भारतीय निर्यात-आयात बैंक अधिनियम, 1981
(1981 का अधिनियम संख्यांक 28)
[11 सितम्बर, 1981]
देश के अन्तरराष्ट्रीय व्यापार के संवर्धन की दृष्टि से निर्यातकर्ताओं
और आयातकर्ताओं को वित्तीय सहायता देने के लिए तथा माल
और सेवाओं के निर्यात और आयात के वित्त-पोषण में लगी
संस्थाओं के कार्यकरण का समन्वय करने के लिए प्रधान
वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करने के लिए और उनसे
सम्बद्ध तथा उनके आनुषंगिक विषयों के लिए
एक निगम की जो भारतीय निर्यात-आयात
बैंक के नाम से ज्ञात होगा,
स्थापना करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय निर्यात-आयात बैंक अधिनियम, 1981 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बोर्ड" से धारा 6 में निर्दिष्ट, निआ बैंक का निदेशक बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) विकास बैंक" से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अभिप्रेत है;
(ग) निआ बैंक" से धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय निर्यात-आयात बैंक अभिप्रेत है;
(घ) निर्यात" और आयात" से माल या सेवाओं का या दोनों का, भारत या किसी अन्य देश से क्रमशः निर्यात या उसमें आयात अभिप्रेत है;
(ङ) माल" के अन्तर्गत ठोस, द्रव या गैसीय अवस्था में सब पदार्थ, वस्तुएं और चीजें तथा ऊर्जा के सब रूप भी हैं;
(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ज) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन स्थापित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;
(झ) अनुसूचित बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में तत्समय सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत है;
(ञ) सेवा" के अन्तर्गत निम्नलिखित हैं: -
(i) किसी कार्य या परियोजना (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) या किसी क्रियाकलाप के प्रयोजनों के लिए कार्मिकों का (जिसके अन्तर्गत कुशल या अकुशल कर्मकार तथा तकनीकी या अन्य सेवाएं करने वाले व्यक्ति भी हैं) प्रबन्ध करना;
(ii) प्रौद्योगिकी का अन्तरण करना, जिसके अंतर्गत किसी पेटेन्ट, आविष्कार, माडल, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रसंस्करण या समरूप सम्पत्ति की बाबत अधिकारों, व्यवहार-ज्ञान, विशेषज्ञता या अन्य कौशल का अन्तरण करना या अन्तरण कराना भी है;
(iii) किसी विषय की बाबत कोई जानकारी, ब्लू प्रिन्ट, योजनाएं या सलाह देना; और
(iv) कोई अन्य साधन उपलब्ध कराना ।
अध्याय 2
भारतीय निर्यात-आयात बैंक की स्थापना और उसका निगमन
3. भारतीय निर्यात-आयात बैंक की स्थापना और उसका निगमन-(1) ऐसी तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक निगम की स्थापना की जाएगी जो भारतीय निर्यात-आयात बैंक के नाम से ज्ञात होगा ।
(2) निआ बैंक शाश्वत उत्तारधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा और इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उसे सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उस नाम से वह वाद ला सकेगा या उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(3) निआ बैंक का मुख्य कार्यालय मुम्बई में या अन्य ऐसे स्थान पर होगा जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
(4) निआ बैंक भारत में या भारत के बाहर ऐसे स्थानों पर, जो वह आवश्यक समझे, कार्यालय, शाखाएं या अभिकरण स्थापित कर सकेगा ।
4. प्राधिकृत पूंजी- [(1) निआ बैंक की प्राधिकृत पूंजी एक खरब रुपए होगी:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, उक्त पूंजी को उस रकम तक बढ़ा सकेगी जो वह समय-समय पर आवश्यक समझे ।]
(2) निआ बैंक की पुरोधृत पूंजी पूर्णतः केन्द्रीय सरकार द्वारा अभिदत्त की जाएगी ।
अध्याय 3
निआ बैंक का प्रबन्ध
5. प्रबन्ध-(1) निआ बैंक के कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबन्ध एक निदेशक बोर्ड में निहित होगा जो उन सब शक्तियों का प्रयोग तथा वे सब बातें और कार्य कर सकेगा जिनका निआ बैंक द्वारा प्रयोग किया जा सकता है या जिन्हें निआ बैंक कर सकता है ।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, -
(क) यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक है या यदि वह अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक दोनों पदों को धारण करता है, तो अध्यक्ष, या
(ख) यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक नहीं है, या यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक होते हुए अनुपस्थित है, तो प्रबन्ध निदेशक,
को भी निआ बैंक के कार्यकलाप और कारबार के साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबन्ध की शक्तियां प्राप्त होंगी और वह उन सभी शक्तियों का प्रयोग और वे सब कार्य और बातें कर सकेगा जिनका निआ बैंक द्वारा प्रयोग किया जा सकता है और जिन्हें निआ बैंक कर सकता है ।
(3) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड अपने कृत्यों का निर्वहन करने में, लोक हित का सम्यक् ध्यान रखते हुए कारबार के सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करेगा ।
(4) इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने में निआ बैंक का, लोक हित विषयक नीति के विषयों में, मार्गदर्शन ऐसे निदेशों से होगा जो केन्द्रीय सरकार उसे लिखित रूप में दे ।
6. बोर्ड का गठन-(1) निआ बैंक का निदेशक बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -
(क) अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा:
परन्तु एक ही व्यक्ति को अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक दोनों के रूप में कृत्य करने के लिए नियुक्त किया जा सकेगा;
[(कक) दो पूर्णकालिक निदेशक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे;]
