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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994 ( Airports Authority Of India Act, 1994 )


 

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994

(1994 का अधिनियम संख्यांक 55)

[12 सितम्बर, 1994]

विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों के, जिन पर वायु परिवहन

सेवाएं चलाई जाती हैं या चलाई जाने के लिए आशयित हैं, और

[विमानपत्तनों को स्थापित करने या उनके स्थापन में सहायता

करने के प्रयोजन के लिए] सभी वैमानिक संचार स्टेशनों के

बेहतर प्रशासन और सुगठित प्रबंध के लिए भारतीय

विमानपत्तन प्राधिकरण के गठन  का और इस प्रकार

गठित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को और

उसमें भारतीय अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन

प्राधिकरण को और राष्ट्रीय विमानपत्तन

प्राधिकरण के उपक्रमों के अंतरण और

निहित हो जाने तथा उनसे  संबद्ध

या उनसे आनुषंगिक विषयों

का उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के पैंतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, प्रारंभ और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994 है ।

(2) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

(3) यह-

(क) संघ में किसी सशस्त्र बल के या उसके नियंत्रण के अधीन विमानपत्तनों और हवाई मैदानों से भिन्न सभी विमानपत्तनों को जिन पर वायु परिवहन सेवाएं चलाई जाती हैं या चलाई जाने के लिए आशयित हैं;

1[(कक) सभी प्राइवेट विमानपत्तनों को, जहां तक उनका संबंध वायु यातायात सेवाएं प्रदान करने से है, धारा 37 के अधीन उन्हें निदेश जारी करने और अध्याय 5क के प्रयोजनों के लिए;]

(ख) सभी सिविल अंतःक्षेत्रों;

(ग) सभी वैमानिक संचार स्टेशनों; और

(घ) वायु परिवहन सेवाओं से संबंधित सभी प्रशिक्षण स्टेशनों, स्थापनों और कार्यशालाओं,

को लागू होता है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) वैमानिक संचार स्टेशन" से वैमानिक संचार सेवा का कोई स्टेशन अभिप्रेत है जिसके अंतर्गत वैमानिक व्यवसाय सेवा, वैमानिक स्थिर सेवा, वैमानिक चलती फिरती सेवा और वैमानिक रेडियो संचार सेवा भी है ;

(ख) विमानपत्तन" से विमानों के उतरने और उड़ान भरने का क्षेत्र अभिप्रेत है जिस पर प्रायः रनवे और विमान अनुरक्षण तथा यात्री सुविधाएं होती हैं और इसके अंतर्गत वायुयान अधिनियम, 1934 (1934 का 22) की धारा 2 के खंड (2) में यथा परिभाषित विमान क्षेत्र भी है;

(ग) विमानपट्टी" से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जो छोटी जगह से उठान कर सकने और उतर सकने वाले वायुयानों के उतरने और उठान करने के लिए उपयोग में लाया जाता है या लाए जाने के लिए आशयित है तथा इसके अंतर्गत उस पर स्थित या उससे अनुलग्न सभी भवन और संरचनाएं भी हैं;

(घ) वायु यातायात सेवा" के अंतर्गत उड़ान सूचना सेवा, सतर्क करने वाली, वायु यातायात सलाह सेवा, वायु यातायात नियंत्रण सेवा, क्षेत्र नियंत्रण सेवा, पहुंच मार्ग नियंत्रण सेवा और विमानपत्तन नियंत्रण सेवा है;

(ङ) वायु परिवहन सेवा" से किसी भी प्रकार के पारिश्रमिक के लिए व्यक्तियों, डाक या किसी अन्य सजीव या निर्जीव वस्तु के वायु द्वारा परिवहन के लिए कोई सेवा अभिप्रेत है, चाहे ऐसी सेवा एकल उड़ान की हो या उड़ान आवलियों की;

(च) नियत दिन" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार धारा 3 के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे;

(छ) प्राधिकरण" से धारा 3 के अधीन गठित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(ज) अध्यक्ष" से धारा 3 की उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन नियुक्त प्राधिकरण का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(झ) सिविल अंतःक्षेत्र" से कोई ऐसा क्षेत्र, यदि कोई हो, अभिप्रेत है, जो विमानपत्तन से किन्हीं वायु परिवहन सेवाओं का उपयोग करने वाले व्यक्तियों द्वारा उपयोग के लिए या ऐसी सेवा द्वारा यात्री सामान अथवा स्थोरा की उठाई-धराई के लिए संघ के किसी सशस्त्र बल के किसी विमानपत्तन में आबंटित किया गया है और इसके अंतर्गत ऐसे क्षेत्र पर किसी भवन और संरचना वाली भूमि भी है;

 (ञ) हेली पत्तन" से चाहे भूमि तल पर स्थित या किसी संरचना पर स्थित क्षेत्र अभिप्रेत है जो हेलीकाप्टरों के उतरने और उठान करने के लिए उपयोग में लाया जाता है या लाए जाने के लिए आशयित है तथा इसके अन्तर्गत वह क्षेत्र भी है जहां हेलीकाप्टर ठहराए जाते हैं और उस पर स्थित या उससे अनुलग्न सभी भवन और संरचनाएं भी हैं;

(ट) अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण" से अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1971(1971 का 43) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(ठ) सदस्य" से प्राधिकरण का कोई सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अध्यक्ष भी है, किन्तु इसके अंतर्गत धारा 4, धारा 5, धारा 6 और धारा 7 के प्रयोजनों के लिए, धारा 3 की उपधारा (3) के खंड (ख) में निर्दिष्ट कोई पदेन सदस्य नहीं है;

(ड) राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण" से राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1985 का 64) की धारा 3 के अधीन गठित राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

 [(ढढ) प्राइवेट विमानपत्तन" से ऐसा विमानपत्तन अभिप्रेत है जो,-

(i) प्राधिकरण अथवा किसी राज्य सरकार से भिन्न किसी व्यक्ति या अभिकरण के, अथवा

(ii) प्राधिकरण या किसी राज्य सरकार या दोनों के साथ संयुक्ततः ऐसे किसी व्यक्ति या अभिकरण के, जहां प्राइवेट विमानपत्तन की आस्तियों में, यथास्थिति, उस व्यक्ति या अभिकरण का शेयर पचास प्रतिशत से अधिक है,

स्वामित्वाधीन है या उसके द्वारा विकसित या प्रबंधित है;]

(ण) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ।

अध्याय 2

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण

3. प्राधिकरण का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार नियत दिन से ही राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक प्राधिकरण का गठन करेगी, जो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण कहलाएगा ।

(2) प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम का, शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला, एक निगमित निकाय होगा जिसे, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जंगम और स्थावर दोनों प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण तथा व्ययन करने की, और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा, और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।

(3) प्राधिकरण निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-

                (क) अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

                (ख) सिविल विमानन का महानिदेशक या ऐसा अधिकारी जो सिविल विमानन उप महानिदेशक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, केन्द्रीय सरकार द्वारा पदेन नियुक्त किया जाएगा;

(ग) कम से कम आठ और अधिक से अधिक चौदह सदस्य जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ।

                (4) अध्यक्ष पूर्णकालिक सदस्य होगा और उपधारा (3) के खंड (ग) में निर्दिष्ट अन्य सदस्य पूर्णकालिक या अंशकालिक सदस्यों के रूप में, जैसा केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, नियुक्त किए जा सकेंगे ।

                (5) अध्यक्ष और उपधारा (3) के खंड (ग) में निर्दिष्ट अन्य सदस्यों का चुनाव ऐसे व्यक्तियों में से किया जाएगा जिन्हें वायु परिवहन या किन्हीं अन्य परिवहन सेवाओं, उद्योग, वाणिज्यिक या वित्तीय विषयों या प्रशासन का विशेष ज्ञान और अनुभव हो तथा ऐसे व्यक्तियों में से किया जाएगा, जो कर्मकारों तथा उपभोक्ताओं के संगठनों का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ हों ।

4. सदस्य-पद के लिए निरर्हता-जो व्यक्ति-

(क) ऐसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है और कारावास से दंडादिष्ट किया गया है जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्ग्रस्त है; अथवा

(ख) अनुन्मोचित दिवालिया है; अथवा

(ग) विकृतचित का है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है; अथवा

(घ) सरकार या सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी निगमित निकाय की सेवा से हटा दिया गया है या पदच्युत कर दिया गया है; अथवा

(ङ) केन्द्रीय सरकार की राय में, प्राधिकरण में ऐसा वित्तीय या अन्य हित रखता है जिसके कारण सदस्य के रूप में उसके द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है,

वह सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए निरर्हित होगा ।

5. सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें-(1) धारा 6 के उपबंधों के अधीन रहते हुए,-

(i) प्रत्येक पूर्णकालिक सदस्य (पदेन सदस्य से भिन्न) उस तारीख से, जिसको वह पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए या जब तक वह साठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता है, इन दोनों में से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा; और

(ii) प्रत्येक अंशकालिक सदस्य (पदेन सदस्य से भिन्न) उस तारीख से, जिसको वह पद ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा :

परन्तु केन्द्रीय सरकार-

(क) ऐसे किसी पूर्णकालिक सदस्य की नियुक्ति जो सरकार का सेवक नहीं है, उसे कम से कम तीन मास की अवधि की सूचना देने के पश्चात् अथवा उसके बदले में उसे तीन मास की अवधि के उसके वेतन और भत्तों, यदि कोई हों, के बराबर रकम देकर समाप्त कर सकेगी;

(ख) ऐसे किसी अंशकालिक सदस्य की नियुक्ति, जो सरकार का सेवक नहीं है, उसे उतनी अवधि की जितनी विहित की जाए, सूचना देने के पश्चात् समाप्त कर सकेगी; और

(ग) ऐसे किसी सदस्य की नियुक्ति, जो सरकार का सेवक है, किसी भी समय समाप्त कर सकेगी ।

(2) सदस्यों की सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।

(3) कोई भी सदस्य केन्द्रीय सरकार को इतनी अवधि की, जितनी विहित की जाए, लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग सकेगा और ऐसे पदत्याग से उस सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किए जाने पर यह समझा जाएगा कि उस सदस्य ने अपना पद रिक्त कर दिया है ।

