रिजर्व और सहायक वायु सेना अधिनियम, 1952
(1952 का अधिनियम संख्यांक 62)
[22 अगस्त, 1952]
कतिपय वायु सेना रिजर्वों के तथा एक सहायक वायु सेना के भी
गठन और विनियमन के लिए तथा उनसे संबंधित
मामलों के लिए उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियमय का संक्षिप्त नाम रिजर्व और सहायक वायु सेना अधिनियम, 1952 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह अध्याय तुरन्त प्रवृत्त हो जाएगा और शेष उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे तथा विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो :-
(क) “वायु सेना रिजर्व" से इस अधिनियम के अधीन समुत्थापित और अनुरक्षित वायु सेना रिजर्व में से कोई अभिप्रेत है;
(ख) “सक्षम प्राधिकारी" से भाग 3 के अधीन नियुक्त कोई एयर आफिसर या दो या अधिक एयर आफिसरों से बनी समिति अभिप्रेत है;
(ग) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(घ) अन्य सभी शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त किए गए हैं और वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) में परिभाषित है तथा इसमें इसके पूर्व परिभाषित नहीं हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उन्हें उस अधिनियम में क्रमशः दिए गए है ।
3. सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी एयर आफिसर को या दो या दो अधिक एयर आफिसरों से बनी किसी समिति को इस अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी के सभी या किन्हीं कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसे क्षेत्र के लिए नियुक्त कर सकेगी जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।
अध्याय 2
नियमित वायु सेना रिजर्व
4. नियमित वायु सेना रिजर्व का गठन-केन्द्रीय सरकार नियमित वायु सेना रिजर्व कहलाने वाला एक वायु सेना रिजर्व इस अध्याय में इसके पश्चात् उपबंधित रीति में समुत्थापित कर सकेगी और अनुरक्षित रख सकेगी जिसमें केवल वही व्यक्ति होंगे जो धारा 5 के अधीन उसको अन्तरित या उसमें नियुक्त किए जाएं ।
5. नियमित वायु सेना रिजर्व में भर्ती-(1) सक्षम प्राधिकारी साधारण या विशेष आदेश द्वारा निम्नलिखित को नियमित वायु सेना रिजर्व को अन्तरित कर सकेगा :-
(क) वायु सेना का कोई आफिसर या वायु सैनिक, जो अपनी सेवा के निबंधनों और शर्तों के अधीन किसी वायु सेना रिजर्व में, यदि और जब वह गठित किया जाए, सेवा करने के दायित्वाधीन है;
(ख) वायु सेना का कोई आफिसर या वायु सैनिक जिसका वायु सेना में कमीशन या नियोजन इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व पर्यवसित कर दिया गया है और जो अपने कमीशन या नियोजन के निबंधनों के अधीन किसी वायु सेना रिजर्व में, यदि और जब वह गठित किया जाए, सेवा करने के दायित्वाधीन था;
(ग) कोई आफिसर या वायु सैनिक जिसने वायु सेना में सेवा की है और जो उससे सेवानिवृत्त हो गया है और इस प्रकार अन्तरित कोई आफिसर या वायु सैनिक उक्त रिजर्व का सदस्य समझा जाएगा ।
(2) सक्षम प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन समुत्थापित और अनुरक्षित वायु रक्षा रिजर्व या सहायक वायु सेना के किसी सदस्य को ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन, जैसी विहित की जाएं, विशेष आदेश द्वारा नियमित वायु सेना रिजर्व में नियुक्त कर सकेगा और जहां कोई ऐसा सदस्य इस प्रकार नियुक्त किया जाता है वहां वह, यथास्थिति, वायु रक्षा रिजर्व या सहायक वायु सेना का सदस्य नहीं रहेगा और ऐसी नियुक्ति की तारीख से नियमित वायु सेना रिजर्व का सदस्य समझा जाएगा ।
