Monday, 20, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

अमृतसर आइल वर्क्स (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1982 ( Amritsar Oil Works (Aquisition And Transfer Of Undertakings) Act, 1982 )


 

अमृतसर आइल वर्क्स (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1982

(1982 का अधिनियम संख्यांक 50)

[19 अक्तूबर, 1982]

स्वास्थ्यप्रद वनस्पति और परिष्कृत खाद्य तेलों को उचित कीमतों पर जनता

को प्रदाय करना सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित लोक स्वामित्व के या

नियंत्रित यूनिट के केन्द्रों को कायम रखने और उन्हें सुदृढ़ करने की

दृष्टि से जिससे कि संविधान के अनुच्छेद 39 के खण्ड (ख)

और खंड (ग) में विनिर्दिष्ट सिद्धांतों को सुनिश्चित

करने के लिए राज्य की नीति को क्रियान्वित

किया जा सके, अमृतसर आइल वर्क्स के

संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी

के उपक्रमों के अधिकार, हक

और हित का अर्जन और

अन्तरण का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी, अपने उपक्रमों, अर्थात् अमृतसर आइल वर्क्स, अमृतसर के नाम से ज्ञात कारखाने के माध्यम से कुछ वस्तुओं अर्थात् वनस्पति और परिष्कृत खाद्य तेलों के विनिर्माण और उत्पादन में लगी हुई है, जो समुदाय की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक हैं ;

और उक्त अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबंध को केन्द्रीय सरकार ने उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951(1951 का 65) के अधीन ग्रहण कर लिया था ;

और स्वास्थ्यप्रद वनस्पति और परिष्कृत खाद्य तेलों को उचित कीमतों पर जनता को प्रदाय करना सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित लोक स्वामित्व के या नियंत्रित यूनिट के केन्द्रों को कायम रखने और उन्हें सुदृढ़ करने के लिए उक्त अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के उपक्रम का अर्जन करना आवश्यक है ;

और ऐसा अर्जन, संविधान के अनुच्छेद 39 के खंड (ख) और खंड (ग) में विनिर्दिष्ट सिद्धान्तों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की नीति को क्रियान्वित करने के लिए है ;

भारत गणराज्य के तैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अमृतसर आइल वर्क्स (उपक्रमो का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1982 है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) अमृतसर आइल वर्क्स" से अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के ऐसे उपक्रम अभिप्रेत हैं जो वनस्पति और परिष्कृत खाद्य तेलों के विनिर्माण, उत्पादन और विपणन में लगे हुए हैं ;

(ख) अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी" से अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड, अमृतसर अभिप्रेत है, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अर्थ के भीतर एक कंपनी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय, डाकघर रेयन मिल्स, छेहरता, अमृतसर, पंजाब राज्य में है ;

(ग) नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ;

(घ) आयुक्त" से धारा 14 के अधीन नियुक्त संदाय आयुक्त अभिप्रेत है ;

(ङ) प्रबंध ग्रहण की तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबंध को प्रबंध बोर्ड ने उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 18कक के अधीन भारत सरकार के भूतपूर्व औद्योगिक विकास मंत्रालय के का० आ० 542(इ)/18ए०/ए०/आई०डी०आर०ए०/74 तारीख 13 सितम्बर, 1974 द्वारा किए गए आदेश के आधार पर अपने हाथ में लिया था ;

(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है ;

(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(ज) इस अधिनियम के किसी उपबंध के संबंध में विनिर्दिष्ट तारीख" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, उस उपबंध के प्रयोजन के लिए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी ;

(झ) सरकारी कंपनी" से ऐसी सरकारी कंपनी अभिप्रेत है जिसमें धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन अमृतसर आइल वर्क्स को निहित होने के लिए निदेश दिया गया है ;

(ञ) उन शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं है, किन्तु कंपनी अधिनियम, 1956(1956 का 1) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।

अध्याय 2

अमृतसर आइल वर्क्स का अर्जन और अन्तरण

3. अमृतसर आइल वर्क्स का केन्द्रीय सरकार को अंतरण और उसमें निहित होना-नियत दिन को अमृतसर आइल वर्क्स और अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के अधिकार, हक और हित, इस अधिनियम के आधार पर, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।