6. सदस्य के पद का रिक्त हो जाना-केन्द्रीय सरकार किसी सदस्य को निम्नलिखित दशाओं में हटा देगी :-

(क) यदि वह धारा 4 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी के अधीन हो जाती है :

परंतु किसी सदस्य को इस आधार पर कि वह उस धारा के खंड (ङ) में वर्णित निरर्हता के अधीन हो गया है, तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उसे उस विषय में सुनवाई का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता; अथवा

(ख) यदि वह कार्य करने से इंकार करता है, या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है; अथवा

(ग) यदि वह प्राधिकरण से अनुपस्थिति-छुट्टी लिए बिना प्राधिकरण की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता    है; अथवा

(घ) यदि उसने केंद्रीय सरकार की राय में अपने पद का ऐसा दुरुपयोग किया है जिसके कारण उसका पद पर बना रहना लोकहित में हानिकारक है :

परन्तु इस खंड के अधीन कोई सदस्य तब तक नहीं हटाया जाएगा तब तक कि उस विषय में सुनवाई का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता ।

7. पुनर्नियुक्ति के लिए सदस्य की पात्रता-कोई भी व्यक्ति जो सदस्य न रह गया हो, यदि धारा 4 के अधीन निरर्हित नहीं है तो, पुनर्नियुक्ति का पात्र होगा ।

8. बैठकें-(1) प्राधिकरण की बैठकें ऐसे समय और स्थान पर होंगी और उन बैठकों में कारबार किए जाने के बारे में (जिसके अंतर्गत ऐसी बैठकों में गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन किया जाएगा जैसे विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएं ।

(2) अध्यक्ष, अथवा यदि किसी कारण से वह प्राधिकरण की किसी बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ है तो, बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा चुना गया कोई अन्य सदस्य, उस बैठक में पीठासीन होगा ।

(3) ऐसे सभी प्रश्न, जो प्राधिकरण की किसी बैठक के समक्ष आएं, उपस्थित होने और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे, और मतों के बराबर होने की दशा में अध्यक्ष का अथवा उसकी अनुपस्थिति में पीठासीन व्यक्ति का दूसरा या निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा ।

9. प्राधिकरण में रिक्ति आदि से कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-प्राधिकरण का कोई कार्य या कार्यवाही-

(क) प्राधिकरण में किसी रिक्ति या उसके गठन में किसी त्रुटि; अथवा

(ख) प्राधिकरण के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति की नियुक्ति में किसी त्रुटि; या

(ग) प्राधिकरण की कार्यवाही में किसी ऐसी अनियमितता, जो मामले के गुणागुण पर प्रभाव न डालती हो,

के कारण अविधिमान्य नहीं होगी ।

10. प्राधिकरण के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति-(1) प्राधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए अपने को समर्थ बनाने के प्रयोजन से धारा 18 के उपबन्धों के और ऐसे नियमों के, जो इस निमित्त बनाए जाएं, अधीन रहते हुए, उतने अधिकारी और अन्य कर्मचारी जितने वह आवश्यक समझे (प्रतिनियुक्ति पर अथवा अन्यथा) नियुक्त कर सकेगा :

परन्तु ऐसे प्रवर्ग के अधिकारियों की नियुक्ति, जो अध्यक्ष से परामर्श करने के पश्चात् नियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के अधीन होगी ।

(2) धारा 18 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किया गया प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन रहेगा और ऐसे पारिश्रमिक का हकदार होगा जो विनियमों द्वारा अवधारित किया जाए ।

11. प्राधिकरण का कारबार के सिद्धांतों पर चलना-इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में प्राधिकरण, जहां तक हो सकेगा, कारबार के सिद्धांतों पर चलेगा ।

अध्याय 3

प्राधिकरण के कृत्य

12. प्राधिकरण के कृत्य-(1) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, प्राधिकरण का कृत्य यह होगा कि वह विमानपत्तनों, सिविल अंतःक्षेत्रों और वैमानिक संचार स्टेशनों का प्रबन्ध दक्षतापूर्वक करे ।

                (2) प्राधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि वह किसी विमानपत्तन और सिविल अंतःक्षेत्र में वायु यातायात सेवा और आयु परिवहन सेवा की व्यवस्था करे ।

                (3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण-

(क) विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों पर रनवे, टैक्सीवे, एप्रन, और टर्मिनल तथा आनुषंगिक भवनों का आयोजन, विकास, सन्निर्माण और अनुरक्षण कर सकेगा;

 [(कक) ऐसी तकनीकी, वित्तीय या अन्य सहायता देकर जिसे केन्द्रीय सरकार इस प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे, विमानपत्तन स्थापित कर सकेगा या प्राइवेट विमानपत्तनों की स्थापना में सहायता कर सकेगा;]

(ख) वायुयानों के सुरक्षित दिक्चालन और प्रचालन के लिए विमानपत्तनों और ऐसे अवस्थानों पर, जो आवश्यक समझे जाएं, दिक्चालन संबंधी सहायता, संचार, उपस्कर, बीकनों और भूमि सहायता का आयोजन कर सकेगा, उसे उपाप्त कर सकेगा, संस्थित कर सकेगा और उसका अनुरक्षण कर सकेगा;

(ग) अन्य अभिकरणों के समन्वयन से वायु सुरक्षा सेवाओं और खोज तथा बचाव सुविधाओं की व्यवस्था कर सकेगा;

(घ) इस अधिनियम के प्रयोजनों से संबंधित किसी विषय की बाबत अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए विद्यालय या संस्थाएं या केन्द्र स्थापित कर सकेगा;

(ङ) अपने कर्मचारियों के लिए निवास स्थानों का सन्निर्माण कर सकेगा;

(च) विमानपत्तनों पर या उनके निकट होटल, रेस्तरां और विश्राम कक्ष स्थापित कर सकेगा और उनका अनुरक्षण कर सकेगा;

(छ) माल के भंडारकरण या प्रसंस्करण के लिए विमानपत्तनों पर भाण्डागारों और स्थोरा काम्पलैक्सों की स्थापना   कर सकेगा;

(ज) विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों में यात्रियों तथा अन्य व्यक्तियों के उपयोग के लिए डाक, मुद्रा विनिमय, बीमा और टेलीफोन संबंधी सुविधाओं का इंतजाम कर सकेगा;

(झ) विमानपत्तनों और सिविल अन्तःक्षेत्रों में पहरे और निगरानी का समुचित इन्तजाम कर सकेगा;

(ञ) भारत सरकार के सुरक्षा और नयाचार से संबंधित कृत्यों का सम्यक् ध्यान रखते हुए विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों में यानों के चलने का तथा यात्रियों और मुलाकातियों के आने और जाने का विनियमन तथा नियंत्रण कर सकेगा;

(ट) विमानपत्तनों, विमान चालन सेवाओं, भूमि सहायता और सुरक्षा सेवाओं के या वहां किन्हीं सुविधाओं के संबंध में भारत में और विदेशों में परामर्शदात्री, सन्निर्माण विकास या प्रबंधकीय सेवाओं का विकास और उनकी व्यवस्था कर सकेगा तथा संक्रियाओं का जिम्मा ले सकेगा;

(ठ) हैलीपत्तनों और विमान पट्टियों की स्थापना और प्रबंध कर सकेगा;

(ड) ऐसी परिवहन सुविधाओं की व्यवस्था कर सकेगा जो प्राधिकरण की राय में विमान द्वारा यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आवश्यक हों;

(ढ) इस अधिनियम द्वारा उस पर अधिरोपित कृत्यों का अधिक दक्षतापूर्वक निर्वहन करने के लिए,कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के या कम्पनियों से संबंधित किसी अन्य विधि के अधीन एक या अधिक कम्पनियां बना सकेगा;

(ण) ऐसे सभी कार्य कर सकेगा जो इस अधिनियम द्वारा प्राधिकरण को प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग या उस पर अधिरोपित किसी कृत्य के निर्वहन के लिए आवश्यक या सुविधाजनक हों या उनके आनुषंगिक हों;

(त) ऐसा कोई अन्य कृत्य कर सकेगा जो भारत के आकाशीय क्षेत्र में, उससे और उसके आर-पार वायुयान के सुरक्षित और दक्ष प्रचालन को सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा आवश्यक और वांछनीय समझा जाए;

(थ) प्रशिक्षण संस्थानों और कर्मशालाओं की स्थापना कर सकेगा;

(द) प्राधिकरण को समनुदेशित किसी कृत्य के निर्वहन के लिए प्राधिकरण के सर्वाधिक वाणिज्ियक हित में विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों में कोई अन्य क्रियाकलाप कर सकेगा, जिसके अन्तर्गत स्थोरा की उठाई-धराई, सह उद्यमों की स्थापना भी है ।

                (4) प्राधिकरण, इस धारा के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में लागू परिवहन सेवा के विकास और ऐसी सेवा की दक्षता, मितव्ययता और सुरक्षा का सम्यक् ध्यान रखेगा ।

                (5) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह,-

                                (क) प्राधिकरण द्वारा, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की अवहेलना प्राधिकृत करती है; या

                (ख) किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कर्तव्य या दायित्व की बाबत, जिनके अधीन प्राधिकरण या उसके अधिकारी या अन्य कर्मचारी अन्यथा न हों, कोई कार्यवाही संस्थित करने के लिए प्राधिकृत करती है ।

 [12क. प्राधिकरण द्वारा पट्टा-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, प्राधिकरण, धारा 12 के अधीन कुछ कृत्यों का, जिन्हें प्राधिकरण उचित समझे, कार्यान्वयन करने के लिए लोक हित में या विमानपत्तनों के बेहतर प्रबंध के हित में, किसी विमानपत्तन के परिसरों को (जिनमें उस पर कर के और उससे अनुलग्न भवन और संरचनाएं भी सम्मिलित हैं) पट्टे पर दे सकेगा :

