भारतीय दंड संहिता की धारा 462 के अनुसार, जो कोई ऐसा बंद पात्र, जिसमें संपत्ति हो, या जिसमें संपत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किए जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा या उपबंधित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
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| किसी भी बंद पात्र युक्त या किसी भी संपत्ति को नियंत्रित करने के लिए माना जाता है के साथ सौंपा जा रहा है, और धोखे से उसी खोलने | 3 साल या जुर्माना या दोनों | संज्ञेय | जमानतीय | कोई भी मजिस्ट्रेट |

