Thursday, 23, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 ( River Boards Act, 1956 )


 

नदी बोर्ड अधिनियम, 1956

(1956 का अधिनियम संख्यांक 49)

[12 सितम्बर, 1956]

अन्तरराज्यिक नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और

विकास के लिए नदी बोर्डों की स्थापना के

बारे में उपबन्ध करने हेतु

अधिनियम

भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 है

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे

2. केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि केन्द्रीय सरकार को अन्तरराज्यिक नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास को इसमें इसके पश्चात् उपबन्धित विस्तार तक अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो,-

() “बोर्ड” से धारा 4 के अधीन स्थापित कोई नदी बोर्ड अभिप्रेत है;

(किसी बोर्ड के सम्बन्ध में, “हितबद्ध सरकारों” से उन राज्यों की सरकारें अभिप्रेत हैं, जिनकी, केन्द्रीय सरकार की राय में, इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कृत्यों में हितबद्ध या उनके द्वारा प्रभावित होने की सम्भावना है;

() “सदस्य” से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसमें उसका अध्यक्ष भी है;

() “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है

अध्याय 2

नदी बोर्डों की स्थापना

                4. बोर्डों की स्थापना-(1) किसी राज्य सरकार से इस निमित्त प्राप्त अनुरोध पर या अन्यथा किसी अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग के विनियमन या विकास से सम्बद्ध ऐसे मामलों के संबंध में हितबद्ध सरकारों को सलाह देने तथा ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करने के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी नदी बोर्ड की स्थापना कर सकेगी और विभिन्न अन्तरराज्यिक नदियों या नदी घाटियों के लिए विभिन्न बोर्डों की स्थापना की जा सकेगी :

परन्तु, बोर्ड की स्थापना, उसके सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों तथा जिन कृत्यों का पालन करने के लिए बोर्ड सशक्त किया जाए उन कृत्यों के लिए प्रस्ताव की बाबत हितबद्ध सरकारों से पूर्व परामर्श के बिना कोई भी ऐसी अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी

(2) बोर्ड ऐसे नाम से स्थापित किया जा सकेगा, जो उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए

(3) इस प्रकार स्थापित प्रत्येक बोर्ड शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा

(4) प्रत्येक बोर्ड, नदी (जिसमें उसकी उप-नदियां, यदि कोई हों, भी हैं) या नदी घाटी की ऐसी सीमाओं के भीतर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगा, जो उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, और इस प्रकार विनिर्दिष्ट क्षेत्र बोर्ड का कार्य-क्षेत्र कहलाएगा

5. बोर्ड की संरचना-(1) बोर्ड, एक अध्यक्ष तथा ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा, जिनको केन्द्रीय सरकार नियुक्त करना ठीक समझे

(2) कोई भी व्यक्ति, सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा, जब तक केन्द्रीय सरकार की राय में उसको सिंचाई, विद्युत इंजीनियरी, बाढ़-नियंत्रण, नौ परिवहन, जल-संरक्षण, भू-संरक्षण, प्रशासन या वित्त का विशेष ज्ञान तथा अनुभव हो

6. सदस्यों की सेवा के निबन्धन और शर्तें-(1) जब तक सदस्य की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार पहले समाप्त कर चुकी हो, वह ऐसी अवधि के लिए पद धारण करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित की जाए, और वह अपनी पदावधि की समाप्ति पर प्रतिनियुक्ति का पात्र होगा

(2) केन्द्रीय सरकार को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा सदस्य अपना पद त्याग सकेगा किन्तु वह पद पर तब तक बना रहेगा जब तक राजपत्र में उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति अधिसूचित की जाए

(3) उपधारा (2) के अधीन किसी सदस्य के पदत्याग द्वारा या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुई आकस्मिक रिक्ति नई नियुक्ति द्वारा भरी जाएगी

(4) सदस्य पूर्णकालिक या अंशकालिक सदस्य के रूप में, जैसा केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, नियुक्त किया जा सकेगा

(5) अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की सेवा के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं

7. किसी सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति-यदि कोई सदस्य अंग-शैथिल्य के कारण या अन्यथा अपने कृत्यों को कार्यान्वित करने में अस्थायी रूप से असमर्थ है या छुट्टी पर होने के कारण या अन्यथा ऐसी परिस्थितियों में अनुपस्थित है, जिसमें उसकी नियुक्ति की रिक्ति नहीं होती, तो केन्द्रीय सरकार, अन्य व्यक्ति को उसके स्थान में कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकेगी

