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चलचित्र अधिनियम, 1952 ( Cinematograph Act, 1952 )


 

चलचित्र अधिनियम, 1952

(1952 का अधिनियम संख्यांक 37)

[21 मार्च, 1952]

प्रदर्शन के लिए चलचित्र फिल्मों के प्रमाणन का और

चलचित्रों के प्रदर्शन को विनियमित करने

का उपबंध करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

भाग 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चलचित्र अधिनियम, 1952 है ।

(2) भाग 1, भाग 2 और भाग 4 का विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है तथा भाग 3 का विस्तार केवल  [संघ राज्यक्षेत्रों]             पर है । 

(3) यह अधिनियम उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे :

 [परन्तु भाग 1और भाग 2 का जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवर्तन, चलचित्र (संशोधन) अधिनियम, 1973 के प्रारम्भ के पश्चात्, उसी तारीख को होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।]

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) “वयस्क" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अपना अठाहरवां वर्ष पूरा कर लिया हो ;

 [(ख) “बोर्ड" से धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा गठित फिल्म प्रमाणीकरण बोर्ड अभिप्रेत है ;]

 [(खख) “प्रमाणपत्र" से धारा 5क के अधीन बोर्ड द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र अभिप्रेत है ;]

(ग) “चलचित्र" के अन्तर्गत चलचित्रों या चित्रावलियों का प्रदर्शन करने वाला साधित्र भी है ;

(घ) प्रेसिडेंसी नगर के संबंध में किसी “जिला मजिस्ट्रेट" से पुलिस आयुक्त अभिप्रेत है ;

 [(घघ) “फिल्म" से चलचित्र फिल्म अभिप्रेत है ;]

(ङ) “स्थान" के अन्तर्गत गृह, भवन, टेंट और प्रत्येक परिवहन है चाहे वह भूमि का हो या समुद्र का या वायु का ;

(च) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

  [(छ) “प्रादेशिक अधिकारी" से धारा 5 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त प्रादेशिक अधिकारी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अपर प्रादेशिक अधिकारी और सहायक प्रादेशिक अधिकारी भी है ;

(ज) “अधिकरण" से धारा 5घ के अधीन गठित अपील अधिकरण अभिप्रेत है ।]

 [2क. किसी ऐसी विधि के प्रति जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति जो उस राज्य में विद्यमान नहीं है, निर्देशों का अर्थान्वयन-इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति जो उस राज्य में विद्यमान नहीं है, किसी निर्देश का उस राज्य के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त ततस्थानी विधि के प्रति या उस राज्य में विद्यमान तत्सम कृत्यकारी के प्रति निर्देश है ।]

भाग 2

सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों का प्रमाणन

 [3. फिल्म सेंसर बोर्ड-(1) फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी देने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा  [फिल्म प्रमाणीकरण बोर्ड] नामक एक बोर्ड गठित कर सकेगी जिसका गठन एक अध्यक्ष तथा  [कम से कम बारह और अधिक से अधिक पच्चीस] सदस्यों से होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ।

(2) बोर्ड का अध्यक्ष ऐसा वेतन और भत्ते प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएं और अन्य सदस्य बोर्ड के अधिवेशनों में भाग लेने के लिए ऐसे भत्ते या फीस प्राप्त करेंगे जो विहित की जाए ।

(3) बोर्ड के सदस्यों की सेवा के अन्य निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।]

4. फिल्मों का परीक्षण-(1) कोई व्यक्ति, जो किसी फिल्म को प्रदर्शित करना चाहता है, उसकी बाबत प्रमाणपत्र के लिए बोर्ड को विहित रीति से आवेदन करेगा और बोर्ड उस फिल्म का विहित रीति में परीक्षण करने या परीक्षण करवाने के पश्चात्,-

                                (i) उस फिल्म को अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी दे सकेगा :  ***

 [परन्तु फिल्म की किसी विषय-वस्तु को ध्यान में रखते हुए, यदि बोर्ड की राय में इस बात की चेतावनी देना आवश्यक है कि 12 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को ऐसी फिल्म को देखने के लिए अनुज्ञात किया जाए अथवा नहीं, इस प्रश्न पर ऐसे बालक के माता-पिता या संरक्षक द्वारा विचार किया जाना चाहिए, तो बोर्ड ऐसी फिल्म को उस आशय के पृष्ठांकन सहित अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी दे सकेगा ; या]

(ii) उस फिल्म को वयस्कों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी दे सकेगा ; या]