परंतु ऐसे पट्टे से, धारा 12 के अधीन प्राधिकरण के उन कृत्यों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा जो वायु यातायात सेवा अथवा विमानपत्तनों और सिविल अंतःक्षेत्रों में पहरा और निगरानी से संबंधित हैं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई पट्टा, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन दिए गए पट्टे के निबंधनानुसार पट्टेदार द्वारा संदेय कोई धन, प्राधिकरण की निधि का भाग होगा और उसमें इस प्रकार जमा किया जाएगा मानो वह धन, धारा 24 के सभी प्रयोजनों के लिए प्राधिकरण की प्राप्ति हो ।

(4) ऐसे पट्टेदार को, जिसे उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण का कोई कृत्य समनुदेशित किया गया है, पट्टे के निबंधनानुसार ऐसे कृत्य के निष्पादन के लिए आवश्यक प्राधिकरण की सभी शक्तियां होंगी ।]

अध्याय 4

सम्पत्ति और संविदा

13. अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रमों का प्राधिकरण में निहित    होना-(1) नियत दिन से ही धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण में अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।

(2) अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम के बारे में जो उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण को अन्तरित और उसमें निहित हो गया है यह समझा जाएगा कि उसके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, शक्ितयां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा स्थावर और जंगम संपत्ति पूर्ण स्वामित्व या निजी, मूर्त या अमूर्त, वर्तमान या समाश्रित किसी भी प्रकार की और कहीं भी स्थित सभी संपत्तियां, जिनके अन्तर्गत भूमि, भवन, मशीनरी, उपस्कर, संकर्म, कर्मशालाएं, नकदी अतिशेष, पूंजी, आरक्षितियां, आरक्षित निधि, विनिधान, अभिधृतियां, पट्टा और बही ऋण और ऐसी संपत्ति से उद्भूत होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित भी हैं, जो नियत दिन के ठीक पूर्व, उसके उपक्रम के संबंध में, यथास्थिति, अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के स्वामित्व, कब्जे या शक्ति में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे, और तत्संबंधी सभी लेखा बहियां और दस्तावेजें हैं और इसके बारे में यह भी समझा जाएगा कि उसके अन्तर्गत उसके उपक्रम के संबंध में, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के तत्समय विद्यमान सभी प्रकार के उधार, दायित्व और बाध्यताएं भी हैं ।

14. प्राधिकरण में उपबन्धों के निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान और, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण को प्रभाजित करने वाली सभी संविदाएं, करार और कार्यचालन के ठहराव, जहां तक उनका संबंध, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण से है, यथास्थिति, अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के विरुद्ध प्रभावहीन हो जाएंगे या प्रवर्तनीय नहीं रहेंगे और उनका उस प्राधिकरण के विरुद्ध या उसके पक्ष में जिसमें उपक्रम इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गया है पूर्ण प्रभाव होगा और प्रवर्तनीय होंगे और वे पूर्ण रूप से और प्रभावी रूप से इस प्रकार प्रवर्तनीय होंगे मानो, यथास्थिति, अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बजाय प्राधिकरण को उसमें नामित किया गया हो या वह उसका एक पक्षकार रहा हो ।

(2) नियत दिन के ठीक पूर्व अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा या उसके विरुद्ध उसके उपक्रमों के संबंध में लंबित या विद्यमान कोई कार्यवाही, वाद या वादहेतुक उस दिन से ही उस प्राधिकरण के द्वारा या उसके विरुद्ध जिसमें वह इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गया है, उसी प्रकार जारी रखा जा सकेगा और प्रवर्तित किया जा सकेगा जिस प्रकार वह अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा या उसके विरुद्ध तब प्रवर्तित किया जाता, जब यह अधिनियम पारित नहीं किया गया होता और, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं रहेगा ।

15. अनुज्ञप्तियों आदि का प्राधिकरण को दिया गया माना जाना-नियत दिन से, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के क्रियाकलाप और कारबार के संबंध में अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण की दी गई सभी अनुज्ञप्तियां, अनुज्ञापत्र, कोटा और छूटों के बारे में यह माना जाएगा कि वे उस प्राधिकरण को दी गई हैं जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम इस आधार पर निहित हो गए हैं ।

16. कर छूट या फायदे का प्रभावी बना रहना-(1) जहां आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण को किसी कर से, या उसके संबंध में किसी निर्धारण से कोई छूट दी गई या किसी अनामेलित अवक्षयण या विनिधान मोक या अन्य मोक या हानि के, यथास्थिति, मुजरा या अग्रनयन के रूप में कोई फायदा दिया गया है या उपलब्ध है, वहां ऐसी छूट निर्धारण या फायदा उस प्राधिकरण के संबंध में जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गए हैं, प्रभावी बने रहेंगे ।

(2) जहां आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के किसी उपबंध के अधीन अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा किया गया कोई संदाय स्रोत पर कर की कटौती से छूट प्राप्त है वहां कर से छूट उसी प्रकार उपलब्ध बनी रहेगी मानो अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण को लागू किए गए उक्त अधिनियम के उपबंध उस प्राधिकरण के संबंध में प्रभावी थे जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गए हैं ।

(3) धारा 13 के निबंधानानुसार उपक्रमों या उसके किसी भाग के अंतरण और निहित हो जाने का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वे पूंजी अभिलाभ के प्रयोजन के लिए आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अर्थान्तर्गत कोई अंतरण है ।

17. प्रत्याभूति का प्रभावी होना-किसी उधार या पट्टा वित्त की बाबत अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बारे में या उसके पक्ष में दी गई कोई प्रत्याभूति उस प्राधिकरण के संबंध में प्रभावी बनी रहेगी जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम इस अधिनियम के आधार पर निहित हो गए हैं ।

18. अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बारे में उपबंध-(1) (क) अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में कार्यरत है, जहां तक ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस उपक्रम के संबंध में, जो इस अधिनियम के आधार पर प्राधिकरण में निहित हो गया है, नियोजित है, नियत दिन से ही, प्राधिकरण के अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्रभाग का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा ।

(ख) राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में कार्यरत है, जहां तक ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस उपक्रम के संबंध में, जो इस अधिनियम के आधार पर प्राधिकरण में निहित हो गया है, नियोजित है, नियत दिन से ही, प्राधिकरण के राष्ट्रीय विमानपत्तन प्रभाग का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी    हो जाएगा ।

(2) अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकरण का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाता है, उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर, उन्हीं बाध्यताओं पर और उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर, तथा छुट्टी, यात्रा व्यय, बीमा, अधिवर्षिता स्कीम, भविष्य-निधि, अन्य निधियां, सेवा-निवृत्ति के पेंशन, उपदान और अन्य प्रसुविधाओं के बारे में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ उसमें अपना पद या सेवा धारण करेगा जो वह, यथास्थिति, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधीन उस दशा में धारण करता जब उसका उपक्रम, प्राधिकरण में निहित नहीं हुआ होता और यदि ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस अवधि के भीतर प्राधिकरण का अधिकारी या अन्य कर्मचारी न होने का विकल्प करता है तो वह प्राधिकरण के, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में नियत दिन से एक वर्ष की अवधि के समाप्त हो जाने तक ऐसा करता रहेगा :

परन्तु, यदि प्राधिकरण इस प्रकार नियत की गई अवधि को बढ़ाना समीचीन समझे तो वह उसे अधिकतम एक वर्ष की अवधि तक बढ़ा सकता है ।

(3) जहां अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, उपधारा (2) के अधीन उस प्राधिकरण के नियोजन या सेवा में नहीं रहने का विकल्प करता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम निहित हो गए हैं वहां ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपने काडर से त्यागपत्र दे दिया है ।

(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का प्राधिकरण को अंतरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

(5) ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के पूर्व अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण की सेवा से निवृत्त हो गए हैं और जो किन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों के हकदार हैं, उस प्राधिकरण से, जिसमें अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के उपक्रम निहित हो गए हैं, उन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों को प्राप्त करने के हकदार होंगे ।

(6) अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के भविष्य निधि, और समूह बीमा तथा अधिवार्षिता स्कीम संबंधी न्यास और अधिकारियों या कर्मचारियों के कल्याण के लिए सृजित कोई अन्य निकाय, प्राधिकरण में अपने कृत्यों का निर्वहन वैसे ही करते रहेंगे जैसे कि वे अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण में किया करते थे और भविष्य-निधि या समूह बीमा तथा अधिवर्षिता स्कीम के संबंध में दी गई कोई कर-छूट प्राधिकरण की बाबत लागू रहेगी ।

(7) जैसे उपधारा (2) में निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि या बढ़ाई गई अवधि की समाप्ति के पश्चात्, प्राधिकरण को अन्तरित और उसमें नियुक्त सभी अधिकारी और कर्मचारी, जो उन अधिकारियों या कर्मचारियों से भिन्न हैं, जो ऐसी अवधि के भीतर प्राधिकरण के अधिकारी या कर्मचारी होने का विकल्प नहीं करते हैं, उक्त प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा शर्तों के बारे में प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों और विनियमों द्वारा शासित होंगे ।

19. प्राधिकरण के लिए भूमि का अनिवार्य अर्जन-प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षित कोई भूमि, लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक समझी जाएगी और प्राधिकरण के लिए ऐसी भूमि का अर्जन, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य तत्स्थानी विधि के उपबन्धों के अधीन किया जा सकेगा ।

20. प्राधिकरण द्वारा संविदाएं-धारा 21 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक कोई संविदा करने और उसका पालन करने के लिए सक्षम होगा ।

21. प्राधिकरण की ओर से संविदाएं निष्पादित करने का ढंग-(1) प्राधिकरण की ओर से प्रत्येक संविदा, प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा या उसके ऐसे अन्य सदस्य या ऐसे अधिकारी द्वारा की जाएगी जिसे प्राधिकरण इस निमित्त साधारणतया या विशिष्टतया सशक्त करे और ऐसी संविदाएं या ऐसे वर्ग की संविदाएं, जैसी विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्राधिकरण की सामान्य मुद्रा से मुद्रांकित की जाएंगी :

परन्तु उतने मूल्य या रकम से, जितनी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर आदेश द्वारा इस निमित्त नियत करे, अधिक की गई संविदा तब तक नहीं की जाएगी जब तक प्राधिकरण द्वारा उसका पूर्व अनुमोदन न कर दिया गया हो :

