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राष्ट्रीय सेवा अधिनियम, 1972 ( National Service Act, 1972 )


 

राष्ट्रीय सेवा अधिनियम, 1972

(1972 का अधिनियम संख्यांक 28)

[9 जून, 1972]

अर्हित व्यक्तियों के रजिस्ट्रीकरण और ऐसे व्यक्तियों द्वारा

राष्ट्रीय सेवा करने तथा उनसे सम्बद्ध विषयों

का उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय सेवा अधिनियम, 1972 है

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे  

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो,-

() नियोजक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी अर्हित व्यक्ति को किसी स्थापन में कोई काम करने के लिए नियोजित करता है और इसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति भी है जिसे ऐसे स्थापन में अर्हित व्यक्तियों का पर्यवेक्षण और नियंत्रण सौंपा गया है;

() स्थापन" से अभिप्रेत है

(i) कोई कार्यालय, या

(ii) कोई स्थान जहां कोई उद्योग, व्यापार, कारबार या उपजीविका की जाती है, और इसके अन्तर्गत कोई तकनीकी संस्था या प्रशिक्षण केन्द्र भी है

() राष्ट्रीय सेवा" से ऐसी कोई सेवा अभिप्रेत है जिसके द्वारा भारत की रक्षा और नागरिक सुरक्षा में या सैनिक संक्रियाओं के दक्षतापूर्ण संचालन में सहायता की जा सकती है और इसके अन्तर्गत ऐसी सामाजिक सेवा भी है जिसे केन्द्रीय सरकार, यदि उसकी राय में ऐसा करना लोक प्रयोजनों के लिए आवश्यक है, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे

() अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है

() अर्हित व्यक्ति" से भारत का ऐसा नागरिक अभिप्रेत है जो मामूली तौर पर भारत का निवासी है और,-

(i) भारतीय चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) के अर्थ में कोई मान्यताप्राप्त चिकित्सा अर्हता अभिप्राप्त कर चुका है, या 

(ii) जिसने किसी विश्वविद्यालय से इंजीनियरी या प्रौद्योगिकी की किसी शाखा की या दोनों की कोई उपाधि प्राप्त कर ली है, या ऐसी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है जो उसे ऐसी उपाधि प्राप्त करने का या उसके समतुल्य कोई अर्हता प्राप्त करने का, हकदार बनाती है

स्पष्टीकरण-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, वह अर्हित व्यक्ति जो भारत का निवासी है, निम्नलिखित दशाओं के सिवाय मामूली तौर पर भारत का निवासी समझा जाएगा, अर्थात् :-

() वह केवल किसी पाठ्यक्रम में सम्मिलित होने के प्रयोजन के लिए भारत में निवास कर रहा है; या 

() भारत में उसके निवास की परिस्थितियां अन्यथा ऐसी हैं जो यह दर्शाती हैं कि वह केवल किसी अस्थायी प्रयोजन के लिए भारत में निवास कर रहा है; या 

() वह ऐसा व्यक्ति है जो भारत से बाहर किसी देश में जन्मा या अधिवसित है और भारत में दो वर्ष से कम समय से रह रहा है  

अध्याय 2

राष्ट्रीय सेवा करने का व्यक्तियों का दायित्व

3. राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने का व्यक्तियों का दायित्व-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो

() इस अधिनियम के प्रारम्भ पर अर्हित व्यक्ति है, या

() ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् अर्हित व्यक्ति बन जाता है,

यदि उसने, यथास्थिति, ऐसे प्रारम्भ पर या उस तारीख को जिसको वह अर्हित व्यक्ति बन जाता है, तीस वर्ष की आयु पूरी नहीं कर ली है, तो वह, तीस वर्ष की आयु पूरी करने पर्यन्त, चार वर्ष से अनधिक अवधि के लिए राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन होगा  

(2) राष्ट्रीय सेवा की अवधि, जिसके लिए कोई अर्हित व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन बुलाए जाने के दायित्व के अधीन होगा, उस तारीख से आरम्भ होगी जिसको उससे इस अधिनियम के अधीन तामील की गई भर्ती सूचना द्वारा, उसमें विनिर्दिष्ट प्राधिकारी के समक्ष, उपस्थित होने की अपेक्षा की जाती है और उस दिन समाप्त होगी जिस दिन उसकी राष्ट्रीय सेवा की अवधि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार पूरी हो जाती है   

4. राष्ट्रीय सेवा के बदले में स्वेच्छया सेवा-(1) यदि कोई अर्हित व्यक्ति, संघ के सशस्त्र बलों में से किसी एक में चार वर्ष से अन्यून अवधि की सेवा के लिए, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन, भर्ती किया गया है तो वह इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित राष्ट्रीय सेवा के बदले उस बल के सदस्यों से अपेक्षित सेवा करेगा  

(2) यदि अर्हित व्यक्ति ने, संघ के सशस्त्र बलों में से किसी में सेवा से भिन्न, कोई सेवा की है या कर रहा है, और केन्द्रीय सरकार ऐसी सेवा को राष्ट्रीय सेवा के समतुल्य घोषित कर देती है तो ऐसी सेवा की अवधि इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित राष्ट्रीय सेवा के बदले सेवा समझी जाएगी और वह (जब तक कि इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने का उसका दायित्व समाप्त नहीं हो जाता) उतनी अवधि के लिए राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन होगा जो, उसके द्वारा पूरी की गई सेवा को मिलाकर, उस सेवा-अवधि के समतुल्य है जिसके लिए व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सेवा करने के दायित्व के अधीन है  

(3) यदि कोई अर्हित व्यक्ति-

() भारतीय रिजर्व बल अधिनियम, 1888 (1888 का 4) के अधीन विनियमित भारतीय रिजर्व बल

() प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 (1948 का 56) के अधीन गठित प्रादेशिक सेना

() रिजर्व और सहायक वायु सेना अधिनियम, 1952 (1952 का 62) के अधीन गठित वायु सेना रिजर्व या सहायक वायु सेना

() नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) के अधीन समुत्थापित तथा अनुरक्षित भारतीय नौसैनिक रिजर्व बल, या 

() पूर्ववर्ती प्रकृति के किसी अन्य बल,

के सदस्य के रूप में भर्ती किया गया है, तो जब तक वह उस बल का सदस्य रहता है तब तक इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा :

परन्तु जब वह ऐसे बल का सदस्य रहे तब उतनी अवधि के लिए राष्ट्रीय सेवा करने के दायित्व के अधीन होगा (जब तक कि इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने का उसका दायित्व समाप्त हो गया हो) जो उस बल के सदस्य के रूप में उसके द्वारा की गई वास्तविक सेवा को मिलाकर, उस सेवा की अवधि के समतुल्य होगी जिसके लिए व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सेवा करने के दायित्व के अधीन है   

5. व्यवधानग्रस्त सेवा पूरी करने का दायित्व-यदि संघ के सशस्त्र बलों में सेवा करने वाला कोई अर्हित व्यक्ति चार वर्ष की ऐसी सेवा पूरी करने से पूर्व सेवा करना समाप्त कर देता है तो वह (जब तक कि इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने का उसका दायित्व समाप्त हो गया हो) उतनी अवधि के लिए राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन होगा जो, उसके द्वारा पूरी की गई सेवा को मिलाकर, उस सेवा की अवधि के समतुल्य होगी जिसके लिए व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सेवा करने के दायित्व के अधीन है  

6. किसी व्यक्ति को संघ के सशस्त्र बलों में सेवा करने या अन्य राष्ट्रीय सेवा करने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-धारा 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, किसी अर्हित व्यक्ति से संघ के सशस्त्र बलों में सेवा या ऐसी अन्य राष्ट्रीय सेवा, जैसी वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, ऐसी अवधि के लिए और ऐसे स्थान पर करने की अपेक्षा कर सकेगी जिसे आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए

7. अनुशासन-(1) संघ के सशस्त्र बलों में राष्ट्रीय सेवा करने के लिए इस अधिनियम के अधीन भर्ती किया गया प्रत्येक अर्हित व्यक्ति ऐसी शर्तों के अधीन जो विहित की जाएं, सशस्त्र बलों की किसी शाखा में, जिसमें वह तत्समय लगा हुआ है, सेवा करने के लिए आबद्ध होगा और ऐसी शाखा के संबंध में तत्समय प्रवृत्त विधियों, नियमों, विनियमों और आदेशों के अधीन होगा  

(2) संघ के सशस्त्र बलों में सेवा से भिन्न किसी राष्ट्रीय सेवा के लिए भर्ती किया गया प्रत्येक अर्हित व्यक्ति, ऐसी शर्तों के अधीन जो विहित की जाएं, किसी ओहदे या पद पर, जिस पर वह तत्समय नियुक्त है, सेवा करने के लिए आबद्ध होगा, और ऐसे ओहदे या पद से संबंधित तत्समय प्रवृत्त सब विधियों, नियमों, विनियमों और आदेशों के अधीन होगा

8. अर्हित व्यक्तियों को निर्मुक्त करने की नियोजक से अपेक्षा करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा, किसी नियोजक से किसी अर्हित व्यक्ति को राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के लिए, ऐसे समय के भीतर जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, निर्मुक्त करने की अपेक्षा कर सकती है   

(2) अर्हित व्यक्ति को राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के लिए निर्मुक्त करने की दशा में, नियोजक, उस अवधि के लिए, जिसके दौरान अर्हित व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीय सेवा की जाए या की गई है, अर्हित व्यक्ति को वेतन, मजदूरी और अन्य उपलब्धियां, यदि कोई हों, संदत्त करने के दायित्व के अधीन नहीं होगा

(3) राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के लिए अर्हित व्यक्ति की नियुक्ति की तारीख को अर्हित व्यक्ति और उसके नियोजक के बीच विद्यमान कोई संविदा तब तक प्रवर्तनीय नहीं होगी जब तक ऐसा अर्हित व्यक्ति राष्ट्रीय सेवा से उन्मुक्त नहीं कर दिया जाता

(4) ऐसे अर्हित व्यक्ति के संबंध में, जिसे राष्ट्रीय सेवा करने के लिए बुलाया गया है, सेवा की किसी संविदा में विनिर्दिष्ट अवधि की संगणना करने में ऐसे अर्हित व्यक्ति द्वारा वास्तव में की गई राष्ट्रीय सेवा की अवधि अपवर्जित कर दी जाएगी

(5) यदि कोई नियोजक उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश का अनुपालन करने में पर्याप्त हेतुक के बिना असफल रहेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा  

9. अन्तरण-केन्द्रीय सरकार, संघ के सशस्त्र बलों की किसी शाखा में राष्ट्रीय सेवा करने वाले अर्हित व्यक्ति को उस बल की किसी अन्य शाखा में या राष्ट्रीय सेवा की किसी अन्य शाखा में या विपर्ययेन अन्तरित करने के लिए, या किसी अर्हित व्यक्ति से ऐसी अपेक्षा करने के लिए उसे समर्थ बनाने के लिए, विनियमों द्वारा उपबन्ध कर सकती है

10. व्यक्तियों द्वारा केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बिना राष्ट्रीय सेवा छोड़ना या उससे उन्मुक्त किया जाना-(1) इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा करने वाला अर्हित व्यक्ति तब तक ऐसी सेवा नहीं छोड़ेगा जब तक कि उसे धारा 17 के अधीन उससे उन्मुक्त नहीं कर दिया जाता  

(2) कोई अर्हित व्यक्ति, जिस पर धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन सूचना या धारा 14 के अधीन भर्ती सूचना तामील की गई है, यदि वह ऐसी सूचना की तामील की तारीख को किसी नियोजन में है तो, इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ही ऐसा नियोजन छोड़ेगा या उससे उन्मुक्त किया जाएगा अन्यथा नहीं :

परन्तु इस उपधारा की कोई भी बात वहां लागू नहीं होगी जहां अर्हित व्यक्ति का नियोजन इस कारण से पर्यवसित कर दिया जाता है कि उक्त व्यक्ति घोर अनधीनता, कार्य से आभ्यासिक अनुपस्थिति या गम्भीर अवचार का दोषी है या किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है  

(3) यदि कोई अर्हित व्यक्ति, जिस पर धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन सूचना या धारा 14 के अधीन भर्ती सूचना तामील की गई है, किसी नियोजन को, जिसमें वह ऐसी सूचना की तामील की तारीख को लगा हुआ है, इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार छोड़कर या उससे उन्मुक्त किया जाकर अन्यथा छोड़ता है या उन्मुक्त किया जाता है तो, यथास्थिति, ऐसा अर्हित व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति, जिसके द्वारा वह उन्मुक्त किया गया है, कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी; और जुर्माने से भी, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा  

अध्याय 3

राष्ट्रीय सेवा के लिए रजिस्ट्रीकरण और भर्ती

11. वे व्यक्ति जिनका रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है-(1) प्रत्येक अर्हित व्यक्ति, यदि वह, इस अधिनियम के प्रारम्भ पर, राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन है, ऐसे प्रारम्भ से नब्बे दिन के भीतर, इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने के लिए आवेदन करेगा  

(2) प्रत्येक अर्हित व्यक्ति जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन है, उस तारीख से, जिसको वह इस प्रकार दायित्व के अधीन हो जाता है, तीस दिन के भीतर इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने के लिए आवेदन करेगा  

12. रजिस्ट्रीकरण-(1) केन्द्रीय सरकार, साधारण आदेश द्वारा, ऐसे अर्हित व्यक्तियों को, जिनका इस अधिनयम के अधीन रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है, निदेश देगी कि वे

() ऐसे स्थान और समय पर, ऐसी रीति से और ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति को, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, अपने बारे में ऐसी विशिष्टियां दें जिनकी आदेश में अपेक्षा की जाए; और

() ऐसे स्थान पर, ऐसी रीति से और ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति को, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने के लिए आवेदन करें  

(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश में, उन अर्हित व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों के लिए जिनका रजिस्ट्रीकरण किया जाना है, विभिन्न उपबन्ध हो सकेंगे और अर्हित व्यक्तियों के ऐसे किसी वर्ग को, जिसके बारे में केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए पर्याप्त विशिष्टियां उन अपेक्षाओं से ही नहीं अन्यथा भी अभिनिश्चित की जा सकती हैं, आदेश की किन्हीं अपेक्षाओं से छूट देने का उपबन्ध किया जा सकेगा    

(3) यदि कोई अर्हित व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश की किसी अपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा  

(4) केन्द्रीय सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि-

() इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने के लिए सम्यक् रूप से आवेदन किए जाने पर, आवेदक का नाम और पता, उन विषयों की विशिष्टियों के साथ जिनके बारे में आवेदक ने उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश के अनुसरण में जानकारी दी है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए रखे गए रजिस्टर में, जो राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर" के नाम से ज्ञात होगा, प्रविष्ट कर दिया गया है; और 

() आवेदक का रजिस्ट्रीकरण हो जाने पर, आवेदक को एक रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र विहित प्ररूप में जारी कर दिया गया है  

(5) राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर में अन्तर्विष्ट जानकारी इस अधिनियम के प्रयोजनों से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में नही लाई जाएगी :

