पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966
(1966 का अधिनियम संख्यांक 31)
झ्र्18 सितम्बर, 1966ट
विद्यमान पंजाब राज्य के पुनर्गठन और
तत्सम्बद्ध विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सत्रहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :श्न्
भाग 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नामश्न्यह अधिनियम पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 कहा जा सकेगा ।
2. परिभाषाएंश्न्इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,श्न्
(क) प्रशासकञ्ज् से राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ;
(ख) नियत दिनञ्ज् से नवम्बर, 1966 का प्रथम दिन अभिप्रेत है ;
(ग) अनुच्छेदञ्ज् से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है ;
(घ) सभा निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज्, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज् और संसद् निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज् के वे ही अर्थ हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में हैं :
(ङ) परिसीमन आयोगञ्ज् से परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 (1962 का 1) की धारा 3 के अधीन गठित परिसीमन आयोग अभिप्रेत है ;
(च) विद्यमान पंजाब राज्यञ्ज् से नियत दिन के ठीक पहले यथाविद्यमान पंजाब राज्य अभिप्रेत है ;
(छ) विधिञ्ज् के अन्तर्गत सम्पूर्ण विद्यमान पंजाब राज्य में या उसके किसी भाग में नियत दिन के ठीक पहले विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी है ;
(ज) अधिसूचित आदेशञ्ज् से शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश अभिप्रेत है ;
(झ) हरियाणा और पंजाब राज्यों तथा संघ के संबंध में, जनसंख्या अनुपातञ्ज् से 37.38 : 54.84 : 7.78 का अनुपात अभिप्रेत है ;
(ञ) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ट) आसीन सदस्यञ्ज् से संसद् के या विद्यमान पंजाब राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों में से किसी के संबंध में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पहले उस सदन का सदस्य है ;
(ठ) पंजाब राज्यञ्ज् से उसी नाम का वह राज्य अभिप्रेत है जिसमें धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र समाविष्ट है ;
(ड) उत्तरवर्ती राज्यञ्ज् से विद्यमान पंजाब राज्य के संबंध में पंजाब राज्य या हरियाणा राज्य अभिप्रेत है और चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र और अन्तरित राज्यक्षेत्र के संबंध में इसके अंतर्गत संघ भी है ;
(ढ) अन्तरित राज्यक्षेत्रञ्ज् से वह राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है जिसको से विद्यमान पंजाब राज्य से हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र को नियत दिन अन्तरित कर दिया गया है ;
(ण) खजानाञ्ज् के अन्तर्गत उपखजाना भी है ; तथा
(त) विद्यमान पंजाब राज्य के जिले, तहसील या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह जुलाई, 1966 के प्रथम दिन उस प्रादेशिक खण्ड में समाविष्ट क्षेत्र के प्रति निर्देश है ।
भाग 2
पंजाब राज्य का पुनर्गठन
3. हरियाणा राज्य का बनाया जानाश्न्(1) नियत दिन से एक नया राज्य बनाया जाएगा जो हरियाणा राज्य कहलाएगा और जिसमें विद्यमान पंजाब राज्य के निम्नलिखित राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे, अर्थात् :श्न्
(क) हिसार, रोहतक, गुड़गांव, करनाल और महेन्द्रगढ़ जिले ;
(ख) संगरूर जिले की नरवाणा और जीन्द तहसीलें ;
(ग) अम्बाला जिले की अम्बाला, जगाधरी और नारायण गढ़ तहसीलें ;
(घ) अम्बाला जिले की खरड़ तहसील का पिंजौर कानूनगो हल्का ; तथा
(ङ) अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्के के वे राज्यक्षेत्र जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं,
और तदुपरि उक्त राज्यक्षेत्र विद्यमान पंजाब राज्य के भाग नहीं रहेंगे ।
(2) हरियाणा राज्य में, उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों का एक पृथक् जिला होगा जो जीन्द जिला कहलाएगा ।
(3) हरियाणा राज्य में, उपधारा (1) के खण्ड (ग), (घ) और (ङ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों का एक पृथक् जिला होगा जो अम्बाला जिला कहलाएगा और उस जिले में,श्न्
(त्) उपधारा (1) के खण्ड (घ) और (ङ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नारायण गढ़ तहसील के अन्तर्गत होंगे और उसका भाग होंगे, तथा
(त्त्) उपधारा (1) के खण्ड (ङ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नारायण गढ़ तहसील के पिंजौर कानूनगो हल्के के अन्तर्गत होंगे और उसके भाग होंगे ।
4. चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र का बनाया जानाश्न्नियत दिन से, एक नया संघ राज्यक्षेत्र बनाया जाएगा जो चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र कहलाएगा और जिसमें विद्यमान पंजाब राज्य के अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा और मनौली कानूनगो हल्के के वे राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं और तदुपरि इस प्रकार विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र विद्यमान पंजाब राज्य के भाग नहीं रहेंगे ।
5. राज्यक्षेत्र का पंजाब से हिमाचल प्रदेश को अन्तरणश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य के वे राज्यक्षेत्र जो निम्नलिखित में समाविष्ट हैं, नियत दिन से हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र में जोड़ दिए जाएंगे :श्न्
(क) शिमला, कांगड़ा, कुलू और लाहौल तथा स्पिति जिले ;
(ख) अम्बाला जिले की नालागढ़ तहसील ;
(ग) होशियारपुर जिले की उना तहसील के लोहारा, अम्ब और उना कानूनगो हल्के ;
(घ) होशियारपुर जिले की उना तहसील के सन्तोषगढ़ कानूनगो हल्के के वे राज्यक्षेत्र जो तीसरी अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट हैं ;
(ङ) होशियारपुर जिले की उना तहसील के वे राज्यक्षेत्र जो तीसरी अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट हैं ; तथा
(च) गुरदासपुर जिले की पठानकोट तहसील के धरकलां कानूनगो हल्के के वे राज्यक्षेत्र जो तीसरी अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट हैं,
और तदुपरि उक्त राज्यक्षेत्र विद्यमान पंजाब राज्य के भाग नहीं रहेंगे ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र शिमला जिले के अन्तर्गत होंगे और उसके भाग होंगे ।
(3) उपधारा (1) के खण्ड (ग), (घ) और (ङ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र कांगड़ा जिले के अन्तर्गत होंगे और उसके भाग होंगे, तथा,श्न्
(त्) उस जिले में खण्ड (ग) और (घ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों की एक पृथक् तहसील होगी जो उना तहसील कहलाएगी और उस तहसील में खण्ड (घ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों का एक पृथक् कानूनगो हल्का होगा जो सन्तोषगढ़ कानूनगो हल्का कहलाएगा ; तथा
(त्त्) खण्ड (ङ) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र उक्त जिले की हमीरपुर तहसील के भाग होंगे ।
(4) उपधारा (1) के खण्ड (च) में निर्दिष्ट हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र के छम्ब जिले की भटियल तहसील के अन्तर्गत होंगे और उसके भाग होंगे और उस तहसील में, डलहोजी तथा बालन ग्राम बनीखेत कानूनगो हल्के के अन्तर्गत होंगे और उसके भाग होंगे तथा बकलोह ग्राम चौवारी कानूनगो हल्के का भाग होगा ।
6. पंजाब राज्य तथा उसके प्रादेशिक खण्डश्न्(1) नियतहदिन से पंजाब राज्य में विद्यमान पंजाब राज्य के वे राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे जो धारा 3 की उपधारा (1), धारा 4 तथा धारा 5 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नहीं हैं ।
(2) वे राज्यक्षेत्र जो नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य के अम्बाला जिले के भाग थे किन्तु धारा 3, 4 तथा 5 के आधार पर अन्तरित नहीं हुए हैं, उन राज्यक्षेत्रों सहित, जो उस दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य के होशियारपुर जिले की उना तहसील के भाग थे किन्तु धारा 5 के आधार पर अन्तरित नहीं हुए हैं, पंजाब राज्य में रोपड़ जिले के नाम से एक पृथक् जिला होगा और उस जिले मेंश्न्
(त्) वे राज्यक्षेत्र, जो नियत दिन के ठीक पहले अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्के के भाग थे किन्तु धारा 3 तथा 4 के आधार पर अन्तरित नहीं हुए हैं, उस तहसील में एक पृथक् कानूनगो हल्का होंगे जो मुल्लनपुर कानूनगो हल्का कहा जाएगा ;
(त्त्) वे राज्यक्षेत्र, जो नियत दिन के ठीक पहले होशियारपुर जिले की उना तहसील के भाग थे किन्तु धारा 5 के आधार पर अन्तरित नहीं हुए हैं, आनन्दपुर साहिब तहसील के नाम से एक पृथक् तहसील होंगे और उस तहसील में वे राज्यक्षेत्र जो नियत दिन के ठीक पहले होशियारपुर जिले की उना तहसील के संतोषगढ़ कानूनगो हल्के के भाग थे, किन्तु धारा 5 के आधार पर अन्तरित नहीं हुए हैं, नूरपुर बेडी कानूनगो हल्के के अन्तर्गत होंगे तथा उसके भाग होंगे ।
7. संविधान की प्रथम अनुसूची का संशोधनश्न्नियत दिन से संविधान की प्रथम अनुसूची में,श्न्
(क) 1. राज्यञ्ज् शीर्षक के अन्तर्गतश्न्
(त्) पंजाब राज्य के राज्यक्षेत्रों से संबंधित पैरा के अन्त में निम्नलिखित जोड़ दिया जाएगा, अर्थात्ःश्न्
और वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 3 की उपधारा (1), धारा 4 तथा धारा 5 की उपधारा (1) में उल्लिखित हैंञ्ज् ;
(त्त्) प्रविष्टि 16 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ःश्न्
17. हरियाणा : वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 3 की उपधारा (1) में उल्लिखित हैंञ्ज् ;
(ख) 2. संघ राज्यक्षेत्रञ्ज् शीर्षक के अंतर्गतश्न्
(त्) हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्रों के विस्तार से संबंधित पैरा के अन्त में निम्नलिखित जोड़ दिया जाएगा, अर्थात्ःश्न्
और वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 5 की उपधारा (1) में उल्लिखित हैंञ्ज् ;
(त्त्) प्रविष्टि 9 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ःश्न्
10. चंडीगढ़ : वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 4 में उल्लिखित हैंञ्ज् ।
8. सरकार की शक्ति की व्यावृत्तिश्न्इस भाग के पूर्वगामी उपबन्धों की कोई बात पंजाब या हरियाणा सरकार की या हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की, नियत दिन के पश्चात्, यथास्थिति, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खंड के नाम, क्षेत्र या सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
भाग 3
विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व
राज्य सभा
9. संविधान की चतुर्थ अनुसूची का संशोधनश्न्(1) नियत दिन से, संविधान की चतुर्थ अनुसूची की सारणी में,श्न्
(क) 5 से 21 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 6 से 22 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनः संख्यांकित की जाएंगी ;
(ख) प्रविष्टि 4 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :श्न्
5. हरियाणा..........5ञ्ज् ;
(ग) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित प्रविष्टि 12 में, अंक 11ञ्ज् के स्थान पर, अंक 7ञ्ज् प्रतिस्थापित किया जाएगा ;
(घ) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित प्रविष्टि 19 में अंक 2ञ्ज् के स्थान पर, अंक 3ञ्ज् प्रतिस्थापित किया जाएगा ; तथा
(ङ) अंक 226ञ्ज् के स्थान पर, अंक 228ञ्ज् प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
10. आसीन सदस्यों का आबंटनश्न्(1) नियत दिन से, विद्यमान पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य सभा के ग्यारह आसीन सदस्य चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से हरियाणा और पंजाब राज्यों और हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र को आबंटित स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे ।
(2) ऐसे आसीन सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।
11. रिक्तियों का भरा जानाश्न्(1) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, हरियाणा राज्य को आबंटित स्थानों में नियत दिन पर विद्यमान रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन किए जाएंगे ।
(2) इस प्रकार निर्वाचित दो सदस्यों में से ऐसे एक की पदावधि, जिसे राज्य सभा का अध्यक्ष लाट द्वारा अवधारित करे, अप्रैल, 1968 के दूसरे दिन समाप्त होगी ओर दूसरे सदस्य की पदावधि अप्रैल, 1972 के दूसरे दिन समाप्त होगी ।
लोक सभा
12. विद्यमान सदन के बारे में उपबंधश्न्भाग 2 की कोई बात लोक सभा के गठन या विद्यमान लोक सभा की अवधि या उस सभा के आसीन सदस्य के निर्वाचन-क्षेत्र के विस्तार पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
विधान सभाएं
13. विधान सभाओं के बारे में उपबंधश्न्(1) नियत दिन हरियाणा और पंजाब राज्यों तथा हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभाओं के स्थानों की संख्या क्रमशः चौवन, सत्तासी और छप्पन होगी ।
(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में :श्न्
(क) प्रविष्टि 4 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :श्न्
4क. हरियाणा..........54ञ्ज् ;
(ख) प्रविष्टि 11 में अंक 154ञ्ज् के स्थान पर, अंक 87ञ्ज् प्रतिस्थापित किए जाएंगे ; तथा
(ग) प्रविष्टि 16 में अंक 40ञ्ज् के स्थान पर, अंक 54ञ्ज् प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
14. परिसीमन आदेशों का संशोधनश्न्नियत दिन से संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 1961 की अनुसूची 11 का भाग ख तथा प्रादेशिक परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (हिमाचल प्रदेश) आदेश, 1962 की अनुसूची इस अधिनियम की पांचवी अनुसूची में यथा निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएगी ।
15. आसीन सदस्यों का आबंटनश्न्(1) पंजाब विधान सभा का प्रत्येक आसीन सदस्य जो उस सभा में स्थान को भरने के लिए किसी ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित हो जो नियत दिन धारा 14 के उपबंधों के आधार पर, हरियाणा राज्य या हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन सहित या उसके बिना आबंटित हो गया हो, पंजाब विधान सभा का सदस्य नहीं रहेगा और, यथास्थिति, हरियाणा विधान सभा या हिमाचल प्रदेश विधान सभा में स्थान को भरने के लिए इस प्रकार आबंटित निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित समझा जाएगा ।
(2) पंजाब विधान सभा के सभी अन्य आसीन सदस्य उस राज्य की विधान सभा के सदस्य बने रहेंगे और किसी ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का जिसके विस्तार में या नाम तथा विस्तार में धारा 14 के उपबंधों के आधार पर परिवर्तन हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाला कोई आसीन सदस्य इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से उस विधान सभा के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।
(3) किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी, नियत दिन हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की विधान सभाएं सम्यक् रूप से गठित समझी जाएंगी ।
16. हरियाणा विधान सभा की अवधिश्न्अनुच्छेद 172 के खण्ड (1) में निर्दिष्ट पांच वर्ष की कालावधि हरियाणा विधान सभा की दशा में उस तारीख को प्रारंभ हुई समझी जाएगी जिस तारीख को वह पंजाब विधान सभा की दशा में वस्तुतः प्रारंभ हुई थी ।
17. पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश विधान सभाओं की अवधिश्न्पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश विधान सभाओं की संरचना में किए गए परिवर्तन उन सभाओं में से किसी की अवधि पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे ।
18. अध्यक्ष और उपाध्यक्षश्न्(1) वह व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले पंजाब विधान सभा का अध्यक्ष हो, उस दिन से उस सभा का अध्यक्ष बना रहेगा ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र हरियाणा विधान सभा अपना कोई सदस्य उस सभा के अध्यक्ष के रूप में चुनेगी ।
(3) वह व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले पंजाब विधान सभा का उपाध्यक्ष हो, हरियाणा विधान सभा का उपाध्यक्ष होगा ।
(4) नियत के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र पंजाब विधान सभा अपना कोई सदस्य उस सभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुनेगी ।
19. प्रक्रिया के नियमश्न्नियत दिन के ठीक पहले यथाप्रवृत्त पंजाब विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन के नियम, जब तक अनुच्छेछ 208 के खण्ड (1) के अधीन नियम नहीं बनते, उसके अध्यक्ष द्वारा उसमें किए गए उपान्तरों और अनुकूलनों सहित, हरियाणा विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन के नियम होंगे ।
विधान परिषद्
20. पंजाब विधान परिषद्श्न्नियत दिन से, पंजाब विधान परिषद् में चालीस स्थान होंगे और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की तृतीय अनुसूची में विद्यमान प्रविष्टि 7 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :श्न्
7. पंजाबश्न्40 14 3 3 14 6ञ्ज् ।
21. परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रश्न्नियत दिन से परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 की छठी अनूसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित होगा ।
22. कुछ आसीन सदस्यों के बारे में उपबंधश्न्(1) पंजाब विधान परिषद् के सातवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट आसीन सदस्य नियत दिन उस परिषद् के सदस्य नहीं रहेंगे ।
(2) पंजाब विधान परिषद् के उपधारा (1) में निर्दिष्ट से भिन्न सब सदस्य नियत दिन से उस परिषद् के सदस्य बने रहेंगे ।
(3) उपरोक्त रीति से बने रहने वाले आसीन सदस्यों में से कोई सदस्य जो उस परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र का जिसके विस्तार में धारा 21 के उपबन्धों के आधार पर परिवर्तन हो गया है, प्रतिनिधित्व करता है, इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से पंजाब विधान परिषद् के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।
(4) उक्त परिषद् का प्रत्येक आसीन सदस्य, जो निम्नलिखित सारणी के स्तंभ (1) में विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र में से किसी निर्वाचन-क्षेत्र का नियत दिन के ठीक पहले प्रतिनिधित्व करता है, उस निर्वाचन-क्षेत्र के सामने उक्त सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र से उक्त परिषद् के लिए निर्वाचित समझा जाएगा :श्न्
सारणी
(1) (2)
पंजाब पश्चिम केन्द्रीय स्नातक पंजाब केन्द्रीय स्नातक
पंजाब पूर्व केन्द्रीय स्नातक पंजाब दक्षिण स्नातक
पंजाब पश्चिम केन्द्रीय शिक्षक पंजाब केन्द्रीय शिक्षक
पंजाब पूर्व केन्द्रीय शिक्षक पंजाब दक्षिण शिक्षक
पटियाला स्थानीय प्राधिकारी पटियाला-एवं-रोपड़ स्थानीय प्राधिकारी ।
(5) उपधारा (2) में निर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।
(6) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 द्वारा विभिन्न परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों को आबंटित स्थानों की नियत दिन विद्यमान रिक्तियों को भरने के लिए और विद्यमान सभा के सदस्यों के द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की उस दिन विद्यमान रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र किए जाएंगे ।
