मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986
(1986 का अधिनियम संख्यांक 10)
[20 मार्च, 1986]
मसालों के निर्यात के विकास के लिए और इलायची उद्योग के
नियंत्रण के लिए, जिसके अन्तर्गत इलायची की खेती
का नियंत्रण है, और उससे संबंधित विषयों
के लिए बोर्ड का गठन करने का
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) बोर्ड" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित मसाला बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) इलायची" से इलायची के पौधे का फल अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत हरी इलालयी, विरंजित इलायची, विरंजेय सफेद इलायची, धूप में सुखाई गई इलायची, इलायची के बीज, चूर्णित इलायची और इलायची से निष्कासित तेल भी है ;
(ग) इलायची का पौधा" से इलेटेरिया कार्डमोमम मैटन, अमोमम सुबुलेटम राक्सब और कोई अन्य पौधा अभिप्रेत है जिसे बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए इलायची के पौधे के रूप में घोषित करे ;
(घ) प्रमाणपत्र" से धारा 12 के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र अभिप्रेत है ;
(ङ) व्यवहारी" से मसालों का व्यवहारी अभिप्रेत है ;
(च) सम्पदा" से एक यूनिट के रूप में प्रशासित ऐसा कोई क्षेत्र अभिप्रेत है जिसमें इलायची के पौधों से रोपित भूमि है ;
(छ) निर्यात" और आयात" से भूमि, समुद्र और वायु मार्ग द्वारा क्रमशः भारत से बाहर ले जाना या भारत के भीतर लाना अभिप्रेत है ;
(ज) विनिर्माता" से मसालों का विनिर्माता अभिप्रेत है ;
(झ) सदस्य" से धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन नियुक्त बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है ;
(ञ) स्वामी" के अन्तर्गत इलायची के पौधों से रोपित किसी भूमि के संबंध में निम्नलिखित भी आते हैं,-
(i) स्वामी का कोई अभिकर्ता ; और
(ii) भूमि का वास्तविक कब्जा रखने वाला कोई बंधकदार, पट्टाधारी या अन्य व्यक्ति ;
(ट) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ठ) रजिस्ट्रीकृत सम्पदा" से ऐसी संपदा अभिप्रेत है जिसके संबंध में कोई स्वामी धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत है और इसके अन्तर्गत ऐसी कोई सम्पदा भी है जिसके संबंध में स्वामी को उस उपधारा के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत किए जाने की अपेक्षा है ;
(ड) रजिस्ट्रीकृत स्वामी" से किसी रजिस्ट्रीकृत सम्पदा का ऐसा स्वामी अभिप्रेत है जो धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया गया है या किया जाता है या किए जाने के लिए अपेक्षित है ; और
(ढ) मसाला" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट मसाला अभिप्रेत है :
परन्तु केन्द्रीय सरकार, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि लोक हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची में किसी अन्य मसाले को जोड़ सकती है या उसमें से किसी मसाले का लोप कर सकती है ।
अध्याय 2
मसाला बोर्ड
3. बोर्ड का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, मसाला बोर्ड के नाम से ज्ञात एक बोर्ड का गठन करेगी ।
(2) बोर्ड, पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) बोर्ड बत्तीस से अनधिक इतने सदस्यों से मिलकर बनेगा जो विहित किए जाएं, और जब तक कि इस निमित्त बनाए गए नियमों में अन्यथा उपबन्ध न किया जाए, बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) एक अध्यक्ष ;
(ख) संसद् के तीन सदस्य जिनमें से दो लोक सभा द्वारा और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे ;
(ग) तीन सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार के क्रमश :-
(i) वाणिज्य ;
(ii) कृषि; और
(iii) वित्त, से संबंधित मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करेंगे ;
(घ) छह सदस्य, जो मसाले उगाने वालों का प्रतिनिधित्व करेंगे ;
(ङ) ग्यारह सदस्य, जो मसालों के निर्यातकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करेंगे ;
(च) तीन सदस्य, जो मसाला उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों का प्रतिनिधित्व करेंगे ;
(छ) पांच सदस्य, जिनमें से-
(i) कोको, सुपारी और मसाला विकास निदेशालय, कालीकट ;
(ii) भारतीय पैकेज संस्थान, मुम्बई ;
