पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीधे तौर पर मुख्य सचिव से सवाल किया, "आप फोन क्यों नहीं उठाते?" इस मामले की सुनवाई के दौरान NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक 11 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, तीन मुख्य एफआईआर न्यायिक अधिकारियों को धमकी देने और घेराव से जुड़ी हैं। एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस। वी। राजू ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि एक महिला जज को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से रोका गया था। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या वही महिला जज थीं, जो वीडियो में रोती नजर आई थीं।
एनआईए ने यह भी बताया कि एक एफआईआर महिला अधिकारी को प्रवेश से रोकने, दूसरी घेराव और तीसरी स्थानीय पुलिस की लापरवाही को लेकर दर्ज की गई है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में नाकेबंदी को लेकर 9 अन्य एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। कुल मिलाकर 11 मामलों में जांच चल रही है। इसके साथ ही 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
कोर्ट को बताया गया कि अब तक 309 संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है। 432 लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण की मांग की गई है। फिलहाल जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन अब एनआईए ने सभी मामलों की जांच अपने हाथ में लेने की अनुमति मांगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने विशेष अधिकारों की बात कही।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आदेश पारित करते हुए एनआईए को सभी 12 मामलों की जांच सौंप दी। कोर्ट ने कहा कि भले ही ये मामले एनआईए के निर्धारित दायरे में न आते हों, लेकिन न्यायिक अधिकारियों पर हमले बेहद गंभीर हैं। कोर्ट ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया कि वो केस डायरी और जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड तुरंत एनआईए को सौंपे।
इसके साथ ही कहा कि जिन लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है, उनसे एनआईए पूछताछ करेगी। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से हलफनामा भी दाखिल किया गया। राज्य पुलिस ने बताया कि दो आरोपियों शाहजहां कादरी और मफतुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, कोर्ट राज्य प्रशासन के रवैये से संतुष्ट नहीं दिखा।
मुख्य न्यायाधीश ने मुख्य सचिव से कहा कि आप हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के फैसलों को भी गंभीरता से नहीं लेते। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए मुख्य सचिव ने सफाई दी कि वो दिल्ली में बैठक में थे और उन्हें कोई कॉल नहीं मिला। इस पर जस्टिस बागची ने कहा, "आप इतने ऊंचे नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश आप तक पहुंच ही न सकें। कृपया जमीन पर रहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि यदि फोन पर उपलब्ध होते तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि मुख्य सचिव को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से माफी मांगनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि यह प्रशासन और पुलिस की विफलता है, जिसकी वजह से न्यायिक अधिकारियों को खतरे का सामना करना पड़ा।
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