(ख) एक निदेशक जो रिजर्व बैंक द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;
(ग) एक निदेशक जो विकास बैंक द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;
(घ) एक निदेशक जो एक्सपोर्ट क्रेडिट एण्ड गारण्टी कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में एक सरकारी कम्पनी है, नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;
(ङ) बारह से अनधिक निदेशक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे, जिनमें से-
(i) पांच निदेशक केन्द्रीय सरकार के पदधारी होंगे;
(ii) तीन से अनधिक निदेशक अनुसूचित बैंकों से होंगे;
(iii) चार से अनधिक निदेशक ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें निर्यात या आयात अथवा उसके वित्त-पोषण का विशेष ज्ञान या वृत्तिक अनुभव हो ।
(2) अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक 1[या पूर्णकालिक निदेशक] [पांच वर्ष] से अनधिक ऐसी अवधि तक पद धारण करेंगे जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे और इस प्रकार नियुक्त कोई व्यक्ति पुनर्नियुक्ति का पात्र होगा ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार को, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबन्ध निदेशक 1[या पूर्णकालिक निदेशक] की पदावधि को, उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पूर्व किसी समय, उसे तीन मास से अन्यून की लिखित सूचना देकर या उसके बदले में तीन मास का वेतन और भत्ते देकर समाप्त करने का अधिकार होगा और, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबन्ध निदेशक 1[या पूर्णकालिक निदेशक] को भी, उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पूर्व किसी समय अपना पद, केन्द्रीय सरकार को तीन मास से अन्यून की लिखित सूचना देकर या उसके बदले में तीन मास का वेतन और भत्ते देकर, त्यागने का अधिकार होगा ।
(4) अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक 1[या पूर्णकालिक निदेशक] ऐसे वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएं ।
(5) केन्द्रीय सरकार किसी भी समय, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबन्ध निदेशक 1[या पूर्णकालिक निदेशक] को उसके पद से हटा सकेगी:
परन्तु किसी व्यक्ति को इस उपधारा के अधीन अपने पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे उसके हटाए जाने के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर न दे दिया गया हो ।
[(6) उपधारा (7) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (ङ) के अधीन नामनिर्देशित कोई निदेशक जो सरकार का पदधारी नहीं है या रिजर्व बैंक या विकास बैंक या उक्त निर्यात प्रत्यय और गारंटी निगम लिमिटेड या किसी अनुसूचित बैंक का अधिकारी नहीं है, ऐसी अवधि तक जो तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी, जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या उसका नामनिर्देशन करने वाला प्राधिकारी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ॥। पद धारण और वह पुनर्नामनिर्देशन के लिए पात्र होगा :
परंतु कोई ऐसा निदेशक छह वर्ष से अधिक की अवधि तक निरंतर पद धारण नहीं करेगा ।]
(7) इस धारा के अधीन नामनिर्दिष्ट कोई ॥। निदेशक, उसे नामनिर्दिष्ट करने वाले प्राधिकारी के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
(8) बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समयों और स्थानों पर होंगे और वह अपने अधिवेशनों में कार्य करने के बारे में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।
(9) अध्यक्ष, अथवा यदि वह किसी कारण से बोर्ड के अधिवेशन में हाजिर होने में असमर्थ है तो प्रबन्ध निदेशक, या अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक दोनों के अधिवेशनों में हाजिर होने में असमर्थ होने की दशा में, अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट कोई अन्य निदेशक, और ऐसे नामनिर्देशन के अभाव में उपस्थित निदेशकों द्वारा अपने में से निर्वाचित कोई निदेशक अधिवेशन का सभापतित्व करेगा ।
(10) बोर्ड के किसी अधिवेशन में उठने वाले सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले निदेशकों के बहुमत से किया जाएगा और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष का, या उसकी अनुपस्थिति में प्रबन्ध निदेशक का, या अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक दोनों की अनुपस्थिति में, पीठासीन व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा ।
(11) उपधारा (10) में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय बोर्ड के हर निदेशक को एक मत देने का अधिकार होगा ।
7. समितियां-(1) बोर्ड, चाहे तो पूर्णतया निदेशकों से या पूर्णतया अन्य व्यक्तियों से, या भागतः निदेशकों से और भागतः अन्य व्यक्तियों से मिलकर बनी ऐसी समितियां ऐसे प्रयोजन या प्रयोजनों के लिए गठित कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन गठित किसी समिति के अधिवेशन ऐसे समयों और स्थानों पर होंगे और वह अपने अधिवेशन में कार्य करने के बारे में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी जो विहित किए जाएं ।
8. निदेशकों और समितियों के सदस्यों की फीसें और भत्ते-निदेशकों और समिति के सदस्यों को बोर्ड के या इस अधिनियम के अनुसरण में गठित किसी समिति के अधिवेशनों में हाजिर होने के लिए और निआ बैंक का कोई अन्य कार्य करने के लिए ऐसी फीसें और भत्ते दिए जाएंगे जो विहित किए जाएं:
परन्तु अध्यक्ष को, यदि उसे पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है, या ऐसे प्रबन्ध निदेशक [या पूर्णकालिक निदेशक] को या किसी अन्य निदेशक या सदस्य को, जो सरकार, रिजर्व बैंक या विकास बैंक का अधिकारी है, कोई फीस संदेय नहीं होगी ।