(3) समक्ष प्राधिकारी ऐसे कारणों से जो उसकी राय में पर्याप्त हों उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन दिए गए किसी आदेश को रद्द कर सकेगा और ऐसे आदेश के रद्द किए जाने पर वह व्यक्ति, जिसके सम्बन्ध में वह आदेश दिया गया था, नियमित वायु सेना रिजर्व का सदस्य नहीं रहेगा ।
6. नियमित वायु सेना रिजर्व में व्यक्तियों के वर्ग-नियमित वायु सेना रिजर्व के सदस्य निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किए जाएंगे, अर्थात् :-
(क) जनरल ड्यूटी आफिसर;
(ख) ग्राउंड ड्यूटी आफिसर; और
(ग) वायु सैनिक,
और प्रत्येक आफिसर रिजर्व को अन्तरण या उसमें नियुक्ति पर उसी रैंक को धारण करने का हकदार होगा जिसे वह ऐसे अन्तरण या नियुक्ति से पूर्व, यथास्थिति, वायु सेना या वायु रक्षा रिजर्व या सहायक वायु सेना में अंतिम बार धारण करता था ।
7. सेवा की अवधि(1) नियमित वायु सेना रिजर्व का प्रत्येक सदस्य रिजर्व में सेवा करने के दायित्वाधीन :-
(क) यदि वह धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन रिजर्व को अन्तरित किया गया है तो अपने रिजर्व दायित्व की अवधि के लिए होगा; और
(ख) यदि वह धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन रिजर्व में नियुक्त किया गया है तो उस अवधि के शेष भाग के लिए होगा जिसके लिए वह, यथास्थिति, वायु रक्षा रिजर्व या सहायक वायु सेना में सेवा करने के दायित्वाधीन थाः
परन्तु सक्षम प्राधिकारी किसी ऐसे सदस्य से अपेक्षा कर सकेगा कि वह कुल मिलाकर पांच वर्ष से अनधिक की इतनी अतिरिक्त अवधि या अवधियों के लिए, जितनी वह ठीक समझे, रिजर्व में सेवा करे ।
स्पष्टीकरण 1-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “रिजर्व दायित्व की अवधि" से नियमित वायु सेना रिजर्व के किसी सदस्य के संबंध में वह अवधि अभिप्रेत है जिसके लिए वह वायु सेना में अपनी सेवा के निबंधनों और शर्तों के अधीन किसी वायु सेना रिजर्व में, यदि और जब वह गठित किया जाए, सेवा करने के दायित्वाधीन था ।
स्पष्टीकरण 2-नियमित वायु सेना रिजर्व के किसी ऐसे सदस्य के संबंध में, जिसका वायु सेना में कमीशन या नियोजन इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व पर्यवसित कर दिया गया था, रिजर्व दायित्व की अवधि की संगणना में वह अवधि, जो ऐसे पर्यवसान और ऐसे प्रारम्भ की तारीख के बीच बीत चुकी है, सम्मिलित की जाएगी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, विहित आयु प्राप्त करने के पश्चात् कोई भी व्यक्ति रिजर्व में सेवा करने के दायित्वानधीन नहीं होगा ।
8. रिजर्व में सेवा का पर्यवसान-नियमित वायु सेना रिजर्व का प्रत्येक सदस्य, उसमें अपनी सेवा की अवधि के पूरा हो जाने पर रिजर्व का सदस्य न रहेगा ।
अध्याय 3
वायु रक्षा रिजर्व
9. वायु रक्षा रिजर्व का गठन-केन्द्रीय सरकार वायु रक्षा रिजर्व कहलाया जाने वाला एक वायु सेना रिजर्व इस अध्याय में इसके पश्चात् उपबंधित रीति में समुत्थापित कर सकेगी और अनुरक्षित रख सकेगी जिसमें ऐसे व्यक्ति होंगे जो धारा 16 के उपबंधों के अधीन उसमें भर्ती हुए समझे जाएंगे ।
10. वायु रक्षा रिजर्व में व्यक्तियों के वर्ग-वायु रक्षा रिजर्व के सदस्य निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किए जाएंगे, अर्थात् :-