(7) फिरोजपुर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र, जालन्धर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र और लुधियाना स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र से इस प्रकार निर्वाचित तीन सदस्यों की तथा विधान सभा के सदस्यों द्वारा इस प्रकार निर्वाचित सदस्य की पदावधि अप्रैल, 1968 के 26वें दिन समाप्त होगी और पटियाला एवं रोपड़ स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र से इस प्रकार निर्वाचित सदस्य की पदावधि अप्रैल, 1972 के 26वें दिन समाप्त होगी ।
(8) वह व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले पंजाब विधान परिषद् का अध्यक्ष है, उस दिन से उस परिषद् का अध्यक्ष बना रहेगा ।
(9) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र पंजाब विधान परिषद् अपना कोई सदस्य अपने उपाध्यक्ष के रूप में चुनेगी ।
निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन
23. लोक सभा में के स्थानों का आबंटनश्न् इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् गठित होने वाली लोक सभा मेंश्न्
(क) हरियाणा राज्य को नौ स्थान आबंटित होंगे, जिनमें से दो स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे ;
(ख) पंजाब राज्य को तेरह स्थान आबंटित होंगे, जिनमें से तीन स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे ;
(ग) हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र को छह स्थान आबंटित होंगे, जिनमें से एक स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित होगा ; तथा
(घ) चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र को एक स्थान आबंटित होगा, जो एक संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र होगा ।
24. विधान सभा में के स्थानों का आबंटनश्न्(1) नियत दिन के पश्चात् किसी समय गठित होने वाली हरियाणा विधान सभा में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या इक्यासी होगी, जिनमें से पन्द्रह स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे ।
(2) नियत दिन के पश्चात् किसी समय गठित होने वाली पंजाब विधान सभा में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या एक सौ चार होगी, जिनमें से तेईस स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे ।
(3) नियत दिन के पश्चात् किसी समय गठित होने वाली हिमाचल प्रदेश विधान सभा में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या साठ होगी, जिनमें से चौदह स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे तथा तीन स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित होंगे ।
25. निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमनश्न्(1) परिसीमन आयोग, धारा 23 के अधीन हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को आबंटित लोक सभा में के स्थानों को और धारा 24 के अधीन उनमें से हर एक की विधान सभा को समनुदेशित स्थानों को एक सदस्य प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में, इसमें उपबंधित रीति से वितरित करेगा और उनका परिसीमन संविधान के उपबंधों और निम्नलिखित उपबंधों का ध्यान रखते हुए अंतिम जनगणना के आकंड़ों के आधार पर करेगा, अर्थात् :श्न्
(क) सब निर्वाचन-क्षेत्र, यथासाध्य भौगोलिक रूप से संहत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन भौतिक लक्षणों, प्रशासनिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार की सुविधाओं और लोक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ;
(ख) प्रत्येक सभा निर्वाचन-क्षेत्र का इस प्रकार परिसीमन किया जाएगा कि वह पूर्णतया एक ही संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र में पडे़,
(ग) वे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें अनुसूचित जातियों के लिए स्थान आरक्षित हों, राज्य के भिन्न-भिन्न भागों में वितरित होंगे और यथासाध्य उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां कुल जनसंख्या से उनकी जनसंख्या का अनुपात तुलनात्मक रूप से अधिक हो ; तथा
(घ) वे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित हों, यथासाध्य, उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां कुल जनसंख्या से उनकी जनसंख्या का अनुपात अधिकतम हो ।
(2) परिसीमन आयोग, उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों के पालन में अपनी सहायता के प्रयोजनार्थ अपने साथ प्रत्येक राज्य और संघ राज्यक्षेत्रों के संबंध में ऐसे छह व्यक्तियों को, जिन्हें केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, और जो व्यक्ति या तो लोक सभा या हरियाणा, पंजाब या हिमाचल प्रदेश विधान सभा के सदस्य हों, सहयुक्त करेगा :
परन्तु ऐसे व्यक्तियों को यावत्साध्य ऐसे सदस्यों में से चुना जाएगा जो इस अधिनियम के प्रारंभ के पहले परिसीमन आयोग के साथ पंजाब या हिमाचल प्रदेश के निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन में सहयुक्त थे :
परन्तु यह और कि सहयुक्त सदस्यों में से किसी को मतदान का या परिसीमन आयोग के किसी विनिश्चय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा ।
(3) परिसीमन आयोग उपधारा (1) में निर्दिष्ट संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन का अवधारण एक या अधिक आदेशों द्वारा करेगा ।
(4) परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 (1962 का 61) की धारा 7, 10 और 11 के उपबंध इस भाग के अधीन संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उक्त अधिनियम के अधीन संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में लागू होते हैं ।
(5) उपधारा (3) के अधीन दिए गए परिसीमन आयोग के आदेश या आदेशों के भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने पर, उसके द्वारा दिए गए पंजाब और हिमाचल प्रदेश के संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के पूर्वादेश रद्द हो जाएंगे ।
26. संविधान के अनुच्छेद 371 का संशोधनश्न्नियत दिन से, संविधान के अनुच्छेद 371 के खण्ड (1) में या पंजाबञ्ज् शब्दों का लोप कर दिया जाएगा ।
27. अनुसूचित जाति आदेशों का संशोधनश्न्(1) नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950, आठवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएगा ।
(2) नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जातियां) (संघ राज्यक्षेत्र) आदेश, 1951 नवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएगा ।
28. अनुसूचित जनजाति आदेशों का संशोधनश्न्(1) नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 दसवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएगा ।
(2) नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) (संघ राज्यक्षेत्र) आदेश, 1951 ग्यारहवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएगा ।
भाग 4
उच्च न्यायालय
29. पंजाब, हरियाणा और चण्डीगढ़ के लिए सामान्य उच्च न्यायालयश्न्(1) नियत दिन से,श्न्
(क) पंजाब और हरियाणा राज्यों के लिए तथा चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र के लिए एक सामान्य उच्च न्यायालय होगा जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय कहलाएगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् सामान्य उच्च न्यायालय कहा गया है) ;
(ख) उस दिन के ठीक पहले पंजाब उच्च न्यायालय में पद धारण करने वाले न्यायाधीश, जब तक वे अन्यथा वरण न करें, उस दिन सामान्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे ।
(2) सामान्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन तथा भत्तों के बारे में व्यय पंजाब और हरियाणा राज्यों तथा संघ में ऐसे अनुपात में आबंटित किया जाएगा जिसे राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे ।
30. सामान्य उच्च न्यायालय की अधिकारिताश्न्नियत दिन से पंजाब और हरियाणा राज्यों तथा चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र में समाविष्ट राज्यक्षेत्रों के संबंध में सामान्य उच्च न्यायालय को वह सब अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार होंगे, जो नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि के अधीन उन राज्यक्षेत्रों के संबंध में पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य हों और इस भाग में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, अन्तरित राज्यक्षेत्रों के बारे में कोई अधिकारिता नहीं होगी ।
31. विधिज्ञ परिषद् और अधिवक्ताओं के संबंध में विशेष उपबंधश्न्(1) नियत दिन से,श्न्
(क) अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) की धारा 3 की उपधारा (1) में खण्ड (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :श्न्
(घ) पंजाब और हरियाणा राज्यों तथा चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्रों के लिए होगी, जो पंजाब और हरियाणा विधिज्ञ परिषद् के नाम से ज्ञात होगी ; ञ्ज् ;
(ख) पंजाब विधिज्ञ परिषद् का हरियाणा राज्य के महाधिवक्ता सहित जो पदेन सदस्य होगा, उक्त परिषद् पंजाब और हरियाणा विधिज्ञ परिषद् समझी जाएगी ।
(2) कोई व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले, पंजाब उच्च न्यायालय में विधि-व्यवसाय करने का हकदार अधिवक्ता है सामान्य उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में विधि-व्यवसाय करने का हकदार होगा ।
(3) वे सब व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले पंजाब विधिज्ञ परिषद् की नामावली में अधिवक्ता के रूप में दर्ज हों, उस दिन से पंजाब और हरियाणा विधिज्ञ परिषद् की नामावली में दर्ज अधिवक्ता होंगे ।
(4) सामान्य उच्च न्यायालय में सुने जाने का अधिकार उन्हीं सिद्धांतों के अनुसार विनियमित किया जाएगा, जो पंजाब उच्च न्यायालय में सुने जाने के अधिकार की बाबत नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त हों :
परन्तु जहां तक पंजाब के महाधिवक्ता और हरियाणा के महाधिवक्ता के सुने जाने के अधिकार का संबंध है वह अधिवक्ता के रूप में उनके नामावलिगत किए जाने की तारीख के प्रति निर्देश से अवधारित किया जाएगा ।
32. सामान्य उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रियाश्न्इस भाग के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, पंजाब उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों सहित, सामान्य उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
33. सामान्य उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षाश्न्पंजाब उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों सहित, सामान्य उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा की बाबत लागू होगी ।
34. रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूपश्न्पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों सहित, सामान्य उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत लागू होगी ।
35. न्यायाधीशों की शक्तियांश्न्पंजाब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एकल न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में और उन शक्तियों के प्रयोग के आनुषंगिक सभी विषयों के संबंध में नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों सहित, सामान्य उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
36. सामान्य उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान और बैठक के अन्य स्थलश्न्(1) सामान्य उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान, जब तक राष्ट्रपति द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति तथा पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों से परामर्श के पश्चात् अन्यथा अवधारित न किया जाए, उसी स्थान पर होगा जहां नियत दिन के ठीक पहले पंजाब उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान था ।
(2) राष्ट्रपति सामान्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति तथा पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों से परामर्श के पश्चात्, अधिसूचित आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय के प्रधान स्थान से भिन्न उस न्यायालय के स्थायी न्यायपीठ या न्यायपीठों की, उन राज्यक्षेत्रों के भीतर जिन पर उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार है, एक या अधिक स्थलों पर, स्थापना का तथा तत्सम्बन्धी किन्हीं मामलों का उपबंध कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, सामान्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और खण्ड न्यायालय पंजाब और हरियाणा राज्यों के अन्य ऐसे स्थल या स्थलों पर भी बैंठेगे जिसे या जिन्हें मुख्य न्यायाधिपति पंजाब और हरियाणा राज्यों के राज्यपालों की अनुमति से नियत करें ।
37. उच्चतम न्यायालय को अपीलों के विषय में प्रक्रियाश्न्पंजाब उच्च न्यायालय और उसके न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों से उच्चतम न्यायालय की अपीलों से संबंधित जो विधि नियत दिन के ठीक पहले हो, वह, आवश्यक उपान्तरों सहित, सामान्य उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
38. हिमाचल प्रदेश न्यायिक आयुक्त के न्यायालय की अधिकारिता का विस्तारणश्न्नियत दिन से हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार अन्तरित राज्यक्षेत्र पर भी होगा ।
39. लम्बित कार्यवाहियों का अन्तरणश्न्(1) पंजाब उच्च न्यायालय में नियत दिन के ठीक पहले लम्बित सब कार्यवाहियां उस दिन सामान्य उच्च न्यायालय को अन्तरित हो जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन सामान्य उच्च न्यायालय को अन्तरित ऐसी कार्यवाहियां जिनके बारे में सामान्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति ने, वाद-हेतुक के पैदा होने के स्थान और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, यह प्रमाणित किया हो कि वे ऐसी कार्यवाहियां हैं जो हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय द्वारा सुनी और विनिश्चित की जानी चाहिएं, ऐसे प्रमाणन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र हिमाचल प्रदेश न्यायिक आयुक्त के न्यायालय को अन्तरित कर दी जाएंगी ।
(3) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इसमें इसके पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय, जहां ऐसी किसी कार्यवाही में नियत दिन के पहले पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश की बाबत कोई अनुतोष चाहा गया हो, वहां अपीलों, उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत के लिए आवेदनों, पुनर्विलोकन के लिए आवेदनों और अन्य कार्यवाहियों को ग्रहण करने, सुनने और निपटाने की अधिकारिता सामान्य उच्च न्यायालय को होगी और हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त को न होगी :
परन्तु यदि ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों के सामान्य उच्च न्यायालय द्वारा ग्रहण किए जाने के पश्चात्, उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को यह प्रतीत हो कि वे हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय को अंतरित की जानी चाहिएं तो वह आदेश देगा कि वे कार्यवाहियां इस प्रकार अंतरित की जाएं और तब ऐसी कार्यवाहियां तद्नुसार अंतरित कर दी जाएंगी ।
(4)(क) उपधारा (2) के आधार पर हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय को अंतरित किसी कार्यवाही में पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा नियत दिन के पहले दिया गया कोई आदेश, अथवा
(ख) किसी ऐसी कार्यवाही में जिसकी बाबत सामान्य उच्च न्यायालय को अधिकारिता उपधारा (3) के आधार पर बनी रहती है उस उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया कोई आदेश,
यह सभी प्रयोजनों के लिए, केवल, यथास्थिति, पंजाब उच्च न्यायालय या सामान्य उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में ही नहीं, अपितु हिमाचल प्रदेश के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के रूप में भी प्रभावी होगा ।
40. निर्वाचनश्न्इस भाग के प्रयोजनों के लिए,श्न्
(क) कार्यवाहियां न्यायालय में तब तक लम्बित समझी जाएंगी जब तक उस न्यायालय ने पक्षकारों के बीच के सभी विवाद्यकों को, जिनके अंतर्गत कार्यवाहियों के खर्चों के विनिर्धारण की बाबत विवाद्यक भी हैं, निपटा न दिया हो और इसके अन्तर्गत अपीलें, उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन, पुनरीक्षण के लिए अर्जियां और रिट के लिए अर्जियां भी होंगी ; तथा
(ख) उच्च न्यायालय के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उसके न्यायाधीश या खण्ड न्यायालय के प्रति निर्देश भी है तथा न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उस न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा पारित दण्डादेश, निर्णय या डिक्री के प्रति निर्देश भी हैं ।
41. व्यावृत्तियांश्न्इस भाग की किसी बात का प्रभाव संविधान के किन्हीं उपबंधों के सामान्य उच्च न्यायालय को लागू होने पर नहीं पडे़गा तथा यह भाग किसी ऐसे उपबंध के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जिसे ऐसा उपबंध करने की शक्ति रखने वाला कोई विधान मण्डल या अन्य प्राधिकारी नियत दिन या उसके पश्चात् उस उच्च न्यायालय की बाबत बनाए ।
भाग 5
व्यय का प्राधिकरण और राजस्व का वितरण
42. हरियाणा राज्य के व्यय का प्राधिकरणश्न्विद्यमान पंजाब राज्य का राज्यपाल नियत दिन के पहले किसी समय हरियाणा राज्य की संचित निधि में से किसी कालावधि के लिए जो इकतीस मार्च, 1967 के बाद की न होगी ऐसा व्यय, जो वह आवश्यक समझे तब तक के लिए प्राधिकृत कर सकेगा जब तक कि ऐसा व्यय हरियाणा की विधान सभा, द्वारा मंजूर न कर दिया जाए :
परन्तु नियत दिन के पश्चात् हरियाणा का राज्यपाल ऐसी मंजूरी मिलने तक के लिए उक्त कालावधि के लिए राज्य की संचित निधि में से ऐसा और व्यय, जो वह आवश्यक समझे, प्राधिकृत कर सकेगा ।
43. अंतरित राज्यक्षेत्र में व्यय के लिए धन का विनियोगश्न्(1) वित्तीय वर्ष 1966-67 के किसी भाग की बाबत किसी व्यय को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की संचित निधि में से किसी धन के विनियोग के लिए उस संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा द्वारा उस दिन के पहले पारित कोई अधिनियम अंतरित राज्यक्षेत्र के सबंध में भी नियत दिन से प्रभावी होगा और हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए विधिपूर्ण होगा कि उस संघ राज्यक्षेत्र में किसी सेवा के लिए व्यय किए जाने के लिए ऐसे अधिनियम द्वारा प्राधिकृत रकम में से कोई रकम अंतरित राज्यक्षेत्र में खर्च करे ।
(2) नियत दिन के पश्चात् हिमाचल प्रदेश का प्रशासक अंतरित राज्यक्षेत्र में किसी प्रयोजन या सेवा पर संघ राज्यक्षेत्र की संचित निधि में से किसी कालावधि के लिए जो इकतीस मार्च, 1967 के बाद की न होगी ऐसा व्यय जो वह आवश्यक समझे, तब तक के लिए अधिकृत कर सकेगा जब तक कि ऐसा व्यय हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा मंजूर न किया जाए ।
44. विद्यमान पंजाब राज्य के लेखाओं के संबंध में रिपोर्टश्न्(1) अनुच्छेद 151 के खण्ड (2) में निर्दिष्ट नियंत्रक और महा लेखापरीक्षक की, नियत दिन के पहले की किसी कालावधि के संबंध में विद्यमान पंजाब राज्य के लेखाओं की बाबत रिपोर्टें, पंजाब और हरियाणा राज्यों में से प्रत्येक राज्यपाल को और हिमाचल प्रदेश के प्रशासक को प्रस्तुत की जाएंगी, जो उन्हें, यथास्थिति, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के विधान मंडल के समक्ष रखवाएगा ।
(2) राष्ट्रपति आदेश द्वारा :श्न्