9. निरर्हता-कोई ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन गठित बोर्ड का निदेशक नहीं होगा, -
(क) जो दिवालिया न्यायनिर्णीत है या किसी समय दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है, या
(ख) जो विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा वैसा घोषित किया गया है, या
(ग) जो ऐसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है या ठहराया जा चुका है जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है, या
(घ) जिसने केन्द्रीय सरकार की राय में, निदेशक के रूप में अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका बोर्ड में बना रहना जनसाधारण के हितों के लिए अपायकर है, या
(ङ) जिसे किसी कारण से बोर्ड से हटा दिया गया है ।
अध्याय 4
निआ बैंक का कारबार
10. निआ बैंक का कारबार-(1) निआ बैंक निर्यात या आयात के प्रयोजनों के लिए भारत में या उसके बाहर उधार और अग्रिम धन या तो स्वयं या भारत में या उसके बाहर के किसी बैंक या वित्तीय संस्था के साथ साझेदारी में दे सकेगा और निर्यात और आयात के वित्त-पोषण में लगी संस्थाओं के कार्यकरण के समन्वय के लिए प्रधान वित्तीय संस्था के रूप में भी ऐसी रीति से कार्य करेगा जैसी वह उचित समझे ।
(2) निआ बैंक निम्नलिखित में से सभी या किसी भांति का कारबार भी चला सकेगा और कर सकेगा, अर्थात्: -
(क) किसी अनुसूचित बैंक या किसी अन्य बैंक या वित्तीय संस्था को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचित की गई है, निर्यात या आयात के प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा दिए गए उधारों और अग्रिम धनों की पुनर्वित्तपूर्ति के रूप में उधार और अग्रिम धन देना;
(ख) निर्यात या आयात में लगी किसी कम्पनी के स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों या डिबेन्चरों की पुरोधृति की हामीदारी करना;
(ग) भारत में या उसके बाहर अपने द्वारा या भारत में या उसके बाहर किसी सरकार, बैंक या वित्तीय संस्था के साथ साझेदारी में कोई बोली बन्धपत्र या प्रत्याभूति जारी करना;
(घ) निर्यात या आयात से सम्बन्धित संव्यवहारों से उद्भूत विनिमय पत्रों या वचनपत्रों का भारत में या उसके बाहर प्रतिग्रहण, संग्रहण, मितिकाटे पर भुगतान, पुनः मितिकाटे पर भुगतान, क्रय, विक्रय या परक्रामण करना और ऐसे विनिमय पत्रों या वचनपत्रों के प्रति भारत में या उसके बाहर उधार और अग्रिम धन देना;
(ङ) प्रत्ययपत्रों का अनुदान, खोलना, जारी करना, पुष्टि करना या पृष्ठांकन करना और उनके अधीन लिखे गए बिलों और अन्य दस्तावेजों का परक्रामण या संग्रहण;
(च) निर्यात या आयात के प्रयोजनों के लिए सरकार और सरकार के बीच के और वाणिज्यिक उधार के समुच्चय को अन्तर्वलित करने वाला कोई संव्यवहार हाथ में लेना;
(छ) निर्यात या आयात के प्रयोजनों के लिए किसी विदेशी राज्य की सरकार को या भारत के बाहर की किसी वित्तीय संस्था या व्यक्ति को प्रत्यय की सीमा बांधना;
(ज) किसी भारतीय संयुक्त उद्यम के लिए भारत के बाहर उधार और अग्रिम धन देना;
(झ) भारत के बाहर के किसी देश में किसी संयुक्त उद्यम में अपने साधारण अभिदाय के सम्बन्ध में भारत के किसी व्यक्ति को उधार और अग्रिम धन देना;
(ञ) पट्टे के आधार पर मशीनरी और उपस्करों के निर्यात या आयात का वित्त-पोषण करना;
(ट) भारत से बाहर किसी देश के किसी विकास बैंक या निर्यात-आयात बैंक के स्टाकों, शेयरों, बन्धपत्रों या डिबेंचरों में अभिदाय या विनिधान करना या उनका क्रय करना;
(ठ) विदेशी मुद्रा का क्रय या विक्रय करना या उसमें ऐसे अन्य कारबार करना जो उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों;
(ड) भारत में या उसके बाहर के किसी बैंक में कोई खाता खोलना या भारत में या उसके बाहर के किसी बैंक या अन्य संस्था के साथ किसी अभिकरण की व्यवस्था करना या उसके अभिकर्ता या प्रतिस्थानी के रूप में कार्य करना;
(ढ) अपने द्वारा दिए गए उधारों और अग्रिम धनों से संबंधित किसी लिखत को प्रतिफल लेकर अन्तरित करना;
(ण) साझेदारी-प्रमाणपत्र जारी करना;
(त) उस विस्तार तक स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों या डिबेंचरों में अभिदाय या विनिधान करना या उनका क्रय करना जहां तक धारणाधिकार, गिरवी या अन्य संविदात्मक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए आवश्यक हो;
(थ) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में संवर्धन और विकास के सम्बन्ध में अनुसंधान सर्वेक्षण, तकनीकी-आर्थिक या अन्य अध्ययन हाथ में लेना और उसका वित्त-पोषण करना;
(द) निर्यात या आयात के लिए किसी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय सहायता का उपबन्ध करना;
(ध) निर्यातोन्मुखी समुत्थानों की योजना बनाना, उनका संवर्धन, विकास और वित्त-पोषण करना;
(न) अपने कृत्यों के पालन के लिए समनुषंगियों की स्थापना और उनका संचालन करना;
(प) केन्द्रीय सरकार, किसी राज्य सरकार, रिजर्व बैंक, विकास बैंक या किसी अन्य व्यक्ति के, जिसे केन्द्रीय सरकार प्राधिकृत करे, अभिकर्ता के रूप में कार्य करना;
(फ) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार की बाबत बाजार या प्रत्यय सम्बन्धी जारकारी का संग्रह, संकलन और प्रसार करना;
(ब) किसी अन्य प्रकार का कारबार करना जिसे केन्द्रीय सरकार प्राधिकृत करे ;
(भ) साधारणतया, ऐसे अन्य कार्य या बातें करना जो इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग या उसके कर्तव्यों के निर्वहन की आनुषंगिक या पारिणामिक हों जिनके अन्तर्गत उसकी किन्हीं आस्तियों का विक्रय या अन्तरण है ।
(3) निआ बैंक उपधारा (1) और (2) में वर्णित सेवाओं में से किसी के प्रतिफलस्वरूप ऐसा कमीशन, दलाली, ब्याज, पारिश्रमिक या फीसें ले सकेगा जिसका करार हो ।