परन्तु यह और कि स्थावर संपत्ति के अर्जन या विक्रय के लिए या ऐसी किसी संपत्ति के तीस वर्ष से अधिक अवधि के पट्टे के लिए कोई संविदा तथा उतने मूल्य या रकम से, जितनी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर आदेश द्वारा इस निमित्त नियत करे, अधिक की कोई अन्य संविदा तब तक नहीं की जाएगी तब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा उसका पूर्व अनुमोदन न कर दिया गया हो ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन की जाने वाली किसी संविदा का प्ररूप और रीति ऐसी होगी जैसी विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।

(3) कोई भी संविदा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों तथा विनियमों के अनुसार नहीं है, प्राधिकरण पर आबद्धकर नहीं होगी ।

अध्याय 5

वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा

22. प्राधिकरण की फीस, किराया, आदि प्रभारित करने की शक्ति-प्राधिकरण,-

                (i) केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, निम्नलिखित के लिए फीस या किराया प्रभारित कर सकेगा-

(क) किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन या विमानपट्टी पर वायुयानों के उतरने, रखने या ठहरने के लिए या वायुयान चलाने के संबंध में दी गई किसी अन्य सेवा या सुविधा के लिए ।

स्पष्टीकरण-इस उपखंड में वायुयान" के अन्तर्गत संघ के किसी सशस्त्र बल का वायुयान नहीं है और वायुयान चलाने" के अंतर्गत उक्त बल के किसी वायुयान का चलाना नहीं है;

(ख) किसी विमानपत्तन पर और किसी वैमानिक संचार के स्टेशन पर वायु यातायात सेवाओं, भूमि सुरक्षा सेवाओं, वैमानिक संचार और दिक्चालन संबंधी सहायता और मौसम विज्ञान संबंधी सेवाओं की व्यवस्था के लिए;

(ग) किसी विमानपत्तन, सिविल अन्तःक्षेत्र, हेलीपत्तन या विमानपट्टी पर यात्रियों और मुलाकातियों को दी गई सुख-सुविधाओं के लिए;

(घ) व्यक्ितयों द्वारा किसी विमानपत्तन, सिविल अंतःक्षेत्र, हेलीपत्तन या विमानपट्टी पर प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं और अन्य सेवाओं के उपयोग और उपयोजन के लिए;

(ii) उन अनुदेशों का सम्यक् ध्यान रखते हुए, जो केन्द्रीय सरकार प्राधिकरण को समय-समय पर दे, उन व्यक्तियों पर फीस या किराया प्रभारित कर सकेगा, जिन्हें प्राधिकरण ने किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन या विमानपट्टी पर कोई व्यापार या कारबार चलाने के लिए कोई सुविधा दी हों ।

 [22क. प्राधिकरण की विमानपत्तनों पर विकास फीस उद्गृहीत करने की शक्ति-प्राधिकरण,-

(i) इस निमित्त केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के पश्चात् भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 की धारा 2 के खंड (ज) में निर्दिष्ट महा विमानपत्तनों से भिन्न किसी विमानपत्तन से यानारोहण करने वाले यात्रियों से ऐसी दर से, जो विहित की जाए, विकास फीस उद्गृहीत और संगृहीत कर सकेगा;

(ii) भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 की धारा 2 के खंड (ज) में निर्दिष्ट महा विमानपत्तन से यानारोहण करने वाले यात्रियों से ऐसी दर से, जो भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 की धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन अवधारित की जाए, विकास फीस उद्गृहीत और संगृहीत कर सकेगा,

तथा ऐसी फीस प्राधिकरण के पास जमा की जाएगी और निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए विहित रीति से विनियमित और उपयोजित   की जाएगी ।]

23. केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकरण को अतिरिक्त पूंजी और अनुदान-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा, इस निमित्त विधि के अनुसार किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्-

(क) उतनी पूंजी, जितनी प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अथवा उनसे संबद्ध किसी प्रयोजन के लिए अपेक्षित हो, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर उपलब्ध करा सकेगी, जो उस सरकार द्वारा अवधारित की जाए;

(ख) प्राधिकरण को, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, उधारों या अनुदानों के रूप में उतनी धनराशि का संदाय कर सकेगी जितनी वह सरकार, प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।

24. प्राधिकरण की निधि और उसका विनिधान-(1) प्राधिकरण की अपनी निधि होगी और प्राधिकरण की सभी प्राप्तियां उसमें जमा की जाएंगी और प्राधिकरण द्वारा सभी संदाय उसमें से किए जाएंगे ।

(2) प्राधिकरण को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उतनी राशियां खर्च करने की शक्ति होगी जितनी वह इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों या प्रयोजनों के लिए तथा प्राधिकरण के सभी प्रशासकीय व्ययों की पूर्ति के लिए ठीक समझे और ऐसी राशियों को प्राधिकरण की निधि में से किया गया व्यय समझा जाएगा ।

(3) प्राधिकरण के नाम जमा वह सब धनराशि, जो उपधारा (2) में उपबंधित रूप में तुरन्त उपयोजित नहीं की जा सकती हैं, -

(क) भारतीय स्टेट बैंक या किसी ऐसे अनुसूचित बैंक या बैंकों में या अन्य लोक वित्तीय संस्थाओं में ऐसी शर्तों के अधीन, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाएं, निक्षिप्त की जाएगी, और

(ख) केन्द्रीय सरकार की प्रतिभूतियों में या ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, विनिहित की जाएगी ।

                स्पष्टीकरण-इस उपधारा में अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 22) की धारा 2 के खण्ड (ङ) में है ।

25. अधिशेष निधियों का आबंटन-(1) प्राधिकरण, किसी विमानपत्तन, सिविल अन्तःक्षेत्र, हेलीपत्तन या विमानपट्टी पर विद्यमान सुविधाओं या सेवाओं के विस्तार अथवा नई सुविधाओं या सेवाओं के सृजन के प्रयोजन के लिए अथवा अस्थायी कारणों से आमदनी में किसी अस्थायी कमी या व्यय में किसी अस्थायी वृद्धि के विरुद्ध व्यवस्था करने के प्रयोजन के लिए अथवा अग्नि, तूफान, विमान दुर्घटना या अन्य दुर्घटना से हुई हानि या नुकसान के कारण प्रतिस्थापन के प्रयोजनों या व्यय की पूर्ति के लिए अथवा इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में किसी कार्य या लोप से उत्पन्न किसी दायित्व की पूर्ति के लिए, समय-समय पर इतनी रकमें, जितनी वह ठीक समझे, आरक्षित निधि या निधियों के रूप में पृथक् रख सकेगा :

परन्तु एक या अधिक विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट आरक्षित निधियों की स्थापना के बारे में प्राधिकरण के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण को एक साधारण आरक्षित निधि स्थापित करने की भी शक्ति होगी :

परन्तु यह और कि विनिर्दिष्ट और साधारण आरक्षित निधियों में से प्रत्येक की या किसी की बाबत प्रतिवर्ष पृथक् रखी गई राशियों तथा किसी एक समय में ऐसी राशियों का योग उन सीमाओं से अधिक नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त, समय-समय पर, नियत की जाएं ।

(2) ऐसी आरक्षित निधि या निधियों के लिए तथा डूबे और शंकास्पद ऋणों, आस्तियों के अवक्षयण और ऐसी सभी अन्य बातों के लिए व्यवस्था करने के पश्चात् जिनके लिए कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत और निगमित कंपनियां प्रायः व्यवस्था करती हैं, प्राधिकरण अपने वार्षिक शुद्ध लाभों के अतिशेष केन्द्रीय सरकार को संदत्त करेगा ।

26. क्रियाकलापों के कार्यक्रम और वित्तीय प्राक्कलनों का प्रस्तुत किया जाना-(1) प्राधिकरण, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ से पूर्व, आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों के कार्यक्रम का विवरण और उनकी बाबत वित्तीय प्राक्कलन तैयार करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन तैयार किया गया विवरण, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ से कम से कम तीन मास पूर्व केन्द्रीय सरकार को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा ।

(3) प्राधिकरण का विवरण और वित्तीय प्राक्कलन केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से प्राधिकरण द्वारा पुनरीक्षित किया जा सकेगा ।

27. प्राधिकरण की उधार लेने की शक्तियां-(1) प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने सभी या किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए, केन्द्रीय सरकार की सम्मति से या केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे दिए गए किसी साधारण या विशेष प्राधिकार के निबन्धनों के अनुसार बंधपत्रों, डिबेन्चरों या ऐसी अन्य लिखतों का, जैसी वह ठीक समझे, निर्गमन करके किसी भी स्रोत से धन उधार ले सकेगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार, प्राधिकरण द्वारा उपधारा (1) के अधीन लिए गए उधारों की बाबत, मूलधन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज के संदाय को ऐसी रीति से प्रत्याभूत कर सकेगी, जैसी वह ठीक समझे ।

(3) प्राधिकरण, ऐसी सीमाओं के अधीन रहते हुए, जैसी केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर अधिकथित करे, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षित रकमें ओवर ड्राफ्ट द्वारा अथवा अस्थायी रूप से उधार ले सकेगा ।

28. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) प्राधिकरण उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अन्तर्गत लाभ और हानि लेखा तथा तुलनपत्र भी है, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।

(2) प्राधिकरण के लेखाओं की भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रतिवर्ष लेखापरीक्षा की जाएगी और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय प्राधिकरण द्वारा भारत के निंयत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के तथा प्राधिकरण के लेखाओं को लेखापरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार तथा विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की लेखापरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, संबंधित वाउचरों, दस्तावेजों और कागजों के पेश किए जाने की मांग करने और प्राधिकरण के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित प्राधिकरण के लेखे तद्विषयक लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को प्रत्येक वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के दानों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

[अध्याय 5

विमानपत्तन परिसरों के अप्राधिकृत अधिभोगियों, आदि की बेदखली

28क. परिभाषाएं-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                (क) विमानपत्तन परिसर" से अभिप्रेत हैं ऐसे कोई परिसर जो-