8. बोर्ड के अधिवेशन-बोर्ड का अधिवेशन ऐसे समय और स्थानों पर होगा और वह अपने अधिवेशनों में कार्य संचालन की बाबत प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं

9. बोर्ड में रिक्ति आदि के कारण कार्य या कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-बोर्ड का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं समझी जाएगी कि बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके सदस्य की नियुक्ति में कोई त्रुटि विद्यमान है

10. सलाहकार समिति की नियुक्ति-बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों को कार्यान्वित करने में अपने को समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए समय-समय पर एक या अधिक सलाहकार समिति या समितियां नियुक्त कर सकेगा

11. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए बोर्ड के साथ व्यक्तियों का अस्थायी सहयोजन-(1) बोर्ड अपने साथ, ऐसी रीति में, और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को सहयुक्त कर सकेगा जिसकी सहायता या सलाह की वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों में से किसी का पालन करने के लिए वांछा करे

(2) किसी प्रयोजन के लिए उपधारा (1) के अधीन बोर्ड से सहयुक्त किसी व्यक्ति को उस प्रयोजन से सुसंगत बोर्ड के विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु बोर्ड के किसी अधिवेशन में मत देने का अधिकार नहीं होगा और किसी अन्य प्रयोजन के लिए वह उसका सदस्य नहीं होगा

12. बोर्ड के कर्मचारिवृन्द-ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन या अपनी शक्तियों के प्रयोग के लिए अपने को समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए ऐसे अधिकारियों को नियुक्त कर सकेगा, जो वह ठीक समझे और उनके कृत्य तथा सेवा के निबन्धन और शर्तें अवधारित कर सकेगा

अध्याय 3

बोर्ड की शक्तियां और कृत्य

13. वे बातें, जिनकी बाबत बोर्ड को सलाह देने के लिए प्राधिकृत किया जाए-धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन निम्नलिखित सभी कृत्यों या उनमें से किसी का पालन करने के लिए बोर्ड को सशक्त किया जा सकेगा, अर्थात् :-

() हितबद्ध सरकारों को बोर्ड के कार्य-क्षेत्र के भीतर किसी विनिर्दिष्ट अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास से सम्बन्धित किसी मामले पर सलाह देना, और विशिष्टतया, उनके आपसी विरोधों को मिटाने तथा निम्नलिखित प्रयोजन के लिए अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी में उनके द्वारा किए गए उपायों की बाबत अधिकतम सफलता प्राप्त करने की दृष्टि से उसके क्रियाकलापों के समन्वय के सम्बन्ध में उन्हें सलाह देना-

(i) अन्तरराज्यिक नदी के जल साधनों का संरक्षण, नियंत्रण तथा उत्तमोत्तम उपयोग;

(ii) सिंचाई, जल प्रदाय या जल निकासी के लिए स्कीमों का संप्रवर्तन तथा कार्यान्वयन;

(iii) जल-विद्युत् शक्ति के विकास की स्कीमों का संप्रवर्तन तथा कार्यान्वयन;

(iv) बाढ़-नियंत्रण की स्कीमों का संप्रवर्तन तथा कार्यान्वयन;

(v) नौपरिवहन का संप्रवर्तन तथा नियंत्रण;

(vi) वन रोपण का संप्रवर्तन तथा भू-कटाव का नियंत्रण;

(vii) अन्तरराज्यिक नदी-जल के प्रदूषण का निवारण;

(viii) ऐसी अन्य बातें, जो विहित की जाएं;

() अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास के प्रयोजन के लिए स्कीमें बनाना, जिसमें बहुद्देशीय स्कीमें आती हैं, और हितबद्ध सरकारों को बोर्ड द्वारा बनाई गई स्कीम को निष्पादित करने के लिए उपाय करने के बारे में सलाह देना;

() बोर्ड द्वारा बनाई गई किसी सकीम का निष्पादन तथा स्कीम के निष्पादन में किए गए किसी संकर्म के अनुरक्षण के व्यय का हितबद्ध सरकारों के बीच आबंटन करना;

() हितबद्ध सरकारों द्वारा किए गए उपायों की प्रगति के बारे में निगरानी रखना;

() कोई ऐसी अन्य बात, जो उपरोक्त कृत्यों में से किसी की अनुपूरक, आनुषंगिक या पारिणामिक हो

