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वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी अधिनियम, 2011 ( Academy of Scientific and Innovative Research Act, 2011 )


 

वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी अधिनियम, 2011

(2012 का अधिनियम संख्यांक 13)

[6 फरवरी, 2012]

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के साथ मिलकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विद्या के

अभिवर्धन और अनुसंधान कार्य को अग्रसर करने के लिए एक अकादमी की स्थापना

करने तथा वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी के नाम से ज्ञात

संस्था को, राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने के लिए, उसके

निगमन तथा उनसे संबद्ध या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी अधिनियम, 2011 है ।

(2) इस का विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्नद्भभिन्न उपबंधों के लिए भिन्नद्भभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए सभी परिनियमों और अध्यादेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

() अकादमी" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी  अभिप्रेत है

(ख) बोर्ड" से धारा 10 में निर्दिष्ट वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी का शासी बोर्ड अभिप्रेत है;

(ग) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्" से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के नाम से रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभिप्रेत है;

(घ) अध्यक्ष" से धारा 12 के अधीन नियुक्त बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(ङ) कुलाधिपति" से धारा 20 में निर्दिष्ट अकादमी का कुलाधिपति अभिप्रेत है;

(च) निदेशक" से धारा 22 के अधीन नियुक्त अकादमी का निदेशक अभिप्रेत है;

(छ) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के प्रख्यात वैज्ञानिक" या उत्कृष्ट वैज्ञानिक" से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के उस रूप में अभिहित वैज्ञानिक अभिप्रेत हैं;

(ज) विद्यमान अकादमी" से भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के संकल्प संख्यांक 6/1/सीएसआईआरद्भएसीएसआईआर/2010द्भपीपीडी, तारीख 1 जुलाई, 2010 के अनुसरण में स्थापित वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी अभिप्रेत है;

(झ) अकादमी का संकाय" से अकादमी आचार्य, विख्यात आचार्य, प्रख्यात आचार्य, प्रतिभाशाली आचार्य, ज्येष्ठ आचार्य, प्रतिष्ठित आचार्य, आचार्य, सहयुक्त आचार्य, सहायक आचार्य, अभ्यागत प्राध्यापक वर्ग और ऐसे अन्य व्यक्ति अभिप्रेत हैं, जिनको अकादमी में या अकादमी द्वारा चलाई जा रही संस्थाओं में शिक्षा देने या अनुसंधान का संचालन करने के लिए नियुक्त किया जाए और जिनके अंतर्गत शिक्षा देने या अनुसंधान संचालित करने के लिए समनुदेशित, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिक भी हैं;

(ञ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(ट) परिनियमों और अध्यादेशों" से तत्समय प्रवृत्त अकादमी के परिनियम और अध्यादेश अभिप्रेत हैं ।

3. वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी की स्थापना-(1) उस तारीख से जो केंद्रीय सरकार, इस निमित्त अधिसूचना द्वारा नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी" के नाम से ज्ञात अकादमी को उस नाम से निगमित निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा ।

(2) अकादमी का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।

(3) अकादमी के उतनी संख्या में प्रादेशिक केंद्र और परिसर होंगे, जितने वह ठीक समझे ।

(4) अकादमी का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी, उसको इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन तथा संविदा करने की शक्ति होगी और वह उस नाम से वाद लाएगी तथा उस पर वाद लाया जाएगा ।

4. अकादमी के उद्देश्य-(1) अकादमी के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे,-

(क) विद्या की ऐसी शाखाओं में, जो वह ठीक समझे, विशेषकर नए उभरते हुए क्षेत्रों में और ऐसे क्षेत्रों में, जो भविष्य में उभर सकें, शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नत ज्ञान का प्रसार करना;

(ख) अंतर विषयक अध्ययन और अनुसंधान कराना;

(ग) प्राकृतिक विज्ञान, प्राणी विज्ञान, गणितीय और संगणनात्मक विज्ञान, आयुर्विज्ञान, इंजीनियरी, अनुप्रयुक्त कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान वाले अंतर विषयक और बहु विषयक क्षेत्रों में, इन क्षेत्रों और उनके अंतरापृष्ठों से संबंधित विधि में और उनके पाठ्यक्रमों में समाकलित पाठ्यक्रमों को चलाना;

(घ) शिक्षण और विद्या संबंधी प्रक्रियाओं में प्रवर्तनों के लिए समुचित उपाय करना;

(ङ) अंकों या श्रेणियों पर अनन्य रूप से ध्यान देने के स्थान पर उन्नत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विद्या और छात्रवृत्ति के लिए परिवेश सृजित करना;

(च) वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक क्षेत्रों में जनशक्ति को शिक्षित और प्रशिक्षित करना;

() विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संवर्धन के लिए भारत में और भारत से बाहर उद्योगों के साथ संपर्क स्थापित करना;

(ज) भारत में या भारत से बाहर ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों और संस्थाओं के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में समुचित क्षेत्रों में सहयोग करना;

(झ) लोगों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और शैक्षणिक कल्याण से संबंध रखने वाले विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान का संवर्धन करना ।

(2) अकादमी, मुख्य रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जिन पर भारत में नियमित शैक्षणिक विश्वविद्यालयों में सामान्यतः शिक्षा नहीं दी जाती है, अनुसंधान और शिक्षा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी ।

(3) अकादमी के पाठ्यक्रम, शिक्षा शास्त्र और मूल्यांकन प्रवर्तित होंगे तथा वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी व्यक्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अन्योन्य विषयक ज्ञान के साथ उच्चतम गुणवत्ता वाले कार्मिकों के सृजन के लिए निदेशित होंगे ।

5. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के साथ अकादमी का संबंध-(1) अकादमी को, पारस्परिक फायदे के लिए शिक्षण और अनुसंधान प्रयोजनों के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की अवसंरचना और वैज्ञानिक जनशक्ति, उपलब्ध कराई जाएगी या उपयोग करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा ।

(2) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम, नियमों, विनियमों या उपविधियों में किसी बात के होते हुए भी, अकादमी, इस अधिनियम के प्रांरभ से दो सप्ताह के भीतर, विद्या संबंधी, शिक्षण और उपाधियों या डिप्लोमाओं को प्रदान करने के  प्रयोजनों के लिए अकादमी के साथ उसके सहबद्ध होने के प्रयोजनों के लिए, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के साथ समझौता ज्ञापन करेगी और ऐसे समझौता ज्ञापन करने के पश्चात् किसी उपाधि या डिप्लोमा प्रदान करने के लिए परिषद् में अध्ययनरत व्यक्तियों को उक्त अकादमी द्वारा उपाधियां या डिप्लोमा प्रदान किए जाएंगे :