                                (i) विमानपत्तन के हैं;

                                (ii) विमानपत्तन के प्रयोजनों के लिए पट्टे पर लिए गए हैं;

                (iii) भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य तत्स्थानी विधि के उपबंधों के अधीन प्राधिकरण के लिए अर्जित किए गए हैं ।

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस खंड के प्रयोजनों के लिए विमानपत्तन" के अंतर्गत प्राइवेट विमानपत्तन भी है;

                                (ख) बेदखली अधिकारी" से प्राधिकरण द्वारा धारा 28ख के अधीन उस रूप में नियुक्त कोई अधिकारी अभिप्रेत है;

                                (ग) परिसर" से अभिप्रेत है कोई भूमि या भवन या किसी भवन का भाग और उसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं-

                                                (i) ऐसे भवन या भवन के भाग से अनुलग्न बाग, मैदान और उपभवन, यदि कोई हों; और

(ii) ऐसे भवन या भवन के भाग से संयोजित कोई फिटिंगें जो उसके अधिक फायदाप्रद उपभोग के लिए हों;

(घ) किन्हीं विमानपत्तन परिसरों के संबंध में किराया" से अभिप्रेत है परिसरों के प्राधिकृत अधिभोग के लिए सावधिक रूप से संदेय प्रतिफल और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं-

                                                (i) परिसरों के अधिभोग के संबंध में बिजली, पानी या किसी अन्य सेवा के लिए कोई प्रभार; और

                                                (ii) परिसरों के संबंध में संदेय कोई कर, चाहे जिस नाम से ज्ञात हो;

                                (ङ) अधिकरण" से धारा 28झ की उपधारा (1) के अधीन स्थापित विमानपत्तन अपील अधिकरण अभिप्रेत है;

                (च) किसी विमानपत्तन परिसर के संबंध में अप्राधिकृत अधिभोग" से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति द्वारा विमानपत्तन परिसरों पर, ऐसे अधिभोग के लिए प्राधिकार के बिना अधिभोग और इसके अंतर्गत उस प्राधिकार के (चाहे अनुदान द्वारा या अंतरण के किसी अन्य ढंग द्वारा हो) जिसके अधीन, उक्त परिसरों का अधिभोग उसे अनुज्ञात किया गया था, समाप्त हो जाने के पश्चात् या किसी भी अन्य कारण से उसके पर्यवसित हो जाने के पश्चात्, उक्त विमानपत्तन परिसरों पर किसी व्यक्ति के अधिभोग का बना रहना भी है ।

28ख. बेदखली अधिकारियों की नियुक्ति-प्राधिकरण, साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा, इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए अपने उतने अधिकारियों को जितने वह ठीक समझे, बेदखली अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगा, और उन स्थानीय सीमाओं को, जिनके भीतर विमानपत्तन परिसरों के उन प्रवर्गों को परिभाषित कर सकेगा जिनके संबंध में बेदखली अधिकारी, इस अध्याय द्वारा या उसके अधीन बेदखली अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे और अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करेंगे ।

28ग. बेदखली के आदेश के विरुद्ध कारण बताओ सूचना-(1) यदि बेदलखी अधिकारी की यह राय है कि कोई विमानपत्तन परिसर किन्हीं व्यक्तियों के अप्राधिकृत अधिभोग में है और उन्हें बेदखल किया जाना चाहिए तो बेदखली अधिकारी, इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से लिखित सूचना जारी करेगा जिसमें सभी संबंधित व्यक्तियों से यह कारण बताने की अपेक्षा की जाएगी कि बेदखली का आदेश क्यों न किया जाए ।

(2) सूचना में,-

                (क) वे आधार विनिर्दिष्ट होंगे जिन पर बेदखली का आदेश किए जाने का प्रस्ताव है;

                (ख) सभी संबंधित व्यक्तियों अर्थात् उन सभी व्यक्तियों से जो विमानपत्तन परिसर पर अधिभोग रखते हैं या उसमें हित का दावा करते हैं, अपेक्षा की जाएगी किः-

(i) वे ऐसी तारीख को या उसके पूर्व, जो सूचना में विनिर्दिष्ट हो, जो सूचना के जारी किए जाने की तारीख से सात दिन से पूर्वतर की तारीख न हो, प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण, यदि कोई हो, दर्शित करें; और

(ii) सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को, उस साक्ष्य के साथ जो वे दर्शित कारणों के समर्थन में पेश करना चाहते हैं और वैयक्तिक सुनवाई के लिए भी, यदि ऐसी सुनवाई की वांछा की गई है,

                बेदखली अधिकारी के समक्ष उपसंजात हों ।

(3) बेदखली अधिकारी, विमानपत्तन परिसर के बाहरी द्वार पर या किसी अन्य सहजदृश्य भाग में चिपकवाकर या किसी ऐसी अन्य रीति से, जो विहित की जाए, सूचना की तामील करवाएगा और तब संबंधित व्यक्तियों को सूचना सम्यक् रूप से दी गई समझी जाएगी ।

(4) जहां बेदखली अधिकारी यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति विमानपत्तन परिसर का अधिभोग रखता है वहां वह उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्रत्येक व्यक्ति पर सूचना की एक प्रति डाक द्वारा या उस व्यक्ति को परिदत्त करके या निविदत्त करके अथवा ऐसी किसी अन्य रीति से, जो विहित की जाए, तामील करवाएगा ।

28घ. अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली-(1) यदि किसी व्यक्ति द्वारा धारा 28ग के अधीन सूचना के अनुसरण में दर्शित कारण, यदि कोई हो, और उसके समर्थन में उसके द्वारा प्रस्तुत किसी साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात् और धारा 28ग की उपधारा (2) के खंड (ख) के उपखंड (ii) के अधीन की गई वैयक्तिक सुनवाई, यदि कोई हो, के पश्चात्, बेदखली अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि विमानपत्तन परिसर अप्राधिकृत अधिभोग में हैं तो बेदखली अधिकारी बेदखली का आदेश उसमें उसके लिए कारणों को लेखबद्ध करते हुए, यह निदेश देते हुए कर सकेगा कि विमानपत्तन परिसर उन व्यक्तियों द्वारा, जिनके अधिभोग में वे हों, ऐसी तारीख को जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, खाली कर दिए जाएंगे और आदेश की एक प्रति विमानपत्तन परिसरों के बाहरी द्वार पर या किसी अन्य सहजदृश्य भाग पर चिपकवाएगा ।

(2) यदि कोई व्यक्ति, आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पूर्व अथवा उपधारा (1) के अधीन प्रकाशन की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, जो भी पूर्वतर हो, बेदखली के आदेश का पालन करने से इंकार करता है या असफल रहता है तो बेदखली अधिकारी या बेदखली अधिकारी द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् या पूर्वोक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्, जो भी पूर्वत्तर हो, विमानपत्तन परिसर से उस व्यक्ति को बेदखल कर सकेगा और उसका कब्जा ले सकेगा तथा उस प्रयोजन के लिए यथा आवश्यक बल का प्रयोग कर सकेगा ।

28ङ. अप्राधिकृत अधिभोगियों द्वारा विमानपत्तन परिसर में छोड़ी गई संपत्ति का व्ययन-(1) जहां धारा 28घ के अधीन किसी विमानपत्तन परिसर से किन्हीं व्यक्तियों को बेदखल किया गया है, वहां बेदखली अधिकारी, उन व्यक्तियों को, जिनसे विमानपत्तन परिसर का कब्जा लिया गया है, दस दिन की सूचना देकर और कम से कम एक ऐसे समाचारपत्र में, जिसका उस परिक्षेत्र में परिचालन हो, प्रकाशन के पश्चात्, ऐसे परिसरों में पड़ी रह गई किसी संपत्ति को हटा सकेगा या हटवा सकेगा या उसका लोक नीलामी द्वारा व्ययन कर सकेगा ।

(2) जहां किसी संपत्ति का उपधारा (1) के अधीन विक्रय किया जाता है, वहां उसके विक्रय आगम, विक्रय के व्ययों और ऐसी रकम की, यदि कोई हो जो केंद्रीय सरकार या निगमित प्राधिकरण को किराए के बकाया या नुकसानी या खर्चों के कारण देय हो, कटौती करने के पश्चात्, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को सदंत्त किए जाएंगे, जो बेदखली अधिकारी को उसके हकदार प्रतीत होते हों :

परंतु जहां बेदखली अधिकारी इस बारे में विनिश्चय करने में असमर्थ है कि किस व्यक्ति या व्यक्तियों को शेष रकम का संदाय किया जाना चाहिए या उसको किन-किन व्यक्तियों में प्रभाजित किया जाना चाहिए तो वह ऐसे विवाद को अधिकरण को निर्दिष्ट कर सकेगा तथा उस पर अधिकरण का विनिश्चय अंतिम होगा ।

28च. अप्राधिकृत सन्निर्माण आदि को हटाने की शक्ति-(1) कोई व्यक्ति, किसी विमानपत्तन परिसर पर या उसके पास या उसके सामने उस प्राधिकार के अनुसार (चाहे अनुदान द्वारा या अंतरण के किसी अन्य ढंग द्वारा हो) जिसके अधीन उसे उक्त विमानपत्तन परिसर का अधिभोग अनुज्ञात किया गया था, के सिवाय,-

(क) कोई भवन या कोई जंगम या स्थावर संरचना या फिक्सचर निर्मित नहीं करेगा या नहीं रखेगा या खड़ा नहीं करेगा;

(ख) कोई माल न तो प्रदर्शित करेगा और न ही फैलाएगा;

