अयोध्या मध्यस्थता पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में एक सहमति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ज़मीन के बदले कहीं और जगह दिए जाने पर सहमत हुआ है. उसने सभी धार्मिक स्थलों की 1947 की स्थिति बनाए रखने की भी बात कही है. इस चर्चा में कई अहम हिंदू और मुस्लिम पक्षकार शामिल नहीं हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट में केस में कुल 7 मुस्लिम पक्षकार हैं, जिनमें शिया वक़्फ़ बोर्ड पहले ही सुप्रीम कोर्ट में मंदिर के हक़ में पैरवी कर चुके हैं और अब सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड भी मंदिर बनाने के हक़ में रास्ता सुझा रहे हैं.
सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के अलावा 6 और पार्टियां हैं ..
1. हासिम अंसारी/ इकबाल अंसारी
2. एम सिद्दीकी
3. मिसबाहुद्दीन
4 फ़ारुख अहमद
5.मौलाना मेहफुजूरह्मान
6.सिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड
दरअसल, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या केस (Ayodhya Case) वापस लेने का फैसला लिया है. बोर्ड के चेयरमैन ने मुकदमा वापस लेने का हलफनामा मध्यस्थता पैनल के सदस्य श्रीराम पंचू को भेजा. इसके बाद मध्यस्थता पैनल ने सेटलमेंट दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की 40वें दिन की सुनवाई जारी है. हालांकि सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के अपील वापस लेने के मामले में कोर्ट में कोई चर्चा नहीं हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने स्पष्ट किया कि आज शाम 5 बजे तक हर हाल में बहस पूरी होगी. चीफ जस्टिस ने तय पक्षकारों के अतिरिक्त किसी अन्य को हस्तक्षेप की अनुमति देने से इनकार कर दिया.
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