4. निहित होने के साधारण प्रभाव-(1) अमृतसर आइल वर्क्स के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम संपत्तियां, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर भी हैं, रोकड़ बाकी, हाथ की रोकड़, आरक्षित निधियां, विनिधान, अमृतसर आइल वर्क्स से संबंधित बही-ऋण और ऐसी संपत्ति में या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे, और सभी लेखा-बहियां, रजिस्टर और तत्संबंधी अन्य सभी दस्तावेजें भी हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों

(2) यथापूर्वोक्त समस्त संपत्तियां जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के बल पर, किसी भी न्यास, बाध्यता, बन्धक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय, या अन्य प्राधिकरण की कोई कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश की बाबत जो ऐसी संपत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करता है या जो ऐसी समस्त सम्पत्तियों या उनके किसी भाग की बाबत कोई रिसीवर नियुक्त करता है, यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।

(3) किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो इस अधिनियम के अधीन, केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, प्रत्येक बन्धकदार और किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, ऐसे बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा ।

(4) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का बन्धकदार या ऐसी किसी सम्पत्ति में या उसके सम्बम्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति, धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकमों में से, बन्धक धन या अन्य शोध्य रकमों के पूर्णतः या भागतः संदाय के लिए, अपने अधिकारों और हितों के अनुसार, दावा करने का हकदार होगा किन्तु ऐसा कोई बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो, केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है ।(5) अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी को, कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत, नियत दिन से पूर्व किसी समय अनुदत्त की गई है और वह नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त है तो वह अमृतसर आइल वर्क्स के प्रयोजनों के लिए और उनके सम्बन्ध में अपनी अस्तित्वावधि के अनुसार ऐसी तारीख को और उसके पश्चात् प्रवृत्त बनी रहेगी और अमृतसर आइल वर्क्स के धारा 5 के अधीन किसी सरकारी कम्पनी में निहित होने की तारीख से ही, सरकारी कम्पनी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गई है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत सरकारी कंपनी को अनुदत्त की गई थी और सरकारी कंपनी उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगी जिसके लिए अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी उसके निबन्धनों के अनुसार उसे धारण करती है ।

(6) यदि नियत दिन को, अमृतसर आइल वर्क्स के सम्बन्ध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित या किया गया कोई वाद, अपील या किसी भी प्रकार की अन्य कार्यवाही, लम्बित है, तो अमृतसर आइल वर्क्स के अन्तरण या इस अधिनियम की किसी बात के कारण, उसका उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध या जहां अमृतसर आइल वर्क्स, धारा 5 के अधीन किसी सरकारी कंपनी में, निहित होने के लिए निदेशित है, वहां उस सरकारी कंपनी द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी और प्रवृत्त की जा सकेगी ।

5. अमृतसर आइल वर्क्स का सरकारी कंपनी में निहित किए जाने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) धारा 3 और धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि कोई सरकारी कंपनी ऐसे निबन्धनों और शर्तों का, जिन्हें अधिरोपित करना वह सरकार ठीक समझे, अनुपालन करने के लिए रजामंद है या उसने उनका अनुपालन कर लिया है तो वह अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि अमृतसर आइल वर्क्स और अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी में उसके अधिकार, हक और हित, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, केन्द्रीय सरकार में निहित बने रहने के बजाय, या तो अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को या ऐसी किसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख को (जो नियत दिन से पहले की तारीख न हो), जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, उस सरकारी कंपनी में निहित हो जाएंगे ।

                (2) जहां अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में उसके अधिकार, हक और हित उपधारा (1) के अधीन सरकारी कंपनी में निहित हो जाते हैं वहां वह सरकारी कंपनी ऐसे निहित की तारीख से ही, अमृतसर आइल वर्क्स की स्वामी समझी जाएगी और अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में केन्द्रीय सरकार के अधिकार और दायित्व, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, सरकारी कंपनी के क्रमशः अधिकार और दायित्व समझे जाएंगे ।

