SC/ST एक्ट (SC/ST Act) में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम ज़मानत दिए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार की पुनर्विचार अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था देते हुए अपने पुराने फैसले को पलट दिया. तीन जजों की बेंच ने पिछले साल दिये गए दो जजों की बेंच के फैसले को रद्द किया. हालांकि दो जजों के फैसले के बाद फैसले को पलटने के लिए केन्द्र सरकार इस क़ानून में संशोधन कर इसे फिर से काफ़ी कड़ा कर चुकी है, जिसमें तुरंत गिरफ्तारी होगी और अग्रिम ज़मानत का प्रावधान ख़त्म किया गया.
क्या था फैसला
पिछले साल दिए इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि एससी/एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी की व्यवस्था के चलते कई बार बेकसूर लोगों को जेल जाना पड़ता है. कोर्ट ने तुंरत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी. इसके खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार अर्जी दायर की थी. जिस पर आज तीन जजों की बेंच का फ़ैसला आया है. पिछले साल 20 मार्च को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों के खिलाफ SC/ST कानून के दुरुपयोग को देखते हुए उसमें गिरफ्तारी के प्रावधानों को हल्का कर दिया था. कोर्ट ने प्राथमिक जांच के बाद ही आपराधिक केस दर्ज करने और सरकारी कर्मचारियों के मामले में गिरफ्तारी से पहले संबंधित अधिकारी से पूर्व अनुमति लेने को भी आवश्यक बना दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देश में बवाल के बाद केंद्र सरकार ने संसद में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम,2018 पारित कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया था. संशोधित कानून के मुताबिक आपराधिक केस दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच और गिरफ्तारी से पूर्व अनुमति के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया था.
Source Link
Publish Your Article
Campus Ambassador
Media Partner
Campus Buzz
LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026
LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!