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हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया राज्य) अधिनियम, 1954 ( Himachal Pradesh and Bilaspur (New State) Act, 1954(Himachal Pradesh) )


 

हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया

राज्य) अधिनियम, 1954

(1954 का अधिनियम संख्यांक 32)

[28 मई, 1954]

वर्तमान हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर राज्यों को संयोजित करके

नए हिमाचल प्रदेश राज्य के निर्माण के लिए और

उससे सम्बन्धित विषयों के वास्ते

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के पांचवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

भाग 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया राज्य) अधिनियम, 1954 है । 

(2) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) “अनुच्छेद" से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है; 

 ।                             ।                              ।                    ।                       ।                              ।                              ।

(ग) “वर्तमान राज्यों" से इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले संविधान की प्रथम अनुसूची के भाग ग में बिलासपुर और हिमाचल प्रदेश के रूप में विनिर्दिष्ट राज्य अभिप्रेत हैं और “वर्तमान राज्य" से इन वर्तमान राज्यों में से कोई अभिप्रेत है ;  

(घ) “विधि" के अन्तर्गत वर्तमान राज्यों में से किसी भी सम्पूर्ण राज्य में या उसके किसी भाग में विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, नियम, स्कीम, अधिसूचना, उपविधि या अन्य लिखत है; 

(ङ) “आदेश" से राजपत्र में प्रकाशित आदेश अभिप्रेत है; 

(च) “संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" का वही अर्थ है जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में है; 

(छ) “आसीन सदस्य" से संसद् के किसी सदन के संबंध में या वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य के विधान-मंडल के संबंध में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले, यथास्थिति, उस सदन का या उस विधान-मंडल का सदस्य है । 

भाग 2

नए हिमाचल प्रदेश राज्य का निर्माण

3. नए हिमाचल प्रदेश राज्य का निर्माण-इस अधिनियम के प्रारम्भ से, वर्तमान राज्यों को संयोजित करके एक नए भाग ग राज्य का निर्माण किया जाएगा जो हिमाचल प्रदेश राज्य कहलाएगा (जिसे इसके पश्चात् इस अधिनियम में “नया राज्य" कहा                 गया है) ।

4. संविधान की प्रथम अनुसूची का संशोधन-संविधान की प्रथम अनुसूची में, भाग ग में,-

(क) “राज्यों के नाम" शीर्षक के अधीन- 

(i) प्रविष्टि “3. बिलासपुर" का लोप किया जाएगा; और  

(ii) 4 से 10 तक की प्रविष्टियों को क्रमशः 3 से 9 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा; 

(ख) “राज्यों के राज्यक्षेत्र" शीर्षक के अधीन प्रथम पैरा के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

“हिमाचल प्रदेश राज्य के राज्यक्षेत्र में वे राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे जो हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया राज्य) अधिनियम, 1954 के प्रारम्भ के ठीक पहले बिलासपुर और हिमाचल प्रदेश राज्यों में समाविष्ट थे ।"। 

भाग 3

विधान-मण्डलों में प्रतिनिधित्व

राज्य सभा

5. राज्य सभा में प्रतिनिधित्व-(1) राज्य सभा में नए राज्य को एक स्थान आबंटित किया जाएगा । 

(2) वर्तमान राज्यों को समाविष्ट करने वाले राज्य-समूह का प्रतिनिधित्व करने वाला राज्य सभा का आसीन सदस्य, इस अधिनियम के प्रारम्भ से राज्य सभा में नए राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा, किन्तु ऐसे आसीन सदस्य के कार्यकाल की अवधि अपरिवर्तित रहेगी, अर्थात्, वह 1958 के अप्रैल की 2 तारीख को समाप्त हो जाएगी । 

6. संविधान की चतुर्थ अनुसूची का संशोधन-संविधान की चतुर्थ अनुसूची में, प्रथम अनुसूची के भाग ग में उल्लिखित राज्यों के प्रतिनिधियों से संबंधित स्थानों की सारणी में- 

