयों को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विशेष न्यायालय अधिसूचित कर सकेगी । 

(2) जब तक कि उच्च न्यायालय द्वारा अन्यथा निदेशित न किया गया हो, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित न्यायालय इस अधिकारिता का प्रयोग केवल इस अधिनियम के अधीन मामलों के संबंध में ही करेगा । 

(3) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी जिले या महानगर क्षेत्र में उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी की अधिकारिता और शक्तियों का विस्तार, यथास्थिति, पूरे जिले या महानगर क्षेत्र पर होगा । 

(4) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी जिले या महानगर क्षेत्र में, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित कोई न्यायालय दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की, यथास्थिति, धारा 11 की उपधारा (1) या धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित न्यायालय समझा जाएगा और उस संहिता के उपबंध ऐसे न्यायालयों के संबंध में तद्नुसार लागू होंगे ।

स्पष्टीकरण-इस धारा में, उच्च न्यायालय" का वही अर्थ है जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 2 के खंड (ङ) में है ।]

32.[वर्धित शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति ।] 1977 के अधिनियम सं० 24 की धारा 8 द्वारा निससित । 

33. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कंपनी द्वारा किया गया हो, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस समय जब अपराध किया गया, उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक अथवा उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदुनसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि वह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसा अपराध किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी । 

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो और यह साबित हो कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-  

(क) “कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा 

(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

34. निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबन्धों में से किसी के उस राज्य में निष्पादन के लिए आवश्यक प्रतीत हों । 

35. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए सरकार अथवा सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी, रजिस्ट्रीकरण समिति या बोर्ड की किसी समिति के विरुद्ध कोई अभियोजन, वाद या अन्य कार्यवाही न होगी ।

36. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकर की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए नियम, बोर्ड से परामर्श के पश्चात् और पूर्व प्रकाशन की शर्तके अधीन रहते हुए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी :

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं जिनके कारण परामर्श के बिना नियम बनाना आवश्यक हो गया है, तो वह बोर्ड से परामर्श के बिना, नियम बना सकेगी, किन्तु ऐसे मामलों में नियम बनाने के छह मास के भीतर बोर्ड से परामर्श किया जाएगा और केन्द्रीय सरकार किन्हीं ऐसे सुझावों पर विचार करेगी जिन्हें बोर्ड उक्त नियमों के संशोधन के सम्बन्ध में दे । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित को                    विहित कर सकेंगे :-

(क) पैक करने और लेबिल लगाने की पद्धति; 

(ख) कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण की रीति; 

(ग) बोर्ड तथा रजिस्ट्रीकरण समिति के कृत्य और बोर्ड, रजिस्ट्रीकरण समिति तथा बोर्ड की किसी समिति के सदस्यों को संदेय यात्रा संबंधी और अन्य भत्ते; 

(घ) वे स्थान जहां कीटनाशियों का आयात किया जा सकेगा और किसी अन्य स्थान पर उनके आयात का प्रतिषेध; 

(ङ) किसी कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का प्ररूप और उससे सम्बद्ध विशिष्टियां; 

(च)  । । । रजिस्ट्रीकरण की बाबत संदेय फीस ;

(छ) केन्द्रीय सरकार को धारा 10 के अधीन अपील की रीति और उसके लिए संदेय फीस; 

(ज) अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए आवेदन का प्ररूप और उससे संबंधित विशिष्टियां; 

(झ) अनुज्ञप्ति का प्ररूप, उससे संलग्न शर्तें और उसके लिए संदेय फीस; 

(ञ) वह कालावधि जिसके लिए अनुज्ञप्ति का नवीकरण किया जा सकेगा और ऐसे नवीकरण के लिए फीस;   

(ट) वे परिस्थितियां जिनमें अनुज्ञप्ति में धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन फेरफार या संशोधन किया जा सकेगा;

(ठ) केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला के कृत्य; 

(ड) कीटनाशी विश्लेषक और कीटनाशी निरीक्षक की अर्हताएं, शक्तियां और कर्तव्य; 

(ढ)  किसी कीटनाशी के नमूने के परीक्षण या विश्लेषण की रीति और उसके लिए संदेय फीस;

(ण) वह प्ररूप जिसमें धारा 22 की उपधारा (5) के अधीन प्रज्ञापना, कीटनाशी निरीक्षक द्वारा उस व्यक्ति को दी जाएगी जिससे कीटनाशी की नमूना परीक्षण या विश्लेषण के लिए लिया गया; 

(त) वह प्ररूप जिसमें कीटनाशी विश्लेषक अपने परीक्षण या विश्लेषण की रिपोर्ट कीटनाशी निरीक्षक को धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत करेगा;  

(थ) वे संरक्षा-वस्त्र और उपस्कर जिनका उपयोग कर्मकारों द्वारा कीटनाशियों के विनिर्माण, बनाए जाने, परिवहन, वितरण और उपयोजन में किया जाना है और वे अन्य सुविधाएं जो उन्हें और उन्हें दी गई वस्तुओं को संदूषण से मुक्त रखे;

(द) कर्मकारों द्वारा किसी ऐसे संरक्षा-वस्त्र, उपस्कर और अन्य सुविधाओं का उपयोग; 

(ध) कीटानाशियों के उपयोग या हथालने द्वारा विषाक्तता के विरुद्ध बरती जाने वाली पूर्वावधानियां; 

(न) जिन मामलों में विषाक्तता हुई है उनका पता लगाने और अन्वेषण के लिए उपाय; 

(प) वे सुविधाएं जिनकी व्यवस्था प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने के लिए की जाएगी; 

(फ) कर्मकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें दी गई वस्तुओं के उपयोग के सम्बन्ध में दिए जाने वाले शिक्षण और प्रशिक्षण; 

(ब) कीटनाशियों के विनिर्माण या हथालने में लगे कर्मकारों की चिकित्सीय परीक्षा के लिए सुविधाएं;

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।             

(म) कीटनाशी के उपयोग के लिए उपस्कर और प्रणाली और उपयोग के पश्चात् अधिष्ठित सामग्रियों, धोवन और आधानों का व्ययन; 

(य) अभिलेख और विवरणियों का रखा जाना और उनका निरीक्षण; 

(यक)  परिवहन के दौरान या अन्यथा भोजन की वस्तुओं के साथ कीटनाशी के भण्डारकरण पर निर्बन्धन;

(यख) किसी कीटनाशी का अधिकतम अनुपात जो घरेलू उपयोग की किसी निर्मिति में मिलाया जा सकेगा या उसमें हो सकेगा और उस पर निर्बन्धन; 

(यग) वह रीति जिससे कीटनाशी के रजिस्ट्रीकरण से इन्कार या उससे रजिस्ट्रीकरण-प्रमाणपत्र का रद्द किया जाना अधिसूचित किया जा सकेगा; 

(यघ) वह अधिकारी या प्राधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम द्वारा अपने को प्रदत्त शक्तियों और कृत्यों में से कोई प्रत्यायोजित कर सकेगी ;  

(यङ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना हो या किया जाए ।

                [(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन-सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल नहीं पड़ेगा ।]

37. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार बोर्ड से परामर्श के पश्चात् और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे नियम बना सकेगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से यदि कोई हो, असंगत न हों । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे :-

(क) वह प्राधिकारी जिसे, वह रीति जिससे और वह फीस जिसके संदाय पर धारा 15 के अधीन कोई अपील फाइल की जा सकेगी और अपील के निपटाने में अपील प्राधिकारी द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;

(ख) राज्य सरकार को इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किन्हीं शक्तियों और कृत्यों में से किसी का किसी ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी को, जो उक्त सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया हो, प्रत्यायोजन ।

                [(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।ट 

38. छूट-(1) इस अधिनियम की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी- 

(क) किसी व्यक्ति द्वारा अपने स्वयं की गृहस्थी के प्रयोजनों के लिए या शाकवाटिका के लिए या अपनी खेती की किसी भूमि की बाबत किसी कीटनाशी का उपयोग ; 

(ख) कोई पदार्थ जो अनुसूची में विनिर्दिष्ट या सम्मिलित किया गया हो या कोई निर्मिति जिसमें ऐसा कोई एक या अधिक पदार्थ हो, यदि ऐसा पदार्थ या निर्मिति किन्हीं कीटों, कृन्तक प्राणियों, कवकों, घासपातों तथा मनुष्यों के लिए अनुपयोगी वानस्पत्य या जीवजान्तव जीवन के अन्य रूपों के निवारण या उन्हें नष्ट करने, दूर करने या कम करने के प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजन के लिए आशयित हो । 

(2) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और उन शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो वह उसमें विनिर्दिष्ट करे, इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों में से समस्त या किसी से, किसी शैक्षणिक, वैज्ञानिक या अनुसंधान संबंधी संगठन को, जो कीटनाशियों संबंधी प्रयोग करने में लगा हुआ हो, छूट दे सकेगी ।

अनुसूची

[धारा 3(ङ) देखिए]

कीटनाशियों की सूची

                एक्रिलोनाइट्राइल

अल्ड्रिन (1:2:3:4:10:10-षट्क्लोरो- 1:4:4ठ्ठ; 5:8:8ठ्ठ-षट्हाइड्रो- 1:4:5:8-द्विमेथेनोनैफ्थलीन)

एलथ्रिन (सिनरीन ख्र् का एलिल सजात)

एलुमिनियम फॉस्फाइड

ऐमिटॉन 

एन्टू (आल्फा-नैफ्थिल थायोयूरिआ)

एरामाइट[2 (घ्-तृतीय-ब्यूटिलफिनाक्सी) आईसप्रोफिल 1-2 क्लोरोएथिल सल्फाइटट

बेरियम कार्बोनेट

बेरियम फ्लुओरो सिलीकेट

बी एच सी (बेन्जीन षट्क्लोराइड) (1, 2, 3, 4, 5, 6-षट्क्लोरोहक्सेन)

