नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968
(1968 का अधिनियम संख्यांक 27)
[24 मई, 1968]
नागरिक सुरक्षा तथा उससे संबंधित विषयों के लिए
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उन्नीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह किसी राज्य या उसके भाग में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे और जो भारत रक्षा अधिनियम, 1962 (1962 का 51) के अवसान की तारीख से पूर्व की न हो, और विभिन्न राज्यों या उनके विभिन्न भागों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “नागरिक सुरक्षा" के अन्तर्गत वास्तविक मुडभेड़ की कोटि में न आने वाले वे सभी उपाय हैं जो भारत में या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग में किसी व्यक्ति, संपत्ति, स्थान, या वस्तु को किसी बैरपूर्ण आक्रमण से, चाहे वह वायु, भूमि या समुद्र से हो या अन्य स्थानों से, संरक्षण प्रदान करने के लिए, अथवा ऐसे किसी आक्रमण को पूर्णतः या भागतः प्रभावहीन करने के लिए हों, चाहे ऐसे उपाय ऐसे आक्रमण के समय पर किए जाएं या उसके पूर्व या दौरान या पश्चात् किए जाएं [या ऐसा कोई उपाय है जो किसी आपदा के पूर्व, दौरान, समय या उसके पश्चात् आपदा प्रबन्धन के प्रयोजन के लिए किया गया है ;ट
(ख) “नागरिक सुरक्षा कोर" से पूर्णतः या मुख्यतः नागरिक सुरक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाई गई कोर अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत धारा 4 की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन कोर समझा जाने वाला संगठन भी है ;
(ग) “बैरपूर्ण आक्रमण" से किसी व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय द्वारा किया जाने वाला ऐसा आक्रमण अभिप्रेत है, जो चाहे वह किसी युद्ध, बाह्य अभ्यासक्रमण या आन्तरिक उपद्रव के दौरान हो या अन्यथा, भारत में या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग में जीवन, संपत्ति, स्थान या वस्तु की सुरक्षा को संकटापन्न करता है ;
(घ) “अधिसूचना" से शासकीय राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(ङ) “वैयक्तिक सेवा क्षति" का वही अर्थ है जो उसका वैयक्तिक क्षति (आपात् उपबंध) अधिनियम, 1962 (1962 का 59) में है ;
(च) “किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में राज्य सरकार" से उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ;
4[(छ) “आपदा" से आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 (2005 का 53) की धारा 2 के खण्ड (घ) में यथा परिभाषित कोई आपदा अभिप्रेत है ;
(ज) “आपदा प्रबन्धन" से आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 (2005 का 53) की धारा 2 के खण्ड (ङ) में यथा परिभाषित आपदा प्रबन्धन अभिप्रेत है ।]
अध्याय 2
नागरिक सुरक्षा के लिए नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति
3. नागरिक सुरक्षा के लिए नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, नागरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित सभी विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध करने वाले नियम अधिसूचना द्वारा बना सकेगी, अर्थात् :-
(क) किसी ऐसे काम के किए जाने को निवारित करना, जिससे नागरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य हो ;
(ख) जन-साधारण को नागरिक सुरक्षा के संबंध में शिक्षण देना और ऐसी सुरक्षा के प्रयोजनों के लिए उन्हें तैयार करना ;
(ग) नागरिक सुरक्षा के लिए अपेक्षित वस्तुओं और चीजों की व्यवस्था, भंडारकरण और अनुरक्षण ;
(घ) पत्तनों तथा राज्यक्षेत्रीय, ज्वारीय और अन्तर्देशीय जल में यातायात और जलयानों, बोयाओं, रोशनियों और संकेतों के प्रयोग का प्रतिषेध या विनियमन करना ;
(ङ) रोशनियों और ध्वनियों का नियंत्रण ;
(च) अग्नि निवारक और अन्य उपायों द्वारा जीवन और संपत्ति का संरक्षण ;