(क) जनरल ड्यूटी आफिसर;
(ख) ग्राउंड ड्यूटी आफिसर; और
(ग) वायु सैनिक ।
11. रजिस्टर कराने की बाध्यता-(1) भारत का प्रत्येक नागरिक
(क) जिसके पास भारतीय वायुयान नियम, 1937 के अधीन जारी की गई लोक परिवहन पाइलट की अनुज्ञप्ति (“ख" अनुज्ञप्ति) है या रही है; या
(ख) जिसे दो सौ घंटे से अन्यून का एकल उड़ान का अनुभव रहा है; जिसके अन्तर्गत कम से कम तीस उतराइयां भी हैं; या
(ग) जिसके पास भारतीय वायुयान नियम, 1937 के अधीन जारी की गई प्रथम वर्ग दिक्चालक की अनुज्ञप्ति है या रही है; या
(घ) जिसे कम से कम चार वर्ष का विमानन का अनुभव रहा है जिसके दौरान कम से कम छह सौ घंटे वायु में व्यतीत किए हों और जिसे अनुभव के कम से कम एक सौ घंटे वायु में दिक्चालक के अनुभव के हों; या
(ङ) जिसके पास भारतीय वायुयान नियम, 1937 के अधीन जारी की गई प्रथम वर्ग रेडियों तार चालक की अनुज्ञप्ति है या रही है; या
(च) जिसके पास भारतीय वायुयान नियम, 1937 के अधीन जारी की गई रेडियो टेलीफोन चालक की अनुज्ञप्ति है या रही है; या
(छ) जिसके पास भारतीय वायुयान नियम, 1937 के अधीन जारी की गई क, ख, ग, घ, या भ प्रवर्गों में से किसी में ग्राउंड इंजीनियर की अनुज्ञप्ति है या रही है; या
(ज) जो किसी विमान क्षेत्र के संबंध में या वायुयान के नियंत्रण और चालन के सम्बन्ध में ऐसी हेसियत में, जैसी विहित की जाए, किसी समय नियोजित है या था,
विहित अवधि के अन्दर विहित प्ररूप को अपने सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार सही तौर पर भरेगा या भराएगा तथा हस्ताक्षरित करेगा और उसे अपने निवास या कारबार के सामान्य स्थान से निकटतम सक्षम प्राधिकारी के पास दाखिल करेगाः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी :-
(i) खण्ड (क) से (च) तक में विनिर्दिष्ट वर्गो में से किसी में का कोई व्यक्ति यदि उसने सैंतीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है; या
(ii) खण्ड (छ) और (ज) में विनिर्दिष्ट वर्गों में से किसी में का कोई व्यक्ति यदि उसने पचास वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि यदि सक्षम प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि उस उपधारा के उपबंध किसी व्यक्ति को लागू होते हैं तो वह लिखित आदेश द्वारा उस व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह इतने समय के अन्दर ऐसी विशिष्टियां दे जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट हों और ऐसा व्यक्ति विनिर्दिष्ट समय के अन्दर अपने सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार, वह विशिष्टियां उक्त प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, सही तौर से देगा ।
12. जांच के लिए आहूत किए जाने का दायित्व-प्रत्येक व्यक्ति, जिसको धारा 11 के उपबंध लागू हैं धारा 13 के अधीन जांच के लिए आहूत किए जाने के दायित्वाधीन-
(क) यदि वह धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (क) से लेकर (च) तक में विनिर्दिष्ट वर्गों में से किसी का है तो तब तक होगा जब तक उसने अपना सैंतीसवां वर्ष पूरा न कर लिया हो; और
(ख) यदि वह उक्त उपधारा के खंड (छ) और (ज) में विनिर्दिष्ट वर्गों में से किसी का है तो तब तक होगा जब तक उसने अपना पचासवां वर्ष पूरा न कर लिया हो ।
