गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च' (Birch) नाइट क्लब में हुए अग्निकांड पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने व्यावसायिक नैतिकता और नागरिक कर्तव्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जिसे लेकर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है।
गोवा के एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि मृतकों के परिजनों को 7-7 लाख रुपये (5 लाख राज्य और 2 लाख केंद्र) की सहायता दी गई है। घायलों को 1-1 लाख रुपये (50-50 हजार राज्य व केंद्र) प्रदान किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने अवैध ढांचों के सर्वेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। इस पर जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस अमित जामसांडेकर की पीठ ने कहा, “आप सही कह रहे हैं, लेकिन यह समस्या कुछ महीनों में पैदा नहीं हुई है, बल्कि कई वर्षों से चली आ रही है। सामान्यतः ऐसे मामलों से निपटना प्रशासन का काम है। यदि प्रशासन विफल रहता है तो व्यापक जनहित को देखते हुए हम हस्तक्षेप कर सकते हैं। लेकिन हमें कदम-दर-कदम आगे बढ़ना होगा, अन्यथा पहले से मौजूद अव्यवस्था और बढ़ सकती है।”
कोर्ट का सवाल
जब अधिवक्ता ने इस मुद्दे पर और जोर दिया, तो पीठ ने कहा कि मामले को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और बढ़ती अवैधताओं पर अंकुश लगाया जाएगा। अदालत ने कहा, “हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि अदालत के रूप में हम ऐसा कोई आदेश न दें जिससे किसी को अनुचित नुकसान पहुंचे। यदि प्रशासन गलती करता है तो लोग अदालत आ सकते हैं, लेकिन यदि हमारे आदेश से किसी को नुकसान हुआ तो वह कहां जाएगा?”
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जिस नाइट क्लब में हादसा हुआ, उसके मालिकों की भी अपने ग्राहकों के प्रति नागरिक जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें।
इस पर पीठ ने कहा, “यह निश्चित रूप से सार्वजनिक दायित्व है। भले ही लोग इसे महसूस न करें, लेकिन यह सबकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। अगर कुछ जल्दी पैसे कमाने के लिए लोग अपने नागरिक कर्तव्य भूल जाते हैं तो क्या किया जाए? फिर हमें मामलों को केस-दर-केस देखना पड़ेगा।”
अंत में अदालत ने कहा कि हालात रातोंरात नहीं बदलेंगे। कोर्ट ने कहा, “हमारे पास योजना है और हम इस पर काम करेंगे, लेकिन अराजकता पैदा नहीं करना चाहते। हमें सभी पक्षों को साथ लेकर व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ना होगा। यह समस्या एक दिन में पैदा नहीं हुई है और यह संवेदनशील मामला भी है, इसलिए इसे अनिश्चितकाल तक टाला भी नहीं जा सकता।”
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