कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राय चटर्जी ने शिक्षा विभाग में नियुक्ति से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन शिक्षा मंत्री द्वारा नियमों का पालन किए बिना कई नियुक्तियां किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
यदि राज्य सरकार चाहे, तो इसकी जांच कर सकती है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने किस प्रकार सरकारी फंड का उपयोग करते हुए कथित रूप से अवैध नियुक्तियां कीं। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जांच होने पर ऐसी कई अन्य नियुक्तियां भी सामने आ सकती हैं।
मामले के अनुसार, तिथि अधिकारी नामक अभ्यर्थी को विकास भवन में अनुबंध के आधार पर विभागीय सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। वर्ष 2011 में नई सरकार के गठन के बाद शिक्षा विभाग ने 2012 में उनकी सेवा समाप्त कर दी। इसके खिलाफ तिथि अधिकारी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि संबंधित पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक था, लेकिन उस समय नियमों को दरकिनार कर निजी प्रभाव के आधार पर नियुक्ति दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कर्मचारी का वेतन सर्व शिक्षा मिशन फंड से दिया जा रहा था, जो एक सरकारी फंड है। अदालत ने कहा कि अनुबंध कर्मचारी को सरकारी फंड से वेतन देना और नियुक्ति प्रक्रिया का पालन न करना वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
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