13. जांच के लिए आहूत करना-सक्षम प्राधिकारी धारा 12 के अधीन जांच के लिए आहूत किए जाने के तत्समय दायित्वाधीन किसी व्यक्ति पर एक लिखित सूचना तामील करा सकेगा जिसमें यह कथित होगा कि उसे वायु रक्षा रिजर्व में सेवा के लिए उसकी उपयुक्तता के बारे में जांच के लिए आहूत किया जाता है और यह अपेक्षा होगी कि वह अपने आपको ऐसे व्यक्ति के समक्ष और ऐसे स्थान में तथा ऐसे समय पर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट हो, पेश करे और उक्त व्यक्ति द्वारा जांच के लिए अपने आप को प्रस्तुत करे ।
14. चिकित्सीय परीक्षा-धारा 13 के अधीन जांच के लिए आहूत किया गया प्रत्येक व्यक्ति यदि और जब सक्षम प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित हो तब अपने आपको परीक्षा के लिए ऐसे चिकित्सीय अधिकारी के समक्ष पेश करेगा जिसको उस प्राधिकारी द्वारा निदेश दिया जाए और ऐसी परीक्षा के प्रयोजनों के लिए चिकित्सीय अधिकारी के निदेशों का पालन करेगा ।
15. भर्ती के लिए उपयुक्त समझे गए व्यक्तियों का रजिस्ट्रीकरण-यदि यथापूर्वोक्त जांच और चिकित्सीय परीक्षा के पश्चात् सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति को वायु रक्षा रिजर्व में भर्ती के लिए उपयुक्त समझता है तो वह उसे तदनुकूल इत्तिला देगा और उसका नाम तथा अन्य विहित विशिष्टियां एक रजिस्टर में प्रविष्ट करेगा जो ऐसे प्ररूप और रीति से रखा जाएगा जो विहित की जाए ।
16. सेवा के लिए आहूत करना-सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति पर जिसका नाम धारा 15 के अनुसरण में रखे हुए रजिस्टर में प्रविष्ट है एक लिखित सूचना तामील करा सकेगा जिसमें यह कथित होगा कि उसे वायुरक्षा रिजर्व में सेवा के लिए आहूत किया जाता है और वह अपेक्षा होगी कि वह अपने आप को ऐसे स्थान और समय पर और ऐसे प्राधिकारी के समक्ष, जो सूचना में विनिर्दिष्ट हो, पेश करे; और वह व्यक्ति जिस पर सूचना की तामील की जाती है इस प्रकार विनिर्दिष्ट दिन में रिजर्व में भर्ती हुआ समझा जाएगा ।
17. सेवा की अवधि-(1) वायु रक्षा रिजर्व में भर्ती हुआ समझा गया प्रत्येक व्यक्ति सेवा के दायित्वाधीन
(क) यदि वह धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (क) से लेकर (च) तक में विनिर्दिष्ट वर्गों में से किसी का है तो तब तक के लिए होगा जब तक उसने अपना बयालीसवां वर्ष पूरा न कर लिया हो ;
(ख) यदि वह उक्त उपधारा के खण्ड (छ) और (ज) में विनिर्दिष्ट वर्गों में से किसी का है तो तब तक के लिए होगा जब तक उसने अपना पचपनवां वर्ष पूरा न कर लिया हो ।
(2) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट आयु प्राप्त करने पर वायु रक्षा रिजर्व का सदस्य नहीं रहेगा ।
अध्याय 4
सहायक वायु सेना
18. सहायक वायु सेना का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार सहायक वायु सेना कहलाई जाने वाली एक वायु सेना इस अध्याय में इसके पश्चात् उपबंधित रीति से समुत्थापित कर सकेगी और अनुरक्षित रख सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार सहायक वायु सेना के इतने स्क्वैड्रन और यूनिट गठित कर सकेगी जितने वह ठीक समझाती है और किसी स्क्वैड्रन या यूनिट को समाप्त या पुनर्गठित कर सकेगी ।
19. सहायक वायु सेना में व्यक्तियों के वर्ग-सहायक वायु सेना के सदस्य निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किए जाएंगे, अर्थात् :-
(क) जनरल ड्यूटी आफिसर;
(ख) ग्राउंड ड्यूटी आफिसर; और
(ग) वायु सैनिक ।