(i) प्रविष्टि 4 और 5 के स्थान पर प्रविष्टि 4. हिमाचल प्रदेश ह्ल.1" रखी जाएगी; और 

(ii)  6 से 10 तक की प्रविष्टियों को क्रमशः 5 से  9 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा । 

7. 1950 के अधिनियम संख्यांक 43 की धारा 27का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 27क में- 

(i) उपधारा (5) में  “दिल्ली" शब्द के स्थान पर “दिल्ली, हिमाचल प्रदेश" शब्द रखे जाएंगे; और 

(ii) उपधारा (6) का लोप किया जाएगा ।

लोक सभा

8. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-जब तक विधि द्वारा अन्य उपबन्ध नहीं किया जाता, लोक सभा में नए राज्य को 4 स्थान आबंटित किए जाएंगे । 

9. 1950 के अधिनियम संख्यांक 43 की प्रथम अनुसूची का संशोधन-(1) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की प्रथम अनुसूची में, भाग ग राज्यों से संबंधित भाग में,-

(i) प्रविष्टि 3 का लोप किया जाएगा; 

(ii) 4 से 12 तक की प्रविष्टियों को क्रमशः 3 से 11 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा; और 

(iii) हिमाचल प्रदेश के सामने स्तम्भ 2 में “3" अंक के स्थान पर “4" अंक रखा जाएगा । 

10. नए राज्य के संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र और उनका परिसीमन-(1) जब तक विधि द्वारा अन्य उपबंध नहीं किया जाता, नए राज्य में निम्नलिखित तीन संसदीय निर्वाचन क्षेत्र होंगे, अर्थात्- 

(i) बिलासपुर निर्वाचन-क्षेत्र जिसमें वर्तमान बिलासपुर राज्य समाविष्ट हैं, और

(ii) वे दो निर्वाचन-क्षेत्र जिनमें वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य विभाजित किया गया है ।

(2) जब तक विधि द्वारा अन्य उपबंध नहीं किया जाता, संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन  (भाग ग राज्य) आदेश, 1951 , प्रथम अनुसूची में किए गए संशोधनों के अधीन प्रभावी होगा । 

11. आसीन सदस्य-(1) वर्तमान बिलासपुर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा का आसीन सदस्य, इस अधिनियम के प्रारम्भ से, नए राज्य के बिलासपुर निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा और उस निर्वाचन-क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित समझा जाएगा; 

(2)  वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य के किसी निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा का प्रत्येक आसीन सदस्य, इस अधिनियम के प्रारम्भ से, नए राज्य में उसी नाम वाले निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा और निर्वाचन-क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।

नए राज्य की विधान सभा

                12-16. विधि अनुकूलन  (संख्या 3) आदेश, 1956 द्वारा निरसित ।

प्रकीर्ण

17. 1950 के अधिनियम संख्या 43 की धारा 13 का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13 में उपधारा (1) के खण्ड (ख) में “बिलासपुर" शब्द का लोप किया जाएगा । 

18. [1951 के अधिनियम सं० 49, धारा 2 का संशोधन] विधि अनुकूलन (संख्या 3) आदेश, 1956 द्वारा निरसित । 

19. संविधान (अनुसूचित जातियां) (भाग राज्य) आदेश, 1951 का संशोधन-संविधान (अनुसूचित जातियां) (भाग ग राज्य) आदेश, 1951  द्वितीय अनुसूची में दर्शित रूप में संशोधित किया जाएगा । 

20. 1952 के अधिनियम संख्या 81 की धारा 9 का संशोधन-परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 9 में उपधारा (3) में और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन दिए गए आदेशों" शब्दों के स्थान पर “हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया राज्य) अधिनियम, 1954 और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन दिए गए आदेशों" शब्द, कोष्ठक और अंक रखे जाएंगे । 

