इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के आदेश पत्र में खामियां मिलने पर संबंधित न्यायिक अधिकारी को वर्चुअल माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने चंद्रदेव शुक्ला की याचिका पर दिया।
चंद्रदेव के खिलाफ नवाबगंज थाने में चोट पहुंचाने और धमकी देने समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। याचिका में चंद्रदेव ने मांग की थी कि प्रयागराज के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 2018 से लंबित आपराधिक मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी कराई जाए।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि केस की आदेश पत्रिका (ऑर्डर शीट) में 29 अप्रैल 2021 से नौ अगस्त 2021 तक कोई भी आदेश दर्ज नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चाहे पीठासीन अधिकारी अवकाश पर हों, प्रशिक्षण में हों या न्यायालय रिक्त रहा हो। ऐसी स्थिति में भी प्रभार अधिकारी की ओर से कार्यवाही दर्ज की जानी चाहिए। कोर्ट ने इस चूक पर संबंधित पीठासीन अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।
कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई साल में केवल तीन-चार बार ही हुई है। ऐसा लगता है कि संबंधित कोर्ट में केसों का बोझ बहुत ज्यादा हो गया है। अगर ऐसा है तो कि पीठासीन अधिकारी अपने जवाब में इस पहलू को भी स्पष्ट करें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि 17 फरवरी 2026 को पारित आदेश में केवल केस पुकारा गया लिखा गया। कोर्ट ने इसे अपर्याप्त और अस्पष्ट बताते हुए कहा कि ऐसे संक्षिप्त आदेश एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से अपेक्षित नहीं हैं। 10 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी।
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