(4) निआ बैंक स्वयं अपने बन्धपत्रों या डिबेंचरों की प्रतिभूति पर कोई उधार या अग्रिम धन या कोई अन्य वित्तीय सौकर्य प्रदान नहीं करेगा ।
अध्याय 5
निआ बैंक के साधन
11. केन्द्रीय सरकार द्वारा उधार दिया जाना-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, निआ बैंक को-
(क) बीस करोड़ रुपए का उधार सवा पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज पर दे सकेगी जो बराबर की पन्द्रह वार्षिक किस्तों में प्रतिसंदेय होगा ये किस्तें उधार की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह वर्ष की अवधि के अवसान पर प्रारम्भ होंगी; और
(ख) उधार के रूप में ऐसी अतिरिक्त धनराशियां, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर दे सकेगी, जो करार पाई जाएं:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, निआ बैंक द्वारा अपने से प्रार्थना की जाने पर, खंड (क) के अधीन किस्तों की संख्या बढ़ा सकेगी या किसी किस्त की रकम परिवर्तित कर सकेगी या उस तारीख को बदल सकेगी जिसको कोई किस्त संदेय है ।
12. निआ बैंक द्वारा उधार लिया जाना और निक्षेपों का प्रतिग्रहण-(1) निआ बैंक इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के प्रयोजनों से, -
(क) केन्द्रीय सरकार की प्रत्याभूति के सहित या उससे रहित बन्धपत्र और डिबेंचर पुरोधृत कर सकेगा, और उनका विक्रय कर सकेगा;
(ख) रिजर्व बैंक से-
(i) ऐसे स्टाकों, निधियों और (स्थावर सम्पत्ति से भिन्न) प्रतिभूतियों की प्रतिभूति पर, जिनमें न्यास-धन विनिहित करने के लिए कोई न्यासी भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा प्राधिकृत है, ऐसा धन उधार ले सकेगा जो मांग की जाने पर, या इस प्रकार धन उधार लिए जाने की तारीख से नब्बे दिन से अनधिक की नियत अवधियों के अवसान पर प्रतिसंदेय हो;
(ii) ऐसे विनिमयपत्रों या वचनपत्रों पर धन उधार ले सकेगा जो सद्भाविक वाणिज्यिक या व्यापारिक संव्यवहारों में लिखे जाएं, जिन पर दो या अधिक मान्य हस्ताक्षर हों और जो उधार लिए जाने की तारीख से पांच वर्ष के भीतर परिपक्व होते हों;
(iii) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ग के अधीन स्थापित राष्ट्रीय औद्योगिक प्रत्यय (दीर्घकालिक प्रवर्तन) निधि में से, उस धारा में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए धन उधार ले सकेगा;
(ग) भारत में के ऐसे अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से धन उधार ले सकेगा जिसे केन्द्रीय सरकार, साधारणतया या विशेषतया, अनुमोदित करे;
(घ) ऐसी कालावधि के अवसान के पश्चात्, जो निक्षेप किए जाने की तारीख से बारह मास से कम की नहीं होगी, ऐसे निबन्धनों पर, जो रिजर्व बैंक द्वारा, साधारणतया या विशेषतया, अनुमोदित किए जाएं, प्रतिसंदेय निक्षेप प्रतिगृहीत कर सकेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, निआ बैंक द्वारा अपने से प्रार्थना की जाने पर, उस बैंक द्वारा पुरोधृत बन्धपत्रों और डिबेंचरों के मूलधन के प्रतिसंदाय और ऐसी दर से, जो केन्द्रीय सरकार नियत करे, ब्याज के संदाय की बाबत प्रत्याभूति दे सकेगी ।
13. विदेशी करेंसी में उधार-विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) में या विदेशी मुद्रा से सम्बद्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में किसी बात के होते हुए भी, निआ बैंक, इस अधिनियम के अधीन उधार और अग्रिम धन देने के प्रयोजनार्थ, केन्द्रीय सरकार की पूर्व सम्मति से किसी विदेशी राज्य या किसी विदेश में के किसी बैंक या वित्तीय संस्था से या अन्यथा, विदेशी करेंसी उधार ले सकेगा ।
14. निआ बैंक को अनुदान, संदान, आदि-निआ बैंक भारत में या उसके बाहर सरकार या किसी अन्य स्रोत से दान, अनुदान, संदान या उपकृति प्राप्त कर सकेगा ।
अध्याय 6
निर्यात विकास निधि
15. निर्यात विकास निधि-निआ बैंक ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे, एक विशेष निधि स्थापित करेगा जिसका नाम निर्यात विकास निधि होगा ।
16. निर्यात विकास निधि में जमा किया जाना-निर्यात विकास निधि में निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, -
(क) उस निधि के प्रयोजनार्थ भारत में या उसके बाहर सरकार से या किसी अन्य स्रोत से उधार, दान, अनुदान, संदान या उपकृति के रूप में प्राप्त सभी रकमें;
(ख) उस निधि से दिए गए उधारों, अग्रिम धनों या अन्य सुविधाओं के बारे में प्रतिसंदाय या वसूलियां;
(ग) उस निधि में से किए गए विनिधानों से होने वाली आय या लाभ; और
(घ) धारा 17 के उपबन्धों के अनुसार उस निधि के उपयोजन से ब्याज के रूप में या अन्यथा प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली आय ।
17. निर्यात विकास निधि का उपयोग-(1) जहां निआ बैंक ऐसा करना आवश्यक या वांछनीय समझे वहां वह उपधारा (2) और (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, निर्यात विकास निधि में से धारा 10 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (थ) या खंड (द) या खंड (ध) या खंड (ब) या खंड (भ) के अधीन किसी उधार या अग्रिम के अनुदान मद्धे या उसके फलस्वरूप अथवा उसके अधीन कोई ठहराव करने के मद्धे या उसके फलस्वरूप कोई रकम निर्यात विकास निधि में से संवितरित या व्यय कर सकेगा :
परन्तु निआ बैंक ऐसा उधार या अग्रिम देने या कोई ऐसा ठहराव करने से पहले केन्द्रीय सरकार का पूर्वानुमोदन अभिप्राप्त करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार का अनुमोदन मांगने के पहले निआ बैंक इस बारे में अपना समाधान कर लेगा कि यह सम्भावना नहीं है कि बैंककारी या अन्य वित्तीय संस्थाएं या अन्य अभिकरण अपने कारबार के मामूली अनुक्रम में ऐसा उधार या अग्रिम देंगे अथवा कोई ऐसा ठहराव करेंगे ।
(3) केन्द्रीय सरकार अपना अनुमोदन देने के पहले इस बारे में अपना समाधान कर लेगी कि ऐसा उधार या अग्रिम धन या ठहराव देश के अन्तरराष्ट्रीय व्यापार के हित में, पूर्विकता के आधार पर, आवश्यक है ।