(छ) किन्हीं भवनों, परिसरों या अन्य संरचनाओं को किसी बैरपूर्ण आक्रमण के अवसर पर आसानी से पहचाने जाने से बचाना सुनिश्चित करना ;
(ज) जीवन और संपत्ति के खतरे के निवारण के लिए किसी भवन, परिसर या अन्य संरचना या किसी अन्य संपत्ति को तोड़ डालना, नष्ट करना या अनुपयोगी बना देना ;
(झ) निम्नलिखित के कब्जे, उपयोग या व्ययन का प्रतिषेघ या विनियमन करना-
(i) विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ, संक्षारक और अन्य खतरनाक पदार्थ या चीजें, आयुद्ध और गोलाबारूद ;
(ii) जलयान ;
(iii) बेतार के तार का साधित्र ;
(iv) वायुयान ; तथा
(v) फोटोग्राफी और संकेतन साधित्र तथा सूचनाओं को अभिलिखित करने का कोई साधन ;
(ञ) क्षेत्रों को खाली कराना और वहां से संपत्ति या जीव-जन्तुओं को हटाना ;
(ट) एक क्षेत्र से निष्क्रामित व्यक्तियों को किसी अन्य क्षेत्र में बसाना और ऐसे क्षेत्र में बसाए गए निष्क्रामित व्यक्तियों के आचरण का विनियमन ;
(ठ) निष्क्रामित व्यक्तियों या इस अधिनियम के अधीन कृत्य करने के लिए प्राधिकृत व्यक्तियों को आवासादेश देना ;
(ड) नुकसानग्रस्त भवनों, संरचनाओं और संपत्ति का उद्धारण तथा शवों का व्ययन ;
(ढ) क्षत, अदावाकृत या खतरनाक जीव-जन्तुओं का अभिग्रहण, उनकी अभिरक्षा या उन्हें नष्ट करना ;
(ण) निम्नलिखित की सुरक्षा को सुनिश्चित करना-
(i) पत्तन, डाकयार्ड, दीप-स्तम्भ, दीप-पोत, हवार्ह अड्डे और विमान संचालन से संबद्ध सुविधाएं ;
(ii) रेलें, ट्रामवे, सड़कें, पुल, नहरें और भूमि या जल द्वारा परिवहन के सभी अन्य साधन ;
(iii) तार, डाकघर, संकेतन साधित्र और सभी अन्य संचार साधन ;
(iv) जल-प्रदाय के स्रोत और पद्धतियां, जल, गैस या विद्युत के प्रदाय के संकर्म और लोक-प्रयोजनों के लिए सभी अन्य संकर्म ;
(v) जलयान, वायुयान, मोटरयान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) में यथा परिभाषित परिवहन यान और रेलों तथा ट्रामवे के चल स्टाक ;
(vi) भांडागार तथा भंडारकरण के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए जाने वाले या ऐसे उपयोग के लिए आशयित सब अन्य स्थान ;
(vii) साधारणतः खानें, तेल-क्षेत्र, कारखाने या औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक उपक्रम या विशिष्टतः कोई खान, तेल-क्षेत्र, कारखाना या औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक उपक्रम ;
(viii) ऐसी प्रयोगशालाएं और संस्थाएं जहां वैज्ञानिक या प्रौद्योगिक अनुसंधान या प्रशिक्षण चलाया या दिया जाता है ;
(ix) ऐसे सभी संकर्म और संरचनाएं जो इस खंड में पूर्व वर्णित किसी चीज के भाग हैं या उससे संबंधित हैं ;
(x) सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी अर्धसरकारी अथवा स्वायत्त संगठन के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाने वाला या लाए जाने के लिए आशयित कोई ऐसा अन्य स्थान या चीज जिसका संरक्षण नागरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझा जाए ;
(त) किसी सड़क या पथ्या, जलमार्ग, पारघाट या पुल, नदी, नहर या जल-प्रदाय के अन्य स्रोत का नियंत्रण ;
(थ) ऐसे पूर्वावधानिक उपाय जिन्हें अपनी-अपनी अधिकारिता के अन्दर अथवा अपने द्वारा नियोजित किसी कार्मिक के संबंध में करने की अपेक्षा, सरकार या उसके किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकारी, पुलिस बल के सदस्यों, अग्निशामक दल और नागरिक सुरक्षा से भिन्न प्रयोजनों के लिए प्रथमतः नियोजित किसी अन्य सेवा या प्राधिकारी के सदस्यों से की जानी चाहिए ;
(द) किन्हीं वर्दियों के, चाहे वे शासकीय हों या अन्य, या ध्वजों के या पदकों, बैजों अथवा अन्य लक्ष्य जैसे शासकीय अलंकरणों या तत्समान किसी वस्तु के, जिसे धारण करना प्रवंचन के लिए या नागरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए प्रकल्पित हो, किसी उपयोग का निवारण या नियंत्रण करना ;
