अफ्रीकी विकास बैंक अधिनियम, 1983
(1983 का अधिनियम संख्यांक 13)
[26 मई, 1983]
अफ्रीकी विकास बैंक की स्थापना और उसके कार्य करने के
लिए हुए अन्तरराष्ट्रीय करार को कार्यान्वित करने
तथा उससे सम्बन्धित विषयों के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अफ्रीकी विकास बैंक अधिनियम, 1983 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) करार" से अफ्रीकी विकास बैंक की स्थापना के लिए करार अभिप्रेत है ;
(ख) बैंक" से करार के अधीन स्थापित अफ्रीकी विकास बैंक अभिप्रेत है ।
3. बैंक को संदाय-(1) संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् भारत की संचित निधि में से ऐसी सब धनराशियां, जो निम्नलिखित के संदाय के लिए समय-समय पर अपेक्षित हो, संदत्त की जाएंगी :-
(क) करार के अनुच्छेद 6, 7, 10 और 21 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बैंक को संदेय अभिदाय ;
(ख) करार के अनुच्छेद 28 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बैंक को संदेय कोई धनराशियां ।
(2) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना ठीक समझे, तो वह ऐसे प्ररूप में जिसे वह ठीक समझे, ऐसे कोई ब्याज रहित और अपरक्राम्य नोट या अन्य बाध्यताएं सृष्ट कर सकेगी और बैंक को पुरोधृत कर सकेगी ।
4. रिजर्व बैंक का बैंक के लिए निक्षेपागार होना-भारतीय रिजर्व बैंक, बैंक की भारतीय करेन्सी धृतियों का, निक्षेपागार होगा ।
5. बैंक को प्रास्थिति और कतिपय उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का प्रदान किया जाना और उसके अधिकारियों और कर्मचारियों को कतिपय उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का प्रदान किया जाना-(1) किसी अन्य विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी करार के उन उपबन्धों को, जो अनुसूची में दिए गए हैं, भारत में विधि का बल प्राप्त होगा :
परन्तु करार के अनुच्छेद 57 की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह-
(क) सीमाशुल्क से मुक्त माल का भारत में आयात करने का हक, वहां उसके पश्चात्वर्ती विक्रय पर किसी निर्बन्धन के बिना, बैंक को देती है ; या
(ख) बैंक को उन शुल्कों या करों से कोई छूट प्रदान करती है, जो बेचे गए माल की कीमत का भाग हैं ; या
(ग) बैंक को उन शुल्कों या करों से कोई छूट प्रदान करती है जो की गई सेवाओं के लिए प्रभारों के सिवाय वास्तव में कुछ नहीं हैं ।
(2) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची का संशोधन किन्हीं ऐसे संशोधनों के अनुरूपतः कर सकेगी जो करार के उन उपबंधों में, जो अनुसूची में उपवर्णित हैं, सम्यक् रूप से किए और अंगीकृत किए गए हैं ।
6. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
7. धारा 5 के अधीन जारी की गई अधिसूचनाओं और धारा 6 के अधीन बनाए गए नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना और धारा 6 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, जारी किए जाने या बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी या रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस अधिसूचना या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह अधिसूचना या नियम ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी या होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए या वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगी या हो जाएगा । किन्तु अधिसूचना या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उस अधिसूचना या नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अनुसूची
(धारा 5 देखिए)