6. कुछ पूर्व दायित्वों के लिए अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी का जिम्मेदार होना-(1) नियत दिन के पूर्व की अवधि के संबंध में उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न, अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी का प्रत्येक दायित्व अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी का दायित्व होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा और न कि केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां अमृतसर आइल वर्क्स किसी सरकारी कंपनी में निहित होता है, वहां सरकारी कंपनी के विरुद्ध ।

(2) अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी को प्रबंध ग्रहण की तारीख के पश्चात् अग्रिम दी गई रकम, उस पर शोध्य ब्याज सहित कोई दायित्व तथा प्रबंध ग्रहण की तारीख के पश्चात् की किसी अवधि की बाबत अमृतसर आइल वर्क्स में नियोजित व्यक्तियों की मजदूरी, वेतन तथा अन्य शोध्य, नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के दायित्व हो जाएंगे तथा उनका उन्मोचन, केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के लिए और उसकी ओर से सरकारी कंपनी द्वारा, या जब ऐसी मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य देय और संदेय हो जाएं, किया जाएगा ।

(3) शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि,-

(क) इस धारा या इस अधिनियम की किसी अन्य धारा में अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबंधित है उसके सिवाय,    उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी का नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कोई दायित्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध, प्रवर्तनीय नहीं होगा ;

(ख) अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण का कोई, अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश जो नियत दिन के पश्चात्, किसी ऐसे विषय, दावे या विवाद के संबंध में पारित किया गया है जो उपधारा (2) में निर्दिष्ट विषय न हो और जो उस तारीख के पूर्व उत्पन्न हुआ था, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ;

(ग) उस समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबंध के, नियत दिन के पूर्व किए गए उल्लंघन के लिए उपगत अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी का कोई दायित्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा

अध्याय 3

रकमों का संदाय

7. रकम का संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार को धारा 3 के अधीन अमृतसर आइल वर्क्स और अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी का उस वर्क्स के संबंध में उसके अधिकार, हक तथा और हित का अन्तरण करने और उन्हें उसमें निहित करने के लिए अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को केन्द्रीय सरकार द्वारा नकदी रूप में और अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट रीति से चौंसठ लाख अड़तालीस हजार और नौ सौ चवालीस रुपए तथा पैंसठ पैसे के बराबर रकम दी जाएगी

                (2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम के अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार द्वारा अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को दस हजार रुपए प्रतिवर्ष की दर से संगणित रकम, अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को, उसके अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबन्ध से वंचित किए जाने के लिए, प्रबन्ध ग्रहण की तारीख से, प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन की समाप्त होने वाली अवधि के लिए, संदाय किया जाएगा ।

                (3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम और उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसार संगणित रकम पर चार प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज नियत दिन से प्रारम्भ होकर उस तारीख को जिसको, ऐसी रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि के लिए दिया जाएगा ।

अध्याय 4

अमृतसर आइल वर्क्स का प्रबन्ध, आदि

8. अमृतसर आइल वर्क्स का प्रबंध आदि-(1) नियत दिन से अमृतसर आइल वर्क्स के कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबन्ध,-

(क) जहां केन्द्रीय सरकार ने धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन कोई निदेश दिया है, वहां उस निदेश में विनिर्दिष्ट सरकारी कंपनी में निहित होगा ; या

(ख) जहां केन्द्रीय सरकार ने कोई निदेश नहीं दिया है वहां उपधारा (2) के अधीन, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त एक या अधिक अभिरक्षकों में निहित होगा,

और तब, यथास्थिति, इस प्रकार सरकारी कम्पनी या इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक सभी अन्य व्यक्तियों का अपवर्जन करते हुए, ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य करने के हकदार होंगे जिन शक्तियों का प्रयोग और जिन कार्यों को करने के लिए अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी, अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में प्राधिकृत है