परंतु किसी उपाधि या डिप्लोमा को प्रदान करने के लिए इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् में किसी शैक्षणिक या अनुसंधान पाठ्यक्रम में अध्ययनरत और किसी अन्य विश्वविद्यालय में उक्त प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रीकृत किसी व्यक्ति को, उस विश्वविद्यालय के अनुमोदन से, जिसमें ऐसा व्यक्ति रजिस्ट्रीकृत है, इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी में इस प्रकार प्रारंभ के पश्चात् स्थानान्तरित किया जा सकेगा और इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी द्वारा उसी उपाधि या डिप्लोमा को प्रदान करने के लिए उक्त अकादमी में रजिस्ट्रीकृत किया जा सकेगा तथा ऐसे व्यक्ति को, इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी में उसी विश्वविद्यालय में, जिससे ऐसा व्यक्ति स्थानान्तरित हुआ है, अध्ययन के उसी स्तर पर स्थानान्तरित और रजिस्ट्रीकृत हुआ समझा जाएगा ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह परिषद् द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के कृत्यों के निर्वहन और शक्तियों के प्रयोग को, या विद्या संबंधी, शिक्षण और उपाधियों या डिप्लोमाओं को प्रदान करने के प्रयोजनों के लिए या किन्हीं अन्य प्रयोजनों के लिए, जो उसके उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए आवश्यक हों, किसी अन्य विश्वविद्यालय या संस्था के साथ सहबद्ध करने को, प्रभावित करती है ।

6. अकदामी की राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में घोषणा-(1) यह घोषणा की जाती है कि वैज्ञानिक और प्रवर्तित अनुसंधान अकादमी एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था होगी ।

7. विद्यमान अकादमी की आस्तियों, दायित्वों आदि का इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी को अंतरण और अन्य उपबंध, आदि-(1) अकादमी की स्थापना की तारीख से ही,-

(क) इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि में या किसी संविदा या अन्य लिखत में विद्यमान अकादमी के प्रति किसी निर्देश को अकादमी के प्रति निर्देश समझा जाएगा;

(ख) विद्यमान अकादमी के सभी स्थावर और जंगम संपत्तियां और आस्तियां उस अकादमी में निहित होंगी;

(ग) विद्यमान अकादमी के सभी अधिकार और दायित्व उस अकादमी को अंतरित हो जाएंगे और उस अकादमी के अधिकार और दायित्व होंगे;

(घ) खंड (ग) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना विद्यमान अकादमी के प्रयोजन के लिए या उसके संबंध में उस तारीख से ठीक पहले उक्त विद्यमान अकादमी द्वारा, उसके साथ या उसके लिए, उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने वाले सभी मामले और बातें अकादमी द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के रूप में समझे जाएंगे;

() उस तारीख को ठीक पहले विद्यमान अकादमी को शोध्य सभी धनराशियां अकादमी को शोध्य समझी जाएंगी;

(च) उस तारीख से ठीक पहले विद्यमान अकादमी द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित या जो संस्थित किए जा सकते हों, सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां अकादमी द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रह सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी;

(छ) उस तारीख से ठीक पहले विद्यमान अकादमी के अधीन कोई पद धारण करने वाला या उसमें अध्यापन करने वाला प्रत्येक कर्मचारी (जिसके अन्तर्गत ऐसे कर्मचारी भी हैं जो विद्यमान अकादमी में शिक्षा देने या अनुसंधान करने के लिए नियुक्त किए गए थे) अकादमी में उसी पदावधि और पारिश्रमिक, छुट्टी, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति और अन्य सीमांत प्रसुविधाओं के संबंध में वैसे ही सेवा निबंधनों और शर्तों पर पद धारण करेगा या अध्यापन करता रहेगा मानो उसने ऐसा पद तब धारण किया होता यदि अकादमी की स्थापना नहीं की गई होती और वह अकादमी के कर्मचारी के रूप में ऐसा करना जारी रखेगा या यदि ऐसा कर्मचारी ऐसी अवधि के भीतर अकादमी का कर्मचारी न बने रहने का विकल्प लेता है तो उस तारीख से छह मास की अवधि के अवसान तक ऐसा करना जारी रखेगा ।

(2) इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व, किसी उपाधि या डिप्लोमा या प्रमाणपत्र को प्रदान करने के लिए विद्यमान अकादमी में कोई शैक्षणिक या अनुसंधान पाठ्यक्रम कर रहा कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन अकादमी की स्थापना के पश्चात् ऐसे शैक्षणिक या अनुसंधान पाठ्यक्रम को पूरा करने का हकदार होगा और उसको इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी द्वारा उसी उपाधि या डिप्लोमा या प्रमाणपत्र को प्रदान करने के लिए उक्त अकादमी में रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और ऐसे व्यक्ति को, इस अधिनियम के अधीन स्थापित अकादमी में, विद्यमान अकादमी में अध्ययन के उसी स्तर पर जिससे ऐसे व्यक्ति ने प्रवास किया था, प्रवासित और रजिस्ट्रीकृत किया गया समझा जाएगा ।

(3) ऐसा कोई व्यक्ति, जिसको इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पहले, विद्यमान अकादमी द्वारा कोई पाठ्यक्रम अर्हित करने पर कोई उपाधि या डिप्लोमा या प्रमाणपत्र प्रदान किया गया था, अकादमी के बोर्ड द्वारा अनुमोदन के अधीन रहते हुए, अकादमी द्वारा समतुल्य उपाधि या डिप्लोमा प्रदान किए जाने का हकदार होगा ।

(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन अकादमी द्वारा किसी कर्मचारी का उसकी नियमित सेवा में आमेलन, ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

8. अकादमी के कृत्य और शक्तियां-(1) अकादमी, उसके कृत्यों का निर्वहन और निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगी, अर्थात्ः-

(i) प्राकृतिक विज्ञान, प्राणी विज्ञान, गणितीय और संगणनीय विज्ञान, आयुर्विज्ञान, इंजीनियरी, अनुप्रयुक्त कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, इन क्षेत्रों और उनके अंतरापृष्ठों से संबंधित विधि जैसी विद्या की ऐसी शाखाओं में और विशिष्टतया इन शाखाओं के अंतर विषयक और बहु विषयक क्षेत्रों में तथा सभी ऐसे क्षेत्रों में, जो भविष्य में उभर सकते हैं तथा ज्ञान के अन्य उभरते हुए क्षेत्रों में, जो अकादमी समयद्भसमय पर अवधारित करे और ज्ञान की अभिवृद्धि तथा प्रसार के लिए उपबंध करे, शिक्षण के लिए तथा अनुसंधान संचालित करने की व्यवस्था करना;

(ii) प्रशासनिक मानकों और संरचनाओं को अधिकथित करना तथा पदों के सृजन के सभी विषयों को अवधारित करना, भर्ती के लिए मानक अधिकथित करना, प्रतिकर पैकेजों और संविदात्मक ठहरावों का अवधारण करना;

(iii) डिप्लोमाओं या प्रमाणपत्रों को प्रदान करने के लिए उनकी पाठ्यचर्या और अध्यापन को डिजाइन करना तथा ऐसी उपाधियों और विद्या संबंधी अन्य विशेष उपाधियों को, जो वह ठीक समझे, प्रदान करना;

(iv) ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो अकादमी अवधारित करे, डिप्लोमाओं और प्रमाणपत्रों को प्रदान करना तथा मूल्यांकन की ऐसी पद्धतियों के आधार पर, उपाधियां या विद्या संबंधी अन्य विशेष उपाधियों को प्रदान करना और उसकी परीक्षाएं आयोजित कराना जो अकादमी, समयद्भसमय पर अवधारित करे तथा अच्छा और पर्याप्त कारण के लिए किन्हीं ऐसे डिप्लोमाओं, प्रमाणपत्रों, उपाधियों या विद्या संबंधी अन्य विशेष उपाधियों को वापस लेना;