(ग) कोई पशु या अन्य जीव-जन्तु न तो लाएगा और न रखेगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन में किसी विमानपत्तन परिसर में कोई भवन या अन्य स्थावर संरचना या फिक्सचर निर्मित किया गया है या रखा गया है या खड़ा किया गया है, वहां बेदखली अधिकारी, ऐसे भवन या अन्य संरचना या फिक्सचर को निर्मित करने वाले व्यक्ति पर एक सूचना की तामील करेगा जिसमें उससे अपेक्षित होगा कि वह सूचना में यथाविनिर्दिष्ट अवधि, जो सात दिन से अन्यून किंतु तीस दिन से अनधिक की होगी, के भीतर या तो वह विमानपत्तन परिसर से ऐसे भवन या अन्य संरचना या फिक्सचर को हटा दे या कारण दर्शित करे कि वह उन्हें क्यों नहीं हटाएगा और ऐसे व्यक्ति द्वारा कारण दर्शित करने अथवा विमानपत्तन परिसर से ऐसे भवन या अन्य सरंचना को हटाने से चूक करने या इंकार करने पर अथवा यदि दर्शित किया गया कारण बेदखली अधिकारी की राय में पर्याप्त नहीं है, तो बेदखली अधिकारी, आदेश द्वारा, विमानपत्तन परिसर से उस भवन या अन्य संरचना या फिक्सचर को हटा सकेगा या हटवा सकेगा और इस प्रकार हटाए जाने की लागत, उस व्यक्ति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूलनीय होगी ।

(3) जहां किसी व्यक्ति द्वारा उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन में किसी विमानपत्तन परिसर में कोई जंगम संरचना या फिक्सचर निर्मित किया गया है, रखा गया है या खड़ा किया गया है अथवा कोई माल प्रदर्शित किया गया है या फैलाया गया है अथवा कोई पशु या अन्य जीव-जन्तु लाया गया है या रखा गया है, वहां बेदखली अधिकारी, आदेश द्वारा, सूचना दिए बिना, यथास्थिति, ऐसी संरचना, फिक्सचर, माल, पशु या अन्य जीव-जन्तु को विमानपत्तन परिसर से हटा सकेगा या हटवा सकेगा और इस प्रकार हटाए जाने की लागत उस व्यक्ति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूलनीय होगी ।

28छ. विमानपत्तन परिसर की बाबत किराए या नुकसानी के संदाय की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) जहां किसी व्यक्ति पर विमानपत्तन परिसर के संबंध में संदेय किराया बकाया है, वहां बेदखली अधिकारी आदेश द्वारा, उस व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे समय के भीतर और उतनी किस्तों में जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, उसका संदाय करे ।

(2) जहां कोई व्यक्ति किसी विमानपत्तन परिसर में अप्राधिकृत अधिभोगी है या किसी समय रहा है, वहां बेदखली अधिकारी, नुकसानी के निर्धारण के ऐसे सिद्धांतों को जो विहित किए जाएं, ध्यान में रखते हुए, ऐसे परिसर के उपयोग और अधिभोग के कारण हुई नुकसानी का निर्धारण कर सकेगा और आदेश द्वारा उस व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे समय के भीतर उतनी किस्तों में जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, नुकसानी का संदाय करे ।

(3) बेदखली अधिकारी, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कोई आदेश करते समय, निदेश दे सकेगा कि, यथास्थिति, किराए या बकाया या नुकसानी, ऐसी दर से, जो विहित की जाए, साधारण ब्याज के साथ संदेय होगी ।

(4) किसी व्यक्ति के विरुद्ध, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को लिखित सूचना न दे दी जाए कि वह सात दिन से अन्यून, किंतु तीस दिन से अनधिक ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, यह दर्शित करे कि ऐसा आदेश क्यों न किया जाए और जब तक कि उसके आक्षेपों, यदि कोई हों, और किसी साक्ष्य, जो वह उसके समर्थन में पेश करे, पर बेदखली अधिकारी द्वारा विचार नहीं कर लिया जाए ।

28ज. बेदखली अधिकारियों की शक्तियां-बेदखली अधिकारी को, इस अध्याय के अधीन कोई जांच करने के प्रयोजन के लिए, वही शक्तियां होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय निम्नलिखित विषयों के संबंध में किसी सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-

                (क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

                (ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;

                (ग) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।

28झ. अधिकरण की स्थापना-(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक अधिकरण की स्थापना करेगी जो विमानपत्तन अपील अधिकरण" के नाम से ज्ञात होगा और वह इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करेगा ।

(2) अधिकरण में एक अध्यक्ष होगा (जिसे इस अधिनियम में इसके पश्चात् अधिकरण के अध्यक्ष के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) ।

(3) अधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा :

परंतु अधिकरण अपनी बैठकें ऐसे अन्य स्थानों पर भी कर सकेगा जो अधिकरण का अध्यक्ष, समय-समय पर, अधिकरण के समक्ष अपीलों का विनिश्चय करने में सुविधा को ध्यान में रखते हुए, विनिश्चित करे ।

(4) अधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति, केंद्रीय सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के परामर्श से की जाएगी ।

(5) कोई व्यक्ति अधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा जब तक कि वह किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश न हो या न रहा हो या होने के लिए अर्हित न हो ।

(6) अधिकरण का अध्यक्ष, उस तारीख से, जिसको वह अपना पदभार ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि के लिए या जब तक वह बासठ वर्ष की आयु प्राप्त न कर ले, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उस रूप में पद धारण करेगा ।

(7) अधिकरण के अध्यक्ष को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं :

परंतु अधिकरण के अध्यक्ष के न तो वेतन और भत्तों में और न ही सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन किया जाएगा ।

28ञ. त्यागपत्र और हटाया जाना-(1) अधिकरण का अध्यक्ष, केंद्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित सूचना द्वारा अपना पद त्याग सकेगा :

परंतु अधिकरण का अध्यक्ष, जब तक कि उसे केंद्रीय सरकार द्वारा उससे पहले पद त्याग करने के लिए अनुज्ञा नहीं दी जाती है, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास का अवसान होने तक या उसके पदोत्तरवर्ती के रूप में सम्यक्ः रूप से नियुक्त व्यक्ति द्वारा अपना पद ग्रहण कर लेने तक या उसकी पदावधि का अवसान होने तक, इनमें से जो भी पूर्वतम हो, अपना पद धारण करता रहेगा ।

(2) अधिकरण का अध्यक्ष अपने पद से साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर जो उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा ऐसी जांच किए जाने के पश्चात्, जिसमें ऐसे अध्यक्ष को उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दे दी गई हो और उन आरोपों के संबंध में युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर दे दिया गया हो, केंद्रीय सरकार द्वारा किए गए ऐसे आदेश से ही हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(3) केंद्रीय सरकार, अधिकरण के अध्यक्ष के कदाचार या असमर्थता का अन्वेषण करने के लिए प्रक्रिया, नियमों द्वारा, विनियमित कर सकेगी ।

28ट. अधिकरण को अपीलें-(1) इस अध्याय के अधीन बेदखली अधिकारी के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस आदेश की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर, ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, अधिकरण को अपील कर सकेगा :

परंतु अधिकरण, उक्त पंद्रह दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किन्तु पूर्वोक्त तारीख से तीस दिन की अवधि के पश्चात् नहीं, कोई अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाए कि अपीलार्थी समय पर अपील फाइल करने से पर्याप्त हेतुक द्वारा निवारित किया गया था ।

(2) अधिकरण, उपधारा (1) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, अपीलार्थी और बेदखली अधिकारी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, ऐसा आदेश पारित करेगा जैसा वह ठीक समझे ।

(3) अधिकरण, अपील फाइल किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर अपील का निपटारा करेगा :

परंतु अधिकरण, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, पंद्रह दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर अपील का निपटारा कर सकेगा ।

(4) उपधारा (2) के अधीन पारित अधिकरण का कोई आदेश सिविल न्यायालय की डिक्री के रूप में निष्पादनीय होगा और उसका निष्पादन करने के लिए अधिकरण, उसकी प्रति अधिकारिता रखने वाले सिविल न्यायालय को भेजेगा, जो यथासंभव शीघ्र उसका निष्पादन इस प्रकार करेगा मानो वह आदेश, उस न्यायालय द्वारा पारित डिक्री हो ।

(5) उस तारीख से ही जिससे किसी विषय के संबंध में अधिकरण द्वारा इस अध्याय के अधीन कोई अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार प्रयोक्तव्य होते हैं, किसी न्यायालय को (संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 226 तथा अनुच्छेद 227 के अधीन उच्च न्यायालय के सिवाय) ऐसे विषय के संबंध में कोई अधिकारिता, शक्तियां या प्राधिकार नहीं होगा या उसे उनका प्रयोग करने का अधिकार नहीं होगा ।

28ठ. अधिकरण की शक्तियां और प्रक्रिया-(1) अधिकरण, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में अधिकथित प्रक्रिया से आबद्ध नहीं होगा किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों से मार्गदर्शित होगा और इस अधिनियम और केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए अधिकरण को, अपनी प्रक्रिया अधिकथित करने और उसे विनियमित करने की शक्ति होगी जिसमें अपनी जांच के स्थानों और समयों को नियत करना तथा यह विनिश्चित करना कि वह खुला न्यायालय होगा या प्राईवेट, सम्मिलित है ।

(2) अधिकरण को, इस अध्याय के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित विषयों के संबंध में वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-

                (क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

                (ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;

                (ग) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।

(3) अधिकरण के समक्ष कोई कार्यवाही, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत और धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी और अधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

28ड. आदेशों का अंतिम होना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अध्याय के अधीन किसी बेदखली अधिकारी या अधिकरण द्वारा किया गया प्रत्येक आदेश अंतिम होगा और किसी वाद, आवेदन, निष्पादन या अन्य कार्यवाही में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा तथा इस अध्याय द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी कार्रवाई के संबंध में किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई व्यादेश अनुदत्त नहीं किया जाएगा ।

28ढ. इस अध्याय के अधीन अपराध-(1) जो कोई किसी विमानपत्तन परिसर को विधिविरुद्धतया अधिभोग में रखता है वह कारावास से जिसकी अवधि छह वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा ।

(2) जो कोई इस अध्याय के अधीन बेदखली अधिकारी या अधिकरण के किसी आदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है, वह कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा ।

(3) यदि कोई व्यक्ति जिसे इस अध्याय के अधीन किसी विमानपत्तन परिसर से बेदखल कर दिया गया है, अधिभोग के प्राधिकार के बिना परिसर को पुनः अधिभोग में रखता है तो वह कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा ।

