दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा जैसे आरोपों में चल रहे केसों से तंग आकर आत्महत्या करने वाले अतुल सुभाष के मामले ने नई बहस को जन्म दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट में ऐसे मामलों को लेकर एक पीआईएल दाखिल की गई है। इसमें अपील की गई है कि देश में घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न कानूनों का बेजा इस्तेमाल हो रहे है। इनके जरिए पुरुषों को कई बार बेवजह ही प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। इसलिए गाइडलाइंस तय की जाएं ताकि पुरुषों का उत्पीड़न रोका जा सके। विशाल तिवारी नाम के वकील की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि ऐसे लाखों अतुल हैं, जो फर्जी मामलों से परेशान हैं।
अर्जी में कहा गया, 'यह किसी एक अतुल सुभाष का मामला नहीं है बल्कि ऐसे लाखों केस हैं, जब पुरुषों ने फर्जी केसों के दबाव में आकर जान दे दी। दहेज उत्पीड़न कानून के बेजा इस्तेमाल ने इसके मकसद को ही समाप्त कर दिया है, जो कभी महिलाओं की रक्षा के लिए आया था। अब वक्त है कि इन कानूनों की समीक्षा की जाए।' विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इन कानूनों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन होना चाहिए। यह कमेटी विचार करे कि क्या कानून सही हैं और यदि कुछ खामियां हैं तो उन्हें कैसे दूर किया जाए।
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