(v) परिनियमों और अध्यादेशों को विरचित करना और उनको परिवर्तित, उपांतरित या विखंडित करना;

(vi) पाठयक्रमातिरिक्त अध्ययनों, प्रशिक्षण और विस्तारित सेवाओं को आयोजित करना और उनको चलाना;

(vii) सम्मानिक उपाधियां या अन्य विशिष्टताएं प्रदान करना;

(viii) विद्या की ऐसी शाखाओं में और ऐसे व्यक्तियों को, जो वह अवधारित करे, दूर-शिक्षण की व्यवस्था करना;

(ix) अकादमी द्वारा अपेक्षित आचार्य, सहयोजित आचार्य और सहायक आचार्य जिनके अंतर्गत अकादमी आचार्य, प्रतिष्ठित आचार्य, प्रख्यात आचार्य, उत्कृष्ट आचार्य, ज्येष्ठ आचार्य, प्रतिष्ठित आचार्य या अभ्यागत पद भी हैं और अन्य अध्यापन या शैक्षणिक अथवा अन्य पद संस्थित करना और ऐसे पदों पर नियुक्तियां करना;

(x) किसी अन्य विश्वविद्यालय या संस्था या उद्योग से व्यक्तियों को अथवा अध्ययनों के समुचित क्षेत्रों से प्रख्यात व्यक्तियों को, जिनके अंतर्गत वे व्यक्ति भी हैं, जो देश के बाहर हैं, अकादमी के संकाय के रूप में नियुक्त करना;

(xi) प्रशासनिक, अनुसचिवीय और अन्य पद सृजित करना तथा उन पर नियुक्तियां करना;

(xii) किसी निकाय के साथ, जिसके अंतर्गत भारत में या भारत से बाहर अवस्थित कोई विश्वविद्यालय या संस्था, या उद्योग भी है, सहकार करना या सहयोग करना या सहयुक्त करना;

(xiii) अनुसंधान और शिक्षण के लिए ऐसे केंद्र और विशेषित प्रयोगशालाएं और अन्य इकाइयां, जो अपेक्षित हों, स्थापित करना;

(xiv) विद्यालयों, केंद्रों और परिसरों को स्थापित करना और वहां से कार्य करना या उसकी पसंद के किसी स्थान से कक्षाएं चलाना, जिनके अंतर्गत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं और अन्य केंद्रों के परिसर सम्मिलित हैं;

(xv) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, अध्ययनवृत्तियां, पदकों और पुरस्कारों कों संस्थित करना और प्रदान करना;

(xvi) किसी लोक या निजी इकाई के साथ या उसके लिए, चाहे वह भारत में या भारत के बाहर हो, अनुसंधान, सलाहकार और परामर्श ऐसी सेवाएं संचालित करना, जो अकादमी के भाव और उद्देश्य के अनुरूप हो;

(xvii) अकादमी में शिक्षा देने और अनुसंधान संचालित करने में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिकों को संकाय के रूप में नियोजित करना;

(xviii) छात्रों के आवास के लिए संस्थाओं और छात्रवासों को स्थापित करना, उनको चलाना और उनकी व्यवस्था करना या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् या किसी अन्य निकाय के माध्यम से ऐसी संस्थाओं को स्थापित करना और उन्हें चलाना;

(xix) फीसों और अन्य प्रभारों को नियत करना; उनके संदाय की मांग करना और उनको प्राप्त करना;

(xx) अकादमी में प्रवेश के स्तरमानों को अवधारित करना; जिनमें परीक्षा, परीक्षण या मूल्यांकन के अन्य प्रवर्तित आदर्श सम्मिलित हो सकेंगे;

(xxi) अकादमी के छात्रों के आवासों का पर्यवेक्षण करना और उनके स्वास्थ्य, सामान्य कल्याण, संस्कृति और संगठित जीवन के संवर्धन के लिए व्यवस्थाएं करना;

(xxii) सभी प्रवर्गों के कर्मचारियों के लिए सेवा की शर्तें, जिसके अंतर्गत उनकी आचार संहिता भी है, अधिकथित करना;

(xxiii) छात्रों और कर्मचारियों के बीच अनुशासन का विनियमन करना और उनके द्वारा अनुशासन का पालन कराना तथा इस संबंध में ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना, जो आवश्यक हों;

(xxiv) कर्मचारियों के स्वास्थ्य और साधारण कल्याण की अभिवृद्धि करने के लिए प्रबंध करना;

(xxv) अकादमी के प्रयोजनों के लिए अनुदान, उपकृति, संदान, दान, वसीयतें प्राप्त करना और किसी जंगम या स्थावर संपत्ति को, जिसके अंतर्गत न्यास और विन्यास संपत्ति है, अंतरित या अर्जित करना, धारित करना तथा उसका प्रबंध और व्ययन करना:

 परंतु अकादमी द्वारा ऐसे कोई अनुदान, उपकृति, संदान, दान, वसीयत और अंतरण स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिनमें बोर्ड की राय में इस अधिनियम के भाव और उद्देश्य के विरुद्ध शर्तें या बाध्यताएं अंतर्वलित हैं;

(xxvi) अकादमी की संपत्ति की प्रतिभूति पर या अन्यथा अकादमी के प्रयोजनों के लिए धन उधार लेना या ऐसे प्रयोजनों के लिए जो इस अधिनियम के भाव और उद्देश्य के अनुरूप हैं, उसकी संपत्ति का उपयोग करना;

(xxvii) ऐसे अन्य सभी कार्य और बातें करना, जो उसके सभी या किन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आनुषंगिक या सहायक हों ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग करने में, अकादमी का यह प्रयास होगा कि वह एक अखिल भारतीय स्वरूप और अध्यापन तथा अनुसंधान के उच्च स्तरमान बनाए रखे और अकादमी, ऐसे अन्य उपायों के साथ, जो उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यक हों, विशिष्टतया, निम्नलिखित उपाय करेगी, अर्थात्ः-

(i) धारा 9 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, छात्रों को प्रवेश गुणागुण के आधार पर दिए जाएंगे;

(ii) सतत मूल्यांकन या मूल्यांकन की अन्य प्रवर्तित पद्धतियां और विकल्प आधारित प्रत्यय प्रणाली आरंभ की जा सकेंगी और अकादमी, प्रत्यय अंतरण तथा संयुक्त उपाधि कार्यक्रमों के लिए भारत में या भारत से बाहर अन्य विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थाओं से करार कर सकेगी;

(iii) आवधिक पुनर्विलोकन और पुनर्संरचना के लिए उपबंध के साथ अध्ययनों के प्रवर्तित पाठ्यक्रम और कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे;

(iv) शिक्षा का दिया जाना, यथाशक्य, आधुनिक तकनीकियों या प्रौद्योगिकियों के उपयोग के माध्यम से होगा;

(v) अकादमी की प्रणालियां और संरचनाएं, बहु विषयक और अंतर विषयक अध्ययनों की अपेक्षाओं के प्रति सुनम्य होनी चाहिए;

