संदाय या तुष्टि होने तक लिखत परक्राम्य है -- परक्राम्य लिखत तब तक परक्रामित की जा सकेगी, जब तक रचयिता, ऊपरवाल या प्रतिगृहीता द्वारा उसका संदाय या तुष्टि परिपक्वता पर या के पश्चात् न कर दी गई हो किन्तु ऐसे संदाय या तुष्टि के पश्चात् नहीं; परन्तु परिपक्वता के पश्चात् वह उसके रचयिता, ऊपरवाल या प्रतिगृहीता द्वारा परक्रामित न की जा सकेगी ।