सड़क मार्ग द्वारा वहन अधिनियम, 2007
(2007 का अधिनियम संख्यांक 41)
[29 सितम्बर, 2007]
सामान्य वाहकों का, उनके दायित्व को सीमित करके, विनियमन करने और उनकी,
उनके सेवकों या अभिकर्ताओं की उपेक्षा या आपराधिक कार्यों के कारण
ऐसे माल को हुई हानि या नुकसान के लिए उनका दायित्व अवधारित
करने के लिए, उन्हें परिदत्त माल के मूल्य की घोषणा
करने और उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अठावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सड़क मार्ग द्वारा वहन अधिनियम, 2007 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) सामान्य वाहक" से किसी माल की रसीद के अधीन माल वाहकों द्वारा वहन किए जाने वाले माल का संग्रहण, भंडारण, प्रेषण और वितरण करने तथा बिना किसी विभेद के सभी व्यक्तियों के लिए सड़क पर मोटरीकृत परिवहन द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल का भाड़े के लिए परिवहन करने के कारबार में लगा व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत माल बुकिंग कंपनी, ठेकेदार, अभिकर्ता, दलाल और ऐसा कुरियर अभिकरण भी है, जो दस्तावेजों, माल या वस्तुओं के द्वार-द्वार तक परिवहन में, ऐसी दस्तावेजों, माल या वस्तुओं को वहन करने या साथ ले जाने के लिए, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, किसी व्यक्ति की सेवाओं का उपयोग करके, लगा हुआ है किन्तु इसके अंतर्गत सरकार नहीं है;
(ख) परेषिती" से माल प्रेषण टिप्पण में परेषिती के रूप में नामित व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ग) परेषण" से परेषक द्वारा वहन के लिए सामान्य वाहक को सौंपे गए ऐसे दस्तावेज, माल या वस्तुएं अभिप्रेत हैं, जिनका वर्णन या ब्यौरे, माल प्रेषण टिप्पण में दिए गए हैं;
(घ) परेषक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो माल प्रेषण टिप्पण में परेषक के रूप में नामित है, जिसके द्वारा या जिसकी ओर से ऐसे प्रेषण टिप्पण के अंतर्गत आने वाले दस्तावेज, माल या वस्तुएं उनके वहन के लिए सामान्य वाहक को सौंपे जाते हैं;
(ङ) माल" के अंतर्गत निम्नलिखित हैं: -
(i) आधान, प्रपटि्टकाएं या माल को संचित करने के लिए प्रयुक्त परिवहन की वैसी ही वस्तुएं;
(ii) पशु या पशुधन;
(च) माल प्रेषण टिप्पण" से धारा 8 के अधीन निष्पादित दस्तावेज अभिप्रेत है;
(छ) माल की रसीद" से धारा 9 के अधीन जारी की गई रसीद अभिप्रेत है;
(ज) व्यक्ति" के अंतर्गत ऐसा कोई संगम या व्यक्ति निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, कोई सड़क परिवहन बु्किंग कंपनी, ठेकेदार और कोई अभिकर्ता या कोई दलाल भी है, जो सामान्य वाहक का कारबार कर रहा है;
(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ञ) रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी" से मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 68 के अधीन गठित कोई राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(ट) रजिस्ट्रीकरण" से धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन अनुदत्त या नवीकृत रजिस्ट्रीकरण अभिप्रेत है ।
3. व्यक्तियों का रजिस्ट्रीकरण के बिना सामान्य वाहक के कारबार में न लगना-(1) कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् सामान्य वाहक के कारबार में तब तक नहीं लगेगा, जब तक उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त न किया गया हो ।
(2) कोई व्यक्ति, जो चाहे पूर्णतः या भागतः सामान्य वाहक के कारबार में लगा है, इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व, -
(क) ऐसे प्रारंभ की तारीख से नब्बे दिन के भीतर रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करेगा;
(ख) जब तक उसने रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन न किया हो और रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त न कर दिया गया हो, ऐसे प्रारंभ की तारीख से एक सौ अस्सी दिन की समाप्ति पर उस कारबार में नहीं लगेगा ।
