जबकि चेक सम्यक् रूप से उपस्थापित नहीं किया गया और लेखीवाल को तद्वारा नुकसान हुआ, NI Act Section 84 ( NI Act, Section 84. When cheque not duly presented any drawer damaged thereby )
बकि चेक सम्यक् रूप से उपस्थापित नहीं किया गया और लेखीवाल को तद्वारा नुकसान हुआ --- (1) जहाँ कि चेक, उसके काटे जाने से युक्तियुक्त समय के अंदर संदाय के लिए उपस्थापित न किया जाए और जहाँ तक लेखीवाल या जिस व्यक्ति लेखे वह लिखा गया है उस व्यक्ति और बैंकार के बीच का सम्बन्ध है, वहाँ तक लेखीवाल या ऐसे व्यक्ति को उस समय, जबकि वह उपस्थापित किया जाना चाहिए था, यह अधिकार प्राप्त था कि चेक का संदाय किया जाए और वह विलम्ब के कारण वास्तव में नुकसान उठाता है वहाँ वह ऐसे नुकसान की मात्रा तक उन्मोचित हो जाता है, अर्थात् उस मात्रा तक जिस तक ऐसा लेखीवाल या व्यक्ति उस रकम से अधिक के लिए बैंकार का लेनदार है, जिस रकम का लेनदार वह होता यदि चेक का संदाय कर दिया गया होता ।
(2) यह अवधारण करने के लिए कि युक्तियुक्त समय क्या है लिखत की प्रकृति को, व्यापार और बैंकारों की प्रथा को और उस विशिष्ट मामले के तथ्यों को ध्यान में रखा जाएगा ।
(3) उस चेक का धारक, जिसकी बाबत् ऐसा लेखीवाल या व्यक्ति ऐसे उन्मोचित हो गया है, ऐसे लेखीवाल या व्यक्ति के बदले में ऐसे बैंकार का ऐसे उन्मोचन की मात्रा तक लेनदार और उससे उस रकम को वसूल करने का हकदार होगा ।
दृष्टान्त
(क) क 1,000 रुपये के लिए चेक लिखता है, और जब उपस्थापित किया जाना चाहिए था उस समय बैंक में उसके संदाय के लिए उसका रुपया है । चेक उपस्थापित किए जाने से पूर्व बैंक फैल हो जाता है । लेखीवाल उन्मोचित हो जाता है किन्तु धारक चेक की रकम के लिए बैंक के विरुद्ध अपना दावा साबित कर सकता है ।
(ख) क अम्बाले में एक चेक कलकत्ते के एक बैंक पर लिखता है । चेक के सम्यक्-अनुक्रम में उपस्थापित किए जाने से पूर्व बैंक फैल हो जाता है । क उन्मोचित नहीं होता क्योंकि चेक के उपस्थापित करने में किसी विलम्ब से उसे वास्तविक नुकसान नहीं उठाना पड़ा ।