                (2) केन्द्रीय सरकार एक या अधिक व्यक्तियों को या किसी सरकारी कंपनी को, अमृतसर आइल वर्क्स के अभिरक्षक या अभिरक्षकों के रूप में नियुक्त कर सकेगी जिनके संबंध में धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन उसने कोई निदेश नहीं किया है ।

                (3) इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक अमृतसर आइल वर्क्स की निधियों में से ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा/करेंगे जो केन्द्रीय सरकार नियत करे और केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा/करेंगे ।

(4) अमृतसर आइल वर्क्स के अभिरक्षक, अमृतसर आइल वर्क्स का लेखा ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में तथा ऐसी शर्तों के अनुसार रखेगा या रखेंगे जो विहित की जाएं और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1)के उपबन्ध ऐसे रखे गए लेखा को लेखापरीक्षा को इस प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी कम्पनी के लेखा की लेखापरीक्षा को लागू होते हैं

9. अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबंध के भारसाधक व्यक्तियों का सभी आस्तियां आदि परिदान करने का कर्तव्य-अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबन्ध का केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी में निहित होने पर, ऐसे निहित होने की तारीख के ठीक पूर्व अमृतसर आइल वर्क्स के प्रबन्ध के भारसाधक सभी व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को जो केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, अमृतसर आइल वर्क्स से संबंधित सभी आस्तियां, लेखाबहियों, रजिस्टर या अन्य दस्तावेज, जो उनकी अभिरक्षा में है, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे ।

10. आस्तियों आदि का लेखा देने के लिए व्यक्तियों के कर्तव्य-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन को, अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी में निहित हो गया है, कोई आस्तियां, लेखाबहियां, दस्तावेजें या अन्य कागज-पत्र अपने कब्जे में या अपने नियंत्रण में रखता है और जो, अमृतसर आइल वर्क्स के हैं या उनके होते यदि, अमृतसर आइल वर्क्स केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी के निहित न होते, उक्त आस्तियों, लेखाबहियों, दस्तावेजों, और अन्य  कागज-पत्रों के लिए, यथास्िथति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी के प्रति दायी होगा और उनको केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी या ऐसे व्यक्ित या व्यक्तियों के निकाय को जैसा केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त  करेगा

(2) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन उसमें निहित अमृतसर आइल वर्क्स का कब्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी या करवाएगी ।

11. विशिष्टियां देने का अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी का कर्तव्य-अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी ऐसी अवधि के भीतर जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, नियत दिन को, अमृतसर आइल कम्पनी से संबंधित जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है या हो गए हैं, सभी संपत्तियों और आस्तियों की पूर्ण तालिका केन्द्रीय सरकार को देगी और इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को सभी समुचित सुविधाएं देगी ।

अध्याय 5

अमृतसर आइल वर्क्स के कर्मचारियों के बारे में उपबन्ध

12. कर्मचारियों का बने रहना-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी में नियोजित रहा है,-

(क) नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार का कर्मचारी हो जाएगा ; और

(ख) जहां अमृतसर आइल वर्क्स धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन किसी सरकारी कम्पनी में निहित किए जाने के लिए निदेशित है वहां ऐसे निहित होने की तारीख से ही ऐसे कम्पनी का कर्मचारी हो जाएगा,

और, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कंपनी के अधीन पेंशन, उपदान और अन्य सभी प्रकार की बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे उस दशा में अनुज्ञेय होते यदि ऐसा निधान न हुआ होता और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कम्पनी में उसका नियोजन सम्यक् रूप में समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कम्पनी सम्यक् रूप में परिवर्तित नहीं कर देती ।

                (2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या उस समय प्रवृत किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, अमृतसर आइल वर्क्स में नियोजित किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की सेवा का केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कम्पनी को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और कोई दावा कोई न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण ग्रहण नहीं करेगा ।

