न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985
(1985 का अधिनियम संख्यांक 59)
[6 सितम्बर, 1985]
न्यायाधीशों और न्यायिकतः कार्य करते हुए अन्य
व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त संरक्षण
सुनिश्चित करने और उससे
संबंधित विषयों के लिए
अधिनियम
भारतीय गणराज्य के छत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
2. परिभाषा-इस अधिनियम में न्यायाधीशञ्ज् से न केवल प्रत्येक ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो पद रूप से न्यायाधीश अभिहित है किन्तु ऐसा प्रत्येक व्यक्ति भी अभिप्रेत है-
(क) जो किसी विधिक कार्यवाही में, अन्तिम निर्णय या ऐसा निर्णय, जो उसके विरुद्ध अपील न होने पर अन्तिम हो जाए या ऐसा निर्णय, जो किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्ट किए जाने पर अंतिम हो जाए, देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया है ; या
(ख) जो उस व्यक्ति-निकाय में से एक है, जो व्यक्ति-निकाय ऐसा निर्णय, जो खंड (क) में निर्दिष्ट है, देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया है ।
3. न्यायाधीशों के लिए अतिरिक्त संरक्षण-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी और उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध, जो न्यायाधीश है या था, उसके द्वारा उस समय जब वह अपने पदीय या न्यायिक कर्तव्य या कृत्य के निर्वहन में कार्य कर रहा हो या कार्य करने के लिए तात्पर्यित हो, या उसके अनुक्रम में किए गए किसी कार्य, की गई किसी बात या बोले गए किसी शब्द के लिए किसी सिविल या दाण्डिक कार्यवाही को ग्रहण नहीं करेगा या जारी नहीं रखेगा ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या भारत के उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी की किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध, जो न्यायाधीश है या था, ऐसी कार्रवाई (चाहे वह सिविल, दाण्डिक या विभागीय कार्यवाही के रूप में हो या अन्यथा) करने की शक्ति को किसी भी रीति से विवर्जित नहीं करेगी या उस पर प्रभाव नहीं ड़ालेगी ।
4. व्यावृत्ति-इस अधिनियम के उपबन्ध, न्यायाधीशों के संरक्षण के लिए, उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।
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