विशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988
(1988 का अधिनियम संख्यांक 34)
[2 जून, 1988]
भारत के प्रधानमंत्री और [भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों और
उनके अव्यवहित कुटुंब के सदस्यों] के लिए निकट सुरक्षा
की व्यवस्था करने के लिए संघ के एक सशस्त्र
बल के गठन और विनियमन के लिए
तथा उससे संबंधित विषयों के
लिए उपबंध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ग्रुप के सदस्य के संबंध में, सक्रिय कर्तव्य" से उस अवधि के दौरान ऐसे सदस्य के रूप में कोई कर्तव्य अभिप्रेत है जिस अवधि में वह भारत के प्रधानमंत्री और उसके अव्यवहित कुटुंब [या किसी पूर्व प्रधानमंत्री और उसके अव्यवहित कुटुंब] के सदस्यों की, वे जहां भी हों, शारीरिक संरक्षा करने के लिए पदस्थ है ;
(ख) निदेशक" से धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया गया ग्रुप का निदेशक अभिप्रेत है;
(ग) ग्रुप" से धारा 4 के अधीन गठित विशेष संरक्षा ग्रुप अभिप्रेत है;
(घ) ग्रुप का सदस्य" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो विहित प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व या पश्चात् ग्रुप में नियुक्त किया गया है;
(ङ) अव्यवहित कुटुंब के सदस्य" से पत्नी, पति, संतान और माता-पिता अभिप्रेत हैं;
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(छ) निकट सुरक्षा" से सड़क, रेल, वायुयान, जलयान या पैदल या परिवहन के किसी अन्य साधन से यात्रा के दौरान, सामीप्य से व्यवस्थित संरक्षा अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत समारोह, कार्यक्रम, निवास या विराम के स्थान हैं और इसमें प्रधानमंत्री या उसके अव्यवहित कुटुंब के सदस्यों के घेरादल, पार्थक्य घेरा, विसंक्रमित घेरा, और भाषण-मंच तथा पहुंच नियंत्रण भी समाविष्ट होंगे;
(ज) उन सभी शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, किंतु भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में परिभाषित हैं वही अर्थ होंगे, जो उनके उस संहिता में हैं ।
3. सदस्यों का इस अधिनियम के अधीन होना-ग्रुप का प्रत्येक सदस्य इस अधिनियम के अधीन होगा, चाहे वह कहीं भी हो ।
4. ग्रुप का गठन- [(1) (i) प्रधानमंत्री और उसके अव्यवहित कुटुंब के सदस्यों की, और
[(ii) किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री या उसके अव्यवहित कुटुम्ब के सदस्यों की-
(क) उस तारीख से जिसको भूतपूर्व प्रधानमंत्री, पद पर नहीं रह जाता है, एक वर्ष की अवधि तक और एक वर्ष से परे केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा विनिश्चित धमकी के स्तर पर आधारित अवधि तक, तथापि, यह कि निकट सुरक्षा की आवश्यकता के संबंध में किए गए दो क्रमवर्ती निर्धारणों के बीच बारह मास से अधिक का समय व्यतीत न हुआ हो :
परंतु केन्द्रीय सरकार, धमकी के स्तर का विनिश्चय करते समय, अन्य बातों के साथ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगी, अर्थात् :-
(अ) धमकी किसी उग्रवादी या आतंकवादी संगठन द्वारा अथवा किसी अन्य स्रोत से दी गई है; और
(आ) धमकी गंभीर और लगातार बने रहने वाली प्रकृति की है;
(ख) उनकी विदेश यात्रा के दौरान, निकट सुरक्षा की हकदारी और केन्द्रीय सरकार द्वारा यथानिर्धारित धमकी के स्तर के आधार पर ।]
(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) कोई भूतपूर्व प्रधानमंत्री या प्रधानमंत्री के या किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री के अव्यवहित कुटुंब का कोई सदस्य ऐसी निकट सुरक्षा से इंकार कर सकेगा ;
(ख) जहां किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री से निकट सुरक्षा, चाहे विशेष सरंक्षा ग्रुप (संशोधन) अधिनियम, 1999 (1999 का 35) के प्रारंभ से पूर्व या उसके पश्चात् हटा ली जाती है, वहां ऐसी निकट सुरक्षा ऐसे भूतपूर्व प्रधानमंत्री के अव्यवहित कुटुंब के सदस्यों से भी हट जाएगी :
परंतु जहां किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री के अव्यवहित कुटुंब के किसी सदस्य के सामने खतरे का स्तर निकट सुरक्षा या किसी अन्य सुरक्षा को न्यायसंगत बनाता है वहां ऐसी सुरक्षा उस सदस्य को प्रदान की जाएगी ।]
(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ग्रुप का गठन ऐसी रीति में किया जाएगा जो विहित की जाए और ग्रुप के सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