(4) न्यायालय, किसी व्यक्ति को उपधारा (3) के अधीन सिद्धदोष ठहराते समय, उस व्यक्ति को संक्षेपतः बेदखल करने का आदेश करेगा और वह इस अध्याय के अधीन की जाने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी बेदखली का   भागी होगा ।

28ण. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का प्रत्यक्षतः भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :

                परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अध्याय में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।

                (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अध्याय के अधीन दंडनीय कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति से या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

                (क) कंपनी" से कोई निगम निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई फर्म या व्यष्टियों का संगम भी है;

                (ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

28त. अपराधों का संज्ञान-कोई भी न्यायालय इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का संज्ञान प्राधिकरण, बेदखली अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा किए गए परिवाद पर के सिवाय न करेगा और महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्नतर कोई न्यायालय इस अध्याय के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

28थ. जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति-यदि बेदखली अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति किसी विमानपत्तन परिसर के अप्राधिकृत अधिभोग में है तो वह या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, उन व्यक्तियों या किसी अन्य व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह उन व्यक्तियों के नाम और अन्य विशिष्टियों के संबंध में जानकारी दे जो विमानपत्तन परिसर के अधिभोग में हैं और प्रत्येक व्यक्ति जिससे ऐसी अपेक्षा की जाए, वह सभी जानकारी जो उसके कब्जे में है, देने के लिए बाध्य होगा ।

28द. अधिकारियों आदि की सहायता करना-सरकार के सभी अधिकारियों, जिनके अंतर्गत पुलिस अधिकारी और कोई स्थानीय प्राधिकारी भी हैं, का यह कर्तव्य होगा कि वे बेदखली अधिकारी या प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों की इस अध्याय के अधीन उनके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करें और सहयोग दें ।]

अध्याय 6

प्रकीर्ण

29. वार्षिक रिपोर्ट का प्रस्तुत किया जाना-(1) प्राधिकरण, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र, उस वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों का विवरण देते हुए यथा विहित प्ररूप में एक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा उसे केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा और इस रिपोर्ट में उन क्रियाकलापों का भी विवरण दिया जाएगा, जिनके प्राधिकरण द्वारा, आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान किए जाने की संभावना है ।

(2) केन्द्रीय सरकार, ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

30. प्रत्यायोजन-प्राधिकरण, लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों और कृत्यों में से (धारा 42 के अधीन शक्तियों के सिवाय) उन शक्ितयों और कृत्यों का प्रत्यायोजन, जिन्हें प्रत्यायोजित करना वह आवश्यक समझे, अध्यक्ष को या प्राधिकरण के किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को ऐसी शर्तों और सीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन कर सकेगा, जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं ।

31. प्राधिकरण के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन-प्राधिकरण के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष या किसी ऐसे अन्य सदस्य के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे जो प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो और प्राधिकरण द्वारा निष्पादित की गई अन्य सभी लिखतें प्राधिकरण के किसी ऐसे अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएगी, जिसे प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो ।

32. प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-प्राधिकरण के सभी अधिकारी और कर्मचारी जब वे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या उनका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।

33. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए, अथवा प्राधिकरण के या उसके नियंत्रण के अधीन विमानपत्तन, सिविल अन्तःक्षेत्रों, हेलीपत्तन, हवाई पट्टी, वैमानिक संचार स्टेशनों या अन्य वस्तुओं में से किसी में किसी खराबी के परिणामस्वरूप किसी वायुयान या यान को हुए किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही प्राधिकरण के अथवा प्राधिकरण के किसी सदस्य या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी  [या अधिकरण के अध्यक्षट के विरुद्ध न होगी ।

34. खोई हुई सम्पत्ति की अभिरक्षा और व्ययन-ऐसे विनियमों के अधीन रहते हुए जिन्हें प्राधिकरण इस निमित्त बनाए, प्राधिकरण किसी ऐसी संपत्ति को, जो उचित अभिरक्षा में न होते हुए, प्राधिकरण के या उसके व्यापक नियंत्रण के अधीन किसी परिसर में या किसी ऐसे परिसर पर या किसी वायुयान में पाई जाए, सुरक्षित अभिरक्षा और वापसी सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करेगा ।

35. आय-कर से संबंधित उपबंध-आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) या आय-कर से या आय, लाभों या अभिलाभों पर किसी अन्य कर से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के प्रयोजनों के लिए, प्राधिकरण आय-कर अधिनियम, 1961 के अर्थ में कम्पनी समझा जाएगा और अपनी आय, लाभों और अभिलाभों पर तद्नुसार कर का दायी होगा ।

36. कतिपय संकर्मों का भार ग्रहण करने की प्राधिकरण की शक्ति-प्राधिकरण किसी व्यक्ति की ओर से किन्हीं सकर्मों या सेवाओं या किसी वर्ग के संकर्मों या सेवाओं के निष्पादन का ऐसे निबंधनों और शर्तों पर भार ग्रहण कर सकेगा जो प्राधिकरण और संबंधित व्यक्ति के बीच तय पाई जाएं ।

37. निदेश जारी करने की शक्ति-(1) प्राधिकरण या उसके द्वारा इस निमित्त विशेषतः प्राधिकृत कोई अधिकारी, समय-समय पर आदेश द्वारा, वायुयान अधिनियम, 1934 (1934 का 22) के और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों से संगत, उक्त अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (2)  के खंड (च), (ज), (झ), (ञ), (ट), (ड), (त), (थथ) और (द) में विनिर्दिष्ट किसी विषय की बाबत, ऐसी दशा में जब प्राधिकरण या अधिकारी का समाधान हो जाता है कि भारत की सुरक्षा के हित में या वायुयान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, वायुयान के चालन में लगे या किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी या सिविल अन्तःक्षेत्र का प्रयोग करने वाले किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को निदेश जारी कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए प्रत्येक निदेश का अनुपालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिन्हें ऐसा निदेश जारी किया जाता है ।

(3) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन जारी किए गए किसी निदेश के अनुपालन में जानबूझकर चूक करता है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

38. किसी विमानपत्तन के प्रबंध से प्राधिकरण को अस्थायी रूप से वंचित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, तो वह, आदेश द्वारा, प्राधिकरण को निदेश दे सकेगी कि वह किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र, वैमानिक संचार स्टेशन या किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन के अन्य किसी अभिकरण या विभाग का प्रशासन, प्रबंध या वैसे ही अन्य कृत्य उस तारीख से और उस व्यक्ति को, जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो, सौंप दे और प्राधिकरण ऐसे निदेश का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश जारी करने से पूर्व प्राधिकरण को मामले में सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा ।

(2) जहां किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अन्तःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग का प्रबंध उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् प्राधिकृत व्यक्ति कहा गया है), सौंपा जाता है, वहां प्राधिकरण ऐसे विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अन्तःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में इस अधिनियम के अधीन अपनी सभी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन नहीं करेगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा ऐसे अनुदेशों के, यदि कोई हों, अनुसार किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को समय-समय पर दिए जाएं :

परन्तु प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना ऐसी किसी शक्ति का प्रयोग या कृत्य का निर्वहन नहीं किया जाएगा जिसे केन्द्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।

(3) उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश, जब तक विखंडित न कर दिया जाए, उस तारीख से, जिसको विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग का प्रबंध प्राधिकृत व्यक्ति को सौंपा जाता है, छह मास की अवधि के लिए प्रवृत्त रहेगा :

परन्तु केन्द्रीय सरकार ऐसी अवधि को इतनी अतिरिक्त अवधि या अवधियों तक बढ़ा सकेगी जो अठारह मास से अधिक न होगी ।

(4) उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश के प्रवर्तन के दौरान केन्द्रीय सरकार इस बात के लिए सक्षम होगी कि वह प्राधिकरण को समय-समय पर ऐसे निदेश दे जो उस विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में, जिसका प्रबंध प्राधिकृत व्यक्ति को सौंपा गया है, उस प्राधिकृत व्यक्ति को, इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण को, शक्तियों का प्रयोग करने और कृत्यों का निर्वहन करने के लिए समर्थ बनाने के लिए और विशिष्टतया विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के प्रबंध के लिए प्राधिकरण की निधि से कोई धनराशि उस प्राधिकृत व्यक्ति को अन्तरित करने के लिए आवश्यक हो और प्राधिकरण, ऐसे प्रत्येक निदेश का अनुपालन करेगा ।

(5) किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश के प्रवर्तन की समाप्ति पर प्राधिकृत व्यक्ति ऐसे विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण की शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वहन नहीं करेगा और प्राधिकरण इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वहन करना चालू कर देगा ।

(6) किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश के प्रवर्तन की समाप्ति पर, प्राधिकृत व्यक्ति ऐसी कोई सम्पत्ति (जिसके अन्तर्गत कोई धनराशि या अन्य आस्ति भी है), जो ऐसे विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन के प्रबंध के संबंध में उसके पास बच रही है, प्राधिकरण को सौंप देगा ।

(7) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश के प्रवर्तन की अवधि के दौरान किसी विमानपत्तन, हेलीपत्तन, विमानपट्टी, सिविल अंतःक्षेत्र या वैमानिक संचार स्टेशन या उसके किसी अन्य अभिकरण या विभाग के संबंध में प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा विधिपूर्वक की गई कोई बात या कार्रवाई प्राधिकरण द्वारा की गई समझी जाएगी और प्राधिकरण पर आबद्धकर होगी ।

39. प्राधिकरण को प्रतिष्ठित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-यदि किसी समय, केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि-

(क) गंभीर आपात के कारण प्राधिकरण इस अधिनियम के उपबधों द्वारा या इनके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है; या

(ख) प्राधिकरण ने केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए किसी निदेश के अनुपालन में या इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है और उस व्यतिक्रम के फलस्वरूप प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति या किसी एकीकृत जांच चौकी के प्रशासन का ह्रास हो गया है, या

(ग) ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं, जिनके कारण लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है,

तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, छह मास से अनधिक इतनी अवधि के लिए, जितनी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्राधिकरण को अतिष्ठित कर सकेगी :