द्वित-द्विमेथिलएमीनो फ्लुओरोफास्फीन आक्साइड 

कैल्सियम आर्सेनेट

कैल्सियम साइनाइड

कैप्टन (ग़्-त्रिक्लोरोमैथेलिमर्केप्टो-4-वक्रीहैक्सन), 1, 2-द्विकार्बोक्सीमाइड 

कार्बेरिल (1-नैफ्थिल-ग़्-मैथिल कार्बामेट)

कार्बन डाइसल्फाइड

कार्बन चतुक्लोराइड 

क्लोर्बेन्साइड (घ्-क्लोरोबेन्जिल-घ्-क्लोरोफेनिल सल्फाइड)

क्लोरोद्वि एथिल ऐमिनो ट्राइऐजीन

क्लोर्डेन (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 8-अष्टक्लोर-2, 3, 3ठ्ठ, 4, 7, 7ठ्ठ-ष्ट्हाइड्रो-4, 7-मेथेनोइन्डेन)

क्लोरोबेंजिलेट (एथिल, 4, 4ऱ्-द्विवक्लोरोबेंजिलेट)

क्लोरोथाइऑन (0, 0-द्विमेथिल-0-3-क्लोरो-4-नाइट्रोफेनिल थाइऑनो फॉस्फेट)

क्लोरो-आइ० पी० सी० 

क्लोरोपिक्रिन

क्लोरोफेन्सन (घ्-क्लोरोफेनिल-घ्-क्लोरोबेन्जीन सल्फोनेट)

च्-(घ्-क्लोरोफेनिलथायो) मेथिल-0-0-द्विएथिल फास्फोरोद्विथायोएट (ट्राइथायान)

सी आई पी सी[आइसोप्रोपिल-ग़्-(3-क्लोरोफेनिल) कार्बामेटट

सी एम यू (मैन्यूरान)

ताम्र आर्सेनेट

ताम्र साइनाइड

ताम्र नैफ्थेनेट

ताम्र सल्फेट

 कूमैक्लोर[3-(ठ्ठ-एसीटॉनिल-4-क्लोरोबेन्जिल-4-हाइड्राक्सी कुमैरिन)]

ताम्र ऑक्सीक्लोराइड

कुप्रस ऑक्साइड 

डेलापॉन (सोडियम 2, 2, द्विक्लोरोप्रोपिऑनेट)

डी-डी मिश्रण 

डी डी डी (द्विक्लोरो-द्विफेनिल द्विक्लोरोएथेन)

डी डी टी[1, 1, 1-त्रिक्लोरो-2, 2-द्वित (घ्-क्लोरोफेनिल) एथेन और 1, 1, 1-त्रिक्लोरो 2-(ग्र्-क्लोरोफेनिल)-2 (घ्-क्लोरोफेनिल)  एथेन का मिश्रणट

डी डी वी पी (2, 2 द्विक्लोरोवाइनिल द्विमेथिल फास्फेट) 

डिमिटॉन-ग्र् (ग्र्, ग्र्-द्विएथिल-च्[(2-एथिलथायोट-एथिल) फास्फोरोथायोएट)

डिमिटॉन-ग्र् (च्, ग्र्-द्विएथिल)-च्[(2-एथिलथायोट-एथिल) फास्फोरीथायोएट)

द्विएजिनॉन(ग्र्, ग्र्-द्विएथिल-ग्र्[2, आईसोप्रोपिल-6-मेथिल-4-पिरीमिडिनलट फास्फोरोथायोएट)

द्विब्रोम (1, 2-द्विब्रोम, 2, 2-द्विक्लोरीएथिल द्विमेथिल फॉस्फेट)

द्विक्लोरोफिनाक्सी ऐसीटिक अम्ल (2, 4-)

द्विएल्ड्रिन (1ः2ः3ः4ः10ः10-षट्क्लोरो-6ः7-इफॉक्सी-1ः4ठ्ठः5ः6ः7ः8ः8ठ्ठ-अष्टहाइड्रोजन-1ः4ः5ः8-द्विमेथोनौनैपथलीन)

द्विमोथोएट[ग्र्, ग्र्-द्विमेथिल-च्-(-ग़्-मेथिलकार्बेमाइल मेथिल) फास्फोरोद्विथायोएटट

डिपटिरेक्स (ग्र्, ग्र्-द्विमेथिल-2, 2, 2-त्रिक्लोरो हाइड्राक्सी एथिल फॉस्फोनेट)

डी एन ओ सी (द्विनाइट्रो-आर्थो-योगिक) 3ः5-द्विनाइट्रो-ग्र्-क्रीसॉल)

इ डी सी टी मिश्रण (एथेलीन द्विक्लोराइड कार्बन चतुक्लोराइड मिश्रण)

एकाटिन

एन्ड्रिन (1, 2, 3, 4 10-10-षट्क्लोरो-6, 7-एपाक्सी-1, 4, 4ठ्ठ 5, 6, 7, 8, 8ठ्ठ-अष्टहाडड्रो-1, 4-एन्डो-एन्डो, 5-8-द्विमेथेनोनैफ्थलीन)

ई० पी०  एन० (ग्र्-एथिल-ग्र्-घ्-नाईट्रिफेनिल बेन्जील थायोफॉस्फोनेट)

एथॉक्सी एथिल मर्करी क्लोराइड 

एथिल द्वि- द- प्रोपिलथायोलकार्बामेट (ऐप्टम)

एथिल मर्करी फास्फेट

एथिल मर्करी क्लोराइड

एथिलिन द्विब्रोमाइड

एथिलिन द्विक्लारोइड 

फेन्सान (पैराक्लोरोफेनिल बेन्जील सल्फोनेट)

फेन्थिऑन (3-मेथिल-4-मेथिल थायोफेनिल फास्फोथायोनेट)

फर्बेम (फेरिक द्विमेथिल द्विथायो कार्बामेट)

गुसाथिऑन[ग्र्, ग्र्-द्विमेथिल च् (4-आक्सो-1, 2, 3-बेन्जोत्रिएजिनिल-3-मेथिल) फास्फोरोथायोएटट

लप्तक्लोर (1, 4, 5, 6, 7, 8,  8-सप्तक्लोरो-4-7-मेथेनो-3ठ्ठ, 4, 7, 7ठ्ठ-चतुहॉइड्रोइन्डीन)

एच इ टी पी (षट्एथिल चतुर्फास्फेट)

षट्क्लोरोबेन्जीन

[हरसटेला प्रजाति]

हाइड्रोजन साइनाइड

हाइड्रोजन फॉस्फाइड

सीसा आर्सेनेट

चूना गन्धक (कैल्सियम पॉलिसल्फाइड, जलमुक्त गन्धक, कैल्सियम थायोसल्फेट मिश्रण)

लिन्डेन (गामा, बी० एच० सी०)

मैलाथाइऑन[च्-(1, 2-द्वित (एथॉक्सीकार्बेनिल) एथिलट ग्र्, ग्र्-द्विमेथिल-फास्फोरो-द्विथायोएट)

मलेइक हाइड्रेजाइड (1, 2-द्विहाइड्रोपायरोपिरिडैजीन 3, 6-डाइओन)

मैनेब मैंगनीज एथिलीन द्वितद्विथायोकार्बामेट

एस सी पी ए-(4-क्लोरो-2 मेथिल फिनॉक्सी ऐसीटिक अम्ल)

मर्क्यूरिक क्लोराइड

मेटेल्डिहाइड

मेटासिस्टॉक्स

मेथाक्सीक्लोर (1, 1, 1-त्रिक्लोरो-2, 2-द्वि-द्र-मैथाक्सीफेनिलएथेन)

मेथाक्सी एथिल मर्करी क्लोराइड

मेथिल ब्रोमाइड

मेथिल डिमेटॉन (द्विमेटॉन-मेथिल और द्विमेटॉन-मेथिल) 

मेथिल मर्करी क्लोराइड

मेथिल पेराथॉइऑन (ग्र्, ग्र्-द्विमेथिल-ग्र्-द्र-नाइट्रोफेनिलथायोफास्फेट)

मेटॉक्स (क्लोरसल्फिसाइड)

नेबेम (द्विसोडियम एथिलिन-1, 2, द्वितद्विथायोकार्बामेट)

निकोटीन सल्फेट

अष्ट मेथिल पायरोफॉस्फोरेमाइड

पैरा-द्विक्लोरो बेन्जीन

पैराथाइऑन (ग्र्, ग्र्-द्विएथिल-ग्र्-द्र-नाइट्रोफेनिलथायोफॉस्फेट)

पेरिस ग्रीन (ताम्र एसीटो आर्सेनाइट)

पंचक्लोरोनाइट्रोबेन्जीस (पी०सी०एन०बी)

पंचक्लोरोफिनॉल

फेनिल मर्करी एसीटेट

फेनिल मर्करी क्लोराइड

फेनिल मर्करी यूरीया

फॉस्ड्रीन

फ्थैलीमिडोमेथिल-ग्र्-ग्र्-द्विमेथिल फास्फोरोद्विथायोएट (इमिडन)

पिपरोनिल ब्यूटॉक्साइड (ब्यूटिल कार्बिटिल) (6-प्रोपिल पिपरोनिल) ईथर ग्र्

पाइवल (2-पाइवलिल-इन्डेन 1-3-डाइओन)

पोटेशियम साइनाइड

द-प्रोपिल एथिल-द-ब्यूटिल थाइयोलकार्बोमेट (टिलम)

पाइरेथिन्स (क्राइसेन्थियम सिरेरिएफोलियम के कीटतः सक्रिय घटक)

रोटनोन

राइएनीआ

सोडियम फ्लुओरोऐसीटेट

सोडियम साइनाइड

सोडियम फ्लुओरो सिलिकेट

गन्धक (क्लेदनीय अथवा कॉलॉइडील गन्धक)

स्ट्रिकनीन

सल्फोक्लाइड[1, 2-मैथिलिन-द्विऑक्सी-4 (2-ऑक्टिलसल्फीनिल) प्रोपिल बेन्जान]