(ध) किसी आशंकित बैरपूर्ण आक्रमण के खतरों से जन साधारण या उसके किन्हीं सदस्यों की संरक्षा करने या उन्हें उन खतरों से अवगत कराने की दृष्टि से व्यक्तियों या प्राधिकारियों द्वारा बरती जाने वाली पूर्वावधानियां या की जाने वाली कार्रवाई ;
(न) किसी भवन, संरचना या परिसर के स्वामी या अधिभोगी से ऐसे इन्तजाम करने या पूरे करने की अपेक्षा करना जो अग्नि का पता लगाने या उसके निवारण के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हों ;
(ज) आग लग जाने पर उसके संबंध में उपाय करना ;
(फ) यह निदेश देना कि किसी विनिर्दिष्ट छूट के अधीन रहते हुए, किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में उपस्थित कोई भी व्यक्ति विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा दिए गए अनुज्ञा-पत्र से प्राप्त अधिकार के बिना, ऐसे घंटों के बीच, जो विनिर्दिष्ट किए जाएं, अपने घर के बाहर नहीं रहेगा ;
(ब) (i) किसी ऐसे समाचार-पत्र, समाचार-पत्रक, पुस्तक या अन्य दस्तावेज के, जिसमें नागरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली बातें हों, मुद्रण और प्रकाशन का प्रतिषेध करना ;
(ii) किसी ऐसे समाचार-पत्र, समाचार-पत्रक, पुस्तक या अन्य दस्तावेज के, जिसमें उपखंड (i) में निर्दिष्ट बातों में से कोई बात हो मुद्रण और प्रकाशन के प्रयोजन के लिए काम में लाए जाने वाले किसी प्रेस से प्रतिभूति मांगना और ऐसे समाचार-पत्र, समाचार-पत्रक, पुस्तक या अन्य दस्तावेज की प्रतियां समपहृत कर लेना ;
(भ) ऐसे क्षेत्रों की बाबत, जिनका नियंत्रण आवश्यक या समीचीन समझा जाए, व्यक्तियों के आचरण को विनियमित करना और ऐसे क्षेत्रों से व्यक्तियों का हटाया जाना ;
(म) किसी व्यक्ति या व्यक्ति वर्ग से नागरिक सुरक्षा की किसी स्कीम का अनुपालन करने की अपेक्षा करना ;
(य) कोई अन्य उपबंध जो नागरिक सुरक्षा के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया कोई नियम यह उपबंध कर सकेगा कि उसमें विनिर्दिष्ट विषयों के बारे में आदेश राज्य सरकार द्वारा किए जा सकेंगे ।
(3) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया कोई नियम यह उपबंध कर सकेगा कि उसका या उसके अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और जहां उल्लंघन जारी रहता है वहां अतिरिक्त जुर्माने से जो प्रथम के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है, पचास रुपए तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
अध्याय 3
नागरिक सुरक्षा कोर
4. नागरिक सुरक्षा कोर का गठन-(1) राज्य सरकार, राज्य के अंदर के किसी क्षेत्र के लिए एक व्यक्ति-निकाय गठित कर सकेगी जो नागरिक सुरक्षा कोर कहलाएगा (और जिसे इसमें इसके पश्चात कोर" कहा गया है), और वह ऐसी कोर का समादेशन करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को जो उसकी राय में जिला मजिस्ट्रेट से नीचे की पंक्ति का न हो (और जो नियंत्रक" कहलाएगा) नियुक्त कर सकेगी :
परन्तु यदि राज्य के किसी क्षेत्र में, इस अधिनियम के उस क्षेत्र में प्रवृत्त होने के ठीक पहले कोई ऐसा संगठन विद्यमान हो जिसे राज्य सरकार की राय में कोर के कृत्य सौंपे जा सकते हों, तो राज्य सरकार, उस क्षेत्र के लिए अलग कोर गठित करने के बजाय, उस संगठन से उस क्षेत्र में कोर के कृत्यों को ग्रहण कर लेने या उनका निर्वहन करने की अपेक्षा कर सकेगी और तब इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए वह संगठन उस क्षेत्र के लिए कोर समझा जाएगा ।
(2) राज्य सरकार, राज्य के अंदर नियंत्रकों के क्रियाकलाप में समन्वय स्थापित करने के प्रयोजन से, एक नागरिक सुरक्षा निदेशक नियुक्त कर सकेगी और प्रत्येक नियंत्रक ऐसे निदेशक द्वारा दिए गए निदेशों को अनुपालन करेगा ।