                14. बोर्ड के कृत्य-(1) हितबद्ध सरकारों से परामर्श के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, केन्द्रीय सरकार बोर्ड को, धारा 13 के अधीन सभी कृत्यों या उनमें से ऐसे कृत्यों का पालन करने के लिए सशक्त बना सकेगी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं

(2) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन शक्तियों का प्रयोग करने तथा बोर्ड के कार्य-क्षेत्र के भीतर, बोर्ड को जिन सभी कृत्यों का पालन करने के लिए सशक्त किया गया है, वह उन्हें प्रयोग में लाएगा तथा उनका पालन करेगा

(3) इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने में, बोर्ड हितबद्ध सरकारों से सभी प्रक्रमों पर विचार विमर्श करेगा और ऐसी सरकारों के बीच करार सुनिश्चित कराने के लिए यावत्साध्य प्रयत्न करेगा

15. बोर्ड द्वारा स्कीमों का बनाया जाना तथा उनका निष्पादन-(1) जहां धारा 13 के खण्ड () के अधीन कृत्यों का पालन करने के लिए कोई बोर्ड सशक्त किया गया है, वहां बोर्ड समय-समय पर ऐसी स्कीमें बनाएगा, जो इस अधिनियम के अधीन उसके  कृत्यों से असंगत हों, और जो उसके कार्यक्षेत्र के भीतर किसी अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास के प्रयोजन के लिए हों

(2) कोई भी ऐसी स्कीम बनाने के पश्चात्, बोर्ड हितबद्ध सरकारों तथा केन्द्रीय सरकार से स्कीम की बाबत परामर्श करेगा और उनके सुझावों पर, यदि कोई हों, विचार करने के पश्चात् स्कीम की पुष्टि कर सकेगा, उसमें उपान्तर कर सकेगा या उसे नामंजूर  कर सकेगा

(3) उपधारा (2) के अधीन यथापुष्ट या उपांतरित स्कीम तत्पश्चात् अंतिम रूप की होगी और अनुमोदित स्कीम कहलाएगी

(4) किसी स्कीम का अनुमोदन किए जाने के पूर्व, बोर्ड स्कीम को निष्पादित करने के लिए उपायों में तथा स्कीम के निष्पादन में किए जाने वाले किन्हीं संकर्मों के अनुरक्षण में संभवतः उपगत होने वाले व्यय पर विचार करेगा और वह व्यय हितबद्ध सरकारों के बीच ऐसे अनुपात में आबंटित किया जाएगा, जैसा करार पाया जाए, या करार के अभाव में, जैसा बोर्ड द्वारा उन फायदों को ध्यान में रखते हुए जो उनको स्कीम से प्राप्त होंगे, अवधारित किया जाए

(5) प्रत्येक अनुमोदित स्कीम हितबद्ध सरकारों को भेजी जाएगी और बोंर्ड उन्हें स्कीम को निष्पादित करने के लिए उपायों की बाबत सलाह दे सकेगा तथा अनुमोदित स्कीम की एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भी भेजी जाएगी

(6) केन्द्रीय सरकार, किसी हितबद्ध सरकार से इस निमित्त प्राप्त अनुरोध पर, या अन्यथा हितबद्ध सरकारों की, ऐसे कदम उठाने में, सहायता कर सकेगी, जो स्कीम के निष्पादन के लिए आवश्यक हों

16. बोर्ड की साधारण शक्तियां-इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्ण पालन करने के प्रयोजन के लिए, प्रत्येक बोर्ड अपने कार्यक्षेत्र के भीतर,-

() स्थावर तथा जंगम दोनों प्रकार की ऐसी सम्पत्ति को अर्जित कर सकेगा, धारित कर सकेगा और उनका निपटारा कर सकेगा, जो वह ठीक समझे;

() ऐसे प्रारम्भिक अन्वेषण या सर्वेक्षण या अन्य उपाय कर सकेगा, जो वह आवश्यक समझे;

() अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास से संबंधित किसी हितबद्ध सरकार द्वारा हाथ में लिए गए किन्हीं संकर्मों का निरीक्षण कर सकेगा या निरीक्षण करवा सकेगा;

() जल-शक्ति उत्पादन, सिंचाई, नौपरिवहन, बाढ़-नियंत्रण, भू-संरक्षण, भू-उपयोग तथा संबंधित बनावट तथा डिजाइन की विशेषताओं, जैसे जल साधनों के संरक्षण, विनियमन और उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान का संचालन तथा समन्वय कर सकेगा;