(iii) केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिक और अनुसंधान संस्थान, मैसूर ;
(iv) प्रादेशिक अनुसंधान प्रयोगशाला, त्रिवेन्द्रम ; और
(v) केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगडे, में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सदस्य होगा ।
(4) बोर्ड के सदस्य का पद उसके धारक को संसद् के किसी सदन का सदस्य चुने जाने या होने से निरर्हित नहीं करेगा ।
(5) सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
(6) अध्यक्ष, बोर्ड के अधिवेशनों में अध्यक्षता करने के अतिरिक्त बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित की जाएं और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।
(7) बोर्ड अपने सदस्यों में से एक को उपाध्यक्ष निर्वाचित करेगा जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो उसे अध्यक्ष द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(8) बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इसी कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि-
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ;
(ख) बोर्ड के सदस्यों के रूप में कृत्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है ;
(ग) बोर्ड की प्रक्रिया में ऐसी कोई अनियमितता है जो मामले के गुणागुण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती ।
4. सचिव और अन्य अधिकारी-(1) बोर्ड, सचिव और ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यक समझता है ।
(2) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी जैसी विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।
5. सलाहकार समितियां-(1) बोर्ड इस निमित्त बनाए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, समय-समय पर, ऐसी समितियों का गठन कर सकेगा जो उसके कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।
(2) उपधारा (1) के अधीन गठित प्रत्येक समिति उतने व्यक्तियों से मिलकर बनेगी जो बोर्ड ठीक समझे ।
6. इलायची बोर्ड और मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् की आस्तियों और दायित्वों का बोर्ड को अन्तरण-(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही,-
(क) ऐसे प्रारम्भ से ठीक पूर्व इलायची बोर्ड और मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् में निहित सभी सम्पत्ति और अन्य आस्तियां बोर्ड में निहित हो जाएंगी ;
(ख) इलायची बोर्ड या मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् के प्रयोजन के लिए या उसके सम्बन्ध में, ऐसे प्रारम्भ से ठीक पूर्व इलायची बोर्ड या मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋणों, बाध्यताओं और दायित्वों, की गई सभी संविदाओं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी विषयों और बातों के बारे में यह माना जाएगा कि वे बोर्ड द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई और किए जाने के लिए वचनबद्ध हैं ;
(ग) ऐसे प्रारम्भ से ठीक पूर्व इलायची बोर्ड या मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् को देय सभी धनराशियां बोर्ड को देय मानी जाएंगी ;
(घ) ऐसे सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां जो ऐसे प्रारम्भ से ठीक पूर्व इलायची बोर्ड या मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित की गई हैं या की जा सकती थीं, बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी ; और
(ङ) ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व इलायची बोर्ड या मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् के अधीन कोई पद धारण करने वाला प्रत्येक कर्मचारी ऐसे प्रारम्भ पर बोर्ड के अधीन अपना पद या सेवा, पेंशन, उपदान और अन्य विषयों के संबंध में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ धारण करेगा जो उसे तब अनुज्ञेय होते यदि ऐसा विनिधान न हुआ होता; और वह ऐसा तब तक करता रहेगा जब तक कि बोर्ड के अधीन उसका नियोजन सम्यक् रूप से पर्यवसित नहीं कर दिया जाता है या जब तक उसका पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें बोर्ड द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती हैं ।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड द्वारा किसी कर्मचारी का इस धारा के अधीन अपनी सेवा में समामेलन ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या किसी विधि के अधीन, किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा ।
7. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड-
(i) मसालों के निर्यात का विकास, संवर्धन और विनियमन कर सकेगा ;
(ii) मसालों के निर्यात के लिए प्रमाणपत्र दे सकेगा और उसके लिए दलालों को रजिस्ट्रीकृत कर सकेगा ;
(iii) मसालों के निर्यात के संवर्धन के लिए कार्यक्रम और परियोजनाएं प्रारम्भ कर सकेगा ;
(iv) मसालों के प्रसंस्करण, क्वालिटी, श्रेणीकरण की तकनीक और पैंकिग में सुधार के लिए अध्ययन और अनुसंधान में सहायता दे सकेगा और उसका प्रोत्साहन कर सकेगा ;
(v) निर्यात के लिए मसालों की कीमतों के स्थिरीकरण के लिए प्रयास कर सकेगा ;
(vi) निर्यात के लिए मसालों के लिए उपयुक्त क्वालिटी मापमान विकसित कर सकेगा और क्वालिटी चिह्न" के माध्यम से क्वालिटी का प्रमाणन प्रारम्भ कर सकेगा ;
(vii) निर्यात के लिए मसालों की क्वालिटी का नियंत्रण कर सकेगा ;
(viii) निर्यात के लिए मसालों के विनिर्माताओं को, ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, अनुज्ञप्तियां दे सकेगा ;
(ix) यदि निर्यात के संवर्धन के हित में आवश्यक समझे तो किसी मसाले का विपणन कर सकेगा ;
(x) मसालों के लिए विदेशों में भण्डारकरण की सुविधाओं की व्यवस्था कर सकेगा ;
(xi) संकलन और प्रकाशन के लिए मसालों के बारे में आंकड़ों का संग्रह कर सकेगा ;
(xii) विक्रय और लिए किसी मसाले का केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से आयात कर सकेगा ; और
(xiii) मसालों के आयात और निर्यात से संबंधित किसी विषय पर केन्द्रीय सरकार को सलाह दे सकेगा ।
(2) बोर्ड-
(i) इलायची के उगाने वालों के बीच सहकारिता प्रयासों को बढ़ावा भी दे सकेगा ;
(ii) इलायची उगाने वालों के लिए लाभप्रद प्रत्यागम भी सुनिश्चित कर सकेगा ;
(iii) इलायची की खेती और प्रसंस्करण के उन्नत तरीकों के लिए इलायची के पुनः रोपण के लिए और इलायची उगाने के क्षेत्रों के विस्तार के लिए वित्तीय या अन्य सहायता की व्यवस्था भी कर सकेगा ;
(iv) इलायची के विक्रय और इलायची की कीमतों के स्थिरीकरण का भी विनियमन कर सकेगा ;
(v) इलायची के परीक्षण और इलायची के श्रेणी-मानदण्ड नियत करने में प्रशिक्षण की व्यवस्था भी कर सकेगा ;
(vi) इलायची के उपभोग में वृद्धि और उस प्रयोजन के लिए प्रचार भी कर सकेगा ;
(vii) इलायची के दलालों को (जिनके अन्तर्गत नीलामकर्ता हैं) और इलायची के कारबार में लगे व्यक्तियों को रजिस्ट्रीकृत और अनुज्ञप्ति भी कर सकेगा ;
(viii) इलायची के विपणन में वृद्धि भी कर सकेगा ;
(ix) उगाने वालों, व्यवहारियों और अन्य व्यक्तियों से, जो विहित किए जाएं, इलायची उद्योग से संबंधित किसी विषय पर आंकड़ों का संग्रह कर सकेगा; ऐसे संगृहीत आंकड़ों या उनके भागों या उनसे उद्धरणों का प्रकाशन भी कर सकेगा ;
(x) कर्मकारों के लिए अधिक अच्छी कार्यकारी दशाओं और सुविधाओं की व्यवस्था तथा प्रोत्साहन को भी सुनिश्चित कर सकेगा ; और
(xi) वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अनुसंधान आरम्भ कर सकेगा, उसमें सहायता या प्रोत्साहन भी दे सकेगा ।
अध्याय 3
इलायची सम्पदा के स्वामियों का रजिस्ट्रीकरण
8. इलायची सम्पदा के स्वामियों का रजिस्ट्रीकरण-(1) इलायची के पौधों से रोपित भूमि का प्रत्येक स्वामी, चाहे ऐसी भूमि एक सम्पदा में या एक से अधिक सम्पदा में हो, उस तारीख से एक मास के अवसान के पूर्व, जिसको वह पहली बार ऐसी सम्पदा या सम्पदाओं का स्वामी होता है, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को, उसके द्वारा स्वामित्व में रखी गई प्रत्येक सम्पदा के बारे में स्वामी के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए आवेदन करेगा :
परन्तु राज्य सरकार पर्याप्त कारणों से रजिस्ट्रीकरण के लिए समय परिसीमा का ऐसी अवधि के लिए विस्तार कर सकेगी जो वह ठीक समझे ।
(2) एक बार किया गया रजिस्ट्रीकरण तब तक प्रवृत्त बना रहेगा जब तक कि वह रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता है ।
9. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा धारा 8 के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम रजिस्ट्रीकरण के लिए और रजिस्ट्रीकरण के रद्द किए जाने के लिए आवेदन के प्ररूप, ऐसे आवेदन पर संदेय फीस, ऐसे आवेदन में सम्मिलित की जाने वाली विशिष्टियों, रजिस्ट्रीकरण के अनुदान और रद्दकरण में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टरों और रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा बोर्ड को जानकारी प्रदान करने के बारे में विहित कर सकेंगे ।
10. रजिस्ट्रीकृत स्वामियों द्वारा दी जाने वाली विवरणियां-(1) रजिस्ट्रीकृत स्वामी, बोर्ड को ऐसे प्ररूप में, ऐसे समयों पर और ऐसी रीति से जो विहित की जाए, विवरणियां देगा ।
(2) बोर्ड इस धारा के अधीन दी गई किसी विवरणी की शुद्धता के सत्यापन के लिए या सम्पदा की उत्पादन क्षमता को अभिनिश्चित करने के लिए किसी समय किसी सम्पदा के निरीक्षण के लिए किसी अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगा ।
अध्याय 4
मसालों के निर्यात के लिए प्रमाणपत्र
11. किसी व्यक्ति द्वारा प्रमाणपत्र के बिना मसालों का निर्यात न किया जाना-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् कोई व्यक्ति किसी मसाले के निर्यात का कारबार प्रमाणपत्र के अधीन और उसके अनुसार ही प्रारम्भ करेगा, अन्यथा नहीं :
परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व मसालों के निर्यात का कारबार करने वाला कोई व्यक्ति ऐसे प्रारम्भ से तीन मास की अवधि तक, और यदि उसने उक्त तीन मास की कालावधि के भीतर ऐसे प्रमाणपत्र के लिए कोई आवेदन किया है तो ऐसे आवेदन के निपटाए जाने तक, ऐसे करता रहेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में इस अधिनियम के प्रारम्भ के प्रति निर्देश का धारा 2 के खण्ड (ढ) के परन्तुक के अधीन अधिसूचना द्वारा अनुसूची में जोड़े गए किसी मसाले के सम्बन्ध में उस तारीख के प्रति निर्देश समझा जाएगा जिससे ऐसा मसाला अनुसूची में जोड़ा गया है ।
12. प्रमाणपत्र का दिया जाना-(1) प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए कोई आवेदन बोर्ड को ऐसे प्ररूप में किया जाएगा और उसमें ऐसी विशिष्टियां होंगी जो विहित की जाएं और उसके साथ विहित फीस के संदाय के साक्ष्यस्वरूप रसीद होगी ।
(2) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर बोर्ड-
(क) यदि आवेदन विहित प्ररूप में नहीं है या उसके साथ कोई विहित विशिष्टियां नहीं हैं तो आवेदन को आवेदक को लौटा देगा ; या
(ख) यदि आवेदन विहित प्ररूप में है और उसके साथ विहित विशिष्टियां हैं तो प्रमाणपत्र ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए देगा, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।
13. प्रमाणपत्र का रद्दकरण, निलम्बन, आदि-(1) बोर्ड किसी प्रमाणपत्र को निम्नलिखित एक या अधिक आधारों पर रद्द कर सकेगा, अर्थात् :-
(क) प्रमाणपत्र के धारक ने प्रमाणपत्र के किसी निबन्धन या शर्त का उल्लंघन किया है ; और
(ख) केन्द्रीय सरकार की राय में लोकहित में यह आवश्यक है कि प्रमाणपत्र रद्द किया जाए ।
(2) जहां बोर्ड का अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से यह समाधान हो जाता है कि उपधारा (1) में वर्णित किसी आधार पर प्रमाणपत्र के रद्दकरण के प्रश्न पर विचार किया जाना लम्बित होने तक ऐसा करना आवश्यक है, तो बोर्ड, लिखित आदेश द्वारा प्रमाणपत्र का प्रवर्तन पैंतालीस दिन से अनधिक ऐसी कालावधि के लिए निलम्बित कर सकेगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और प्रमाणपत्र के धारक से, ऐसे आदेश की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, यह हेतुक दर्शित करने की अपेक्षा कर सकेगा कि इस प्रश्न का अवधारण किए जाने तक रजिस्ट्रीकरण को रद्द किया जाना चाहिए या नहीं, प्रमाणपत्र के निलम्बन को विस्तारित क्यों नहीं किया जाना चाहिए ।
(3) इस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को ऐसे रद्दकरण के आधारों के बारे में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया हो ।
14. अपील-(1) धारा 13 के अधीन किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति केन्द्रीय सरकार को कोई अपील ऐसी कालावधि के भीतर कर सकेगा जो विहित की जाए ।
(2) कोई अपील ग्रहण नहीं की जाएगी यदि वह उसके लिए विहित कालावधि के अवसान के पश्चात् की जाती है :