 [(iiक) फिल्म की प्रकृत्ति, अन्तर्वस्तु और मूल भाव को ध्यान में रखते हुए ऐसी फिल्म को किसी वृत्ते के सदस्यों या किसी वर्ग के व्यक्तियों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रर्दशन के लिए मंजूरी दे सकेगा ; या]

 [(iii) पूर्वगामी खण्डों में से किसी के अधीन फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी देने से पूर्व फिल्म में ऐसी काटछांट या उपान्तर जो वह आवश्यक समझे, करने के लिए आवेदक को निदेश दे सकेगा : याट

(iv) उस फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी देने से इन्कार कर सकेगा ।

                (2) उपधारा (1) के  [खण्ड (त्) के परन्तुक, खण्ड (त्त्), खण्ड (त्त्क), खण्ड (त्त्त्) या खण्ड (त्ध्)] के अधीन बोर्ड द्वारा कोई कार्यवाही आवेदक को उस मामले में अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देने के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नहीं ।

                5. सलाहकार पैनल(1) बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्ण निर्वहन करने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार ऐसे प्रादेशिक केन्द्रों पर जिन्हें वह ठीक समझे सलाहाकर पैनल स्थापित कर सकेगी जिनमें से प्रत्येक में उतने व्यक्ति, जो ऐसे व्यक्ति हों जो केन्द्रीय सरकार की राय में जनता पर फिल्म के प्रभाव को आंकने के लिए अर्हित हों, होंगे जितने केन्द्रीय सरकार उसमें नियुक्त करना ठीक समझे ।

                (2) प्रत्येक प्रादेशिक केन्द्र पर उतने प्रादेशिक अधिकारी होंगे जितने केन्द्रीय सरकार नियुक्त करना ठीक समझे और इस निमित्त बनाए गए नियमों में फिल्मों के परीक्षण में प्रादेशिक अधिकारियों के सहयुक्त किए जाने के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा ।

                (3) बोर्ड किसी ऐसी फिल्म के बारे में जिसकी बाबत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया है, किसी सलाहकार पैनल से ऐसी रीति से, जो विहित की जाए परामर्श कर सकेगा ।

                (4) प्रत्येक ऐसे सलाहकार पैनल का, चाहे वह निकाय के रूप में या समितियों के रूप में जिनके लिए इस निमित्त बनाए गए नियमों में उपबन्ध किया जाए, कार्य कर रहा हो, यह कर्तव्य होगा कि वह फिल्म का परीक्षण करे और बोर्ड को ऐसी सिफारिशें करें जो वह ठीक समझे ।

                (5) सलाहकार पैनल के सदस्य किसी वेतन के हकदार नहीं होंगे किन्तु उन्हें ऐसी फीस या भत्ते प्राप्त होंगे जो विहित किए जाए ।

                5क. फिल्मों का प्रमाणन- [(1) यदि विहित रीति से किसी फिल्म का परीक्षण करने के पश्चात् या उसका परीक्षण कराने के पश्चात् बोर्ड यह समझता है कि-

(क) कोई फिल्म, यथास्थिति, अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए या धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (त्) के परन्तुक में वर्णित प्रकृति के पृष्ठांकन सहित अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त है तो वह उस फिल्म की बाबत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को, यथास्थति, “अनिर्बन्धित" प्रमाणपत्र या “अनिर्बन्धित वयस्क" प्रमाणपत्र देगाः या

(ख) कोई फिल्म, अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त नहीं है, किन्तु केवल वयस्कों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त है या, यथास्थित, किसी वृत्ति के सदस्यों या किसी वर्ग के व्यक्तियों के लिए निर्बन्धित प्रदर्शन के लिए उपयुक्त है, तो वह उस फिल्म की बाबत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को, यथास्थित, “वयस्क" प्रमाणपत्र या “विशिष्ट" प्रमाणपत्र देगा ।

और उस फिल्म को विहित रीति से इस प्रकार चिह्नित कराएगा :

                परन्तु प्रमाणपत्र का आवेदक, कोइ वितरक या प्रदर्शक या कोई अन्य ऐसा व्यक्ति जिसे फिल्म के अधिकार संक्रान्त हो गए है, ऐसी फिल्म में, जिसके लिए खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन प्रमाणपत्र दिया गया है, अन्तर्विष्ट किसी विषय के बारे में अश्लीलता से संबंधित किसी विधि के अधीन दंड का दायी नहीं होगा ।]

                (2) किसी फिल्म की बाबत दिया गया प्रमाणपत्र या प्रमाणपत्र देने से इंकार करने वाला आदेश भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा ।

                (3) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन बोर्ड द्वारा दिया  गया प्रमाणपत्र भारत में सर्वत्र दस वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य होगा ।