(vi) अकादमी के शैक्षिक विषयों के प्रबंध में छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी ।

9. अकादमी का सभी जातियों, पंथ, मूलवंश या वर्ग के लिए खुला होना-(1) अकादमी सभी स्त्रियों और पुरुषों के लिए जाति, पंथ, मूलवंश या वर्ग का विचार किए बिना खुली होगी और अकादमी के लिए यह विधिपूर्ण नहीं होगा कि वह किसी व्यक्ति पर अकादमी के संकाय के रूप में नियुक्त किए जाने या उसमें कोई अन्य पद धारण करने या उसमें नियोजित होने या अकादमी में छात्र के रूप में प्रवेश पाने या उसमें उपाधि प्राप्त करने या उसके किसी विशेषाधिकार का उपभोग या प्रयोग करने का हकदार बनाने के लिए किसी धार्मिक विश्वास या मान्यता संबंधी मानदंड अपनाए या उस पर अधिरोपित करे।

(2) अकादमी, महिलाओं, निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों या समाज के कमजोर वर्गों के व्यक्तियों और विशेषतया अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और नागरिकों के अन्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के व्यक्तियों के नियोजन या प्रवेश के लिए विशेष उपबंध करेगी तथा केन्द्रीय शिक्षा संस्था (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 (2007 का 5) की धारा 4 के खंड (ख) के परन्तुक के अधीन ऐसा आरक्षण करने से कोई छूट, अकादमी को लागू नहीं होगीः परंतु ऐसा कोई विशेष उपबंध, अधिवास के आधार पर नहीं किया जाएगा । 

10. अकादमी के प्राधिकारी-अकादमी के निम्नलिखित प्राधिकारी होंगे, अर्थात्ः-

(क) बोर्ड;

(ख) सिनेट;

(ग) निदेशक;

(घ) अध्ययन बोर्ड; 

(ङ) ऐसे अन्य प्राधिकारी, जो परिनियमों द्वारा अकादमी के प्राधिकारी घोषित किए जाएं ।

11. शासी बोर्ड की संरचना-(1) धारा 10 के खंड (क) में निर्दिष्ट बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-

()

धारा 12 के अधीन नियुक्त किया जाने वाला बोर्ड का अध्यक्ष;

 

()

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक,

पदेन उपाध्यक्ष;

()

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का सभापति,

पदेन सदस्य;

()

अध्यक्ष, परमाणु उर्जा आयोग, भारत सरकार,

पदेन सदस्य;

()

अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग, भारत सरकार,

पदेन सदस्य;

()

अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारत सरकार,

पदेन सदस्य;

()

वित्त सचिव, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार,

पदेन सदस्य;

()

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में शिक्षा देने के क्षेत्र में तीन प्रमुख संस्थाओ के प्रधान,

धारा 13 के अधीन नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले सदस्य;

()

चार प्रख्यात वैज्ञानिक या विश्वविद्यालय शिक्षाविद्, जिनमें से दो, भारत से बाहर की ख्यात संस्थाओं से होने चाहिए,

धारा 13 के अधीन नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले सदस्य;

()

तीन विख्यात उद्योगपति या प्रौद्योगिकीविद्,

धारा 13 के अधीन नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले सदस्य;

()

चार प्रख्यात वैज्ञानिक या उत्कृष्ट वैज्ञानिक या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं के निदेशक,

धारा 14 के अधीन नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले सदस्य;

()

अकादमी का निदेशक

पदेन सदस्य

(2) अध्यक्ष, सामान्य=तया, बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता करेगा ।

(3) बोर्ड अपनी बैठकों के संचालन और उनमें कारबार संव्यवहार के प्रयोजन के लिए अपनी स्वयं की प्रक्रिया तैयार कर सकेगा ।

(4) अकादमी के प्रशासन का प्रभारी सहयुक्त निदेशक, बोर्ड का सचिव होगा ।

12. अध्यक्ष की नियुक्ति-(1) अध्यक्ष की नियुक्ति, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के प्रधान द्वारा उपधारा (2) के अधीन गठित चयन समिति की सिफारिश पर की जाएगी:

परंतु वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक, धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ख) में यथा निर्दिष्ट पदेन उपाध्यक्ष होते हुए तब तक अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा, जब तक कि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार प्रथम अध्यक्ष चयनित नहीं हो जाता है और नियुक्त नहीं कर दिया जाता हैः

परंतु यह और कि कोई व्यक्ति, अध्यक्ष के रूप में तब तक चयनित और नियुक्त नहीं होगा जब तक कि ऐसा व्यक्ति भारतीय नागरिक न हो ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट चयन समिति, अंतरराष्ट्रीय ख्याति के चार विख्यात वैज्ञानिकों या प्रौद्योगिकीविदों से मिलकर बनेगी, जिनको वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभापति द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए

(3) उपधारा (2) के अधीन नामनिर्दिष्ट अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कम से कम दो विख्यात वैज्ञानिक या प्रौद्योगिकीविद्, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सोसाइटियों, अकादमियों या समरूप संगठनों के प्रधानों में से होंगे ।

(4) उपधारा (2) में निर्दिष्ट चयन समिति-

(क) का गठन, बोर्ड के अध्यक्ष के पदधारी की सेवाधृति की समाप्ति से पूर्व छह मास के भीतर किया जाएगा;

(ख) पदधारी अध्यक्ष की सेवाधृति की समाप्ति से कम से कम तीन मास पूर्व अपनी सिफारिश प्रस्तुत करेगी ।

(5) चयन समिति, बैठकों के प्रयोजनों और किसी व्यक्ति के संबंध में, जिसने अध्यक्ष के पद के लिए आवेदन नहीं किया है, सिफारिश करने सहित उपधारा (1) के अधीन सिफारिशें करने के लिए अपनी स्वयं की प्रक्रिया तैयार कर सकेगी

(6) उपधारा (1) में निर्दिष्ट चयन समिति की बैठक के लिए गणपूर्ति, समिति के तीन सदस्यों से मिलकर होगी ।

(7) अध्यक्ष ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कृत्य करेगा, जो उसको इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा समनुदेशित किए जाएं ।

13. प्रख्यात वैज्ञानिकों या विश्वविख्यात शिक्षाविदों, विख्यात उद्योगपतियों या प्रौद्योगिकीविदों और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में शिक्षा देने के क्षेत्र में तीन प्रमुख संस्थाओं के प्रधानों का नामनिर्देशन-धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ज) में निर्दिष्ट विज्ञान तथा प्रौ़द्योगिकी में शिक्षा देने के क्षेत्र में तीन प्रमुख संस्थाओं के प्रधानों, खंड (झ) में निर्दिष्ट प्रख्यात वैज्ञानिकों या विश्वविख्यात शिक्षाविदों और खंड (ञ) में निर्दिष्ट विख्यात उद्योगपतियों या प्रौद्योगिकीविदों को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभापति द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । 

14. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के प्रख्यात वैज्ञानिकों या उत्कृष्ट वैज्ञानिकों या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं के निदेशकों का नामनिर्देशन-धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ट) में निर्दिष्ट वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के प्रख्यात वैज्ञानिकों या उत्कृष्ट वैज्ञानिकों या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं के निदेशकों का नामनिर्देशन, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के शासी निकाय द्वारा किया जाएगा ।