(क) वित्तीय वर्ष 1966-67 के दौरान नियत दिन के पहले की किसी कालावधि की बाबत या किसी पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत किसी सेवा पर पंजाब की संचित निधि में से उपगत किसी व्यय को जो उस सेवा के लिए और उस वर्ष के लिए अनुदत्त रकम से आधिक्य में हो और, जैसा कि वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्टों में प्रकाशित हो, सम्यक् रूप से प्राधिकृत घोषित कर सकेगा ; तथा
(ख) उक्त रिपोर्टों से उठने वाले किसी विषय पर कोई कार्रवाई की जाने के लिए उपबंध कर सकेगा ।
45. हरियाणा के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकारश्न्हरियाणा के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकार जब तक अनुच्छेद 158 के खण्ड (3) के अधीन संसद् विधि द्वारा इस निमित्त उपबंध न करे, तब तक, वे ही होंगे जो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा अवधारित करें ।
46. राजस्व का वितरणश्न्नियत दिन से, संविधान (राजस्व वितरण) आदेश, 1965, संघ उत्पाद-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 (1962 का 3), अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम, 1957 (1957 का 58) और संपदा-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 (1962 का 9) बारहवीं अनुसूची में निर्दिष्ट रूप से संशोधित हो जाएंगे ।
भाग 6
आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन
47. भाग का लागू होनाश्न्इस भाग के उपबंध विद्यमान पंजाब राज्य को नियत दिन के ठीक पहले की आस्तियों और दायित्वों के प्रभाजन के संबंध में लागू होंगे ।
48. भूमि और मालश्न्(1) इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, विद्यमान पंजाब राज्य के स्वामित्व की सब भूमि और सब सामान, वस्तुएं और अन्य मालश्न्
(क) यदि वे उस राज्य के भीतर हों, तो उस उत्तरवर्ती राज्य को जिसके राज्यक्षेत्र में वे स्थित हों संक्रांत हो जाएंगे, अथवा
(ख) यदि वे उस राज्य के बाहर हों तो पंजाब राज्य को संक्रांत हो जाएंगे :
परन्तु जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि किसी माल या किसी वर्ग के माल का वितरण उत्तरवर्ती राज्यों में माल के अवस्थान के अनुसार न होकर अन्यथा होना चाहिए वहां केन्द्रीय सरकार माल के न्यायोचित और साम्यिक वितरण के लिए ऐसे निदेश दे सकेगी जैसे वह उचित समझे, और माल उत्तरवर्ती राज्य को तद्नुसार संक्रांत हो जाएगा ।
(2) विनिर्दिष्ट प्रयोजनार्थ, जैसे कि विशिष्ट-संस्थाओं, कर्मशालाओं या उपक्रमों में या सन्निर्माणाधीन विशेष संक्रर्मों पर प्रयोग या उपयोग के लिए रखा हुआ, सामान उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएगा जिसके राज्यक्षेत्र में ऐसी संस्थाएं, कर्मशालाएं, उपक्रम या संकर्म स्थित हों ।
(3) सचिवालय से तथा संपूर्ण विद्यमान पंजाब राज्य पर अधिकारिता रखने वाले विभागाध्यक्षों के कार्यालयों से संबंधित सामान उत्तरवर्ती राज्यों में उन निदेशों के अनुसार विभाजित किए जाएंगे जिन्हें जारी करना केन्द्रीय सरकार ऐसे सामान के न्यायोचित और साम्यिक वितरण के लिए आवश्यक समझे ।
(4) विद्यमान पंजाब राज्य में किसी वर्ग के किसी अन्य अनिर्गमित सामान का विभाजन उत्तरवर्ती राज्यों में उस अनुपात में किया जाएगा जिस अनुपात में इकतीस मार्च, 1966 को समाप्त होने वाली तीन वर्ष की कालावधि में उस वर्ग का कुल सामान विद्यमान पंजाब राज्य के उन राज्यों के लिए खरीदा गया जो उत्तरवर्ती राज्यों में क्रमशः सम्मिलित हैं :
परन्तु जहां किसी वर्ग के सामान की बाबत ऐसा अनुपात विनिश्चित नहीं किया जा सकता या जहां ऐसे किसी वर्ग के सामान का मूल्य हजार रुपए से अधिक न हो वहां उस वर्ग के सामान का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
(5) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यह है कि तेरहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भूमि जिसका अर्जन विद्यमान पंजाब राज्य की सरकार द्वाराश्न्
(त्) चंडीगढ़ की मल वहन स्कीम के लिए ;
(त्त्) सुखना झील के आवाह क्षेत्र में भूमि संरक्षण के उपायों के लिए ; तथा
(त्त्त्) चण्डीगढ़ राजधानी परियोजना के ईंट भट्टे बनाने के लिए,
किया गया था, उस भूमि में या उसके ऊपर के सब संबंधित संक्रर्मों सहित (जिनके अन्तर्गत कोई संयंत्र, मशीनरी या उपकरण भी हैं) संघ में निहित होगी ।
(6) इस धारा में भूमिञ्ज् पद के अन्तर्गत प्रत्येक प्रकार की स्थावर सम्पत्ति तथा ऐसी सम्पत्ति में या उस पर के कोई अधिकार हैं और मालञ्ज् पद के अन्तर्गत सिक्के, बैंक नोट तथा करेंसी नोट नहीं आते ।
49. खजानों और बैंक अतिशेषश्न्नियत दिन के ठीक पहले के विद्यमान पंजाब राज्य के सब खजानों में की रोकड़ बाकी तथा उस राज्य की भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अन्य बैंक में की जमा अतिशेषों के योग का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा :
परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए कोई रोकड़ बाकी किसी एक खजाने से दूसरे खजाने को अंतरित नहीं की जाएगी और प्रभाजन उत्तरवर्ती राज्यों के भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में नियत दिन जमा अतिशेषों के समायोजन द्वारा किया जाएगा :
परन्तु यह और कि यदि किसी उत्तरवर्ती राज्य का भारतीय रिजर्व बैंक में कोई खाता न हो, तो समायोजन ऐसी रीति से किया जाएगा जिसका केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे ।
50. करों की बकायाश्न्सम्पत्ति पर के किसी कर या शुल्क की बकाया को, जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व की बकाया भी है, वसूल करने का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य को होगा जिसके राज्यक्षेत्र में वह संपत्ति स्थित है, और किसी अन्य कर या शुल्क की बकाया की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य को होगा जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान हो ।
51. उधारों और अधिदायों की वसूली का अधिकारश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा उस राज्य के भीतर किसी क्षेत्र में किसी स्थानीय निकाय, सोसाइटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को नियत दिन के पहले दिए गए किन्हीं उधारों या अधिदायों की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य को होगा जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत वह क्षेत्र हो :
परन्तु विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा किसी सरकारी सेवक को नियत दिन के पहले दिए गए उधारों या वेतन तथा यात्रा-भत्ते के अग्रिम की वसूली का अधिकार उस उत्तरवर्ती राज्य को होगा जिसे ऐसा सरकारी सेवक आबंटित किया गया हो ।
(2) विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा उस राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति या संस्था को नियत दिन के पहले दिए गए उधारों या अधिदायों की वसूली का अधिकार पंजाब राज्य को होगा :
परन्तु ऐसे किसी उधार या अधिदाय की बाबत वसूल की गई राशि का विभाजन सब उत्तरवर्ती राज्यों में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
52. कतिपय निधियों में विनिधान और जमाश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य के रोकड़ बाकी विनिधान खाते, अकाल रहित निधि तथा अन्य किसी साधारण निधि में से किए गए विनिधान, केन्द्रीय सड़क निधि में उस राज्य के खाते जमा राशियों और रक्षा तथा सुरक्षा राहत निधि की राशियों का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा; तथा किसी ऐसी विशेष निधि में के विनिधान, जिसके उद्देश्य विद्यमान पंजाब राज्य में के किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हों उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगे जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत वह क्षेत्र हो ।
(2) विद्यमान पंजाब राज्य के किसी प्राइवेट वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम में के नियत दिन के ठीक पहले के विनिधान, जहां तक वे रोकड़ बाकी विनिधान खाते में से न किए गए हों या न किए गए समझे गए हों, उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगे जिसके राज्यक्षेत्र में उपक्रम के कारबार का प्रधान स्थान स्थित हो और जहां उस दिन उपक्रम के कारबार का प्रधान स्थान विद्यमान पंजाब राज्य के राज्यक्षेत्र के बाहर स्थित हो, वहां ऐसे विनिधानों का सब उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
(3) जहां केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रान्तीय अधिनियम के अधीन विद्यमान पंजाब राज्य या उसके किसी भाग के लिए गठित कोई निगमित निकाय भाग 2 के उपबंधों के आधार पर अन्तरराज्यिक निगमित निकाय हो गया हो वहां विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा नियत दिन के पहले ऐसे निगमित निकाय में किए गए विनिधानों या उसे दिए गए उधारों या अधिदायों का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें निगमित निकाय की आस्तियों का विभाजन भाग 7 के उपबन्धों के अधीन किया जाए ।
53. राज्य उपक्रमों की आस्तियां और दायित्वश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य के किसी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम से संबंधित आस्तियां और दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगे जिसके राज्यक्षेत्र में वह उपक्रम स्थित हो ।
(2) जहां विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा किसी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम के लिए अवक्षयण आरक्षित निधि रखी गई हो, वहां उस निधि में से किए गए विनिधान की बाबत धारित प्रतिभूतियां, उस उत्तरवर्ती राज्य को संक्रांत हो जाएंगी जिसके राज्यक्षेत्र में वह उपक्रम स्थित हो ।
(3) जहां ऐसा उपक्रम एक से अधिक उत्तरवर्ती राज्यों में स्थित हो वहां क्रमशः उपधारा (1) और (2) में निर्दिष्ट आस्तियों और दायित्वों तथा प्रतिभूतियों का विभाजन ऐसी रीति से किया जाएगा जो उत्तरवर्ती राज्यों के बीच नवम्बर, 1967 के प्रथम दिन के पहले करार पाई जाए, या ऐसे करार के अभाव में जिसका केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे ।
54. लोक-ऋणश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य का लोक-ऋण, जो उस उधार के कारण हो जो सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके लिया गया हो और नियत दिन के ठीक पहले जनता को बकाया हो उस दिन से पंजाब राज्य का ऋण हो जाएगा, तथाश्न्
(क) अन्य उत्तरवर्ती राज्य, पंजाब राज्य को ऋण की शोधन व्यवस्था और अदायगी के लिए समय-समय पर देय राशियों के अपने-अपने अंश के देनदार होंगे ; तथा
(ख) उक्त अंशों के अवधारण के प्रयोजन के लिए ऋण का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन ऐसे किया गया समझा जाएगा मानो वह उपधारा (4) में निर्दिष्ट ऋण हो ।
(2) विद्यमान पंजाब राज्य का लोक ऋण, जो उन उधारों के कारण हो जो किसी विनिर्दिष्ट संस्था या किसी विनिर्दिष्ट वर्ग की संस्थाओं को पुनः उधार देने के प्रयोजनार्थ केन्द्रीय सरकार तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम या खादी तथा ग्रामोद्योग आयोग या अन्य किसी स्रोत से लिए गए हों और नियत दिन के ठीक पहले बकाया होंश्न्
(क) यदि किसी स्थानीय क्षेत्र में के किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था को पुनः उधार दिया गया हो तो वह उस उत्तरवर्ती राज्य का ऋण होगा जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत वह स्थानीय क्षेत्र नियत दिन हो ; अथवा
(ख) यदि पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड को या किसी अन्य ऐसी संस्था को जो नियत दिन अन्तरराज्यिक संस्था हो जाए, पुनः उधार दिया गया हो तो उत्तरवर्ती राज्यों में उसका विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें ऐसे निगमित निकाय या ऐसी संस्था की आस्तियों का विभाजन भाग 7 के उपबंधों के अधीन किया जाए ।
(3) केन्द्रीय सरकार से धारा 78 की उपधारा (4) में यथापरिभाषित ब्यास योजना तथा भाखड़ा नांगल परियोजना के लिए, लिए गए उधारों के कारण विद्यमान पंजाब राज्य के लोक-ऋण का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन ऐसे अनुपात में किया जाएगा जो उनके बीच करार पाया जाए या यदि नियत दिन से दो वर्ष के भीतर कोई करार न हो तो जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा नियत करे ।
(4) केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य निकाय या बैंक से नियत दिन के पहले लिए गए उधारों के कारण विद्यमान पंजाब राज्य के शेष लोक-ऋण का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन, विद्यमान पंजाब राज्य के उन उत्तरवर्ती राज्यों में से प्रत्येक में क्रमशः सम्मिलित किए गए राज्यक्षेत्रों में सब पूंजी-संकर्मों या अन्य पूंजी लागत मद्धे नियत दिन तक उपगत या उपगत समझे गए कुल व्यय के अनुपात में किया जाएगा :
परन्तु ऐसे व्यय की संगणना करने में धारा 78 की उपधारा (4) में यथापरिभाषित ब्यास परियोजना तथा भाखड़ा नांगल परियोजना पर होने वाला व्यय छोड़ दिया जाएगा तथा अन्य आस्तियों पर होने वाला व्यय जिसके लिए पूंजी खाता रखा गया हो, लेखे में लिया जाएगा ।
स्पष्टीकरणश्न्जहां पूंजी-संकर्मों या अन्य पूंजी लागतों मद्धे व्यय उत्तरवर्ती राज्यों में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों में आबंटित नहीं किया जा सकता वहां ऐसा व्यय इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए उन राज्यक्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार उपगत किया गया समझा जाएगा ।
(5) जहां विद्यमान पंजाब राज्य में कोई निक्षेप निधि या अवक्षयण निधि उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी उधार की अदायगी के लिए रखी हो, वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन उसी अनुपात में और उसी रीति से किया जाएगा जिसमें और जिससे उपधारा (3) में निर्दिष्ट लोक ऋण का विभाजन किया जाए ।
(6) जहां विद्यमान पंजाब राज्य ने कोई निक्षेप निधि या अवक्षयण निधि उपधारा (3) में निर्दिष्ट उधार से भिन्न अपने द्वारा लिए गए किसी उधार की अदायगी के लिए रखी हो, वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का उत्तरवर्ती राज्यों में विभाजन उसी अनुपात में किया जाएगा जिसमें उपधारा (4) निर्दिष्ट लोक ऋण का विभाजन किया जाए ।
(7) इस धारा में, सरकारी प्रतिभूतिञ्ज् पद से कोई ऐसी प्रतिभूति अभिप्रेत है जो ऋण जनता से उधार लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा सृजित और जारी की गई है और लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 13) की धारा 2 के खण्ड (2) में विनिर्दिष्ट या उसके अधीन विहित प्ररूपों में से किसी प्ररूप में है ।
55. आधिक्य में वसूल किए गए करों की वापसीश्न्आधिक्य में वसूल किया गया सम्पत्ति पर कर या शुल्क जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व भी है, वापस करने का विद्यमान पंजाब राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्र में वह सम्पत्ति स्थित हो, तथा आधिक्य में वसूल किया गया कोई अन्य कर या शुल्क वापस करने का विद्यमान पंजाब राज्य का दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान हो ।
56. निक्षेप, आदिश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य का किसी सिविल निक्षेप या स्थानीय निक्षेप की बाबत दायित्व नियत दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र में निक्षेप किया गया हो :
परन्तु यदि निक्षेप विद्यमान राज्य के बाहर के किसी क्षेत्र में किया गया हो तो दायित्व प्रथमतः पंजाब राज्य का होगा और उत्तरवर्ती राज्यों में उसका समायोजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
(2) विद्यमान पंजाब राज्य का किसी खैराती या अन्य विन्यास की बाबत दायित्व नियत दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र में विन्यास का फायदा पाने की हकदार संस्था स्थित हो या उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा जिस तक विन्यास के उद्देश्य, उसके निबंधनों के अधीन, सीमित हों ।
57. भविष्य-निधिश्न्(1) नियत दिन सेवा में होने वाले किसी सरकारी सेवक के भविष्य-निधि खाते की बाबत विद्यमान पंजाब राज्य का दायित्व, नियत दिन से उस उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा जिसे वह सरकारी सेवक स्थायी रूप से आबंटित किया गया हो ।
(2) किसी ऐसे सरकारी सेवक के, जो नियत दिन के पहले सेवा से निवृत्त हो गया हो, भविष्य-निधि खाते की बाबत विद्यमान पंजाब राज्य का दायित्व प्रथमतः पंजाब राज्य का दायित्व होगा और उत्तरवर्ती राज्यों में उसका समायोजन जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
58. पेंशनश्न्पेंशनों की बाबत विद्यमान पंजाब राज्य के दायित्व का उत्तरवर्ती राज्यों को संक्रमण या उनमें प्रभाजन चौदहवीं अनुसूची के उपबन्धों के अनुसार होगा ।
59. संविदाएंश्न्(1) जहां विद्यमान पंजाब राज्य ने अपनी कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में राज्य के किन्हीं प्रयोजनों के लिए कोई संविदा नियत दिन के पहले की हो, वहां वह संविदाश्न्
(क) यदि संविदा के प्रयोजन, नियत दिन से, अनन्यतः उत्तरवर्ती राज्यों में के किसी एक राज्य के प्रयोजन हों, तो उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में ; तथा
(ख) यदि संविदा के प्रयोजन, नियत दिन से, अनन्यतः उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी एक राज्य के प्रयोजन न हों तो पंजाब राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में,
की गई समझी जाएगी और वे सब अधिकार और दायित्व जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों या प्रोद्भूत हों, उस सीमा तक, यथास्थिति, उत्तरवर्ती राज्य के या ऊपर विनिर्दिष्ट पंजाब राज्य के अधिकार और दायित्व होंगे जिस तक वे विद्यमान पंजाब राज्य के अधिकार या दायित्व होते :
परन्तु खण्ड (ख) में निर्दिष्ट प्रकार की दशा में इस उपधारा द्वारा किया गया अधिकारों तथा दायित्वों का प्रारंभिक आबंटन, ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो संबद्ध उत्तरवर्ती राज्यों के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में, जिसका केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि ऐसे दायित्वों के अन्तर्गत जो संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों या प्रोद्भूत हों निम्नलिखित भी हैं, श्न्
(क) संविदा से संबंधित कार्यवाहियों में किसी न्यायालय या अन्य अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व ; तथा
(ख) ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों में या उनके संबंध में उपगत व्ययों की बाबत कोई दायित्व ।
(3) यह धारा उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं की बाबत दायित्वों के प्रभाजन से संबंधित इस भाग के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी ; और बैंक अतिशेष तथा प्रतिभूतियों के विषय में कार्यवाही, उनके संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति के होते हुए भी, उन अन्य उपबंधों के अधीन की जाएगी ।
60. अनुयोज्य दोष की बाबत दायित्वश्न्जहां नियत दिन के ठीक पहले, विद्यमान पंजाब पर राज्य संविदा भंग से भिन्न किसी अनुयोज्य दोष की बाबत कोई दायित्व हो, वहां वह दायित्वश्न्
(क) यदि वाद-हेतुक, पूर्णतया उस राज्यक्षेत्र के भीतर पैदा हुआ हो जो उस दिन से उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी का राज्यक्षेत्र हो तो उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा ; तथा