                5ख. फिल्मों को प्रमाणित करने के लिए मार्गदर्शन के सिद्धांत-(1) यदि प्रमाणपत्र देने के लिए सक्षम प्राधिकारी की राय में कोई फिल्म या उसका कोई भाग  [भारत की प्रभुता और अखण्डता,] राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हित के विरुद्ध है या उससे न्यायालय की मानहानि या उसका अवमान होता है अथवा किसी अपराध के किए जाने का उद्दीपन संभाव्य है तो उस फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित नहीं किया जाएगा ।

                (2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन प्रमाणपत्र देने के लिए सक्षम प्राधिकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को मंजूरी देने में मार्गदर्शन करने वाले सिद्धांतों को उपवर्णित करते हुए ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

                 [5ग. अपीलें-(1) कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी फिल्म की बाबत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करता है और जो बोर्ड के -

(क)         प्रमाणपत्र देने से इन्कार करने वाले ; या

(ख)        केवल “वयस्क" प्रमाणपत्र देने वाले ; या

(ग)         केवल “विशिष्ट" प्रमाणपत्र देने वाले ; या

(घ)         केवल “अनिर्बन्धित वयस्क" प्रमाणपत्र देने वाले ; या

(ङ) आवेदक को कोई काटछांट या उपान्तर करने का निदेश देने वाले,

किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, अधिकरण को अपील कर सकेगा :

परन्तु यदि अधिकरण का समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी प्रर्याप्त हेतुक के कारण पूर्वोक्त तीस दिन की अवधि के भीतर अपील फाइल करने से निवारित हो गया था,  तो वह ऐसी अपील को तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर ग्रहण किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगा ।

                (2) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील लिखित याचिका द्वारा की जाएगी और उसके साथ उस आदेश के जिसके विरुद्ध अपील की गई है, संक्षिप्त कारणों का एक कथन, जहां अपीलार्थी को ऐसा कथन दिया गया है, होगा और एक हजार रुपए से अनधिक ऐसी फीस, जो विहित की जाए, होगी । ]

                 [5घ. अपील अधिकरण का गठन-(1) धारा 5ग के अधीन बोर्ड के आदेश के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अपील अधिकरण का गठन करेगी ।

                (2) अधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना, विनिर्दिष्ट करे ।

                (3) ऐसे अधिकरण का गठन एक अध्यक्ष और अधिक से अधिक चाय सदस्यों से होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ।

                (4) कोई व्यक्ति अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त होने के लिए तब तक अर्ह नहीं होगा जब तक वह किसी उच्च न्यायालय का अवकाश प्राप्त न्यायाधीश नहीं है या ऐसा व्यक्ति नहीं है जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के लिए अर्ह है । 

                (5) केन्द्रीय सरकार, ऐसे व्यक्तियों को जो उसकी राय में जनता पर फिल्मों के प्रभाव को जांचने के लिए अर्ह है, अधिकरण के सदस्य के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।

                (6) अधिकरण के अध्यक्ष को ऐसा वेतन और भत्ते दिए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकर द्वारा अवधारित किए जाएं और सदस्यों को ऐसे भत्ते या फीस दी जाएगी जो विहित की जाए ।

                (7) ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन अधिकरण के कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए एक सचिव और ऐसे अन्य कर्मचारियों की जो वह आवश्यक समझे नियुक्ति कर सकेगी ।

                (8) अधिकरण का सचिव और उसके अन्य कर्मचारी ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो अधिकरण के अध्यक्ष से परामर्श के पश्चात् विहित किए जाएं ।

                (9) अधिकरण के अध्यक्ष और उसके सदस्यों तथा सचिव और अन्य कर्मचारियों की सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।

                (10) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए अधिकरण अपनी प्रकिया स्वयं विनियमित कर सकेगा ।

                (11) अधिकरण, मामले में ऐसी जांच करने करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे और अपीलार्थी और बोर्ड को उस मामले में सुने जाने का अवसर देने के पश्चात् फिल्म की बाबत ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे और बोर्ड उस मामले का निपटारा ऐसे आदेश के अनुरूप करेगा ।

[स्लिप................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................

 

 

 

 

                                                                                                                                                                                .........................]