15. बोर्ड के सदस्यों को संदेय भत्ते-बोर्ड के सदस्य अकादमी से ऐसे भत्तों, यदि कोई हों, के हकदार होंगे, जो परिनियमों में उपबंधित किए जाएं, किन्तु धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ठ) में निर्दिष्ट अकादमी के निदेशक से भिन्न कोई अन्य सदस्य इस धारा के कारण किसी वेतन का हकदार नहीं होगा ।

16. बोर्ड के सदस्यों की पदावधि-(1) इस धारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि चार वर्ष होगी, जो बोर्ड की एक अवधि है और वे, यथास्थिति, अध्यक्ष के रूप में पुनःनियुक्त या सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए पात्र नहीं होंगे ।

स्पष्टीकरण 1-विद्यमान अकादमी बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य नामनिर्दिष्ट सदस्य [पदेन-उपाध्यक्ष और पदेन सदस्यों तथा धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों से भिन्न] की पदावधि की इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए गणना की जाएगी ।

 स्पष्टीकरण 2-शंका के निवारण के लिए यह घोषित किया जाता है कि ऐसा कोई व्यक्ति, जिसने सदस्य का पद धारण किया है, सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा किंतु इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा:

परंतु बोर्ड का पदावरोही सदस्य, तब तक या अन्यथा निदेश न दिया जाए, पद पर बना रहेगा जब तक उसके स्थान पर, किसी अन्य व्यक्ति को, यथास्थिति, नियुक्त या नामानिर्दिष्ट नहीं किया जाता है ।

(2) अध्यक्ष की मृत्यु या त्यागपत्र के कारण या अन्यथा, उसके पद में रिक्ति की दशा में, उपाध्यक्ष तब तक अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा जब तक इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार रिक्ति को भरने के लिए नया अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया जाता है और अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है:

परंतु उपधारा (2) के अधीन अध्यक्ष के पद में रिक्ति के कारण नियुक्त कोई व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार अध्यक्ष के रूप में, उस अवधि के अतिरिक्त, जिसके लिए वह, अध्यक्ष की रिक्ति को भरने के लिए उसे नियुक्त किया गया था, केवल एक अवधि के लिए नियुक्त किए जाने का पात्र होगा ।

(3) धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ज), खंड (झ), खंड (ञ) और खंड (ट) के अधीन नामनिर्दिष्ट किसी सदस्य के पद में, उसकी मृत्यु या त्यागपत्र के कारण या अन्यथा रिक्ति की दशा में, रिक्ति को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार भरा जाएगा: 

परंतु कोई व्यक्ति धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन किसी सदस्य के पद में रिक्ति के कारण नामनिर्दिष्ट किया गया है तो ऐसा व्यक्ति, उस अवधि के अतिरिक्त, जिसके लिए वह रिक्ति को भरने के लिए नामनिर्दिष्ट किया गया था, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार सदस्य के रूप में केवल एक अवधि के लिए नामनिर्दिष्ट किए जाने का पात्र होगा ।

(4) किसी पदेन सदस्य की पदावधि तब तक बनी रहेगी जब तक वह ऐसा पद धारण करता है, जिसके कारण वह सदस्य   बना है ।

(5) सदस्यों में से एक चौथाई सदस्य, जो धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अधीन नामनिर्दिष्ट प्रख्यात वैज्ञानिक या उत्कृष्ट वैज्ञानिक या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं के निदेशक हैं, प्रत्येक वर्ष सेवानिवृत्त हो जाएंगे और इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उनके स्थान पर नए सदस्य नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे:

परंतु इस उपधारा में किसी बात के होते हुए भी ऐसे सदस्य, जो धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अधीन नामनिर्दिष्ट प्रख्यात वैज्ञानिक या उत्कृष्ट वैज्ञानिक या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की प्रयोगशालाओं के निदेशक हैं, इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पश्चात् पहली बार ऐसी अवधि के लिए पदधारण कर सकेंगे, जो उनके नामनिर्देशन में विनिर्दिष्ट की जाए और इस उपधारा के उपबंध, ऐसे नामनिर्दिष्ट सदस्यों को लागू नहीं होंगे ।

17. बोर्ड की शक्तियां-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड, अकादमी के कार्यों के साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होगा तथा अकादमी की ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जिनके लिए इस अधिनियम, परिनियमों और अध्यादेशों में अन्यथा उपबंध नहीं किया गया है और उसके पास सिनेट के कार्यों का पुनर्विलोकन करने की शक्ति   होगी ।

(2) उपधारा (1) के उपंबधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड के पास निम्नलिखित शक्तियां होंगीः-

(क) अकादमी के प्रशासन और कार्यकरण से संबंधित नीतिगत प्रश्नों पर विनिश्चय करना;

(ख) अकादमी में अध्ययन पाठ्यक्रम प्रारंभ करना;

(ग) परिनियम बनाना;

(घ) अकादमी में शैक्षिक और साथ ही अन्य पदों को संस्थित करना और उन पर व्यक्तियों को नियुक्त करना;

(ङ) अध्यादेशों पर विचार करना और उन्हें उपांतरित या रद्द करना या विखंडित करना;

(च) आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अकादमी की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखों और बजट प्राक्कलनों पर, उसकी विकास योजनाओं के विवरण सहित, विचार करना और उन पर संकल्प पारित करना;

(छ) किसी भूमि या भवन में अकादमी की अवसंरचना में विनियोगों का अनुमोदन करना;

(ज) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना और ऐसे अन्य कर्तव्यों का अनुपालन करना, जो उसको इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा प्रदत्त की जाएं या उस पर अधिरोपित की जाएं ।

(3) बोर्ड को, एक या अधिक व्यक्तियों की ऐसी समितियां नियुक्त करने की भी शक्ति होगी, जिनको वह इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कर्तव्यों के अनुपालन और जांच कराने के लिए आवश्यक समझे ।

18. सिनेट-(1) सिनेट, निम्नलिखित व्यक्तियों से मिलकर बनेगी, अर्थात्ः-

(क) निदेशक, पदेन, जो सिनेट का अध्यक्ष होगा;

(ख) सभी सहयुक्त निदेशक, पदेन सदस्य;

(ग) अकादमी के सभी संकायाध्यक्ष, पदेन सदस्य;

(घ) प्रत्येक अध्ययन क्षेत्र से, जिनका अकादमी के अध्ययन बोर्डों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, दो आचार्य, जिनको बोर्ड द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए; पदेन सदस्य;

(ङ) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के ऐसे दो वैज्ञानिक, जो आयु में सबसे कम हैं, और शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार के प्राप्तिकर्ता हैं तथा जो अकादमी के ऐसे संकाय सदस्य भी हैं, जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएं;

(च) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के ऐसे दो वैज्ञानिक, जो आयु में सबसे कम हैं; तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्द्भयुवा वैज्ञानिक पुरस्कार के प्राप्तिकर्ता हैं और जो अकादमी के ऐसे संकाय सदस्य भी हैं, जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएं;