4. रजिस्ट्रीकरण के अनुदान या नवीकरण के लिए आवेदन-(1) कोई व्यक्ति, जो सामान्य वाहक के कारबार में लगा हुआ है या लगने का आशय रखता है, सामान्य वाहक के कारबार को करने के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अनुदान या नवीकरण के लिए रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को आवेदन करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आवेदन, उस क्षेत्र में, जिसमें आवेदक निवास करता है या उसके कारबार का प्रधान स्थान है, अधिकारिता रखने वाले रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को, यह कथन करते हुए कि आवेदन मुख्य कार्यालय के लिए है, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को संदेय, ऐसी फीस के साथ जो विहित की जाए, किया जाएगा ।
(3) मुख्य कार्यालय के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अनुदान या नवीकरण के लिए किसी आवेदन में, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की, जिसमें मुख्य कार्यालय को ऐसे प्ररूप और रीति में जो विहित की जाए, रजिस्ट्रीकृत किया जाना है, अधिकारिता के बाहर प्रचालित किया जाने वाला शाखा कार्यालय, यदि कोई हो, के ब्यौरे अन्तर्विष्ट होंगे:
परन्तु किसी शाखा कार्यालय को खोलने या बन्द करने के प्रयोजन के लिए कोई आवेदन उस रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को किया जाएगा, जिसकी मुख्य कार्यालय पर अधिकारिता है ।
(4) रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त या नवीकृत करने से पूर्व अपना यह समाधान करेगा कि आवेदक ऐसी शर्तों को, जो विहित की जाएं, पूरा करता है ।
(5) रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर और अपना यह समाधान करने के पश्चात् कि आवेदक उपधारा (4) की अपेक्षाओं को पूरा करता है, सामान्य वाहक के कारबार को करने के लिए, ऐसे प्ररूप में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त करेगा या उसे नवीकृत करेगा:
परन्तु किसी रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अनुदान या नवीकरण के लिए कोई आवदेन रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा, जब तक आवदेक को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो और ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा ऐसी नामंजूरी के कारण लिखित में न दे दिए गए हों:
परन्तु यह और कि यदि ऐसी नामंजूरी की संसूचना आवेदन की तारीख से साठ दिन के भीतर नहीं दी गई है तो रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी तीस दिन की और अवधि के भीतर रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त या नवीकृत करेगा ।
(6) उपधारा (5) के अधीन अनुदत्त या नवीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र में विभिन्न राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में चलाए जाने वाले शाखा कार्यालयों के ब्यौरे अंतर्विष्ट होंगे और वह, यथास्थिति, ऐसे अनुदान या नवीकरण की तारीख से दस वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य होगा:
परन्तु उपधारा (3) में निर्दिष्ट शाखा कार्यालयों के संबंध में रजिस्ट्रीकरण की दशा में, ऐसे रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता, मुख्य कार्यालय के संबंध में अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता तक निर्बंधित होगी ।
(7) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का धारक-
(क) ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, एक रजिस्टर रखेगा;
(ख) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र में उल्लिखित मुख्य कार्यालय को स्थानांतरित करने के लिए उस रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को आवेदन देगा, जिसने रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया था:
परन्तु ऐसा रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के भीतर मुख्य कार्यालय स्थानांतरित करने की मंजूरी देगा या नामंजूर करेगा और मुख्य कार्यालय स्थानांतरित करने के लिए किसी आवेदन को तभी नामंजूर किया जाएगा जब आवेदक को सुने जाने का अवसर दे दिया गया हो और रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा ऐसी नामंजूरी के कारण लिखित में दिए गए हों:
परन्तु यह और कि रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा तीस दिन के भीतर अनुमति न दिए जाने या इंकार न किए जाने की दशा में यह समझा जा सकेगा कि स्थानांतरण की अनुमति दे दी गई है ।
(ग) उस रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को, जिसकी अधिकारिता के अधीन मुख्य कार्यालय अवस्थित है, तथा सड़क परिवहन और राजमार्गों से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग के परिवहन अनुसंधान खंड को, प्रत्येक वर्ष की इकतीस मार्च के पश्चात् एक सौ बीस दिन के भीतर ऐसी सूचना और विवरणी प्रस्तुत करेगा, जो विहित की जाए;
(घ) अपने या उसके मुख्य कार्यालय और प्रत्येक शाखा कार्यालय में, यदि कोई हो, सहजदृश्य स्थान पर रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की मूल प्रति या संबंधित रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, नोटेरी या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा अनुप्रमाणित उसकी प्रमाणित प्रति प्रदर्शित करेगा ।
(8) कोई सामान्य वाहक, मोटर यान में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र में उल्लिखित उस सकल यान भार से अधिक भार नहीं लादेगा, जिसका रजिस्ट्रीकरण संख्यांक माल प्रेषण टिप्पण या माल रसीद में वर्णित है और सामान्य वाहक ऐसे वाहन में सकल यान भार से अधिक माल नहीं लादेगा या उसकी अनुमति नहीं देगा ।
5. रजिस्ट्रीकरण का निलंबन या रद्दकरण-(1) यदि रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का धारक धारा 4 की उपधारा (7) के किसी उपबंध का अनुपालन करने में असफल रहा है तो वह रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के धारक को रजिस्ट्रीकृत डाक या इलेक्ट्रानिक माध्यम से या किन्हीं सत्यापन योग्य माध्यमों द्वारा तीस दिन की अवधि के भीतर उसका सुधार करने की सूचना दे सकेगा और यदि ऐसा धारक ऐसा करने में असफल रहता है तो वह जांच के पूरा होने पर रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को प्रतिसंहृत कर सकेगा ।
(2) यदि रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा किसी परेषक से निम्नलिखित के संबंध में सामान्य वाहक के विरुद्ध कोई शिकायत प्राप्त की जाती है, -
(i) माल की रसीद का जारी न किया जाना;
(ii) परेषक या परेषिती द्वारा पूछे जाने पर अभिवहन में माल के पते-ठिकाने का अप्रकटन;
(iii) विधिमान्य कारणों के बिना परिदान के लिए माल को निरुद्ध रखना;
(iv) परिदान के समय अयुक्तियुक्त अतिरिक्त प्रभारों की मांग, जो पूर्व में प्रकट नहीं किए गए थे या परेषक और परेषिती के बीच करार नहीं पाए गए थे;
(v) ट्रक के स्वामियों को, सहमत किए गए और संदेय प्रभारों का असंदाय,
तो वह रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के धारक को रजिस्ट्रीकृत डाक या इलेक्ट्रानिक माध्यम से या किसी अन्य सत्यापन योग्य माध्यमों द्वारा तीस दिन की अवधि के भीतर उसका सुधार करने की सूचना दे सकेगा और यदि ऐसा धारक ऐसा करने में असफल रहता है तो वह नियमों के अधीन किसी ऐसी अवधि में, जो विहित की जाएं, जांच के पूरा होने पर रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को प्रतिसंहृत कर सकेगा ।
(3) यदि रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी या मोटर अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के अधीन इस प्रकार प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी को धारा 4 की उपधारा (8) के उपबंध के अतिक्रमण का सबूत प्राप्त हुआ है तो वह सामान्य वाहक पर मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 194 के अधीन विहित शास्ति अधिरोपित करने के लिए इस तथ्य के होते हुए भी सक्षम होगा कि ऐसी शास्ति, यथास्थिति, माल यान के ड्राइवर या स्वामी या परेषक पर पहले ही अधिरोपित की जा चुकी हैं और उससे वसूल की जा चुकी हैं ।