() ऐसे स्थलाकृतिक, मौसमी, जल-विज्ञान तथा भूमिगत जल संबंधी आंकड़ों का संग्रहण कर सकेगा, जैसा वह  ठीक समझे;

() अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास के विभिन्न पहलुओं से संबंधित आंकड़े या अन्य जानकारी प्रकाशित कर सकेगा;

() किसी हितबद्ध सरकार से ऐसी जानकारी देने की अपेक्षा कर सकेगा जिनकी निम्नलिखित के संबंध में बोर्ड अपेक्षा करे-

(i) अन्तरराज्यिक नदी या नदी घाटी के विनियमन या विकास के लिए उस सरकार द्वारा किए          गए उपाय;

(ii) स्थलाकृतिक, मौसमी, जल-विज्ञान तथा भूमिगत जल संबंधी आंकड़े;

(iii) ऐसी अन्य बातें जो विहित की जाएं

                17. बोर्ड को संदाय-केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त विधि के अनुसार संसद् द्वारा किए गए सम्यक् विनियोजन के पश्चात्, बोर्ड को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी राशियों का संदाय कर सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक समझे

18. बोर्ड की निधि-(1) बोर्ड की अपनी एक निधि होगी और सभी राशियां, जो समय-समय पर उसे केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा संदत्त की जाएं, तथा बोर्ड की सभी अन्य प्राप्तियां, बोर्ड की निधि में जमा की जाएंगी और बोर्ड द्वारा सभी संदाय उसमें से किए जाएंगे

(2) बोर्ड ऐसी राशियों का व्यय कर सकेगा, जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक समझें और ऐसी राशियां बोर्ड की निधि में से संदेय व्यय मानी जाएंगी

19. बजट-बोर्ड प्रतिवर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष की बाबत एक बजट तैयार करेगा जिसमें प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित किए जाएंगे, तथा उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार और हितबद्ध सरकारों को भेजी जाएंगी

20. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड प्रतिवर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्व वर्ष के दौरान के उसके क्रियाकलाप का सही और पूर्ण विवरण दिया जाएगा तथा उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार और हितबद्ध सरकारों को भेजी जाएंगी और केन्द्रीय सरकार ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट को संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी

21. लेखा तथा लेखापरीक्षा-(1) बोर्ड अपने लेखाओं के सम्बन्ध में ऐसी लेखा बहियां तथा अन्य बहियां ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति में, जैसी विहित की जाए, रखवाएगा

(2) बोर्ड के लेखाओं की लेखापरीक्षा ऐसे समय पर और ऐसी रीति से की जाएगी, जैसी विहित की जाए

अध्याय 4

प्रकीर्ण

22. माध्यस्थम्-(1) जहां दो या अधिक हितबद्ध सरकारों के बीच-

() इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा दी गई किसी सलाह;

() बोर्ड द्वारा दी गई किसी सलाह के अनुसरण में किसी हितबद्ध सरकार द्वारा किए गए किसी उपाय;

() बोर्ड द्वारा दी गई किसी सलाह के अनुसरण में किसी हितबद्ध सरकार द्वारा किन्हीं उपायों के करने से इन्कार या उसकी उपेक्षा;

() बोर्ड द्वारा दी गई किसी सलाह से उद्भूत फायदों या वित्तीय दायित्वों में अंश विभाजन;

() इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट या उस विषयक या उससे उद्भूत किसी अन्य बात,

के बारे में कोई विवाद या मतभेद उद्भूत हो वहां हितबद्ध सरकारों में से कोई सरकार ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, विवादग्रस्त मामले को माध्यस्थम् के लिए निर्देशित कर सकेगी

                (2) मध्यस्थ ऐसा व्यक्ति होगा, जो इस निमित्त भारत के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हैं या रहे हैं या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं

(3) मध्यस्थ अपने समक्ष की कार्यवाही में अपनी सहायता करने के लिए, दो या अधिक व्यक्तियों को असेसर के रूप में नियुक्त कर सकेगा

(4) मध्यस्थ का विनिश्चय अन्तिम होगा तथा विवाद के पक्षकारों पर बाध्यकर होगा और उनके द्वारा उसे क्रियान्वित     किया जाएगा

(5) माध्यस्थम् अधिनियम, 1940 (1940 का 10) की कोई बात इस धारा के अधीन के माध्यस्थमों को लागू नहीं होगी

23. विवरणियां और रिपोर्ट-बोर्ड अपनी निधि या क्रियाकलापों की बाबत केन्द्रीय सरकार को ऐसी विवरणियां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी देगा, जिसकी केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अपेक्षा की जाए