परन्तु इस उपधारा की किसी बात से केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर" में अन्तर्विष्ट कोई जानकारी सांख्यिकीय प्रयोजनों के लिए प्रकट करने से प्रवारित नहीं हो जाएगी   

(6) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) की अपेक्षाओं में से किसी से छूट-प्राप्त वर्ग के किसी अर्हित व्यक्ति का रजिस्ट्रीकरण इस प्रकार करा सकेगी और उसको रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करा सकेगी मानो उस व्यक्ति ने इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने के लिए सम्यक् रूप से आवेदन किया था  

(7) () यदि कोई अर्हित व्यक्ति, जिसका इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है, केन्द्रीय सकरार को, विहित रीति से, यह संसूचित करता है कि वह सेना, वायु सेना या नौसेना सेवा को अधिमान देता है तो यह तथ्य राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर" में अभिलिखित किया जाएगा   

() यदि इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण से छूट-प्राप्त वर्ग का कोई अर्हित व्यक्ति सेना, वायु सेना या नौसेना सेवा को अधिमान्य देता है तो वह केन्द्रीय सरकार को, ऐसी रीति से जैसी वह सरकार विनिर्दिष्ट करे, ऐसा अधिमान प्रज्ञापित करेगा और ऐसा प्रज्ञापन प्राप्त होने पर केन्द्रीय सरकार ऐसे अधिमान्य को राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर" में अभिलिखित कराएगी

(8) () इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर रहने के दौरान यदि किसी अर्हित व्यक्ति के नाम या पत्ते में कोई परिवर्तन होता है या यदि कोई ऐसा व्यक्ति अतिरिक्त शैक्षणिक या वृत्तिक अर्हता या उपाधि प्राप्त कर लेता है, तो वह तत्क्षण अपने नाम या पत्ते में परिवर्तन या अतिरिक्त शैक्षणिक या वृत्तिक अर्हता या उपाधि प्राप्त करने के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार को, विहित रीति से, संसूचित करेगा और उसके साथ ही वह रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, जो उसके पास है, शुद्धि के लिए केन्द्रीय सरकार को वापस कर देगा, और यदि वह अपने नाम या पत्ते में परिवर्तन, या अतिरिक्त शैक्षणिक या वृत्तिक अर्हता या उपाधि की प्राप्ति संसूचित करने में असफल रहेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा  

() केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी अर्हित व्यक्ति के नाम या पत्ते में परिवर्तन या उसके द्वारा अतिरिक्त शैक्षणिक या वृत्तिक अर्हता या उपाधि प्राप्त करने की संसूचना प्राप्त होने पर राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर की प्रविष्टियों में आवश्यक शुद्धियां कराएगी और या तो प्रमाणपत्र में शुद्धियां कराकर प्रमाणपत्र ऐसे व्यक्ति को वापस करा देगी या उसको नया प्रमाणपत्र जारी कराएगी  

(9) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा, उन प्रमाणपत्रों के स्थान पर जो खो गए हों, नष्ट हो गए हों, या विरूपित हो गए हों, विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में नए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए उपबन्ध कर सकेगी

13. राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने की सम्भाव्यता की सूचना-(1) केन्द्रीय सरकार समय-समय पर ऐसे किसी अर्हित व्यक्ति पर जिसका इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है, और यदि वह किसी नियोजन में लगा हुआ है तो उसके नियोजक पर भी, यह कथन करते हुए कि ऐसे व्यक्ति को आगामी बारह मास की अवधि के भीतर किसी भी समय राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया जा सकता है, विहित प्ररूप में, एक लिखित सूचना तामील कर सकेगी

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई सूचना की नियोजक पर तामील होने में लोप होने से या ऐसी सूचना की तामील किसी ऐसे व्यक्ति पर होने से, जो ऐसी सूचना की तामील के समय सम्बद्ध अर्हित व्यक्ति का नियोजक नहीं था, अर्हित व्यक्ति पर उपधारा (1) के अधीन तामील की गई सूचना अविधिमान्य नहीं होगी और राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के अर्हित व्यक्ति के दायित्व पर कोई प्रभाव डालेगी  

(3) केन्द्रीय सरकार, उस अर्हित व्यक्ति पर, जिस पर उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना तामील की गई है, एक लिखित सूचना की तामील कर सकेगी, जिसमें उस व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के लिए अपनी शारीरिक और मानसिक रूप से योग्य होने की, ऐसे प्राधिकारी द्वारा, ऐसे स्थान और ऐसे समय पर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, परीक्षा के लिए उपस्थित रहे

(4) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकरण के अधीन व्यक्तियों की शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए विनियम बना सकेगी और ऐसे विनियम, विशिष्टतया, चिकित्सक और अन्य प्राधिकारी को निम्नलिखित के लिए समर्थ बना सकेंगे-

() ऐसी दशा में, जहां वह एक अवसर में ही परीक्षा पूर्ण करने में असमर्थ है, परीक्षित व्यक्ति को यह निदेश देना कि वह विनिर्दिष्ट समय और स्थान पर अतिरिक्त परीक्षा के लिए उपस्थित रहे;  

                                () परीक्षित व्यक्ति को यह निदेश देना कि वह विशेषज्ञ द्वारा परीक्षा के लिए उपस्थित रहे  

(5) केन्द्रीय सरकार, विनियमों द्वारा, वे प्रवर्ग अवधारित कर सकेगी जिनमें इस धारा के अधीन परीक्षित व्यक्तियों को, उनकी शारीरिक और मानसिक दशा के अनुसार, रखा जाएगा  

(6) यदि कोई अर्हित व्यक्ति उपधारा (3) के अधीन उस पर तामील की गई सूचना की अपेक्षाओं का या उपधारा (4) के अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों या दिए गए निदेशों का अनुपालन करने में असफल रहेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा

(7) वह न्यायालय जो किसी अर्हित व्यक्ति को इस धारा के अधीन किसी अपराध का सिद्धदोष ठहराती है, किसी शास्ति पर, जो उस व्यक्ति पर अधिरोपित की जा सकती है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस व्यक्ति को आदेश दे सकेगी कि वह अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा, अतिरिक्त परीक्षा या किसी विशेषज्ञ द्वारा परीक्षा के लिए, ऐसे स्थान और ऐसे समय पर, जो न्यायालय द्वारा नियत किया जाए, उपस्थित रहे और ऐसे किसी आदेश में इस बात के लिए उपबन्ध हो सकेगा कि ऐसा व्यक्ति उपरोक्त समय तक अभिरक्षा में निरुद्ध रखा जाए और पुलिस अधिकारी द्वारा उस स्थान को और उस समय पर ले जाया जाए :

परन्तु कोई भी व्यक्ति ऐसे किसी आदेश के आधार पर चौबीस घंटे से अधिक के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा

(8) यदि कोई अर्हित व्यक्ति जो शारिरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए उपस्थित होने और अभिरक्षा में निरुद्ध रखे जाने के लिए, किसी न्यायालय द्वारा उपधारा (7) के अधीन आदेश किए जाने पर, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा उस स्थान को और उस समय पर ले जाया जाता है जहां और जिस पर उसकी परीक्षा की जानी है, आदेश के अनुसार अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए उपस्थित नहीं होगा तो उक्त पुलिस अधिकारी, या अन्य कोई पुलिस अधिकारी भी, उसे बिना वारण्ट के गिरफ्तार कर सकेगा  

(9) यदि कोई अर्हित व्यक्ति उपधारा (7) के अधीन किए गए आदेश के अनुसार, अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए उपस्थित होने में असफल रहेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा    

