सिनेमा कर्मकार कल्याण निधि अधिनियम, 1981
(1981 का अधिनियम संख्यांक 33)
[17 सितम्बर, 1981]
कुछ सिनेमा कर्मकारों के कल्याण की प्रोन्नति सम्बन्धी
कार्यकलापों के वित्तपोषण का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सिनेमा कर्मकार कल्याण निधि अधिनियम, 1981 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) चलचित्र फिल्म" का वही अर्थ है जो उसका चलचित्र अधिनियम, 1952 (1952 का 37) में है;
(ख) सिनेमा कर्मकार" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है-
(i) जो कम से कम पांच कथा फिल्मों के निर्माण में या उनके सम्बन्ध में, कलाकार के रूप में (जिसके अन्तर्गत अभिनेता, संगीतकार या नर्तक भी है) कार्य करने के लिए या कोई कौशलपूर्ण, अकौशलपूर्ण, शारीरिक, पर्यवेक्षकीय, तकनीकी, कलात्मक या अन्य प्रकार का कार्य करने के लिए सीधे या किसी ठेकेदार के माध्यम से या किसी अन्य रीति से नियोजित रहा है; और
(ii) जिसका किन्हीं पांच कथा फिल्मों में से प्रत्येक के निर्माण में या उसके सम्बन्ध में, ऐसे नियोजन की बाबत पारिश्रमिक, जहां ऐसा पारिश्रमिक मासिक मजदूरी के रूप में रहा है, प्रति मास एक हजार रुपए की राशि से, तथा जहां ऐसा पारिश्रमिक किसी एकमुश्त राशि के रूप में रहा है, पांच हजार रुपए की राशि से अधिक नहीं हुआ है;
(ग) कथा फिल्म" से भारत में पूर्णतः या भागतः निर्मित पूरी लम्बाई वाली ऐसी चलचित्र फिल्म अभिप्रेत है जिसका कोई रूप विधान हो और जिसकी कहानी कुछ पात्रों के आस-पास घूमती हो और जिसका कथानक मुख्यतः संवादों के माध्यम से व्यक्त होता हो, न कि पूर्णतः वर्णन, सजीव या कार्टून चित्रण द्वारा व्यक्त किया जाता हो, और इसके अन्तर्गत विज्ञापन फिल्म नहीं है;
(घ) निधि" से धारा 3 के अधीन निर्मित सिनेमा कर्मकार कल्याण निधि अभिप्रेत है;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(च) किसी कथा फिल्म के सम्बन्ध में निर्माता" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा ऐसी फिल्म बनाने के लिए (जिसके अन्तर्गत ऐसे फिल्म-निर्माण के लिए वित्त जुटाना और सिनेमा कर्मकारों को नियुक्त करना भी है) आवश्यक इंतजाम किए जाते हैं ।
3. सिनेमा कर्मकार कल्याण निधि-सिनेमा कर्मकार कल्याण निधि के नाम से ज्ञात एक निधि स्थापित की जाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे: -
(क) वे रकमें, जिनका केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, उस उत्पाद-शुल्क के आगमों में से, जो सिनेमा कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1981 की धारा 5 के अधीन जमा किए गए हैं, उनमें से केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन यथाअवधारित संग्रहण व्यय की कटौती करने के पश्चात्, उपबन्ध करे;
(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा निधि को किए गए कोई अनुदान;
(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए संदानों के रूप में प्राप्त कोई धन;
(घ) निधि की रकमों के विनिधान से होने वाली कोई आय ।
4. निधि का उपयोजन-(1) निधि का उपयोजन, केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे उपायों और सुविधाओं के सम्बन्ध में, जो उस सरकार की राय में सिनेमा कर्मकारों के कल्याण की प्रोन्नति के लिए आवश्यक या समीचीन है, उपगत व्यय को चुकाने के लिए और विशिष्टतया निम्नलिखित के लिए किया जाएगा: -
(क) सिनेमा कर्मकारों के फायदे के लिए ऐसे कल्याणकारी उपायों या सुविधाओं के खर्च का चुकाना जो केन्द्रीय सरकार विनिश्चित करे;
(ख) निर्धन सिनेमा कर्मकारों को अनुदान या उधारों के रूप में सहायता की व्यवस्था करना;
(ग) सिनेमा कर्मकारों के कल्याण की किसी स्कीम की सहायतार्थ, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है, कोई धन मन्जूर करना;
(घ) धारा 5 और धारा 6 के अधीन गठित, क्रमशः, सलाहकार समितियों और केन्द्रीय सलाहकार समिति के सदस्यों के भत्ते, यदि कोई हों, तथा धारा 8 के अधीन नियुक्त व्यक्तियों के वेतन और भत्ते, यदि कोई हों, चुकाना ;
(ङ) कोई अन्य व्यय जिसे निधि में से चुकाने का केन्द्रीय सरकार निदेश दे ।
(2) केन्द्रीय सरकार को यह विनिश्चय करने की शक्ति होगी कि कोई विशिष्ट व्यय निधि में से विकलनीय है या विकलनीय नहीं है, और उसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
5. सलाहकार समितियां-(1) केन्द्रीय सरकार, उतनी सलाहकार समितियां, जितनी वह इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले ऐसे मामलों में, जो केन्द्रीय सरकार उसे निर्दिष्ट करे, जिनके अन्तर्गत निधि के उपयोजन से संबद्ध मामले भी हैं, केन्द्रीय सरकार को सलाह देने के लिए ठीक समझे, गठित कर सकेगी ।
(2) प्रत्येक सलाहकार समिति में उतने व्यक्ति होंगे जितने केन्द्रीय सरकार उसमें नियुक्त करे और सदस्य ऐसी रीति से चुने जाएंगे जो विहित की जाए:
परन्तु प्रत्येक सलाहकार समिति में सरकार, सिनेमा कर्मकारों और निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बराबर-बराबर होगी ।
(3) प्रत्येक सलाहकार समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार करेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार प्रत्येक सलाहकार समिति के सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