                5ङ. प्रमाणपत्र का निलम्बन और प्रतिसंहरण-(1) धारा 6 की उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस भाग के अधीन दिए गए प्रमाणपत्र को ऐसी अवधि के लिए निलंबित कर सकेगी जो वह ठीक समझे, या ऐसे प्रमाणपत्र को तब प्रतिसंहृत कर सकेगी यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि-

(i) वह फिल्म जिसकी बाबत प्रमाणपत्र दिया गया था उस रूप से भिन्न रूप में प्रदर्शित की जा रही थी जिसके लिए उसको प्रमाणित किया गया थाः या

(ii) उस फिल्म या उसके किसी भाग को इस भाग के या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के उल्लंघन में प्रदर्शित किया जा रहा है ।

                (2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना प्राकशित की गई है, वहां केन्द्रीय सरकार, प्रमाणपत्र के आवेदक से या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति से जिसे फिल्म के अधिकार संक्रांत हो गए है या दोनों से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वे बोर्ड को या उक्त अधिसूचना में

विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या प्राधिकारी को फिल्म की बाबत दिए गए प्रमाणपत्र और प्रमाणपत्रों की सभी दूसरी प्रतियां, यदि कोई हों, परिदत्त करें ।

                (3) इस धारा के अधीन कोई कार्रवाई संबंधित व्यक्ति को उस मामले में अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देने के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नहीं ।

                (4) इस धारा के अधीन कोई प्रमाणपत्र जिस अवधि के लिए निलम्बित किया जाता है उसके दौरान फिल्म अप्रमाणित फिल्म समझी जाएगी ।

                5च. केन्द्रीय सरकार द्वारा आदेशों का पुनर्विलोकन-(1) जहां प्रमाणपत्र का कोई आवेदक या कोई अन्य व्यक्ति, जिसे फिल्म के अधिकार संक्रांत हो गए हैं, धारा 5ङ के अधीन केन्द्रीय सरकार के किसी आदेश से व्यथित है वहां वह राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से साठ दिन के भीतर आदेश का पुनर्विलोकन करने के लिए केन्द्रीय सरकार को आवेदन कर सकेगा और ऐसे आवेदन में उन आधारों को उपवर्णित करेगा जिन पर वह ऐसा पुनर्विलोकन आवश्यक समझता है :

                परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि प्रमाणपत्र का आवेदक या कोई अन्य व्यक्ति पर्याप्त हेतुक से पूर्वोक्त साठ दिन की अवधि के भीतर पुनर्विलोकन के लिए आवेदन फाइल करने से निवारित हो गया था तो वह ऐसे आवेदन को साठ दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर फाइल किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगी ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर केन्द्रीय सरकार व्यथित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् और ऐसी अतिरिक्त जांच करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, अपने विनिश्चय की पुष्टि या उसका उपान्तर करने वाला या उसे उलटने वाला ऐसा आदेश पारित कर सकेगी जो वह ठीक समझे और बोर्ड उस मामले का निपटारा ऐसे आदेश के अनुरूप    करेगा ।]

                6. केन्द्रीय सरकार की पुनरीक्षण संबंधी शक्ति-(1) इस भाग में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार  [स्वप्रेरणा से किसी भी प्रक्रम पर] किसी फिल्म के संबंध में किसी ऐसी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगी जो बोर्ड के समक्ष लम्बित है या जिसका बोर्ड ने विनिश्चय कर दिया है  [या, यथास्थिति, अधिकरण ने विनिश्चय कर दिया है (किन्तु जिसके अन्तर्गत किसी ऐसे मामले से संबंधित कोई ऐसी कार्रवाई नहीं है जो अधिकरण के समक्ष लम्बित है)] और उस मामले में ऐसी जांच के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, उसके संबंध में ऐसा आदेश दे सकेगी जो वह ठीक समझे और बोर्ड उस मामले का निपटारा ऐसे आदेश के अनुरूप करेगा :

                परन्तु, यथास्थिति, प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति पर या ऐसे व्यक्ति पर जिसे प्रमाणपत्र दिया गया है, प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई भी आदेश, उसको उस मामले में अपने विचार प्रकट करने का अवसर देने के पश्चात् ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं :

 [परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोई बात केन्द्रीय सरकार से यह अपेक्षा नहीं करेगी कि वह ऐसे किसी तथ्य को प्रकट करे जिसे प्रकट करना वह लोकहित के विरुद्ध समझती है ।]

                (2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अपने को प्रदत्त शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि,-

(क) कोई फिल्म जिसे प्रमाणपत्र दिया गया है, सम्पूर्ण भारत या उसके किसी भाग में अप्रमाणित फिल्म समझी जाएगी ; या

(ख) कोई फिल्म जिसे “अनिर्बन्धित" प्रमाणपत्र 2[या “अनिर्बन्धित वयस्क" प्रमाणपत्र या “विशेष" प्रमाणपत्र] दिया गया है ऐसी फिल्म समझी जाएगी जिसकी बाबत “वयस्क" प्रमाणपत्र दिया गया है ; या

                                (ग) किसी फिल्म का प्रदर्शन ऐसी अवधि के लिए निलम्बित कर दिया जाए जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाए :

परन्तु खण्ड (ग) के अधीन जारी किया गया कोई निदेश अधिसूचना की तारीख से दो मास से अधिक प्रवृत्त          नहीं रहेगा ।

                (3) उपधारा (2) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन कोई भी कार्रवाई सम्पृक्त व्यक्ति को उस मामले में अपने विचार वयक्त करने का अवसर देने के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नही ।

                (4) उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन कोई फिल्म जिस अवधि के लिए निलम्बित की जाती है उसके दौरान वह फिल्म अप्रमाणित समझी जाएगी ।]

                 [6क. प्रमाणित फिल्मों की बाबत जानकारी और दस्तावेजों का वितरकों और प्रदर्शकों को दिया जाना-कोई व्यक्ति जो किसी वितरक या प्रदर्शक को कोई प्रमाणित फिल्म परिदत्त करता है, ऐसी रीति से जो विहित की जाए, यथास्थिति, उस वितरक या प्रदर्शक को फिल्म का शीर्षक, उसकी लम्बाई, उसकी बाबत दिए गए प्रमाणपत्र का संख्यांक और उसकी प्रकृति और वे शर्तें, यदि कोई हों, जिनके अधीन रहते हुए वह ऐसे दिया गया है तथा उस फिल्म की बाबत कोई अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं अधिसूचित करेगा ।]

 *                                            *                                             *                                             *                                             *

7. इस भाग के उललंघन के लिए शास्तियां- [(1) यदि कोई व्यक्ति,-

                                (क) किसी स्थान में,-

(i) उस फिल्म से भिन्न कोई फिल्म प्रदर्शित करेगा या प्रदर्शित करने की अनुमति देगा जो बोर्ड द्वारा अनिर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन या वयस्कों  [या किसी वृत्ति के सदस्यों या किसी वर्ग के व्यक्तियों] के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त प्रमाणित की गई है और जो जब प्रदर्शित की जाए तब बोर्ड के विहित चिह्न को संप्रदर्शित करती है और जब से उस पर वह चिह्न लगाया गया है तब से उसमें किसी भी रूप में कोई फेरफार या बिगाड़ नहीं किया गया है ;

(ii) किसी ऐसे व्यक्ति को जो वयस्क नहीं है कोई ऐसी फिल्म प्रदर्शित करेगा या प्रदर्शित करने की अनुमति देगा जो बोर्ड द्वारा वयस्कों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त प्रमाणित की गई है ;   ***

 [(iiक) कोई फिल्म, जो बोर्ड द्वारा किसी वृत्ति या किसी वर्ग के व्यक्तियों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त प्रमाणित की गई है, ऐसे व्यक्ति को प्रदर्शित करेगा या प्रदर्शित करने की अनुमति देगा जो ऐसी वृत्ति का सदस्य नहीं है या ऐसे वर्ग का सदस्य नहीं है : या ]

(ख) बिना किसी विधिपूर्ण प्राधिाकर के (जिसको साबित करने का भार उसी पर होगा) किसी फिल्म में, उसके प्रमाणित किए जाने के पश्चात् किसी भी रूप में फेरफार या बिगाड़ करेगा, या

(ग) धारा 6क के उपबन्ध का या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड को प्रदत्त शक्तियों या कृत्यों में से किसी का प्रयोग करते हुए उनके द्वारा किए गए किसी आदेश का अनुपालन नहीं करेगा,

  [तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, और जारी रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा :

                परन्तु कोई व्यक्ति, जो खंड (क) के उपखण्ड (i) के उपबन्धों के उल्लंघन में, कोई वीडियो फिल्म किसी स्थान में प्रदर्शित करेगा या प्रदर्शित करने की अनुमति देगा वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, और जारी रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा :

                परन्तु यह और कि कोई न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से जो निर्णय में वर्णित किए जाएंगे, तीन मास से कम की अवधि के कारावास या बीस हजार रुपए से कम के जुर्माने का दण्डादेश अधिरोपित कर सकेगा :]

 6[परन्तु यह और कि] दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 29 में किसी बात के होते हुए भी किसी महानगर मजिस्ट्रेट या किसी प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के लिए जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विशेष रूप में सशक्त करे, इस भाग के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए सिद्धदोष किसी व्यक्ति पर पांच हजार रुपए से अधिक के जुर्माने का दण्डादेश पारित करना विधिपूर्ण होगा :

[परन्तु यह भी कि] कोई वितरक या प्रदर्शक या किसी चलचित्र गृह का स्वामी या कर्मचारी इस भाग के अधीन अनिर्बन्धित वयस्क" के रूप में प्रमाणित किसी फिल्म पर चेतावनी के पृष्ठांकन की किसी शर्त के उल्लंघन के लिए दण्ड का दायी नहीं होगा ।]

