हज समिति अधिनियम, 2002
(2002 का अधिनियम संख्यांक 35)
[11 जून, 2002]
हज के लिए मुसलमान तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्था करने और
उससे संबंधित विषयों के लिए एक भारत की हज समिति
और राज्य हज समितियां स्थापित
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हज समिति अधिनियम, 2002 है ।
(2) यह उस तारीख या तारीखों को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हों, -
(क) उपविधियों" से धारा 45 के अधीन बनाई गई उपविधियां अभिप्रेत हैं;
(ख) मुख्य कार्यपालक अधिकारी या कार्यपालक अधिकारी" से, यथास्थिति, धारा 16 की उपधारा (1) या धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त समिति का मुख्य कार्यपालक अधिकारी या राज्य समिति का कार्यपालक अधिकारी अभिप्रेत है;
(ग) समिति" से धारा 3 के अधीन गठित भारत की हज समिति अभिप्रेत है;
(घ) सदस्य" से, यथास्थिति, धारा 4 के अधीन नामनिर्देशित भारत की हज समिति का कोई सदस्य या धारा 18 के अधीन नामनिर्देशित किसी राज्य हज समिति का कोई सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अध्यक्ष तथा कोई उपाध्यक्ष भी है;
(ङ) अधिसूचना" से, यथास्थिति, भारत के राजपत्र या किसी राज्य के राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है;
(च) तीर्थ यात्री" से, हज के लिए जाने वाला या वहां से लौटने वाला कोई मुसलमान अभिप्रेत है;
(छ) विहित" से, यथास्थिति, धारा 44 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा या धारा 47 के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ज) राज्य समिति" से धारा 18 के अधीन गठित कोई राज्य हज समिति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत संयुक्त राज्य समिति भी है;
(झ) किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, राज्य सरकार" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
भारत की हज समिति
3. भारत की हज समिति का गठन और निगमन-(1) उस तारीख से, जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, एक समिति गठित की जाएगी जिसे भारत की हज समिति कहा जाएगा ।
(2) समिति पूर्वोक्त नाम की एक निगमित निकाय होगी जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा और जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने, किसी पूर्त न्यास या विन्यास का सृजन करने और संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) समिति का मुख्यालय मुंबई में होगा और जब कभी समिति कार्यकरण की दृष्टि से आवश्यक समझे, केंद्रीय सरकार के परामर्श से अतिरिक्त प्रादेशिक कार्यालय खोले जा सकेंगे ।
4. समिति की संरचना-समिति निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्: -
(i) संसद् के तीन सदस्यों जिनमें से दो लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा उसके मुसलमान सदस्यों में से और एक राज्य सभा के सभापति द्वारा उसके मुसलमान सदस्यों में से नामनिर्देशित किए जाएंगे:
परंतु संसद् का कोई सदस्य उस सदन का सदस्य नहीं रहने पर समिति का सदस्य नहीं रह जाएगा और केंद्रीय सरकार के अनुरोध पर, यथास्थिति, लोक सभा के अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति द्वारा नया नामनिर्देशन किया जाएगा;
(ii) समिति के नौ मुसलमान सदस्य, ऐसी रीति में जो विहित की जाए, निर्वाचित किए जाएंगे जिनमें से तीन उन राज्यों से होंगे जिन्होंने पिछले तीन वर्ष के दौरान सर्वाधिक संख्या में तीर्थयात्री भेजे हैं और एक-एक सदस्य अनुसूची में विनिर्दिष्ट अंचलों से होगा:
परंतु एक से अधिक सदस्य अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट अंचल में आने वाले राज्य से निर्वाचित नहीं किया जाएगा;
(iii) विदेश, गृह, वित्त और नागर विमानन मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित भारत सरकार के संयुक्त सचिव से अन्यून की पंक्ति के चार व्यक्ति, पदेन सदस्य होंगे;
(iv) केंद्रीय सरकार द्वारा निम्नलिखित व्यक्तियों के प्रवर्गों में से सात मुसलमान सदस्य नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे, अर्थात्: -
(क) लोक प्रशासन, वित्त, शिक्षा, संस्कृति या सामाजिक कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले दो सदस्य, जिनमें से एक शिया मुसलमान होगा;
(ख) दो महिला सदस्य, जिनमें से एक शिया मुसलमान होगी;
(ग) तीन सदस्य ऐसे होंगे जो मुस्लिम धर्म विद्या और विधि का विशेष ज्ञान रखते हों, जिनमें से एक शिया मुसलमान होगा ।
5. सदस्यों की अधिसूचना-धारा 4 के अधीन समिति के सदस्यों के नामनिर्देशन के यथाशीघ्र पश्चात्, केंद्रीय सरकार सभी ऐसे सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
6. पदावधि-(1) समिति के सदस्यों की पदावधि (पदेन सदस्यों और आकस्मिक रिक्तियों को भरने वाले सदस्यों से भिन्न) धारा 5 के अधीन सदस्यों की सूची के प्रकाशन के अगले दिन से प्रारंभ होकर तीन वर्ष की होगी:
परंतु समिति के सदस्यों की पदावधि केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक समय में छह मास से अनधिक की अवधि के लिए बढ़ाई जा सकेगी किंतु किसी भी दशा में कुल एक वर्ष से अधिक के लिए नहीं बढ़ाई जाएगी ।
(2) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को संदेय भत्ते और अन्य निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।
7. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-(1) धारा 5 के अधीन समिति के सदस्यों के नामों के प्रकाशन के पश्चात् केंद्रीय सरकार, समिति का पहला अधिवेशन ऐसे प्रकाशन के पैंतालीस दिन के भीतर संयोजित करेगी जिसमें समिति इसके सदस्यों में से एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष निर्वाचित करेगी:
परंतु कोई मंत्री समिति का अध्यक्ष नहीं होगा और पदेन सदस्य अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के निर्वाचन में भाग नहीं लेंगे ।