(छ) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् प्रयोगशालाओं के ऐसे तीन निदेशक या प्रख्यात वैज्ञानिक या उत्कृष्ट वैज्ञानिक, जो उसके महानिदेशक द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएं;

(ज) तीन ऐसे व्यक्ति, जो अकादमी या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के कर्मचारी नहीं हैं, ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों में से निदेशक के परामर्श से कुलपति द्वारा नामनिर्देशित किए जाएं, जिनमें विज्ञान, इंजीनियरी और सामाजिक विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र से एक होगा;

(झ) कर्मचारिवृंदों के ऐसे अन्य सदस्य, जो परिनियमों में अधिकथित किए जाएं ।

(2) उपधारा (1) के खंड (घ) से खंड (ज) के अधीन नामनिर्देशित सदस्यों की पदावधि दो वर्ष होगीः

परंतु सिनेट के पास किसी भी समय, अकादमी में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के अध्यापनरत वैज्ञानिकों से उसके सदस्य पचास प्रतिशत से कम नहीं होगें ।

19. सिनेट की शक्तियां-इस अधिनियम, परिनियमों और अध्यादेशों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अकादमी की सिनेट, अकादमी में शिक्षण, शिक्षा और परीक्षाओं के स्तरमानों का नियंत्रण रखेगा और साधारण विनियमन करेगा तथा उनको बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगा जो परिनियमों और अध्यादेशों द्वारा उसको प्रदत्त किए जाएं या उस पर अधिरोपित किए जाएं ।

20. अकादमी का कुलाधिपति-(1) बोर्ड का अध्यक्ष, अकादमी का कुलाधिपति होगा ।

(2) कुलाधिपति, सामान्यतः अकादमी के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगा ।

21. अकादमी का निदेशक-निदेशक, अकादमी का प्रधान शैक्षणिक और कार्यपालक अधिकारी होगा तथा अकादमी के प्रशासन तथा शिक्षा देने, अनुसंधान करने और अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होगा ।

22. अकादमी के निदेशक की नियुक्ति और कर्तव्य, आदि-(1) निदेशक, उपधारा (2) के अधीन गठित चयन समिति की सिफारिश पर, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाएगा

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट चयन समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी-

(क) बोर्ड का अध्यक्ष;

(ख) बोर्ड का उपाध्यक्ष;

(ग) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का सभापति;

(घ) अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग, भारत सरकार;

(ङ) अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग, भारत सरकार ।

(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट चयन समिति-

(क) निदेशक के रूप में पदधारी की सेवाधृति के पूरा होने से पहले छह मास के भीतर गठित की जाएगी;

(ख) पदधारी निदेशक की सेवाधृति के पूरा होने से कम से कम तीन मास पहले अपनी सिफारिश प्रस्तुत करेगी ।

(4) चयन समिति, ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जिसने निदेशक के पद के लिए आवेदन नहीं किया है, सिफारिशें करने सहित उपधारा (1) के अधीन बैठकें और सिफारिशें करने के प्रयोजनों के लिए स्वयं अपनी प्रक्रिया तैयार कर सकेगी

(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट चयन समिति के तीन सदस्यों से समिति की बैठक की गणपूर्ति होगी:

परंतु किसी व्यक्ति को निदेशक के रूप में तब तक चयनित या नामनिर्देशित नहीं किया जाएगा जब तक ऐसा व्यक्ति भारतीय नागरिक न हो ।

(6) निदेशक का यह कर्तव्य होगा कि बोर्ड द्वारा किए गए विनिश्चय कार्यान्वित किए जाएं ।

(7) निदेशक, बोर्ड को अकादमी की वार्षिक रिपोर्ट और लेखे प्रस्तुत करेगा ।

(8) निदेशक, ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो उसको इस अधिनियम या परिनियमों या अधिनियम द्वारा समनुदेशित किए जाएं ।

(9) निदेशक की पदावधि पांच वर्ष की होगी ।

23. सहयुक्त निदेशक-(1) अकादमी के सहयुक्त निदेशक, अकादमी के आचार्यों या अकादमी में विद्या संबंधी क्रियाकलाप में लगे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिकों में से बोर्ड के अनुमोदन से निदेशक द्वारा ऐसी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर जो परिनियमों द्वारा अधिकथित की जाएं, नियुक्त किए जाएंगे और ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो उनको इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा या निदेशक द्वारा समनुदेशित किए जाएं ।

(2) बोर्ड, प्रशासनिक सुविधा या शैक्षणिक दक्षता के प्रयोजन के लिए सहयुक्त निदेशकों के लिए कोई अन्य पदाभिधान समनुदेशित कर सकेगा ।

24. अन्य प्राधिकारियों की शक्तियां-(1) अध्ययन बोर्डों का गठन और उनकी शक्तियां ऐसी होंगी, जिनका परिनियमों में उपबंध किया जाए ।

(2) शक्तियां, जिनके अंतर्गत अकादमी के प्राधिकारियों, अधिकारियों और अन्य कृत्यकारियों की वित्तीय शक्तियां और कर्तव्य भी हैं, परिनियमों द्वारा यथा उपबंधित होंगी ।

25. अकादमी की निधियां-(1) अकादमी एक ऐसी निधि रखेगी और प्रतिधारित करेगी, जिसमें निम्नलिखित जमा किया जाएगा-

(क) अकादमी द्वारा प्राप्त सभी फीसें (अध्यापन फीसों सहित) और अन्य प्रभार;

() अनुदानों, दानों, संदानों, उपकृतियों, वसीयतों या अंतरणों के रूप में अकादमी द्वारा प्राप्त की गई सभी धनराशियां;

(ग) अकादमी द्वारा आरंभ की गई परियोजना के लिए धनराशियां;

(घ) अकादमी द्वारा किए गए विनिधान या किसी अन्य स्रोत से आय;

(=ङ) ऋण के रूप में या अन्यथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् से प्राप्त निधियां; और

(च) किसी अन्य रीति से या किसी अन्य स्रोत से अकादमी द्वारा प्राप्त सभी धनराशियां ।

(2) अकादमी की निधि में जमा की गई सभी धनराशियां ऐसे बैंकों में जमा की जाएंगी या उनका ऐसी रीति से विनिधान किया जाएगा जो अकादमी, बोर्ड के अनुमोदन से विनिश्चय करे ।

(3) निधि, निम्नलिखित की पूर्ति के लिए उपयोजित की जाएगी, -

(क) अकादमी के बोर्ड या संकाय के अध्यक्ष, सदस्यों, अकादमी द्वारा गठित समितियों के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों या सदस्यों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक;

() धारा 8 के अधीन अकादमी के कृत्यों का निर्वहन करने में या उसकी शक्तियों का प्रयोग करने में हुए उसके व्यय;

(ग) इस अधिनियम के उद्देश्यों पर और उसके द्वारा प्राधिकृत प्रयोजनों के लिए व्यय ।

(4) अकादमी के सभी व्यय, बोर्ड द्वारा अनुमोदित बजट के ढांचे के भीतर होंगे ।

26. लेखा-(1) अकादमी, उचित और पृथक् लेखे रखेगी जिनमें ऐसी निधि में सभी प्राप्तियों और व्यय के सभी ब्यौरे तथा अन्य सुसंगत विशिष्टियां दी गई हों ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट लेखे तैयार किए जाएंगे और प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ित से छह मास की समाप्ित से पूर्व संपरीक्षित कराए जाएंगे ।