परन्तु कोई अपील उसके लिए विहित कालावधि के अवसान के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी, केन्द्रीय सरकार का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विहित कालावधि के भीतर अपील न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था ।
(3) इस धारा के अधीन दी गई प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में की जाएगी और उसके साथ उस आदेश की प्रति होगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है और ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।
(4) किसी अपील के निपटारे की प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए :
परंतु किसी अपील का निपटारा करने के पूर्व अपीलार्थी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।
(5) केन्द्रीय सरकार उस आदेश को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्ट कर सकेगी, उपान्तरित कर सकेगी या उलट सकेगी ।
15. प्रमाणपत्र के बिना निर्यात की अनुज्ञा देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि लोक हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी निकाय या अन्य अधिकरण को प्रमाणपत्र के बिना मसालों के निर्यात का कारबार प्रारम्भ करने या करते रहने की अनुज्ञा दे सकेगी ।
अध्याय 5
केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण
16. इलायची की कीमत और वितरण का नियंत्रण करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, उसमें विनिर्दिष्ट किसी वर्णन की इलायची के बारे में,-
(क) वह अधिकतम कीमत या न्यूनतम कीमत, या अधिकतम और न्यूनतम कीमतें नियत कर सकेगी जो इलायची को उगाने वाले द्वारा अथवा थोक या खुदरा इलायची व्यवहारी द्वारा, चाहे भारतीय बाजार के लिए या निर्यात के लिए, प्रभारित की जा सकेगी ;
(ख) वह अधिकतम मात्रा नियत कर सकेगी जिसका एक ही संव्यवहार में किसी व्यक्ति को विक्रय किया जा सकेगा ।
(2) उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसके अधीन निकाला गया कोई आदेश-
(क) उन व्यक्तियों से, जो इलायची के उत्पादन, प्रदाय या वितरण अथवा व्यापार और वाणिज्य में लगे हुए हैं, यह अपेक्षा करने का उपबन्ध कर सकेगा कि वे अपने कारबार में सम्बन्धित ऐसी बहियां, लेखे और अभिलेख रखें और निरीक्षण के लिए पेश करें तथा उनसे सम्बन्धित ऐसी जानकारी दें, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं; और
(ख) ऐसे अन्य विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेगा जिनके अन्तर्गत विशिष्टतया परिसरों, यानों, जलयानों और विमानों में प्रवेश करना और उनकी तलाशी लेना तथा उस व्यक्ति द्वारा जो ऐसी तलाशी के लिए प्राधिकृत है, उस इलायची का जिसके बारे में ऐसे व्यक्ति के पास यह विश्वास करने का कारण है कि उस आदेश का उल्लंघन किया गया है, किया जा रहा है या किया जाने वाला है, अधिग्रहण करना है ।
17. इलायची के आयात का प्रतिषेध या नियंत्रण करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इलायची का आयात या निर्यात, चाहे साधारणतया या विनिर्दिष्ट वर्गों के मामलों में, प्रतिषिद्ध, निर्बंन्धित या अन्यथा नियंत्रित करने के लिए उपबन्ध, कर सकेगी ।
18. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-(1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर उसे लिखित रूप में दे :
परन्तु बोर्ड को, इस उपधारा के अधीन दिए गए किसी निदेश के पूर्व अथवा दृष्टिकोण व्यक्त करने का यावत्शक्य अवसर दिया जाएगा ।
(2) कोई प्रश्न नीति का है या नहीं इस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
19. केन्द्रीय सरकार की बोर्ड को अतिष्ठित करने की शक्ति-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-
(क) गम्भीर आपात के कारण बोर्ड इस अधिनियम के उपबन्धों द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है ; या
(ख) बोर्ड ने इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए किसी निदेश का पालन करने में या इस अधिनियम के उपबन्धों द्वारा या उनके अधीन, उस पर अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है और ऐसे व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप बोर्ड की वित्तीय स्थिति में या बोर्ड के प्रशासन में गिरावट आई है ; या
(ग) ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनमें ऐसा करना लोकहित में आवश्यक हो गया है,