(2) यदि समिति अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का निर्वाचन करने में असफल रहती है तो, केंद्रीय सरकार, समिति के किसी सदस्य को उसका, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नियुक्त कर सकेगी ।
(3) अध्यक्ष ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं ।
(4) उपाध्यक्ष ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे जो समिति द्वारा इस निमित्त बनाई गई उपविधियों द्वारा अवधारित किए जाएं:
परंतु ऐसी उपविधियों के बनाए जाने तक, उपाध्यक्ष ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे, और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे जो इस संबंध में अध्यक्ष द्वारा, किसी आदेश द्वारा, अवधारित किए जाएं ।
(5) केंद्रीय सरकार द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का निर्वाचन राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा ।
(6) यथास्थिति, अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की पदावधि समिति की कार्यावधि की सहविस्तारी होगी और कोई भी व्यक्ति, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद लगातार दो पदावधियों से अधिक के लिए धारित नहीं करेगा ।
(7) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद की कोई आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसार शेष अवधि के लिए भरी जाएगी ।
8. समिति का पुनर्गठन-(1) केंद्रीय सरकार, यथास्थिति, समिति की अवधि या बढ़ाई गई अवधि की समाप्ति से कम से कम चार मास पूर्व नई समिति के पुनर्गठन के लिए सभी आवश्यक कार्रवाइयां करेगी या करवाएगी ।
(2) कोई पदावरोही सदस्य समिति में दो पदावधियों से अनधिक के लिए पुनः नामनिर्देशन के लिए पात्र होगा:
परंतु सदस्यों में से पचास प्रतिशत से अनधिक दूसरी पदावधि के लिए ऐसी रीति में पुनःनामनिर्देशित किए जा सकेंगे, जो विहित की जाए ।
9. समिति के कर्तव्य-(1) समिति के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे-
(i) तीर्थयात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी संग्रह करना तथा प्रसार करना और तीर्थयात्रियों के लिए अभिविन्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना;
(ii) तीर्थयात्रा के लिए जाते समय या उससे लौटते समय भारत में पत्तन केंद्रों पर ठहरने के दौरान उनको सभी मामलों में जिनके अंतर्गत टीका लगाना, इनोकुलेशन, चिकित्सीय जांच तथा तीर्थयात्री पास जारी करने तथा विदेशी मुद्रा से संबंधित मामले भी हैं, सलाह और सहायता देना और ऐसे मामलों में संबंधित स्थानीय प्राधिकारियों से संपर्क करना;
(iii) संकटग्रस्त तीर्थयात्रियों को राहत पहुंचाना;
(iv) केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से, वार्षिक हज योजना को अंतिम रूप देना और योजना को, जिसके अंतर्गत वायुमार्ग या किसी अन्य साधन से यात्रा के लिए व्यवस्थाएं भी हैं, निष्पादित करना और वास सुविधा से संबंधित विषयों में सलाह देना;
(v) समिति के बजट प्राक्कलनों का अनुमोदन करना और उसे केन्द्रीय सरकार को वित्तीय वर्ष आरम्भ होने से कम से कम तीन मास पूर्व उसकी सहमति के लिए प्रस्तुत करना;
(vi) तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा सुविधाएं सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार, रेल सेवा प्रदाता, वायु सेवा प्रदाता और यात्रा अभिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करना;
(vii) साधारणतया तीर्थयात्रियों के कल्याण की देखभाल करना;
(viii) समिति की ऐसी कार्यवाहियों और तीर्थयात्रियों के हितों से संबंधित ऐसे विषयों को जो समिति द्वारा इस निमित्त बनाई गई उपविधियों द्वारा अवधारित किए जाएं, प्रकाशित करना;
(ix) हज के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
(2) केन्द्रीय सरकार समिति को उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए सभी युक्तियुक्त सहायता प्रदान करेगी ।
10. समिति के अधिवेशन-(1) समिति हज की अवधि के प्रारंभ से पूर्व एक वर्ष में कम से कम तीन बार हज के लिए योजना बनाने और व्यवस्था करने के लिए और उसके पश्चात् एक बार समिति द्वारा की गई सभी व्यवस्थाओं का पुनर्विलोकन करने के लिए अधिवेशन करेगी ।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अधिवेशनों के अतिरिक्त समिति जब कभी इसके कम से कम एक तिहाई सदस्यों द्वारा, अध्यपेक्षा की जाए या अध्यक्ष द्वारा आवश्यक समझा जाए, अधिवेशन कर सकेगी ।
(3) समिति की किसी अधिवेशन में गणपूर्ति उसके सदस्यों की संख्या का एक तिहाई होगा ।
(4) सभी विषयों का विनिश्चय उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाएगा और मतों के समान होने की दशा में, अध्यक्ष या अध्यक्षता करने वाले अन्य व्यक्ति का मत निर्णायक होगा ।
(5) समिति अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी, जो उपविधियों द्वारा अवधारित किए जाएं ।
11. स्थायी समितियों और उपसमितियों की नियुक्ति-(1) समिति वित्त और हज व्यवस्थाओं से संबंधित विषयों पर कार्रवाई करने के लिए अपने सदस्यों में से दो स्थायी समितियों की, जिनमें से प्रत्येक की अध्यक्षता एक उपाध्यक्ष द्वारा की जाएगी, नियुक्ति करेगी उनमें ऐसी संख्या में सदस्य होंगे और उनकी ऐसी शक्तियां तथा ऐसे कृत्य होंगे जो समिति द्वारा इस निमित्त बनाई गई उपविधियों द्वारा अवधारित किए जाएं:
परन्तु यदि अध्यक्ष बैठक में उपस्थित होता है तो वह स्थायी समिति की अध्यक्षता करेगा ।
(2) समिति ऐसे प्रयोजनों के लिए जो वह उपयुक्त समझे उपसमितियां भी नियुक्त कर सकेगी और ऐसी कोई उपसमिति उतनी संख्या में सदस्यों और अन्य व्यक्तियों से मिलकर बनेगी जो समिति द्वारा इस निमित्त अवधारित किए जाएं ।
12. समिति के सदस्य के रूप में नामनिर्देशित किए जाने या बने रहने के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति, समिति के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने या सदस्य के रूप में बने रहने के लिए तब निरर्हित होगा, यदि-