(4) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के प्रतिसंहरण की कोई कार्रवाई उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन तभी की जाएगी जब रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के धारक को जांच में सुने जाने का अवसर दे दिया गया हो और रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा ऐसी कार्रवाई के कारणों को लिखित में दे दिया गया हो ।
(5) वह रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, जिसकी अधिकारिता के भीतर सामान्य वाहक का मुख्य कार्यालय अवस्थित है, उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन कार्रवाई करने के लिए सक्षम होगा और ऐसा कोई अन्य रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, जिसकी जानकारी में अतिक्रमण आए हैं या जिसने उक्त उपधाराओं के अधीन शिकायतें प्राप्त की हैं, उस मामले की रिपोर्ट मुख्य कार्यालय पर अधिकारिता रखने वाले रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को करेगा ।
(6) जब रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत किया जाता है तो रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का धारक तीस दिन की अवधि के भीतर रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अभ्यर्पित करेगा और रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के धारक के लिए यह आवश्यक होगा कि वह रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के प्रतिसंहरण से पूर्व किसी परेषक से सामान्य वाहक द्वारा पहले से प्रतिगृहीत परेषणों की बाबत परिदान और संव्यवहार पूरा करे ।
(7) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का धारक किसी भी समय उस रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को प्रमाणपत्र अभ्यर्पित कर सकेगा, जिसने रजिस्ट्रीकरण अनुदत्त किया था और ऐसे अभ्यर्पण पर, रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के धारक से ऐसी घोषणा अभिप्राप्त करने के पश्चात् कि उसके विरुद्ध कोई दायित्व बकाया नहीं है और यदि वह दायी पाया जाता है तो ऐसे दायित्व का निर्वहन करेगा, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को प्रतिसंहृत करेगा:
परन्तु यदि अभ्यर्पण किसी शाखा कार्यालय के संबंध में है तो रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र से शाखा कार्यालय से संबंधित पृष्ठांकन का लोप कर दिया जाएगा और ऐसे लोप को मुख्य कार्यालय पर अधिकारिता रखने वाले रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा ऐसे अन्य प्राधिकारियों को जो विहित किए जाएं, अधिसूचित किया जाएगा ।
6. अपील-(1) इस अधिनियम के अधीन किसी रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अनुदान या नवीकरण से इन्कार करने वाले या रजिस्ट्रीकरण को निलंबित या प्रतिसंहृत करने वाले रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश की तारीख से साठ दिन के भीतर, मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 89 की उपधारा (2) के अधीन गठित राज्य परिवहन अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई अपील, किसी ज्ञापन के रूप में उसमें रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी के आदेश के संबंध में आक्षेप के आधार उपवर्णित करते हुए दो प्रतियों में की जाएगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी, जो विहित की जाए ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अपील के संबंध में मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 89 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंध, जहां तक हो सके, प्रत्येक अपील के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे, मानो पूर्वोक्त उपबंध इस अधिनियम द्वारा इस उपांतरण के अधीन रहते हुए अधिनियमित किए गए थे कि उसमें परमिट" के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह रजिस्ट्रीकरण" के प्रति निर्देश है ।