21. 1950 के अधिनियम संख्या 43 का अर्थान्वयन-इस अधिनियम द्वारा यथासंशोधित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950  *** में हिमाचल प्रदेश के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह नए राज्य के प्रति निर्देश है ।

22. निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियां-(1) वर्तमान राज्यों के निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियां, इस अधिनियम के प्रारम्भ से नए राज्य में उसी नाम के निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियां समझी जाएंगी और तब तक प्रवृत्त रहेंगी जब तक विधि के अनुसार ऐसी नामावलियां पुनरीक्षित नहीं की जाती या नई नामावलियां तैयार नहीं की जाती । 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

23. परिसीमन आयोग की अपने आदेशों को पुनरीक्षित करने की शक्ति-परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952                (1952 का 81) की धारा 8 की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार लोक सभा में नए राज्य को आंबटित किए जाने वाले स्थानों की संख्या अवधारित करने और उसकी उपधारा  (2) के उपबन्धों के अनुसार उन स्थानों तथा नए राज्य की विधान सभा के लिए नियत स्थानों को प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों को वितरित करने तथा उनका परिसीमन करने के प्रयोजनार्थ परिसीमन आयोग के लिए यह विधिसम्मत होगा कि उस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, वह उस अधिनियम की धारा 9 के अधीन प्रकाशित अपने अंतिम आदेशों में से किसी को संशोधित, परिवर्तित या विखण्डित करे जहां ऐसा कोई आदेश दोनों वर्तमान राज्यों या उनमें से किसी से सम्बन्धित है । 

24. [नए राज्य कि विधान सभा के प्रक्रिया के नियम ।]-विधि अनुकूलन (सं० 3) आदेश, 1956 द्वारा निरसित । 

भाग 4

न्यायालय

25. नए राज्य के लिए न्यायिक आयुक्त का न्यायालय-इस अधिनियम के प्रारम्भ से,-

(क) वर्तमान राज्यों के न्यायिक आयुक्तों के न्यायालयों को (जिन्हें इसके पश्चात् इस भाग में “वर्तमान न्यायालय" कहा गया है) समामेलित किया जाएगा और उनसे नए राज्य के लिए न्यायिक आयुक्त का न्यायालय बनेगा (जिसे इसके पश्चात् इस भाग में “नया न्यायालय" कहा गया है); 

(ख) वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य के न्यायिक आयुक्त और अपर न्यायिक आयुक्त, यदि कोई हों, नए राज्य के क्रमशः न्यायिक आयुक्त और अपर न्यायिक आयुक्त होंगे; 

(ग) प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले वर्तमान न्यायालयों में से किसी का अधिकारी या सेवक है, नए न्यायालय का, यथास्थिति, अधिकारी या सेवक होगा और सेवा के उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर (अथवा उनके उतने ही समान निबन्धनों और शर्तों पर जितने इस अधिनियम द्वारा किए गए परिवर्तनों से अनुज्ञात हों) नियुक्त किया गया समझा जाएगा जो ऐसे प्रारम्भ के ठीक पहले उसको लागू थे : 

परन्तु इस खण्ड की कोई भी बात नए न्यायालय को किसी कार्यालय या पद के नाम या कर्तव्यों को परिवर्तित करने से रोकने वाली नहीं समझी जाएगी;

(घ) नए न्यायालय को सब ऐसी मूल, अपीली या अन्य अधिकारिता होगी जो नए राज्य का भाग होने वाले किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में वर्तमान न्यायालयों में से किसी के द्वारा इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले किसी विधि के अधीन प्रयुक्त की जा सकती है; 

(ङ) नए न्यायालय को सम्पूर्ण नए राज्य में अधिवक्ताओं, वकीलों और प्लीडरों को स्वीकृत करने, निलम्बित करने और हटाने की तथा अधिवक्ताओं, वकीलों और प्लीडरों के बारे में नियम बनाने की वही शक्तियां होंगी जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले वर्तमान न्यायालयों में से किसी के द्वारा प्रयुक्त की जा सकती हैं :