टी सी ए (त्रिक्लोर एसीटिक अम्ल सोडियम और अमोनियम लवण)

टीडिऑन (चतुर्क्लोर द्विफेनिल सल्फोन)

टी ई पी पी (चतुऐथिल पायरोफास्फेट) 

चतुक्लोरो-द्र-बेन्जोक्विनोन

थैनाइट

थाइरैम (द्वित द्विमेथिल थायोकार्बामिल द्विसल्फाइड)

टालिल मर्करी एसीटेट

त्रिक्लोरफोन

त्रिऑर्थोक्रीसिल फास्फेट

थैलियम सल्फेट

थायोमेटॉन

टॉक्सफीन (क्लोरीनित कैम्कीन जिसमें 67-69 प्रतिशत क्लोरीन होती है)  

त्रिक्लोरोफिनॉक्सी एसीटीक अम्ल (2, 4, 5-च्र्)

वारफरिन (3-ठ्ठ-एसीटोनिल बेन्जिन-4-हाइड्रोक्सी-कूमैरिन)

जस्त फॉस्फाइड

जिमेट

जिनेब (जस्त एथिलीन द्वित-द्विथायोकार्बामेट)

जाइरैम (जस्त द्विमेथिल-द्विथायोकार्बामेट) 

जूलेट

 

[एक्रोलीन                              2-प्रोपेनल या एक्रिलएल्डिहाइड ।

एकटेलिक

(पिरिमिफोस्मेथिल)                           2-डाइएथिल-एमिनों-6-मैथिल्पाइरिमिडिन-4-वाइल-डिमेथिल फोस्फोरोथिओनेट ।

एफ्यूगन                                डाइएथिलमेथिल एथौक्सीकार्बेनिल-पाइरेजोलोपिरिमिडीन-वाइल फोस्फोरोथिओनेट

एलैक्लोर                               2-क्लोरो-2ऱ्, 6ऱ्-डाइएथिल-ग़्-(मेथाक्सीमेथिल)-एसीटेनिलाइड । 

एल्डिकार्ब                              2-मेथिल-2 (मेथिलथायी) प्रोपिओनेल्डिहाइड-दृ-(मेथिलकार्बोमिल)  ओक्साइम । 

एमिडिथिओन                                     च्-(ग़्-2-मेथोक्सिएथिल-कार्बोमाइलमेथिल) डाईमेथिल फोस्फोरोथियोलोथिओनेट । 

एमिट्रोल                                3-एमिनो-1, 2, 4-ट्राइऐजोल ।

अमोनियम सल्फामेट                        अमोनियम सल्फामेट ।

एसूलम                  मेथिल-ग़् (4-एमिनोबेंजीन सल्फोनिल) कार्बोमेट ।

एट्राजाइन                              2-क्लोरो-4-एथिलेमिनो-6-प्राइसोप्रोपिलमिनो 1, 3, 5-ट्रायाजाइन ।

ओरियोफजिन                     ओरियोफजिन।

एजिनफोस-एयिल                              च्-(3, 4-डाइहाइड्रो-4-ओक्सोबेजो-(ड्ड)-(1, 2, 3,) ट्रायाजिन-3-वाइलमेथिल) डाइएबिल फासफोरोथियोलोथायोनेट ।

बार्बन                     4-क्लोरो-2-वाइनिल-3-क्लोरोफेनिलकार्बामेट ।

बेरियम पोलिसल्फाइड                       बेरियम पोलिसल्फाइड ।

बस्सा                     ग्र्-सेकेन्डरी-बयूटिल फेनिलएथिलकार्बोमेट ।

बी०सी०पी०ई०

(क्लोर्फेनिथोल)                   1, 1-बिस-(4-क्लोरोफेनिल) इथानॉल ।

बेनोमिल                                मेथिल-ग़्-बेजिमिडाजोल-2-वाइल-ग़्-(ब्यूटाइनियर-बोमाइल कार्बानेट) ।

बेंसुलाइड                               च्-(ग्र्, ग्र्-डाई-आइसोप्रोपिल फोस्फोरोडाइथायोएट) एस्टर,                          ग़्-(2-मकैप्टोएथिल) बेंजीन सल्फोनेमाइड के साथ ।

बिनापाक्रिल                         2-(1-मेथिल-द-प्रोपिल)-4, 6-डाइनाइट्रोफेनिल-2 मेथिलक्रोटोनेट ।

ब्रोमेसिल                               5-ब्रोमो-6-मेथिल -3-(1-मेथिलप्रोपिल) यूरेसिल ।

ब्रोम्फाइराजन                      5-एमिनो-4-ब्रोमो-2-फेनिलपिरिडेजीन-3-एक ।

ब्रोमोक्सिनिल                      3, 5-डाइब्रोमो -4-हाइड्रोक्सिबेंजोनाइट्राइल । 

ब्रोजोन                   मेथिल ब्रोमाइड और पेट्रोलियम विलायक में क्लोरोपिक्रिन ।

ब्यूटयूरन                               3-(4-क्लोरोफेनिल)-1-मेथिल-1 (1-मेथिल प्रोप-2-वाइनिल) यूरिया । 

ब्यूटिलेट                               च्-एथिल-ग़्,  ग़्-डाइआइसो ब्यूटिलपायोकार्बोमेट ।

बक्स                      थ्र्-(1-मेथिल ब्यूटिल) फेनिल मेथिल कार्बोमेट और थ्र्-(1-एथिलप्रोपिल) फेनिल मेथिल कार्बोमेट का मिश्रण । 

कैडमियम पर आधारित

यौगिक                   (कैडमियम, क्लोराइड, कैडमियम सल्फेट, कैडमिनयम सक्सिनेट ।

केप्टाफोल                             ग़्-ग्र् (1, 1, 2, 2-टेट्राक्लोरोएथिलथायो) साइलोहैक्स-4-एने-1,                        2- डाइकार्बोक्सीमाइड ।

कार्बोफ्यूरन                           2, 3-डाइहाइड्रो-2,  2-डाइमेथिल-7-बेंजोफयूरानिल मेथिलकार्बोमेट ।

कार्बोफेनोथियम                  च्-झ्र्(द्र-क्लोरोफेनिलथायो)-मेथिलट-दृ, दृ-डाइएथिल फासफोरोडाइथायोएट ।

कार्बोक्सिन                           5, 6-डाइहाइड्रो-2-मेथिल-1, 4-ओक्साथियिन-3-कार्बोक्सानिलाइड ।

(डी०सी०एम०ओ०)                            

चिनोमेथियोनेट                  6-मेथिल-2-ओक्सो-1, 3-डाइथायो (4, 5-बी) क्विनौक्सलीन ।

क्लोरेम्बेन                              3-एमिनो-2, 5-डाइक्लोरोवेजोनिक एसिड ।

क्लोब्यूफन                           1-मेथिल-2-प्रोपिनिल-थ्र्-क्लोरोकार्बोनिलेट ।

(बी० आई० पी०सी०)                          

क्लोफेन्यिनफोस                                2-क्लोरो-1 (2, 4-डाइक्लोरोफेनिल)-विनाइल डाइएथिलफास्फेट ।

क्लोरोमेक्वट क्लोराइड                      (2-क्लोरोएथिल) ट्रामेथिलेमोनियम क्लोराइड ।

क्लोरोनेब                              1, 4-डाइक्लोरो-2, 5-डाइमेथोक्सोवेयूजाइन ।

क्लोरोप्रोपेन                          क्लोरोप्रोपेन ।

क्लोरोक्यूरन                        ग़्ऱ्-4- (4-क्लोरोफेनोक्सी) फेनिल-ग़्ग़्-डाइमेथिल-यूरिएट ।

सिटिसाइड                            क्लोरिनोटिड टरपोनो ।

सिटाबेटट                              एल्किलऐरिपालिग्लाकोलईथर ।

क्लोनिट्रेलिड                        5, 2-डाइक्लोरो-4-नाइट्रो-सेलिसिलिक-एनिलाइड-एथेनालएमीन

ताम्र हाइड्राक्साइड                               ताम्र हाइड्राक्साइड

कूमैफ्यूरियल                       3-(ठ्ठ-ऐसीटानिफरफ्यूरील)-4-हाइड्रोक्सीसियूमरिन ।

कूमेफोस                                3-क्लोरो-4-मेथिल-7-कूमेरिनिल डाइएथिल फासफोरोथायोनेट ।

कूमैटेट्रालिल                        4-हाइड्रोक्सी-3(1, 2, 3, 4-टेट्रा फिडो-1-नेफथिल) कूमैरिन ।

कोयडेन                 3, 5-डाइक्लोरो-2, 6-डाइमेथिल-4-पाइरिडाइनोल ।

सी० पी० ए० एस०                                4-क्लोरोफेनिल 1, 2, 4, 5-ट्राइक्लोरो-फेनिलेजो-सल्फाइड ।

साइक्लोमार्फ                        ग़्-साइक्लोडोडेसिल-2, 6-डाइमेथिल-मार्फोलिन एसेटेट ।

साइक्ल्यूरन (ओ० एम० यू०)             साइक्लो-ओक्टील-ग़्-ग़्-डाइमेथिल-यूरिया ।

सिट्रोलेन                                2-(डाइयोक्सी फोस्फिसिलिमिनो)-मेथिल-1-1, 3-डाइथियोलेन ।

डिकार्बोफ्यूरन                      2, 3-डाइहायड़ो-2-मेथिलोवेजोफ्यूरन-7-वाइल-मेथिल कार्बोमेट

डेकजोलिज                           1-(एल्फा, एल्फा-डाइमेथिल-बीटा-एसेटौक्सीप्रोपियोनिल)-3-आइसोप्रोपिल-2, 4-डाइओक्सो डेकाहाइड्रोक्विनाजोलाइन ।