7. वार्षिक विवरणी का दिया जाना-राज्य परिवहन प्राधिकरण, प्रत्येक राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में संबंध में सड़क परिवहन और राजमार्गों से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग को प्रतिवर्ष, धारा 4 की उपधारा (7) के खंड (ग) के अधीन यथाविनिर्दिष्ट रजिस्ट्रीकरण के धारकों से प्राप्त विवरणियों के आधार पर, यथास्थिति, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में सामान्य वाहकों द्वारा वहन किए गए माल के ब्यौरे देते हुए एक समेकित वार्षिक विवरणी, प्रस्तुत करेगा ।
8. माल प्रेषण टिप्पण-(1) प्रत्येक परेषक, एक माल प्रेषण टिप्पण, ऐसे प्ररूप में और रीति से, जो विहित की जाए, निष्पादित करेगा, जिसमें परेषण के मूल्य और खतरनाक और परिसंकटमय प्रकृति के माल के बारे में एक घोषणा सम्मिलित होगी ।
(2) परेषक, माल प्रेषण टिप्पण में उसके द्वारा दी गई विशिष्टियों की शुद्धता के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) परेषक, सामान्य वाहक की माल प्रेषण टिप्पण पर विशिष्टियों की अशुद्धता या अपूर्णता के कारण, उसको हुई किसी नुकसानी के संबंध में क्षतिपूर्ति करेगा ।
9. माल रसीद-(1) कोई सामान्य वाहक, -
(क) ऐसी दशा में, जहां माल की लदाई परेषक द्वारा की जानी है, ऐसी लदाई के पूरा होने पर; या
(ख) किसी अन्य दशा में, उसके द्वारा माल स्वीकार करने पर, एक माल रसीद, ऐसे प्ररूप में और रीति से, जो विहित की जाए, जारी करेगा ।
(2) माल रसीद, तीन प्रतियों में जारी की जाएगी और मूल प्रति परेषक को दी जाएगी ।
(3) माल रसीद, माल के भार या माप या अन्य विशिष्टियों और उसमें कथित पैकेजों की संख्या का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगी ।
(4) माल रसीद में, सामान्य वाहक द्वारा, धारा 10 या धारा 11 के अधीन दायित्व के बारे में वचनबद्ध सम्मिलित होगा ।
10. सामान्य वाहक का दायित्व-(1) किसी परेषण की हानि या नुकसान के लिए सामान्य वाहक का दायित्व, तब तक ऐसी रकम तक सीमित होगा, जो परेषण के मूल्य, भाड़े और माल की प्रकृति, दस्तावेजों या वस्तुओं के संबंध में विहित की जाए, जब तक परेषक या इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति ने धारा 11 के अधीन सामान्य वाहक द्वारा नियत उच्चतर जोखिम दर का संदाय करने का अभिव्यक्त रूप से परिवचन न दिया हो ।
(2) किसी विलंब की दशा में, ऐसी अवधि के लिए, जो परेषक और सामान्य वाहक द्वारा और उनके बीच परस्पर करार पाई गई हो और माल प्रेषण टिप्पण में विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित की गई हो, जिसके अंतर्गत ऐसे परेषण की पारिणामिक हानि या नुकसान भी है, सामान्य वाहक का दायित्व, जहां ऐसी हानि, नुकसान या विलंब उस समय हुआ था, जब परेषण ऐसे वाहक के प्रभाराधीन था, भाड़ा प्रभारों की रकम तक सीमित होगा:
परंतु उस अवधि से, जो माल प्रेषण टिप्पण में करार पाई गई हो, परे का प्रतिकर, उपधारा (1) या धारा 11 के अनुसार संदेय होगा:
परंतु यह और कि सामान्य वाहक दायी नहीं होगा यदि ऐसा वाहक यह साबित कर देता है कि परेषण की ऐसी हानि या नुकसान अथवा उसके परिदान में विलंब उसकी या उसके सेवकों या अभिकर्ताओं की किसी त्रुटि या उपेक्षा के कारण नहीं हुआ था ।
11. परेषण के वहन के लिए सामान्य वाहक द्वारा उच्चतर जोखिम दर पर नियत की जाने वाली दरें-प्रत्येक सामान्य वाहक किसी विशिष्ट परेषण को वहन करने में उसके द्वारा वचनबंध किए गए उच्चतर जोखिम के लिए प्रभार की ऐसी दर पर संदाय करने की अपेक्षा कर सकेगा जो वह नियत करे और तत्समान रूप से उसका दायित्व उन निबंधनों के अनुसार होगा जो परेषक के साथ करार पाए जाएं:
परंतु ऐसे वाहक को प्रभार की अपनी सामान्य दर से उच्चतर दर पर संदाय का दावा करने के संबंध में उसे हकदार बनाने के लिए उसे अंग्रेजी और राज्य की जनभाषा में उस स्थान या परिसर में, जहां कि वह सामान्य वाहक का कारबार चलाता है, प्रभार की उच्चतर दर की मुद्रित या लिखित सूचना प्रदर्शित करनी चाहिए ।