(3) अकादमी, धारा 27 के अधीन सम्यक् रूप से संपरीक्षित और निदेशक, वित्त के भारसाधक सहयुक्त निदेशक और प्रशासन के भारसाधक सहयुक्त निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित, उपधारा (1) में निर्दिष्ट लेखाओं को बोर्ड और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् को प्रस्तुत करेगी ।

(4) उपधारा (3) में निर्दिष्ट वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्, बोर्ड और अकादमी के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उनके द्वारा नियुक्त किए गए किसी अन्य व्यक्ति को बहियों, लेखाओं, संबंधित वाउचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागज पत्रों को प्रस्तुत करने की मांग करने और अकादमी के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

27. लेखाओं की संपरीक्षा और उनका प्रकाशन-(1) अकादमी के लेखे, नियंत्रकद्भमहालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 (1971 का 56) में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उन लेखापरीक्षकों द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे जिनको एक वर्ष की अवधि के लिए बोर्ड द्वारा नियुक्त किया जा सकेगा और ऐसे लेखापरीक्षक पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होंगे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई व्यक्ति, लेखापरीक्षक के रूप में तब तक नियुक्त किए जाने का पात्र नहीं होगा जब तक वह चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिनियम, 1949 (1949 का 38) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में यथा परिभाषित चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं है और जिसने उस अधिनियम की धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन व्यवसाय प्रमाणपत्र अभिप्राप्त नहीं कर लिया है ।

(3) अकादमी के लेखे उपधारा (1) के अधीन संपरीक्षा के पूरा हो जाने और बोर्ड तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् को उनको प्रस्तुत किए जाने के पश्चात्, अकादमी की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे ।

28. परिनियम-(1) अकादमी के परिनियम, बोर्ड द्वारा अधिनियमित किए जाएंगे ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सिनेट, परिनियमों के अधिनियमन के लिए बोर्ड को सिफारिशें कर सकेगी ।

(3) बोर्ड, समयद्भसमय पर, नए परिनियम बना सकेगा या ऐसी तारीख से, जो वह निदेश करे, परिनियमों को संशोधित या निरसित या विखंडित कर सकेगा ।

29. विषयों का परिनियमों द्वारा उपबंधित किया जाना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, परिनियम, इस अधिनियम के ढांचे के भीतर अकादमी के कार्यकरण के लिए बोर्ड द्वारा आवश्यक समझे गए सभी या किन्हीं विषयों के लिए, जिनके अंतर्गत निम्नलिखित विषय भी हैं, उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) उपाधियों और डिप्लोमाओं का प्रदान किया जाना;

(ख) अध्ययन बोर्डों का गठन, शक्तियां और कृत्य;

(ग) प्रभारित की जाने वाली अध्यापन फीस और अन्य फीसें;

(घ) अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति, पदकों और पुरस्कारों को संस्थित किया जाना;

(ङ) अकादमी के अधिकारियों की पदावधि और नियुक्ति की पद्धति;

(च) अकादमी के संकाय (अकादमी की सेवा में लगे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिकों से भिन्न), अकादमी के अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृन्द की अर्हताः

परंतु अकादमी की सेवा में लगे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिक, परिषद् द्वारा विनिर्दिष्ट अर्हताओं द्वारा शासित होंगे और इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह उनको अकादमी की सेवा करने से या अकादमी के संकाय के रूप में उनको नियोजित करने से निरर्हित करती है;

(छ) अकादमी के संकाय, अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृन्द का वर्गीकरण, नियुक्ति की पद्धति और उनकी सेवाओं के निबंधन और शर्तों का अवधारण;

(ज) अकादमी के संकाय, अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृन्द के फायदे के लिए बीमा निधि, भविष्य निधि और अन्य सेवानिवृत्ति फायदों का उपबंध;

(झ) अकादमी के प्राधिकारियों का गठन, शक्तियां और कर्तव्य;

(ञ) छात्रावासों का स्थापन और उनका अनुरक्षण;

(ट) अकादमी के छात्रों के निवास की और छात्रावासों में निवास के लिए फीस उद्ग्रहण करने तथा अन्य प्रभारों की शर्तें;

(ठ) बोर्ड और अकादमी द्वारा गठित किसी समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;

(ड) बोर्ड, सिनेट या किसी समिति की बैठकें, ऐसी बैठकों में गणपूर्ति तथा उनके कारबार के संचालन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया;

(ढ) अन्य कोई विषय जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित या आवश्यक हो ।

30. अध्यादेश-(1) इस अधिनियम और अन्य परिनियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अकादमी के अध्यादेशों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) छात्रों का प्रवेश;

(ख) पाठ्यक्रम;

(ग) वे शर्तें, जिनके अधीन छात्रों को अकादमी की परीक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा और वे उपाधियों, डिप्लोमाओं तथा प्रमाणपत्रों के लिए पात्र होंगे;

(घ) अध्येतावृत्तियों, छात्रवृत्तियों, पदकों और पुरस्कारों को प्रदान करने की शर्तें;

(ङ) परीक्षा निकायों, परीक्षकों और अनुसीमकों की नियुक्ति की शर्त और पद्धति तथा कर्तव्य;

(च) परीक्षाओं का संचालन;

(छ) अकादमी के छात्रों में अनुशासन बनाए रखना;

(ज) ऐसा कोई अन्य विषय, जिसका इस अधिनियम या परिनियम के अनुसार अध्यादेशों द्वारा उपबंध किया जाना है या किया जाए ।

(2) इस धारा में अन्यथा यथा उपबंधित के सिवाय, अध्यादेश, सिनेट द्वारा बनाए जाएंगे ।

(3) सिनेट द्वारा बनाए गए सभी अध्यादेश उस तारीख से प्रभावी होंगे जिसका वह निदेश करे, किन्तु ऐसा बनाया गया प्रत्येक अध्यादेश, यथाशीघ्र, बोर्ड को प्रस्तुत किया जाएगा और बोर्ड द्वारा उसकी पश्चात्वर्ती बैठक में उस पर विचार किया जाएगा ।

(4) बोर्ड को, किन्हीं अध्यादेशों को, संकल्प द्वारा उपांतरित करने या रद्द करने या विखंडित करने की शक्ति होगी और ऐसे अध्यादेश, ऐसे संकल्प की तारीख से, तद्नुसार, यथास्थिति, उपांतरित या रद्द या विखंडित हो जाएंगे

31. अकादमी के कार्यकरण का पुनर्विलोकन-(1) प्रत्येक चार वर्ष में एक बार वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् द्वारा नियुक्त किए जाने वाले विख्यात व्यक्तियों द्वारा, अकादमी के कार्यकरण का पुनर्विलोकन किया जाएगा ।

(2) अकादमी, उपधारा (1) के अधीन पुनर्विलोकन कराने के लिए व्ययों की पूर्ति करेगी और ऐसे पुनर्विलोकन की रिपोर्ट की प्राप्ति पर बोर्ड समुचित कार्रवाई कर सकेगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन पुनर्विलोकन के अतिरिक्त, बोर्ड, अकादमी के प्रशासनिक कार्यकरण और अकादमी के खंडों का, ऐसी रीति से और ऐसे अंतरालों पर, जो परिनियमों में उपबंधित किए जाएं, पुनर्विलोकन करा सकेगा ।