20. सहायक वायु सेना के आफिसर-राष्ट्रपति किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे वह ठीक समझता है सहायक, वायु सेना में आफिसर के रूप में कमीशन प्रदान कर सकेगा जिसका अभिधान वायु सेना में किसी कमीशंड आफिसर के समान रैंक का होगा ।
21. भर्ती के लिए पात्र व्यक्ति-भारत का कोई भी नागरिक सहायक वायु सेना में भर्ती के लिए अपने आपको प्रस्तुत कर सकेगा और यदि वह विहित शर्तों की पूर्ति करता है तो ऐसे निबन्धनों पर भर्ती किया जा सकेगा जो विहित किए जाएं ।
22. सेवा की अवधि-प्रत्येक आफिसर और प्रत्येक भर्ती किया गया व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन इस निमित्त बनाए जाने वाले किन्हीं नियमों के अध्यधीन, अपनी नियुक्ति या भर्ती की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए सहायक वायु सेना में सेवा करने के लिए अपेक्षित होगा किन्तु अपनी सेवा की अवधि के पूरा हो जाने के पश्चात् ऐसी अतिरिक्त अवधियों के लिए जिनमें से प्रत्येक पांच वर्ष से अधिक की अस्तित्वावधि की नहीं होगी उसमें सेवा के लिए स्वेच्छा से अपने आपको प्रस्तुत कर सकेगा ।
23. सेवा का पर्यवसान-सहायक वायु सेना के किसी आफिसर या भर्ती किए गए व्यक्ति की सेवा, उसकी सेवा की अवधि के पूरा होने से पूर्व किसी भी समय ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी शर्तों के अधीन, जैसी विहित की जाएं, पर्यवसित की जा सकेगी ।
24. सलाहकार समिति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र-
(क) सम्पूर्ण भारत के लिए एक केन्द्रीय सलाहकार समिति गठित करेगी;
(ख) प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य सलाहकार समिति गठित करेगी ; और
(ग) सहायक वायु सेना के प्रत्येक यूनिट के लिए एक यूनिट सलाहकार समिति गठित करेगी ।
(2) साधारणतया सहायक वायु सेना से संबंधित मामलों पर केन्द्रीय सरकार को सलाह देने का केन्द्रीय सलाहकार समिति का कर्तव्य होगा, राज्य में स्क्वैड्रनों या यूनिटों को बनाने तथा राज्य में पहले से आस्थापित स्क्वैड्रनों या यूनिटों से संबंधित मामलों पर केन्द्रीय सरकार को सलाह देने का राज्य सलाहकार समिति का कर्तव्य होगा ।
(3) सलाहकार समितियों के कर्तव्य, शक्तियां और प्रक्रियाएं तथा विशिष्टतः, वे मामले जिनके संबंध में सलाहकार समितियों से सलाह देने के लिए कहा जाए, ऐसे होंगे जैसे विहित किए जाएं ।
अध्याय 5
रिजर्व और सहायक वायु सेना के सदस्यों का दायित्व और अनुशासन
25. सेवा के लिए आहूत किए जाने का दायित्व-वायु सेना रिजर्व या सहायक वायु सेना का प्रत्येक सदस्य अपनी सेवा की अवधि के दौरान इस बात के दायित्वाधीन होगा कि वह-
(क) इतनी अवधि के लिए जितनी विहित की जाए प्रशिक्षण के लिए और चिकित्सीय परीक्षा के लिए आहूत किया जाए;
(ख) सिविल शक्ति की सहायता के लिए सेवा करने के लिए आहूत किया जाए;
(ग) भारत में या बाहर वायु सेना सेवा के लिए आहूत किया जाए ।
26. वायु सेना अधिनियम, 1950 का लागू होना-वायु सेना रिजर्व का या सहायक वायु सेना का प्रत्येक सदस्य, प्रशिक्षण के लिए, चिकित्सीय परीक्षा के लिए या सेवा के लिए इस अधिनियम के अधीन आहूत किए जाने पर, वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) और तद्धीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन उसी रीति से होगा जिससे वायु सेना का और वैसा ही रैंक धारण करने वाला व्यक्ति उक्त अधिनियम और नियमों के अध्यधीन है और ऐसे अध्यधीन तब तक बना रहेगा जब तक वह, यथास्थिति, ऐसे प्रशिक्षण, चिकित्सीय परीक्षा या सेवा से सम्यक्तः निर्मुक्त नहीं कर दिया जाता ।