परन्तु इस खण्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नए न्यायालय द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन, किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले वर्तमान न्यायालयों में से किसी में विधि-व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता, वकील या प्लीडर है, नए न्यायालय में विधि-व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता, वकील या प्लीडर के रूप में मान्यता दी जाएगी;

(च) इस भाग के उपबंधों के अधीन, वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया के बारे में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, जब तक कि किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसमें फेरफार या परिवर्तन नहीं कर दिया जाता, नए न्यायालय के संबंध में ऐसे परिवर्तनों के साथ लागू होगी जो उस न्यायालय द्वारा किए जाएं; 

(छ) न्यायिक आयुक्त न्यायालय (उच्च न्यायालय के रूप में घोषणा) अधिनियम, 1950 (1950 का 15); नए न्यायालय को ऐसे लागू होगा मानो नया न्यायालय उस अधिनियम के प्रारम्भ पर विद्यमान था, और वर्तमान हिमाचल प्रदेश राज्य के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय से उच्चतम न्यायालय को अपीलों के संबंध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले प्रवृत्त कोई अन्य विधि, आवश्यक परिवर्तनों के साथ, नए न्यायालय के संबंध में लागू होगी;  

(ज) वे सब कार्यवाहियां, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले वर्तमान न्यायालयों में से किसी में लम्बित हैं, इस अधिनियम के आधार पर नए न्यायालय को अंतिरत हो जाएंगी और इस प्रकार जारी रखी जाएंगी मानो वे उस न्यायालय में संस्थित कार्यवाहियां थीं; 

(झ) यथापूर्वोक्त किसी कार्यवाही में वर्तमान न्यायालयों में से किसी के द्वारा दिया गया कोई आदेश सभी प्रयोजनों के लिए उसी न्यायालय के आदेश के रूप में ही नहीं वरन् नए न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के रूप में भी प्रभावी होगा; 

(ञ) वर्तमान न्यायालयों में से किसी के प्रति, चाहे किसी भी नाम से, किसी विधि में निर्देशों का अर्थ, जब तक कि सन्दर्भ अपेक्षित न हो, नए न्यायालय के प्रति निर्देशों के रूप में किया जाएगा ।

26. अधीनस्थ न्यायालय-वे सब न्यायालय जो नए राज्य का भाग होने वाले किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले वर्तमान न्यायालयों में से किसी के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन विधिसम्मत शक्तियों, प्राधिकार और अधिकारिता का प्रयोग कर रहे थे, जब तक सक्षम विधान-मण्डल या प्राधिकारी द्वारा और उपबन्ध नहीं कर दिया जाता, नए न्यायालय के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन उस क्षेत्र में अपनी शक्तियों, प्राधिकार तथा अधिकारिता का प्रयोग करते रहेंगे । 

भाग 5

प्रशासकीय और प्रकीर्ण उपबन्ध

27. वर्तमान प्राधिकरियों और अधिकारियों का नए राज्य में कृत्य करते रहना-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय न्यायिक, कार्यपालक और अनुसचिवीय सभी प्राधिकारी और सभी अधिकारी, जो नए राज्य का भाग होने वाले किसी क्षेत्र में, इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले, विधिसम्मत कृत्यों का प्रयोग कर रहे थे, जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा और उपबंध नहीं कर दिया जाता अपने-अपने कृत्य यथाशक्य उसी रीति से और उसी विस्तार तक करते रहेंगे जैसे वे ऐसे प्रारम्भ के पहले कर रहे थे । 

28. वर्तमान विधियों का जारी रहना-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, नए राज्य का भाग होने वाले किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले प्रवृत्त सब विधियां तक तब प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक सक्षम विधान-मण्डल या प्राधिकारी द्वारा निरसित या संशोधित नहीं की जाती । 