(i) वह भारत का नागरिक नहीं है;
(ii) वह धारा 4 के खंड (iii) में यथाविहित पदेन सदस्यों के सिवाय मुसलमान नहीं है;
(iii) वह पच्चीस वर्ष से कम आयु का है;
(iv) वह विकृतचित्त है और उसे सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है;
(v) वह अनुन्मोचित दिवालिया है;
(vi) वह किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जिसमें, केन्द्रीय सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतर्वलित है;
(vii) उसे किसी पूर्व अवसर पर, -
(क) सदस्य के रूप में अपने पद से हटाया गया है; या
(ख) उसे सक्षम प्राधिकारी के किसी आदेश द्वारा या तो तीर्थयात्रियों के हित में कार्य नहीं करने के कारण या भ्रष्टाचार के कारण हटाया गया है ।
13. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का त्यागपत्र-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा केन्द्रीय सरकार को संबोधित करके अपने पद से त्यागपत्र दे सकेगा और वह ऐसे त्यागपत्र की तारीख से प्रभावी होगा ।
14. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का हटाया जाना-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समिति के अध्यक्ष, किसी उपाध्यक्ष या उसके किसी सदस्य को हटा सकेगी, यदि वह-
(i) धारा 12 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी के अधीन है या हो जाता है; या
(ii) कार्य करने से मना करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है या ऐसी रीति में कार्य करता है जिसे केन्द्रीय सरकार किसी स्पष्टीकरण की, जो वह पेश करे, सुनवाई करने के पश्चात्, समिति के हितों या तीर्थयात्रियों के हितों के प्रतिकूल समझती है;
(iii) समिति की राय में समिति के तीन लगातार अधिवेशनों में पर्याप्त प्रतिहेतु के बिना उपस्थित होने में असफल रहता है ।
(2) जहां समिति के अध्यक्ष या किसी उपाध्यक्ष को उपधारा (1) के अधीन हटाया जाता है, वहां वह समिति का सदस्य भी नहीं रह जाएगा ।
15. आकस्मिक रिक्ति का भरा जाना-(1) जब किसी सदस्य का स्थान उसके हटाए जाने, त्यागपत्र देने, मृत्यु या अन्यथा के कारण रिक्त होता है, तब उसके स्थान पर एक नए सदस्य को, यथास्थिति, नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित किया जाएगा और ऐसा सदस्य तब तक पद धारण करेगा जब तक वह स्दस्य, जिसका पद वह भरता है, पद धारण करने का हकदार रहता, यदि ऐसी रिक्ति नहीं हुई होती ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आकस्मिक रिक्ति उसी प्रवर्ग के सदस्य द्वारा भरी जाएगी जिसका पूर्ववर्ती सदस्य था ।
16. मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य कर्मचारी-(1) केंद्रीय सरकार, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों के मुसलमान अधिकारियों के पैनल में से एक व्यक्ति को, जो भारत सरकार के उपसचिव से नीचे की पंक्ति का न हो, समिति का मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ऐसे निबंधन और शर्तों पर, जो विहित की जाए, नियुक्त करेगी ।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी समिति का पदेन सचिव होगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी तीन वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाई जा सकेगी ।
(4) मुख्य कार्यपालक अधिकारी समिति के विनिश्चयों का निष्पादन करेगा और ऐसे अन्य कृत्यों का, पालन करेगा, जो विहित किए जाएं:
परंतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी और समिति की राय में कोई अंतर होने की दशा में, वह उस मामले को केंद्रीय सरकार के ध्यान में लाएगा जिस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
(5) समिति, केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, ऐसे अन्य अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को जिन्हें वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे, ऐसे निबंधन और शर्तों पर, जो विहित की जाएं, नियोजित कर सकेगी ।
अध्याय 3
राज्य हज समितियां
17. राज्य हज समितियों की स्थापना और निगमन-(1) कोई राज्य सरकार उस तारीख से जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ....................... (राज्य का नाम) हज समिति के नाम से ज्ञात एक समिति का गठन करेगी:
परंतु, यदि केंद्रीय सरकार को किसी कारण से ऐसा प्रतीत होता है कि किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के लिए किसी हज समिति को स्थापित करना आवश्यक नहीं है तो वह किसी संलग्न राज्य की राज्य हज समिति को उन तीर्थयात्रियों के संबंध में कार्रवाई करने के लिए और उन राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के समुचित प्रतिनिधित्व का सुझाव देने के लिए, प्राधिकृत कर सकेगी ।
(2) राज्य समिति पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने, किसी पूर्त न्यास या विन्यास का सृजन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और वह उक्त नाम से वाद ला सकेगा तथा उसके विरुद्ध वाद लाया जा सकेगा ।
(3) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी निम्नलिखित द्वारा कोई करार किया जा सकेगा-
(क) संलग्न राज्यों की दो या अधिक सरकारों द्वारा; या
(ख) केंद्रीय सरकार (एक या अधिक संघ राज्यक्षेत्रों के संबंध में) और ऐसे संघ राज्यक्षेत्रों या संघ राज्यक्षेत्रों से संलग्न एक या अधिक राज्य सरकारों द्वारा,
जो ऐसी अवधि के लिए प्रवृत्त होगा तथा ऐसी और अवधि के लिए, यदि कोई है, नवीकरण के अधीन होगा, जो संयुक्त राज्य समिति के गठन का उपबंध करने के लिए निम्नलिखित के लिए करार में विनिर्दिष्ट किया जाए, -
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले में, सभी भाग लेने वाले राज्यों के लिए, और
(ii) खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी मामले में, भाग लेने वाले संघ राज्यक्षेत्र या संघ राज्यक्षेत्रों और राज्य तथा राज्यों के लिए ।