परन्तु खंड (ख) में वर्णित कारणों से इस उपधारा के अधीन कोई अधिसूचना जारी करने से पूर्व, केन्द्रीय सरकार प्राधिकरण को यह कारण दर्शित करने के लिए उचित अवसर देगी कि उसे अतिष्ठित क्यों न कर दिया जाए, और प्राधिकरण के स्पष्टीकरणों और आपत्तियों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण को अतिष्ठित करने वाली अधिसूचना के प्रकाशन पर,-

(क) सभी सदस्य, अतिष्ठित होने की तारीख से, उस रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख) उन सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका प्रयोग या निर्वहन इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन प्राधिकरण द्वारा या उसकी ओर से किया जा सकता है, प्रयोग या निर्वहन, तब तक जब तक उपधारा (3) के अधीन प्राधिकरण का पुनर्गठन नहीं कर दिया जाता, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें केन्द्रीय सरकार निदेश दे;

(ग) जब तक उपधारा (3) के अधीन प्राधिकरण का पुनर्गठन नहीं कर दिया जाता, प्राधिकरण के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन सभी संपत्ति केन्द्रीय सरकार में निहित होगी ।

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिक्रमण की अवधि की समाप्ति पर केन्द्रीय सरकार-

(क) अधिक्रमण की अवधि को छह मास से अनधिक इतनी अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकेगी जितनी वह आवश्यक समझे; या

(ख) नई नियुक्ति द्वारा प्राधिकरण का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में वे सदस्य जिन्होंने उपधारा (2) के   खंड (क) के अधीन अपने पदों को रिक्त किया था, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझे जाएंगे :

परन्तु केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन मूलतः विनिर्दिष्ट अथवा इस उपधारा के अधीन बढ़ाई गई अधिक्रमण की अवधि समाप्ति के पूर्व किसी समय, इस उपधारा के खंड (ख) के अधीन कार्रवाई कर सकेगी ।

                (4) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना को और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की तथा उन परिस्थितियों की, जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई, पूरी रिपोर्ट को शीघ्रतम अवसर पर संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

                40. निदेश जारी करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) इन अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जैसे केन्द्रीय सरकार लिखित रूप में समय-समय पर उसे दे :

                परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई निदेश दिए जाने के पूर्व यावत्साध्य, प्राधिकरण को अपने विचार अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।

                (2) इस बाबत कि कोई प्रश्न नीति के बारे में है या नहीं, केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

                (3) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, प्राधिकरण को धारा 12 की उपधारा (3) के अधीन उसके किसी कृत्य के निर्वहन के बारे में निदेश जारी कर सकेगी और प्राधिकरण ऐसे निदेशों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगी ।

41. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे :-

(क) उस सूचना की अवधि, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 5 की उपधारा (1) के परन्तुक के खंड (ख) के अधीन प्राधिकरण के किसी अंशकालिक सदस्य की नियुक्ति समाप्त करने के लिए दी जाए;

(ख) धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकरण के सदस्यों की सेवा-शर्तें;

(ग) उस सूचना की अवधि, जो किसी सदस्य द्वारा धारा 5 की उपधारा (3) के अधीन अपने पद त्याग के लिए दी जाए;

(घ) वे उपबंध, जिनके अध्यधीन प्राधिकरण द्वारा अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त किए जा सकेंगे और उस प्रवर्ग के अधिकारी जिन्हें धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के पश्चात् नियुक्त किया जा सकेगा;

(ङ) वे उपबंध, जिनके अधीन रहते हुए प्राधिकरण धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन विमानपत्तन, सिविल अंतःक्षेत्र और वैमानिक संचार स्टेशनों का प्रबंध कर सकेगा;

 [(ङङ) धारा 22क के अधीन  [महा विमानपत्तनों से भिन्न विमानपत्तनों के संबंध में विकास फीस की दर और] उक्त फीस के विनियमन और उपयोजन की रीति;]

(च) वह रीति, जिसमें प्राधिकरण धारा 24 की उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन अपनी निधियां विनिहित कर सकेगा;

(छ) वह प्ररूप, जिसमें प्राधिकरण द्वारा धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन लेखाओं का वार्षिक विवरण तैयार किया जाएगा;

1[(छत्) धारा 28ग की उपधारा (3) के अधीन सूचना की तामील की अन्य रीति;

(छत्त्) धारा 28ग की उपधारा (4) के अधीन सूचना की तामील की अन्य रीति;

(छत्त्त्) धारा 28छ की उपधारा (2) के अधीन नुकसानी के निर्धारण के सिद्धांत;

(छत्ध्) धारा 28छ की उपधारा (3) के अधीन साधारण ब्याज की दर;

(छध्) धारा 28ज के खंड (ग) के अधीन कोई अन्य विषय;

(छध्त्) धारा 28झ की उपधारा (7) के अधीन अधिकरण के अध्यक्ष को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें;

(छध्त्त्) धारा 28ञ की उपधारा (3) के अधीन अधिकरण के अध्यक्ष के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण की प्रक्रिया;

(छध्त्त्त्) धारा 28ट की उपधारा (1) के अधीन अपील का प्ररूप;

(छत्न्) धारा 28ठ की उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन कोई अन्य विषय;]

(ज) चह प्ररूप जिसमें प्राधिकरण के क्रियाकलापों का विवरण देते हुए रिपोर्ट की जाएगी और धारा 29 की   उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय सरकार को प्रस्तुत की जाएगी; और

(झ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।

42. विनियम बनाने की शक्ति-(1) प्राधिकरण, इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए ऐसे सभी विषयों की बाबत, जिनके लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम और तद्घीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :-

(क) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण के अधिवेशनों के लिए समय और स्थान, और ऐसे अधिवेशनों में कारबार जिसके अंतर्गत गणपूर्ति भी है, किए जाने के बारे में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;

(ख) प्राधिकरण द्वारा धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें और पारिश्रमिक;

(ग) धारा 12 की उपधारा (3) के खंड (ङ) के अधीन प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के लिए निवास स्थान का सन्निर्माण;

(घ) धारा 12 की उपधारा (3) के खण्ड (छ) के अधीन प्राधिकरण द्वारा स्थापित किसी भाण्डागार में माल का भंडारकरण या प्रसंस्करण और ऐसे भंडारकरण या प्रसंस्करण के लिए फीसों का प्रभारण;

(ङ) वे संविदाएं या उस वर्ग की संविदाएं, जिन्हें प्राधिकरण की सामान्य मुद्रा से मुद्रांकित किया जाना है और वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे प्राधिकरण द्वारा धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन कोई संविदा की जा सकेगी;

(च) खोई हुई संपत्ति की अभिरक्षा और वापसी और वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन खोई हुई संपत्ति, धारा 34 के अधीन उसके हकदार व्यक्तियों को वापस की जा सकेगी;

(छ) ऐसे मामलों में जहां खोई हुई संपत्ति वापस नहीं की जाती है, ऐसी संपत्तियों का व्ययन;

(ज) विमानपत्तन या सिविल अन्तःक्षेत्र का उपयोग करने वाले वायुयानों, यानों और व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्िचत करने तथा विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र में वायुयान के उपयोग और प्रचालन से जनता के लिए संकट पैदा होने का निवारण;

(झ) विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के सामान्य कार्यकरण के लिए उसके भीतर बाधाओं की रोकथाम;

(ञ) विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के भीतर प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट स्थानों से भिन्न स्थानों पर किसी ढोने वाले यान के ठहराने या प्रतीक्षा में रखने का प्रतिषेध;

(ट) विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के किसी भाग तक पहुंचने का निषेध या उस पर निर्बन्धन;

(ठ) विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के भीतर व्यवस्था बनाए रखना और वहां पर की संपत्ति के नुकसान का निवारण;

(ड) विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के भीतर विज्ञापन का विनियमन या निर्बन्धन;

(ढ) प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए गए अधिकारी द्वारा निदेश दिए जाने पर किसी व्यक्ति से विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र को या विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र के किसी विशेष भाग को छोड़ने की अपेक्षा; और

(ण) साधारणतः विमानपत्तन या सिविल अंतःक्षेत्र का दक्ष और उचित प्रबंध ।

                (3) उपधारा (2) के खंड (ज) से (ण) तक के खंडों में से (जिनमें ये दोनों खंड भी हैं) किसी के अधीन बनाए गए किसी भी विनियम में यह उपबन्ध किया जा सकेगा कि उसका उल्लंघन जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा और जहां उल्लंघन जारी रहता है, वहां, अतिरिक्त जुर्माने से, जो उस प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन ऐसे प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, बीस रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

                (4) इस धारा के अधीन प्राधिकरण द्वारा बनाया गया कोई भी विनियम तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित और राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिया जाता ।

                (5) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन पहले विनियम केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएंगे और राजपत्र में प्रकाशित किए जाने पर प्रभावी होंगे ।

                (6) उपधारा (5) के अधीन बनाए गए पहले विनियम तब तक प्रवृत्त रहेंगे जब तक प्राधिकरण विनियम नहीं बना लेता है और वे राजपत्र में प्रकाशित नहीं हो जाते हैं ।

43. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि, यथास्थिति, वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा, किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

44. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :

परन्तु ऐसा कोई भी आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी   हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

 ।45. 1934 के अधिनियम संख्यांक 22 का संशोधन-वायुयान अधिनियम, 1934 की धारा 5 की उपधारा (2) में,-

(क) खंड (ख) में अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1971 (1971 का 43) या राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1985 का 64)" शब्दों और अंकों के स्थान पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994" शब्द और अंक रखे जाएंगे;

                (ख) खंड (ख) के परन्तुक का लोप किया जाएगा ।

46. निरसन और व्यावृत्ति-(1) नियत दिन से ही,-

(i) अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1971 (1971 का 43) और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1985 का 64) निरसित हो जाएंगे;

(ii) पूर्वोक्त अधिनियमों के अधीन गठित अन्तरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण विद्यमान नहीं रहेंगे ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित उक्त अधिनियमों के अधीन की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात या कार्रवाई के, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत नहीं है, बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई है ।

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