(ख) किसी अन्य दशा में प्रारंभिकतः पंजाब राज्य का दायित्व होगा किन्तु यह ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो सब संबंधित उत्तरवर्ती राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में जिसका केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे ।
61. प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्वश्न्जहां नियत दिन के ठीक पहले, विद्यमान पंजाब राज्य पर किसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी, या अन्य व्यक्ति के दायित्व के बारे में प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व हो, वहां विद्यमान पंजाब राज्य का वह दायित्वश्न्
(क) यदि उस सोसाइटी या व्यक्ति का कार्यक्षेत्र उस राज्यक्षेत्र तक सीमित हो जो उस दिन से उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी का राज्यक्षेत्र हो तो वह दायित्व उस उत्तरवर्ती राज्य का होगा ; तथा
(ख) किसी अन्य दशा में दायित्व पंजाब राज्य का होगा :
परन्तु खण्ड (ख) में निर्दिष्ट प्रकार की किसी अन्य दशा में इस धारा के अधीन दायित्वों का प्रारंभिक आबंटन, ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए किया जाएगा जो सब उत्तरवर्ती राज्यों के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में जिसका केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।
62. उचंत मदश्न्यदि कोई उचंत मद अंततः इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी में निर्दिष्ट प्रकार की आस्ति या दायित्व पर प्रभाव डालने वाला पाया जाए तो उसके संबंध में उस उपबंध के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।
63. अवशिष्टीय उपबंधश्न्विद्यमान पंजाब राज्य की किन्हीं ऐसी आस्तियों या दायित्वों का, जिनके बारे में इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में व्यवस्था नहीं है, फायदा या भार प्रथमतः पंजाब राज्य को ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए संक्रान्त हो जाएगा जो एक नवंबर, 1967 के पूर्व सब उत्तरवर्ती राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में, जिसका केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे ।
64. आस्तियों या दायित्वों का करार द्वारा प्रभाजनश्न्जहां उत्तरवर्ती राज्य करार कर लें कि किसी विशिष्ट आस्ति या दायित्व के फायदे या भार का उनके बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाना चाहिए जो उससे भिन्न है जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में दी गई है, वहां उन उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी उस आस्ति या दायित्व के फायदे या भार का प्रभाजन उस रीति से किया जाएगा जो करार पाई जाए ।
65. कुछ मामलों में आबंटन या समायोजन के लिए आदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्तिश्न्जहां कोई उत्तरवर्ती राज्य इस भाग के उपबंधों में से किसी के आधार पर किसी सम्पत्ति का हकदार हो जाए या कोई फायदा प्राप्त करे या किसी दायित्व के अधीन हो जाए और नियत दिन से तीन वर्ष की कालावधि के भीतर किसी राज्य द्वारा निर्देश किए जाने पर केन्द्रीय सरकार की राय हो कि यह न्यायसंगत तथा साम्यापूर्ण है कि वह सम्पत्ति या फायदा अन्य उत्तरवर्ती राज्यों में से एक या अधिक को अंतरित किया जाना चाहिए या उसमें से या उन्हें अंश मिलना चाहिए या उस दायित्व के मद्धे अन्य उत्तरवर्ती राज्यों में से एक या अधिक द्वारा अभिदाय किया जाना चाहिए, वहां उक्त सम्पत्ति या फायदे का आबंटन ऐसी रीति से किया जाएगा या अन्य उत्तरवर्ती राज्य प्रारंभतः दायित्व के अधीन होने वाले राज्य को उसके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा या करेंगे जो केन्द्रीय सरकार संबद्ध राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा, अवधारित करे ।
66. कुछ व्यय का संचित निधि पर भारित किया जानाश्न्इस भाग या धारा 72 की उपधारा (4) या धारा 77 या भाग 8 के उपबंधों के आधार पर संघ द्वारा किसी राज्य को अथवा किसी राज्य द्वारा किसी अन्य राज्य को या संघ को संदेय सब राशियां, यथास्थिति, भारत की संचित निधि पर या उस राज्य की संचित निधि पर जिसके द्वारा ऐसी राशियां संदेय हों, भारित होंगी :
परन्तु जहां कोई राशियां अंतरित राज्यक्षेत्र के संबंध में पूर्वोक्त रूप से संघ द्वारा संदेय हों वहां केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे सकेगी कि ऐसे दायित्वों की बाबत जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, राशियां हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की संचित निधि पर भारित होंगी ।
भाग 7
कुछ निगमों के बारे में उपबंध
67. कुछ निगमों के बारे में उपबन्धश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य के लिए गठित निम्नलिखित निगमित निकाय, अर्थात् :श्न्
(क) विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) के अधीन गठित राज्य विद्युत बोर्ड ; तथा
(ख) भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 58) के अधीन गठित राज्य भाण्डागारण निगम,
नियत दिन से उन क्षेत्रों में जिनके बाबत उस दिन के ठीक पहले वे कार्य करते थे इस धारा के उपबंधों और ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं कार्य करते रहेंगे ।
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन बोर्ड या निगम की बाबत जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अन्तर्गत ऐसा निदेश भी हो सकेगा कि वह अधिनियम जिसके अधीन वह बोर्ड या वह निगम गठित हुआ, उस बोर्ड या निगम को लागू होने में ऐसे अपवादों और उपांतरों सहित प्रभावी होगा जो केंद्रीय सरकार ठीक समझे ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम 1 नवंबर, 1967 से या ऐसी पूर्वतर तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा नियत करे, कार्य करना बंद कर देगा और उस तारीख से विघटित समझा जाएगा ; तथा ऐसे विघटन पर उनकी आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाएगा जो, यथास्थिति, बोर्ड या निगम के विघटन के एक वर्ष के भीतर उनमें करार पाई जाएं, या यदि कोई करार न हो पाए तो जिसे केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा अवधारित करे ।
(4) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबन्धों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी की सरकार को, नियत दिन या उसके पश्चात् किसी समय राज्य विद्युत बोर्ड या राज्य भाण्डागारण निगम से संबंधित अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसा बोर्ड या निगम उस राज्य के लिए गठित करने से निवारित करती है ; और यदि उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में ऐसे बोर्ड या निगम का इस प्रकार गठन उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम के विघटन से, पहले किया जाए तोश्न्
(क) उस राज्य में विद्यमान बोर्ड या निगम से उसके सब उपक्रम, आस्तियां, अधिकार और दायित्व या उनमें से कोई ग्रहण करने के लिए नए बोर्ड या निगम को समर्थ बनाने के लिए उपबन्ध केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा किया जा सकेगा ; तथा
(ख) विद्यमान बोर्ड या निगम के विघटन पर कोई आस्तियां, अधिकार और दायित्व जो अन्यथा उपधारा (3) के उपबन्धों के कारण या अधीन उस राज्य को संक्रांत हो जाने चाहिए थे, उस राज्य की बजाय नए बोर्ड या नए निगम को संक्रांत हो जाएंगे ।
68. विद्युत शक्ति के उत्पादन और प्रदाय तथा जल-प्रदाय के बारे में इंतजाम का बना रहनाश्न्यदि केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत हो कि किसी क्षेत्र के लिए विद्युत शक्ति के उत्पादन या प्रदाय या जल-प्रदाय के बारे में या किसी परियोजना के निष्पादन के बारे में इंतजाम में उस क्षेत्र के लिए अहितकर उपांतरण इस कारण हो गया है या होना संभाव्य है कि वह क्षेत्र भाग 2 के उपबंधों के कारण उस राज्य से अंतरित हो गया है, जिसमें, यथास्थिति, ऐसी शक्ति के उत्पादन और प्रदाय के लिए विद्युत स्टेशन या अन्य संस्थापन अथवा जल-प्रदाय के लिए आवाह क्षेत्र, जलाशय या अन्य संकर्म स्थित है तो केन्द्रीय सरकार पहले वाले इंतजाम को यावत्साध्य बनाए रखने के लिए ऐसे निदेश, जो वह ठीक समझे, राज्य सरकार या अन्य सम्बद्ध प्राधिकारी को दे सकेगी ।
69. पंजाब राज्य वित्तीय निगम के बारे में उपबन्धश्न्(1) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन स्थापित पंजाब राज्य वित्तीय निगम नियत दिन से, उन क्षेत्रों में जिनके संबंध में वह उस दिन के ठीक पहले कार्य करता था इस धारा के उपबंधों तथा ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाएं, कार्य करता रहेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निगम के बारे में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अन्तर्गत ऐसा निदेश भी हो सकेगा कि उक्त अधिनियम निगम को लागू होने में, ऐसे अपवादों तथा उपान्तरों के सहित प्रभावी होगा जो निदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी निगम का निदेशक बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से किसी समय निगम के, यथास्थिति, पुनर्गठन या पुनर्संगठन या विघटन की स्कीम के, जिसके अंतर्गत नए निगमों के बनाए जाने और विद्यमान निगमों की आस्तियां, अधिकार तथा दायित्व उन्हें अंतरित किए जाने की प्रस्थापनाएं भी हैं, विचारार्थ अधिवेशन बुला सकेगा और यदि केन्द्रीय सरकार ऐसी अपेक्षा करे तो बुलाएगा और यदि ऐसी स्कीम उपस्थित और मत देने वाले शेयरधारकों के बहुमत से साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित कर दी जाएं तो वह स्कीम केन्द्रीय सरकार को उसकी मंजूरी के लिए प्रस्तुत की जाएगी ।
(4) यदि स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा उपांतरों के बिना या ऐसे उपांतरों के सहित जो साधारण अधिवेशन में अनुमोदित हुए, मंजूर की जाए तो केन्द्रीय सरकार स्कीम को प्रमाणित करेगी और ऐसे प्रमाणन पर वह स्कीम, किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी उस स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके लेनदारों और शेयरधारकों पर भी आबद्धकर होगी ।
(5) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित और मंजूर न की जाए तो केन्द्रीय सरकार स्कीम को पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायाधिपति द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित किया जाए, निर्देशित कर सकेगी और उस स्कीम के बारे में न्यायाधीश का विनिश्चय अन्तिम होगा और स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके लेनदारों और शेयरधारकों पर भी आबद्धकर होगा ।
(6) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह हरियाणा या पंजाब राज्य की सरकार को नियत दिन के पश्चात् किसी समय केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन उस राज्य के लिए किसी राज्य वित्तीय निगम का गठन करने से निवारित करती है ।
70. 1942 के अधिनियम 6 का संशोधनश्न्बहुएकक सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1942 में धारा 5ग के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :श्न्
5घ. कुछ बहुएकक सहकारी सोसाइटियों से सम्बन्धित संक्रमणकालीन उपबन्धश्न्(1) जहां पंजाब राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की पन्द्रहवीं अनुसूची में निर्दिष्ट किसी ऐसी सहकारी सोसाइटी की बाबत, जो धारा 5क की उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन बहुएकक सहकारी सोसाइटी हो जाएगी, निदेशक बोर्ड की सोसाइटी के पुनर्गठन, पुनर्संगठन या विघटन के लिए कोई स्कीम जिसके अन्तर्गतश्न्
(क) नई सहकारी सोसाइटियां बनाने और उन्हें उस सोसाइटी की आस्तियों तथा दायित्वों और कर्मचारियों के पूर्णतः या भागतः अंतरण, अथवा
(ख) उस सोसाइटी की आस्तियों तथा दायित्वों और कर्मचारियों के विद्यमान पंजाब राज्य या हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की किसी अन्य सहकारी सोसाइटी को पूर्णतः या भागतः अन्तरण,
के बारे में प्रस्थापनाएं भी है, निदेशकों के तीन-चौथाई के बहुमत से अंगीकार करे,
और पंजाब राज्य सरकार 1 नवम्बर, 1966 के पूर्व किसी समय स्कीम को प्रमाणित करे, वहां उक्त धारा की उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि, विनियम या उपविधि में उस सोसाइटी के संबंध में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रमाणित स्कीम, उसके द्वारा प्रभावित सब सोसाइटियों पर तथा ऐसी सब सोसाइटियों के शेयरधारकों, लेनदारों तथा कर्मचारियों पर भी ऐसे वित्तीय समायोजनों के अधीन रहते हुए आबद्धकर होगी जो उपधारा (3) के अधीन इस निमित्त निदिष्ट किए जाएं, किन्तु ऐसी कोई स्कीम उक्त दिन के पहले प्रभावी नहीं की जाएगी :
परन्तु जहां किसी स्कीम के अन्तर्गत खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी सहकारी सोसाइटी की आस्तियों तथा दायित्वों और कर्मचारियों के अन्तरण की कोई प्रस्थापना हो, वहां वह स्कीम उस विद्यमान सोसाइटी या उसके शेयरधारकों या लेनदारों पर, तब तक आबद्धकर नहीं होगी जब तक ऐसे अंतरण के बारे में प्रस्थापना विद्यमान सोसाइटी द्वारा उसके साधारण निकाय के अधिवेशन में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा स्वीकृत न हो जाए ।
(2) जब सहकारी सोसाइटी के बारे में कोई स्कीम इस प्रकार प्रमाणित कर दी जाए तब केन्द्रीय रजिस्ट्रार उक्त स्कीम को ऐसे व्यक्तियों के, जो उस स्कीम के प्रमाणन की तारीख के ठीक पहले सोसाइटी के सदस्य थे, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में विहित रीति से बुलाए गए अधिवेशन में रखेगा और स्कीम उस अधिवेशन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित की जाएगी ।
(3) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित न की जाए या उपांतरों सहित अनुमोदित की जाए, तो केन्द्रीय रजिस्ट्रार स्कीम को पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायाधिपति द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित किया जाए, निर्देशित कर सकेगा और वह न्यायाधीश प्रभावित सोसाइटियों में ऐसे वित्तीय समायोजन करने का निदेश दे सकेगा, जिन्हें वह आवश्यक समझे और स्कीम उन वित्तीय समायोजनों के अधीन रहते हुए अनुमोदित समझी जाएगी ।
(4) यदि उपधारा (3) के अधीन दिए गए निदेशों के परिणामस्वरूप कोई सोसाइटी किसी धनराशि की देनदार हो जाए, तो वह उत्तरवर्ती राज्य जिसके क्षेत्र के भीतर सोसाइटी स्थित हो, ऐसे धन के संदाय की बाबत प्रत्याभूतिदाता समझा जाएगा और इस रूप में दायी होगा ।ञ्ज् ।
71. सहकारी बैंकों के बारे में उपबंधश्न्बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 22 में किसी बात के होते हुए भी, जहां विद्यमान पंजाब राज्य के पुनर्गठन के कारण उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में नियत दिन या उसके तीन मास के भीतर कोई नया सहकारी बैंक बनाया जाए, वहां वह उस धारा के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक से अनुज्ञप्ति प्राप्त किए बिना, बैंकिग कारबार शुरू कर सकेगा और तब तक चला सकेगा जब तक ऐसी अनुज्ञप्ति प्राप्त न हो या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उसे यह इत्तिला न दी जाए कि उसे ऐसी अनुज्ञप्ति प्रदान नहीं की जा सकती :
परन्तु यह तब जब ऐसा बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन बैंक के बनाए जाने की तारीख से तीन मास की कालावधि के भीतर करे ।
72. कानूनी निगमों के बारे में साधारण उपबंधश्न्(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों द्वारा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहां विद्यमान पंजाब राज्य या उसके किसी भाग के लिए केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय उत्तरवर्ती राज्यों की आवश्यकताएं पूरी करता हो या भाग 2 के उपबंधों के आधार पर अंतर्राज्यिक निगमित निकाय हो गया हो वहां जब तक उस निगमित निकाय के बारे में विधि द्वारा अन्य उपबंध न किया जाए, वह उन क्षेत्रों में जिनकी बाबत वह नियत दिन के ठीक पहले कार्य करता था, ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं, कार्य करता रहेगा ।
(2) ऐसे निगमित निकाय की बाबत उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए किसी निदेश के अंतर्गत ऐसा निदेश भी हो सकेगा कि कोई विधि, जिसके द्वारा उक्त निकाय शासित होता हो उस निगमित निकाय को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपान्तरों के सहित प्रभावी होगी जो उस निदेश में विनिर्दिष्ट हों ।
(3) शंकाओं के निवारण के लिए एत्दद्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के उपबंध पंजाब विश्वविद्यालय अधिनियम, 1947 (1947 का पूर्वी पंजाब अधिनियम 7) के अधीन गठित पंजाब विश्वविद्यालय, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 32) के अधीन गठित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय तथा सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 (1925 का पंजाब अधिनियम 8) के भाग 3 के उपबंधों के अधीन गठित बोर्ड को भी लागू होंगे ।
(4) जहां तक यह धारा उपधारा (3) में निर्दिष्ट पंजाब विश्वविद्यालय तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है, इसके उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजनार्थ, उत्तरवर्ती राज्य ऐसे अनुदान देंगे, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, आदेश द्वारा अवधारित करे ।
73. कुछ कम्पनियों के बारे में उपबन्धश्न्(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी निम्नलिखित कम्पनियों में से प्रत्येक, अर्थात् :श्न्
(त्) पंजाब एक्सपोर्ट कारपारेशन,
(त्त्) पंजाब स्टेट स्माल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन,
(त्त्त्) पंजाब डेरी डेवेलपमेंट कारपोरेशन,
(त्ध्) पंजाब पाउल्ट्री कारपोरेशन,
(ध्) लैण्ड डेवेलपमेंट एण्ड सीड कारपोरेशन,
(ध्त्) इंडस्ट्रीयल डेवेलपमेंट कारपोरेशन,
(ध्त्त्) एग्रोइंडस्ट्रियल कारपोरेशन,
नियत दिन से तथा जब तक किसी अन्य विधि में या उत्तरवर्ती राज्यों के बीच किए गए किसी करार में या केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी निदेश में अन्यथा उपबंध न किया जाए, उन क्षेत्रों में, जिनमें वह उस दिन के ठीक पहले कार्य करती थी, कार्य करती रहेगी ; और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में या किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर ऐसे कार्यकरण के संबंध में ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह ठीक समझे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी कम्पनी के बारे में दिए गए निदेशों के अन्तर्गत निम्नलिखित निदेश भी हो सकेंगे :श्न्
(क) कम्पनी में विद्यमान पंजाब राज्य के हितों तथा अंशों के उत्तरवर्ती राज्यों के बीच विभाजन संबंधी निदेश ;
(ख) कम्पनी के निदेशक बोर्ड के पुनर्गठन की अपेक्षा करने वाले निदेश, जिससे सब उत्तरवर्ती राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल जाए ।
74. कुछ विद्यमान सड़क परिवहन अनुज्ञापनों के चालू रहने के बारे में उपबंधश्न्(1) मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) की धारा 63 में किसी बात के होते हुए भी, विद्यमान पंजाब राज्य में राज्य या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकारी द्वारा अनुदत्त अनुज्ञापत्र, यदि ऐसा अनुज्ञापत्र नियत दिन के ठीक पहले उस क्षेत्र में विधिमान्य तथा प्रभावी था, उस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए जो तत्समय उस क्षेत्र में प्रवृत्त हो, उस क्षेत्र में उस दिन के पश्चात् विधिमान्य तथा प्रभावी बना रहा समझा जाएगा और उस क्षेत्र में उपयोग के लिए उसे विधिमान्य करने के प्रयोजनार्थ ऐसे किसी अनुज्ञापत्र का किसी राज्य या प्रादेशिक परिहवन प्राधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना आवश्यक नहीं होगा :