(4) इस अधिनियम के अधीन कोई करार उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले में भागीदार राज्यों के राजपत्र में और उस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी मामले में भागीदार संघ राज्यक्षेत्रों और भागीदार राज्य या राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा ।
(5) इस अधिनियम में राज्य समिति के प्रति कोई निर्देश, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, किसी संयुक्त राज्य समिति को सम्मिलित करते हुए समझा जाएगा ।
18. राज्य समिति की संरचना-(1) राज्य समिति सोलह सदस्यों से मिलकर बनेगी जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे, अर्थात्: -
(i) (क) संसद् में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले;
(ख) राज्य विधान सभा के; और
(ग) विधान परिषद् के, जहां यह विद्यमान है;
मुसलमान सदस्यों में से तीन सदस्य;
(ii) राज्य में स्थानीय निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुसलमान सदस्यों में से तीन सदस्य;
(iii) मुस्लिम धर्म विद्या और विधि में विशेषज्ञता रखने वाले तीन सदस्य जिनमें एक शिया मुसलमान होगा ।
(iv) लोक प्रशासन, वित्त, शिक्षा, संस्कृति या सामाजिक कार्य के क्षेत्रों में कार्यरत मुसलमान स्वैच्छिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच सदस्य;
(v) राज्य वक्फ़ बोर्ड का अध्यक्ष; और
(vi) राज्य समिति का कार्यपालक अधिकारी जो राज्य समिति का पदेन सदस्य होगा:
परंतु किसी संघ राज्यक्षेत्र की समिति या संयुक्त राज्य समिति उतनी संख्या में सदस्यों से मिलकर बनेगी, जो विहित की जाए ।
(2) उस दशा में जहां उपधारा (1) के उपखंड (i) और उपखंड (ii) में वर्णित किन्हीं प्रवर्गों में कोई मुसलमान सदस्य नहीं है, या जहां किसी राज्य में कोई विधान परिषद् नहीं है, वहां नामनिर्देशन ऐसी रीति में किया जाएगा, जो विहित की जाए ।
19. सदस्यों की अधिसूचना-धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन किसी राज्य समिति के सदस्यों के नामनिर्देशन के यथाशीघ्र पश्चात्, राज्य सरकार उस राज्य के राजपत्र में ऐसे सभी सदस्यों के नाम प्रकाशित करेगी ।
20. पदावधि-(1) राज्य समिति के सदस्यों की पदावधि (पदेन सदस्यों और आकस्मिक रिक्तियों को भरने वाले सदस्यों से भिन्न) धारा 19 के अधीन सदस्यों की सूची के प्रकाशन के अगले दिन से प्रारंभ होकर तीन वर्ष की होगी ।
(2) अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय भत्ते और अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
21. अध्यक्ष-(1) धारा 19 के अधीन राज्य समिति के सदस्यों के नामों के प्रकाशन के पश्चात्, पैंतालीस दिन के भीतर राज्य सरकार राज्य समिति की पहली बैठक संयोजित करेगी जिसमें राज्य समिति अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष निर्वाचित करेगी:
परंतु पदेन सदस्य अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग नहीं लेगा ।
(2) यदि राज्य समिति अध्यक्ष का निर्वाचन करने में असफल रहती है तो राज्य सरकार, राज्य समिति के किसी सदस्य को उसका अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगी ।
(3) अध्यक्ष का निर्वाचन राज्य सरकार द्वारा राज्य के राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा ।
(4) अध्यक्ष की पदावधि तीन वर्ष की होगी और कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष का पद दो लगातार पदावधियों से अधिक के लिए धारण नहीं करेगा ।
(5) अध्यक्ष के पद की कोई आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसार भरी जाएगी ।
22. राज्य समिति का पुनर्गठन-(1) राज्य सरकार, राज्य समिति की अवधि के समाप्त होने से कम से कम चार मास पूर्व नई राज्य समिति के पुनर्गठन के लिए सभी आवश्यक कार्रवाईयां करेगी या कराएगी ।
(2) कोई पदावरोही सदस्य राज्य समिति में पुनः नामनिर्देशन के लिए, दो पदावधियों से अनधिक के लिए, पात्र होगा:
परंतु नामनिर्देशितियों में से पचास प्रतिशत दूसरी पदावधि के लिए ऐसी रीति में पुनः नामनिर्देशित किए जा सकेंगे, जो विहित की जाएं ।
23. समिति के सदस्य के रूप में नामनिर्देशित किए जाने या बने रहने के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति समिति में नामनिर्दिष्ट किए जाने या सदस्य बने रहने के लिए निरर्हित होगा यदि वह-
(i) भारत का नागरिक नहीं है;
(ii) उस राज्य का निवासी नहीं है;
(iii) धारा 18 की उपधारा (1) के खंड (vi) में यथा उपबंधित कार्यपालक अधिकारी के सिवाय, मुसलमान नहीं है;
(iv) पच्चीस वर्ष से कम आयु का है;
(v) विकृतचित है और उसे किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है;
(vi) अनुन्मोचित दिवालिया है;
(vii) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है;
(viii) उसे किसी पूर्व अवसर पर, -
(क) सदस्य के रूप में अपने पद से हटाया गया है; या
(ख) उसे सक्षम प्राधिकारी के किसी आदेश द्वारा या तो तीर्थयात्रियों के हित में कार्य नहीं करने के कारण या भ्रष्टाचार के कारण हटाया गया है ।
24. अध्यक्ष और सदस्यों के त्यागपत्र-अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा राज्य सरकार को संबोधित करके अपने पद से त्यागपत्र दे सकेगा और वह ऐसे त्यागपत्र की तारीख से प्रभावी होगा ।
25. अध्यक्ष और सदस्यों को हटाया जाना-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राज्य समिति के अध्यक्ष या किसी सदस्य को हटा सकेगी, यदि वह-
(i) धारा 23 में विनिर्दिष्ट किसी निरर्हता के अधीन है या हो जाता है; या
(ii) कार्य करने से मना करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है या ऐसी रीति में कार्य करता है जिसे राज्य सरकार किसी स्पष्टीकरण की, जो वह पेश करे, सुनवाई करने के पश्चात्, समिति के हितों या तीर्थ यात्रियों के हितों के प्रतिकूल समझती है; या