24. शक्तियों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को, ऐसी शर्तों और सीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियां और कृत्य प्रत्यायोजित कर सकेगा, जो बोर्ड के दिन प्रतिदिन के प्रशासन को दक्षतापूर्वक चलाने के लिए वह आवश्यक समझे

25. बोर्ड के सदस्यों तथा अधिकारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी सदस्य और अधिकारी जब वे इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या जब उनका इस प्रकार कार्य करना तात्पर्यित हो, तब भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे

26. सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही बोर्ड के किसी सदस्य या अधिकारी के विरुद्ध होगी

27. बोर्ड का विघटन तथा आस्तियों और दायित्वों का अन्तरण-(1) जब केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन कर चुका है, तो केन्द्रीय सरकार हितबद्ध सरकारों से परामर्श के पश्चात् राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि बोर्ड का ऐसी तारीख से विघटन किया जाएगा, जो ऐसी अधिसूचना में इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए और तदनुसार बोर्ड विघटित किया हुआ समझा जाएगा

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी अधिसूचना द्वारा बोर्ड के विघटन पर,-

() बोर्ड में निहित या उसके द्वारा प्राप्य सभी सम्पत्ति, निधि तथा शोध्य रकमें ऐसी सरकार या प्राधिकारी में निहित होंगी या उसके द्वारा प्राप्य होंगी जैसा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए; तथा

() सभी दायित्व, जो बोर्ड के विरुद्ध प्रवर्तनीय हैं, केवल उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट सरकार या प्राधिकारी के विरुद्ध ही प्रवर्तनीय होंगे

28. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी मामलों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

                () बोर्ड के सदस्यों के वेतन, भत्ते तथा सेवा की शर्तें;

() वे बातें, जिनकी बाबत बोर्ड हितबद्ध सरकारों को, धारा 13 के खण्ड () के उपखण्ड (ध्त्त्त्) के अधीन सलाह    दे सकेगा;

() वे बातें, जिनकी बाबत बोर्ड हितबद्ध सरकार से जानकारी देने की अपेक्षा कर सकेगा;

() वह रीति, जिसमें केन्द्रीय सरकार, बोर्ड द्वारा बनाई गई किसी स्कीम के निष्पादन में हितबद्ध सरकारों की सहायता कर सकेगी;

() वह प्ररूप जिसमें और वह समय, जिसके भीतर बोर्ड का बजट तथा वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी तथा केन्द्रीय सरकार और हितबद्ध सरकारों को भेजी जाएगी;

() वह प्ररूप तथा रीति, जिसमें बोर्ड के लेखे रखे जा सकेंगे तथा वह समय जिस पर तथा वह रीति, जिसमें, ऐसे लेखाओं की लेखापरीक्षा कराई जा सकेगी;

() वे विवरणियां तथा जानकारी, जिसकी बोर्ड द्वारा केन्द्रीय सरकार को देने की अपेक्षा की जाए;

() वह प्ररूप तथा रीति, जिसमें इस अधिनियम के अधीन विवाद माध्यस्थम् के लिए निर्देशित किया जा सकेगा;

() इस अधिनियम के अधीन माध्यस्थम् की कार्यवाहियों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;

() बोर्ड के अधिकारियों की भर्ती की रीति तथा ऐसे अधिकारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें;

() कोई अन्य बात, जो विहित की जाए या विहित की जा सकेगी

                 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।ट

29. विनियम बनाने की शक्ति- [(1)]

 बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से भारत के राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित के बारे में विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत हों,-

                () बोर्ड के अधिवेशनों तथा उसके कार्यचालन को विनियमित करने की प्रक्रिया;

                () वह रीति, जिसमें, और वे प्रयोजन, जिनके लिए सलाहकार समितियां नियुक्त की जाएं, उनका विनियमन;

() वह रीति, जिसमें और वे प्रयोजन, जिनके लिए धारा 11 के अधीन बोर्ड से व्यक्तियों को सहयुक्त किया जाए, उनका विनियमन;

() सलाहकार समितियों के सदस्यों, धारा 11 के अधीन बोर्ड से सहयुक्त व्यक्तियों तथा बोर्ड द्वारा नियुक्त सभी अधिकारियों की सेवा के निबन्धन तथा शर्तों का अवधारण

 [(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

______

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IDRC

 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 
 
Latestlaws Newsletter