मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम पुरुष द्वारा मान्य शर्तों के साथ एक से अधिक पत्नी रखता है तो वह अपराध नहीं है। जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 494 के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता के खिलाफ अन्य धाराओं के तहत दर्ज अपराध पर ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।
ये है मामला
जबलपुर के मोहम्मद आरिफ अहमद जहांगीर खान की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसकी पहली पत्नी की शिकायत पर महिला थाना में केस दर्ज है। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 498 ए , 494, 342, 323 और 506 के अपराध दर्ज करते हुए न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया था। न्यायालय के द्वारा उसके खिलाफ उक्त धाराओं के तहत चार्ज फ्रेम कर दिए गए हैं। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
2002 में शिकायतकर्ता के साथ हुई थी शादी
याचिका में कहा गया था कि उसका विवाह 27 दिसंबर 2002 को शिकायतकर्ता के साथ हुआ था। पहली पत्नी ने थाने में 17 जून 2022 को शिकायत दर्ज करवाई थी कि बच्चा पैदा नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता उसके साथ मारपीट करता था। याचिकाकर्ता ने 16 जून 2022 को रात करीब 10-11 बजे, जहर देकर मारने की धमकी थी। साथ ही पति ने 29 मई 2022 को दूसरी शादी कर ली और उससे आपसी सहमति से खुला यानी तलाक देने के लिए कहा।
केस की अहम बातें
दूसरी शादी के कारण मनगढ़ंत आरोप लगाए
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता से उसकी शादी 20 साल पूर्व हुई थी। इस दौरान उसने कभी कोई शिकायत नहीं की थी। दूसरी शादी करने के कारण उसने मनगढ़ंत आरोप लगाया है। पर्सनल लॉ के अनुसार मुस्लिम पुरुष एक ही समय में चार पत्नियां रख सकता है। मुस्लिम आदमी पांचवीं शादी करता है, तभी उस पर सेक्शन 494 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
एमपी हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 494 के तहत आरोप तय किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता के खिलाफ अन्य धाराओं के तहत प्रथम दृष्टया आरोप अपेक्षित पाते हुए ट्रायल कोर्ट को सुनवाई के आदेश दिए हैं।
Publish Your Article
Campus Ambassador
Media Partner
Campus Buzz
LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026
LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!