(3) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति या संघ के किसी अन्य सशस्त्र बल का कोई सदस्य केंद्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, ऐसी अवधि के लिए जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, ग्रुप में नियुक्त किया जा सकेगा, और इस प्रकार नियुक्त किया गया व्यक्ति, अपनी नियुक्ति की अवधि के दौरान, ग्रुप का सदस्य समझा जाएगा, तथा इस अधिनियम के उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे व्यक्ति या सदस्य को लागू होंगे ।
5. नियंत्रण, निदेशन आदि-(1) ग्रुप का साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण केंद्रीय सरकार में निहित होगा और वही उसका प्रयोग करेगी और उसके तथा इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ग्रुप का समादेशन और पर्यवेक्षण किसी ऐसे अधिकारी में निहित होगा, जिसे केंद्रीय सरकार ग्रुप के निदेशक के रूप में नियुक्त करे ।
(2) इस अधिनियम के अधीन निदेशक के कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी सहायता के लिए उतने [महानिरीक्षक, उप-महानिरीक्षक, सहायक महानिरीक्षक] और अन्य अधिकारी होंगे, जितने केंद्रीय सरकार नियुक्त करे ।
6. भारत के बाहर सेवा करने का दायित्व-ग्रुप का प्रत्येक सदस्य भारत के किसी भाग में तथा भारत के बाहर भी सेवा करने के दायित्वाधीन होगा ।
7. ग्रुप के सदस्यों का सदैव सक्रिय कर्तव्य पर रहना-ग्रुप का प्रत्येक ऐसा सदस्य जो छुट्टी पर नहीं है या निलंबनाधीन नहीं है, इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए सदैव सक्रिय कर्तव्य पर रहेगा और उसे किसी भी समय ऐसी किसी रीति में नियोजित या अभिनियोजित किया जा सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन ग्रुप के कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों से संगत हो ।
8. पद त्याग और पद से अलग होना-विहित प्राधिकारी की लिखित पूर्व अनुज्ञा के बिना ग्रुप के किसी सदस्य को,-
(क) उस अवधि के दौरान जिसके लिए वह वचनबद्ध है, अपना पद त्याग करने की; या
(ख) अपने पद के सभी या उनमें से किन्हीं कर्तव्यों से अलग होने की, स्वतंत्रता नहीं होगी ।
9. सेवा की अवधि-ग्रुप का प्रत्येक सदस्य राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
10. संगम बनाने, वाक् स्वातंत्र्य आदि के अधिकार के संबंध में निबंधन-(1) ग्रुप का कोई सदस्य केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना :-
(क) किसी व्यापार संघ, श्रम संघ, राजनीतिक संगम या व्यापार संघों, श्रम संघों या राजनीतिक संगमों के किसी वर्ग का न तो सदस्य होगा और न उनसे किसी प्रकार से सहयोजित होगा; या
(ख) किसी ऐसी सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन का, जो केवल सामाजिक, आमोद-प्रमोदात्मक या धार्मिक स्वरूप का नहीं है, न तो सदस्य होगा और न उससे किसी प्रकार से सहयोजित होगा; या
(ग) प्रेस से न तो पत्र-व्यवहार करेगा और न कोई पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज प्रकाशित करेगा, न प्रकाशित कराएगा, किंतु उस दशा में ऐसा कर सकेगा जबकि ऐसा पत्र-व्यवहार या प्रकाशन उसके कर्तव्यों के सद्भावपूर्वक निर्वहन के लिए है या विशुद्धतः साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति का है या विहित प्रकृति का है ।
स्पष्टीकरण-यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन खंड (ख) के अधीन विशुद्धतः सामाजिक, आमोद-प्रमोदात्मक या धार्मिक स्वरूप का है या नहीं अथवा कोई पुस्तक, पत्र या दस्तावेज खंड (ग) के अधीन उसके कर्तव्यों के सद्भाविक निर्वहन के लिए पत्र-व्यवहार या प्रकाशन है या नहीं अथवा विशुद्धतः साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति या विहित प्रकृति का है अथवा नहीं तो उस पर केंद्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(2) ग्रुप का कोई सदस्य ऐसे किसी अधिवेशन में न तो भाग लेगा और न उसे संबोधित ही करेगा, न ऐसे किसी प्रदर्शन में भाग लेगा जो किन्हीं राजनीतिक प्रयोजनों से या ऐसे अन्य प्रयोजनों से जो विहित किए जाएं, व्यक्तियों के किसी निकाय द्वारा आयोजित है ।