(iii) राज्य समिति की राय में राज्य समिति के तीन लगातार अधिवेशनों में किसी पर्याप्त प्रतिहेतु के बिना उपस्थित होने में असफल रहता है ।
(2) जहां राज्य समिति के अध्यक्ष को उपधारा (1) के अधीन हटाया जाता है वहां वह राज्य समिति का सदस्य भी नहीं रह जाएगा ।
26. आकस्मिक रिक्ति का भरा जाना-(1) जब किसी सदस्य का स्थान उसके हटाए जाने, त्यागपत्र देने, मृत्यु या अन्यथा के कारण रिक्त होता है, तब उसके स्थान पर एक नए सदस्य को नामनिर्दिष्ट किया जाएगा और ऐसा सदस्य तब तक पद धारण करेगा जब तक वह सदस्य, जिसका पद वह भरता है, पद धारण करने का हकदार रहता यदि ऐसी रिक्ति नहीं हुई होती ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आकस्मिक रिक्ति को उसी प्रवर्ग के सदस्य द्वारा भरा जाएगा जिसका पूर्ववर्ती सदस्य था ।
27. राज्य समिति के कर्तव्य-(1) राज्य समिति का यह कर्तव्य होगा कि वह हज तीर्थ यात्रियों के हित में समिति की नीति और निदेशों को कार्यान्वित करे ।
(2) राज्य समिति हज तीर्थयात्रियों को सहायता उपलब्ध कराएगी जिसके अंतर्गत उनके गृह राज्यों और भारत से निकास के स्थान के बीच उनके परिवहन के विषय और भारत से निकास स्थानों पर उनके अभिवहन, आवास की व्यवस्था भी है ।
(3) राज्य समिति हज के संबंध में ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो केन्द्रीय सरकार के परामर्श से संबद्ध राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
28. राज्य समिति के अधिवेशन-(1) राज्य समिति हज दिन के पूर्व एक वर्ष में कम से कम दो बार और हज की समाप्ति के पश्चात् एक बार अधिवेशन करेगी ।
(2) राज्य समिति के किसी अधिवेशन में गणपूर्ति करने के लिए अपेक्षित सदस्यों की संख्या इसके सदस्यों की एक तिहाई होगी ।
(3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अधिवेशनों की संख्या के अतिरिक्त राज्य समिति जब कभी इसके कम से कम एक तिहाई सदस्यों द्वारा अध्यपेक्षा की जाए या अध्यक्ष द्वारा आवश्यक समझा जाए अधिवेशन कर सकेगी ।
(4) सभी विषयों का विनिश्चय उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाएगा और मतों के बराबर होने की दशा में अध्यक्ष या अध्यक्षता करने वाले अन्य व्यक्ति का मत निर्णायक होगा ।
29. राज्य समिति का कार्यपालक अधिकारी और अन्य कर्मचारी-(1) राज्य सरकार अपने ऐसे अधिकारियों में से जो उप सचिव से नीचे की पंक्ति के न हों, एक व्यक्ति को राज्य समिति का कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करेगी:
परंतु इस प्रकार नियुक्त किया गया व्यक्ति अधिमानतः मुसलान होगा ।
(2) राज्य समिति का कार्यपालक अधिकारी इसके सचिव के रूप में कार्य करेगा ।
(3) कार्यपालक अधिकारी राज्य समिति के विनिश्चयों का निष्पादन करेगा और ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं:
परन्तु कार्यपालक अधिकारी और समिति की राय में अंतर होने की दशा में, वह उस मामले को राज्य सरकार के ध्यान में लाएगा जिस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
(4) राज्य समिति राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त करेगी जो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे ।
(5) अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की पदावधि और सेवा की शर्तें ऐसी होगी जो विहित की जाएं ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
30. केन्द्रीय हज निधि-समिति की अपनी निधि होगी जो केन्द्रीय हज निधि कहलाएगी और उसके खाते में निम्नलिखित राशियां जमा की जाएंगी, अर्थात्: -
(क) किन्हीं फीसों और सेवा प्रभारों से वसूल की गई राशियां जो समिति द्वारा निम्नलिखित के लिए उद्गृहीत की जा सकेंगी-
(i) हज के आवेदनों के रजिस्ट्रीकरण के लिए; और
(ii) हज तीर्थयात्री यात्रा पास जारी करने के लिए;
(ख) हज करने के लिए तीर्थयात्रियों से संगृहीत धन;
(ग) समिति की निधि के सभी निक्षेपों और विनिधान से आय;
(घ) मृत तीर्थयात्रियों की चीज-बस्त के विक्रय से वसूल की गई राशियां और उनके द्वारा छोड़ी गई धनराशियां, जिनके लिए कोई दावा नहीं किया गया है और केन्द्रीय सरकार को व्यपगत हो गई हैं;
(ङ) केन्द्रीय या किसी राज्य सरकार द्वारा या सरकार द्वारा अनुमोदित किसी अन्य स्रोत से उधार ली गई कोई धनराशि;
(च) किसी अन्य स्रोत से कोई अन्य रकम, जो समिति को विधिक रूप से देय हो; और
(छ) इस अधिनियम के प्रारम्भ पर हज समिति अधिनियम, 1959 (1959 का 51) के अधीन स्थापित हज निधि या निर्धन तीर्थयात्री निधि में जमा रकम ।
31. केन्द्रीय हज निधि का उपयोजन-केन्द्रीय हज निधि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन और उनके अन्तर्गत बनाए गए नियमों के अध्यधीन समिति के नियंत्रण और प्रबंध के अधीन होगी और उसका उपयोजन निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा, अर्थात्: -
(क) समिति के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते;
(ख) धारा 9 में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों के आनुषंगिक प्रभारों और व्ययों का संदाय; और
(ग) कोई अन्य व्यय जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित रूप में समिति या राज्य समिति द्वारा किया जाना अपेक्षित हो ।
32. राज्य हज निधि-राज्य समिति की अपनी निधि होगी जो राज्य हज निधि कहलाएगी और उसके खाते में निम्नलिखित राशियां जमा की जाएंगी, अर्थात्: -
(i) इसे संदत्त सभी धनराशियां या इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए समिति को दिया गया कोई अनुदान;
(ii) राज्य सरकार द्वारा या अन्य किसी स्रोत से इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार के अनुमोदन से राज्य समिति को दिया गया कोई अनुदान या ऋण;
(iii) किसी स्रोत से राज्य समिति को विधिक रूप से देय कोई रकम; और
(iv) इस अधिनियम के प्रारम्भ होने पर राज्य हज समिति के खाते में जमा कोई धन, यदि कोई हो ।