(4) शंकाओं के निराकरण के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा की किसी भी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह निआ बैंक को, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के बिना, धारा 10 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के खण्ड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (थ) या खंड (द) या खंड (ध) या खंड (ब) या खंड (भ) के अधीन कोई उधार या अग्रिम देने या कोई ठहराव करने से उस दशा में प्रवारित करती है जबकि उसके बारे में कोई रकम निर्यात विकास निधि से संवितरित या व्यय नहीं की जानी है ।
18. निर्यात विकास निधि के प्रति विकलन-(1) निर्यात विकास निधि के प्रति निम्नलिखित का विकलन किया जाएगा, अर्थात्: -
(क) ऐसी रकमें जो धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन समय-समय पर संवितरित या व्यय की जाएं;
(ख) ऐसी रकमें जो उस निधि के प्रयोजनों के लिए प्राप्त उधारों से सम्बन्धित दायित्वों के निर्वहन के लिए अपेक्षित हों;
(ग) उस निधि में से किए गए विनिधान के कारण उद्भूत होने वाली कोई हानि; और
(घ) निधि के प्रशासन और उपयोजन से या उनके सम्बन्ध में उद्भूत होने वाला ऐसा व्यय, जो बोर्ड द्वारा अवधारित किया जाए ।
(2) उपधारा (1) में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय, कोई रकम निर्यात विकास निधि के प्रति विकलित नहीं की जाएगी ।
19. निर्यात विकास निधि का लेखा और लेखापरीक्षा-(1) निर्यात विकास निधि का तुलनपत्र और लेखा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तैयार किया जाएगा जो विहित की जाए ।
(2) बोर्ड निर्यात विकास निधि की बहियों और लेखा को प्रतिवर्ष 31 दिसम्बर को [या ऐसी अन्य तारीख को जो केंन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे] बंद और संतुलित कराएगा:
1 [परंतु केंद्रीय सरकार, इस उपधारा के अधीन, एक लेखा अवधि से दूसरी लेखा अवधि को संक्रमण को सुकर बनाने की दृष्टि से, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो वह संबंधित वर्षों की बाबत बहियों या लेखाओं को बंद और संतुलित करने के लिए, या उससे संबंधित अन्य विषयों के लिए, आवश्यक या समीचीन समझती है ।]
(3) निर्यात विकास निधि की लेखापरीक्षा, केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 24 के अधीन नियुक्त किए गए एक या अधिक लेखापरीक्षकों द्वारा की जाएगी जो उसकी बाबत पृथक् रिपोर्ट देंगे ।
(4) धारा 24 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4) और उपधारा (6) के उपबंध यावत्शक्य, निर्यात विकास निधि की लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में लागू होंगे ।
(5) निआ बैंक तुलनपत्र तथा लेखा की एक प्रति और साथ में लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट की एक प्रति और सुसंगत वर्ष के दौरान निधि की संक्रिया की बाबत एक रिपोर्ट उस तारीख से जिसको निर्यात विकास निधि का लेखा बन्द और संतुलित किया जाता है चार मास के भीतर, केन्द्रीय सरकर को देगा तथा केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा उनके प्राप्त हो जाने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
20. निर्यात विकास निधि का समापन-निर्यात विकास निधि को, केन्द्रीय सरकार के आदेश से और ऐसी रीति से ही, जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, बंद या परिसमापित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
अध्याय 7
साधारण निधि, लेखा और लेखापरीक्षा
21. साधारण निधि-निआ बैंक की ऐसी सभी प्राप्तियां जो उनसे भिन्न हैं जिन्हें इस अधिनियम के अधीन निर्यात निधि में जमा करना है, एक निधि में जमा की जाएंगी जिसे साधारण निधि कहा जाएगा और निआ बैंक द्वारा किए गए ऐसे सभी संदाय, जो उनसे भिन्न हैं, जिन्हें निर्यात विकास निधि के प्रति विकलित किया जाना है, साधारण निधि में से किए जांएगे ।
22. लेखा और तुलनपत्र तैयार करना-(1) निआ बैंक का तुलनपत्र और लेखा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तैयार किया जाएगा जो विहित की जाए ।
(2) बोर्ड, निआ बैंक की लेखा बहियों और लेखा को प्रति वर्ष 31 दिसम्बर को [ऐसी अन्य तारीख को जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करेट बंद और संतुलित कराएगा:
1[परंतु केंद्रीय सरकार, इस उपधारा के अधीन, एक लेखा अवधि से दूसरी लेखा अवधि को संक्रमण को सुकर बनाने की दृष्टि से राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो वह संबंधित वर्षों की बाबत बहियों या लेखाओं को बंद और संतुलित करने के लिए, या उससे संबंधित अन्य विषयों के लिए, आवश्यक या समीचीन समझती है ।]
23. साधारण निधि को प्रोद्भूत होने वाले लाभों का व्ययन-(1) निआ बैंक एक आरक्षित निधि की स्थापना कर सकेगा जिसमें साधारण निधि को प्रोद्भूत होने वाले वार्षिक लाभों में से ऐसी राशियां, जो वह बैंक ठीक समझे, अंतरित की जा सकेंगी ।
(2) डूबंत और शंकास्पद ऋणों, आस्तियों के अवक्षयण और उन सब बातों के लिए जिनके लिए उपबन्ध आवश्यक या समीचीन हो, या जिनके लिए बैंककारों द्वारा प्रायः उपबंध किया जाता है और उपधारा (1) में निर्दिष्ट आरक्षित निधि के लिए उपबंध करने के पश्चात् निआ बैंक, शुद्ध लाभों का अतिशेष, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित करेगा ।
24. लेखापरीक्षा-(1) निआ बैंक के लेखा की लेखापरीक्षा, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 226 की उपधारा (1) के अधीन लेखापरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित लेखापरीक्षकों द्वारी की जाएगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी अवधि के लिए और ऐसे पारिश्रमिक पर नियुक्त किए जांएगे जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