परन्तु केन्द्रीय सरकार उन शर्तों में, जो अनुज्ञापत्र देने वाले प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञापत्र से संलग्न की गई हों, परिवर्धन, संशोधन या परिवर्तन संबद्ध राज्य सरकार या सरकारों से परामर्श के पश्चात् कर सकेगी ।
(2) ऐसे किसी अनुज्ञापत्र के अधीन उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी में चलाने के लिए दिन के पश्चात् किसी परिवहन यान की बाबत कोई पथकर, प्रवेश फीस या वैसी ही प्रकृति के अन्य प्रभार, उद्गृहीत नहीं किए जाएंगे । यदि उस यान को उस दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य के भीतर चलाने के लिए पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभारों के संदाय से छूट प्राप्त हो :
परन्तु केन्द्रीय सरकार, यथास्थिति, पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभार के उद्ग्रहण को संबद्ध राज्य सरकार या सरकारों से परामर्श के पश्चात् प्राधिकृत कर सकेगी ।
75. कुछ मामलों में छंटनी प्रतिकर से संबंधित विशेष उपबंधश्न्जहां केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई सहकारी सोसाइटी या उस राज्य का कोई वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम विद्यमान पंजाब राज्य के इस अधिनियम के अधीन पुनर्गठन के कारण किसी प्रकार से पुनर्गठित या पुनर्संगठित हो, या किसी अन्य निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम में समामेलित किया जाए या विघटित किया जाए और ऐसे पुनर्गठन, पुनर्संगठन, समामेलन या विघटन के परिणामस्वरूप उस निगमित निकाय या उस अन्य सहकारी सोसाइटी या उपक्रम द्वारा नियोजित कोई कर्मकार किसी अन्य निगमित निकाय को या किसी अन्य सहकारी सोसाइटी या उपक्रम को अंतरित हो या उसके द्वारा पुनर्नियोजित हो, वहां औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च, 25चच या 25चचच में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा अंतरण या पुनर्नियोजन उसे उक्त धारा के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा :
परन्तु यह तब जब किश्न्
(क) ऐस अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् कर्मकार को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और शर्तें अंतरण या पुनर्नियोजन के ठीक पहले उसे लागू होने वाले निबंधनों और शर्तों से कम अनुकूल न हों ; तथा
(ख) उस निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम से, जहां कर्मकार अंतरित या पुनर्नियोजित हो संबंधित नियोजक करार द्वारा या अन्यथा उस कर्मकार को उसकी छंटनी की दशा में, इस आधार पर कि उसकी सेवा चालू रही है और अंतरण या पुनर्नियोजन द्वारा उसमें बाधा नहीं पड़ी है, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च, 25चच या 25चचच के अधीन विधिक रूप से प्रतिकर का देनदार हो ।
76. आय-कर के बारे में विशेष उपबंधश्न्जहां इस भाग के उपबंधों के अधीन कारबार चलाने वाले किसी निगमित निकाय की आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों को किसी अन्य निगमित निकायों को, जो उस अंतरण के पश्चात् वही कारबार चलाते हों, अंतरित हो, वहां प्रथम वर्णित निगमित निकाय द्वारा हुई लाभ और अभिलाभों की हानियां, जो अंतरण के अभाव में, आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अध्याय 6 के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत की जाती या मुजरा की जाती, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार अंतरिती निगमित निकायों में प्रभावित की जाएंगी और ऐसे प्रभाजन पर प्रत्येक अंतरिती निगमित निकाय को आबंटित हानि के अंश के संबंध में कार्यवाही उक्त अधिनियम के भाग 6 के उपबंधों के अनुसार की जाएगी, मानो वे हानियां स्वयं अंतरिति निगमित निकाय को अपने द्वारा किए गए कारबार में उन वर्षों में हुई हों जिनमें वे हानियां वास्तव में हुई ।
77. कुछ राजकीय संस्थाओं में प्रसुविधाओं का बना रहनाश्न्यथास्थिति, हरियाणा या पंजाब राज्य की सरकार, या अंतरित राज्यक्षेत्रों या चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में केन्द्रीय सरकार सोलहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट और पूर्वोक्त राज्य या राज्यक्षेत्र में स्थित संस्थाओं की बाबत प्रसुविधाएं किसी अन्य पूर्वोक्त सरकार तथा पूर्वोक्त राज्यों और राज्यक्षेत्रों के लोगों को, ऐसी कालावधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर (जिनके अंतर्गत ऐसी प्रसुविधाओं के लिए किए जाने वाले किन्हीं अभिदायों से संबंधित निबंधन और शर्तें भी हैं) देती रहेगी जो उक्त राज्यों के बीच 1 अप्रैल, 1967 के पहले करार पाई जाएं, या यदि उक्त तारीख तक कोई करार न हो तो जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा नियत करे तथा जो किसी भी प्रकार से ऐसी सरकार या लोगों के लिए उन प्रसुविधाओं से कम अनुकूल न होंगी जो उन्हें नियत दिन के पहले दी जा सकती थी ।
(2) केन्द्रीय सरकार 1 अप्रैल, 1967, के पहले किसी समय, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन राज्यों या राज्यक्षेत्रों में नियत दिन विद्यमान किसी अन्य संस्था को सोलहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के जारी किए जाने पर यह समझा जाएगा कि अनुसूची का संशोधन उक्त संस्था को उसमें सम्मिलित करके किया गया है ।
भाग 8
भाखड़ा-नांगल तथा ब्यास परियोजनाएं
78. भाखड़ा-नागला तथा ब्यास परियोजनाओं के बारे में अधिकार और दायित्वश्न्(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किन्तु धारा 79 तथा 80 के उपबंधों के अधीन रहते हुए विद्यमान पंजाब राज्य की भाखड़ा-नांगल परियोजना तथा ब्यास परियोजना की बाबत सब अधिकार तथा दायित्व, नियत दिन को ऐसे अनुपात में जो नियत किया जाए, और ऐसे समायोजनों के अधीन रहते हुए जो उक्त राज्यों द्वारा केन्द्रीय सरकार से परामर्श के पश्चात् किए गए करार द्वारा किए जाएं, या यदि नियत दिन से दो वर्ष के भीतर ऐसा कोई करार न हो तो जो केन्द्रीय सरकार परियोजना के प्रयोजनों को ध्यान में रखते हुए, आदेश द्वारा, अवधारित करे, उत्तरवर्ती राज्यों के अधिकार और दायित्व होंगे :
परन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रकार किए गए आदेश में केन्द्रीय सरकार से परामर्श के पश्चात् उत्तरवर्ती राज्यों द्वारा किए गए किसी पश्चात्वर्ती करार द्वारा परिवर्तन किया जा सकेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई करार या आदेश यदि उस उपधारा में निर्दिष्ट परियोजनाओं में से नियत दिन के पश्चात् किसी एक का विस्तार या अतिरिक्त विकास किया गया हो तो ऐसे विस्तार या अतिरिक्त विकास के बारे में उत्तरवर्ती राज्यों के अधिकारों और दायित्वों का भी उपबंध करेगा ।
(3) उपधारा (1) और (2) में निर्दिष्ट अधिकारों और दायित्वों के अन्तर्गत श्न्
(क) परियोजनाओं के परिणामस्वरूप वितरण के उपलभ्य जल को प्राप्त करने तथा उसका उपयोग करने के अधिकार ; तथा
(ख) परियोजनाओं के परिणामस्वरूप निर्मित विद्युत शक्ति को प्राप्त करने तथा उसका उपयोग करने के अधिकार,
भी होंगे किन्तु नियत दिन के पहले विद्यमान पंजाब राज्य की सरकार द्वारा सरकार से भिन्न किसी व्यक्ति या प्राधिकारी के साथ की गई किसी संविदा के अधीन के अधिकार तथा दायित्व इनके अंतर्गत नहीं होंगे ।
(4) इस धारा में तथा धारा 79 और 80 में, श्न्
(क) ब्यास परियोजनाञ्ज् से वे संकर्म अभिप्रेत हैं जो या तो सन्निर्माण के अधीन हों या ब्यास-सतलुज-लिंक परियोजना (यूनिट 1) और ब्यास नदी पर पांग बांध परियोजना (यूनिट 2) के घटकों के रूप में सन्निर्मित होने वाले हों जिनके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैंश्न्
(त्) ब्यास-सतलुज-लिंक परियोजना (यूनिट 1) जिसमें निम्नलिखित समाविष्ट हैंश्न्
(क) पांडों बांध और उससे अनुलग्नक संकर्म,
(ख) पांडों-बग्गी सुरंग,
(ग) सुंदरनगर जलविद्युत सरणी,
(घ) सुंदरनगर सतलुज सुरंग,
(ङ) उपमार्ग सुरंग,
(च) सतलुज नदी की दायीं ओर डेरा, बिजली घर में चार जनित्र यूनिट प्रत्येक 165 मे० वा० की क्षमता का,
(छ) भाखड़ा दाहिना किनारा बिजली घर में 120 मे० वा० क्षमता का पांचवां जनित्र यूनिट,
(ज) संचारण लाइनें,
(झ) संतोलक जलाशय ;
(त्त्) पांग बांध परियोजना (यूनिट 2) जिसमें निम्नलिखित समाविष्ट हैं श्न्
(क) पांग बांध और उससे अनुलग्नक संकर्म,
(ख) निर्गम संकर्म,
(ग) पेनस्टाक सुरंग,
(घ) 60 मे० वा० प्रत्येक के चार जनित्र यूनिटों सहित विद्युत संयंत्र ;
(त्त्त्) ऐसे अन्य संकर्म, जो पूर्वकथित संकर्मों के पूरक हों और जो एक से अधिक राज्यों के सामान्य हित के हों ;
(ख) भाखड़ा-नांगल परियोजनाञ्ज् से अभिप्रेत है श्न्
(त्) भाखड़ा बांध, जलाशय और उनसे अनुलग्नक संकर्म,
(त्त्) नांगल बांध और नांगल जलविद्युत सरणी,
(त्त्त्) भाखड़ा मुख्य लाइन तथा नहर प्रणाली,
(त्ध्) भाखड़ा बायां किनारा बिजली घर, गंगुवाल बिजली घर तथा कोटला बिजली घर स्विचयार्ड सब-स्टेशन, तथा संचारण लाइनें ;
(ध्) भाखड़ा दाहिना किनारा बिजली घर प्रत्येक 120 मे० वा० के चार यूनिटों सहित ।
79. भाखड़ा प्रबन्धक बोर्डश्न्(1) निम्नलिखित संकर्मों के प्रशासन बनाए रखने और प्रवर्तन के लिए केन्द्रीय सरकार एक बोर्ड गठित करेगी जो भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड कहलाएगा, अर्थात् श्न्
(क) भाखड़ा बांध और जलाशय और उनसे अनुलग्नक संकर्म ;
(ख) नांगल बांध तथा कोटला बिजली घर तक नांगल विद्युत जलसरणी ;
(ग) रोपड़, हारिके तथा फिरोजपुर पर सिंचाई के जलशीर्ष तंत्र ;
(घ) भाखड़ा बिजली घर :
परन्तु दाहिना किनारा बिजली घर के उन जनित्र यूनिटों का जिनका प्रारंभ नहीं हुआ है, उक्त बोर्ड द्वारा प्रशासन बनाए रखना और प्रवर्तन ऐसे किसी यूनिट के प्रारंभ से शुरू होगा ;
(ङ) गंगुवाल तथा कोटला बिजली घर ;
(च) गंगुवाल, अम्बाला, पानीपत, दिल्ली, लुधियाना, संगरूर तथा हिसार के सब-स्टेशन, और मुख्य 220 कि० वा० की उक्त सब-स्टेशनों को खण्ड (घ) तथा (ङ) में विनिर्दिष्ट बिजली घरों के साथ जोड़ने वाली संचारण लाइनें ; तथा
(छ) ऐसे अन्य संकर्म जिन्हें केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
(2) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा श्न्
(क) पूर्णकालिक अध्यक्ष तथा दो पूर्णकालिक सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ;
(ख) पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों तथा हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र की सरकारों में से प्रत्येक का एक-एक प्रतिनिधि जो, यथास्थिति, अपनी-अपनी सरकारों या प्रशासक द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ;
(ग) केन्द्रीय सरकार के दो प्रतिनिधि जो उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ।
(3) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड के कृत्यों के अन्तर्गत निम्नलिखित होंगे श्न्
(क) हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान राज्यों को निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए, भाखड़ा-नांगल परियोजना से जल प्रदाय का विनियमन श्न्
(त्) विद्यमान पंजाब राज्य और राजस्थान राज्य के बीच किया गया कोई करार या ठहराव, तथा
(त्त्) धारा 78 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार या आदेश ;
(ख) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बिजली घर में उत्पादित शक्ति के किसी विद्युत बोर्ड या शक्ति के वितरण के भारसाधक अन्य प्राधिकारी को निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए, प्रदाय का विनियमन श्न्
(त्) विद्यमान पंजाब राज्य तथा राजस्थान राज्यों की सरकारों के बीच किया गया कोई करार या ठहराव,
(त्त्) धारा 78 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार या आदेश, और
(त्त्त्) विद्यमान पंजाब राज्य या पंजाब विद्युत बोर्ड या राजस्थान राज्य या राजस्थान विद्युत बोर्ड द्वारा नियत दिन के पहले किसी अन्य विद्युत बोर्ड या शक्ति के वितरण के भारसाधक प्राधिकारी के साथ उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट बिजली घर में उत्पादित शक्ति के प्रदाय की बाबत किया गया कोई करार या ठहराव ;
(ग) दाहिना किनारा बिजली घर से संबंधित ऐसे शेष संकर्मों की संरचना, जिन्हें केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे ;
(घ) ऐसे अन्य कृत्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान राज्यों की सरकारों से परामर्श के पश्चात् उसे सौंप दे ।
(4) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड ऐसा कर्मचारिवृन्द नियोजित कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए, वह आवश्यक समझे :
परन्तु प्रत्येक व्यक्ति, जो उक्त बोर्ड के गठन के ठीक पहले उपधारा (1) में के संकर्मों की संरचना, उन्हें बनाए रखना या उनके प्रवर्तन में लगा हुआ था, बोर्ड के अधीन उक्त संकर्मों के संबंध में सेवा के उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर जो उसे ऐसे गठन के पहले लागू थीं, तब तक इस प्रकार नियोजित बना रहेगा जब तक केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा अन्यथा निदेश न दे :
परन्तु यह और भी कि उक्त बोर्ड किसी समय राज्य सरकार या संबद्ध विद्युत बोर्ड से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से ऐसे किसी व्यक्ति को उस सरकार या बोर्ड के अधीन सेवा के लिए वापस भेज सकेगा ।
(5) उत्तरवर्ती राज्यों तथा राजस्थान की सरकारें सब समयों पर भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड को उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षित सब व्यय को (जिसके अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द के वेतन तथा भत्ते भी हैं) पूरा करने के लिए आवश्यक निधियों का उपबन्ध करेगा और ऐसी राशियों का उत्तरवर्ती राज्यों में, राजस्थान राज्य तथा उक्त राज्यों के विद्युत बोर्डों में ऐसे अनुपात में प्रभाजन किया जाएगा जैसा केन्द्रीय सरकार उक्त राज्यों या बोर्डों में से प्रत्येक को होने वाले फायदों को ध्यान में रखते हुए विनिर्दिट करे ।
(6) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रणाधीन होगा और ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगा, जो समय-समय पर उसे उस सरकार द्वारा दिए जाएं ।
(7) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से अपनी ऐसी शक्तियां, कृत्य या कर्तव्य, जैसे वह ठीक समझे, उक्त बोर्ड के अध्यक्ष या बोर्ड के किसी अधीनस्थ अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
(8) केन्द्रीय सरकार, भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड को प्रभावी रूप से कार्य करने को समर्थ बनाने के प्रयोजनार्थ हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान राज्यों की सरकारों तथा हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासन या किसी अन्य प्राधिकारी को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी और राज्य सरकारें, प्रशासक या प्राधिकारी ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगे ।
(9) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से तथा शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित का उपबन्ध करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों से सुसंगत होंश्न्
(क) बोर्ड के अधिवेशनों के समय और स्थान का तथा ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया का विनियमन ;
(ख) शक्तियों तथा कर्तव्यों का बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अधिकारी को प्रत्यायोजन ;
(ग) बोर्ड के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति और उनकी सेवा की शर्तों का विनियमन ;
(घ) कोई अन्य बात जिसके लिए विनियम बोर्ड द्वारा आवश्यक समझे जाएं ।
80. ब्यास परियोजना की संरचनाश्न्(1) इस अधिनियम या किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी ब्यास परियोजना की संरचना (जिसके अन्तर्गत पहले ही प्रारंभ किए गए किसी संकर्म का पूरा किया जाना है) नियत दिन से उत्तरवर्ती राज्यों तथा राज्य की ओर से केन्द्रीय सरकार द्वारा की जाएगी :
परन्तु उत्तरवर्ती राज्यों की तथा राजस्थान राज्य की सरकारें सभी समयों पर परियोजना पर होने वाले व्यय के लिए झ्र्जिसके अन्तर्गत उपधारा (2) में निर्दिष्ट बोर्ड के व्यय भी हैंट केन्द्रीय सरकार को आवश्यक निधियों का उपबन्ध करेगी और ऐसी राशियों का उत्तरवर्ती राज्यों में तथा राजस्थान राज्य के बीच ऐसे अनुपात में प्रभाजन किया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उक्त राज्यों की सरकार से परामर्श के पश्चात् नियत किया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए केन्द्रीय सरकार श्न्
(क) शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और उत्तरवर्ती राज्यों तथा राजस्थान राज्य की सरकारों से परामर्श करके ऐसे सदस्यों के सहित जितने वह ठीक समझे एक बोर्ड गठित कर सकेगी जो ब्यास संरचना बोर्ड कहलाएगा और बोर्ड को ऐसे कृत्य सौंप सकेगी जो वह आवश्यक समझे ; तथा
(ख) हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान की राज्य सरकारों, हिमाचल प्रदेश के संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या अन्य प्राधिकारी को ऐसे निदेश दे सकेगी और राज्य सरकार प्रशासक या अन्य प्राधिकारी ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगा ।
(3) उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन बोर्ड का गठन करने वाली अधिसूचना बोर्ड को ऐसे कर्मचारिवृन्द को नियुक्त करने के लिए सशक्त कर सकेगी जो उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक हो :
परन्तु प्रत्येक व्यक्ति जो बोर्ड के गठन के ठीक पहले ब्यास परियोजना से संबंधित किसी संरचना या संकर्म में लगा हुआ था बोर्ड द्वारा उन संकर्मों के संबंध में सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों पर जो उसे ऐसे गठन के पहले लागू थी तब तक इस प्रकार नियोजित बना रहेगा जब तक केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा अन्यथा निदेश न दे :
परन्तु यह और भी कि बोर्ड किसी समय राज्य सरकार या संबद्ध विद्युत बोर्ड से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से ऐसे किसी व्यक्ति को उस सरकार या बोर्ड के अधीन सेवा के लिए वापस भेज सकेगा ।
(4) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ न लगाया जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार को हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान राज्यों की सरकारों से परामर्श किए बिना ब्यास परियोजना की उस परिधि को जो कि राजस्थान राज्य तथा विद्यमान पंजाब राज्य की सरकार के बीच करार पाई गई है घटाने या बढ़ाने को समर्थ बनाती है ।
(5) ब्यास परियोजना का कोई घटक जिसके संबंध में नियत दिन के पश्चात् संरचना पूर्ण की गई है, केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 79 के अधीन गठित बोर्ड को अन्तरित किया जा सकेगा, जिस पर उस धारा के उपबंध ऐसे लागू होंगे मानो वह संकर्म उस धारा की उपधारा (1) में सम्मिलित किया गया संकर्म था ।
(6) जब ब्यास परियोजना के घटकों में से कोई घटक उपधारा (5) के अधीन अंतरित किया गया हो तब धारा 79 के अधीन गठित भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड भाखड़ा ब्यास प्रबंधक बोर्ड के रूप में पुनःनामित किया जाएगा और जब ब्यास बोर्ड के सब घटक इस प्रकार अंतरित कर दिए जाएं तब ब्यास संरचना बोर्ड अस्तित्वहीन हो जाएगा ।
भाग 9
सेवाओं के बारे में उपबन्ध
81. अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित उपबन्धश्न्(1) इस धारा में राज्य काडरञ्ज् पद का, श्न्