(10) इस धारा के अधीन किसी अर्हित व्यक्ति पर तामील की गई सूचना प्रभावहीन हो जाएगी यदि उस तारीख के पूर्व, जिसको उससे अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए उपस्थित होने की अपेक्षा की गई है, वह व्यक्ति इस अधिनियम के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकरण के अधीन नहीं रहता है

(11) केन्द्रीय सरकार ऐसे चिकित्सक या अन्य प्राधिकारी, विशेषज्ञ या किसी अर्हित व्यक्ति को, जो इस धारा के अधीन शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा कराएगा, ऐसे यात्रा और अन्य भत्तों का, जिसके अन्तर्गत पारिश्रमिक-योग्य समय की हानि के लिए प्रतिकर भी है, ऐसे मापमानों के अनुसार, जैसे विहित किए जाएं, संदाय कर सकेगी

14. राष्ट्रीय सेवा के लिए भर्ती-(1) केन्द्रीय सरकार, ऐसी पूर्विक्ताओं के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के लिए तत्समय दायित्वाधीन किसी अर्हित व्यक्ति पर, जो उसकी शारीरिक और मानसिक दशा की परीक्षा के पश्चात् ऐसी सेवा के योग्य पाया जाए, विहित प्रारूप में एक लिखित सूचना (जिसे इस अधिनियम में भर्ती सूचना" कहा गया है) तामील कर सकेगी, जिसमें यह कथित होगा कि वह संघ के सशस्त्र बलों में से किसी एक में या किसी अन्य सेवा में, जो भर्ती सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, उपस्थित रहे :

परन्तु, इस धारा के अधीन भर्ती सूचना द्वारा उस व्यक्ति से, जिस पर उसकी तामील हुई है, तामील की तारीख के पश्चात् चौदहवें दिन से पूर्वतर किसी दिन या ऐसे पूर्वतर दिन के पहले, जो उसकी प्रार्थना पर अवधारित किया जाए, उपस्थित होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी  

(2) किसी अर्हित व्यक्ति पर तामील की गई भर्ती सूचना प्रभावहीन हो जाएगी यदि उस तारीख के पूर्व, जिसको उसके उपस्थित होने की अपेक्षा की गई है, वह इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन नहीं रहता है

(3) केन्द्रीय सरकार, उन व्यक्तियों को, जिनसे उन पर तामील की गई भर्ती सूचना के अनुसरण में उपस्थित होने की अपेक्षा की गई है, यात्रा और अन्य भत्तों को, ऐसे मापमानों के अनुसार जैसे विहित किए जाएं, संदाय कर सकेगी

(4) यदि उस दिन, जो भर्ती सूचना में ऐसे दिन के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जिसको उस व्यक्ति से, जिससे वह सूचना संबंधित है, राष्ट्रीय सेवा के लिए उपस्थित होने की अपेक्षा की गई है,-

() उससे सम्बन्धित कोई मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रवृत्त है, या 

() राष्ट्रीय सेवा को मुल्तवी करने के लिए उसकी कोई अपील या आवेदन लम्बित है

तो तामील की गई भर्ती सूचना का उस पर कोई प्रभाव नहीं होगा

(5) भर्ती सूचना ऐसी रीति से तामील की जाएगी जैसी विहित की जाए

15. राष्ट्रीय सेवा के लिए भर्ती किए गए व्यक्तियों को संदत्त किया जाने वाला वेतन, मजदूरी, आदि और यात्रा भत्ते-(1) प्रत्येक अर्हित व्यक्ति को, जिसे इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया जाता है या जिसे एक प्रकार की राष्ट्रीय सेवा से अन्य प्रकार की राष्ट्रीय सेवा को अन्तरित किया जाता है, ऐसे वेतन, मजदूरी, भत्ते, पेंशन, निर्योग्यता और मृत्यु प्रतिकर और अन्य फायदों का संदाय किया जाएगा जो विहित किए जाएं :

परन्तु, ऐसे संदाय उन मापमानों से कम लाभदायक मापमानों पर नहीं होंगे जो सरकार के अधीन वैसे ही पदों पर समान अर्हताओं, अनुभव और सेवाकाल वाले व्यक्तियों को अनुज्ञेय हैं  

स्पष्टीकरण-पूर्वगामी परन्तुक के प्रयोजनों के लिए, किसी अर्हित व्यक्ति के इंजीनियर या चिकित्सा व्यवसायी के रूप में अनुभव की अवधि का उसके सेवाकाल के रूप में अर्थ लगाया जाएगा

(2) किसी ऐसे अर्हित व्यक्ति को, जिसे राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया जाए या जिसे एक प्रकार की राष्ट्रीय सेवा से अन्य प्रकार की राष्ट्रीय सेवा में या राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के स्थान से अन्य स्थान को अन्तरित किया जाए, इस अधिनियम के अधीन उसके नियोजन के स्थान तक यात्रा के लिए यात्रा भत्ते का ऐसी दर से संदाय किया जाएगा जो विहित की जाए

(3) ऐसे अर्हित व्यक्ति को जो भर्ती सूचना की उस पर तामील होने की तारीख को किसी अन्य नियोजन में लगा हुआ है या जिसे एक प्रकार की राष्ट्रीय सेवा से अन्य प्रकार की राष्ट्रीय सेवा में या राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के एक स्थान से अन्य स्थान को अन्तरित किया जाए, उसके पूर्वतर नियोजन के स्थान से इस अधिनियम के अधीन उसके नियोजन स्थान तक उसके अभिवहन की अवधि के लिए केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन नियत की गई दर से, वेतन या मजदूरी का (भत्तों सहित) संदाय किया जाएगा   

(4) ऐसे अर्हित व्यक्ति को जो, उस तारीख को जिसको उसे इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया गया था, किसी नियोजन में था, ऐसी सेवा से उसे उन्मुक्त किए जाने पर, इस अधिनियम के अधीन उसके नियोजन के स्थान से पूर्वतर नियोजन के स्थान तक उसके अभिवहन की अवधि के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन नियत की गई दर से, वेतन या मजदूरी का (भत्तों सहितसंदाय किया जाएगा  

(5) ऐसे अर्हित व्यक्ति को, जिसे इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया जाए राष्ट्रीय सेवा की समाप्ति पर उसके पूर्वतर नियोजन के स्थान तक की यात्रा के लिए, या यदि वह इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रथम बार बुलाए जाने के समय नियोजन में नहीं था तो, उसे उसके निवास स्थान तक की यात्रा के लिए, ऐसी दर से यात्रा व्ययों का संदाय किया जाएगा जो विहित की जाए  

16. प्रशिक्षण-अर्हित व्यक्ति से, राष्ट्रीय सेवा की अवधि के दौरान, ऐसी अवधि के लिए जो विहित की जाए, प्रशिक्षण लेने की अपेक्षा की जा सकेगी  

17. उन्मोचन-(1) इस अधिनियम के अधीन भर्ती किया गया प्रत्येक अर्हित व्यक्ति, उस अवधि की समाप्ति पर जिसके लिए उसे भर्ती किया गया था, राष्ट्रीय सेवा से उन्मोचित किए जाने का हकदार होगा और ऐसे व्यक्ति को उस अवधि की समाप्ति के पूर्व, ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित किया जाए या की जाएं राष्ट्रीय सेवा से उन्मोचित किया जा सकेगा   

(2) इस धारा के अधीन उन्मोचित किए जाने वाले व्यक्ति को, यह प्रमाणित करते हुए कि उसको राष्ट्रीय सेवा से उन्मुक्त कर दिया गया है, एक प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में दिया जाएगा जो विहित किया जाए  

(3) इस धारा के अधीन उन्मोचित किए गए व्यक्ति से, ऐसे उन्मोचन के पश्चात् राष्ट्रीय सेवा करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी :

