Wednesday, 10, Jun, 2026
 
 
 
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धारा 214 आईपीसी - अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन , IPC Section 214 ( IPC Section 214. Offering gift or restoration of property in consideration of screening offender )


 

भारतीय दंड संहिता की धारा 214 के अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली
1 1955 के अधिनियम सं. 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा (1-1-1956 से) आजीवन निर्वासन के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
2 1894 के अधिनियम सं0 3 की धारा 7 द्वारा अंतःस्थापित ।
3 1951 के अधिनियम सं0 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा राज्यों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4 1955 के अधिनियम सं0 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा आजीवन निर्वासन के स्थान पर प्रतिस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 42
कार्यवाही न की जाने के लिए प्रतिफलस्वरूप कोई परितोषण देगा या दिलाएगा या देने या दिलाने की प्रस्थापना या करार करेगा, या 1[कोई संपत्ति प्रत्यावर्तित करेगा या कराएगा] ;
यदि अपराध मॄत्यु से दंडनीय हो-- यदि वह अपराध मॄत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ;
यदि आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय हो--तथा यदि वह अपराध 2[आजीवन कारावास] से या दस वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ;
तथा यदि वह अपराध दस वर्ष से कम तक के कारावास से दंडनीय हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से इतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
3[अपवाद--धारा 213 और 214 के उपबंधों का विस्तार किसी ऐसे मामले पर नहीं है, जिसमें कि अपराध का शमन विधिपूर्वक किया जा सकता है ।]

अपराध सजा संज्ञेय जमानत विचारणीय

उपहार या स्क्रीनिंग अपराधी के विचार में संपत्ति की बहाली की पेशकश, अगर अपराध पूंजी हो

यदि आजीवन कारावास या 10 साल के लिए कारावास के साथ दंडनीय    

यदि 10 साल से कम के लिए कारावास के साथ दंडनीय

7 साल + जुर्माना

3 साल + जुर्माना

अपराध या जुर्माना या दोनों का एक चौथाई

संज्ञेय

असंज्ञेय

असंज्ञेय

जमानती

जमानती

जमानती

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