डी० ई० ई० टी०                     ग़्, ग़्-डाइएथिल-थ्र्-टालूएमाइड ।

डाइब्रोमोक्लोरोप्रोपेन                          1, 2-डाइब्रोमो-3-क्लोरोप्रोपेन ।

डाइकेम्बा                              3, 6-डाईक्लोरो-2-मथोक्सीवैजोइक एसिड ।

डाइक्लोबेनिल                      2, 6-डाइक्लोरोबजो नाइट्राइल ।

डाइक्लोफेथायोजेन                             ग्र्-(2, 4-डाइक्लोरोफेनिल) ग्र्, ग्र्-डाइएथिल फोस्फोरोथायोएट ।

डायक्लीन                             2-3-डाइक्लोरी-1, 4-नेफयोक्विनोन ।

डाइक्लोरोप्रोपेन                   1, 3-डाइक्लोरोप्रोपेन

डाइक्लोरन                            2, 6-डाइक्लोरो-4-नाइट्रोएनिलीन ।

डाइकोफोल                           2, 2, 2-ट्राइक्लोरो-1, 1-डाई-(4-क्लोरोफेनिल) एथानाल । 

डाइक्रोटोफोस                       ()-3-हाइड्रोक्सी-ग़्, ग़्-डाइमेथिलसिस क्रोटोनमाइड डाइमेथिल फास्फेट के साथ डाइमेथिल फास्फेट एस्टर ।

2, 4-डी बीमाकर्ता                                4-(2-, 4-डाइक्लोरोफेनौक्सी) ब्यूटिरिक एसिड ।

डाइफेफोस एवेट                   ग्र्, ग्र्, ग्र्, ग्र्-टेट्रामेथिल ग्र्, ग्र्-थायोडाइ-घ् फनिलीन फोस्फोरोथायोएट ।

डाइकार                  डाइथन ग्-45 और तकनीकी करायेन का सम्मिश्रण ।

डाइमस (एलार)                    ग़्-डाइमेथिलेमिनो सक्सिनीक एसिड ।

डाइनौक्स                              2, 4-डाइनाइट्रो-6-आक्टो-फिनिल क्राटोनट्रेस के 4 और 5 भागों का 2,                4-डाएनाइट्रो-6-आक्टिलफेनिल क्राटोनेट्स के आइसोमर के 2 भागों के साथ सम्मिश्रण ।

डाइनोसब                              2, 4-डाइनाइट्रो-6-च्-ब्यूटिलफेनोल ।

डाइनोसब एसीटेट                               2, 4-डाइनाइट्रो-6-च्-ब्यूटिलफेनोल एसीटेट ।

डाइओक्साथायोन                               च्-च्-1, 4-डाइओक्सन-2, 3-यलिडेन (बिस) ग्र्, ग्र्-डाइएथिल फोस्फोरोथियोलोथायोनट ।

डाइफेसिनोन                        2-डाइफेनिलेसिटिल 1, 3-इन्डनेडाइयोन ।

डाइफनामिड                         ग़्ग़्-डाइमेथिल-2,  2-डाइफनिलएसेटामाइड ।

डाइसल्फोटन                       डाइएथिल च्-झ्र्2-(एथिलथायो) एथिलट फोस्फोरो थियोलौथायोनेट ।

डाइयूरन                                ग़्ऱ्-3-(4-डाइक्लोरोफनिल)-ग़्ग़्-डाइमेथिलयूरिया

डी० एम० पी० ए०                                 ग्र्-(2, 4-डाइक्लोरोफेनिल) ग्र्ऱ् मेथिल ग़्-आइसोप्रोपिल-फोस्फोरोएमिडाइथायोएट ।

डोडाइन                  डोडेसिलगुएनिडाइन-मौनोएसीटेट ।

डोडोमार्फ                               4-साइक्लोडोडसिल-2, 6-डाइमेथिलमार्फालाइन ।

डेट (क्लोरोसिनोन)                             2-(ठ्ठ-घ्-क्लोरोफेनिल-ठ्ठ-फेयलसिटील) इन्डन-1, 3-डाइयोन ।

डी०एस०एम०ए०                 डाइसोडियम मीथेनआर्सोनेट ।

डाएबिन ग्र्, ग्र्-डाएथिल ग्र्-(3, 5, 6-ट्राइक्लोरो-2-पिराइडिल) फास्फोरोथायोएट ।

डस्टिंग सल्फर                    

एडाइफेन्फोस                       ग्र्-एथिल-च्, च्-डाइफेनिल-डाइथायोफास्फेट

एन्डासल्फन                         6, 7, 8, 9, 10, 10-हैक्साक्लोरो-1, 5, 5ठ्ठ, 6 9 9ठ्ठ हैक्साहाइड्रो-6, 9-  मेथैनो-2, 4, 3-बैन्जो(ड्ढ)-डाइओक्सोथिएपिन-3-ओक्साइड ।

एन्डोथाल                              7-ओक्सावाइसिलो (2, 2, 1)-हैप्टेन-2, 3-डाइकार्बोक्सीलेट ।

इ० पी० टी० सी०                   च्-एथिल-डाइप्रोपिलथायोकार्बोमेट ।

एर्बन                       2-(2, 4, 5-ट्राइक्लोरफेनोक्सी) मेथिल 2, 2-डाइक्लोरो प्रोपियोनेट ।

इथिओन                                टेट्राएथिल च्च्ऱ् मेथिलीन बिस (फोस्फोरोथियोलोथायोनेट) ।

एथेरेल                    2-क्लोरोइथेन फास्फोनिक एसिड ।

फेनक                     सोडियम 2, 3, 6-ट्राइक्लोरोफेनिलेसीटेट ।

फेनाजोफ्लोर                          फेनिल 5, 6-डाइक्लोरी-2-ट्राइफ्ल्यूरोमेथिल बैजिमिडाजोल-1-कार्बोक्सीलेट ।

फनिट्रोथियन                       डाइमेथिल-3-मेथिल-4-नाइट्रोफेनिल फासफोरोथायोनेट

फन्सल्फीथियन                  डाइएथिल 4-(मेथिल सरिफनिल) फेनिल फास्फोरोथायोनेट

फैंटिनएसीटेड                       ट्राइफनिलटिन एसीटेट

फैंटिन-क्लोराइड                  ट्राइफेनिल टिन क्लोराइड ।

फैंटिल-हाइड्रोक्साइड                          ट्राइफेनिल टिन हाइड्रोक्साइड ।

फोलैक्स                                 च्च्च्-ट्राइब्यूटिल फास्फोरोट्राइथायोएट ।

फार्माथियन                          च्-(ग़्-फार्मिल-ग़्-मेथिलकार्बामाएल मेथिल) ग्र्ग्र्-डाइमेथिल फास्फोरोडाइथायोएट ।

फीनोफीस (डिफोनेट)                         ग्र्-एथिल-च्-फेनिल एथिल फास्फोरोडाएथायोएट ।

फजिथियोन                         ग्र्, ग्र्-डाइमेथिल-च्-पाराक्लोरोफेनिल फास्फोरोथिस ।

गिब्बरेलिस                           गिब्बरेलिक एसिड ।

हर्बन                       3-(5-3-ठ्ठ, 4, 5, 6, 7, 8, 8-ठ्ठ-हैक्साहाइड्रो-4, 7-मेथानयिनडेनिल)-1,           1-डाइमेथिल यूरिया ।

इंडोल एसेटिक और ब्यूटिरिक एसिड्स                           इन्डोल एसेटिक एसिड, इन्डोल ब्यूटिरिक एसिड ।

आइओक्सीनिल (पैट्रोल)                   3, 5-डाइ-आयोडो-4-हाइड्रोक्सी बैन्जीनाइट्रिल ।

आइसीबैंजन                         1, 3, 4, 5, 6, 7, 7, 7-ओक्टीक्लोरो-1, 3, 3ठ्ठ, 4, 7, 7ठ्ठ-हैक्साहाइड्रो-4,               7-मैथनोआइसोबैंजोफयूरिन

आइसोनोन्यूरन                   ग़्-(हैक्साहाइड्रो-4, 7-मिथेनोइन्डेन-1-वाहल) ग़्ग़् डाइमेथिल यूरिया ।

किटाजिन                             ग्र्-ग्र्-डाइआइसोप्रोपिल-च्-बैंजोइल थायीफास्फेट ।

लेनासिल                               3-साइक्लोहैक्सिल-5, 6-ट्राइमेथिलेन्यूरेसिल ।

लाइन्यूरन                             ग़्-(3, 4-डाइक्लोरोफेनिल)-ग़्-मेथोक्सी-ग़्-मेथिलयूरीया ।

ल्यूसेल                   5, 6, 7, 8-टैट्राक्लोरोक्विननौक्सालाइन ।

मचेटे  (ब्यूटाक्लोर)                             झ्र्2-क्लोरो-2ऱ्, 6ऱ्-डाइएथिल-ग़्-(ब्यूटीक्सीमेथिल)-एसीटेनिलाइडट ।

एम०सी०पी०बी०                 4-(4-क्लोरो-3-मेथिलफैनोक्सी) ब्यूटिरिक एसिड ।

मैनालन                                 च्-(4, 6-डाइएमिनो-1, 3, 5-ट्राइएजिन 2-वाइल मेथिल) डाइमेथिल फास्फोरोथायालोथायोनेट ।

मेथामिडोफोस                     थिफास्फोरिक एसिड का ग्र्-च्-डाइमेथिलनेस्टर एमाइड ।

मैटम सोडियम                     ग़्-मेथिल डाइथायोकार्बामिक एसिड ।

मैथोमिल                               च्-मेथिल-ग़्-(-मेथिलाकार्बामोयल ओक्सी) थायोएसेटिमाइडेट ।

मैथिलमेटिरम                     झ्द-(ग़्ऱ् ग़्-1, 2-प्रोपिलेनेबिस-(डाइथायोकार्बामेट) और ग़्ऱ्ग़्ऱ् पोलि-1,                2,-प्रोपीलिनबिस (थायोकार्बामोयल)-डाइसल्फिड सहित अमोनियम कम्पलेक्स ।