(क) भारतीय प्रशासनिक सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (काडर) नियम, 1954 में दिया गया है ; तथा
(ख) भारतीय पुलिस सेवा के संबंध में वही अर्थ है जो उसे भारतीय पुलिस सेवा (काडर) नियम, 1954 में दिया गया है ।
(2) नियत दिन से विद्यमान पंजाब राज्य के भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा भारतीय पुलिस सेवा काडरों के स्थान पर इन सेवाओं में से प्रत्येक की बाबत दो पृथक् काडर, एक पंजाब राज्य के लिए तथा दूसरा हरियाणा राज्य के लिए होंगे ।
(3) पंजाब तथा हरियाणा राज्यों के राज्य काडरों में से प्रत्येक की प्रारंभिक सदस्य-संख्या और संरचना और दिल्ली-हिमाचल प्रदेश राज्य काडरों की प्रारंभिक सदस्य-संख्या और संरचना ऐसी होगी, जो केन्द्रीय सरकार नियत दिन के पहले आदेश द्वारा अवधारित करे ।
(4) उक्त सेवाओं में से प्रत्येक के ऐसे सदस्य जो नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य के राज्य काडरों में दर्ज थे उस सेवा के पंजाब और हरियाणा राज्यों में से प्रत्येक के राज्य काडर को तथा दिल्ली-हिमाचल प्रदेश राज्य काडरों को ऐसी रीति से और ऐसी तारीख या तारीखों से आबंटित कि जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
(5) इस धारा की कोई भी बात, नियत दिन या उसके पश्चात् उपधारा (3) में निर्दिष्ट उक्त सेवाओं के राज्य काडरों के संबंध में और उन सेवाओं के ऐसे सदस्यों के संबंध में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) या तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
82. अन्य सेवाओं से संबंधित उपबन्धश्न्(1) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा कर रहा हो, उस दिन से जब तक केन्द्रीय सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा उससे यह अपेक्षा न की जाए कि वह किसी अन्य उत्तरवर्ती राज्य के कार्यकलाप के संबंध में अनन्तिम रूप से सेवा करे, तब तक पंजाब राज्य के कार्यकलाप के संबंध में अनन्तिम रूप से सेवा करता रहेगा ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा वह उत्तरवर्ती राज्य जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति सेवा के लिए अनन्तिम रूप से आबंटित होगा और वह तारीख जिससे ऐसा आबंटन प्रभावी होगा या प्रभावी हुआ समझा जाएगा, अवधारित करेगी ।
(3) प्रत्येक व्यक्ति जो उपधारा (2) के अधीन अनन्तिम रूप से उत्तरवर्ती राज्य को आबंटित किया जाए, यदि वह उनमें पहले ही सेवा न करता हो तो उत्तरवर्ती राज्य में ऐसी तारीख से जो संबंधित सरकारों के बीच करार पाई जाए या ऐसे करार के अभाव में जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, सेवा के लिए उपलब्ध किया जाएगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के संबंध में अपनी सहायता के प्रयोजनार्थ आदेश द्वारा एक या अधिक सलाहकार समितियां स्थापित कर सकेगी श्न्
(क) उत्तरवर्ती राज्यों के बीच सेवाओं का विभाजन और एकीकरण ; तथा
(ख) इस धारा के उपबंधों द्वारा प्रभावित सब व्यक्तियों के साथ ऋजु और साम्यापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना और ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए किसी अभ्यावेदन पर उचित विचार करना ।
(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंध किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में जिसे धारा 81 के उपबन्ध लागू होते हों, लागू नहीं होंगे ।
(6) इस धारा की कोई बात नियत दिन से या उसके पश्चात् संघ या किसी राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने वाले व्यक्तियों की सेवा की शर्तों के अवधारण के संबंध में संविधान के भाग 14 के अध्याय 1 के उपबंधों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली न समझी जाएगी :
परन्तु उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को नियत दिन के ठीक पहले लागू होने वाली सेवा की शर्तों में उसके लिए अहितकर रूप में परिवर्तन केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।
83. अधिकारियों को उन्हीं पदों में बनाए रखने के बारे में उपबंधश्न्प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन के ठीक पहले किसी क्षेत्र में, जो उस दिन पर उत्तरवर्ती राज्यों में से किसी के भीतर आता हो, विद्यमान पंजाब राज्य के कार्यकलाप के संबंध में किसी स्थान या पद को धारण करता हो या उसके कर्तव्यों का निर्वहन करता हो, उस उत्तरवर्ती राज्य में वही स्थान या पद धारण करता रहेगा और उस दिन से उत्तरवर्ती राज्य की सरकार या उसमें अन्य समुचित प्राधिकारी द्वारा उस स्थान या पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त समझा जाएगा :
परन्तु इस धारा की कोई बात किसी सक्षम प्राधिकारी को नियत दिन से ऐसे व्यक्ति के संबंध में उसके ऐसे पद या स्थान पर बने रहने पर प्रभाव डालने वाला आदेश पारित करने से निर्धारित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
84. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्तिश्न्केन्द्रीय सरकार, पंजाब तथा हरियाणा राज्यों की सरकारों को तथा हिमाचल प्रदेश और चण्डीगढ़ संघ राज्यक्षत्रों के प्रशासकों को ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों और राज्य सरकारें और प्रशासक ऐसे निदेशकों का अनुपालन करेंगे ।
85. राज्य लोक सेवा आयोग के बारे में उपबंधश्न्(1) विद्यमान पंजाब राज्य का लोक सेवा आयोग नियत दिन से अस्तित्व में नहीं रहेगा ।
(2) नियत दिन के ठीक पहले, विद्यमान पंजाब राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का पद धारण करने वाला व्यक्ति जैसा राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे हरियाणा या पंजाब राज्य के लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष होगा और उस दिन के ठीक पहले उस आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करने वाला प्रत्येक अन्य व्यक्ति उक्त आयोगों में से ऐसे एक का जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करेगा, सदस्य या यदि राष्ट्रपति इस प्रकार विनिर्दिष्ट करे तो अध्यक्ष हो जाएगा ।
(3) प्रत्येक व्यक्ति जो उपधारा (2) के अधीन नियत दिन से लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या अन्य सदस्य हो जाए श्न्
(क) राज्य सरकार से सेवा की ऐसी शर्तें प्राप्त करने का हकदार होगा जो उन शर्तों से कम अनुकूल न होंगी जिन्हें वह नियत दिन के ठीक पहले उसे लागू होने वाले उपबन्धों के अधीन प्राप्त करने का हकदार था ;
(ख) अनुच्छेद 316 के खण्ड (2) के परन्तुक के अधीन रहते हुए, नियत दिन के ठीक पहले उसे लागू होने वाले उपबंधों के अधीन यथा अवधारित उसकी पदावधि का जब तक अवसान न हो, तब तक पद धारण करेगा या धारण किए रहेगा ।
(4) नियत दिन के पहले किसी कालावधि के बारे में आयोग द्वारा किए गए कार्य की पंजाब लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट अनुच्छेद 323 के खण्ड (2) के अधीन पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों को प्रस्तुत की जाएगी और पंजाब का राज्यपाल ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर उसकी एक प्रति किसी ऐसे मामले की बाबत, यदि कोई हो, जहां आयोग की सलाह अस्वीकार की गई थी वहां ऐसे अस्वीकृति के कारणों के यावत्शक्य स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित, पंजाब राज्य के विधान-मण्डलों के समक्ष रखवाएगा और ऐसी रिपोर्ट या ऐसा कोई ज्ञापन हरियाणा विधान सभा के समक्ष रखवाना आवश्यक नहीं होगा ।
भाग 10
विधिक और प्रकीर्ण उपबन्ध
86. 1956 के अधिनियम 37 का संशोधनश्न्राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 के खण्ड (क) में श्न्
(त्) पंजाबञ्ज् शब्द के स्थान पर हरियाणा, पंजाबञ्ज् शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे,
(त्त्) और हिमाचल प्रदेशञ्ज् के स्थान पर हिमाचल प्रदेश और चण्डीगढ़ञ्ज् शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
87. चण्डीगढ़ को अधिनियमितियां विस्तारित करने की शक्तिश्न्केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा कोई भी अधिनियमिति, जो अधिसूचना की तारीख को किसी राज्य में प्रवर्तित हो, ऐसे निबन्धनों या उपान्तरों सहित, जिन्हें वह ठीक समझे, चण्डीगढ़ के संघ राज्यक्षेत्र को विस्तारित कर सकेगी ।
88. विधियों का प्रादेशिक विस्तारश्न्भाग 2 के उपबन्धों की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उनके उन राज्यक्षेत्रों में, जिन्हें नियत दिन के ठीक पहले कोई प्रवृत्त विधि विस्तारित होती है या लागू होती है, कोई परिवर्तन हुआ है और ऐसी किसी विधि में राज्यक्षेत्रीय निर्देशों का पंजाब राज्य को, जब तक अन्य सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबन्धित न हो, तब तक वही अर्थ लगाया जाएगा मानो वे नियत दिन के ठीक पहले उस राज्य के भीतर के राज्यक्षेत्र हों ।
89. विधियों के अनुकूलन की शक्तिश्न्नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के पंजाब राज्य या हरियाणा को या हिमाचल प्रदेश या चण्डीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, समुचित सरकार उस दिन से दो वर्ष के अवसान के पूर्व आदेश द्वारा विधि के ऐसे अनुकूलन तथा उपान्तर चाहे वे निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में हों जैसे आवश्यक या समीचीन हों, कर सकेगी और तब ऐसी हर विधि जब तक सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित न कर दी जाए, तब तक इस प्रकार किए गए अनुकूलनों या उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी ।
स्पष्टीकरणश्न् इस धारा में समुचित सरकारञ्ज् पद से अभिप्रेत है, श्न्
(क) संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि के बारे में केन्द्रीय सरकार, और
(ख) किसी अन्य विधि के बारे मेंश्न्
(त्) उसके किसी राज्य को लागू होने की दशा में राज्य सरकार ; और
(त्त्) उसके संघ राज्यक्षेत्र को लागू होने की दशा में, केन्द्रीय सरकार ।
90. विधियों के अर्थान्वयन की शक्तिश्न्(1) इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 89 के अधीन कोई उपबन्ध नहीं किया गया है, या अपर्याप्त उपबन्ध किया गया है, ऐसी विधि को प्रवर्तित करने के लिए अपेक्षित या सशक्त किया गया कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी, पंजाब अथवा हरियाणा राज्य के या चण्डीगढ़ अथवा हिमाचल प्रदेश के संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, उस विधि का अर्थान्वयन, सार पर प्रभाव डाले बिना, ऐसी रीति से कर सकेगा, जो, यथास्थिति, उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष के मामले की बाबत आवश्यक या उचित हो ।
(2) किसी विधि में पंजाब उच्च न्यायालय के प्रति किसी निर्देश का अर्थ जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो नियत दिन से यह लगाया जाएगा कि वह पंजाब और हरियाणा के उच्च न्यायालय के प्रति निर्देश है ।
91. कानूनी कृत्यों का प्रयोग करने वाले प्राधिकारियों आदि को नामित करने की शक्तिश्न्केन्द्रीय सरकार, चण्डीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र या अंतरित राज्यक्षेत्र की बाबत और हरियाणा राज्य की सरकार उसके राज्यक्षेत्रों की बाबत शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसा प्राधिकारी, अधिकारी या व्यक्ति विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो नियत दिन से उस दिन प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे प्रयोक्तव्य कृत्यों का प्रयोग करने के लिए जो उस अधिसूचना में उपवर्णित हो, सक्षम होगा और ऐसी विधि तद्नुसार प्रभावी होगी ।
92. विधिक कार्यवाहियांश्न्जहां, नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य इस अधिनियम के अधीन प्रभाजनाधीन किसी सम्पत्ति, अधिकार या दायित्वों की बाबत किन्हीं विधिक कार्यवाहियों का पक्षकार हो, वहां वह उत्तरवर्ती राज्य, जो इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के आधार पर उस सम्पत्ति या उन अधिकारों या दायित्वों का कोई वारिस होता हो या उसमें कोई भाग अर्जित करता हो, विद्यमान पंजाब राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया या उन कार्यवाहियों में पक्षकार के रूप में जोड़ा गया समझा जाएगा और कार्यवाहियां तद्नुसार चालू रखी जा सकेंगी ।
93. लम्बित कार्यवाही का अन्तरणश्न्(1) नियत दिन के ठीक पहले किसी ऐसे क्षेत्र में जो उस दिन किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के भीतर आता हो, किसी न्यायालय (उच्च न्यायालय से भिन्न), अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के समक्ष की प्रत्येक कार्यवाही, यदि वह कार्यवाही अनन्यतः उन राज्यक्षेत्रों से संबंधित हो, जो उस दिन से अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के राज्यक्षेत्र हैं, यथास्थिति, स्थापित उस अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी को अंतरित हो जाएगी ।
(2) यदि कोई प्रश्न उठे कि क्या उपधारा (1) के अधीन कोई कार्यवाही अंतरित हो जानी चाहिए तो वह उस क्षेत्र की बाबत, जिसमें वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जिसमें या जिसके समक्ष ऐसी कार्यवाही नियत दिन को लम्बित हो, कृत्य कर रहा हो, अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय को निर्देशित किया जाएगा, और उस उच्च न्यायालय का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(3) इस धारा मेंश्न्
(क) कार्यवाहीञ्ज् के अंतर्गत कोई वाद, मामला या अपील भी है, तथा
(ख) राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारीञ्ज् से अभिप्रेत है श्न्
(त्) उस राज्य का या संघ राज्यक्षेत्र का वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जिसमें या जिसके समक्ष वह कार्यवाही यदि वह नियत दिन के पश्चात् संस्थित की जाती तो रखी जाती ; या
(त्त्) शंका की दशा में उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र का ऐसा न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जो नियत दिन के पश्चात्, यथास्थिति, उस राज्य की सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा या नियत दिन के पहले विद्यमान पंजाब राज्य की सरकार द्वारा तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के रूप में अवधारित किया जाए ।
94. कुछ दशाओं में विधि-व्यवसाय करने का प्लीडरों का अधिकारश्न्कोई व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पहले विद्यमान पंजाब राज्य में किन्हीं अधीनस्थ न्यायालयों में विधि-व्यवसाय करने के हकदार प्लीडर के रूप में नामावलित हो, उस दिन से एक वर्ष की कालावधि के लिए, इस बात के होते हुए भी कि उन न्यायालयों की अधिकारिता के भीतर के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उनका कोई भाग हरियाणा राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को अंतरित कर दिया गया है, उन न्यायालयों में विधि-व्यवसाय करने का हकदार बना रहेगा ।
95. अधिनियम के अन्य विधियों से असंगत उपबंधों का प्रभावश्न्इस अधिनियम के उपबंध किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
96. कठिनाइयां दूर करने की शक्तिश्न्यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई आती है, तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा, कोई भी बात कर सकेगा जो ऐसे उपबन्धों से असंगत न हो तथा जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ।
97. नियम बनाने की शक्तिश्न्(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :श्न्
(क) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड तथा ब्यास संरचना बोर्ड के कार्य संचालन के लिए और बोर्डों के उचित कार्यकरण के लिए तथा उक्त बोर्डों के सदस्यों में होने वाली आकस्मिक रिक्तियां भरने के लिए अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ;
(ख) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड के पूर्णकालिक अध्यक्ष तथा पूर्णकालिक सदस्यों का संदेय वेतन और भत्ते ;
(ग) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड या ब्यास संरचना बोर्ड के कर्मचारिवृन्द के सदस्यों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें ;
(घ) भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड या ब्यास संरचना बोर्ड के अधिवेशनों में किए गए कारबार के अभिलेख रखना और केन्द्रीय सरकार को ऐसे अभिलेख की प्रतियां प्रस्तुत करना ;
(ङ) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए और वह रीति जिसमें भाखड़ा प्रबंधक बोर्ड या ब्यास संरचना बोर्ड के कृत्यों की बाबत उत्तरवर्ती राज्यों और राजस्थान राज्य की ओर से संविदाएं की जा सकेंगी ;
(च) उक्त बोर्डों की प्राप्तियों और व्यय के बजट प्राक्कलन तैयार करना तथा वह प्राधिकारी जो ऐसे प्राक्कलनों को अनुमोदित करेगा ;
(छ) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, उक्त बोर्ड व्यय उपगत कर सकेगा या किसी बजट शीर्ष से दूसरे ऐसे शीर्ष की निधियों का पुनर्विनियोजन कर सकेगा ;
(ज) वार्षिक रिपोर्टों का तैयार किया जाना तथा प्रस्तुत किया जाना ;
(झ) उक्त बोर्डों द्वारा उपगत व्यय के लेखे रखे जाना ;
(ञ) कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या की जाए ।
झ्र्(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।ट
पहली अनुसूची
झ्र्धारा 3(1) (ङ) देखिएट
विद्यमान पंजाब राज्य के अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्का से नए हरियाणा राज्य को अन्तरित राज्यक्षेत्र :श्न्
1. निम्नलिखित पटवार हल्के :श्न्
भरेली
बाटावर
बरवाला
मजरी
कालका ।
2. निम्नलिखित पटवार हल्कों के वे राज्यक्षेत्र जो चण्डीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र को बनाने में धारा 4 के अधीन अन्तरित नहीं हुए हैं :श्न्
मनीमाजरा
मौली
चण्डीमंदर ।
दूसरी अनुसूची
(धारा 4 देखिए)
चण्डीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र बनाने के लिए विद्यमान पंजाब राज्य से अन्तरित राज्यक्षेत्र :श्न्
1. अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्का के निम्नलिखित पटवार हल्के :श्न्
धनास
कालीबर
कैलर
दादू माजरा
कंथाला
हैलो माजरा ।
2. अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्के के निम्नलिखित ग्राम :श्न्
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या उस पटवार हल्के का नाम, जिसमें ग्राम सम्मिलित हैं
1 2 3
लाहौरा 348 लाहौरा
सारंगपुर 347 सारंगपुर
खुदा अलीशर 353 कंसल
दारिया 374
मनीमाजरा
मनीमाजरा 375
मौली जग्रान 373
मौली
बड़ा रायपुर 371
छोटा रायपुर 232
3. अंबाला जिले की खरड़ तहसील के मनीमाजरा कानूनगो हल्के के निम्नलिखित भाग जिनका विस्तार नीचे की सारणी में स्तम्भ 3 में विनिर्दिष्ट है, जो उन गांवों के हैं जो नीचे स्तम्भ 1 की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट हैं और जिन्हें विद्यमान पंजाब राज्य की सरकार ने उक्त सारणी के स्तंभ 4 की तत्स्थानी प्रविष्टि में निर्दिष्ट अधिसूचनाओं द्वारा अर्जित किया है :श्न्
सारणी
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या अर्जित क्षेत्र (एकड़ों में) पंजाब सरकार की अधिसूचना, जिसके अधीन अर्जित किया गया
1 2 3 4
सुकेत्री 376 77.74 तारीख 12 नवम्बर, 1955 की सी-11544-55/ज्ख्र्/1003.
तारीख 12 नवम्बर, 1955 की सी-11544-55/ज्ख्र्/1008.
करोरन 352 214.59 तारीख 22/23 मई, 1951 की सी-2707-51/1232.
तारीख 26 फरवरी, 1953 की सी-1058-53/1111.
तारीख 29 जनवरी, 1952 की सी-539-52/351.
तारीख 15 अप्रैल, 1953 की सी-3144-53/2106
तारीख 14 मार्च, 1964 की सी-2352-डब्ल्यू-64/ख्र्/6710.
कंसिल 354 199.78 तारीख 1 फरवरी, 1952 की सी-542-52/339.
तारीख 15 फरवरी, 1952 की सी-1152-52/734.