12. सामान्य वाहक के दायित्व के लिए माफी देने को सीमित करने वाली शर्तें-प्रत्येक सामान्य वाहक किसी परेषण को हुई हानि या नुकसान के लिए, जहां ऐसी हानि या नुकसान सामान्य वाहक या उसके किसी सेवक अथवा अभिकर्ता के किसी आपराधिक कार्य के कारण उद्भूत होता है, माल के परेषण टिप्पण के अनुसार परेषक के प्रति दायी होगा ।
(2) सामान्य वाहक के विरुद्ध परेषण की हानि, नुकसान या अपरिदान के लिए लाए गए किसी वाद में वाद के लिए यह साबित करना आवश्यक नहीं होगा कि ऐसी हानि, नुकसान या अपरिदान सामान्य वाहक या उसके किसी सेवक या अभिकर्ता की उपेक्षा या आपराधिक कार्य के कारण हुआ था ।
(3) जहां कोई परेषण किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षा या संवीक्षा के लिए निरुद्ध किया गया है और ऐसी परीक्षा या संवीक्षा किए जाने पर यह पाया जाता है कि ऐसा कतिपय प्रतिषिद्ध माल या ऐसा माल, जिस पर देय कर संदत्त नहीं किया गया था या अपर्याप्त रूप से संदत्त किया गया था परेषक द्वारा सामान्य वाहक को सौंपा गया है जिसका वर्णन माल प्रेषण टिप्पण में नहीं किया गया है वहां ऐसी परीक्षा या संवीक्षा का खर्च परेषक द्वारा वहन किया जाएगा और सामान्य वाहक परेषण की परीक्षा या संवीक्षा के लिए ऐसे निरोध द्वारा कारित किसी हानि, नुकसान या क्षय के लिए दायी नहीं होगा :
परंतु यह साबित करने का भार सामान्य वाहक पर होगा कि माल प्रेषण टिप्पण का गलत वर्णन परेषक से प्राप्त किया गया था ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी" से ऐसा कोई व्यक्ति या प्राधिकारी अभिप्रेत है जो उस विधि के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के द्वारा या उसके अधीन माल की परीक्षा या संवीक्षा करने के लिए सशक्त हो ।
13. मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल के वहन के लिए उपबंध-(1) मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति का कोई माल सामान्य वाहक द्वारा ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसे रक्षोपायों का, जो विहित किए जाएं, अनुपालन करने के पश्चात् ही वहन किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(2) केन्द्रीय सरकार इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा, मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल को और परिवहन के अनुक्रम में मोटर यानों में वहन किए जाने वाले या ऐसे माल पर प्रदर्शित किए जाने वाले लेबल या लेबलों के वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
(3) प्रत्येक सामान्य वाहक, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे परेषण का, जिसमें मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति का माल हो, परिवहन आरंभ करने से पूर्व यह संवीक्षा करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह परेषण ऐसे माल के संबंध में किसी बीमा संविदा के अधीन ऐसी एक या अधिक बीमा पालिसियों द्वारा बीमा किया हुआ है जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या क्षति अथवा किसी संपत्ति या परेषण के नुकसान की दशा में, यदि कोई दुर्घटना होती है, तो अनुतोष का उपबंध किया गया हो ।
14. कतिपय वर्ग के माल के वहन को प्रतिषिद्ध करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, लोकहित में ऐसे माल या माल वर्ग या वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनका सामान्य वाहक द्वारा वहन नहीं किया जाएगा ।
15. परेषिती के व्यतिक्रम की दशा में सामान्य वाहक का अधिकार-(1) यदि परेषिती माल के किसी परेषण का परिदान सामान्य वाहक द्वारा दी गई सूचना की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर लेने में असफल रहता है तो ऐसे परेषण को अदावाकृत समझा जाएगा:
परंतु विनश्वर परेषण की दशा में तीस दिन की अवधि लागू नहीं होगी और परेषण, सूचना की तामील के चौबीस घंटे की अवधि के पश्चात् या किसी ऐसी कम अवधि के पश्चात् जिस पर सामान्य वाहक और परेषिती के बीच पारस्परिक करार पाया गया हो, अदावाकृत समझा जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी अदावाकृत परेषण की दशा में, -