(2) यदि कोई व्यक्ति किसी फिल्म के संबंध में अपने द्वारा किए गए किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है जो इस धारा के अधीन दण्डनीय है तो सिद्धदोष ठहराने वाला न्यायालय यह और निदेश दे सकेगा कि वह फिल्म सरकार को समपहृत हो जाएगी ।

(3) अपने माता-पिता या संरक्षकों के साथ आने वाले तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसी फिल्म का प्रदर्शन करना किसकी बाबत “वयस्क" प्रमाणपत्र  [या “विशिष्ट" प्रमाणपत्र या “अनिर्बन्धित-वयस्क" प्रमाणपत्र] दिया गया है, इस धारा के अर्थ में अपराध नहीं समझा जाएगा ।

 [7क. अभिग्रहण की शक्ति-(1) जहां कोई फिल्म जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, प्रदर्शित की जाती है, या वयस्कों के लिए निर्बन्धित सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त प्रमाणित की गई कोई फिल्म किसी ऐसे व्यक्ति को प्रदर्शित की जाती है जो वयस्क नहीं है या कोई फिल्म इस अधिनियम के अन्य उपबंन्धों में से किसी के या केन्द्रीय सरकार      [, अधिकरण] या बोर्ड द्वारा, अपने को प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करते हुए किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में प्रदर्शित की जाती है वहां कोई पुलिस अधिकारी  *** किसी ऐसे स्थान में जहां उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह फिल्म प्रदर्शित की गई है या की जा रही है या उसका प्रदर्शन किया जाना सम्भाव्य है, प्रवेश कर सकेगा, उसकी तलाशी ले सकेगा और उस फिल्म का अभिग्रहण कर सकेगा ।

(2) इस अधिनियम के अधीन सभी तलाशियां  [दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)] के ऐसे उपबन्धों के अनुसार की जाएंगी जो तलाशियों से संबंध रखते हैं ।

7ख. बोर्ड द्वारा शक्तियों का प्रत्यायोजन- [(1)] केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्रयोग की जा सकने वाली कोई शक्ति, प्राधिकार या अधिकारिता,  [इस भाग के अधीन फिल्मों के प्रमाणीकरण के संबंध में] और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जिन्हें आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी तथा अध्यक्ष या आदेश में विनिर्दिष्ट अन्य सदस्य द्वारा की गई कोई बात या कार्यवाही बोर्ड द्वारा की गई बात या कार्रवाई समझी जाएगी ।

 [(2) केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा, ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, प्रादेशिक अधिकारियों को अनन्तिम प्रमाणपत्र जारी करने के लिएण् प्रधिकृत कर सकेगी ।]

7ग. परीक्षण के लिए फिल्मों के प्रदर्शन का निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार  [अधिकरण] या बोर्ड इस अधिनियम द्वारा अपने को प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करने के प्रयोजन के लिए किसी फिल्म को अपने समक्ष या अपने द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट  [किसी व्यक्ति या प्राधिकारी] के समक्ष प्रदर्शित करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

7घ. रिक्तियों आदि से कार्यवाही का अविधिमान्य होना- [अधिकरण,] बोर्ड या किसी सलाहकार पैनल का कोई कार्य या कार्यवाही, यथास्थिति, 11[अधिकरण,ट बोर्ड या पैनल में किसी रिक्ति के या उसके गठन में किसी त्रुटि के कारण ही अविधिमान्य नहीं समझी जाएगी ।

7ङ. बोर्ड और सलाहकार पैनल के सदस्यों का लोक सेवक होना- [अधिकरण,] बोर्ड, और सलाहकार पैनल के सभी सदस्य जब वे इस अधिनियम के उपबन्धों में से किसी के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या जब उनका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।

7च. विधिक कार्यवाहियों का वर्जन-कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो  [केन्द्रीय सरकार, अधिकरण, बोर्ड,] सलाहकार पैनल अथवा, यथास्थिति,  [केन्द्रीय सरकार, अधिकरण, बोर्ड या] सलाहकार पैनल के किसी अधिकारी या सदस्य के विरुद्ध न होगी ।

8. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस भाग के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

 [(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इस धारा के अधीन बनाए गए नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :

(क)         बोर्ड के सदस्यों को संदेय भत्ते या फीसें ;

(ख)        बोर्ड के सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तें ;

(ग) बोर्ड को प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की रीति और ऐसी रीति जिसमें बोर्ड द्वारा किसी फिल्म का परीक्षण किया जाएगा और उसके लिए उद्गृहीत की जाने वाली फीसें ;