तो केन्द्रीय सरकार बोर्ड को, छह मास से अनधिक ऐसी कालावधि के लिए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को अतिष्ठित करने वाली किसी अधिसूचना के प्रकाशन पर,-
(क) सभी सदस्य, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से, ऐसे सदस्य के रूप में अपना पद रिक्त कर देंगे ;
(ख) ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम के उपबन्धों द्वारा या उनके अधीन प्रयोग या निर्वहन बोर्ड द्वारा या उसके निमित्त किया जा सकता है, जब तक कि उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं किया जाता है, प्रयोग और निर्वहन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा, जैसा केन्द्रीय सरकार निदेश दे ; और
(ग) बोर्ड के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन सभी सम्पत्ति, जब तक उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं किया जाता है, केन्द्रीय सरकार में निहित होगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठित किए जाने की कालावधि के अवसान पर केन्द्रीय सरकार नई नियुक्ति द्वारा बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में ऐसा व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति जिन्होंने उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन अपना पद रिक्त किया है, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझे जाएंगे :
परन्तु केन्द्रीय सरकार अतिष्ठित किए जाने की कालावधि के अवसान के पूर्व किसी समय इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की, और उन परिस्थितियों की जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई, पूरी रिपोर्ट शीघ्र से शीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 6
वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा
20. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् बोर्ड को अनुदानों और उधारों के रूप में उतनी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जितनी वह सरकार आवश्यक समझे ।
21. बोर्ड की निधि-(1) मसाला बोर्ड निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे :-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को धारा 20 के अधीन दिए गए कोई अनुदान और उधार ;
(ख) इस अधिनियम के अधीन दिए गए प्रमाणपत्रों के संबंध में उद्गृहीत और संगृहीत सभी फीसें ; और
(ग) ऐसे अन्य स्रोतों से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चित किए जाएं, बोर्ड को प्राप्त सभी राशियां ।
(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित का वहन करने के लिए किया जाएगा-
(क) बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक ;
(ख) धारा 7 के अधीन बोर्ड के कृत्यों का निर्वहन करने में बोर्ड के खर्चे ; और
(ग) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों के लिए खर्चे ।
22. बजट-बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किए जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा जिसमें बोर्ड की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शाए जाएंगे और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
23. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके कार्यकलापों का पूरा लेखा दिया जाएगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
24. लेखा और लेखा परीक्षा-बोर्ड के लेखा ऐसी रीति से तैयार किए जाएंगे और रखे जाएंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित की जाए और बोर्ड ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, अपने लेखाओं की लेखापरीक्षित प्रति उस पर लेखापरीक्षक की रिपोर्ट के साथ केन्द्रीय सरकार को देगा ।
25. वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट को उनकी प्राप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
26. मिथ्या विवरणियां देने के लिए शास्ति-जो कोई व्यक्ति, जिससे इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन कोई विवरणी देने की अपेक्षा की गई है, ऐसी विवरणी देने में असफल रहेगा या ऐसी विवरणी देगा जिसमें कोई विशिष्टि मिथ्या है और जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
27. बोर्ड के किसी अधिकारी या सदस्य को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने के लिए तथा बहियों और लेखाओं को पेश करने में असफलता के लिए शास्तियां-जो कोई व्यक्ति-
