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रेलूराम पूनिया हत्याकांड केस में नया ट्विस्ट, 'कातिल बेटी' ने खुद को बताया पीड़ित, सुप्रीम कोर्ट में दी नई दलील


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13 Apr 2026
Categories: Hindi News

 हरियाणा के बहुचर्चित रेलूराम पूनिया परिवार हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। परिवार के आठ सदस्यों की हत्या की दोषी और रेलूराम पूनिया की बेटी सोनिया ने अब हत्याकांड में खुद हो असली पीड़ित बता दिया है। उसने सुप्रीम कोर्ट में नई दलील दी है। उसने खुद को पीड़ित बताते हुए दलील दी है कि वारदात के समय उसके शरीर में भी जहर था। यह वही जहर था जिससे बाकी परिवार की मौत हुई थी। उसका कहना है कि उसकी पैतृक संपत्ति पर कब्जा करने के लिए उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया गया।

 जेल में 23 साल बिता चुकी सोनिया ने सुधार का दावा किया है। उसका कहना है कि जेल में रहकर उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए और वो रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं। उसका कहना कि उसे जेल के अंदर रहकर भी सम्मानित किया जा चुका है। उसने बताया कि 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से उसे सम्मानित किया गया था।

क्या है रेलूराम पूनिया हत्याकांड

मामला साल 2001 का है। 23 अगस्त को सोनिया पूनिया अपना 19वां जन्मदिन मना रही थी। उसी रात हिसार जिले के उकलाना क्षेत्र में स्थित पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया की आलीशान हवेली उस रात खून से लाल हो गई। पीड़ित पक्षा का आरोप था कि सोनिया ने अपने पति संजीव कुमार के साथ मिलकर सोते हुए परिवार पर हमला कर दिया लोहे की छड़ों और डंडों से किए गए इस हमले में रेलू राम पुनिया, उनकी दूसरी पत्नी कृष्णा, बेटी प्रियंका, पहली शादी से हुए बेटे सुनील, उसकी पत्नी शकुंतला, चार साल के लोकेश, दो साल की शिवानी और महज डेढ़ महीने की प्रीति की बेरहमी से हत्या कर दी।

पूरे परिवार को क्यों मार डाला

  • जांच में सामने आया था रेलूराम की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद था।
  • रेलू राम अपनी संपत्ति सौतेले बेटे सुनील के नाम करना चाहते थे।
  • इससे सोनिया काफी नाराज थी।
  • हत्या से कुछ हफ्ते पहले सोनिया ने सुनील को धमकी दी थी।
  • पुलिस पूछताछ में सोनिया ने यह तक कहा था कि संपत्ति के कागजात तैयार हो चुके थे और उसे सब कुछ हाथ से निकलता दिख रहा था।

 

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा

बता दें कि 2004 में ट्रायल कोर्ट ने सोनिया और संजीव को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। मगर 2005 में हाई कोर्ट ने इस फैसले को बदल दिया। हाईकोर्ट ने दोनों की सजा उम्रकैद कर दी। लेकिन 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर मौत की सजा बहाल कर दी। आखिरकार 2013 में लंबी कानूनी प्रक्रिया और दया याचिकाओं में देरी को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की सजा उम्रकैद में बदल दी। इसके बाद दोनों को परोल और फरलो मिलती रही। दोनों अपने इकलौते बेटे प्रशांत से मिलने के लिए बाहर आते थे।

संपत्ति पर अब भी जारी है घमासान

पुनिया परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद अभी भी जारी। सोनिया ने जेल से ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र लिखकर अपने पिता की संपत्तियों पर दावा ठोका था। दूसरी ओर रेलू राम के भाई राम सिंह के बेटे जितेंद्र पुनिया इसका विरोध कर रहे हैं। वो खुद को कानूनी वारिस बता रहे हैं।

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