(क) सामान्य वाहक को, यदि ऐसा परेषण विनश्वर प्रकृति का है तो परेषण का विक्रय करने का अधिकार हो सकेगा; या
(ख) सामान्य वाहक, यदि ऐसा परेषण विनश्वर प्रकृति का नहीं है तो परेषिती को या यदि परेषिती उपलब्ध नहीं है तो परेषक को सूचना की तामील उससे यह अपेक्षा करते हुए कराएगा कि वह सूचना की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर माल हटा ले और सूचना के अनुपालन में असफल रहने की दशा में सामान्य वाहक को, यथास्थिति, परेषिती या परेषक को कोई और सूचना दिए बिना ऐसे परेषण का विक्रय करने का अधिकार होगा ।
(3) सामान्य वाहक, उपधारा (2) के अधीन प्राप्त विक्रय आगमों में से शोध्य मालभाड़ा, भंडारकरण और अन्य प्रभारों, जिनके अंतर्गत विक्रय के लिए उपगत व्यय भी हैं, के बराबर राशि प्रतिधारित करेगा और ऐसे विक्रय आगमों का अतिशेष, यदि कोई हो, यथास्थिति, परेषिती या परेषक को दे दिया जाएगा ।
(4) जब तक सामान्य वाहक और परेषक के बीच अन्यथा करार न हुआ हो, परिदान लेने के समय सामान्य वाहक को संदेय भाड़े और अन्य प्रभारों का संदाय करने में परेषिती के असफल रहने की दशा में सामान्य वाहक, अपने शोध्यों की भागरूप में या पूर्णतः वसूली करने में, परेषण को निरुद्ध करने या उसका व्ययन करने के लिए हकदार होगा ।
16. वाद संस्थित करने के लिए सूचना-परेषण को हुई किसी हानि या नुकसान के लिए किसी सामान्य वाहक के विरुद्ध कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही तब तक संस्थित नहीं की जाएगी जब तक वाद या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित करने के पूर्व और परेषक द्वारा परेषण बुक किए जाने की तारीख से एक सौ अस्सी दिन के भीतर, सामान्य वाहक पर परेषण को हुई हानि या नुकसान की लिखित में सूचना की तामील नहीं कर दी जाती है ।
17. सामान्य वाहक का साधारण उत्तरदायित्व-इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, सामान्य वाहक निम्नलिखित किसी कारण के सिवाय वहन के लिए उसे सौंपे गए किसी परेषण के अभिवहन में उद्भूत हानि, नाश, नुकसान या क्षय अथवा उसके अपरिदान के लिए उत्तरदायी होगा, अर्थात्: -
(क) दैवकृत;
(ख) युद्धकृत या लोकशत्रुकृत;
(ग) बलवा और सिविल अशांति;
(घ) विधिक आदेशिका के अधीन गिरफ्तारी, अवरोध या अभिग्रहण;
(ङ) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा अथवा उस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीनस्थ किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित आदेश या निर्बन्धन अथवा प्रतिषेध:
परंतु सामान्य वाहक, परेषण की किसी हानि, नाश, नुकसान, क्षय या अपरिदान के लिए अपने उत्तरदायित्व में मुक्त नहीं होगा यदि सामान्य वाहक, परेषण के वहन में सम्यक् तत्परता और सावधानी का प्रयोग करता तो सामान्य वाहक ऐसी हानि, नाश, नुकसान या क्षय अथवा अपरिदान के बच सकता था ।
18. खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल या प्रतिषिद्ध माल के वहन, उसके अरजिस्ट्रीकरण संबंधी उल्लंघन के लिए दंड-(1) जो कोई धारा 3, धारा 13 के उपबंधों का या धारा 14 के अधीन जारी किसी अधिसूचना का उल्लंघन करेगा, वह प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और दूसरे या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(2) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कोई कंपनी है तो ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसे किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी और तद्नुसार दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए, -
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
19. अपराधों का शमन-(1) धारा 18 के अधीन किए गए किसी अपराध का, ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा और ऐसी राशि के लिए जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, शमन या तो अभियोजन संस्थित किए जाने के पूर्व या उसके पश्चात् किया जा सकेगा ।
