भारतीय दंड संहिता की धारा 120ख के अनुसार, (1) जो कोई मॄत्यु, 2[आजीवन कारावास] या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने के आपराधिक षड््यंत्र में शरीक होगा, यदि ऐसे षड््यंत्र के दंड के लिए इस संहिता में कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है, तो वह उसी प्रकार दंडित किया जाएगा, मानो उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था ।
(2) जो कोई पूर्वोक्त रूप से दंडनीय अपराध को करने के आपराधिक षड््यंत्र से भिन्न किसी आपराधिक षड््यंत्र में शरीक होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से अधिक की नहीं होगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