32. नियुक्तियां-(1) अकादमी के कर्मचारिवृन्द की सभी नियुक्तियां (निदेशक की नियुक्ति के सिवाय), -

(क) अकादमी के कर्मचारिवृन्द के लिए बोर्ड द्वारा;

(ख) किसी अन्य दशा में निदेशक द्वारा, परिनियम में अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार की जाएंगी ।

33. सेवा की शर्तें-(1) अकादमी का प्रत्येक कर्मचारी, किसी ऐसी लिखित संविदा के अधीन, जो अकादमी को सौंपी जाएगी और जिसकी एक प्रति संबद्ध कर्मचारी को दी जाएगी, संविदात्मक आधार पर नियुक्त किया जाएगा:

परन्तु अकादमी की सेवा में लगे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभी वैज्ञानिक और अन्य कर्मचारी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की सेवा शर्तों, नियमों और विनियमों द्वारा शासित होंगे

(2) अकादमी में सुनम्य प्रतिकर प्रणाली होगी जो अकादमी में सर्वोत्तम प्रतिभाशाली व्यक्ति को लाने के लिए परिनियमों में यथा अधिकथित निष्पादन को मान्यता देती हैः

परन्तु वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के ऐसे वैज्ञानिक जो: -

(क) अकादमी की सेवा में लगे हैं; और

(ख) परिषद् से अपना वेतन प्राप्त करते हैं; ऐसे भत्तों या मानदेय के लिए, जो परिनियम द्वारा अवधारित किए जाएं, पात्र होंगे ।

34. माध्यस्थम्-(1) अकादमी और उसके किन्हीं कर्मचारियों के बीच किसी संविदा से उत्पन्न कोई विवाद, संबद्ध कर्मचारी के अनुरोध पर या अकादमी के आवेदन पर, ऐसे माध्यस्थम् अधिकरण को निर्देशित किया जाएगा, जो निदेशक द्वारा नियुक्त एक सदस्य, कर्मचारी द्वारा नामनिर्देशित एक सदस्य से मिलकर बनेगा और ऐसे दो मध्यस्थ, तीसरे मध्यस्थ को नियुक्त करेंगे जो पीठासीन मध्यस्थ के रूप में कार्य करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन माध्यस्थम्, माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26) द्वारा शासित होगा

35. अध्यक्ष और अन्य सदस्यों या निदेशक का त्यागपत्र, हटाया जाना और निलंबन-(1) बोर्ड का अध्यक्ष या बोर्ड के पदेन सदस्य से भिन्न कोई सदस्य या निदेशक, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभापति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित में सूचना द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकेगा:

परन्तु अध्यक्ष या ऐसा सदस्य या निदेशक, जब तक उसको वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभापित द्वारा पद त्याग करने की अनुमति न दे दी जाए, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास के अवसान तक या उसके उत्तरवर्ती के रूप में सम्यक् रूप से नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा उसका पदग्रहण करने तक या उसकी पदावधि की समाप्ति तक, जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करता रहेगा ।

(2) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का सभापति, बोर्ड के ऐसे अध्यक्ष या किसी सदस्य या निदेशक को पद से हटा सकेगा, -

 (क) जिसे दिवालिया अधिनिर्णीत किया गया है; या

(ख) जो निदेशक होते हुए अपनी पदावधि के दौरान किसी भी समय किसी संदत्त नियोजन में लगा है; या

(ग) जिसको किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्वलित है; या

() जो शारीरिक या मानसिक रूप से, ऐसे अध्यक्ष या सदस्य या निदेशक के रूप में कार्य करने में अक्षम हो गया है; या

(ङ) जो विकृतचित है और जिसको किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया गया है; या

(च) जिसने ऐसे वित्तीय या अन्य हित अर्जित किए हैं, जिससे ऐसे अध्यक्ष या सदस्य या निदेशक के रूप में उसके कृत्यों के निर्वहन के प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की संभावना है; या

(छ) जिसने अपनी हैसियत का ऐसा दुरुपयोग किया है, जिससे उसका पद पर बने रहना लोकहित के प्रतिकूल      है; या

(ज) जो साबित कदाचार का दोषी हो गया है; या

(झ) जो ऐसी अन्य निरर्हताएं रखता है, जो विहित की जाएं ।

(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी सदस्य या किसी निदेशक को उपधारा (1) के खंड (च) या खंड (छ) या खंड (ज) में विनिर्दिष्ट आधारों पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सभापति द्वारा इस निमित्त ऐसी जांच करने के पश्चात्, जिसमें ऐसे अध्यक्ष या सदस्य या निदेशक को उसके विरुद्ध आरोपों की सूचना दी गई हो और उन आरोपों के संबंध में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया गया हो, किए गए आदेश के सिवाय उसके पद से हटाया नहीं जाएगा ।

(4) उपधारा (2) के अधीन जांच संस्थित किए जाने की दशा में, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का सभापति, ऐसे अध्यक्ष या सदस्य या निदेशक को, जिसके विरुद्ध जांच संस्थित की गई है, यदि वह लोकहित में आवश्यक समझता है, तो छह मास से अनधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकेगा ।

(5) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का सभापति, नियमों द्वारा, उपधारा (2) में निर्दिष्ट जांच के लिए प्रक्रिया को विनियमित कर सकेगा ।

(6) यदि धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अधीन बोर्ड में नामनिर्दिष्ट कोई सदस्य, उपधारा (1) के खंड (क) से खंड (झ) के अधीन किसी निरर्हता को उपगत करता है, तो ऐसा नामनिर्दिष्ट सदस्य, उस रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा और नामनिर्दिष्ट सदस्य के रूप में उसके नामनिर्देशन को ऐसे व्यक्तियों द्वारा प्रतिसंहृत किया जाएगा, जिन्होंने ऐसे सदस्य को नामनिर्दिष्ट किया था ।

36. बैठकें-बोर्ड, सिनेट या अकादमी द्वारा गठित अन्य समितियों की बैठकें, सदस्यों को अनिवार्य रूप से वस्तुतः उपस्थित हुए बिना, सूचना और संसूचना प्रौद्योगिकियों (जिनके अंतर्गत वीडियो कान्फ्रेंसिंग भी है) के समसामयिक यंत्रों का प्रयोग करके आयोजित की जा सकेंगी ।

37. रिक्तियों, आदि से बोर्ड, अकादमी या किसी अन्य निकाय के कार्यों या कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-इस अधिनियम या परिनियमों के अधीन गठित किया गया बोर्ड या अकादमी या किसी अन्य निकाय का कार्य केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगा, कि-

(क) उसमें कोई रिक्ति है, या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या

(ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के चयन, नामनिर्देशन या नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या

(ग) उसकी प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है, जो मामले के गुणावगुण पर प्रभाव नहीं डालती है ।

38. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित ऐसे आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत हो, जो उसको कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो:

परंतु ऐसा कोई आदेश इस धारा के अधीन इस अधिनियम के प्रारंभ से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) उपधारा (1)  के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों मे पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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