मैटिरम                  झ्द-(ग़्ऱ् ग़्-1, 2-एथिलने बिस-(डाइथायोकार्बामेट) और ग़्ऱ्ग़्ऱ् पोलि-1,                2,-प्रोपीलिनबिस (थायोकार्बामोयल)-डाइसल्फिड सहित अमोनियम कम्पलेक्स ।

मैटोक्सयूरन                         ग़्ऱ्-(3-क्लोरो-4-मैथोक्सीफेनिल)-ग़्, ग़्-डाइमेथिल यूरिया ।

मैक्न्िफोस                         2-मैथोक्सी-कार्बानिल-1 मेथिल वाइनिल डाइमेथिल फास्फेट ।

एम०आई०पी०सी०आई०एन०                          2-आइसोप्रोपिलफेनिल-ग़्-मेथिल कार्बामेट ।

मेनैप                      ग्र्-एथिल च्, च्-डाइप्रोपिल फास्फोरोडाइथायोएट ।

मौलाइनेट                             च्-एथिल-ग़्-हैक्साहाइड्रो-1, ख़्-एजोपिनुथियोल कार्बामेट ।

मोनोक्रोटोफोस                    3-हाइड्रोक्सी-ग़्-मेथिल-क्रोटोनामाइड डाइमेथिल फास्फेट ।

मोनोलिन्यूरन                      ग़्-(4-क्लोरोफेनिल)-ग़्-मैथोक्सी-ग़्-मेथिल यूरिया ।

एम०एस०एम ०ए०                              मोनोसोडियम मैथेनियरसोनेट ।

नालेड                     1, 2-डाइब्रोमो-2, 2-डाइक्लोरोएथिल डाइमेथिल फास्फेट

नैपिथलऐसिटिक एसिड                     नैपिथलऐसिटिक एसिड और इससे व्युत्पन्न ।

नैब्यूरन                 1-ब्यूटिल-3-(3, 4 डाइक्लोरोफेनिल)-1-मैथिल यूरिया ।

मेमाफोस (थायोनाजिम)                   ग्र्, ग्र्-डाइएथिल व़्-2 पिरेजिनिल फास्फोरोथियोएट

न्योपिनामिग                       3,4, 5, 6-टेट्राहाइड्रो-फ्थालिमाइडोमेथिल क्राइसेन्थेनेट ।

निकेल क्लोराइड                  निकेल क्लोराइड ।

नाइट्रोफेन                             2,4-डाइक्लोरोफेनिल 4-नाइट्रोफेनिल ईथर ।

ओमेथोएट                            डाइमेथिल-8 (ग़्-मेथिल-कार्बामोइल-मेथिल) फास्फोरोथायोएट ।

आरथेन                  ग्र्, च्-डाइमेथिल ग़्-एसीटिल फासफोरामिडोथायोएट ।

ओक्सापिरेजन                     2-डाइमेथिल एमिनो एथानोल (1 और 1) सहित 5-ब्रोमो-1,  6-डाइहाइड्रो-6-औक्सो-1-फेनिल-4-पाइरिडाजिनिल ओक्सोमिक एसिडयोगिक ।

ओक्सीकार्बाक्सिन                              5, 6-डाइहाइड्रो-2-मेथिल-1, 4-ओक्साथिहन-3-कार्बाक्सोनिजाइड ।

डी०सी०एम०ओ०डी०                          4, 4-डाइओक्साइड ।

पैराक्वेट                                 1, 1-डाइमेथिल-4, 4-वाइयपिरिडिलियम आइयोन ।

पेब्यूलेट                 1-प्रोपिल-ब्यूटिल-एथिलथयाकार्बामेट ।

फैथोएट                 च्-ठ्ठ-एथोक्सी कार्बानिल बैंजिल-ग्र्, ग्र्-डाइमेथिल फास्फोरोडाइथायोएट ।

फोरेट                      डाइएथिल च्-(एथिलथायो मैथिल) फास्फोरथियोलोथायोएट ।

फोसालोन                              च्-(6 क्लोरो-2-ओक्सा बैजोक्साजोलिन 3-बाइल)-मैथिल)-ग्र्-ग्र् डाइएथिल- फास्फोरो-डाइथायोएट ।

फास्फामिडन       2-क्लोरो-2-2-डाइएथिल कार्बामोइल-1 मेथिल वाइनिल डाइमेथिल           फास्फेट ।

फास्फोरस पेस्ट   फास्फोरस पेस्ट ।

फास्फेट (इमिडन)               ग्र्, ग्र्-डाइमेथिल-ग़्-फथाइलिमाइड-मेथिल फास्फोरोयाइथायोएट ।

फास्वैल (लैप्टोफास)          ग्र्-(2, 5-डाइक्लोरो-4-ब्रोमोफेनिल)  ग्र्-मैथिल फैनिलथायोफास्फारेट ।

फाक्सिम

                फेनिलग्लाइओक्सिलो नाइट्राइल ओक्साइम ग्र्-ग्र् डाइएथिम फास्फोरोथायोएट ।

पाइक्लोरम           4-एमिनो-3, 5, 6-ट्राइक्लोरो पाइककोलिनिक एसिड ।

प्लाइक्टरैन          ट्राइसाइक्लोहैक्सिल टिन हाइड्रोओक्साइड व्युत्पन्न ।

प्रोनेमाइड क्रोमे    3, 5-डाइक्लोरो-ग़्-(1-डाइमेथिल-3-प्रोपिनिल (वैजामाइड) ।

प्रोपेनिल                3, 4-डाइक्लोरो प्रोपायोने निलाइड ।

प्रोपरजाइट ओमाइर            प्रोप-2-वाइनिल-2-(4-1-बयूटिलफैनीक्सी)-साइक्लोहैक्सिस  सल्फाइट ।

प्रोपिनैव जिंक प्रोपिलीन बिसडाइथायोकेटबामेट (पोलिमैरिक) ।

प्रोपोक्सर              ग्र्-आइसोप्रोपोक्सीफेनिल मेथिल कार्बामेट ।

प्रिनेक्लोर .    .     .    .         ग़्-ब्यूटिन-(1) ज्ञ्,-(3)-क्लोरो-एसेटेनीलाइड । 

पिराकार्बोलिक.    .     .    .     .    .     2-मेथिल-5, 6-डाइहाइड्रो-4-ग़्-पिरन-3-कारबोसीलिक एनिलाइड ।

पिरजन (पी०सी०ए०).    .     .    .     .                5-एमिनो-4-क्लोरो-2-फैनिल-3-पिराइडाजोन ।

क्विनलफोस.    .     .    .     .    .        ग्र्, ग्र्-डाइएथिल क्विनौक्सालिन-2 वाइल फास्फोरोथायोएट ।

रेविसाइड    .     .    .     .    .     .         4, 5, 6, 7,-टेट्राक्लोरोरोप्थलाइड ।

रो-नीट.    .     .    .     .    .     .            च्-एथिल ग़्-एथिल ग़्-साइक्लोहैक्सिल थायोकार्बामेट ।

रोन्नेल.    .     .    .     .    .     .            ग्र्, ग्र्-डाइमैथिल ग्र्-(2, 4, 5-ट्राइक्लोरोफेनिल) फास्फोरोथोयट ।

च्-421.    .     .    .     .    .     .     .      ओक्टाक्लोरो डाइप्रोपिल-ईथर ।

स्वलेक्स.    .     .    .     .    .     .     .     3-(3, 5-डाइक्लोरोफेनिल)-5, 5-डाइमेथिल औक्साजोलि डाइनडायोन-2,4 ।

सिमाजाइन.    .     .    .     .    .     .                    2-क्लोरो-4, 6-बिस (एथिल एमिनो)-च्-ट्राइएजाइन ।

सिंडोन ए.    .     .    .     .    .               1, 1-डाइमेथिल-4, 6-डाई-आइसोप्रोपिल-इन्डेनिल एथिल कीटोन ।

सिंडोन बी.    .     .    .     .    .              1, 1-4-ट्राइमेथिल-4, 6-डाई-आइसोप्रोपिल-5-एन्डेनिल एथिल कीटोन ।

सिमेंट.    .     .    .     .    .     .             3, 4 और 2, 3-डाइक्लोरोबैन्जिल ग़्-मेथिल कार्बामेट । 

स्वेप.    .     .    .     .    .     .     .          मेथिल 3, 4 डाइक्लोरोकार्बा-नाइलेट ।

टार एसिड.    .     .    .     .    .     .       कामप्लैक्सम्पत्ति फेनोलिक योगिक या टार आयल या क्रियोसोटस ।

टोवरन जी.    .     .    .     .    .     .     2, 2, 2-ट्राइक्लोरोएथिल स्ट्राइरीन ।

टैक्नेजीन.    .     .    .     .    .              1, 2, 4, 5-टैट्राक्लोरो-3-नाइट्रोबेन्जीन्स ।

टैर्बासिल.    .     .    .     .    .     .         3-द्य्-ब्यूटिल-5-क्लोरो-6-मेथिलयूरेसिल ।

टेट्राक्लोर विनफास (गाडौना).          2-क्रोलो-1-(2, 4, 5-ट्राइक्लोरोफेनिल) विनाइल डाइमेथिल फास्फेट ।

टेट्रम.    .     .    .     .    .     .                ग्र्, ग्र्-डाइएथिल च्-(2-डाइएथिलएमिनो) एथिल फास्फोरोथायोएट हाइड्रोजन ओक्सालेट ।

2, 4, 5-च्र्व्.    .     .    .     .    .    .       4-(2, 4, 5-ट्राइक्लोरोफेनाक्सी) ब्यूटरिक एसिड ।

थाइएडिएजिनथियोन (टेरकिर).    .                 5-कार्बाक्सीमेथिल-3-मेथिल-2-ग़्-1, 3, 5-थाइएडिया-जाएन-2 थियोन ।

थारोफेनेट-ग्.    .     .    .     .              1, 2-डाइ (3-मेथाक्सी-कार्बानिल-2-थायोयूरआइड) बेंजीन ।