13. भविष्य निधि तथा अन्य निधियां-(1) जहां अमृतसर आइल वर्क्स में नियोजित व्यक्ितयों के फायदे के लिए अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी ने कोई भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि या कल्याण निधि या अन्य निधि स्थापित की है वहां अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कम्पनी को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अन्तरित की गई हैं, संबंधित धनराशियां, ऐसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन्य निधि में, नियत दिन को जमा धनराशियों में से, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगी ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी को अन्तरित हो जाने वाली धनराशियों को केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी ऐसी रीति से बरतेगी जो विहित की जाए ।

अध्याय 6

संदाय आयुक्त

14. सदायं आयुक्त की नियुक्त-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 7 के अधीन अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को संदेय रकमों के संवितरण के प्रयोजन के लिए अधिसूचना द्वारा, एक संदाय आयुक्त नियुक्त करेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार आयुक्त की सहायता के लिए ऐसे अन्य व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे, और तब आयुक्त ऐसे व्यक्तियों में से एक या अधिक को इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगा और भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को भिन्न-भिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया  जा सकेगा ।

(3) कोई व्यक्ति, जो आयुक्त द्वारा प्रयोक्तव्य किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किया गया है, उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदान की गई थीं, प्राधिकार के रूप में नहीं प्राप्त हुई हैं ।

(4) इस धारा के अधीन नियुक्त आयुक्त और अन्य व्यक्तियों के वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि में से चुकाए जाएंगे

15. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी को संदाय करने के लिए आयुक्त को, विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर, उतनी रकम नकद देगी जो धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकमों के बराबर है ।

(2) केन्द्रीय सरकार भारत के लोक खाते में आयुक्त के नाम एक निक्षेप खाता खोलेगी और आयुक्त, इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त प्रत्येक रकम, उक्त खाते में जमा करेगा और उक्त निक्षेप खाते को चलाएगा ।

(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट निक्षेप खातें में जमा रकमों पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी के फायदे के लिए काम आएगा ।

16. दावों के संबंध में पूर्विकता-(1) अमृतसर शुगर मिल्स कम्पनी से शोध्य प्रत्येक प्रतिभूत ऋण को अन्य सभी ऋणों पर पूर्विकता होगी तथा प्रतिभूत लेनदारों के अधिकारों और हितों के अनुसार उनका संदाय किया जाएगा :

परन्तु जहां प्रतिभूत ऋण विभिन्न लेनदारों को उनको विभिन्न आस्तियों के अडमान के कारण शोध्य हैं वहां ऐसे ऋण का पूर्ण प्रतिसंदाय ऐसे लेनदारों के अधिकारों और हितों के अनुसार किया जाएगा ।

(2) उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, अन्य सभी अप्रतिभूत ऋणों से निम्नलिखित के संदाय के लिए पूर्विकता होगी, अर्थात् :-

(क) सभी राजस्वों, करों, उपकरों, दरों और नियत दिन के पूर्व, अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकरणों तथा राज्य विद्युत बोर्डों को संदेय अन्य कोई शोध्य ;

(ख) कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के किसी कर्मचारी की मृत्यु या विकलांग हो जाने के संबंध में प्रतिकर के लिए या दायित्व की बाबत सभी शोध्य रकमें जब तक कि उक्त कंपनी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 14 में वर्णित बीमाकर्ता के साथ ऐसी संविदा के अधीन उक्त कम्पनी के अधिकार, कर्मकारों को अंतरित होने या उनमें निहित होने योग्य हों ;

(ग) अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी द्वारा किसी भविष्य निधि या कर्मचारियों के कल्याण के लिए स्थापित किसी अन्य निधि में जमा करने के लिए अमृतसर आइल वर्क्स के किसी कर्मचारी के वेतन या मजदूरी से काटी गई सभी धनराशियां किन्तु जो ऐसी निधियों के खाते में जमा न की गई हों ।

(3) उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट ऋण आपस में समान स्थान रखेंगे और उनका पूर्ण संदाय किया जाएगा जब तक उपधारा (1) में निर्दिष्ट दायित्वों को पूरा करने के पश्चात् अतिशेष रकम उन्हें पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो तब उस दशा में उनका समान अनुपात में उपशमन किया जाएगा और तद्नुसार संदाय किया जाएगा ।