11. सेवा की समाप्ति-विहित प्राधिकारी, लिखित आदेश द्वारा लोक हित में ग्रुप के किसी सदस्य की नियुक्ति को समाप्त कर सकेगा और सेवा की ऐसी समाप्ति को सेवोन्मुक्ति मात्र समझा जाएगा और यह पदच्युति या पद से हटाए जाने की कोटि में नहीं आएगा ।
12. अपील-(1) ग्रुप का कोई सदस्य जो धारा 11 के अधीन किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर ऐसे बोर्ड को अपील कर सकेगा जो केंद्रीय सरकार द्वारा गठित किया जाए ।
(2) बोर्ड ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनेगा जो विहित किए जाएं ।
(3) बोर्ड का विनिश्चय अंतिम होगा और उसे किसी न्यायालय या अधिकरण में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
(4) बोर्ड को अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी ।
13. ग्रुप के सदस्यों को शक्तियों और कर्तव्यों का प्रदान किया जाना-केंद्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि ग्रुप का कोई सदस्य इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं ऐसी शक्तियों का प्रयोग या ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेगा जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
14. ग्रुप को सहायता देना-केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के प्रत्येक मंत्रालय और विभाग, प्रत्येक भारतीय मिशन, प्रत्येक स्थानीय या अन्य प्राधिकारी या प्रत्येक सिविल या सैनिक प्राधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि जब कभी भी ग्रुप के निदेशक या सदस्य को सौंपे गए कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को अग्रसर करने के लिए ऐसे निदेशक या सदस्य द्वारा ऐसा करने की अपेक्षा की जाए तो वह उसकी सहायता में कार्य करे ।
15. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के या तद्धीन जारी किए गए किसी आदेश या बनाए गए किसी नियम के या ऐसे किसी नियम के अधीन जारी किए गए किसी आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित या विलोपित किसी बात के लिए ग्रुप या उसके किसी सदस्य के विरुद्ध, जिसे इस अधिनियम के या तद्धीन जारी किए गए किसी आदेश या बनाए गए किसी नियम के अधीन शक्तियां प्रदान की गई हैं या जिस पर कर्तव्य अधिरोपित किए गए हैं, कोई वाद, अभियोजन या अन्य कार्यवाही नहीं होगी ।
16. नियम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी विषय के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) ग्रुप का गठन करने की रीति और धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन इसके सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तें;
(ख) धारा 8, धारा 10 की उपधारा (1) और धारा 11 के अधीन विहित किए जाने वाले प्राधिकारी;
(ग) धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन पत्रव्यवहार या प्रकाशन की प्रकृति;
(घ) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन राजनैतिक प्रयोजनों से भिन्न वे प्रयोजन, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन कोई व्यक्ति किसी अधिवेशन में भाग नहीं लेगा, या उसे संबोधित नहीं करेगा या किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लेगा;
(ङ) वे व्यक्ति जो धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के सदस्य होंगे;
(च) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जा सकेगा ।
17. आदेशों और नियमों का रखा जाना-धारा 13 के अधीन जारी किया गया प्रत्येक आदेश और धारा 16 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम जारी किए जाने या बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु ऐसे आदेश या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
18. विद्यमान विशेष संरक्षा ग्रुप के संबंध में उपबंध-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान विशेष संरक्षा ग्रुप को इस अधिनियम के अधीन गठित किया गया ग्रुप समझा जाएगा ।
(2) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान विशेष संरक्षा ग्रुप के सदस्य को इस अधिनियम के अधीन उस रूप में नियुक्त किया गया समझा जाएगा ।
(3) इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व उपधारा (1) में निर्दिष्ट विशेष संरक्षा ग्रुप के गठन के संबंध में और उसमें नियुक्त किसी व्यक्ति के संबंध में, की गई कोई बात या कार्रवाई विधि में वैसे ही विधिमान्य और प्रभावी होगी मानो वह बात या कार्रवाई इस अधिनियम के अधीन की गई थी

