पश्चिम बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गंभीर सवाल उठाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि मामला राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच दोष मढ़ने का नहीं होना चाहिए, क्योंकि मतदाता दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच फंस जाता है।
बंगाल SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
जस्टिस बागची ने कहा, ‘अगर जीत का अंतर सिर्फ 2 फीसदी हो और 15 फीसदी मतदाता वोट न दे पाए, तो अदालत को गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।’ कोर्ट ने कहा, ‘मजबूत अपीलीय व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि हर शिकायत का समाधान हो।’ कोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट से नाम कटने में सबसे आगे
पश्चिम बंगाल में वोटरों के नाम हटाने और फॉर्म-7 के इस्तेमाल के मामले में सबसे ज्यादा संख्या दर्ज की गई। यहां करीब 10.9% वोटरों के नाम सूची से हटाए गए। वहीं, लक्षद्वीप, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी में सबसे कम, सिर्फ 0.3% नाम हटाए गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मृत, डुप्लीकेट, अनुपस्थित, शिफ्टेड और अन्य (ASDD) श्रेणी में 58.20 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। इसके अलावा, फॉर्म-7 के जरिए 33 लाख से अधिक वोटरों के नाम काटे गए, जो इन 12 राज्यों में सबसे ज्यादा है। यानी, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के आधार पर सबसे अधिक 33.15 लाख नाम पश्चिम बंगाल में ही हटाए गए। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों के करीब 51 करोड़ मतदाताओं वाली वोटर लिस्टों की हुई एसआईआर प्रक्रिया में 7.20 करोड़ वोटरों के नाम कटे
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