17. आयुक्त के समक्ष दावों का किया जाना-प्रत्येक व्यक्ति, जिसका, अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी के विरुद्ध कोई दावा है, ऐसा दावा विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर आयुक्त के समक्ष करेगा ;

परन्तु यदि आयुक्त का समाधान हो जाता है कि दावेदार पर्याप्त कारण से तीस दिन की उक्त अवधि के अन्दर दावा करने से निवारित रहा था तो वह तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के अन्दर दावा ग्रहण कर सकेगा, किन्तु उसके पश्चात् नहीं ।

18. दावों का सबूत-(1) आयुक्त कोई तारीख नियत करेगा जिसको या जिसके पूर्व प्रत्येक दावेदार अपने दावे का सबूत फाइल करेगा जिसके न हो सकने पर उसे आयुक्त द्वारा किए जाने वाले संवितरण के फायदे से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।

(2) इस प्रकार नियत की गई तारीख के बारे में कम से कम चौदह दिन की सूचना, अंग्रेजी भाषा के ऐसे दैनिक समाचारपत्र के जो देश के मुख्य भाग में परिचालित हो एक अंक में और ऐसी प्रादेशिक भाषा के ऐसे दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में, जिसे आयुक्त उपयुक्त समझे, विज्ञापन द्वारा दी जाएगी, और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत विनिर्दिष्ट अवधि के अन्दर आयुक्त के समक्ष फाइल करे

(3) प्रत्येक दावेदार को, जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि के अन्दर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहता है, आयुक्त द्वारा किए जाने वाले संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।

(4) आयुक्त, ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात् जो उसको राय में आवश्यक है और अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी को दावे का खंडन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदार को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् लिखित आदेश द्वारा दावे को पूर्णतः या भागतः स्वीकार या अस्वीकार करेगा ।

(5) आयुक्त को, अपने कृत्यों के निर्वहन से उद्भूत होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं जहां वह अपनी बैठकें करेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए उसे वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों की बाबत वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-

(क) किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;

(ख) किसी दस्तावेज या अन्य तात्त्विक पदार्थ का जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हो, प्रकटीकरण और पेश किया जाना ;

(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना ;

(घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।

(6) आयुक्त के समक्ष कोई अन्वेषण भारतीय दंड संहिता, (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

(7) कोई दावेदार, जो आयुक्त के विनिश्चय से असंतुष्ट है उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील, आरम्भिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायालय में कर सकता है, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर अमृतसर आइल वर्क्स स्थित है :

परन्तु जहां कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है वहां अपील पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को होगी और वह अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी ।

19. आयुक्त द्वारा दावेदारों को रकम का संवितरण-जहां आयुक्त द्वारा प्रतिभूत लेनदारों और धारा 16 की उपधारा (2) के अधीन पूर्विकता रखने वाले अप्रतिभूत लेनदारों के दावों को स्वीकार करने के पश्चात् आयुक्त द्वारा स्वीकार किए गए अप्रतिभूत अन्य लेनदारों के दावों की रकम, धारा 16 की उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट दायित्वों को पूरा करने के पश्चात् दावों की कुल रकम से अधिक नहीं है वहां ऐसे अन्य अप्रतिभूत लेनदारों के स्वीकृत प्रत्येक दावों का स्थान आपस में समान होगा और उनका पूर्ण संदाय किया जाएगा और अतिशेष, यदि कोई हो, अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी को संदत्त किया जाएगा किन्तु जहां ऐसी रकम ऐसे स्वीकृत दावों की कुल रकम का पूर्ण संदाय करने में अपर्याप्त है वहां ऐसे सभी दावों का समान अनुपात में उपशमन होगा और तद्नुसार उनका संदाय किया जाएगा ।

