दादरा और नागर हवेली अधिनियम, 1961
(1961 का अधिनियम संख्यांक 35)
[2 सितम्बर, 1961]
संसद् में दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र के
प्रतिनिधित्व और उस संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासन
और उससे सम्बद्ध विषयों के लिए
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दादरा और नागर हवेली अधिनियम, 1961 है ।
(2) इसका विस्तार दादरा और नगर हवेली के सम्पूर्ण संघ राज्यक्षेत्र पर है ।
(3) यह 1961 के अगस्त के ग्यारहवें दिन को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) प्रशासक" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है;
(ख) नियत दिन" से 1961 के अगस्त का ग्याहरवां दिन अभिप्रेत है;
(ग) दादरा और नागर हवेली" से दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है;
(घ) वरिष्ठ पंचायत" से नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान वरिष्ठ पंचायत अभिप्रेत है ।
3. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-(1) लोक सभा में दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र को एक स्थान आबंटित किया जाएगा ।
(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में,-
(क) धारा 4 की उपधारा (1) में लक्कादीव, मिनिकोय और अमीनदीवी द्वीपसमूह को" शब्दों के पश्चात् दादरा और नागर हवेली को" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) प्रथम अनुसूची में, -
(i) प्रविष्टि 21 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -
22. दादरा और नागर हवेली ............................................... 1";
(ii) प्रविष्टि 22 और 23 को क्रमशः प्रविष्टि 23 और 24 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ।
(3) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) में, धारा 4 में, लक्कादीव, मिनिकोय और अमीनदीवी द्वीपसमूह को" शब्दों के पश्चात् दादरा और नागर हवेली को" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
4. वरिष्ठ पंचायत-(1) जब तक कि विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, तब तक इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही वरिष्ठ पंचायत को निम्नलिखित विषयों पर विवेचन करने और प्रशासक को सिफारिशें करने का अधिकार होगा, -
(क) विकास की साधारण नीति और स्कीमों से संबंधित प्रशासन के मामले;
(ख) प्रशासक द्वारा उसे निर्दिष्ट अन्य कोई मामला ।
(2) इस धारा में निर्दिष्ट वरिष्ठ पंचायत के कृत्य केवल सलाहकारी होंगे किन्तु जिस मामले के संबंध में सलाह दी गई है, उसका विनिश्चय करने में प्रशासक उस सलाह पर सम्यक् ध्यान देगा ।
(3) वरिष्ठ पंचायत के सदस्यों में किसी विद्यमान रिक्ति या उसके गठन में किसी त्रुटि के कारण ही उसका कोई कार्य या कार्यवाही अविधिमान्य नहीं होगी ।
(4) वरिष्ठ पंचायत का प्रत्येक सदस्य इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यारूढ़ होने के पूर्व प्रशासक के समक्ष निम्नलिखित रूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा तथा उस पर हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्: -
मैं, ....................अमुक................., जो दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्र की वरिष्ठ पंचायत का सदस्य हूं, ईश्वर की शपथ लेता हूँ/सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं, उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूंगा ।"
5. अन्य कृत्यकारी-दादरा और नागर हवेली के प्रशासन के लिए आवश्यक अधिकारियों और प्राधिकारियों को समय-समय पर नियुक्त करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे सभी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी तथा प्राधिकारी, जो नियत दिन के ठीक पूर्व, स्वतंत्र दादरा और नागर हवेली या उसके किसी भाग में विधिपूर्ण कृत्य कर रहे हों, जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए, दादरा और नागर हवेली के प्रशासन के सम्बन्ध में अपने-अपने कृत्य, नियत दिन के पूर्व जैसे थे वैसी ही रीति में और उसी विस्तार तक करते रहेंगे ।
6. संपत्ति और आस्तियां-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि ऐसी सभी संपत्ति और आस्तियां स्वतन्त्र दादरा और नागर हवेली की वरिष्ठ पंचायत या प्रशासक में जो नियत दिन के ठीक पूर्व निहित थी, उस दिन से संघ में निहित होंगी ।
7. अधिकार और बाध्यताएं-स्वतन्त्र दादरा और नागर हवेली के संबंध में स्वतन्त्र दादरा और नागर हवेली की वरिष्ठ पंचायत या प्रशासक के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, नियत दिन से, केन्द्रीय सरकार के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी ।
8. विद्यमान विधियों का चालू रहना-इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, स्वतन्त्र दादरा और नागर हवेली में नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी विधियां तब तक प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक वे संसद् या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा निरसित या संशोधित न कर दी गई हों ।
9. विद्यमान करों का चालू रहना-वे सभी कर, शुल्क, उपकर या फीस, जो स्वतन्त्र दादरा और नागर हवेली या उसके किसी भाग में विधियुक्त रीति से नियत दिन के ठीक पूर्व, उद्गृहीत की जाती रही हों, तब तक उद्गृहीत की जाती रहेंगी और वैसे ही प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त की जाती रहेंगी, जब तक संसद् या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्य उपबन्ध न कर दिया जाए ।
10. दादरा और नागर हवेली को अधिनियमितियां विस्तारित करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे निर्बन्धनों या उपांतरों सहित, जैसा वह ठीक समझे, दादरा और नागर हवेली पर कोई ऐसी अधिनियमिति का विस्तार कर सकेगी, जो किसी राज्य में अधिसूचना की तारीख को प्रवृत्त हों ।
11. मुंबई उच्च न्यायालय की अधिकारिता का दादरा और नागर हवेली पर विस्तार-ऐसी तारीख1 से, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, मुंबई उच्च न्यायालय की अधिकारिता का दादरा और नागर हवेली पर विस्तार होगा ।
12. विधियों का लागू होना सुकर बनाने के प्रयोजनों के लिए न्यायालयों और अन्य प्राधिकारियों की शक्तियां-दादरा और नागर हवेली में किसी विधि का लागू होना सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, कोई न्यायालय या अन्य प्राधिकारी, सार पर प्रभाव न डालने वाले ऐसे परिवर्तनों सहित, किसी ऐसी विधि का अर्थ लगा सकेगा, जो उस विधि को न्यायालय या अन्य प्राधिकारी के समक्ष विषय के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक या उचित हो ।
13. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में या दादरा और नागर हवेली के प्रशासन के संबंध में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, ऐसा और उपबन्ध कर सकेगी, जो इस कठिनाई दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन का कोई आदेश भूतलक्षी प्रभाव से किया जा सकेगा किन्तु वह नियत दिन से पहले का किसी तारीख से प्रभावी नहीं होगा ।
14. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टितया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) वह रीति, जिससे वरिष्ठ पंचायत की आकस्मिक रिक्तियां भरी जा सकेंगी;
(ख) वरिष्ठ पंचायत के अधिवेशन, ऐसे अधिवेशनों में कारबार का संचालन और अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(ग) अन्य कोई ऐसा मामला, जो विहित किया जाना है या जिसे विहित किया जा सके ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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