4. अम्बाला जिले की खरड़ तहसील के मेनोषी कानूनगो हल्के के निम्नलिखित ग्राम :श्न्
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या उस पटवार हल्के का नाम, जिसमें ग्राम सम्मिलित हैं
1 2 3
बेहलना 231
भाब
चुहरपुर 233
बैर माजरा 224 धरमगढ़
निजामपुर कुम्ब्रा 197 कुम्ब्रा
बुढ़ेरी 12
कुझेरी
कुझेरी 198
अट्टावा 199
पलसोरा 11 मातौर
मलोया 13
मलोया
सलाहपुर 201
बुरैल 222
बुरैल
निजामपुर बुरैल 259
जमरो 260
तीसरी अनुसूची
झ्र्धारा 5(1) देखिएट
धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (घ), (ङ) और (च) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र जो विद्यमान पंजाब राज्य से हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र को अंतरित किए गए :श्न्
भाग 1
1. होशियारपुर जिले की ऊना तहसील के संतोषगढ़ कानूनगो हल्के के निम्नलिखित पटवार हल्के :श्न्
पटवार हल्के का नाम पटवार हल्का संख्या
पालकवाह 60
पुबोवाल 62
पोलिअन 63
दुलेहर 64
बेटन 65
कुनग्राट 66
नांगल कलान 67
नांग्रान 68
बाथू 74
2. होशियारपुर जिले की ऊना तहसील के संतोषगढ़ कानूनगो हल्के के निम्नलिखित ग्राम :श्न्
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या उस पटवार हल्के का नाम और संख्या जिसमें ग्राम सम्मिलित है
1 2 3
फत्तेवाल 460
61 जखेरा
बानगढ़ 461
चरतगढ़ 225
72 चरतगढ़
खानपुर 226
छतरपुर 227
73
संतोषगढ़
जाटपुर 245
तखतपुर 247
संतोषगढ़ 246
बथ्री 476 75 बथ्री
3. होशियारपुर जिले की ऊना तहसील के संतोषगढ़ कानूनगो हल्के के निम्नलिखित ग्राम, उनके वे भाग छोड़कर जो नया नांगल के स्थानीय क्षेत्र में सम्मिलित किए गए हैं जिसे स्थानीय क्षेत्र को पंजाब म्युनिसिपल ऐक्ट, 1911 के प्रयोजनों के लिए, पंजाब सरकार की तारीख 21 मार्च, 1961 की अधिसूचना संख्या 2225-सी 1(3 सी 1)-61-9484 द्वारा अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है ।
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या उस पटवार का सर्किल का नाम और संख्या जिसमें ग्राम सम्मिलित है
1 2 3
जखेरा 229 61 जखेरा
मलिकपुर 242
69
कनचेहरा
बाइनवाल 243
माजरा 248
मेहातपुर 230
70 भाभौर
भटोली 231
बसडेरा 228
71
बसडेरा
अजौली 237
पूना 244
रायपुर 218 72 चरतगढ़
सनौली 249 77 सनौली
भाग 2
4. ग्राम कोसर जो होशियारपुर जिले की उना तहसील का भाग है ।
भाग 3
5. गुरदासपुर जिले की पठानकोट तहसील के धरकलां कानूनगो हल्के के निम्नलिखित ग्राम :श्न्
ग्राम का नाम हदबस्त संख्या
बकलोह 421
बालन 422
हलहौजी 423
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
चौथी अनुसूची
(धारा 10 देखिए)
1. तीन आसीन सदस्यों में से जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1968 को समाप्त होगी श्री सुरजीत सिंह और अन्य दो सदस्यों, अर्थात् श्री अब्दुलगनी और श्री चमन लाल में से ऐसा एक सदस्य जिसे विधान परिषद् का अध्यक्ष लाट द्वारा अवधारित करे, पंजाब राज्य को आबंटित स्थानों में से दो स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे और शेष सदस्य को हरियाणा राज्य को आबंटित स्थानों में से एक को भरने के लिए आबंटित समझे जाएंगे ।
2. चार आसीन सदस्यों में से अर्थात् श्री अनुप सिंह, श्री जगत नारायण, श्रीमती मोहिन्दर कौर और श्री उत्तम सिंह दुग्गल को जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1970 को समाप्त होगी ऐसा एक सदस्य जिसे विधान परिषद् का अध्यक्ष लाट द्वारा अवधारित करे, हरियाणा राज्य को आबंटित स्थानों में से एक स्थान को भरने के लिए निर्वाचित समझा जाएगा और तीन अन्य आसीन सदस्य पंजाब राज्य को आबंटित स्थानों में से तीन स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे ।
3. चार आसीन सदस्यों में से जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1972 को समाप्त होगी, श्री नेकीराम को हरियाणा राज्य को आबंटित स्थानों में से एक स्थान को भरने के लिए निर्वाचित समझा जाएगा, श्री नरेन्द्र सिंह और श्री रघुबीर सिंह पंजाब राज्य को आबंटित स्थानों में से दो स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित समझे जाएंगे ; और श्री सालिगराम को हिमाचल प्रदेश संघ राज्यक्षेत्र को आबंटित स्थानों में से एक स्थान को भरने के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
पांचवी अनुसूची
(धारा 14 देखिए)
1. संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 1961 की अनुसूची 11 के भाग ख का संशोधन
1. ख-सभा निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज्, शीर्षक के नीचे 1-हरियाणाञ्ज् उपशीर्षक अन्तःस्थापित करें ।
2. लाहौल और स्पिति, कुल्लु और कांगड़ा जिला क्षेत्रञ्ज् शीर्षक का और प्रविष्टि 1 से 13 तक का लोप करें ।
3. प्रविष्टि 14 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
14. नारायणगढ़श्न्नारायणगढ़ तहसील (सढोरा थाने में सढोरा, हवेली और गडौली जै़लों और एम० सी० सढोरा को छोड़कर) ।ञ्ज्
4. शिमला जिलाञ्ज् शीर्षक और प्रविष्टि 20 का लोप करें ।
5. प्रविष्टि 21 से पहले करनाल जिला क्षेत्रञ्ज् शीर्षक के स्थान पर करनाल और जींद जिलेञ्ज् शीर्षक प्रतिस्थापित करें ।
6. प्रविष्टि 26 में संगरूरञ्ज् शब्द के स्थान पर जीन्दञ्ज् शब्द प्रतिस्थापित करें ।
7. प्रविष्टि 68 के पश्चात् 2श्न्पंजाबञ्ज् उपशीर्षक अन्तःस्थापित करें ।
8. प्रविष्टि 129 में और डलहौजी थानाञ्ज् शब्दों के स्थान पर और डलहौजी थाने में जै़ल तरहरी (भाग)ञ्ज् शब्द और कोष्ठक प्रतिस्थापित करें ।
9. प्रविष्टि 130 के पश्चात् होशियारपुर जिला क्षेत्रञ्ज् शीर्षक के स्थान पर होशियारपुर और रोपड़ जिलेञ्ज् प्रतिस्थापित करें ।
10. प्रविष्टि 136 और 137 का लोप करें तथा प्रविष्टि 138 और 139 को क्रमशः 136 और 137 के रूप में पुनः संख्यांकित करें ।
11. प्रविष्टि 140 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :श्न्
138. आनन्दपुर श्न् रोपड़ जिले में आनन्दपुर साहिब तहसील; तथा होशियारपुर जिले के गढ़शंकर तहसील में बालाचौर थाने में रात्तेवाल जै़ल ।
139. रोपड़ श्न् रोपड़ तहसील में रोपड़ थाना; तथा खरड़ तहसील के खरड़ थाने में खिज़राबाद, सैलबा और तीरा जै़ल ।
140. मोरिन्दा (अ०जा०) श्न् रोपड़ तहसील में मोरिन्दा और चमकौर थाने; तथा खरड़ तहसील में खरड़ थाने में कुराली नगर और कुराली जै़ल ।
140क. खरड़ श्न् खरड़ तहसील (खरड़ थाने में) खिज़राबाद, सैल्बा, तीरा और कुराली जै़लों तथा कुराली नगर को छोड़कर ।ञ्ज् ।
12. परिशिष्ट में अम्बाला जिले से सम्बन्धित प्रविष्टियों का लोप करें ।
13. इस भाग के अन्त में निम्नलिखित टिप्पण अंतःस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
टिप्पणश्न्इस भाग की प्रविष्टि 14, 26, 138 और 140क में जिले, तहसील, कानूनगो हल्के, पटवार हल्के या अन्य प्रादेशिक खंड के प्रति निर्देश से वह क्षेत्र अभिप्रेत माना जाएगा जो उस जिले, तहसील, कानूनगो हल्के, पटवार हल्के या अन्य प्रादेशिक खंड में नवंबर, 1966 के प्रथम दिन समाविष्ट था, तथा उसकी परिधि के भीतर के सब नगरपालिक नगर और वन-ग्राम भी उसके अंतर्गत माने जाएंगे ।ञ्ज् ।
2. प्रादेशिक परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (हिमाचल प्रदेश) आदेश, 1962 की अनुसूची का संशोधन
1. पैरा 5 में लिए जाएंगेञ्ज् शब्दों के स्थान पर अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित के सिवाय लिए जाएंगेञ्ज् शब्द प्रतिस्थापित करें ।
2. प्रविष्टि 41 के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ें, अर्थात् :श्न्
लाहौल और स्पिति, कुलु और कांगड़ा जिले
42. कुलु श्न् लाहौल और स्पिति जिला तथा कुलु जिले की कुलु तहसील में कुलु थाना (कनवर, हरकंधी, चुंग, कोट कंधी, भल्लान और सैंसार जै़लों को छोड़कर) तथा कांगड़ा जिले की पालमपुर तहसील में पालमपुर थाना में बीर भांगल जै़ल ।
43. सिराज (अ०जा०) श्न् कुलु जिले की कुलु तहसील का सिराज थाना और कुलु थाने के कनवर, हरकन्धी, चुंग, कोट कंधी, भल्लान और सैंसार जै़लें ।
44. पालमपुर श्न् पालमपुर तहसील में पालमपुर थाना (नौरा और बीर भांगल जै़लों को छोड़कर) ।
45. कांगड़ा श्न् कांगड़ा तहसील (धर्मशाला थाने, शाहपुर थाना-भाग और कांगड़ा थाने में नरवाणा, चैत्रु, तयारा और रामगढ़ जै़ल-भागों को छोड़कर) डेरा गोपीपुर तहसील में चानगर जै़ल; पालमपुर तहसील के पालमपुर थाने में सुजानपुर थाना-भाग और नौरा जै़ल ।
46. धर्मशाला श्न् कांगड़ा तहसील के धर्मशाला थाना, शाहपुर थाना भाग और कांगडा थाने के नरवाणा, चैत्रु, तयारा और रामगढ़ जै़ल-भाग ।
47. नूरपुर श्न् नूरपुर तहसील; और डेरा गोपीपुर तहसील के घमेटा और नगरोटा जै़ल ।
48. डेरा गोपीपुर श्न् डेरा गोपीपुर तहसील (घमेटा, नगरोटा और चांगड जै़लों को छोड़कर ।
49. हमीरपुर (अ०जा०) श्न् हमीरपुर तहसील के सुजानपुर, राजगीर, उगैल्टा, मेवा और मेहत्ता जै़ल ।
50. बरसार श्न् हमीरपुर तहसील, (सुजानपुर, राजगीर, उगैल्टा, मेवा और मेहत्ता जैलों को छोड़कर) ।
51. अम्ब श्न् उना तहसील में उना थाने में अम्ब थाना और पनडोगा और बसल जै़ल तथा खंड जै़ल-भाग ।
52. उना श्न् कांगड़ा जिले में उना तहसील (अम्ब थाना और उना थाने के पनडोगा और बसल जैलों और खण्ड ज़ैल-भागों को छोड़कर) ।
शिमला जिला
53. शिमला श्न् शिमला जिला (नालागढ़ तहसील को छोड़कर) ।
54. नालागढ़ श्न् शिमला जिले की नालागढ़ तहसील ।ञ्ज् ।
3. अनुसूची के अन्त में निम्नलिखित टिप्पण अन्तःस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
टिप्पणश्न्इस अनुसूची की प्रविष्टि 3, 4, 42, 43, 50, 53 और 54 में जिले, तहसील, कानूनगो हल्के, पटवार हल्के या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश से वह क्षेत्र अभिप्रेत माना जाएगा जो उस जिले, तहसील, कानूनगो हल्के, पटवार हल्के या अन्य प्रादेशिक खण्ड में नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन समाविष्ट था और उसकी परिधि के भीतर के सब नगर क्षेत्र, अधिसूचित क्षेत्र, लघु नगर क्षेत्र और वन ग्राम भी उसके अन्तर्गत होंगे ।ञ्ज्।
छठी अनुसूची
(धारा 21 देखिए)
परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र (पंजाब-परिसीमन) आदेश, 1951 में उपान्तर
उक्त आदेश से उपाबद्ध सारणी मेंश्न्
(1) स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज् उपशीर्षक के अन्तर्गत प्रविष्टियों मेंश्न्
(त्) प्रविष्टि पंजाब उत्तर स्नातकञ्ज् के सामने स्तम्भ 2 में विद्यमान प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
अमृतसर, गुरदासपुर और होशियारपुर जिलेञ्ज् ;
(त्त्) विद्यमान प्रविष्टि 2 और 3 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
2. पंजाब केन्द्रीय स्नातकह्लह्लफिरोजपुर, कपूरथला और जालंधर जिले-1 ;
3. पंजाब दक्षिण स्नातकह्लह्ललुधियाना, रोपड़, पटियाला, संगरूर और भटिंडा जिले-1ञ्ज्; और
(त्त्त्) प्रविष्टि 4 का लोप करें ;
(2) शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज् उपशीर्षक के अन्तर्गत प्रविष्टियों में श्न्
(त्) प्रविष्टि पंजाब उत्तर शिक्षकञ्ज् के सामने स्तम्भ 2 में विद्यमान प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
अमृतसर, गुरदासपुर और होशियारपुर जिलेञ्ज् ;
(त्त्) विद्यमान प्रविष्टि 2 से 4 तक के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
2. पंजाब केन्द्रीय शिक्षकह्लह्लफिरोजपुर, कपूरथला और जालंधर जिले-1;
3. पंजाब दक्षिण शिक्षकह्लह्ललुधियाना, रोपड़, पटियाला, संगरूर और भटिंडा जिले-1ञ्ज्;
(3) स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रञ्ज् उपशीर्षक के अन्तर्गत श्न्
(त्) प्रविष्टि 3 और 11 से 15 तक का लोप करें ;
(त्त्) प्रविष्टि 10 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :श्न्
10. पटियाला एवं रोपड़ स्थानीय प्राधिकारी पटियाला और रोपड़ जिले 2ञ्ज् ; और
(त्त्त्) जालन्धर स्थानीय प्राधिकारी, फिरोजपुर स्थानीय प्राधिकारी और लुधियाना स्थानीय प्राधिकारी से सम्बन्धित प्रविष्टि 5, 6 और 9 के सामने स्तम्भ 3 में विद्यमान अंक 1ञ्ज् के स्थान पर अंक 2ञ्ज् प्रतिस्थापित करें ;
(4) आदेश के पैरा 3 में, अप्रैल 1965ञ्ज् शब्द और अंकों के स्थान पर नवम्बर, 1966ञ्ज् शब्द और अंक प्रतिस्थापित करें ।
सातवीं अनुसूची ।
झ्र्धारा 22 देखिएट
पंजाब विधान परिषद् के उन सदस्यों की सूची जो नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन ऐसे सदस्य नहीं रहेंगे
1. श्री चन्द्र भान 6. श्री ओम प्रकाश 11. श्री नसीब सिंह
2. श्री अमीर सिंह 7. श्री प्रेम सुख दास 12. श्री सुल्तान सिंह
3. श्री एस० एल० चोपड़ा 8. श्री विरेन्द्र सिंह 13. श्रीमती लज्जा
4. श्री श्रीचन्द गोयल 9. श्री शेर सिंह 14. श्री बेली राम
5. श्रीमति लेखवती जैन 10. श्री धर्म सिंह 15. श्री श्री चन्द
16. श्रीमती साविता बहन
आठवीं अनुसूची
झ्र्धारा 27(1) देखिएट
संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का संशोधन
(1) पैरा 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें श्न्
4. अनुसूची के भाग 4, 4क, 7क और 10 के सिवाय, इस आदेश में किसी राज्य या उसके जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1956 के प्रथम दिन से गठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है; और अनुसूची के भाग 4 और 7क में किसी राज्य या उसके जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह मई, 1960 के प्रथम दिन से गठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है; और अनुसूची के भाग 4क और 10 में किसी राज्य या उसके जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन से गठित राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ।ञ्ज्।
(2) भाग 4 के पश्चात् निम्नलिखित भाग अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :श्न्
भाग 4कश्न्हरियाणा
1. समस्त राज्य में :श्न्
1. अद धर्मी 12. धानक 23. ओड़
2. बंगाली 13. डूमना, महाशय या डूम 24. पासी
3. बरड़, बुरड़ या बेरड़ 14. गगड़ा 25. पेरना
4. बटवाल 15. गंढीला या गंडील गोन्दोला 26. फरेरा
5. बोरिया या बावरिया 16. कबीर पंथी या जुलाहा 27. सनहाई
6. बाजीगर 17. खटीक 28. सनहाल
7. बाल्मीकी, चूहड़ा या भंगी 18. कोरी या कोली 29. सांसी, भेड़कूट या गनेश
8. भंजड़े 19. मरीजा या मरेचा 30. सपेला
9. चमार, जटिया चमार, रेहगड़, 20. मजहबी 31. सरैडा
रायगढ़, रामदासी या रविदासी 21. मेघ 32. सिकलीगर
10. चनाल 22. नट 33. सिरकीबन्द ।
11. डागी
2. महेन्द्रगढ़ और जीन्द जिलों के सिवाय समस्त राज्य में :श्न्
1. देड़ें 2. ढोगरी, ढागरी या सिग्गी 3. संसौई
3. महेन्द्रगढ़ और जीन्द जिलों में :श्न्
डेहा, ढैया या ढिया ।ञ्ज् ।
(3) भाग 10 में, उसके पैरा 2 और 3 में आने वाले शब्द महेन्द्रगढ़ञ्ज् का लोप करें ।
नवीं अनुसूची
झ्र्धारा 27(2) देखिएट
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) (संघ राज्यक्षेत्र) आदेश, 1951 का संशोधन
(1) पैरा 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें श्न्
4. अनुसूची के भाग 2 और 5 के सिवाय इस आदेश में किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1956 के प्रथम दिन से गठित संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश है और अनुसूची के भाग 2 और 5 में किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन को यथाविद्यमान उस राज्यक्षेत्र के प्रतिनिर्देश है ।ञ्ज्।
(2) अनुसूची के भाग 2 में श्न्
(क) समस्त संघ राज्यक्षेत्र मेंञ्ज् शब्दों के स्थान पर पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 5 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों के सिवाय समस्त संघ राज्यक्षेत्र मेंञ्ज् अंक, शब्द और कोष्ठक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(ख) अन्त में निम्नलिखित जोड़ दिया जाएगा :श्न्
2. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 5 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों में :श्न्
1. अद धर्मी 13. धानक 25. ओड
2. बंगाली 14. डोगरी, ढांगरी या सिग्गी 26. पासी
3. बरड़, बुरड़ या बेरड़ 15. डूमना, महाशय या डूम 27. पेरना
4. बटवाल 16. गगड़ा 28. फरेरा
5. बोरिया या बावरिया 17. गंढीला या गन्डील गोन्दोला 29. सनहाई
6. बाजीगर 18. कबीरपंथी या जुलाहा 30. सनहाल
7. बाल्मीकी, चूहड़ा या भंगी 19. खटीक 31. संसोई
