आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मंदिर के गर्भगृह में पूजा-पाठ को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि जिन पुजारियों ने विदेश यात्रा की है, उन्हें किसी भी मंदिर के गर्भगृह में पूजा-पाठ करने या देवता की आराधना करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य का एंडोमेंट्स विभाग श्री श्रृंगेरी शारदा पीठम द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन करे। बता दें कि इन निर्देशों के अनुसार वंशानुगत पुजारियों के लिए आवश्यक पारंपरिक आचरण और अनुष्ठानिक पवित्रता को संहिताबद्ध किया गया है।
कोर्ट की बहस में क्या हुआ
यह निर्देश न्यायमूर्ति निम्मागड्डा वेंकटेश्वरुलु ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। याचिका डीएसएसएस सुब्रमण्यम सोमयाजी ने 20 दिसंबर 2024 को दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु शंकराचार्य भारती तीर्थ महास्वामी द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। यह पीठ आदि शंकराचार्य की परंपरा में स्थापित प्रमुख धार्मिक संस्थानों में से एक है। उन्होंने तर्क दिया कि एंडोमेंट्स विभाग ने 10 नवंबर, 2010 को इसी तरह के निर्देशों वाला एक सर्कुलर जारी किया था। लेकिन उसे भी लागू नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या बताया
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील के.आर. श्रीनिवास ने कोर्ट को बताया कि सरकारी ज्ञापन और दिशानिर्देशों के अनुसार, वंशानुगत पुजारियों के लिए कठोर आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करना अनिवार्य था। इसमें त्रिकाल संध्या वंदनम , गुरु उपदेश मंत्र जप, वैदिक अध्ययन का पालन और खान-पान तथा आचरण में अनुष्ठानिक पवित्रता बनाए रखना शामिल था। उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने विदेश यात्रा की है या जिन्होंने पारंपरिक मानदंडों के विपरीत दाढ़ी बनवाई है या बाल कटवाए हैं, जो निर्धारित आध्यात्मिक प्रथाओं का पालन नहीं करते हैं, उन्हें गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
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