अध्याय 6
प्रकीर्ण
27. इस अधिनियम के अधीन सेवा करने के लिए अपेक्षित व्यक्तियों का सिविल नियोजनों में पुनःस्थापन-(1) प्रत्येक ऐसे नियोजक का, जिसके द्वारा वह व्यक्ति, जो धारा 25 के अधीन आहूत किया जाता है, नियोजित है, यह कर्तव्य होगा कि वह उसे ऐेसा अवकाश जैसा आवश्यक हो मंजूर करे और उसे उस अवधि के, जिसके दौरान वह इस प्रकार आहूत किया गया है, पयर्वसान पर अपने नियोजन में ऐसे पेशे में और ऐसी शर्तों के अधीन पुनःस्थापित करे जो उसके लिए उससे कम अनुकूल न हों जो उसको लागू होती यदि वह उस प्रकार आहूत न किया गया होता :
परन्तु यदि नियोजक ऐसे व्यक्ति को पुनःस्थापित करने से इन्कार करता है या ऐसे व्यक्ति को पुनःस्थापित करने के अपने दायित्व से इन्कार करता है या किसी अन्य कारण नियोजक द्वारा यह प्रतिदर्शित किया जाता है कि ऐसे व्यक्ति का पुनःस्थापन अव्यवहार्य है तो दोनों में से कोई भी पक्षकार मामले को विहित प्राधिकारी को निर्दिष्ट कर सकेगा और वह प्राधिकारी उन सब मामलों पर जो उसके समक्ष रखे जाएं विचार करने के पश्चात् तथा मामले की ऐसी अतिरिक्त जांच, जैसी विहित की जाए, करने के पश्चात् :
(क) नियोजक को इस धारा के उपबंधों से छूट देने वाला आदेश पारित करेगा; या
(ख) ऐसे व्यक्ति को ऐसे निबन्धनों पर जिन्हें वह प्राधिकारी उपयुक्त समझता है पुनःनियोजित करने की उससे अपेक्षा करने वाला आदेश पारित करेगा; या
(ग) उससे यह अपेक्षा करने वाला आदेश पारित करेगा कि वह पुनःनियोजित करने के लिए असफलता या असमर्थता के लिए प्रतिकर के रूप में ऐसे व्यक्ति को इतनी राशि संदत्त करे जितनी उस दर से, जिस पर नियोजक द्वारा उसे उसका अंतिम पारिश्रमिक संदेय था, छह मास के पारिश्रमिक के बराबर रकम से अधिक न हो ।
(2) यदि कोई नियोजक किसी ऐसे प्राधिकारी के, जो उपधारा (1) के परन्तुक में निर्दिष्ट है, आदेश का पालन करने में असफल होगा, तो वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और वह न्यायालय, जिसके द्वारा कोई नियोजक इस धारा के अधीन सिद्धदोष किया जाता है, उसे आदेश देगा कि (यदि उक्त प्राधिकारी द्वारा उससे पहले ही वैसी अपेक्षा नहीं की गई है तो) वह उस व्यक्ति को जिसे पुनःनियोजित करने में वह असफल हुआ है उस दर पर नियोजक द्वारा उसे उसका अंतिम पारिश्रमिक संदेय था छह मास के पारिश्रमिक की बराबर राशि संदत्त करे और उक्त प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा ऐसे संदत्त की जाने के लिए अपेक्षित कोई रकम इस प्रकार वसूल की जा सकेगी मानो वह ऐसे न्यायालय द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो ।
(3) इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में नियोजक के लिए यह साबित करना प्रतिवाद होगा कि पूर्वतः नियोजित व्यक्ति ने उस अवधि के दौरान जिसके दौरान वह धारा 21 के अधीन आहूत किया गया था, पर्यवसान से दो मास की अवधि के अन्दर पुनःस्थापन के लिए नियोजक से आवेदन नहीं किया ।