ट्रनिड      एक्सी-3-क्लोरो-एन्डो-6-सियानो-2, नार्विनो-ग्र्-(मेथिल-कार्बामोइल) ओक्साइम ।

ट्राइऐलेट               च्-2, 2, 3-ट्राइक्लोरोएलिल डिस-आइसोप्रोपिल थायोकार्बामेट ।

ट्राइडेमार्फ.    .     .    .     .    .             2, 6-डाइमेथिल-4-ट्राइडेसिल मार्फालाइन ।

ट्युनिक    .     .    .     .    .     .     .     2, (3, 4-डाइक्लोरोफेनिल)-4-मेथिल-1, 2, 4-ओक्साडाएजोलिडाइन-3, 5-डाइथोन ।

यूडौंकोर.    .     .    .     .    .     .          ग़्-(बेटा साइएनोथिल) मोनोक्लोरो-एसेटामाइड ।

वेमिडोथियन.    .     .    .     .    .        ग्र्, ग्र्-डाइमेथिल-च्-(2-1-मेथिल 18 कार्बामोईलएथिलथियो एथिल) फास्फोरोथियोएट ।

वजेटा    .     .    .     .     .     .              एथिलीन थाइयूरेम मोनोसल्फाइड ।

वर्नालेट.    .     .    .     .     .                 च्-प्रोपिल ग़्ग़्-डाइप्रोफिल थायोलकार्बामेट ।

जैन्कट्रन.    .     .    .     .    .     .        4-डाइमैथिलएमिनो-3, 5-बिसलिल-ग़्-मैथिलकार्बामेट ।

बेसेग्रम.    .     .    .     .    .     .           3-आइसोप्रोपिल-ख्र्-ग़्-2, 3-ब्रैंजो-थोयाडाइक्सिल-4 (3ख़्)-एक 2, 2-डाइओक्साइड ।

बैसलिन.    .     .    .     .    .      .         ग़्-(2-क्लोरोएस्थिल)-ग़्-प्रोपिल-ट्राइफल्युओरो-2-6, डाइनाइट्रो-द्र-टोल्यूडीन ।

बैविस्टिन.    .     .    .     .    .     .       2-(मेथोक्सी-कार्बामोइल)- बेंजीमाइडेजोल ।

केम्पोग्राम-ग्.    .     .     .     .            2, 5-डाइमेथिल-फ्यूरन 3-कार्बोनिक एसिड एनिलाइड और 320 ग्राम ओजी (जिंक) ।

ट्राइफ्लूयेरेलिन.    .     .     .      .     .                 2, 6-डाइनाइट्रो-ग़्ग़्-डाइप्रोपिल-4-ट्राइफ्लयोरोमेथिल एनिलाइन ।

फ्ल्यूमेटरन.    .     .     .     .     .        ग़्-(3-ट्राइफ्ल्यूरो-मेथिल फेनिल)-ग़्ऱ्-ग़्"-डाइमेथिलयूरिया ।

मेटाब्रोमयूरन.    .     .     .     .            ग़्-(घ्-ब्रोमोफेनिल)-ग़्ऱ्-मेथिल-ग़्ऱ्-मेथाक्सीयूरिया ।

मेंकोजेब.    .     .     .      .     .             जिंक-मैंगनीज एथिलीन-बिस-डाइथायोकार्बामेट ।

[मेथाबैन्जोथियायूरोन.    .     .          1, 3-डाइमेथिल-3 (2,बेन्जोथियोजोलिल)-यूरिया ।

[स्ट्रेप्टोमाइसिन                 

टेट्रासाइक्लीन    

टर्बुटेरिन.    .     .    .     .    .                (2-टर्ट, ब्यूटिलएमिनो-4-एथिलएमिनो-6-मेथिलाथियो-एस-ट्राइएजिन ।)

ग्लाइफोसेट.    .     .    .     .    .          झ्र्ग़्-1 (फास्फोनोमेथिल) ग्लाइसिनट आइसो प्रोपिलएमिनो लवण के रूप में उपस्थित ।

बैसिल्स थ्यूरिनजेन्सिसट                

 [बेंथिओकार्ब.    .     .    .     .   .         च्-(4-क्लोरोबेंजोइल)-ग़्, ग़्-डाइएथिलथिओल कार्बामेट ।

साइपरमेथरीन.    .     .    .     .    .                     ग्र्व़्-साइनो-3-फिनोक्सीबेंजोइल-2, 2-डाइमेथिल-3-(2, 2-डाइक्लोरोविनाइल) साइक्लोप्रोपेन, कार्बोक्सीलेट । 

डेकोमेथरीन.    .     .    .     .    .          (च्)-ग्र्व़्-साइनो-एम-फिनोक्सीबेंजोइल (आई आर, 3आर)-3-(2, 2-डोब्रोमोविनाइल) डाइमेथिल, साइक्लोप्रोपिन कार्बोक्सीलेट ।

फेनवलरेट.    .     .    .     .    .             ग्र्व़्-साइनो-एम-फिनोक्सीबेंजोइल-ग्र्व़्-इसोप्रोपिल-पी-क्लोरोफिनील एसिटेट

परमेथ्रीन.    .     .     .     .    .              3-फिनोक्सी बेंजइल ट्रांस-3-(2, 2-डाइक्लोरोविनइल)-2, 2- डाइमेथिल-साइक्लोप्रोपेन कार्बोक्सीलेट ।

टेट्राक्लोरोआइसोफथालोनिटराइल.   .            1, 2, 4-ट्राइक्लोरो-3, 5-डाइनिट्रो बेंजीनट

 [ब्रोमोफोस.    .     .    .     .    .           ग्र्-(4-ब्रोमो-2, 5-डाइक्लोरोफिनील) ग्र्ग्र्-डाइमेथील फास्फोरोथिओएट ।

ब्रोमोफास एथायल.    .     .    .   .      ग्र्-(4-ब्रोमो-2, 5-डाइक्लोरोफिनील) ग्र्ग्र्-डाइएथील फास्फोरोथिओएट ।

कारटेप.    .     .    .     .     .      .         1, 3-डाइ (कारबोमोयल्थियो)-2-डाइमेथीलइमिनोप्रोपेन ।

डाइक्लोरोफेन (एंटीफेन).   .  .           5, 5-डाइक्लोरो 2, 2, डाइहाइड्रोक्सी डाइफेनीलमिथेन ।

डाइनोब्यूटोन.    .      .     .     .     .                    आइसोप्रोपाइल-2-(1-मेथाइल-एन-प्रोपाइल)-4, 6-डाइनीइट्रोफिनायल कार्बोनेट ।

डाइथिएनन.    .     .    .     .    .     .                    2, 3-डाइसिआनो-1, 4-डाइथिया-एंथ्राक्विनोन ।

इथाइल फार्मेट.    .     .    .     .    .     इथाइल फार्मेट ।

फेनफुरम.    .     .    .     .    .     .        2-मेथाइल फुरन-3-कार्बोक्सानिलाइड ।

ग्लाइफोसाइन.    .     .    .     .     .                     ग़्, ग़्-बिस (फास्फोनोमेथाइल) ग्लीसाइन ।

ग्वाजाटाइन.    .     .    .     .    .          1,17-डाइग्वानाइडिनो-9-एजाहेपटाडिकेन ।

आइसोफेन्फोस.    .     .     .     .     .                  ग्र्-एथिइल-ग्र्-(2-आइसोप्रोपाक्सी-कार्बोनल) फेनीइल आइसोप्रोपाइल फास्फोरामाइडोथिओएट ।

आइसोप्रोट्यूरोन.    .     .    .     .    .                  एन, एन-डाइमेथाइल-एनऱ्-4-आइसोप्रोपाइल फेनील यूरिया ।

मैंगनेशियम फास्फाइड.    .     .        मैंगनेशियम फास्फाइड ।

मेट्रीबुजिन.    .     .     .     .     .          4-एमिनो-6-टट्रेबुटिल-3-(मेथिलथिओ)-1, 2, 4-ट्रायजिन-5-(4एच)-एक ।

ट्रियोडिमेफोन.    .     .    .     .    .     1-(4-क्लोरोफेनाक्सी)-3, 3-डायमेथील-1-(1-एच-1, 2, 4-ट्रियाजोल-1-इल)-2-बेटनोन ।

ट्राइफोराइन.    .     .    .     .    .     .                   1, 4-डाइ-(2, 2, 2-ट्रियाक्लोरो-1 फारमामीडियोथोयल (पिपराजाइन) ।

वेकेर.    .     .    .     .    .     .     .         एन-3-पाइरीडिल मेथाइल-एन-पी-नाइट्रोफेनाइल यूरिया ।

 [एमिट्राज.    .     .     .      .     .          2-मैथिल-1, 3-डाई-(2-4-एक्सीलिमिनो) 2-अजाप्रोपेन ।

ब्रेन्डियोकार्ब.    .     .    .     .     .        2, 2-डाईमेथिलबेन्जो-1, 3-डाइआक्सोल 4-यिल मेथिल कार्बामेट ।

बेन्जोयलप्रोप-ऐथिल.    .     .     .     एथिल एन-बेन्जोयल-एन-(3, 4-डाईक्लोरोफिनायल) -डी एल एलानिनेट ।

काइनाजाइन.    .     .     .     .     .     2-(4-क्लोरो-6-एथिलेमिनी-1, 3, 5-ट्रियाजिन-2-वाइअलामिनो) 2-मेथिल प्रोपाइनोट्राइल ।

एट्रिमफास.    .     .    .     .    .     .     ग्र्-(6-एथोक्सी-2-ऐथिल-4-पाइरीमिडिनाइल) ग्र्, ग्र्-डाइमिथायल फासफोरोथियोट ।

ग्लाइओडीन.    .     .    .     .    .                         2-हेप्टाडेसिल-3, 4-डिडाइड्रो-1-एच-ईमीडाजोलिल एसिटेट ।