(क) अध्यक्ष द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत किसी सदस्य को या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग या अधिरोपित किसी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालेगा ; या
(ख) इस बात के होते हुए कि कोई लेखा बही या अन्य अभिलेख उसके नियंत्रण या अभिरक्षा में है, ऐसी बही या अभिलेख को तब पेश करने में असफल रहेगा जब उससे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन ऐसा करने की अपेक्षा की जाती है,
वह कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
28. कीमत आदि के नियंत्रण से संबंधित आदेश के उल्लंघन के लिए शास्तियां-(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 16 के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा; और वह सम्पत्ति जिसकी बाबत आदेश का उल्लंघन किया गया है, या उसका उतना भाग जो न्यायालय ठीक समझे, केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाएगा ।
(2) जो कोई व्यक्ति धारा 16 के अधीन किसी आदेश का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने उस आदेश का उल्लंघन किया है ।
29. धारा 11 के या धारा 17 के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्तियां-यदि कोई व्यक्ति धारा 11 के उपबन्धों का या धारा 17 के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा वह, ऐसे किसी समपहरण या शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जिसके लिए वह सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के उपबंधों के अधीन दायी हो, कारावास से, जिसकी तारीख एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
30. अन्य शास्तियां-जो कोई व्यक्ति इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबन्धों का, जो उन उपबन्धों से भिन्न हैं, जिनके उल्लंघन के लिए धारा 26, धारा 27, धारा 28, और धारा 29 में दण्ड का उपबन्ध किया गया है, उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा, या उल्लंघन करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, और जारी रहने वाले उल्लंघन की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन ऐसे प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
31. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी जो यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मोनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, तथा
(ख) फर्म के संबंध में निेदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
32. 1962 के अधिनियम 52 के उपबंधों का मसालों के निर्यात और इलायची के आयात को लागू होना-(क) ऐसे सभी मसालों के बारे में, जिनको इस अधिनियम की धारा 11 लागू होती है, और
(ख) ऐसी इलायची के बारे में, जिसको इस अधिनियम की धारा 17 के अधीन कोई आदेश लागू होता है,
यह समझा जाएगा कि वह ऐसा माल है जिसका आयात का निर्यात सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 11 के अधीन प्रतिषिद्ध या निर्बंधित किया गया है और उस अधिनियम के सभी उपबन्ध तद्नुसार प्रभावी होंगे ।
33. केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
34. प्रत्यायोजन-बोर्ड, लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को (धारा 39 के अधीन शक्ति को छोड़कर) जो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
35. बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी जब वे इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अनुसरण में कृत्य कर रहे हों या उनका कृत्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।
36. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाइयों के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सरकार या बोर्ड या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य अथवा सदस्य या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी अथवा सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