(4) किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उपधारा (1) में वर्णित है, अवकाश मंजूर करने के लिए अथवा उसे नियोजन में पुनःस्थापित करने के लिए किसी नियोजक पर उस उपधारा द्वारा अधिरोपित कर्तव्य ऐसे नियोजक से भी संलग्न होगा जो किसी व्यक्ति के नियोजन को धारा 25 के अधीन उसके वस्तुतः आहूत किए जाने से पूर्व ऐसी परिस्थितियों में पर्यवसित कर देता है जिससे यह उपदर्शित होता है कि उसका आशय उस उपधारा द्वारा अधिरोपित कर्तव्य से बचना है और ऐसा आशय तब तक उपधारित किया जाएगा जब तक उस दशा में जिसमें पर्यवसान धारा 25 के अधीन उस व्यक्ति से संबंधित आदेश के जारी किए जाने के पश्चात् किया जाता है प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता ।
28. सेवा के लिए आहूत किए गए व्यक्तियों के कतिपय अधिकारों को बनाए रखना-जब धारा 25 के अधीन आहूत किए गए किसी व्यक्ति के किसी भविष्य-निधि या अधिवार्षिकी निधि या उस नियोजन के संबंध में, जिसे वह त्यागता है, कर्मचारियों के फायदे के लिए बना रखी गई किसी अन्य स्कीम के अधीन कोई अधिकार हों तब उसके ऐसी निधि या स्कीम के संबंध में ऐसे अधिकार, जैसे विहित किए जाएं उस अवधि के दौरान जिसके लिए वह इस प्रकार आहूत किया गया है और यदि वह पुनः स्थापित किया जाता है तो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसे पुनःस्थापन तक, बने रहेंगे।
29. तनखाह और भत्ते-(1) किसी वायु सेना रिजर्व या सहायक वायु सेना का प्रत्येक सदस्य प्रशिक्षण या सक्रिय सेवा की अवधि के दौरान ऐसी तनखाह और भत्ते प्राप्त करेगा जैसे, यथास्थिति, किसी आफिसर या वायु सैनिक को वायु सेना के समान रैंक, शाखा या पेशे में अनुज्ञेय हैं ।
(2) जहां कोई ऐसा सदस्य धारा 25 के अधीन प्रशिक्षण के लिए आहूत किए जाने से ठीक पूर्व किसी नियोजन में था वहां नियोजक प्रशिक्षण की अवधि के दौरान उसे वह अन्तर, यदि कोई हो, देने के दायित्वाधीन होगा जो उस तनखाह और भत्ते, जो वह नियोजक से प्राप्त करता यदि उसे ऐसे प्रशिक्षण के लिए आहूत न किया गया होता, और उस तनखाह और भत्ते के बीच हो जो वह प्रशिक्षण के दौरान ऐसे सदस्य के रूप में प्राप्त करता है ।
(3) यदि कोई नियोजक उपधारा (2) में यथाउपबंधित तनखाह और भत्तों के अन्तर को किसी ऐसे सदस्य को देने से इन्कार करेगा या उसमें असफल होगा तो तनखाह और भत्तों का ऐसा अन्तर, सदस्य द्वारा विहित प्राधिकारी को आवेदन पर नियोजक से ऐसी रीति से वसूल किया जा सकेगा जैसी विहित की जाए ।
30. शास्तियां(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 11 की उपधारा (1) की या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी आदेश की अपेक्षाओं की या धारा 14 की अपेक्षाओं की पूर्णतः पूर्ति करने से इन्कार करेगा या विधिपूर्ण प्रति हेतु के बिना (जिसे साबित करने का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा) उससे अपेक्षा करेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति धारा 13 या धारा 16 के अधीन जारी की गई किसी सूचना का पालन करने में जानबूझकर असफल होगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
31. सूचना की तामील-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति पर तामील की जाने वाली कोई सूचना या आदेश उस व्यक्ति के अंतिम ज्ञात पते पर उस व्यक्ति को डाक द्वारा भेजा सकेगा या उस पर ऐसी अन्य रीति से तामील किया जा सकेगा जैसी विहित की जाए ।
32. सक्षम प्राधिकारी का लोक सेवक होना-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रत्येक सक्षम प्राधिकारी और जहां सक्षम प्राधिकारी दो या अधिक एयर आफिसरों से बनी समिति हो वहां उस समिति का प्रत्येक सदस्य भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
