परक्राम्य लिखत के बारे में उपधारणाएँ, NI Act, Section 118 ( NI Act, Section 118. Presumptions as to negotiable instruments of consideration )
परक्राम्य लिखत के बारे में उपधारणाएँ -- जब तक कि प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता, निम्नलिखित उपधारणाएं की जाएंगी -
(क) प्रतिफल के विषय में -- यह कि हर परक्राम्य लिखत प्रतिफलार्थ रचित या लिखी गई थी और यह कि हर ऐसी लिखत जब प्रतिगृहीत, पृष्ठांकित, परक्रामित या अन्तरित हो चुकी हो, तब वह प्रतिफलार्थ, प्रतिगृहीत, पृष्ठांकित, परक्रामित या अन्र्तारित की गई थी;
(ख) तारीख के बारे में -- यह कि ऐसी हर परक्राम्य लिखत जिस पर तारीख पड़ी है, ऐसी तारीख को रचित या लिखी गई थी।
(ग) प्रतिग्रहण के समय के बारे में -- यह कि हर प्रतिगृहीत विनिमय-पत्र उसकी तारीख के पश्चात् युक्तियुक्त समय के अंदर और उसकी परिपक्वता के पूर्व प्रतिगृहीत किया गया था;
(घ) अन्तरण के समय के बारे में -- यह कि परक्राम्य लिखत का हर अन्तरण उसकी परिपक्वता के पूर्व किया गया था; ।
(ङ) पृष्ठांकनों के क्रम के बारे में -- यह कि परक्राम्य लिखत पर विद्यमान पृष्ठांकन उस क्रम में किए गए थे जिसमें वे उस पर विद्यमान हैं;
(च) स्टाम्प के बारे में -- यह कि खोया गया बचन-पत्र, विनिमय–पत्र या चेक सम्यक् रूप से स्टाम्पित था;
(छ) यह कि धारक सम्यक्-अनुक्रम-धारक है -- यह कि परक्राम्य लिखत का धारक सम्यक् अनुक्रम-धारक है; परन्तु जहाँ कि लिखत उसके विधिपूर्ण स्वामी से या उसकी विधिपूर्ण अभिरक्षा रखने वाले किसी व्यक्ति से अपराध या कपट द्वारा अभिप्राप्त की गई अथवा उसके रचयिता या प्रतिगृहीता से अपराध या कपट द्वारा अभिप्राप्त या विधि विरुद्ध प्रतिफल के लिए अभिप्राप्त की गई है, वहाँ यह साबित करने का भार कि धारक सम्यक्-अनुक्रम-धारक है, उस पर है।