Friday, 22, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

हम कितने भी आगे बढ़ जाए, ये सामाजिक बीमारी अब भी कायम; सुप्रीम कोर्ट को क्यों कहना पड़ा ऐसा


Supreme Court, oil Painting.png
08 Apr 2026
Categories: Hindi News

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान पितृसत्तात्मक समाज की निंदा करते हुए अहम टिप्पणियां की हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि भारत में पितृसत्ता आज भी रोज की हकीकत है और इसकी वजह से महिलाओं पर आज भी अत्याचार हो रहे हैं, चाहे हमारे समाज ने कई अन्य पैमानों पर प्रगति कर ली हो। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के एक शख्स की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी, जिसने अपनी नई-नवेली पत्नी को सिर्फ इसलिए जिंदा जला दिया क्योंकि उसने उससे खाना बनाने को कहा था।

मामला राजस्थान के बूंदी का है। यहां 2012 में शंकर नाम के इस शख्स की शादी सुगना बाई से हुई थी। शादी के कुछ ही समय बाद ही उसके शराब पीने और मारपीट से परेशान होकर सुगना अपने मायके चली गई। इसके बाद शंकर वहां पहुंचा और उसे वापस आने के लिए कहा ताकि वह उसके लिए खाना बना सके। जब सुगना वापस आई और खाना बनाने लगी, तो नशे में धुत शंकर ने पहले उसके साथ मारपीट की, फिर उस पर मिट्टी का तेल डालकर कमरे में बंद कर दिया और आग लगा दी।

मिली थी उम्रकैद की सजा

जानकारी के मुताबिक पड़ोसियों और परिवार वालों ने आग बुझाई और उसे अस्पताल पहुंचाया। वहां उसने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया और चार दिन बाद उसकी मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने 2014 में शंकर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी, जिसे 2019 में हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया। इसके बाद शंकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

दोषी की दलील खारिज

सुप्रीम कोर्ट में उसके वकील ने कहा कि मरने से पहले दिया गया पत्नी का बयान भरोसेमंद नहीं है और उस पर परिवार का दबाव हो सकता है। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर ने जांच करने के बाद ही बताया था कि सुगना बयान देने की हालत में थी। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट भी महिला के बात की पुष्टि करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने केस पर सुनवाई के दौरान कहा कि इतने सालों में कानून बदले, देश आगे बढ़ा, लेकिन पितृसत्ता आज भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी हुई है। घरों में महिलाओं के साथ हिंसा और अत्याचार आज भी होते हैं और ये कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि समाज की गहरी समस्या को दिखाते हैं। जजों ने यह भी कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी महिलाओं के लिए बराबरी और सम्मान से जीने का हक हर जगह सच नहीं बन पाया है।

कोर्ट ने आगे कहा कि शहरों में हालात थोड़े बदले हैं, लेकिन गांव और छोटे शहरों में अब भी घर का पूरा जिम्मा महिला पर ही डाला जाता है, चाहे वो कमाती ही क्यों न हो। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “भले ही महिला कमाती हो, फिर भी उससे यही उम्मीद की जाती है कि काम पर जाने से पहले वह घर का सारा काम ठीक कर दे, और काम से लौटने के बाद भी खाना बनाने जैसे कामों में ही व्यस्त रहे।"

Source Link



Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : MAIMS

 
 
Latestlaws Newsletter