37. प्रवेश करने की शक्ति-इस निमित्त बनाए गए किसी नियम के अधीन रहते हुए, बोर्ड द्वारा इस निमित्त साधारणतया या विशिष्टतया प्राधिकृत कोई व्यक्ति, जब भी इस अधिनियम के किन्हीं प्रयोजनों के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, सभी युक्तियुक्त समयों पर किसी भूमि पर या परिसर में प्रवेश कर सकेगा और कोई निरीक्षण या जांच अथवा ऐसा अन्य कार्य या बात कर सकेगा जो विहित की जाए :
परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति किसी भवन या किसी परिवेष्ठित अहाते, निवासगृह से संलग्न किसी उद्यान में, (उसके अधिभोगी की सम्मति से ही) ऐसे अधिभोगी को ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम चौबीस घंटे की लिखित पूर्व सूचना देकर ही प्रवेश करेगा अन्यथा नहीं ।
38. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित विषयों में से सभी या किन्हीं के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन बोर्ड के सदस्यों की संख्या ;
(ख) धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें ;
(ग) धारा 3 की उपधारा (6) के अधीन अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य ;
(घ) धारा 3 की उपधारा (7) के अधीन उपाध्यक्ष की शक्तियां और कृत्य ;
(ङ) धारा 5 के अधीन समिति का गठन ;
(च) धारा 7 की उपधारा (1) के खण्ड (viii) के अधीन निर्यात के लिए मसालों के विनिर्माताओं को अनुज्ञप्तियां देने के लिए निर्बंधन और शर्तें ;
(छ) वह प्ररूप जिसमें और रीति जिससे और वह समय जिस पर रजिस्ट्रीकृत स्वामी धारा 10 की अधीन बोर्ड को विवरणियां भेज सकेगा ;
(ज) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन का प्ररूप और फीस ;
(झ) धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन अपील के लिए परिसीमा अवधि ;
(ञ) धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन अपील का प्ररूप और संदेय फीस ;
(ट) धारा 14 की उपधारा (4) के अधीन अपील को निपटाने के लिए प्रक्रिया ;
(ठ) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जब, बोर्ड धारा 22 के अधीन अपना बजट और धारा 23 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा ;
(ड) वह रीति जिससे बोर्ड के लेखा रखे जाएंगे और संपरीक्षित किए जाएंगे तथा वह तारीख जिसके पूर्व लेखाओं की लेखापरीक्षित प्रति धारा 24 के अधीन केन्द्रीय सरकार को भेजी जा सकेगी :
(ढ) धारा 37 के अधीन प्रवेश के लिए शक्ति के प्रयोग के बारे में शर्तें और निर्बंन्धन ;
(ण) कोई अन्य विषय जो नियमों द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जाए या जिसके बारे में उपबंध किया जाना है या उपबंध किया जाए ।
39. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को साधारणतया कार्यान्वित करने के लिए इस अधिनियम और नियमों से संगत विनियम बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित में से सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें ; और
(ख) वे निबन्धन और शर्तें जिनके अधीन धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा ।
40. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्श्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
41. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से संगत ऐसे उपबंध कर सकेगी जो कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा ।
42. निरसन और व्यावृत्ति-(1) इलायची अधिनियम, 1965 (1965 का 42) की धारा 3 से धारा 33 तक निरसित की जाती है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अधिनियम के उपबन्धों के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई, जहां तक ऐसी बात या कार्रवाई इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन वैसे ही की गई समझी जाएगी मानो उक्त उपबंध उस समय प्रवृत्त थे जब ऐसी बात या ऐसी कार्रवाई की गई थी और तदनुसार तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित न कर दिए जाएं ।
अनुसूची
[धारा 2 (ढ) देखिए]
1. इलायची
2. काली मिर्च
3. मिर्च
4. अदरक
5. हल्दी
6. धनिया
7. जीरा
8. बड़ी सौंफ
9. मेथी
10. अजवाइन
11. सौंफ
12. विशप्सवीड
13. काला जीरा
14. सोआ
15. दालचीनी
16. कैसिया
17. लहसुन
18. मीठा नीम
19. कोकम
20. पुदीना
21. सरसों
22. अजमोद
23. अनारदाना
24. केसर
25. वेनिला
26. तेजपात
जो किसी भी रूप में हों और इसके अन्तर्गत करी चूर्ण, मसालातेल, ओलियो रेजिन और अन्य मिश्रण भी हैं जिनमें मसाला अंश प्रमुख हो ।
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