5. सदस्यों और अधिकारियों की नियुक्ति-(1) राज्य सरकार ऐसे व्यक्तियों को, जो कोर के सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए योग्य और रजामंद हों, ऐसे सदस्य नियुक्त कर सकेगी और नियंत्रक ऐसे नियुक्त किसी सदस्य को कोर में के ऐसे पद या समादेशन पर, जिसे धारण करने के लिए ऐसा सदस्य नियंत्रक की राय में योग्य हो, नियुक्त कर सकेगा ।
(2) कोर का सदस्य नियुक्त किए गए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे प्ररूप में, जैसा विहित किया जाए, एक सदस्यता-प्रमाणपत्र दिया जाएगा ।
6. नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्यों की पदच्युति-(1) जहां नियंत्रक की राय में, कोर का कोई सदस्य ऐसे सदस्य के नाते अपने कर्तव्यों के समाधानप्रद रूप से निर्वहन में असफल रहे या रहा हो या ऐसे सदस्य के नाते अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी अवचार का दोषी पाया जाए या पाया गया हो, वहां नियंत्रक ऐसी जांच के पश्चात् जिसमें कोर के ऐसे सदस्य को उसके विरुद्ध आरोपों की बाबत सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया गया हो आदेश द्वारा ऐसे सदस्य को कोर से पदच्युत कर सकेगा ।
(2) जहां नियंत्रक की यह राय हो कि कोर के किसी सदस्य का उसमें बना रहना अवांछनीय है, वहां वह कोई कारण दिए बिना ऐसे सदस्य को कोर से संक्षेपतः पदच्युत कर सकेगा ।
7. अपील-कोर का वह सदस्य, जो कोर से धारा 6 के अधीन पदच्युत कर दिया जाए, ऐसी पदच्युति की तारीख से तीन दिन के अन्दर राज्य सरकार से अपील कर सकेगा और वह सरकार ऐसी अपील पर नियंत्रक या अन्य प्राधिकारी द्वारा किए गए आदेश को पुष्ट या उपांतरित कर सकेगी या उसे उलट सकेगी ।
8. नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्यों के कृत्य-(1) कोर के सदस्य नागरिक सुरक्षा के उपाय करने के संबंध में ऐसे कृत्यों का पालन करेंगे जो उन्हें इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा सौंपे जाएं ।
(2) राज्य सरकार या नियंत्रक, आदेश द्वारा, कोर के किसी सदस्य को प्रशिक्षण के लिए या नागरिक सुरक्षा के उपाय किए जाने के संबंध में ऐसे कृत्यों के निर्वहन के लिए, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, आहूत कर सकेगा ।
(3) ऐसे आदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, किसी राज्य की कोर के किसी सदस्य से किसी अन्य राज्य में नागरिक सुरक्षा के संबंध में कृत्यों के निर्वहन की अपेक्षा, आदेश द्वारा किसी समय भी की जा सकेगी और जब ऐसा सदस्य ऐसे कृत्यों का निर्वहन कर रहा हो, तब वह उस अन्य राज्य की कोर का सदस्य समझा जाएगा और उस अन्य राज्य की कोर के सदस्य की शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार उसमें निहित होंगे और उस अन्य राज्य की कोर के सदस्य के दायित्व उस पर होंगे ।
9. विनियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए विनियम अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम-
(क) कोर के सदस्यों के कृत्य विहित कर सकेंगे और वह रीति विनियमित कर सकेंगे जिससे वे सेवा के लिए आहूत किए जा सकेंगे ;
(ख) किसी कोर के या सभी कोरों के सदस्यों का संगठन, नियुक्ति, सेवा की शर्तें, अनुशासन, साज-सज्जा और वस्त्र विनियमित कर सकेंगे ;
(ग) किसी कोर की या सभी कोरों की सदस्यता के प्रमाणपत्रों का प्ररूप विहित कर सकेंगे ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
10. वैयक्तिक क्षति (आपात उपबंध) अधिनियम के उपबन्धों का कोर के सदस्यों को हुई क्षतियों का लागू होना-वैयक्तिक क्षति (आपात उपबंध) अधिनियम, 1962 (1962 का 59) के और उसके अधीन बनाई गई प्रत्येक स्कीम के उपबंध, कोर का सदस्य नियुक्त किए गए किसी भी व्यक्ति को हुई प्रत्येक वैयक्तिक सेवा क्षति को, निम्नलिखित उपांतरों के साथ, यावत्शक्य उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवक की हुई वैयक्तिक सेवा क्षति को लागू होते हैं :-