(2) लेखापरीक्षकों को निआ बैंक के वार्षिक तुलनपत्र की एक प्रति दी जाएगी और उनका यह कर्तव्य होगा कि वे उससे संबंधित लेखा और वाउचरों सहित उसकी परीक्षा करें और उन्हें निआ बैंक द्वारा रखी गई सभी बहियों की एक सूची परिदत्त की जाएगी और निआ बैंक की बहियां, लेखा, वाउचर और अन्य दस्तावेजें सब युक्तियुक्त समयों पर उनकी पहुंच में होंगे ।
(3) लेखापरीक्षक, ऐसे लेखा के संबंध में निआ बैंक के किसी निदेशक या अधिकारी या अन्य कर्मचारी की परीक्षा कर सकेंगे और बोर्ड से या निआ बैंक के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से ऐसी जानकारी और स्पष्टीकरण मांगने के हकदार होंगे जो वे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक समझें ।
(4) लेखापरीक्षक, अपने द्वारा परीक्षित वार्षिक तुलनपत्र और लेखा के बारे में निआ बैंक को रिपोर्ट देंगे और ऐसी हर रिपोर्ट में वे यह कथन करेंगे कि क्या उनकी राय में, तुलनपत्र सब आवश्यक विशिष्टियों से युक्त, पूरा और ठीक तुलनपत्र है और ऐसे उचित रूप में तैयार किया गया है कि उससे निआ बैंक के कामकाज की सच्ची और यथार्थ स्थिति प्रदर्शित होती है और यदि उन्होंने बोर्ड से या निआ बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी से कोई जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा था तो क्या वह दिया गया है और क्या वह समाधानप्रद है ।
(5) निआ बैंक, अपने तुलनपत्र और लेखा की एक प्रति और साथ में लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट की एक प्रति और सुसंगत वर्ष के दौरान निआ बैंक के कामकाज की रिपोर्ट, वार्षिक लेखा के बंद और संतुलित किए जाने की तारीख से चार मास के भीतर केन्द्रीय सरकार को देगा और केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा उनके प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
(6) पूर्वगामी उपधाराओं की किसी बात पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार, भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को, निआ बैंक के लेखाओं की परीक्षा करने और उनकी बाबत रिपोर्ट देने के लिए, किसी भी समय नियुक्त कर सकेगी और ऐसी परीक्षा तथा ऐसी रिपोर्ट के संबंध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को निआ बैंक द्वारा संदेय होगा ।
25. व्यावृत्ति-धारा 19 की उपधारा (4) में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय, इस अध्याय में अन्तर्विष्ट कोई बात निर्यात विकास निधि को लागू नहीं होगी ।
अध्याय 8
विकास बैंक के कारबार के भाग का अन्तरण
26. विकास बैंक के कारबार के भाग का अन्तरण-(1) उस तारीख को, जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे, विकास बैंक के सभी कारबार, सम्पत्ति, आस्तियां और दायित्व, अधिकार, हित, विशेषाधिकार और बाध्यताएं, चाहे वे जिस प्रकार की हों, जहां तक उनका संबंध उस बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से है, निआ बैंक को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निआ बैंक को अन्तरित और उसमें निहित किए जाने के लिए, निआ बैंक, विकास बैंक को ऐसी रकम ऐसी रीति से और उतनी किस्तों में संदाय करेगा जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे ।
(3) विकास बैंक की सभी संविदाएं, विलेख, बन्धपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व के अनुदान और अन्य लिखतें, चाहे वे जिस प्रकार की हों, जिनका सम्बन्ध उस बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से है और जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट तारीख से ठीक पूर्व विद्यमान है या प्रभावशील है और जिनकी बाबत उक्त बैंक एक पक्षकार है या जो उस बैंक के पक्ष में हैं-
(क) यदि वे अनन्य रूप से उस बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से सम्बन्धित हैं तो, यथास्थिति, निआ बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी तथा उन्हें पूर्णतः और प्रभावी रूप से वैसे ही प्रवृत्त किया जा सकेगा और उनकी बाबत, वैसे ही कार्रवाई की जा सकेगी, मानो उनमें विकास बैंक की बजाय निआ बैंक पक्षकार था या मानो वे निआ बैंक के पक्ष में जारी की गई थीं; और
(ख) यदि वे विकास बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से ही सम्बन्धित नहीं हैं किन्तु उस बैंक के किन्हीं अन्य कृत्यों से भी संबंधित हैं, जो विकास बैंक और निआ बैंक दोनों ही के विरुद्ध या उनके पक्ष में पूर्ण प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी तथा वे पूर्णतः और प्रभावी रूप से वैसे ही प्रवृत्त की जा सकेंगी या उनकी बाबत वैसे ही कार्रवाई की जा सकेगी मानो विकास बैंक के अतिरिक्त निआ बैंक भी उनमें एक पक्षकार था या मानो वे विकास बैंक के ही नहीं बल्कि निआ बैंक के पक्ष में भी जारी की गई थीं ।
(4) यदि उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट तारीख को विकास बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही लम्बित है तो न ही उसका उपशमन होगा, न उसे बन्द किया जाएगा अथवा न ही विकास बैंक के कारबार के निआ बैंक को अन्तरित किए जाने के फलस्वरूप या इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, -
(क) जहां वह अनन्य रूप से विकास बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से सम्बन्धित है वहां उसे निआ बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, आगे चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी; और