6. केन्द्रीय सलाहकार समिति-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 5 के अधीन गठित सलाहकार समितियों के काम को समन्वित करने के लिए और इस अधिनियम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले किसी मामले पर केन्द्रीय सरकार को सलाह देने के लिए एक केन्द्रीय सलाहकार समिति गठित कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सलाहकार समिति में केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त ग्यारह सदस्य होंगे और सदस्य ऐसी रीति से चुने जाएंगे जो विहित की जाए:
परन्तु केन्द्रीय सलाहकार समिति में सरकार, सिनेमा कर्मकारों और निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम तीन सदस्य होंगे ।
(3) केन्द्रीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार करेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, केन्द्रीय सलाहकार समिति के सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
7. सहयोजित आदि करने की शक्तियां-(1) कोई सलाहकार समिति या केन्द्रीय सलाहकार समिति किसी भी समय और ऐसी अवधि के लिए, जैसी वह ठीक समझे, किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को सलाहकार समिति में सहयोजित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन सहयोजित व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सदस्य की सभी शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग करेगा किन्तु उसे मत देने का हक नहीं होगा ।
(3) यदि कोई सलाहकार समिति या केन्द्रीय सलाहकार समिति ऐसा करना आवश्यक या समाचीन समझे तो वह किसी भी व्यक्ति को अपने अधिवेशन में हाजिर होने के लिए आमंत्रित कर सकेगी और जब ऐसा व्यक्ति किसी अधिवेशन में हाजिर होता है तब वह उसमें मतदान करने का हकदार नहीं होगा ।
8. कल्याण आयुक्तों आदि की नियुक्ति और उनकी शक्तियां-(1) केन्द्रीय सरकार उतने कल्याण आयुक्त, कल्याण प्रशासक, निरीक्षक और ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारिवृन्द नियुक्त कर सकेगी जितने वह इस अधिनियम और सिनेमा कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1981 के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे ।
(2) केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी कल्याण आयुक्त को ऐसे कर्मचारिवृन्द नियुक्त करने के लिए निदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम और सिनेमा कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1981 (1981 का 30) के प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे जाएं ।
(3) इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
(4) कोई कल्याण आयुक्त, -
(क) ऐसी सहायता के साथ, यदि कोई हो, जैसी वह ठीक समझे, किसी युक्तियुक्त समय पर किसी ऐसे स्थान में प्रवेश कर सकेगा जहां वह इस अधिनियम और सिनेमा कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1981 (1981 का 30) के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए प्रवेश करना आवश्यक समझे;
(ख) ऐसे स्थान के अन्दर कोई ऐसी बात कर सकेगा जो उसके कर्तव्यों के उचित निर्वहन के लिए आवश्यक हो; और
(ग) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो विहित की जाएं ।
9. अधिनियम के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलाप की वार्षिक रिपोर्ट-केन्द्रीय सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, उस वित्तीय वर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलाप का विवरण देने वाली एक रिपोर्ट, लेखा विवरण सहित राजपत्र में प्रकाशित कराएगी ।
10. जानकारी मांगने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी निर्माता से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे आंकड़े और अन्य जानकारी ऐसे प्ररूप में और उतनी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, दे ।
11. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे: -
(क) वह रीति, जिससे निधि का उपयोजन धारा 4 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट उपायों और सुविधाओं के लिए किया जा सकता है;
(ख) धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन किसी उधार की मंजूरी को शासित करने वाली शर्तें ;
(ग) धारा 5 और धारा 6 के अधीन गठित, क्रमशः, सलाहकार समितियों और केन्द्रीय सलाहकार समिति की संरचना, वह रीति जिससे उनके सदस्य चुने जाएंगे, ऐसे सदस्यों की पदावधि, उनको देय भत्ते, यदि कोई हों, और वह रीति जिससे सलाहकार समितियां और केन्द्रीय सलाहकार समिति अपने कामकाज का संचालन करेगी ;
(घ) धारा 8 के अधीन नियुक्त सभी व्यक्तियों की भर्ती, सेवा की शर्तें और कर्तव्य ;
(ङ) वे शक्तियां जिनका धारा 8 के अधीन नियुक्त किसी कल्याण आयुक्त, कल्याण प्रशासक या निरीक्षक द्वारा प्रयोग किया जा सकता है;
(च) किसी निर्माता द्वारा केन्द्रीय सरकार को ऐसे आंकड़े और अन्य जानकारी का दिया जाना जिसका धारा 10 के अधीन दिया जाना अपेक्षित हो;
(छ) वह प्ररूप जिसमें और वह अवधि जिसके भीतर आंकड़े और अन्य जानकारी खण्ड (च) के अधीन दी जानी है;
(ज) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) उपधारा (2) के खण्ड (च) या खण्ड (छ) के अधीन कोई नियम बनाने में केन्द्रीय सरकार यह निदेश दे सकेगी कि उसका भंग जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, जिसमें वह इस प्रकार रखा गया हो, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए हो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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