प्रतिकर के बारे में नियम, NI Act, Section 117 ( NI Act, Section 117. Rules as to compensation )
प्रतिकर के बारे में नियम -- धारक या किसी पृष्ठांकिती के प्रति दायित्वाधीन किसी भी पक्षकार द्वारा वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक का अनादर किए जाने की दशा में देय प्रतिकर निम्नलिखित नियमों द्वारा अवधारित किया जायेगा -
(क) धारक लिखत पर शोध्य रकम, उसे उपस्थापित करने, और टिप्पणित और प्रसाक्ष्यित कराने में उचित तौर पर उपगत व्ययों सहित पाने का हकदार है;
(ख) जब कि भारित व्यक्ति उस स्थान से भिन्न स्थान में रहता है जिसमें कि लिखत देय थी तब धारक ऐसी रकम दोनों स्थानों के बीच विनिमय की चालू दर पर पाने का हकदार है;
(ग) जिस पृष्ठांकक ने दायित्वाधीन होते हुए उस पर शोध्य रकम का संदाय किया है वह ऐसी संदत्त रकम संदाय की तारीख से उसके निविदान या आपन की तारीख तक 'अठारह प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज सहित तथा अनादर और संदाय के कारण हुए सब व्ययों सहित पाने का हकदार है;
(घ) जब कि भारित व्यक्ति और ऐसा पृष्ठांकक विभिन्न स्थानों में निवास करते हैं, तब पृष्ठांकक ऐसी रकम दोनों स्थानों के बीच विनिमय की चालू दर पर पाने का हकदार है;
(ङ) प्रतिकर का हकदार पक्षकार अपने को देय प्रतिकर के दायित्वाधीन पक्षकार पर, दर्शन पर या माँग पर संदेय विनिमय-पत्र अपने द्वारा उचित तौर पर उपगत सब व्ययों सहित अपने को शोध्य रकम के लिए लिख सकेगा । ऐसे विनिमय-पत्र के साथ अनादृत लिखत और उसका प्रसाक्ष्य (यदि कोई हो) होना चाहिए। यदि ऐसा विनिमय-पत्र अनादृत किया जाता है तो उसको अनादर करने वाला पक्षकार उसके लिए प्रतिकर उसी प्रकार से देने के लिए दायित्वाधीन है जैसा कि वह मूल विनिमय-पत्र की दशा में होता है।