(ख) जहां वह विकास बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से ही सम्बन्धित नहीं है किन्तु उस बैंक के किन्हीं अन्य कृत्यों से भी सम्बन्धित है, वहां उसे विकास बैंक और निआ बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध या यदि केन्द्रीय सरकार लिखित रूप में विशेष आदेश द्वारा ऐसा निदेश करे उक्त दोनों बैंकों में से ऐसे एक बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, चालू रखी जा सकेगी, आगे चलाई जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी ।
(5) यदि कोई ऐसा प्रश्न उठता है कि उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट कोई संविदा, विलेख, बन्धपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व का अनुदान या अन्य लिखत या उपधारा (4) में निर्दिष्ट कोई वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही विकास बैंक के निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से सम्बन्धित है या अनन्य रूप से सम्बन्धित है, तो उसे विनिश्चय के लिए केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।
(6) इस धारा के उपबन्ध भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) या किसी अन्य विधि या उक्त अधिनियम या अन्य विधि के आधार पर विधि का बल रखने वाली किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
अध्याय 9
प्रकीर्ण
27. निआ बैंक के कर्मचारिवृन्द-(1) निआ बैंक उतने अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जितने वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक या वांछनीय समझे और वह उनकी नियुक्ति तथा सेवा के निबन्धन और शर्तें अवधारित कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विकास बैंक के ऐसे कर्मचारिवृन्द की सेवाओं का, जिन्हें निर्यात वित्तपोषण कृत्यों से संबंधित अनुभव है, ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जिन पर विकास बैंक और निआ बैंक के बीच करार हो जाए, उपयोग करना निआ बैंक के लिए और उपलब्ध कराना, विकास बैंक के लिए विधिपूर्ण होगा ।
(3) निआ बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण, सेवा की शर्तें और निबंधन तथा उनके फायदे के लिए भविष्य निधि या किसी अन्य निधि की स्थापना करना और उसे बनाए रखना, इस प्रकार होगा, जो विहित किया जाए ।
28. शक्तियों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, निआ बैंक के किसी निदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियां और कृत्य, जो उसे आवश्यक प्रतीत हों, ऐसी शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
29. विवरणियां-निआ बैंक, केन्द्रीय सरकार को समय-समय पर ऐसी विवरणियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार अपेक्षा करे ।
30. विश्वसनीयता और गोपनीयता की बाबत बाध्यता-(1) इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा जैसा अन्यथा अपेक्षित है उसके सिवाय, निआ बैंक अपने ग्राहकों के सम्बन्ध में या उनके कार्यकलापों के सम्बन्ध में कोई जानकारी तब के सिवाय प्रकट नहीं करेगा जबकि परिस्थितियां ऐसी हों जिनमें विधि या बैंककारों की रूढ़िगत पद्धतियों और प्रथाओं के अनुसार निआ बैंक के लिए ऐसी जानकारी प्रकट करना आवश्यक या समुचित हो ।
(2) निआ बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, विकास बैंक या किसी अनुसूचित बैंक या ऐसी अन्य वित्तीय संस्था से या को, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचित करे, प्रत्यय विषयक जानकारी या अन्य जानकारी जो उस प्रयोजन के लिए उपयुक्त समझी जाए, ऐसी रीति से और ऐसे समयों पर, जो वह ठीक समझे, संगृहीत या प्रस्तुत करेगा ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी" पद का वही अर्थ होगा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45क के खंड (ग) में है किन्तु यह इस उपांतरण के अधीन रहते हुए होगा कि उसमें निर्दिष्ट बैंककारी कम्पनी" से विकास बैंक, कोई अनुसूचित बैंक या पूर्वोक्त कोई अन्य वित्तीय संस्था अभिप्रेत होगी ।
(3) निआ बैंक या विकास बैंक का प्रत्येक निदेशक, समिति का सदस्य, लेखापरीक्षक या अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसकी सेवाओं का उपयोग इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन निआ बैंक द्वारा किया जाता है, अपना कार्यभार ग्रहण करने के पूर्व पहली अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा करेगा ।
[(4) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 (2005 का 30) के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।]
31. नियुक्तियों में त्रुटियों के कारण कार्य आदि का अविधिमान्य न होना-(1) बोर्ड का या निआ बैंक की किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि, यथास्थिति, बोर्ड या समिति में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटि थी ।
(2) निदेशक के रूप में सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगा कि वह निदेशक होने के लिए निरर्हित था या उसकी नियुक्ति में कोई अन्य त्रुटि थी ।
32. निदेशकों की नियुक्ति के विषय में निआ बैंक के साथ ठहराव का अध्यारोही होना-(1) जहां निआ बैंक द्वारा किसी कम्पनी के साथ किए गए ठहराव में, ऐसी कम्पनी के एक या अधिक निदेशकों की निआ बैंक द्वारा नियुक्ति के लिए उपबन्ध किया गया है वहां ऐसा उपबन्ध और उसके अनुसरण में की गई निदेशकों की नियुक्ति, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या कम्पनी से सम्बद्ध ज्ञापन, संगम-अनुच्छेदों या किसी अन्य लिखत में किसी बात के होते हुए भी, विधिमान्य और प्रभावशील होगी और शेयर अर्हता, आयु सीमा, निदेशकों के पदों की संख्या, पद से निदेशकों के हटाए जाने से सम्बन्धित कोई उपबन्ध और ऐसी ही अन्य शर्तें जो ऐसी किसी विधि या उपरोक्त लिखत में हैं, यथापूर्वोक्त ठहराव के अनुसरण में निआ बैंक द्वारा नियुक्त किसी निदेशक को लागू नहीं होंगी ।
(2) यथापूर्वोक्त नियुक्त कोई निदेशक-