परन्तु वह व्यक्ति जो राष्ट्रीय सेवा की चार वर्ष की अवधि पूरी करने के पूर्व इस धारा के अधीन उन्मोचित कर दिया जाता है, जब तक कि इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने का उसका दायित्व समाप्त नहीं हो जाता, इस अधिनियम के अधीन उतनी अवधि के लिए राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन होगा जो उसके द्वारा की गई राष्ट्रीय सेवा की अवधि को मिलाकर चार वर्ष के समतुल्य होगी

अध्याय 4

राष्ट्रीय सेवा का मुल्तवी किया जाना

18. राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति-(1) केन्द्रीय सरकार एक राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति गठित करेगी जिसमें उसके द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य होंगे  

(2) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होगा जोइकिसी उच्च न्यायालय न्यायाधीश है या रहा है या होने के लिए अर्हित है  

(3) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के सदस्य तीन वर्ष की अवधि तक पद धारण करेंगे और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र होंगे  

(4)  राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति की कार्यवाहियां, ऐसी समिति के गठन में कोई त्रुटि या उसमें कोई रिक्ति होने के कारण अविधिमान्य नहीं होंगी  

(5) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति में होने वाली कोई रिक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी रीति से भरी जाएगी जो वह उचित समझे  

(6) केन्द्रीय सरकार ऐसे क्षेत्रों के लिए, जिन्हें वह ठीक समझे, प्रादेशिक राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समितियां गठित कर सकेगी और ऐसा गठन हो जाने पर ऐसी प्रादेशिक राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समितियों को वे सभी शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार होंगे जो राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के हैं और वे उन्हीं उपबन्धों के अधीन होंगे जो उस समिति को लागू हैं  

(7) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को इस अधिनियम के अधीन किसी अन्वेषण की बाबत अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी और ऐसा अन्वेषण करने के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित विषयों के सम्बन्ध में उसकी वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करने में किसी सविल न्यायालय की होती हैं, अर्थात् :-

() किसी व्यक्ति को समन करना और उसको हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

() साक्ष्य में पेश किए जाने योग्य दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना

() शपथ पर साक्ष्य लेना

() साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;

() ऐसे अन्य विषय, जो विहित किए जाएं

19. कठिनाई के आधार पर मुल्तवी के लिए आवेदन-(1) कोई भी अर्हित व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के लिए तत्समय दायित्वाधीन है और जिस पर धारा 13 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना तामील कर दी गई है, या ऐसे अर्हित व्यक्ति का कोई नियोजक, राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व को मुल्तवी करने के प्रमाणपत्र के लिए इस आधार पर केन्द्रीय सरकार को, विहित रीति से, आवेदन कर सकेगा कि यदि ऐसे अर्हित व्यक्ति को राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाया गया तो इससे असाधारण कठिनाई उत्पन्न होगी; और वह उस आधार पर उसको प्रदान किए गए मुल्तवी प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए विहित रीति से, आवेदन कर सकेगा  

(2) जहां मुल्तवी प्रमाणपत्र के लिए या उसके नवीकरण के लिए कोई आवेदन किया जाता है, वहां केन्द्रीय सरकार उस आवेदन को विनिश्चय के लिए राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को निर्दिष्ट करेगी  

(3) मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए कोई आवेदन केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को केवल तब निर्दिष्ट किया जाएगा जब ऐसा आवेदन धारा 13 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना की तामील की तारीख से साठ दिन के भीतर किया जाए अन्यथा नहीं

परन्तु केन्द्रीय सरकार उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्, मुल्वती प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए किए गए आवेदन को, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को निर्दिष्ट कर सकेगी यदि उन आधारों को, जिन पर आवेदन किया गया है, ध्यान में रखते हुए उसका यह समाधान हो जाए कि आवेदन अयुक्तियुक्त रूप से विलम्ब से नहीं किया गया है

(4) केन्द्रीय सरकार, मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए या उसके नवीकरण के लिए किसी आवेदन की सुनवाई करने में और उस अवधि के विषय में जिसके लिए मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान या नवीकृत किया जा सकेगा, उन सिद्धांतों को, जो लागू किए जाएंगे और उन परिस्थितियों को, जिनको ध्यान में रखा जाएगा या जिनको ध्यान में नहीं रखा जाएगा, विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट कर सकेगी

(5) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति, मुल्तवी प्रमाणपत्र के लिए या उस के नवीकरण के लिए किसी आवेदन पर विचार करने के पश्चात्, उसे मंजूर या नामंजूर कर सकगी  

(6) वह अवधि, जिसमें मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रवृत्त है, उस अवधि में जोड़ दी जाएगी जिसके दौरान वह व्यक्ति, जिसको प्रमाणपत्र प्रदान किया गया था, इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व के अधीन है और तदनुसार इस अधिनियम का उस व्यक्ति के सम्बन्ध में वही प्रभाव होगा मानो तीस वर्ष की आयु के प्रति उसमें जो निर्देश है उसके स्थान पर ऐसी आयु प्रतिस्थापित की गई थी जो तीस वर्ष और उस अवधि का योग है जिसके दौरान

(i) मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रवृत्त था, और

(ii) धारा 14 की उपधारा (4) के खण्ड () के उपबन्धों के कारण भर्ती सूचना प्रभावहीन थी  

(7) यदि कोई अर्हित व्यक्ति या कोई नियोजक मुल्तवी प्रमाणपत्र के लिए कोई आवेदन ऐसे आधार पर करता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह मिथ्या है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है या ऐसे आधार पर करता है जो, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति की राय में तुच्छ है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक ही हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा

20. राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के विनिश्चय के विरुद्ध अपील-(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के विनिश्चय के विरुद्ध अपील उस राज्यक्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले उच्च न्यायालय में होगी जिस राज्यक्षेत्र में मुल्तवी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाला आवेदक स्वेच्छया निवास करता है, कारबार करता है या अभिलाभ के लिए स्वयं कार्य करता है   

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई भी अपील तब तक नहीं होगी, जब तक कि-    

(i) वह राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के विनिश्चय की तारीख से तीस दिन के भीतर की गई हो, और 

(ii) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति यह प्रमाणित कर दे कि मामले में कोई सारवान् विधि प्रश्न अन्तर्वलित है  

(3) जहां राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति ने उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रमाणपत्र देने से इन्कार कर दिया हो, वहां उच्च न्यायालय, यदि उसका यह समाधान हो जाए कि मामले में कोई सारवान् विधि-प्रश्न अन्तर्वलित है, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के विनिश्चय के विरुद्ध अपील की विशेष इजाजत दे सकेगा  

(4) उच्च न्यायालय, अपील की सुनवाई करने के पश्चात्, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति के विनिश्चय की पुष्टि कर सकेगा, उसे उपान्तरित कर सकेगा या उल्ट सकेगा  

21. मुल्तवी प्रमाणपत्र का प्रतिसंहरण-(1) यदि मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रवृत्त रहने के दौरान किसी भी समय केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत हो कि उस अर्हित व्यक्ति की, जिसको प्रमाणपत्र प्रदान किया गया था, या, जहां ऐसा प्रमाणपत्र नियोजक के आवेदन पर प्रदान किया गया था, वहां नियोजक की, परिस्थितियों में किसी परिवर्तिन के कारण प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत कर लिया जाना चाहिए या वह अवधि, जिसके लिए वह प्रदान किया गया था या जिसके लिए वह अन्तिम बार नवीकृत किया गया था, कम कर दी जानी चाहिए, तो केन्द्रीय सरकार, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को आवेदन कर सकेगी, और वह समिति या तो आवेदन को नामंजूर कर सकेगी या प्रमाणपत्र को रद्द कर सकेगी या उसकी अवधि को कम करते हुए उसमें फेरफार कर सकेगी  