करार के ऐसे उपबंध जो विधि का बल रखेंगे
अफ्रीकी विकास बैंक की स्थापना करने वाले करार
अध्याय 7
प्रास्थिति, उन्मुक्तियां, छूटें और विशेषाधिकार
अनुच्छेद 50-प्रास्थिति
बैंक को अपने प्रयोजनों की पूर्ति और उसे सौंपे गए कृत्यों को पूरा करने में समर्थ बनाने के लिए, पूर्ण अन्तरराष्ट्रीय व्यक्तित्व प्राप्त होगा । इन उद्देश्यों के लिए वह सदस्यों, गैर-सदस्यों, राज्यों और अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के साथ करार कर सकेगा । इन्हीं उद्देश्यों के लिए इस अध्याय के लिए इस अध्याय में उपवर्णित प्रास्थिति, उन्मुक्तियां, छूट और विशेषाधिकार हर सदस्य के राज्यक्षेत्र में बैंक को प्रदान किए जाएंगे ।
अनुच्छेद 51-सदस्य देशों में प्रास्थिति
प्रत्येक सदस्य के राज्यक्षेत्र में बैंक को पूर्ण विधिक व्यक्तित्व और विशिष्टतया,-
(क) संविदा करने,
(ख) स्थावर तथा जंगम संपत्ति अर्जित करने और उसका व्ययन करने ; और
(ग) विधिक कार्यवाहियां संस्थित करने की पूर्ण सामर्थ्य प्राप्त होगी ।
अनुच्छेद 52-न्यायिक कार्यवाहियां
1. बैंक हर रूप की विधिक आदेशिका से उन्मुक्ति का उपभोग उन दशाओं में के सिवाय करेगा जो उसको उधार लेने की शक्तियों का प्रयोग करने से उद्भूत हों । इन दशाओं में सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय में बैंक के विरुद्ध वाद उस सदस्य के राज्यक्षेत्र में, जिसमें बैंक का प्रधान कार्यालय है, अथवा किसी ऐसे सदस्य या गैर-सदस्य राज्य के राज्यक्षेत्र में लाए जा सकेंगे, जिसमें बैंक ने आदेशिका की तामील या सूचना स्वीकार करने के प्रयोजन के लिए अभिकर्ता की नियुक्ति की है या प्रतिभूतियां पुरोधृत या प्रत्याभूत की हैं । तथापि, सदस्यों की ओर से कार्य करने वाले या उनसे दावा प्राप्त करने वाले सदस्यों या व्यक्तियों के द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
2. बैंक की संपत्ति और आस्तियां चाहे वे जहां भी स्थित हों, और किसी के भी द्वारा धारित की गई हों, बैंक के विरुद्ध अन्तिम निर्णय दिए जाने के पूर्व सभी प्रकार के अधिग्रहण, कुर्की या निष्पादन से उन्मुक्त होंगी ।
अनुच्छेद 53-आस्तियों और अभिलेखागारों की उन्मुक्ति
1. बैंक की संपत्ति और आस्तियां वे चाहे जहां भी स्थित हों, और चाहे किसी के भी द्वारा धारित हों, कार्यपालिका या विधायी अनुयोग के द्वारा तलाशी, अभिग्रहण, अधिहरण, स्वत्वहरण या किसी भी अन्य रूप के ग्रहण या पुरोबन्ध से उन्मुक्त रहेंगी ।
2. बैंक के अभिलेखागार और साधारणतया वे सभी दस्तावेज जो वे उसके हैं या उसके द्वारा धारित हैं, वे चाहे जहां स्थित हों, अनतिक्रमणीय होंगे ।
अनुच्छेद 54-आस्तियों की निर्बन्धनों से मुक्ति
इस करार के उपबन्धों के अधीन रहते हुए बैंक की सभी संपत्ति और आस्तियां किसी भी प्रकार के निर्बन्धनों, विनियमों, नियंत्रणों और अधिस्थगनों से वहां तक मुक्त रहेंगी, जहां तक कि बैंक के प्रयोजन और कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों ।
अनुच्छेद 55-संसूचनाओं के लिए विशेषाधिकार
बैंक की शासकीय संसूचनाओं के प्रति हर एक सदस्य वैसा ही व्यवहार करेगा, जो वह सदस्य अन्य सदस्यों की शासकीय संसूचनाओं के प्रति करता है ।
अनुच्छेद 56-व्यक्तिगत उन्मुक्तियां और विशेषाधिकार
(1) बैंक के सभी गवर्नर, निदेशक, अनुकल्प, अधिकारी और कर्मचारी और बैंक के लिए कार्य विशेष का पालन करने वाले विशेषज्ञ और परामर्शी :
(i) अपने द्वारा पदीय हैसियत से किए गए कार्यों की बाबत विधिक आदेशिका से उन्मुक्ति प्राप्त होंगे ;