(क) निआ बैंक के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और निआ बैंक के लिखित आदेश द्वारा हटाया जा सकेगा या उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति रखा जा सकेगा;
(ख) निदेशक होने के कारण ही या निदेशक के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य या लोप या उससे सम्बन्धित किसी बात के लिए कोई बाध्यता या दायित्व उपगत नहीं करेगा;
(ग) चक्रानुक्रम से सेवानिवृत्त होने के दायित्वाधीन नहीं होगा और ऐसे सेवानिवृत्त होने के दायित्वाधीन निदेशकों की संख्या की संगणना करने में उसकी गिनती नहीं की जाएगी ।
33. निदेशकों की क्षतिपूर्ति-(1) प्रत्येक निदेशक की उसके कर्तव्यों के निर्वहन में या सम्बन्ध में उसके द्वारा उपगत सभी हानियों और व्ययों की बाबत, जो उसके जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रमों से न हुए हों, निआ बैंक द्वारा क्षतिपूर्ति की जाएगी ।
(2) कोई निदेशक निआ बैंक के किसी अन्य निदेशक के लिए अथवा किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के लिए या निआ बैंक को होने वाली किसी ऐसी हानि या व्ययों के लिए, जो निआ बैंक की ओर से अर्जित की गई या ली गई किसी सम्पत्ति या प्रतिभूति के मूल्य की या उसमें हक की अपर्याप्तता या कमी के अथवा निआ बैंक के प्रति बाध्यताधीन किसी ऋणी या व्यक्ति के दिवाले या सदोष कार्य के अथवा अपने पद के या इससे संबंधित कर्तव्यों के निष्पादन में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के परिणामस्वरूप हो, उत्तरदायी नहीं होगा ।
34. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या किसी अन्य विधि या विधि का बल रखने वाले किसी उपबंध के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या संभाव्य किसी हानि या नुकसान के लिए कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही निआ बैंक या उसके किसी निदेशक या अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए निआ बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
35. 1891 के अधिनियम संख्यांक 18 का निआ बैंक के संबंध में लागू होना-बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 निआ बैंक के सम्बन्ध में, इस प्रकार लागू मानो वह उस अधिनियम की धारा 2 में यथा परिभाषित बैंक हो ।
36. 1949 के अधिनियम संख्यांक 10 की धारा 34क और धारा 36कघ ही निआ बैंक को लागू होंगी-बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 34क और धारा 36कघ के सिवाय उस अधिनियम की कोई बात निआ बैंक को लागू नहीं होगी ।
। । । । ।
38. निआ बैंक का समापन-कम्पनियों या निगमों के परिसमापन से संबंधित किसी विधि का कोई उपबन्ध निआ बैंक को लागू नहीं होगा और निआ बैंक का समापन केन्द्रीय सरकार के आदेश से ही और ऐसी रीति से, जो वह निदिष्ट करे, किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
39. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा] ऐसे सभी विषयों के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए, उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) बोर्ड या इस अधिनियम के अधीन गठित किसी समिति के अधिवेशनों के समय और स्थान और ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया जिसके अन्तर्गत कामकाज के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति भी है;
(ख) निदेशकों और समिति के सदस्यों को दी जाने वाली फीसें और भत्ते;
(ग) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे निर्यात विकास निधि और निआ बैंक के तुलनपत्र और लेखा तैयार किए जाएंगे;
(घ) निआ बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण तथा उनकी सेवा की शर्तें और निबन्धन;
(ङ) निआ बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के फायदे के लिए भविष्य-निधि या किसी अन्य निधि की स्थापना और उनको बनाए रखा जाना;
(च) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
। । । । ।
41. कठिनाई दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए, आदेश द्वारा, ऐसा कार्य कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो:
परन्तु ऐसा कोई आदेश उस तारीख से जिसको इस अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
पहली अनुसूची
[धारा 30 (3) देखिए]
विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा
मैं, ................................. इसके द्वारा घोषणा करता हूं कि मैं भारतीय निर्यात-आयात बैंक के (यथास्थिति) निदेशक, .......................... समिति के सदस्य, लेखापरीक्षक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में मुझ से अपेक्षित और उक्त निआ बैंक में या उसके सम्बन्ध में मेरे द्वारा धारण किए गए पद या ओहदे से उचित रूप से संबद्ध कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक, सच्चाई से और पूर्ण कुशलता और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा ।
मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं भारतीय निर्यात-आयात बैंक के कार्यों से या उक्त निआ बैंक से कोई व्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कार्यों से सम्बद्ध कोई जानकारी किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसका विधिक रूप से हकदार नहीं है, संसूचित नहीं करूंगा और न संसूचित होने दूंगा तथा ऐसे किसी व्यक्ति को उक्त निआ बैंक की या उसके कब्जे में की तथा उक्त निआ बैंक के कारबार से या उक्त निआ बैंक से कोई व्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कारबार से सम्बद्ध किन्हीं बहियों या दस्तावेजों का निरीक्षण नहीं करने दूंगा और न उसकी उन तक पहुंच होने दूंगा ।
मेरे सामने हस्ताक्षर किए ।
(हस्ताक्षर)
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