आक्साडोयजन.    .     .    .     .   .                     3-(2, 4-डिक्लोरो-5-(1-मेथिलएथोक्सी) फिनायल)-5-(1, 1-डिमेथिलिथिल) -1, 3, 4-आक्साडायजल-2 (3एच) -एक ।

आक्सीफ्लुरफेन.    .     .    .     .    .                    2-क्लोरो-1-(3-एथोक्सी-4-नाइट्रोफिनोक्सील)-4 (ट्रिफुलुईरमेथिल) बेन्जीन ।

प्रोपेटमफोस.    .     .    .    .   .            (ई)-ग्र्-2-आइसोप्रोपोक्सीकारबोनियल-1-मेथिल विनिल-ग्र्-मेथिल एथिलफोसफोरमिडुथियेट ।

साइल्लिरोसिदे.    .     .    .     .    .                     3बी, 6बी-6-एसिटीलोक्सी-3-(बी-डी-ग्लाइकोपाइरानी-सोलोक्सी) 8,     14-डिहाइड्रोक्सीब्यूफा-1, 20, 22, ट्राइनोलाइड ।

थिओसीक्लाम (हाइड्रोजेनोक्सालेट) एन, एन-डिमेथिल-1, 2, 3-ट्रिथिएन-5-एमिनी, हाइड्रोजेनोक्सालेट ।

विकलोजोलिन.    .     .    .     .    .                     3-(3, 5-डिक्लोरोफेनियल)-5-ऐथिनिल-5-मेथिल-2, 4-आक्साजोलिडा-इनडियोने ।

बेनोडानिल.    .     .    .    .   .    .        2-आयोडो-एन-फेयनिलबेन्जामिदे ।

डाइक्लोफॉप-मेथिल.    .     .    .                       2-(4 (2, 4-डिक्लोरोफिनॉक्सी) फिनोक्सी)-प्रोपनाइल एसिड ।

मेटालेक्सिल.    .     .    .     .    .                        मेथिल-2-(मेथोक्सियाऐटिल) एन-(2, 6-एक्सलिल)-डी एल एलानिनेट ।

पेंड्रिमेथालिन.    .    .   .    .    .           एन-(1-ऐथिल प्रोपिल)-3, 4-डिमेथिल-2, 6-डिनाइट्रो-बेंजिनियामिन ।

फॉसेथिल एल्यूमिनियम.    .     .     एल्यूमिनियम ट्राइज (एथिल-फोसफोनेट) ।

थियाबेन्डाजोल.    .     .     .     .         2(4-थियाजोलिल)-बेंडोमिडाजोल ।

ब्युट्रिजोल.    .     .    .     .    .     .     4-एन-बुटिल-4एच-1, 24-ट्रोजोल ।

टी०सी०एम०टी०बी०.    .     .    .                       2-(थायोसाइनोमेथिल-थियो), बेंजोथाइजोल ।

ब्रोमाडियोलोन.    .   .    .    .    .         3-3-4 -ब्रोमोल, 1-बाइफेनिल-4, वाई-3 हाइड्रोक्सी-1-फिनायल प्रोपिल-4 हाइड्रोक्सी-2 एच-1-ब्रेंजोपाइरन-2-एक ।ट

[फ्लूसीथराइनेट  आर एस-(साइनो-3-फिनाक्सी-बैंजाइल (एस)-2-(4-डाइफलुओमेथोक्सी फिनिल)-मिथिलबुटिरेट ।

ट्रायाजोफास         ओ, ओ-डाइथिल 0-1-फिनिल-1, 2-4-ट्रायजोल-3-थिलफासफोरोथाएट ।

डाइफलुबेंजुरान    1-(4 क्लोरोफिनिल)-3 (2), 6-डाइफ्लुरोबेंजोयल) यूरिया ।

बिटरटानोल          बी-(1, 1-बाईफिनिल)-4-इलाक्सी-एल (1, 1-डाइमेथेलिथिल-आई एच 1, 2, 4-ट्रायजोले-1- इथरनौल ।

सिथुरिडियोन       2, 1-(इथाक्सीमाइन) बुटिल-5 (2-इथिलथियोप्रोपिल) 3-हाईड्रोक्सी-2- साइक्लोहैक्सन-1-एक ।

ब्रोडीफेकाम           3-(3)-(4-ब्रोमोबाइफिनिल-4-इल)-1, 2, 3, (4-टेट्राहाइड्रो-1 नेथेफिल हाइड्रोक्सीकोमारिन) ।

मेथोप्रन आइसोप्रोपिल (2ई, 4ई)-11-मेथाक्सी-3, 7, 11-ट्राइमेथिल-2,                             4-डोडेकेडिनिओट ।

[आइसोप्राथियोलेनट          -डाइसोप्रोपिल-1, 3-डिथियोलेन-2-इल-आइडेनमेलेनेट ।

कार्बोसल्फान       2, 3-डिहाइड्रो-2, 2-डाइमेथिल-7-बेंजोफ्यूरानिल[(डिबुटिलामाइन) (थियो)ट मिथाइल कार्बोमेट ।

प्रोक्लोरेज              -एन-प्रोपिल-एन-झ्र्2-झ्र्2, 4, 6- ट्राइक्लोरोफिनाक्सी) इथिलट-इमिडाजोल-1- कार्बोक्सामाइड ।

मेथाक्रीफास         -ओ-2-मेथाक्सीकार्बोनिलप्रॉप-1-इनिल-ग्र्, ग्र्-डाइमेथिल फासफोरोथियोट ।

क्लोरटोलुरान       -3-झ्र्3-क्लोरो-पी-टोलिलट-1-डाइमेथिल-यूरिया ।

प्रोबेनाजोले           -3-एलिलाक्सी-1, 2-बेंजोलसोथियाजोल-1, 1-डाइआक्साइड । 

फ्युवेलिनेट           -(आर एस)-डी-साइनो-3 फिनाक्सीबैन्जिल (आर)-2-(2-क्लोरो-4 ट्राइफ्लूरेमिथाइल-एनिलाइन)-3-मिथिल-बुटानुएट ।

डी०ई०पी०ए०        -एन-डाएथिल-फिनिल एसिटामाइड ।

फेनप्रोपेथरिन       -डी-साइनो-3-फिनाक्सीबेंजिल-2, 2, 3, 3-टेट्रामिथिल-1- साइक्लोप्रोपेनकार्बोक्सीलेट ।

फनोथ्रिन               -3-फिनाक्सीबेंजिल (आई आर एस)-सिस, ट्रांसक्रिसाथेमेट ।

कासुगामाइसिन झ्र्5-एमिनो-2-मिथिल-6-(2, 3, 4, 5, 6-पेथिड्रोक्सी साइक्लोहेक्सिल (टेट्राहइड्रोफिरान-3-इल) एमिनो-एमिनो एसिटिक एसिड ।

एमिडाइन हाइड्राजोन          टेट्राहाइड्रो-5, 5-डाइमेथिल-2 (1-एच) पाइरिमाइडाइनोन[2-झ्र्4-ट्राइफ्लुओरोमिथिल फिनिलट-1-झ्र्2-झ्र्4-ट्राइफ्लुरोमिथिल फिनिल एथेनिल-2 प्रोपेनिलआइडीनट हाइड्रोजोन ।

एमिलफोस           एस[एन (4-क्लोरो-फिनिल-)एन-आइसोप्रोपिल-कार्बोमोइलमिथिलट-ग्र्,        ग्र्-डाइमेथिल-डाइथियोफास्फेट ।

              जड़ी-बूटियों का सत, जिसमें डायालिल डाइसल्फाइड, एलिल प्रोपिल डाइसल्फाइड तथा एलिल आइसोथियों साइनेट, डायालिल डाइसल्फाइड एलिल प्रोपिल डाइसल्फाइड तथा एलिल आयसोथियोसाइनेट सम्मिलित है ।

[फैनामीफोस        इथाइल 4-मिथाइलथियोम-टोलइल आइसोप्रोपाइलफोस-फोरमाइडेट।

एमेट्राइन               एन-एथाइल-एन 1-(1-मिथाइलथाइल)-6-(मिथाइलथियो)-1, 3, 5-ट्रायाजाइन-2, 4-डायामाइन ।

प्रोमेट्राइन              एन, एन 1-बिस (1-मिथाइलथाइल)-6-(मिथाइलथियो)-1, 3, 5-ट्रायाजाइन-2, 4-डायामाइन ।

फ्लुआजीफोप       घ् : (ख्र्छघ्एव़्) (ङ)-2-झ्र्4-(5-ट्रायफ्यूरोमिथाइल-2,-पाइरीडीइलोक्स) (फेनोक्सी) प्रापियोनिक एसिड ।ट

[बोरिक एसिड      ऑर्थो-बोरिक एसिड ।

ब्रोमोप्रोपिलेट .    .     .         आइसोप्रोपिल 4, 4ऱ्डाइब्रोमोब्रेन्जिलेट ।

रेस्मेथिन.    .     .    .     .    5-बेंजिल-3-फरिलमेथिल (आई०आर०एस० 3 आर० एस०ऱ् 1 आर० एस० 3 एस० आर०)-2, 2-डाइमेथिल-3-(2-मैथिलप्रोप-1-एनीइल) साइक्लोप्रोपेनिकार्बोक्सिलेट ।

अजामेथिफोस.    .     .    .                  एस-6 क्लोरो-2, 3-डिहाइड्रो-2-ओक्सी-ओक्साजोल (4, 5-बी) पाइरिडाइन-3-यलमैथाइल ग्र्, ग्र्-डाइमिथाइल फोसफोरोथिओएट ।

मैटोलैक्लोर.    .     .    .         2-क्लोरो-6ऱ्-एथिल-एन-(2-मैथोक्लिस-1-मेथिलेथिल) एसिट-ओ-टोलडाइट ।