29. विधियों का अर्थान्वयन करने की शक्ति-इस अधिनियम के प्रारम्भ के पहले बनाई गई किसी विधि को नए राज्य के संबंध में लागू करना सुगम बनाने के प्रयोजन के लिए कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण, इस अधिनियम के किसी अभिव्यक्त उपबंध के अधीन रहते हुए, उस विधि का अर्थान्वयन, सार को प्रभावित न करने वाले ऐसे परिवर्तनों के सहित कर सकेगा जो उसे यथास्थिति, उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष किसी मामले के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक या उचित हों । 

30. वर्तमान करों का जारी रहना-उन सब करों, शुल्कों, उपकरों और फीसों का, जिनका वर्तमान राज्यों में से किसी में या उनके किसी भाग में विधिपूर्वक उद्ग्रहण किया जा रहा था, उसी रीति में और उसी परिमाण तक उद्ग्रहण किया जाना और उन्हीं प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किया जाना जारी रहेगा जब तक कि सक्षम विधान-मंडल या प्राधिकारी द्वारा अन्य उपबन्ध नहीं कर दिया जाता । 

31. भाखड़ा-नंगल परियोजना के संबंध में केन्द्रीय सरकार की शक्तियों की व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई भी बात केन्द्रीय सरकार की भाखड़ा-नंगल परियोजना के संबंध में ऐसे प्रबंध करने या ऐसे कार्य करने की शक्तियों का अल्पीकरण करने वाली नहीं समझी जाएगी जो, परियोजना के प्रयोजनों का सम्यक् ध्यान रखते हुए, उसका उचित प्रशासन और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, आवश्यक हों । 

32. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राष्ट्रपति ऐसे आदेश दे सकेगा, जो उक्त उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :

परन्तु राष्ट्रपति द्वारा ऐसी किसी शक्ति का प्रयोग इस अधिनियम के प्रारम्भ से एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा । 

प्रथम अनुसूची

(धारा 10 देखिए)

संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (भाग राज्य) आदेश, 1951  में संशोधन

1. पैरा 2 में “बिलासपुर और" शब्दों का लोप कीजिए । 

2. चौथी सारणी में छम्ब-सिरमौर निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अंतःस्थापित कीजिए, अर्थात् : -

“बिलासपुर                                             बिलासपुर                                             1" 

द्वितीय अनुसूची

(धारा 19 देखिए)

संविधान (अनुसूचित जातियां) (भाग राज्य) आदेश, 1951  का संशोधन

1. पैरा 2 में “भाग 1 से 10" के स्थान पर “भाग 1 से 9" रखिए । 

2. पैरा 4 के स्थान पर निम्नलिखित रखिए, अर्थात् :-

“4. इस आदेश की अनुसूची में,-

(क) हिमाचल प्रदेश राज्य या उसके जिले या अन्य प्रादेशिक खंड के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर (नया राज्य) अधिनियम, 1954 द्वारा यथानिर्मित हिमाचल प्रदेश या यथानिर्मित उस राज्य के जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है; और 

(ख) किसी अन्य राज्य या उसके जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह 1950 की जनवरी के 26वें दिन को यथागठित उस राज्य या उस जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ।"। 

3. अनुसूची में,-

(क) बिलासपुर से सम्बन्धित भाग 3 का लोप कीजिए; 

(ख) “भाग 4 से 10" को क्रमशः “भाग 3 से 9" के रूप में पुनःसंख्यांकित कीजिए । 

(ग) हिमाचल प्रदेश से संबंधित इस प्रकार पुनःसंख्यांकित भाग 5 में निम्नलिखित अन्तःस्थापित कीजिए, अर्थात् : -

 “31. जुलाहे

32. दुमने (भंजड़े)

33. चूहड़े

34. हेसी (तूड़ी)

35. छिम्बे (धोबी)

36. सरेहड़े

37. दाडले" ।

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