33. राज्य हज निधि का उपयोजन-राज्य हज निधि, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन, राज्य समिति के नियंत्रण और प्रबंध के अधीन होगी और उसका उपयोजन निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा, अर्थात्: -
(i) राज्य समिति के कर्मचारियों के वेतन और भत्ते जिनमें कार्यपालक अधिकारी के वेतन और भत्ते नहीं हैं, जो राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे;
(ii) धारा 27 में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए राज्य समिति द्वारा उसके कर्तव्यों के सम्यक् अनुपालन के आनुषंगिक प्रभारों और व्ययों का संदाय;
(iii) अन्य व्यय जो राज्य समिति द्वारा राज्य सरकार के अनुमोदन से किए जाने अपेक्षित हों ।
34. लेखा और संपरीक्षा-(1) समिति और प्रत्येक राज्य समिति, ऐसे प्ररूप में जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेंगी और लेखे का वार्षिक विवरण तैयार करेंगी
(2) लेखाओं की परीक्षा और संपरीक्षा वार्षिक रूप से, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित लेखा परीक्षकों से कराई जाएगी ।
(3) लेखापरीक्षक द्वारा यथा सत्यापित समिति या राज्य समिति के लेखे उन पर संपरीक्षा रिपोर्ट के साथ, उक्त समिति द्वारा, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को वार्षिक रूप से अग्रेषित किए जाएंगे ।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (3) के अधीन संपरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
(5) राज्य सरकार, उपधारा (3) के अधीन संपरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र उसे राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
35. समिति की तीर्थयात्री पासों को जारी करने और फीसों को उद्गृहीत करने की शक्तियां-(1) समिति को किसी हज तीर्थयात्री को भारत से सउदी अरब जाने के लिए सद्भावी तीर्थयात्री के रूप में उसके प्रस्थान के लिए यात्रा दस्तावेज, जो तीर्थयात्री पास" कहलाएगा, जारी करने की शक्ति होगी और उक्त तीर्थयात्री को पासपोर्ट अधिनियम, 1967 (1967 का 15) की धारा 3 के उपबंधों से छूट दी गई समझी जाएगी ।
(2) पासपोर्ट अधिनियम, 1967 (1967 का 15) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, समिति से परामर्श करके, हज तीर्थयात्री रजिस्ट्रीकरण के लिए, समिति द्वारा तीर्थयात्री पास जारी करने और अन्य संबंधित मामलों के लिए, ऐसी फीसें, जो ऐसी सेवाएं दिए जाने के संबंध में विहित की जाएं, उद्गृहीत कर सकेगी ।
36. समिति का अधिक्रमण-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की राय में, समिति इस अधिनियम के अधीन या इसके द्वारा अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है या लगातार अनुपालन में व्यतिक्रम करती है या अपनी शक्तियों से अधिक प्रयोग करती है या उनका दुरुपयोग करती है, तो केन्द्रीय सरकार, उसके लिए कारणों के कथन के साथ ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, राजपत्र में प्रकाशित करके अधिक्रांत करने का आदेश कर सकेगी:
परंतु यथापूर्वोक्त अधिक्रमण का आदेश करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार, समिति को कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देगी कि क्यों न उसे अधिक्रांत कर दिया जाए ।
(2) जब उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश द्वारा समिति को अधिक्रांत कर दिया गया है, तब -
(क) सभी सदस्य उस तारीख को, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, खंड (घ) के अधीन नामनिर्देशन के लिए उनकी पात्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पदों को रिक्त कर देंगे;
(ख) समिति की अधिक्रांत अवधि के दौरान, इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन समिति को प्रदत्त सभी अधिकारों और अधिरोपित कर्तव्यों को, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा प्रयोग और निष्पादित किया जाएगा जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे;
(ग) समिति में निहित सभी संपत्तियां, जब तक कि वह पुनर्गठित न हो जाएं, केन्द्रीय सरकार में निहित होंगी;
(घ) अधिक्रमण की अवधि के समाप्त होने से पूर्व समिति के पुनर्गठन के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशन किए जाएंगे ।
(3) इस धारा के अधीन किए गए अधिक्रमण के आदेश के साथ उसके कारणों के कथन को, इसको किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
(4) कोई राज्य सरकार, राज्य समिति की बाबत उन्हीं शक्तियों का प्रयोग और उन्हीं कर्तव्यों का निर्वहन, जिनका उल्लेख इस धारा की उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3) में किया गया है, उनमें उल्लिखित शर्तों और इस संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किन्हीं निर्देशों के अधीन रहते हुए, कर सकेगी ।
37. समिति या राज्य समिति की सदस्यता का लाभ का पद न होना-तत्समय प्रवृत्त अन्य किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, समिति या राज्य समिति के किसी सदस्य के पद को लाभ का पद नहीं समझा जाएगा ।
38. समिति की कार्यवाहियों का रिक्तियों, आदि के कारण अविधिमान्य न होना-यथास्थिति, किसी समिति या राज्य समिति या संयुक्त राज्य समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि उसके सदस्यों में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई कमी है ।
39. समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-समितियों के अधिकारी और कर्मचारी या अन्य व्यक्ति जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या उपविधियों के अधीन किसी कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किए गए हैं, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के अंतर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।
40. संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही समिति या राज्य समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी सदस्य के विरुद्ध, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के सिवाय नहीं की जाएगी ।
41. अनुसूची का संशोधन करने की शक्ति-(1) यदि केंद्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, तो वह राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, अनुसूची को संशोधित कर सकेगी और उसके पश्चात् अनुसूची तद्नुसार संशोधित की गई समझी जाएगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना की एक प्रति, इसके निकाले जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।
42. शिकायतों को दूर करना-कोई भी ऐसा हज तीर्थयात्री, जो हज समिति या राज्य हज समिति द्वारा किए गए कर्तव्यों में से किसी के निर्वहन से व्यथित है, अपनी शिकायतों को दूर करने के लिए, यथास्थिति, हज समिति या राज्य हज समिति को अभ्यावेदन करेगा और यह, यदि आवश्यक हो, व्यथित व्यक्ति की सुनवाई के पश्चात्, उक्त समिति द्वारा निपटाया जाएगा ।
43. संपत्तियों और अन्य अधिकारों, आदि का समितियों में निहित होना-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ से ही, सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी जंगम और स्थावर संपत्तियां, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, भंडार, नकद अतिशेष, हाथ की रोकड़, आरक्षित निधियां, विनिधान और ऐसी संपत्तियों में या उनसे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व, हज समिति अधिनियम, 1959 (1959 का 51) के अधीन गठित हज समिति, मुंबई के स्वामित्व, शक्ति या नियंत्रण में थे, और सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और उनसे संबंधित अन्य सभी दस्तावेज, चाहे वे किसी भी प्रकृत्ति के हों, समिति में पूर्णतया निहित हो जाएंगे और उसके हो जाएंगे ।
(2) इस अधिनियम के प्रारंभ से ही, सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी जंगम और स्थावर संपत्तियां, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, भंडार, नकद अतिशेष, हाथ की रोकड़, आरक्षित निधियां, विनिधान और ऐसी संपत्तियों में या उनसे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व, किसी राज्य की हज समिति के स्वामित्व, शक्ति या नियंत्रण में थे, और सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और उनसे संबंधित अन्य सभी दस्तावेज, चाहे वे किसी भी प्रकृत्ति के हों, राज्य की हज समिति में पूर्णतया निहित हो जाएंगे और उसके हो जाएंगे ।
(3) ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व, समिति या राज्य समिति के प्रयोजनों के लिए या उनके संबंध में समिति या राज्य समिति द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले तथा बातें, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति के द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी ।
(4) ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व, समिति या राज्य समिति को देय सभी धनराशियां, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति को देय समझी जाएंगी ।
(5) हज समिति, मुंबई या राज्य की हज समिति के साथ की गई सभी संविदाएं और उनकी ओर से निष्पादित सभी लिखतें, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति की ओर से की गई या निष्पादित की गई समझी जाएंगी और तद्नुसार उनका अनुपालन किया जाएगा ।
(6) इस अधिनियम के प्रारंभ पर लंबित सभी वाद और विधिक कार्यवाहियां जिनमें हज समिति, मुंबई या राज्य की हज समिति, पक्षकार थी, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति उसके स्थान पर प्रतिस्थापित की गई समझी जाएंगी ।
44. नियम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए, अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(i) धारा 4 के खंड (ii) के अधीन समिति के सदस्यों के निर्वाचन की रीति;
(ii) धारा 6 की उपधारा (2) के अधीन अध्यक्ष और सदस्यों की पदावधियां और शर्तें;
(iii) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;
(iv) वह रीति जिसमें धारा 8 की उपधारा (2) के परंतुक के अधीन सदस्यों का पुनःनामनिर्देशन किया जा सकेगा;
(v) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ix) के अधीन हज से संबंधित कर्तव्य;
(vi) धारा 16 के अधीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी के कृत्य और समिति के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें;
(vii) धारा 18 की उपधारा (1) के खंड (vi) के परंतुक के अधीन संयुक्त राज्य समिति या संघ राज्यक्षेत्र की समिति के सदस्यों की संख्याः
(viii) वह रीति जिसमें धारा 34 के अधीन समिति और राज्य समितियों द्वारा लेखे रखे जाएंगे और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा की जाएगी;
(ix) धारा 35 की उपधारा (1) के अधीन हज तीर्थयात्री पास का जारी किया जाना;
(x) धारा 41 के अधीन संलग्न राज्यों या संघ राज्यक्षेत्र से मिलकर बनने वाले अंचलों से संबंधित अनुसूची का संशोधन;
(xi) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने में सहमत हो जाते हैं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियमों के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
45. उपविधि बनाने की शक्ति-(1) समिति, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों और उनके अधीन बनाए गए नियमों के संगत उपविधियां निम्नलिखित विषयों के संबंध में बना सकेगी, अर्थात्: -
(i) धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;
(ii) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन समिति की कार्यवाहियां और यात्रियों के हितों के किसी विषय के प्रकाशन के लिए उपबंध करना;
(iii) धारा 10 की उपधारा (5) के अधीन समिति के अधिवेशन में कारबार के संव्यवहार के लिए प्रक्रिया के नियम अधिकथित करना;