(2) जहां किसी अपराध का, उपधारा (1) के अधीन शमन किया गया है वहां अपराधी को उन्मोचित कर दिया जाएगा और ऐसे अपराध के संबंध में उसके विरुद्ध आगे की कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
20. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टता और पूर्वमागी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या उनमें से किसी विषय के संबंध में उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) धारा 4 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन, मुख्य कार्यालय या शाखा कार्यालय के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का अनुदान करने या उसके नवीकरण के लिए आवेदन करने का प्ररूप और रीति तथा उसकी फीस;
(ख) पात्रता की अन्य शर्तें जो धारा 4 की उपधारा (4) के खंड (घ) के अधीन किसी आवेदक द्वारा पूरी की जानी अपेक्षित हैं;
(ग) धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन, वह प्ररूप जिसमें और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का अनुदान या नवीकरण किया जा सकेगा:
(घ) धारा 4 की उपधारा (7) के खंड (क) के अधीन रजिस्टर रखने का प्ररूप और रीति;
(ङ) धारा 4 की उपधारा (7) के खंड (ग) के अधीन वह सूचना और विवरणी जो रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी और परिवहन अनुसंधान खंड को दी जा सकेगी;
(च) धारा 6 की उपधारा (2) के अधीन अपील का ज्ञापन प्रस्तुत करने के लिए फीस;
(छ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन वह प्ररूप और रीति जिसमें परेषक द्वारा माल परेषण टिप्पण निष्पादित किया जाएगा;
(ज) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन वह प्ररूप और रीति जिसमें सामान्य वाहक, माल रसीद जारी करेगा:
(झ) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन किसी परेषण की हानि या नुकसान के लिए सामान्य वाहक का दायित्व;
(ञ) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल को ले जाने के लिए अनुपालन की जाने वाली प्रक्रिया और रक्षोपाय;
(ट) धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल का विनिर्देश और उनके परिवहन के दौरान मोटर यान में वहन किए जाने वाले या ऐसे माल पर लगाए जाने वाले या प्रदर्शित किए जाने वाले लेबल या लेबलों का वर्ग:
(ठ) कोई अन्य विषय, जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और धारा 14 के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, बनाए जाने या जारी की जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा या रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा/होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या वह अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा/जाएगी । किंतु नियम या अधिसूचना के निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
21. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों से संगत ऐसे उपबंध कर सकेगी जो उसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हैं:
परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समझा रखा जाएगा ।
22. निरसन और व्यावृत्ति-(1) वाहक अधिनियम, 1865(1865 का 3) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) वाहक अधिनियम, 1865 (1865 का 3) के निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई, जहां तक ऐसी कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के उपबंधों से संगत है इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी और तद्नुसार तब तक प्रवृत्त रहेगी जब तक इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या किसी कार्रवाई द्वारा उसे अतिष्ठित नहीं कर दिया जाता ।
(3) निरसन के प्रभाव के बारे में इस धारा में विशिष्ट मामलों के उल्लेख का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के साधारण प्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है या उसे प्रभावित करता है ।
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