(क) उस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई किसी स्कीम के अधीन नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवक के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह कोर के सदस्य के प्रति निर्देश हैं ; तथा
(ख) उसमें आपात की कालावधि के प्रति किसी निर्देश का, कोर के सदसय के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस कालावधि के प्रति निर्देश है जिसके दौरान यह अधिनियम प्रवृत्त रहता है ।
11. शास्तियां-(1) यदि धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन के किसी आदेश द्वारा आहूत होने पर कोर का कोई सदस्य उस आदेश के अनुपालन या ऐसे सदस्य के नाते अपने कृत्यों के निर्वहन या उसके कृत्यों के पालन के लिए उसे दिए गए किसी विधिपूर्ण आदेश या निदेश के अनुपालन में उपेक्षा करेगा या उससे पर्याप्त कारण के बिना इंकार करेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा और जहां ऐसी उपेक्षा या इंकार जारी रहता है वहां अतिरिक्त जुर्माने से जो प्रथम के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है, पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन किए गए किसी आदेश या उसे दिए गए किसी निदेश के अनुपालन में उपेक्षा करेगा या किसी उचित कारण के बिना असफल रहेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और जहां ऐसी उपेक्षा या असफलता जारी रहती है, वहां अतिरिक्त जुर्माने से जो प्रथम के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी उपेक्षा या असफलता जारी रहती है पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
12. अन्य अधिनियमितियों से असंगत अधिनियम और नियमों आदि का प्रभाव-(1) इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबंध अथवा इस अधिनियम या ऐसे किसी नियम के अधीन से किया गया कोई आदेश, इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभावशील किसी लिखत में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावशील होंगे ।
(2) नागरिक सुरक्षा के संबंध में, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व नागरिक सुरक्षा से संबंधित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन की गई प्रत्येक नियुक्ति, किया गया प्रत्येक आदेश या बनाया गया प्रत्येक नियम, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, तब तक प्रवृत्त रहेगा जब तक वह इस अधिनियम के अधीन विखंडित न कर दिया जाए या उसमें कोई परिवर्तन न कर दिया जाए और वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई, दिया गया या बनाया गया समझा जाएगा ।
स्पष्टीकरण-किसी उपबन्ध या क्षेत्र के संबंध में इस अधिनियम का प्रारंभ" से, यथास्थिति, उस उपबन्ध का प्रारंभ या उस क्षेत्र में इस अधिनियम का प्रारंभ अभिप्रेत है ।
13. जीवन के सामान्य कार्य में यथासंभव कम हस्तक्षेप किया जाना-इस अधिनियम के अनुसरण में कार्य करने वाला कोई प्राधिकारी या व्यक्ति जीवन के सामान्य कार्य और संपत्ति के उपभोग में उतना कम से कम हस्तक्षेप करेगा जितना लोक सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोजन के अनुरूप हो ।
14. आदेशों के संबंध में व्यावृत्तियां-(1) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई आदेश किसी न्यायालय में प्रश्नगत न किया जाएगा ।
(2) जहां कोई आदेश किसी प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया और हस्ताक्षरित तात्पर्यित हो, वहां न्यायालय, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) के अर्थ में यह उपधारणा करेगा कि ऐसा आदेश उस प्राधिकारी द्वारा ही इस प्रकार किया गया था ।