(iv) धारा 11 के अधीन स्थायी समिति की शक्तियां और कृत्य तथा उपसमितियों में सदस्यों और अन्य व्यक्तियों की संख्या का अवधारण;
(v) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए समिति द्वारा आवश्यक समझे जाने वाले किसी अन्य विषय का उपबंध करना ।
(2) इस धारा के अधीन समिति द्वारा बनाई गई उपविधियां केंद्रीय सरकार को प्रस्तुत की जाएंगी और जब तक केंद्रीय सरकार द्वारा उनकी पुष्टि नहीं कर दी गई हो, तब तक वे लागू नहीं होंगी ।
(3) केंद्रीय सरकार द्वारा पुष्ट की गई उपविधियां राजपत्र में प्रकाशित की जाएंगी ।
46. प्रत्यायोजन की शक्तियां-इस अधिनियम के उपबंधों और इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन समिति केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से लिखित रूप में; साधारण या विशेष आदेश द्वारा और ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के (धारा 45 के अधीन उपविधि बनाने की शक्तियों के सिवाय) अधीन ऐसी शक्तियों को, जिन्हें वह आवश्यक समझती है, समिति के किसी सदस्य या मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
47. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकारें, केन्द्रीय सरकार के परामर्श से अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राज्य समितियों के बारे में नियम बना सकेंगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम, निम्नलिखित विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(i) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन राज्य समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के निबंधन और शर्तें;
(ii) वह रीति, जिसमें धारा 22 की उपधारा (2) के परंतुक के अधीन सदस्यों का पुनःनामनिर्देशन किया जा सकेगा;
(iii) धारा 27 की उपधारा (3) के अधीन राज्य समिति के कर्तव्य;
(iv) धारा 29 के अधीन कार्यपालक अधिकारी के कृत्य और अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें;
(v) अन्य कोई विषय, जो विहित किया जाना अपेक्षित हो या जो विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।
48. इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व विद्यमान समिति के कर्मचारियों के लिए उपबंध-यथास्थिति, किसी विद्यमान समिति या राज्य समिति के प्रत्येक अधिकारी और अन्य कर्मचारी इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से ही, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति के अधिकारी या अन्य कर्मचारी, ऐसे पदनाम के साथ, जो समिति अवधारित करे, उसमें पद उसी अवधि के लिए, समान पारिश्रमिक पर, सेवा के उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर, जिन पर वह हज समिति अधिनियम, 1959 (1959 का 51) के अधीन गठित हज समिति के अधीन थे, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में स्थानान्तरित होंगे और ऐसे समय तक कार्य करते रहेंगे जब तक कि ऐसी समिति द्वारा निबंधन और शर्तें सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती :
परन्तु, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति के ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी की सेवा की अवधि, पारिश्रमिक और निबंधन और शर्तें, उसे अलाभकारी रूप में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना, परिवर्तित नहीं की जाएंगी:
परन्तु यह और कि इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व ऐसे किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी द्वारा की गई किसी सेवा को, यथास्थिति, समिति या राज्य समिति के अधीन की गई सेवा माना जाएगा ।
49. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई वाद या अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां सरकार या सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी या इस अधिनियम के अधीन गठित समिति के विरुद्ध नहीं की जाएंगी ।
50. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:
परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया कोई आदेश उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
51. निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करते हुए, समिति या राज्य सरकार या राज्य समिति को लिखित रूप में निदेश जारी कर सकेगी और, यथास्थिति, ऐसी समिति या राज्य सरकार या राज्य समिति ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होंगी ।
52. निरसन-(1) हज समिति अधिनियम, 1959 (1959 का 51) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियम के अधीन गठित हज समिति, इस अधिनियम के अधीन समिति की स्थापना के समय तक ऐसे कार्य करती रहेगी मानो यह अधिनियम पारित न हुआ हो और धारा 5 के अधीन ऐसी अधिसूचना पर समिति की स्थापना होने पर पूर्व समिति विघटित हो जाएगी ।
(3) ऐसे निरसन के होते हुए भी, हज समिति अधिनियम, 1959 (1959 का 51) के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
[धारा 4(ii) और धारा 41(1) देखिए]
अंचल-1 राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र ।
अंचल-2 उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तरांचल और झारखंड ।
अंचल-3 आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा ।
अंचल-4 असम, पश्चिमी बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर, सिक्किम, मेघालय, अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड और अंदमान और निकोबार द्वीप संघ राज्यक्षेत्र ।
अंचल-5 महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा दमण और द्वीव तथा दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र ।
अंचल-6 तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक तथा पांडिचेरी और लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र ।
---------------