(घ) फिल्मों के परीक्षण में प्रादेशिक अधिकारियों को सहयोजित किया जाना, वे शर्तें और निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए, प्रादेशिक अधिकारी धारा 7ख के अधीन अनन्तिम प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्राधिकृत किए जा सकेंगे और ऐसे प्रमाणपत्रों की वैधता की अवधि ;

(ङ) वह रीति जिसमें बोर्ड किसी फिल्म के बारे में किसी सलाहकार पैनल से परामर्श कर सकेगा ;

(च) सलाहकार पैनल के सदस्यों को संदेय भत्ते या फीसें

(छ) फिल्मों को चिह्नित किया जाना ;

(ज) अधिकरण के सदस्यों को संदेय भत्ते या फीसें ;

(झ) अधिकरण के सचिव और अन्य कर्मचारियों की शक्तियां और उनके कर्तव्य ;

(ञ) अधिकरण के अध्यक्ष और उसके सदस्यों और सचिव तथा अन्य कर्मचारियों की सेवा के अन्य निबन्धन                 और  शर्तें ;

(ट) अधिकरण को अपीलार्थी द्वारा किसी अपील की बाबत संदेय फीसें ;

(ठ) वे शर्तें (जिनके अंतर्गत साधारणतया फिल्मों की लम्बाई या विशेषकर फिल्मों के किसी वर्ग से संबंधित शर्तें भी शामिल हैं) जिनके अधीन रहते हुए कोई प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा या वे परिस्थितियां जिनमें कोई प्रमाणपत्र  इन्कार किया जाएगा ;

(ङ) कोई अन्य विषय जिनका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किए जा सकेंगे ।

 [(3) इस भाग के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

9. छूट देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जिन्हें वह अधिरोपित करे किसी फिल्म या फिल्मों के किसी वर्ग के प्रदर्शन या निर्यात को इस भाग के या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के किन्हीं उपबंधों से छूट  दे सकेगी

भाग 3

चलचित्रों के प्रदर्शन का विनियमन

10. चलचित्र प्रदर्शनों का अनुज्ञप्त किया जाना-इस भाग में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, कोई भी व्यक्ति किसी चलचित्र के प्रदर्शन, इस भाग के अधीन अनुज्ञप्त स्थान से भिन्न किसी अन्य स्थान पर नहीं करेगा, या ऐसी अनुज्ञप्ति द्वारा अधिरोपित किन्हीं शर्तों और निर्बन्धनों का अनुपालन करके ही करेगा, अन्यथा नहीं ।

11. अनुज्ञापन प्राधिकारी-इस भाग के अधीन अनुज्ञप्तियां देने की शक्ति रखने वाला प्राधिकारी (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुज्ञापन प्राधिकारी कहा गया है) जिला मजिस्ट्रेट होगा :

परन्तु राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी सम्पूर्ण  [संघ राज्यक्षेत्र] या उसके किसी भाग के लिए, ऐसे अन्य अधिकारी को जिसे वह उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, इस भाग के प्रयोजनों के लिए अनुज्ञापन प्राधिकारी नियत कर सकेगी ।

12. अनुज्ञापन प्राधिकारी की शक्तियों पर निर्बन्धन-अनुज्ञापन प्राधिकारी इस इस भाग के अधीन तब तक कोई अनुज्ञप्ति नहीं देगा जब तक उसका यह समाधान नहीं हो जाता है कि-

                                (क) इस भाग के अधीन बनाए गए नियमों का पर्याप्त रूप से अनुपालन किया गया है, और

(ख) उस स्थान में जिसकी बाबत अनुज्ञप्ति दी जानी है, प्रदर्शनों के देखने के लिए उसमें उपस्थित होने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पूर्वावधानियां बरती गई हैं ।

(2) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों और राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए अनुज्ञापन प्राधिकारी, ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें वह प्राधिकारी, ठीक समझे तथा ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर तथा ऐसे निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह अवधारित करे, इस भाग के अधीन अनुज्ञप्तियां दे सकेगा ।

(3) इस भाग के अधीन अनुज्ञापन प्राधिकारी के ऐसे विनिश्चय से, जिससे अनुज्ञप्ति देने से इंकार किया गया हो, व्यथित कोई भी व्यक्ति राज्य सरकार को या ऐसे अधिकारी को जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, अपील कर सकेगा और, यथास्थति, वह राज्य सरकार या अधिकारी उस मामले में ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।