15. सशस्त्र बल के संरक्षण के लिए किए गए उपायों को अधिनियम का लागू न होना-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश की कोई बात संघ के सशस्त्र बल को या उन उपायों को लागू न होगी जो संघ के सशस्त्र बल पर नियंत्रण रखने वाले प्राधिकारियों में से किसी के द्वारा नागरिक सुरक्षा या ऐसे बल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए या किसी नौसैनिक, सैनिक या वायु-सेना संस्थापनों या भंडारों के संरक्षण के लिए काम में लाए जाए ।
16. अभियोजनों की परिसीमा-इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई अभियोजन नियंत्रक द्वारा, या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा, अथवा नियंत्रक या ऐसे व्यक्ति की सम्मति से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
[16क. केन्द्रीय सरकार को प्रत्यायोजन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कि किसी ऐसी शक्ति का प्रयोग अथवा ऐसे कर्तव्य का निर्वहन जो इस अधिनियम द्वारा अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम द्वारा केन्द्रीय सरकार को प्रदत्त अथवा उस पर अधिरोपित हो, ऐसी परिस्थितियों में तथा ऐसी शर्तों पर यदि कोई हों, जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ किसी अधिकारी अथवा प्राधिकारी द्वारा भी किया जा सकेगा ।
16ख. केन्द्रीय सरकार, आदि द्वारा किए गए, आदेश का प्रभाव-किसी ऐसे विषय के संबंध में जिससे यह अधिनियम अथवा उसके अधीन बनाया गया कोई नियम संबंधित हो केन्द्रीय सरकार द्वारा अथवा धारा 16क के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा किया गया कोई आदेश, उस विषय की बाबत राज्य सरकार अथवा किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होगा ।]
17. प्रत्यायोजन करने की शक्ति-राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि-
(क) वे सभी शक्तियां, जिनका प्रयोग उसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन किया जा सकता है, या उनमें से कोई ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जो राज्य सरकार की राय में जिला मजिस्ट्रेट की पंक्ति से नीचे का न हो और जिसे उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयुक्त की जा सकेंगी ;
(ख) वे सभी शक्तियां, जिनका प्रयोग नियंत्रक द्वारा इस अधिनियम के अधीन किया जा सकता है, या उनमें से कोई ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जो राज्य सरकार की राय में उपखंड मजिस्ट्रेट की पंक्ति से नीचे का न हो और जिसे उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयुक्त की जा सकेंगी ।
18. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-(1) कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या किए गए किन्हीं आदेशों या ऐसे किन्हीं नियमों के अधीन जारी किए गए किन्हीं आदेशों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए सरकार, निदेशक या नियंत्रक अथवा सरकार या नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
(2) कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसे नुकसान के लिए जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या ऐसे किसी नियम के अधीन जारी किए गए किसी आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुआ या संभाव्य हो, सरकार, निदेशक या नियंत्रक अथवा सरकार या नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
19. प्राधिकृत व्यक्तियों और कोर के सदस्यों का लोक सेवक होना-कोई व्यक्ति, जो नियंत्रक 1[केन्द्रीय सरकारट या राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत हो, और कोर का प्रत्येक सदस्य, जब तक वह ऐसे कार्य कर रहा हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
[20. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रक्षा जाना-इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम बनाने जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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