अनादर के या अतिशोध्य होने के पश्चात् अर्जित लिखत -- परक्राम्य लिखत के उस धारक को जिसने उसे अप्रतिग्रहण या असंदाय द्वारा उसके अनादर के पश्चात् उसकी सूचना सहित या परिपक्वता के पश्चात् अर्जित किया है, उस पर अन्य पक्षकारों के विरुद्ध केवल वे ही अधिकार प्राप्त हैं जो उसके अंतरक के थे ।
सौकर्य पत्र या विपत्र -- परन्तु जो कोई भी व्यक्ति सद्भावपूर्वक और प्रतिफलार्थ किसी ऐसे वचनपत्र या विनिमय-पत्र का धारक उनकी परिपक्वता के पश्चात् हो जाता है जो प्रतिफल के बिना इस प्रयोजन से रचा, लिखा या प्रतिगृहीत किया गया था कि उसका कोई पक्षकार उसके आधार पर धन ले सकने के लिए समर्थ हो जाए वह किसी भी पूर्विक पक्षकार से उस वचन-पत्र या विनिमय-पत्र की रकम वसूल कर सकेगा ।