(ii) जहां वे स्थानीय राष्ट्रिक नहीं हैं वहां उनको आप्रवास संबंधी निर्बन्धनों, अन्य देशियों के रजिस्ट्रीकरण की अपेक्षाओं और राष्ट्रीय सेवा की बाध्यताओं से वही उन्मुक्तियां और मुद्रा विनियमों की बाबत वही सुविधाएं दी जाएंगी जो सदस्यों द्वारा अन्य सदस्यों के तुल्य पंक्ति के प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जाती हैं ; और
(iii) यात्रा सुविधाओं की बाबत वही व्यवहार किया जाएगा जो अन्य सदस्यों के तुल्य पंक्ति के प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किया जाता है ।
(2) बैंक के लिए कार्य विशेष का पालन करने वाले विशेषज्ञों और परामर्शियों को ऐसी उन्मुक्तियां और विशेषाधिकार दिए जाएंगे जो बैंक की राय में उनके कार्य करने की अवधि के दौरान, जिसके अन्तर्गत उसके संबंध में यात्रा में व्यतीत हुआ समय भी है, उनके कृत्यों के स्वतंत्र रूप से प्रयोग किए जाने के लिए आवश्यक है ।
अनुच्छेद 57-कराधान से छूट
1. बैंक, उसकी संपत्ति, अन्य आस्तियों, आय और उसकी संक्रियाओं और संव्यवहारों को सभी कराधानों और सीमाशुल्कों से छूट दी जाएगी । बैंक को किसी भी कर या शुल्क के संदाय, विधारण या उसके संग्रहण की बाध्यता से भी छूट दी जाएगी ।
2. बैंक के निदेशकों, अनुकल्पों, अधिकारियों और अन्य वृत्तिक कर्मचारिवृन्द को बैंक द्वारा दिए गए वेतनों और उपलब्धियों पर या उनकी बाबत कोई भी कर उद्गृहीत नहीं किया जाएगा ।
3. बैंक द्वारा पुरोधृत किसी बाध्यता या प्रतिभूति पर जिसके अन्तर्गत उस पर कोई लाभांश या ब्याज भी है, चाहे वह बाध्यता या प्रतिभूति किसी के भी द्वारा धारण की गई हो, किसी प्रकार का कोई भी ऐसा कर उद्ग्रहीत नहीं किया जाएगा-
(i) जो ऐसी बाध्यता या प्रतिभूति के विरुद्ध केवल इस कारण विभेद करता है कि वह बैंक द्वारा पुरोधृत की गई है ; या
(ii) यदि ऐसे कराधान के लिए अधिकारिता विषयक एकमात्र आधार वह स्थान या ऐसी करेंसी हो जिसमें वह पुरोधृत, संदेय या संदत्त की गई है या बैंक द्वारा अनुरक्षित किसी कार्यालय या कारबार के स्थान की अवस्थिति है ।
4. बैंक द्वारा प्रत्याभूत किसी बाध्यता या प्रतिभूति पर जिसके अन्तर्गत उस पर कोई लाभांश या ब्याज भी है, चाहे वह बाध्यता या प्रतिभूति किसी के भी द्वारा धारण की गई हो, किसी प्रकार का कोई भी ऐसा कर उद्गृहीत नहीं किया जाएगा-
(i) जो किसी ऐसी बाध्यता या प्रतिभूति के विरुद्ध केवल इस कारण विभेद करता है कि वह बैंक द्वारा प्रत्याभूत की गई है ; या
(ii) यदि ऐसे कराधान के लिए अधिकारिता विषयक एकमात्र आधार बैंक द्वारा अनुरक्षित किसी कार्यालय या कारबार के स्थान की अवस्थिति है ।
अनुच्छेद 58-कार्यान्वयन के लिए अधिसूचना
प्रत्येक सदस्य बैंक को तुरन्त उस विनिर्दिष्ट कार्रवाई के बारे में सूचित करेगा जो उसने इस अध्याय के उपबंधों को अपने राज्यक्षेत्र में प्रभावी बनाने के लिए की है ।
अनुच्छेद 59-उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का लागू होना
इस अध्याय में उपबंधित उन्मुक्तियां, छूटें और विशेषाधिकार बैंक के हित में दिए गए हैं । निदेशक बोर्ड, ऐसी सीमा तक और ऐसी शर्तों पर जो वह अवधारित करे, इस करार के अनुच्छेद 52, 54, 56 और 57 में उपबन्धित उन्मुक्तियों और छूटों का उन मामलों में वहां अधित्यजन कर सकेगा जहां उसकी कार्रवाई उसकी राय में बैंक के हित को अग्रसर करे । अध्यक्ष किसी अधिकारी की उन्मुक्ति का ऐसे मामलों में अधित्यजन कर सकेगा जहां उसकी कार्रवाई उसकी राय में बैंक के हित को अग्रसर करे । अध्यक्ष को ऐसे किसी पदधारी को उन्मुक्ति का ऐसे मामलों में अधित्यजन करने का अधिकार और कर्तव्य होगा जहां उसकी राय में ऐसी उन्मुक्ति से न्याय का मार्ग अवरुद्ध होगा और जहां उसका बैंक के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अधित्यजन किया जा सकता है ।
-------------