(4) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर सामान्यतया अनुज्ञप्तिधारियों को या विशिष्टतया किसी अनुज्ञप्तिधारी को किसी फिल्म या फिल्मों के किसी वर्ग के प्रदर्शन का विनियमन करने के प्रयोजन के लिए निदेश जारी कर सकेगी, ताकि वैज्ञानिक फिल्मों, शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए आशयित फिल्मों, समाचारों तथा सामयिक घटनाओं से संबंधित फिल्मों, वृत्तचित्रों या देशी फिल्मों को प्रदर्शन का पर्याप्त अवसर प्राप्त हो सके और जहां ऐसे कोई निदेश जारी किए गए हैं वहां वे निदेश ऐसी अतिरिक्त शर्तें और निबन्धन समझे जाएंगे जिनके अधीन रहते हुए अनज्ञति दी गई है ।

13. कतिपय दशाओं में फिल्मों के प्रदर्शन को निलम्बित करने की केन्द्रीय सरकार या स्थानीय प्राधिकारी की शक्ति-(1)  [सम्पूर्ण संघ राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के संबंध में, यथास्थिति, उपराज्यपाल या मुख्य आयुक्त और अपनी अधिकारिता के भीतर आने वाले जिले के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट, यदि उसकी यह राय है कि वहां जिस फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन किया जा रहा है उससे शांति भंग होना संभाव्य है तो, आदेश द्वारा, फिल्म का प्रदर्शन निलम्बित कर सकेगा और ऐसे निलम्बन के दौरान वह फिल्म, यथास्थिति, उस राज्य, भाग या जिले में अप्रमाणित फिल्म समझी जाएगी ।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश, यथास्थिति, किसी मुख्य आयुक्त या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया हो वहां उस आदेश की एक प्रति और उसके लिए कारणों का एक कथन, आदेश करने वाले व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को तुरन्त भेजा जाएगा और केन्द्रीय सरकार या तो उस आदेश की पुष्टि कर सकेगी या उसे प्रभावोन्मुक्त कर सकेगी ।

(3) इस धारा के अधीन किया गया कोई आदेश उसके दिए जाने की तारीख से दो मास की अवधि के लिए प्रवृत्त रहेगा, किन्तु यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि आदेश प्रवृत्त रहना चाहिए तो वह यह निदेश दे सकेगी कि निलम्बन की अवधि को इतनी अतिरिक्त अवधि द्वारा बढ़ाया जाए जितनी वह ठीक समझे ।

14. इस भाग के उल्लंघन के लिए शास्तियां-यदि इस भाग के या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के या उन शर्तों और निर्बन्धनों के, जिनके आधार पर या जिनके अधीन रहते हुए कोई अनुज्ञप्ति इस भाग के अधीन दी गई है, उल्लंघन में, किसी चलचित्र का स्वामी या भारसाधक व्यक्ति उसका प्रयोग करेगा या उसके प्रयोग की अनुज्ञा देगा अथवा किसी स्थान का स्वामी या अधिभोगी उस स्थान को प्रयोग करने की अनुज्ञा देगा तो वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, और जारी रहने वाले अपराध की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

15. अनुज्ञप्ति प्रतिसंहृत करने की शक्ति-जहां किसी अनुज्ञप्ति का धारक धारा 7 या धारा 14 के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया हो वहां वह अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा प्रतिसंहृत की जा सकेगी ।           

16. नियम बनाने की शक्ति- [(1)] केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,

(क) उन निबन्धनों, शर्तों और निर्बन्धनों, यदि कोई हों, जिनके अधीन रहते हुए इस भाग के अधीन अनुज्ञप्तियां दी जा सकेगी, विहित करने के लिए ;

(ख) लोक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलचित्र प्रदर्शनों के विनियमन का उपबन्ध करने के लिए ;

(ग) उस समय और उन शर्तों को, जिसके भीतर और जिनके अधीन रहते हुए धारा 12 की उपधारा (3) के अधीन अपील की जा सकेगी, विहित करने के लिए

नियम बना सकेगी ।

 [(2) इस भाग के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व  दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

17. छूट देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह अधिरोपित करे, किसी चलचित्र प्रदर्शन को या चलचित्र प्रदर्शनों के किसी वर्ग को इस भाग के या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं उपबन्धों से छूट  दे सकेगी ।

भाग 4

निरसन

 

18. निरसन-चलचित्र अधिनियम, 1918 (1918 का 2) इसके द्वारा निरसित किया जाता है :

परन्तु यह निरसन भाग क राज्यों और भाग ख राज्यों के सम्बन्ध में केवल वहां तक प्रभावी होगा जहां तक कि उक्त अधिनियम चलचित्र फिल्मों को प्रदर्शन के लिए मंजूरी देने से सम्बन्ध रखता है ।

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