Thursday, 30, Apr, 2026
 
 
 
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अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना, CrPC, Section 330 ( CrPC Section 330. Release of lunatic pending investigation or trial )


 

अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना-(1) जब कभी कोई व्यक्ति धारा 328 या धारा 329 के अधीन चित्त-विकृति या मानसिक मंदता के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तब, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय, चाहे मामला ऐसा हो जिसमें जमानत ली जा सकती है या ऐसा न हो, ऐसे व्यक्ति को जमानत पर छोड़े जाने का आदेश देगा :

परंतु अभियुक्त ऐसी चित्त-विकृति या मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो अंतरंग रोगी उपचार के लिए समादेशित नहीं करती हो और कोई मित्र या नातेदार किसी निकटतम चिकित्सा सुविधा से नियमित बाह्य रोगी मनःचिकित्सा उपचार कराने और उसे अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित रखने का वचन देता है ।

(2) यदि मामला ऐसा है जिसमें, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय की राय में, जमानत नहीं दी जा सकती या यदि कोई समुचित वचनबंध नहीं दिया गया है तो वह अभियुक्त को ऐसे स्थान में रखे जाने का आदेश देगा, जहां नियमित मनःचिकित्सा उपचार कराया जा सकता है और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा :

परंतु पागलखाने में अभियुक्त को निरुद्ध किए जाने के लिए कोई आदेश राज्य सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14) के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा  नहीं ।

(3) जब कभी कोई व्यक्ति धारा 328 या धारा 329 के अधीन चित्त-विकृति या मानसिक मंदता के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तब, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय कारित किए गए कार्य की प्रकृति और चित्त-विकृति या मानसिक मंदता की सीमा को ध्यान में रखते हुए आगे यह अवधारित करेगा कि क्या अभियुक्त को छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है :

परंतु- 

(क) यदि चिकित्सा राय या किसी विशेषज्ञ की राय के आधार पर, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 328 या धारा 329 के अधीन उपबंधित रीति में अभियुक्त के उन्मोचन का आदेश करने का विनिश्चय करता है तो ऐसे छोड़े जाने का आदेश किया जा सकेगा, यदि पर्याप्त प्रतिभूति दी जाती है कि अभियुक्त को अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित किया जाएगा ;

(ख) यदि, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय की यह राय है कि अभियुक्त के उन्मोचन का आदेश नहीं दिया जा सकता है तो अभियुक्त को चित्त-विकृति या मानसिक मंदता के व्यक्तियों के लिए आवासीय सुविधा में अंतरित करने का आदेश दिया जा सकता है जहां अभियुक्त की देखभाल की जा सके और समुचित शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जा सके

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