8. भंजड़ा 20. कोरी या कोली 32. सांसी, भेड़कूट या गनेश
9. चमार, जटिया चमार, रेहगड़,
रायगढ़, रामदासी या रविदासी 21. मरीजा या मरेचा 33. सपेला
10. चनाल 22. मजहबी 34. सरैडा
11. डागी 23. मेघ 35. सिकलीगर
12. दढे़ 24. नट 36. सिरकीबंद ।ञ्ज्।
(3) भाग 4 के पश्चात् निम्नलिखित भाग अन्तःस्थापित किया जाएगा :श्न्
भाग 5श्न्चंडीगढ़
1. अद धर्मी 13. धानक 25. ओड़
2. बंगाली 14. ढोगरी, ढांगरी या सिग्गी 26. पासी
3. बरड़, बुरड़ या बेरड़ 15. डूमना, महाशय या डूम 27. पेरना
4. बटवाल 16. गगड़ा 28. फरेरा
5. बोरिया या बावरिया 17. गन्ढीला, गन्डील या गोन्दोला 29. सनहाई
6. बाजीगर 18. कबीरपंथी या जुलाहा 30. सनहाल
7. बाल्मीकी, चूहड़ा या भंगी 19. खटीक 31. संसोई
8. भंजड़ा 20. कोरी या कोली 32. सांसी, भेड़कूट या गनेश
9. चमार, जटिया चमार, रेहगड़,
रायगढ़, रामदासी या रविदासी 21. मरीजा या मरेचा 33. सपेला
10. चनाल 22. मजहबी 34. सरेडा
11. डागी 23. मेघ 35. सिकलीगर
12. दडे़ 24. नट 36. सिरकीबंद ।ञ्ज्।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
दसवीं अनुसूची
झ्र्धारा 28(1) देखिएट
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 का संशोधन
भाग 10 का लोप कर दिया जाएगा ।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
ग्यारहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 28(2) देखिएट
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) (संघ राज्यक्षेत्र) आदेश, 1951 का संशोधन
(1) पैरा 3 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :श्न्
3. अनुसूची के भाग 1 के सिवाय इस आदेश में किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1956 के प्रथम दिन से गठित उस संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश है, और अनुसूची के भाग 1 में किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन को यथाविद्यमान संघ राज्यक्षेत्र के रूप में गठित उस राज्यक्षेत्र के प्रति निर्देश है ।ञ्ज्।
(2) अनुसूची के भाग 1 में, श्न्
(क) समस्त संघ राज्यक्षेत्र मेंञ्ज् शब्दों के स्थान पर, 1. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 5 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों के सिवाय समस्त संघ राज्यक्षेत्र मेंञ्ज् अंक, शब्द और कोष्ठक प्रतिस्थापित किए जाएंगे; तथा
(ख) अन्त में निम्नलिखित जोड़ा जाएगा :श्न्
2. लाहौल और स्पिति जिले में :श्न्
1. गद्दी 2. स्वांगला 3. भोट या बोध ।ञ्ज् ।
बारहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 46 देखिएट
1. संविधान (राजस्व-वितरण) आदेश, 1965 का संशोधन
आदेश के पैरा 3 के उपपैरा (2) में सारणी के ठीक नीचे निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :श्न्
परन्तु आय पर करों के नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन के ठीक पहले यथाविद्यमान पंजाब राज्य को संदेय अंश का अर्थ उस तारीख से यह लगाया जाएगा कि वह हरियाणा राज्य और पंजाब राज्य तथा संघ को 37.38 : 54.84 : 7.78 के अनुपात में संदेय है :
परन्तु यह और कि संघ को आबंटनीय अंकुश उसके द्वारा प्रतिधारित किया जाएगा और वह भारत की संचित निधि का भाग समझा जाएगा ।ञ्ज् ।
2. संघ उत्पाद-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 का संशोधन
निम्नलिखित परन्तुक अधिनियम की धारा 3 में सारणी के ठीक पश्चात् अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :श्न्
परन्तु वितरणीय संघ-उत्पादन-शुल्कों के नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन के ठीक पहले यथाविद्यमान पंजाब राज्य को संदेय अंश का उस तारीख से यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह हरियाणा राज्य और पंजाब राज्य तथा संघ को 37.38 : 54.84 : 7.78 के अनुपात में संदेय है :
परन्तु यह और कि संघ को आबंटनीय अंश उसके द्वारा प्रतिधारित किया जाएगा और वह भारत की संचित निधि में से नहीं निकाला जाएगा ।ञ्ज् ।
3. अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम, 1957 का संशोधन
अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के पैरा 2 में सारणी के अन्त में निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :श्न्
परन्तु अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क के नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन के ठीक पहले यथाविद्यमान पंजाब राज्य को संदेय अंश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह हरियाणा राज्य और पंजाब राज्य तथा संघ को 37.38 : 54.84 : 7.78 के अनुपात में संदेय है :
परन्तु यह और कि संघ को आबंटनीय अंश उसके द्वारा प्रतिधारित किया जाएगा और भारत की संचित निधि में से नहीं निकाला जाएगा ।ञ्ज् ।
4. संपदा-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 का संशोधन
अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अन्त में निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :श्न्
परन्तु खण्ड (ख) के अधीन नवम्बर, 1966 के प्रथम दिन के ठीक पहले यथाविद्यमान पंजाब राज्य को संदेय अंश का उस तारीख से यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह हरियाणा राज्य और पंजाब राज्य तथा संघ को 37.38 : 54.84 : 7.78 के अनुपात में संदेय है :
परन्तु यह और कि संघ को आबंटित अंश उसके द्वारा प्रतिधारित किया जाएगा और वह भारत की संचित निधि का भाग समझा जाएगा ।ञ्ज् ।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
तेरहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 48 देखिएट
(1) चण्डीगढ़ की मलवहन स्कीम के लिए अर्जित भूमि :श्न्
क्रम संख्या ग्राम का नाम हदबस्त संख्या एकड़ों में क्षेत्र पंजाब सरकार की अधिसूचना जिसके अधीन अर्जित की गई
1 2 3 4 5
1. जगतपुर 261 4.58
तारीख 11 मई, 1960 की सी-3097-डब्लू-60/एक्स/4564
2. कम्बाली 225 4.18 तारीख 14 मार्च, 1966 की सी-47-(1)-डब्लू-1/7649
3. तरफ कुम्ब्रा 5 6.07
4. कुम्ब्रा 6 5.38
5. कुमबाला 226 20.28 तारीख 10 मई, 1962 की सी-2985-डब्लू-62/1/13254
6. चिल्ला 3 5.62 तारीख 11 मार्च, 1964 की सी-6718-डब्लू-63/1/6071
7. पापड़ी 269 5.21
8. मनौली 270 4.28
9. चाचो माजरा 268 8.52 तारीख 6/8 नवम्बर, 1962 की 10430-डब्लू-4 62/34079
10. मत्रान 267 2.78
11. बकरपुर 264 3.68
कुल योग 70.58
(2) सुखना झील के आवाह क्षेत्र में भूमि संरक्षण उपायों के लिए अर्जित भूमि :श्न्
क्रम संख्या ग्राम का नाम हदबस्त संख्या एकड़ों में क्षेत्र पंजाब सरकार की अधिसूचना जिसके अधीन अर्जित की गई
1 2 3 4 5
1. सुकेत्री 376 2452.07 तारीख 13 फरवरी, 1963 की 517-फट० 4/(63)/4741
2. मानकपुर (खोलगामा) 104 346.45 तारीख 15 मार्च, 1963 की 1789-फट० 4/63/898
3. कुरानवाला 105 461.00
1 2 3 4 5
4. धामला 122 198.94
5. दारा खुरानी 390 557.82
6. कनसील 354 2155.81
कुल योग 6172.09
(3) चण्डीगढ़ राजधानी परियोजना के ईंट भट्टे खड़े करने के लिए अर्जित भूमि :श्न्
क्रम संख्या ग्राम का नाम हदबस्त संख्या एकड़ों में क्षेत्र पंजाब सरकार की अधिसूचना जिसके अधीन अर्जित की गई
1 2 3 4 5
1. जुड़िया 379 68.93 तारीख 8 जनवरी, 1952 की सी-73-52/58
तारीख 21 जनवरी, 1956 की सी-504-56/6/526
तारीख 5 सितम्बर, 1960 की सी-1650-डब्लू-60/10/37469
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
चौदहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 58 देखिएट
पेन्शनों की बाबत दायित्व का प्रभाजन
1. पैरा 3 में वर्णित समायोजनों के अधीन रहते हुए, विद्यमान पंजाब राज्य द्वारा नियत दिन के पहले अनुदत्त पेन्शनों की बाबत उत्तरवर्ती राज्यों में से प्रत्येक अपने-अपने खजानों में से दी जाने वाली पेन्शनें देगा ।
2. उक्त समायोजनों के अधीन रहते हुए विद्यमान पंजाब राज्य के कार्यकलापों के सम्बन्ध में सेवा करने वाले उन अधिकारियों की पेंशनों के बारे में दायित्व जो नियत दिन के पहले निवृत्त होते हैं या सेवा निवृत्ति पूर्व छुट्टी पर चले जाते हैं किन्तु पेन्शनों के लिए जिनके दावे उस दिन के ठीक पहले बकाया है, पंजाब राज्य का दायित्व होगा ।
3. नियत दिन से प्रारम्भ होने वाली और 31 मार्च, 1967 को समाप्त होने वाली कालावधि की बाबत तथा प्रत्येक पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत पैरा 1 और 2 में निर्दिष्ट पेन्शनों के बारे में उस उत्तरवर्ती राज्यों को किए गए कुल संदायों की संगणना की जाएगी । पेन्शनों की बाबत विद्यमान पंजाब राज्य में दायित्व की उस कुल का उत्तरवर्ती राज्यों के बीच प्रभाजन जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा और अपने द्वारा देय अंश में से अधिक का संदाय करने वाले किसी उत्तरवर्ती राज्य की आधिक्य की रकम की प्रतिपूर्ति कम संदाय करने वाले उत्तरवर्ती राज्य या राज्यों द्वारा की जाएगी ।
4. नियत दिन के पहले अनुदत्त की गई और विद्यमान राज्य के राज्यक्षेत्र से बाहर किसी भी क्षेत्र में दी जाने वाली पेन्शनों के बारे में विद्यमान पंजाब राज्य का दायित्व, पैरा 3 के अनुसार किए जाने वाले समायोजनों के अधीन रहते हुए पंजाब राज्य का दायित्व होगा मानो ऐसी पेन्शनें पैरा 1 के अधीन पंजाब राज्य के किसी खजाने से ली गई हों ।
5. (1) विद्यमान पंजाब राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में नियत दिन के ठीक पहले सेवा करने वाले और उस दिन या उसके पश्चात् निवृत्त होने वाले अधिकारी की पेन्शन के बारे में दायित्व पेन्शन अनुदत्त करने वाले उत्तरवर्ती राज्य का दायित्व होगा, किन्तु किसी ऐसे अधिकारी को विद्यमान पंजाब राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा के कारण माना जाने वाला पेन्शन का प्रभाग उत्तरवर्ती राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में आबंटित किया जाएगा और पेन्शन अनुदत्त करने वाली सरकार, अन्य उत्तरवर्ती राज्यों में प्रत्येक राज्य से इस दायित्व का उसका अंश प्राप्त करने की हकदार होगी ।
(2) यदि ऐसा कोई अधिकारी नियत दिन के पश्चात् एक से अधिक उत्तरवर्ती राज्य के कार्यकलापों के सम्बन्ध में सेवा करता रहा हो तो सेवा अनुदत्त करने वाले राज्य से भिन्न उत्तरवर्ती राज्य, पेन्शन अनुदत्त करने वाली सरकार को ऐसी रकम देगा या देंगे जिसका नियत दिन के पश्चात् की उसकी सेवा के कारण या की जा सकने वाले पेन्शन के भाग का वही अनुपात हो जो प्रतिपूर्ति करने वाले राज्य के अधीन नियत दिन के पश्चात् की उसकी अर्हक सेवा का उस अधिकारी की उसकी पेन्शन के प्रयोजनार्थ परिकलित नियत दिन के पश्चात् की कुल सेवा का हो ।
6. इस अनुसूची में पेन्शन के प्रति निर्देश का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत पेन्शन के संराशीकृत मूल्य के प्रति निर्देश भी है ।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
पन्द्रहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 70 देखिएट
1. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
2. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव लैण्ड मार्गेज बैंक लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
3. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव सप्लाई एण्ड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
4. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव यूनियन लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
5. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव लेबर एण्ड कन्सट्रक्शन फेडरेशन लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
6. पंजाब स्टेट हैण्डलूम वीवर्स एपेक्स कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
7. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव शुगर मिल्स फेडरेशन लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
8. पंजाब स्टेट फेडरेशन आफ कन्स्यूमर्स कोआपरेटिव होलसेल स्टोर्स लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
9. पंजाब स्टेट कोआपरेटिव इन्डस्ट्रिल फेडरेशन लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
10. रोपड़ सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, रोपड़ ।
11. अम्बाला सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, अम्बाला सिटी ।
12. होशियारपुर सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, होशियारपुर ।
13. संगरूर सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, संगरूर ।
14. गुरदासपुर सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, गुरदासपुर ।
15. जोगिन्द्रा सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, नालागढ़ ।
16. होशियारपुर प्राइमरी लैण्ड मॉर्गेज बैंक लिमिटेड, होशियारपुर ।
17. गुरदासपुर प्राइमरी लैण्ड मॉर्गेज बैंक लिमिटेड, गुरदासपुर ।
18. सुनम प्राइमरी लैण्ड मॉर्गेज बैंक लिमिटेड, सुनम (संगरूर) ।
19. प्राइमरी कोआपरेटिव लैण्ड मॉर्गेज बैंक लिमिटेड, चण्डीगढ़ ।
20. रोपड़ सब डिविजन होलसेल कोआपरेटिव सप्लाई एण्ड मॉर्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, रोपड़ (अम्बाला) ।
21. होशियारपुर डिस्ट्रिक्ट होलसेल कोआपरेटिव सप्लाई एण्ड मॉर्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, होशियारपुर ।
22. गुरदासपुर डिस्ट्रिक्ट होलसेल कोआपरेटिव सप्लाई एण्ड मार्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, गुरदासपुर ।
23. संगरूर होलसेल कोआपरेटिव सप्लाई एण्ड मार्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, संगरूर ।
24. अम्बाला कोआपरेटिव लेबर एण्ड कन्सट्रक्शन यूनियन लिमिटेड, अम्बाला सिटी ।
25. गुरदासपुर कोआपरेटिव लेबर एण्ड कन्सट्रक्शन यूनियन लिमिटेड, गुरदासपुर ।
ट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठट्ठ
सोलहवीं अनुसूची
झ्र्धारा 77 देखिएट
संस्थाओं की अनुसूची जहां विद्यमान सुविधाएं जारी रखी जानी चाहिएं
1. भूमि उद्धरण सिंचाई और शक्ति अनुसंधान संस्थान, अमृतसर ।
2. जलीय अनुसंधान संस्थान, मलकपुर ।
3. पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय, फिल्लौर ।
4. अंगुलि छाप ब्यूरो, फिल्लौर ।
5. भर्तीकृत प्रशिक्षण केन्द्र, जहान खेलन ।
6. कान्स्टेबल उच्च प्रशिक्षण केन्द्र, अम्बाला ।
7. बेतार प्रशिक्षण केन्द्र, चन्डीगढ़ ।
8. न्याय संबंधी विज्ञान प्रयोगशाला, चन्ड़ीगढ़ ।
9. ग्राम सेवक प्रशिक्षण केन्द्र, नाभा ।
10. ग्राम सेवक प्रशिक्षण केन्द्र, बटाला ।
11. पंचायत सचिव प्रशिक्षण केन्द्र, राय, जिला रोहतक ।
12. दन्तचिकित्सा महाविद्यालय, अमृतसर ।
13. आयुर्वेदिक महाविद्यालय, पटियाला ।
14. पंजाब स्वास्थ्य विद्यालय, अमृतसर ।
15. यक्ष्मा केन्द्र, पटियाला यक्ष्मा स्वास्थ्य परिदर्शक कोर्स के लिए ।
16. पंजाब मानसिक अस्पताल, अमृतसर ।
17. यक्ष्मा स्वास्थ्य सदन (टी०बी० सेनेटोरियम), अमृतसर ।
18. यक्ष्मा स्वास्थ्य सदन टान्डा, जिला कांगड़ा ।
19. हार्डिंग स्वास्थ्य सदन, धरमपुर जिला शिमला ।
20. यक्ष्मा अस्पताल, हरमीटेज, संगरूर ।
21. बी०टी० और बी०एड० प्रशिक्षण महाविद्यालय, शिमला, धर्मशाला, जालन्धर, फरीदकोट और पटियाला ।
22. शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय, पटियाला ।
23. लड़कों का खेल-कूद महाविद्यालय, जालन्धर ।
24. महिलाओं का खेल-कूद महाविद्यालय, कुरूक्षेत्र ।
25. विक्रय वाणिज्य महाविद्यालय, पटियाला ।
26. जेल प्रशिक्षण केन्द्र, हिसार ।
27. सरकारी अंध संस्थान, पानीपत ।
28. वयस्क अंध प्रशिक्षण केन्द्र, सोनीपत ।
29. प्रशिक्षण एवं उत्पादन-केन्द्र तथा जे०बी०टी० प्रशिक्षण केन्द्र, गांधी वनिता आश्रम, जालन्धर ।
30. पश्चात्वर्ती देख-रेख गृह, अमृतसर ।
31. पश्चात्वर्ती देख-रेख गृह, मधुबन (करनाल) ।
32. संरक्षण गृह संगरूर ।
33. रासायनिक परीक्षक प्रयोगशाला, पटियाला ।
34. स्वास्थ्य विज्ञान और वैक्सीन संस्थान, पंजाब, अमृतसर ।
35. सरकारी प्रेस, चण्डीगढ़ ।
36. स्नातकोत्तर चिकित्सीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, चण्डीगढ़ ।
37. पंजाब इंजीनियरी महाविद्यालय, चण्डीगढ़ ।
38. वास्तुकला महाविद्यालय, चण्डीगढ़ ।
39. सामान्य अस्पताल (जनरल अस्पताल) चण्डीगढ़ ।
40. सरकारी महिला महाविद्यालय, चण्डीगढ़ ।
41. सरकारी पुरुष महाविद्यालय, चण्डीगढ़ ।
42. गृह-विज्ञान महाविद्यालय, चण्डीगढ़ ।