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई आवेदन किया जाता है वहां वह व्यक्ति, जिसको प्रश्नगत मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान किया गया था, और, जहां ऐसा प्रमाणपत्र किसी नियोजक के आवेदन पर प्रदान किया था वहां, ऐसा नियोजक, आवेदन के बारे में सुनवाई किए जाने का हकदार होगा और धारा 20 में अन्तर्विष्ट अपील विषयक उपबन्ध ऐसे आवेदन के सम्बन्ध में इस प्रकार लागू होंगे मानो वह मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए किया गया आवेदन था

22. राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व को मुल्तवी करने के अधिकार का निलंबन-(1) केन्द्रीय सरकार, यदि किसी समय उसका यह समाधान हो जाए कि स्थिति की गंभीरता के कारण ऐसा करना आवश्यक है, आदेश द्वारा,-

() आदेश की तारीख को प्रवृत्त सभी मुल्तवी प्रमाणपत्रों को या तो साधारणतः, या अर्हित व्यक्तियों के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग के सम्बन्ध में, रद्द कर सकेगी, और 

() मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए आवेदन करने के किसी अधिकार को और ऐसा प्रमाणपत्र प्रदान करने से इन्कार करने के विरुद्ध अपील करने के किसी अधिकार को, या तो साधारणतः या अर्हित व्यक्तियों के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग के सम्बन्ध में, निराकृत कर सकेगी, और आदेश द्वारा, इस धारा के अधीन प्रवृत्त किसी आदेश में, उस आदेश के पूर्वतन प्रभाव पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, फेरफार कर सकेगी या उसे प्रतिसंहृत कर सकेगी   

(2) जहां उस दिन, जिसको मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने से इन्कार करने के विरुद्ध अपील करने के किसी अधिकार को निराकृत करने वाला कोई आदेश इस धारा के अधीन प्रवृत्त होता है, किसी व्यक्ति द्वारा, जिसको आदेश लागू होता है, कोई अपील कर दी गई है या ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसी अपील करने का समय समाप्त नहीं हुआ है, वहां उस दिन का अवसान हो जाने पर अपील खारिज हुई समझी जाएगी या यह समझा जाएगा कि अपील करने का समय समाप्त हो गया है

अध्याय 5

राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए गए अर्हित व्यक्तियों का पुनःस्थापन

23. पुनःस्थापन-(1) इस धारा में,-

() भूतपूर्व कर्मचारी" से ऐसा अर्हित व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे किसी नियोजक ने राष्ट्रीय सेवा में नियोजन के लिए निर्मुक्त किया था

() भूतपूर्व नियोजक" से ऐसा नियोजक अभिप्रेत है जिसने किसी भूतपूर्व कर्मचारी को, राष्ट्रीय सेवा के लिए उसकी भर्ती से ठीक पूर्व, किसी स्थापन में उसे नियोजित किया था

() भूतपूर्व नियोजन" से ऐसा नियोजन अभिप्रेत है जिसमें कोई भूतपूर्व कर्मचारी राष्ट्रीय सेवा के लिए उसकी भर्ती से ठीक पूर्व नियोजित था  

(2) () भूतपूर्व कर्मचारी, उसकी राष्ट्रीय सेवा की समाप्ति पर, ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, अपने भूतपूर्व नियोजन में पुनःस्थापन के लिए अपने भूतपूर्व नियेाजक को आवेदन कर सकेगा  

() भूतपूर्व नियोजक, खण्ड () में निर्दिष्ट आवेदन प्राप्त होने पर, ऐसा आवेदन प्राप्त होने की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के अवसान के पूर्व, ऐसे कर्मचारी को (जब तक कि भूतपूर्व कर्मचारी या राष्ट्रीय सेवा में नियोजन अवचार के कारण पदच्युत करके समाप्त किया गया हो) पुनःस्थापित करने के लिए बाध्य होगा  

(3) () उपधारा (2)  में निर्दिष्ट आवेदन प्राप्त होने पर यदि भूतपूर्व नियोजक आवेदन को पुनःस्थापित करने से इस आधार पर इंकार कर देता है कि उसकी परिस्थितियां ऐसी बदल गई हैं कि उसके लिए ऐसा करना असम्भव या अयुक्तियुक्त हो गया है या ऐसे भूतपूर्व कर्मचारी को पुनःस्थापित करने के अपने दायित्व का प्रत्याख्यान कर देता है या यह अभ्यावेदन करता है कि भूतपूर्व कर्मचारी को पुनःस्थापित करना उसके लिए असाध्य है, तो वह ऐसा आवेदन प्राप्त होने की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि का अवसान होने के पूर्व, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को, उपधारा (2) में निर्दिष्ट बाध्यता से उसे मुक्त किए जाने के लिए आवेदन करेगा  

() वह भूतपूर्व कर्मचारी, जो उपधारा (2) के अधीन किए गए आवेदन की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर अपने भूतपूर्व नियोजन में पुनःस्थापित नहीं कर दिया जाता, पन्द्रह दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर (जिसकी संगणना उस तारीख से की जाएगी जिसको प्रथम वर्णित पन्द्रह दिन की अवधि समाप्त होती है) राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति से यह अभ्यावेदन कर सकेगा कि उसके भूतपूर्व नियोजक ने उपधारा (2) द्वारा उस पर अधिरोपित बाध्यता का निर्वहन नहीं किया है  

() राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति, खण्ड () में निर्दिष्ट आवेदन या खण्ड () में निर्दिष्ट अभ्यावेदन प्राप्त होने पर, उसके समक्ष प्रस्तुत की गई सभी बातों पर विचार करने के पश्चात्, और उस मामले में ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी वह ठीक समझे आदेश देकर,- 

(i) भूतपूर्व नियोजक को उपधारा (2) में निर्दिष्ट बाध्यता से मुक्त कर सकेगी, या

(ii) भूतपूर्व नियोजक से, भूतपूर्व कर्मचारी को उसके भूतपूर्व नियोजन में पुनःस्थापित करने की अपेक्षा कर सकेगी, या

(iii) भूतपूर्व नियोजक से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह भूतपूर्व कर्मचारी को पुनःस्थापित करने में असफलता या असमर्थता के लिए प्रतिकर के रूप में उस दर से, जिस पर भूतपूर्व नियोजक द्वारा भूतपूर्व कर्मचारी को उसको अन्तिम बार पारिश्रमिक संदेय था, छह मास के पारिश्रमिक के बराबर रकम से अनधिक रकम का संदाय करे

() जहां राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति ने किसी व्यक्ति को उसके भूतपूर्व नियोजन में पुनःस्थापित किए जाने के लिए निदेश दिया है, वहां भूतपूर्व नियोजक ऐसे व्यक्ति को, उपधारा (2) में निर्दिष्ट आवेदन प्राप्त होने की तारीख से, राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति द्वारा विनिर्दिष्ट दर से, वेतन और भत्तों का संदाय करने के लिए बाध्य होगा  

(4) () कोई भूतपूर्व नियोजक, जिसने उपधारा (3) में निर्दिष्ट आधारों में से किसी पर कर्मचारी को पुनःस्थापित करने से इन्कार कर दिया है और जिसने, किसी युक्तियुक्त कारण के बिना, उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को आवेदन करने से लोप किया है या आवेदन करने में असफल रहा है, इस उपधारा के खण्ड () के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा  