20. असंवितरित या अदावाकृत रकम का साधारण राजस्व खाते में निक्षिप्त किया जाना-आयुक्त को संदत्त कोई धन, जो उस तारीख से ठीक पूर्ववर्ती तारीख को, जिसकों आयुक्त के कार्यालय का अन्तिम रूप से परिसमापन होता है, असंवितरित या अदावाकृत रहता है, आयुक्त द्वारा केन्द्रीय सरकार के साधारण राजस्व खाते में संदत्त किया जाएगा किन्तु इस प्रकार अन्तरित किसी धन के लिए कोई दावा ऐसे संदाय के हकदार व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को किया जा सकता है और उस संबंध में कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा अन्तरण नहीं किया गया था और दावे के संदाय के लिए किया गया आदेश, यदि कोई हो, राजस्व के प्रतिदाय के लिए किया गया आदेश माना जाएगा ।

अध्याय 7

प्रकीर्ण

21. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

22. संविदाओं का तब तक प्रभावी होना जब तक कि केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी द्वारा उनका अनुसमर्थन नहीं किया जाता-अमृतसर आइल वर्क्स के संबंध में अमृतसर शुगर मिल्स कंपनी द्वारा जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए की गई और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त प्रत्येक संविदा, नियत दिन से तीस दिन की समाप्ति के पश्चात् प्रभावी नहीं रहेगी, जब तक कि ऐसी संविदा का उस अवधि की समाप्ति के पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी, लिखित रूप में, अनुसमर्थन नहीं कर देती है और, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने में उसमें ऐसे परिवर्तन या उपांतरण कर सकेगी जो वह ठीक समझे :

परन्तु केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी किसी संविदा का अनुसमर्थन करने में लोप और उसमें परिवर्तन या उपान्तरण तब तक नहीं करेगी जब तक कि-

(क) उसका यह समाधान नहीं हो जाता कि ऐसी संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है या असद्भावपूर्वक की गई है या केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी के लिए अहितकर है ; और

(ख) वह ऐसी संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने और संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार करने या संविदा में परिवर्तन या उपान्तरण करने के अपने कारण अभिलिखित नहीं कर देती ।

23. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति,-

(क) अमृतसर आइल वर्क्स की भागरूप किसी संपत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी से सदोष विधारित करेगा ; या

(ख) अमृतसर आइल वर्क्स की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा ; या

(ग) अमृतसर आइल वर्क्स से संबंधित किसी दस्तावेज को जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी या उस सरकार या सरकारी कम्पनी द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने से जानबूझकर विधारित करेगा या उसे देने में असफल रहेगा ; या

(घ) अमृतसर आइल वर्क्स की सम्पत्ति की तालिका तथा उसकी भागरूप आस्ति को जानबूझकर केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को देने में असफल रहेगा ; या

(ङ) अमृतसर आइल वर्क्स से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा बहियों या रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कम्पनी या उस सरकार या सरकारी कंपनी द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा ; या

(च) अमृतसर आइल वर्क्स की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है,

वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डनीय होगा ।

24. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया हो, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उन कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरादायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

                परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है, कि वह अपराध उस कंपनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ;

(ख) फर्म" के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

25. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या उस सरकार या सरकारी कम्पनी के किसी अधिकारी या उस सरकार या सरकारी कम्पनी द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।

                (2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या होने के लिए संभाव्य किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या उसके किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारियों के या सरकारी कंपनी के अन्य कर्मचारियों के या सरकारी कंपनी द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।

26. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उनके द्वारा प्रयोक्तव्य, धारा 27 और धारा 28 द्वारा प्रदत्त शक्ति से भिन्न, सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया गया है तब वह व्यक्ति, जिसको ऐसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया गया है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा

27. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या किन्हीं के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-

(क) वह समय, जिसके अन्दर और वह रीति जिससे धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन को कोई सूचना आयुक्त को दी जाएगी ;

(ख) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए अभिरक्षक धारा 8 की उपधारा (4) द्वारा अपेक्षित, लेखा रखेंगे ;

(ग) वह रीति जिससे धारा 13 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी भविष्य निधि या अन्य निधि के धन का उपयोग किया जाएगा ;

(घ) कोई अन्य विषय जो विहित किए जाने के लिए अपेक्षित है या विहित किया जाए ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

28. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :

परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

_________________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IDRC

 
 
Latestlaws Newsletter