33. छूट देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार विशेष कारणों के लिए और ऐसी शर्तों के अध्यधीन जैसी विहित की जाएं आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी बाध्यता या दायित्व से या उसके किसी विशेष उपबंध से छूट दे सकेगी ।
34. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :
(क) किसी वायु सेना रिजर्व का गठन और उसकी सदस्य-संख्या;
(ख) वे परिस्थितियां जिनमें और वे शर्तें जिनके अध्यधीन किसी आफिसर या वायु सैनिक को धारा 5 के अधीन नियमित वायु सेना रिजर्व को अन्तरित या उसमें नियुक्त किया जा सकेगा;
(ग) वह आयु जिससे ऊपर वाले व्यक्ति नियमित वायु सेना रिजर्व में सेवा करने के दायित्वाधीन नहीं होंगे;
(घ) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 11 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित विशिष्टियां दी जाएंगी;
(ङ) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 15 के अनुसरण में रजिस्टर रखे जाएंगे, वे विशिष्टियां जो उनमें प्रविष्ट की जाएंगी और समय-समय पर ऐसी विशिष्टियों का शोधन और पुनरीक्षण;
(च) इस अधिनियम के अधीन जांच या चिकित्सीय परीक्षा के लिए आहूत किए गए व्यक्तियों को संदेय तनखाह या भत्ते;
(छ) वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन कोई व्यक्ति सहायक वायु सेना के सदस्य के रूप में भर्ती किया जा सकेगा;
(ज) वह प्राधिकारी जिसके द्वारा और वे शर्तें जिनके अधीन सहायक वायु सेना के किसी आफिसर या उसमें भर्ती किए गए किसी व्यक्ति की सेवा पर्यवसित की जा सकेगी;
(झ) धारा 24 के अधीन गठित की जाने वाली सलाहकार समितियों का गठन और कर्तव्य, शक्तियां और प्रक्रिया;
(ञ) किसी वायु सेना रिजर्व और सहायक वायु सेना के सदस्यों के प्रशिक्षण की अवधि और रीति;
(ट) वह रीति जिसमें और वे शर्तें जिनके अधीन वायु सेना के किसी सदस्य का रैंक अवधारित किया जा सकेगा;
(ठ) धारा 27 के प्रयोजन के लिए प्राधिकारी का गठन और वह रीति जिससे ऐसा प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन कोई जांच कर सकेगा;
(ड) वह प्राधिकारी जिसको धारा 29 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन किया जा सकेगा, और वह रीति जिससे तनखाह और भत्तों का अन्तर उस उपधारा के अधीन वसूल किया जा सकेगा;
(ढ) वह रीति जिसमें इस अधिनियम के अधीन जारी की गई कोई सूचना या किया गया कोई आदेश तामील किया जा सकेगा;
(ण) वे शर्तें जिनके अध्यधीन किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी बाध्यता या दायित्व से अथवा उसके किसी विशेष उपबंध से छूट दी जा सकेगी ;
(त) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना हो या किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई नियम यह उपबंधित कर सकेगा कि उसका उल्लंघन जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
[(4) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन के अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
35. [1950 के अधिनियम सं० 45 की धारा 2, धारा 4 और धारा 31 का संशोधन ।टनिरसन और संशोधन अधिनियम, 1957 (1957 का 37) की धारा 2 और पहली अनुसूची द्वारा निरसित ।
36. 1939 के अधिनियम 36 का निरसन-भारतीय वायु सेना वालंटियर रिजर्व (अनुशासन) अधिनियम, 1939 एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।
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