बालीडामाइसिन-ए.    .     .    .           आई०एल०-(1, 3, 4/2, 6)-2, 3-डिहाइड्राक्सी-6-हाइड्राक्सीमैथाइल-4-(1 एस० 4 आर, 5 एस, 6-एस०-)-4, 5, 6-ट्राईहाइड्राक्सी-3-हाइड्राक्सीमैथाइल साइक्लोहेक्स-2-एनिलेमाइनों) साइक्लो-हैक्सिल-बी-डी० ग्लुकोपाइरेनो-साइड ।

हैलोक्सिफाप मैथिल.    .                    मैथिल 2-(4-झ्र्(3-क्लोरो-5-(ट्रिफ्लोमेथिल-2-पाइरिडिनाइल) आक्सीट फिनोक्सी) प्रोपेनोएट ।

पाइमैरिसिन.    .     .    .     .    .         (8ई, 14ई, 16ई, 18ई, 20ई)-(1 एस०, 3 आर०, 5 एस०, 7 एस०, 12 आर०, 24 आर, 25 एस०, 26 आर), -22-(3- एमिनो-3-6-डाइडोओक्सी-बी-डी-मन्नौपाइरेनोसिलाक्सी)-1, 3, 26-ट्रिहाइड्राक्सी-12-मैथिल-10-ओक्सो-6, 11, 28-ट्रिआक्सेट्रिसाइक्लो (22.3.1.05.7) ओक्टेकोसा-8, 14, 16, 18, 20-पेनटेन-25-कार्बोक्सिलिक एसिड ।

साइहेलीथिरिन.   .    .    .    .             (आर०एस०)-ए-सायनो-3-फैनोक्सिबेंजिल (जेड)-(1 आर०एस० 3 आर०एस०)-(2-क्लोरो-3, 3, 3-ट्राइफ्लूरो प्रोपेनिल)-2, 2-डाइमेथिलसाइक्लोप्रोपेनकार्बोक्सिलेट ।

कोलेकैलसिरेरोल.    .    .     9, 10-सियोकेलेस्टा-5, 7, 10 (10)-ट्रीन-3 बिटौल एक्टिवेट                            7-डिहाइड्रोकोलेस्ट्रोल ।

टोलक्लोफास-मेथिल.   .   .                 ग्र्-(2, 6-डाइक्लोरो-4-मैथिलफिनाइल) ग्र्, ग्र्-डायमेथिल फोसफोरोथओएट ।

पोइपरोफास.    .     .    .     .               एस-2-मैथिलपाइपेरिडिनोकोर्बेनिल-मैथिल ग्र्, ग्र्-डिप्रोपिलफोस-फोरो-डिथिओएट ।

क्लोरपाइरिफास-मैथिल.   ग्र्, ग्र्-डाइमैथिल ग्र्-3, 5, 6-ट्राइक्लोरो-2-प्रिडाइलफास्फोरोथिओएट ।ट

 [सारपरमेथरिन (एसएलआर-सिस और आरएलएस-एल सिस-आयसोमर).    .    .   (अल्फामेथरिन)              (आई यू पी ए सी) (एस)- अल्फा-साइनो-3-फिनाक्सोबेनजाइल (आई आर, 3 आर)-3-(2,                   2-डाइक्लोरोविनाइल)-2, 2-डिमिथाइल, साइक्लोप्रोपेन कारबाक्सोलेट और (आर)-अल्फा-साइनो-3-फिनोक्सीबेनजाइल (आई एस, 3 एस)-3-(2, 2-डाइक्लोरोविनायल)-2, 2-डिमिथाइल साइक्लोप्रोपेन कारबोक्सोलेट ।

बेनफ्यूराकर्ब.    .     .    .     (आई यू पी ए सी) एथिल एन-2, 3-डिहायड्रो-2, 2-डिमिथाईल बेन्झोफ्यूरोन-7-वाई एल आक्सीकार्बोनाइल (मेथिल एमिनोथियो)-न्र्एन-आईसोप्रोपाइल- एलानिनेट ।

साईफोनोथ्रिन.    .     .                        (आइ यू पी ए सी) (आर एस)-ग्र्-साइनो-3-फिनोक्सीबेनजाइल (आई आर)-सिस- ट्रान्सक्रायसेंथिमेट ।

साइफ्लूथ्रिन.    .     .    .     (आइ यू पी ए सी) साइनो-(4-फ्लूरो-3-फिनोक्सोफिनाइल-मिथाइल-3-(2,                            2-डाइक्लोरो-एथिनाइल)-2, 2-डीमिथाइल-साइक्लोप्रोपेन कारबॉक्सोलेट ।

डाइमेथाजोन.    .     .    .                     (आइ यू पी ए सी) 2-(2-क्लोरोफिनाइल-4-4-डिमिथाइल-3-आइसोक्साजोलीडीनोन).

डाइनोक्लोर.    .   .    .         (आइ यू पी ए सी) परक्लोरो-1, 1-बाइसाइक्लोपेन्टा-2, 4-डाइन ।

एफोफेनप्रॉक्स.    .    .    .     2-(4-इथरॉक्सीफिनाइल)-2-मिथाइल-प्रोपाइल-3-फिनॉक्सीबेनजाइन-इथर ।

फ्लोकोमाफेन.    .   .    .     4-हाइड्राक्सी-3-(1, 2, 3, 4-टेट्राहाइड्रो-3-झ्र्4-(4-ट्राइफ्लूरोमिथाइल बेनजाइलॉक्सीफिनाइल-1-नैपथाइल कॉनमरीन (सीस और ट्रान्स आइसोमर्स का मिश्रण) ।

फेनारिमोल.    .     .    .     .                 (आइ यू पी ए सी) (%)-2, 4-डाइक्लोरो- (पाइरिमिडीन-5-वाइ एल) बेन्जहाइड्राइल एल्कोहल ।

फ्ल्यूराक्सीपाइपर.    .     .    .           (आइ यू पी ए सी) 4-एमिनो-3, 5-डाइ-क्लोरो-6-फ्लूरो-2-पिरोडाइलोक्सी एसिटिक अम्ल ।

फ्लूफिनोक्स्युरन.    .     .                  1-(4-2-क्लोरो-4-ट्राइफ्ल्यूरोमिथाइल) फिनोक्सी 2-फ्लोरोफिनाइल) 3 (2-6-डाइप्लूरोबेनजो आइल) यूरिया ।

फोलपेट.    .     .    .     .    .                 (आइ यू पी ए सी) एन-(ट्राइफ्लोरोमिथाइलथियो) थालिमाइड ।

क्लोपाइरालिड.    .     .    .                  (आइ यू पी ए सी) 3, 6-डाइक्लोरोपाइरीडाइन-2-कारबॉक्सीलिक अम्ल ।

माइक्लोबूटानिल.    .     .                   (आइ यू पी ए सी) 2-क्लोरोफिनाइल -2-(आइ एच-1, 2, 4-ट्रायाजोल-1-वाइ एल-मिथाइल) हॉक्सीनेनोट्राइल ।

मेथोडेथियोजन    .     .      एस-2, 3-डिहाइट्रो-5-मिथॉक्सी-2-ओक्जो-1, 3, 4-थियाडिजोल-3-वाइ-एल मिथाइल ग्र्-ग्र्- डिमिथाइल फॉस्फोरोडाइथियोएट ।

ओक्साडाइकिजल.    .     .    .     .                    (आइ यू पी ए सी) 2- मिथॉक्सी-एन-(2-आक्जो-1, 3-आक्जाजोलिडिन-3-वाइ एल) एसेट-2, 6-जाइलिडाइड ।

पेन्कोनाजोल.   .    .    .                      (आइ यू पी ए सी) 1-(2, 4-डाइक्लोरो-बीटा-प्रोपाइलफिनीथाइल) 1 एच-1, 2, 4,-ट्राइएजोल ।

प्रिटाइलाक्लोर.     .     .                      (आइ यू पी ए सी) 2-क्लोरो-2, 6-डाइथाइल-एन (2-प्रोपॉक्सी एथाइल) एसिटानोलाइड ।

प्राल्लिथरीन.    .     .    .                     आर एस-2-मेथाइल-3-(2-प्रोपिनाइल) 4-आक्सीसाइफ्लोपेंट-2-एनाइल (आइ आर)-सिस, ट्रांस-क्राइसेंथीमेंट ।

पाइरीडेट.    .     .    .     .    (आइ यू पी ए सी) 6-क्लोरो-3-फिनाइल पाइरीडाजोन-4-वाई एल एस-आक्टाइल थियोकार्बोनेट ।

पाइरोक्विलोन.    .     .    .                  (आइ यू पी ए सी) 1, 2, 5, 6-टेट्राहड्रोपारोलो (3, 2, 1-आई जे) क्विनोलीन-4-एन ।

पाइरिडाफेनथियन.    .       ग्र्, ग्र्-डाइथाइल 2, 3-डोहाइड्रो-3-आक्जो-2-फिनाइल-फास्फोरोथिट ।

सल्प्रोफॉस.    .      .     .                      (आइ यू पी ए सी) ग्र्-एथाइल ग्र्-4 (मेथाइलथयो) फिनाइल एस-प्रोपाइल फास्फोरो-डिथियोएट ।

सेबूफॉस.    .     .    .     .                      एस, एस-डाइ-सेक-बुटाइल ग्र्-एथाइल फास्फोडिथियोएट ।

ट्रायडाइमेनोल.     .     .                       (आइ यू पी ए सी) 1-(4-क्लोरोफिनाक्जी)-3, 3-डिसेथाइल-1-(1-एच-1, 2 4-ट्रायाजोल-1-वाइ एल) बूटान-2-01 ।

ट्रायसाइक्लाजोल.    .     .                  (आइ यू पी ए सी) 5-मेथाइल-1, 2, 4,-ट्रायाजोल (3, 4-बी) (1, 3) बेन्जोथियाजोल ।

ट्राइडायफेन.    .     .    .                       (आइ यू पी ए सी) (आर एस) 3, 5-डायक्लोरोफिनाइल)-2-(2, 2, 2,-ट्राइक्लोरोएथाइल) आक्सीरेन ।

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