() यदि कोई भूतपूर्व नियोजक राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति द्वारा उपधारा (3) के अधीन किए गए किसी आदेश का पालन करने में असफल रहेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा और वह न्यायालय, जिसके द्वारा ऐसा भूतपूर्व नियोजक इस उपधारा के अधीन सिद्धदोष ठहराया जाए, उसे ऐसे व्यक्ति को, जिसको पुनर्नियोजित करने में वह असफल रहा है ऐसी राशि जो ऐसी दर से, जिस पर भूतपूर्व नियोजक द्वारा उसको पारिश्रमिक देय था, छह मास के पारिश्रमिक के बराबर रकम से अनधिक होगी, संदाय करने का आदेश देगा, और संदाय किए जाने के लिए, इस प्रकार अपेक्षित रकम ऐसे वसूलीय होगी मानो वह ऐसे न्यायालय द्वारा                          अधिरोपित जुर्माना है  

(5) जहां कोई भूतपूर्व नियोजक, उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसरण में, अपने भूतपूर्व कर्मचारी को पुनःस्थापित कर लेता है, और तत्पश्चात् ऐसे पुनःस्थापन की तारीख से छह मास के भीतर किसी समय ऐसे भूतपूर्व कर्मचारी का नियोजन समाप्त कर देता है, वहां भूतपूर्व नियोजक, भूतपूर्व कर्मचारी के नियोजन की शर्तों में अन्तर्विष्ट किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, उसका नियोजन समाप्त करते समय भूतपूर्व कर्मचारी को ऐसे पारिश्रमिक के बराबर राशि का, जो वह भूतपूर्व कर्मचारी छह मास की उक्त अवधि के अनवासित भाग के लिए, उसके पुनर्नियोजन के निबन्धनों और शर्तों के अधीन, उपार्जित कर लेता, संदाय करने के दायित्व के अधीन होगा

परन्तु, जहां भूतपूर्व कर्मचारी का नियोजन इस कारण समाप्त किया गया है कि भूतपूर्व कर्मचारी घोर अनधीनता, कार्य से आभ्यासिक अनुपस्थिति या किसी गम्भीर अवचार का दोषी रहा है या किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, वहां भूतपूर्व नियोजक पूर्वोक्त संदाय करने के दायित्व के अधीन नहीं होगा :   

परन्तु यह और कि कोई भूतपूर्व कर्मचारी, जिसका नियोजन पूर्वोक्त किसी भी कारण से उक्त अवधि के भीतर समाप्त किया गया है, मामले को राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति को निर्दिष्ट कर सकेगा और वह समिति उस पर सम्यक् विचार करने के पश्चात् यह विनिश्चित करेगी कि नियोजक इस उपधारा के अधीन पूर्वोक्त दायित्व के अधीन है या नहीं; और ऐसे विनिश्चय अन्तिम होगा और पक्षकारों पर आबद्धकर होगा

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के अधीन संदाय के लिए अपेक्षित कोई राशि उस रकम के, यदि कोई हो, अतिरिक्त होगी, जो नियोजक, नियोजन की शर्तों के अधीन, भूतपूर्व कर्मचारी का नियोजन सूचना के बिना समाप्त करने के कारण उसे संदत्त करने के दायित्व के अधीन है

(6) भूतपूर्व नियोजक के नाम, गठन या स्वरूप में किसी परिवर्तन से ऐसे भूतपूर्व कर्मचारी के, जो राष्ट्रीय सेवा में नियोजन से निर्मुक्त हो गया है, पुनःस्थापन के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

(7) () वह उपजीविका जिसमें और वे निबन्धन तथा शर्तें जिनके अधीन किसी अर्हित व्यक्ति को राष्ट्रीय सेवा पूरी कर लेने के पश्चात् पुनःस्थापित किया जा सकेगा, उनसे कम अनुकूल नहीं होंगी जो उसे राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के कारण व्यवधान पड़ने की दशा में लागू होतीं  

() भूतपूर्व कर्मचारी के पुनःस्थापन के निबन्धनों और शर्तों को अवधारित करते समय, ऐसे कर्मचारी द्वारा राष्ट्रीय सेवा में उसके नियोजन के अनुक्रम में अर्जित अतिरिक्त कौशल और अनुभव को ध्यान में रखा जाएगा  

24. राष्ट्रीय सेवा करने के लिए अपेक्षित अर्हित व्यक्तियों के कतिपय अधिकारों का परिरक्षण-यदि इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय सेवा करने के लिए अपेक्षित किसी अर्हित व्यक्ति के, उस नियोजन के सम्बन्ध में, जिसका वह त्याग करता है, कर्मचारियों के फायदे के लिए बनाई गई किसी भविष्य-निधि या अन्य स्कीम के अधीन कोई अधिकार है, तो जब तक वह राष्ट्रीय सेवा में रहता है तब तक, और यदि उसे पुनःस्थापित कर दिया जाता है तो इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन ऐसे पुनःस्थापन तक, ऐसी निधि या स्कीम के संबंध में उसके अधिकार बने रहेंगे जो विहित किए जाएं

अध्याय 6

अन्य अपराध और शास्तियां

25. मिथ्या कथन और कूटरचना-(1) यदि कोई अर्हित व्यक्ति-

() जिस पर इस अधिनियम के अधीन भर्ती सूचना तामील की गई है और जिसके सम्बन्ध में कोई मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रवृत्त नहीं है या राष्ट्रीय सेवा को मुल्तवी करने के लिए जिसका कोई आवेदन या अपील लम्बित नहीं है, ऐसी सेवा, जिसकी उससे ऐसी सूचना द्वारा अपेक्षा की जाती है, करने में असफल रहेगा या लोप करेगा, या

() राष्ट्रीय सेवा प्रारम्भ करने के पश्चात् उस सेवा को, धारा 17 के अधीन उन्मोचन अभिप्राप्त किए बिना छोड़ देगा,

तो वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा   

(2) कोई व्यक्ति जो,-

() इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कोई जानकारी देने में, जानते हुए या लापरवाही से ऐसा कथन करेगा जिसका कोई महत्वपूर्ण अंश मिथ्या है या जिसके सत्य होने में उसे विश्वास नहीं है, या 

() (i) इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए किसी प्रमाणपत्र को प्रवंचन करने के आशय से कूटरचित करेगा या प्रयोग में लाएगा या किसी अन्य व्यक्ति को देगा या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग में लाने देगा, या 

(ii) कोई ऐसा दस्तावेज बनाएगा या अपने पास कोई ऐसा दस्तावेज रखेगा जो इस प्रकार जारी किए गए किसी प्रमाणपत्र से इतना अधिक मिलता जुलता है कि उससे प्रवंचन प्रकल्पित है,

वह तीन वर्ष से अनधिक अवधि के कारावास से, या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

26. अपराधों के बारे में साधारण उपबंध-कोई अर्हित व्यक्ति जो इस अधिनियम के किसी ऐसे उपबन्ध का उल्लंघन करेगा जिसके उल्लंघन के लिए इस अधिनियम में पृथक्तः कोई शास्ति विनिर्दिष्ट नहीं की गई है, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किए जाएगा :

परन्तु इस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध के लिए किन्हीं कार्यवाहियों में अभियुक्त के लिए यह साबित करना कि वह, ऐसी परिस्थितियों के कारण जो उसके नियन्त्रण के बाहर थीं, इस अधिनियम के उपबन्धों का अनुपालन नहीं कर सका, एक प्रतिवाद होगा

27. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम या इसके अधीन दिए गए किसी आदेश के किसी उपबन्ध का किसी कम्पनी द्वारा उल्लंघन किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस उल्लंघन के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक था और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी  

 (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा   

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

() कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है, और उसके अन्तर्गत कोई फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; या 

() फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है   

अध्याय 7

प्रकीर्ण

28. विश्वविद्यालयों, आदि द्वारा जानकारी का दिया जाना-प्रत्येक विश्वविद्यालय, या किसी विश्वविद्यालय, विद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था का प्रबन्ध करने वाले अन्य व्यक्तियों का यह कर्तव्य होगा कि वे केन्द्रीय सरकार को, उसके निवेदन पर, ऐसे व्यक्तियों के बारे में इंजीनियरी, प्रौद्योगिकी, आयुर्विज्ञान या शल्यचिकित्सा में शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, या जिन्होंने शिक्षण प्राप्त कर लिया है, ऐसी जानकारी दे जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे तथा जो उसके कब्जे में हो या जो उसे युक्तियुक्त रूप से उपलभ्य हो  

29. जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जानकारी का दिया जाना-प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट का यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के भीतर अर्हित व्यक्तियों के बारे में ऐसी जानकारी, जो विहित की जाए, तथा उसके कब्जे में हो, राज्य सरकार को दे, और प्रत्येक राज्य सरकार का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्य के अर्हित व्यक्तियों के बारे में, वह सब जानकारी, जो उसके कब्जे में है, केन्द्रीय सरकार को दे  

30. ऋणों की पूर्विकता-प्रेसिडेन्सी नगर दिवाला अधिनियम, 1909 (1909 का 3), प्रान्तीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5), कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन देय प्रतिकर को अप्रतिभूत ऋणों पर पूर्विकता होगी  

31. अपराधों का संक्षेपतः विचारण-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय प्रत्येक अपराध का संक्षेप्तः विचारण किया जाएगा  

32. अपराधों का विचारण करने की अधिकारिता-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर न्यायालय नहीं करेगा   

33. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-(1) इस अधिनियम, या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों या आदेशों, के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध होगी  

(2) इस अधिनियम, या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों या आदेशों, के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के कारित होने वाले या कारित होने की संभाव्यता रखने वाले नुकसान के लिए कोई भी वाद, या अन्य विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध होगी  

34. कठिनाइयों का निराकरण-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसा आदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत हो और जो उस कठिनाई के निराकरण के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक प्रतीत हो :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) उपधारा (1) के अधीन दिया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा और ऐसे आदेश को धारा 38 के उपबन्ध इस प्रकार लागू होंगे मानो वह इस अधिनियम के अधीन बनाया गया नियम है  

35. प्रत्यायोजन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि वे सब शक्तियां या उनमें से कोई, जो इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य है, ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हो, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, किसी राज्य सरकार द्वारा या अन्य किसी प्राधिकरण द्वारा भी, जो केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में हो, प्रयोक्तव्य होंगी

36. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिऐ नियम अधिसूचना द्वारा बना सकेगी  

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-

() वे सिद्धांत जिनके अनुसार राष्ट्रीय सेवा के लिए व्यक्तियों का बुलाया जाना शासित होगा;

() राष्ट्रीय सेवा रजिस्टर का प्ररूप और अन्तर्वस्तु

() वह प्ररूप जिसमें रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा

() संघ के सशस्त्र बलों की किसी शाखा के लिए अधिमान अधिसूचित करने की रीति

() इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी अर्हित व्यक्ति के नाम या पते में परिवर्तन, या उसके द्वारा कोई शैक्षणिक या वृत्तिक अर्हता या उपाधि का अर्जन, अधिसूचना करने की रीति

() खो गए, नष्ट हो गए या विरूपति हो गए प्रमाणपत्रों के स्थान पर नए प्रमाणपत्र जारी करने के लिए परिस्थतियां;  

() शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा के लिए सूचना का प्ररूप और अन्तर्वस्तु

() वह मापमान जिसके अनुसार चिकित्सक या अन्य प्राधिकारी या विशेषज्ञ को अथवा किसी ऐसे अर्हित व्यक्ति को जिसकी शारीरिक और मानसिक योग्यता की कोई परीक्षा ली जाए यात्रा और अन्य भत्ते संदत्त किए जा सकेंगे और वह मापमान जिसके अनुसार पारिश्रमिक योग्य समय की हानि के लिए प्रतिकर संदत्त किया जा सकेगा

() वे पूर्विकताएं जिनके अनुसार अर्हित व्यक्ति राष्ट्रीय सेवा के लिए भर्ती किए जा सकेंगे

() भर्ती सूचना का प्रारूप और अन्तर्वस्तु और उसकी तामील की रीति

() राष्ट्रीय सेवा करने वाले व्यक्तियों को अनुज्ञेय वेतन, मजदूरी, भत्ते, पेंशन, निःशक्तता प्रतिकर और मृत्यु प्रतिकर तथा अन्य वित्तीय प्रसुविधाओं के मापमान

() इस अधिनियम के अधीन संदाय के लिए अपेक्षित यात्रा-भत्तों के मापमान

() वह प्राधिकारी जिसके द्वारा और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए राष्ट्रीय सेवा से समय से पूर्व उन्मोचन किया जा सकेगा

() उन्मोचन प्रमाणपत्र का प्ररूप

() राष्ट्रीय सेवा के लिए बुलाए जाने के दायित्व की मुल्तवी के प्रमाणपत्र के लिए या उसके नवीकरण के लिए आवेदन करने की रीति और वह अवधि जिसके भीतर नवीकरण के लिए आवेदन किया जाना चाहिए

() राष्ट्रीय सेवा में नियोजन से निर्मुक्त किए गए व्यक्तियों के पुनःस्थापना की शर्तें और उससे सम्बन्धित विषय;

() राष्ट्रीय सेवा में नियोजन से निर्मुक्त किए गए अर्हित व्यक्तियों के पुनःस्थापन से इन्कार या प्रत्याख्यान किए जाने अथवा ऐसे पुनःस्थापन के असाध्य होने का अभ्यावेदन किए जाने की दशा में राष्ट्रीय सेवा (कठिनाई) समिति द्वारा की जाने वाली अतिरिक्त जांच

() राष्ट्रीय सेवा करने वाले अर्हित व्यक्तियों के भविष्य-निधि, आदि के अधिकारों का परिरक्षण

() अर्हित व्यक्तियों से सम्बन्धित जानकारी जो प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट को राज्य सरकार को देनी होगी;   

() कोई अन्य विषय, जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाए  

37. विनियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम, जो इस अधिनियम से असंगत हों, बना सकेगी, अर्थात् :-

() किसी अर्हित व्यक्ति को संघ के सशस्त्र बलों की किसी शाखा में या राष्ट्रीय सेवा की किसी अन्य शाखा में अंतरण के लिए या उससे ऐसे अन्तरण की अपेक्षा करने के लिए समर्थ बनाना

() इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के अधीन अर्हित व्यक्तियों की शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा करना

() उन प्रवर्गों का अवधारण करना जिनमें उन अर्हित व्यक्तियों को, जिनकी शारीरिक और मानसिक योग्यता की परीक्षा की जा चुकी है, उनकी शारीरिक या मानसिक, या दोनों दशाओं के अनुसार रखा जाएगा

() मुल्तवी प्रमाणपत्र प्रदान करने का या उसके नवीकरण के लिए आवेदन की सुनवाई में लागू किए जाने वाले सिद्धांत और विचारणीय परिस्थितियां विनिर्दिष्ट करना

() वह अवधि विनिर्दिष्ट करना जिसके लिए मुल्तवी प्रमाणपत्र मंजूर या नवीकृत किया जा सकेगा

() कोई अन्य विषय जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन विनियम बनाया जाना है या बनाया जाए  

38. नियमों और विनियमों का राजपत्र में अधिसूचित किया जाना और नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

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